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कर्मवीर सम्मान–2026 से नवाजे जाएंगे संतोष चौबे, साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान का सम्मान

 संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित भोपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'कर्मवीर सम्मान–2026' से सम्मानित किया जाएगा।  यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ श्री श्रीराम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री नुरूल हसन 'नूर' भी सम्मानित होंगे।  इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक श्री शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

इंदौरवासियों के लिए खुशखबरी! यशवंत सागर तालाब से बढ़ेगी जलापूर्ति, टंकियां भरने में नहीं होगी दिक्कत

इंदौर इंदौर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर की जल-संग्रहण क्षमता नगर निगम बढ़ाने जा रहा है। देवधरम फिल्टर स्टेशन पर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू होने वाला है। इसके बाद हर दिन यशवंत सागर से अधिक पानी लिया जा सकेगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। अभी छह टंकियों से पानी की सप्लाई होती है।  इस साल शहर में जलसंकट ने शहरवासियों को परेशान किया और निगम अफसरों को भी चिंता में डाल दिया। अगले साल फिर जलसंकट न हो, इसके लिए यशवंत सागर से अधिक पानी लेने की योजना बनाई गई है। पंद्रह साल पहले नगर निगम ने यशवंत सागर तालाब/बांध की ऊंचाई बढ़ाई थी। उसके बाद से तालाब में जून तक पानी रहता है। फिलहाल तालाब से 54 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी लेकर छह टंकियां भरी जाती हैं और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के कुछ संस्थानों को भी पानी दिया जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ने के बाद अधिक मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे शहर के पश्चिमी हिस्से को गर्मी के दिनों में फायदा होगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि जून तक तालाब में बचे पानी का उपयोग सप्लाई के लिए किया जा सके। घरों तक पानी पहुंचाने में यशवंत सागर के पानी की लागत 12 रुपये प्रति हजार लीटर आती है, जबकि नर्मदा जल की लागत 26 रुपये प्रति हजार लीटर है। लिंबोदी तालाब को किया जा रहा है जिंदा नगर निगम लिंबोदी तालाब को भी पुनर्जीवित कर रहा है। तालाब का गहरीकरण और खुदाई का काम किया जा रहा है। इसके बाद तालाब की पाल को मजबूत किया जाएगा। इस काम के लिए नगर निगम पांच करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

ट्राईसिटी को बड़ी सौगात! अक्टूबर से मोहाली-अंबाला के बीच घटेगा सफर का समय, बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था

मोहाली ट्राईसिटी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला व मोहाली) के यात्रियों को आने वाले महीनों में यातायात जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर तक मोहाली की आईटी सिटी से अंबाला तक का सफर करीब 30 मिनट कम हो जाएगा। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तहत बनने वाला 30 किलोमीटर लंबा अंबाला-आईटी सिटी खंड लगभग 89 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है। इसके चालू होने से यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इससे पहले सितंबर तक मोहाली-सरहिंद कॉरिडोर भी जनता के लिए खोल दिया जाएगा। 27.37 किलोमीटर लंबा यह मार्ग 91 प्रतिशत तैयार हो चुका है और इसके शुरू होने पर यात्रियों का लगभग 30 मिनट का समय बचेगा। इस बीच आईटी सिटी-कुराली सेक्शन पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के शुरू होने से वाहन चालकों को खरड़ और मोहाली एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले जाम से राहत मिली है तथा लगभग 45 मिनट का समय बच रहा है। बठिंडा मार्ग पर सबसे बड़ी राहत का इंतजार NHAI अधिकारियों के अनुसार 106.92 किलोमीटर लंबे सरहिंद-सेहना विस्तार परियोजना को अभी केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद मोहाली/चंडीगढ़ से बठिंडा तक का सफर करीब 90 मिनट कम हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरे रिंग रोड नेटवर्क का सबसे बड़ा समय बचाने वाला हिस्सा होगा। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास को मिली मंजूरी हाल ही में NHAI ने 1,878.31 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाईपास और 1,463.95 करोड़ रुपये की लागत वाले ग्रीनफील्ड स्पर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं। इससे दोनों परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास बनने के बाद यात्रियों को वर्तमान में एनएच-5 और एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले भारी जाम से राहत मिलेगी तथा सफर का समय 30 से 40 मिनट तक कम हो सकता है। वहीं 10.3 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड स्पर अंबाला-चंडीगढ़ एक्सप्रेसवे को जीरकपुर बाईपास से जोड़ेगा। यह एक सीधा और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर होगा, जिससे अंबाला, दिल्ली, चंडीगढ़, जीरकपुर, पंचकूला, बद्दी और शिमला के बीच आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी। गडकरी ने बताई परियोजना की अहमियत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख शहरी चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा तथा हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र तक तेज और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। पूरी रिंग रोड से चार घंटे तक की बचत NHAI के अनुसार पिंजौर बाईपास पहले ही चालू हो चुका है, जबकि पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ खंड के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। कुछ अन्य लिंक अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और व्यवहार्यता अध्ययन के चरण में हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्राईसिटी रिंग रोड का पूरा 244 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार होने के बाद विभिन्न मार्गों पर यात्रा समय 30 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक कम हो जाएगा। पूरे रिंग रोड का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को कुल मिलाकर लगभग चार घंटे की बचत होगी। NHAI का मानना है कि परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद हजारों वाहन प्रतिदिन चंडीगढ़ शहर के अंदरूनी मार्गों के बजाय रिंग रोड का उपयोग करेंगे, जिससे ट्राईसिटी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था काफी बेहतर हो जाएगी।  

ट्रंप की नई चाल का खुलासा! ब्रह्मा चेलानी बोले- भारत के बढ़ते प्रभाव से बदली अमेरिकी रणनीति

नई दिल्ली अमेरिका रंग बदल रहा है. जिस भारत-अमेरिका दोस्ती के कसीदे पढ़े जाते थे, उसका हनीमून पीरियड अब खत्म होता दिख रहा है. अमेरिका ने एक झटके में इंडो-पैसिफिक कमांड से ‘इंडो’ शब्द ही गायब कर दिया है. लेकिन इसमें एक मैसेज भी है. ऐसा लग रहा है क‍ि अमेर‍िका भारत के दबदबे से घबरा रहा है. इसल‍िए डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ चीन से अपनी सेटिंग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत को दबाने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान को खाद-पानी देने की तैयारी में हैं.कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी और पूर्व व‍िदेश सच‍िव न‍िरुपमा राव ने इस मूव को समझाने की कोश‍िश की है।  ब्रह्मा चेलानी ने क्या कहा? ब्रह्मा चेलानी ने एक्‍स पर ल‍िखा, पेंटागन के इंडो शब्द को हटाने और वापस यूएस पैसिफिक कमांड नाम अपनाने के फैसले, साथ ही हाल की यूएस नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भारत का ज‍िक्र न के बराबर होने से साफ नजर आ रहा क‍ि अमेर‍िका भारत को क‍ितनी अहमियत देता है. ऐसा लगता है कि अब यह रिश्ता किसी साझी सोच पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से सौदेबाजी यानी लेन-देन पर टिका है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ट्रंप चीन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोश‍िश कर रहे हैं. इसके साथ ही, इस इलाके में किसी एक ताकत (यानी भारत) का दबदबा न बन पाए, इसे रोकने के लिए ट्रंप को एक बार फिर पाकिस्तान की उपयोगिता याद आ गई है।  पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने क्या कहा? न‍िरुपमा राव ने एक्‍स पर ल‍िखा, मुद्दा यह है कि क्या अमेरिका अब भी भारत को इस इलाके की व्यवस्था बनाने वाला साझीदार मानता है या फिर अमेरिकी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई मोहरों में से सिर्फ एक उपयोगी मोहरा? यह एक बिल्कुल अलग बात है. और यह पीएम मोदी के उस बयान से पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें उन्होंने भरोसे की बात कही थी।  अगर हम हाल के कई इशारों को एक साथ देखें, तो एक बड़ी तस्वीर बनती है. ट्रंप का भारत को डेड इकॉनमी कहना. रायसीना डायलॉग में अमेरिकी अधिकारी लैंडौ की वह चेतावनी कि अमेरिका भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा. भारतीय नाविकों की मौत और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के साथ हुई तीखी बहस. G7 सम्मलेन में दिखा रुखापन और ठंडी तस्वीरें. पीएम मोदी का दुनिया में भरोसे की कमी होने पर जोर देना. और अब इंडो-पैसिफिक के प्रतीक को ही छोटा कर देना. इनमें से कोई भी एक बात अपने आप में रिश्ते टूटने का सबूत नहीं है. लेकिन जब इन सबको मिलाकर देखा जाता है, तो साफ पता चलता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों का सुनहरा और जोशीला दौर अब खत्म हो रहा है. यह रिश्ता अब ज्यादा सामान्य, ज्यादा मतलब का, लेन-देन वाला और शायद काफी ज्यादा मुश्किल होने वाला है।  भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?     एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि भारत को अब यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि अमेरिका उसका पक्का दोस्त है. अमेरिका भारत को सिर्फ तब तक पूछेगा, जब तक उसका फायदा है. जरूरत खत्म, तो दोस्ती खत्म।      सबसे बड़ा खतरा यह है कि अमेरिका इस इलाके में भारत को बॉस नहीं बनने देना चाहता. भारत को उलझाए रखने के लिए अमेरिका फिर से पाकिस्तान को ताकत और समर्थन दे सकता है।      ट्रंप चीन से लड़ने के बजाय उससे अपने व्यापारिक सौदे सेट करने में लगे हैं. अगर चीन के साथ अमेरिका की डील पक्की हो गई, तो अमेरिका को भारत की कोई खास जरूरत नहीं रह जाएगी।      पीएम मोदी ने भरोसे की कमी की जो बात कही थी, वह बिल्कुल सच साबित हो रही है. भारत को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी. अमेरिका के भरोसे बैठकर हम अपनी सुरक्षा खतरे में नहीं डाल सकते।   

WhatsApp vs Telegram: सरकार की पहुंच किस ऐप तक ज्यादा और क्यों? समझिए दोनों का पूरा खेल

 नई दिल्ली भारत में सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक के लिए टेंपररी बैन कर दिया गया है. इस बैन के पीछे सबसे बड़ा कारण NEET UG परीक्षा का पेपर लीक रोकना बताया जा रहा है. वहीं दूसरे फेमस मैसेजिंग ऐप्स पर अभी कोई बैन नहीं लगाया गया है, जैसे कि WhatsApp. आखिर दोनों ऐप्स में ऐसा क्या अंतर है कि टेलीग्राम पर बैन लग गया और व्हाट्सऐप सेफ रह गया? टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों ही बहुत ज्यादा फेमस ऐप्स हैं और अपने मैसेजिंग फीचर्स के लिए जाने जाते हैं. लेकिन दोनों ऐप्स को अलग तरीके से बनाया गया है. WhatsApp एक पुराना मैसेजिंग सिस्टम की तरह काम करता है, जबकि टेलीग्राम एक बड़े क्लाउड-बेस्ड नेटवर्क की तरह काम करता है।  जानिए क्यों नहीं बना पा रही सरकार टेलीग्राम पर अपनी पकड़ क्लाउड बेस्ड स्टोरेज VS फोन स्टोरेज टेलीग्राम ऐप पर डेटा ऑनलाइन क्लाउड स्टोरेज में सेव रहता है. इसकी वजह से अगर आप किसी भी मोबाइल या डिवाइस में लॉगिन करते हैं तो अपनी सभी चैट्स और फाइल्स देख सकते हैं. अगर आपका फोन चोरी भी हो जाए, तब भी आपका डेटा क्लाउड पर सेफ रहता है. इसी फीचर की वजह से कोई भी व्यक्ति किसी भी डिवाइस से जानकारी आसानी से शेयर कर सकता है।  वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सऐप आपके फोन की स्टोरेज का ज्यादा इस्तेमाल करता है. डाउनलोड या शेयर किया गया डेटा फोन में सेव हो जाता है. ऐसे में अगर कोई जानकारी शेयर की जाती है, तो उसके निशान फोन में मौजूद रह सकते हैं. यहां क्लाउड बैकअप ऑप्शनल है।  यूजरनेम और फोन नंबर टेलीग्राम में यूजरनेम का फीचर मिलता है, जिसकी मदद से लोग बिना फोन नंबर शेयर किए एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं और ग्रुप्स जॉइन कर सकते हैं. इस वजह से यूजर्स का फोन नंबर सामने नहीं आता।  वहीं व्हाट्सऐप पर किसी से बात करने या ग्रुप जॉइन करने के लिए फोन नंबर जरूरी होता है. इसी वजह से ग्रुप्स में लोग एक दूसरे के नंबर आसानी से देख सकते हैं।  मैसेज ब्रॉडकास्ट करना टेलीग्राम पर चैनल्स का फीचर मिलता है, जो पब्लिक या प्राइवेट हो सकते हैं. चैनल का एडमिन एक क्लिक में अनलिमिटेड लोगों तक मैसेज, वीडियो और फाइल्स पहुंचा सकता है. इस वजह से जानकारी बहुत तेजी से फैल सकती है।  वहीं व्हाट्सऐप को प्राइवेट बातचीत और छोटे ग्रुप्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसके ब्रॉडकास्ट और ग्रुप फीचर्स में भी सीमाएं हैं, जिससे एक साथ बहुत ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचाना आसान नहीं होता।  कोई लोकल ऑफिस नहीं व्हाट्सऐप, मेटा कंपनी के अंडर आता है, जिसके ऑफिस और लीगल टीमें कई देशों में मौजूद हैं. वहीं टेलीग्राम किसी भी देश में लोकल ऑफिस खोलने से बचता है और अपनी कंपनी को काफी हद तक डीसेंट्रलाइज्ड तरीके से चलाता है।  लोकल ऑफिस और लीगल टीम न होने की वजह से सरकारों के लिए टेलीग्राम पर दबाव बनाना मुश्किल हो सकता है।  व्हाट्सऐप एक अच्छा टूल है, जिसकी मदद से लोग रोजाना अपने दोस्तों और परिवार वालों से फोन नंबर के जरिए बात करते हैं. लेकिन टेलीग्राम को ज्यादा प्राइवेसी, बड़े ऑडियंस तक जानकारी पहुंचाने और एडवांस फीचर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यही वजह है कि टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है। 

MP को बड़ी सौगात! इंदौर-अबू धाबी फ्लाइट 15 जुलाई से शुरू, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने जारी किया शेड्यूल

इंदौर  अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर पूरे विश्व में किसी न किसी क्षेत्र में देखने मिला है. चाहे पेट्रोल-डीजल हो, चाहे गैस सिलेंडर हो, महंगाई हो फिर हवाई यातायात हो. इन सब समस्याओं से भारत को भी दो-चार होना पड़ा है. इंदौर में भी लंबे समय से इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट बंद हो गई थी, लेकिन लंबे समय के बाद अच्छी खबर यह है कि इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट की जगह अब इंदौर से अबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू होगी. लिहाजा 17 जुलाई से यात्री अबू धाबी के लिए उड़ान भर सकेंगे।  एयर इंडिया ने शुरू की इंदौर-अबूधाबी फ्लाइट इंदौर से दुबई और अन्य अरब देशों की एयर कनेक्टिविटी के चलते अब तक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट चल रही थी, जिसे युद्ध के कारण 27 फरवरी से अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा था, हालांकि कंपनी ने इसे सुचारु रखने का प्रयास किया, लेकिन संचालन नहीं हो सका. अब शारजाह के स्थान पर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर से आबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू करने का फैसला किया है. जिसका शेड्यूल जारी किया गया है।  हफ्ते में इन 4 दिन चलेगी फ्लाइट एयर इंडिया एक्सप्रेस की यह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन यानि रविवार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी. बताया जा रहा है कि शारजाह के अलावा अबू धाबी के लिए फ्लाइट का शड्यूल पेंडिंग था, हालांकि बीच ही शारजाह की फ्लाइट बंद होने से कंपनी को अब नई फ्लाइट शुरू करना पड़ा. जिससे कि यात्री इंदौर से अबू धाबी के जरिए दुबई और शारजाह की ओर उड़ान भर सकें।  2019 में दुबई के लिए शुरू हुई थी फ्लाइट, हुई बंद आपको बता दें कि इंदौर से 19 जुलाई 2019 को दुबई के लिए फ्लाइट शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारण से यह फ्लाइट बंद करनी पड़ी. इसके बाद इंदौर से शारजाह की फ्लाइट शुरू की गई. जिसे अब युद्ध के कारण नियमित नहीं रखा जा सका, लेकिन अब अबू धाबी के लिए फिर फ्लाइट शुरू होने से दुबई और शारजाह की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को इंदौर से अबू धाबी के लिए सीधी फ्लाइट मिल सकेगी।  ऐसा रहेगा फ्लाइट का शेड्यूल इंदौर से अबू धाबी की फ्लाइट इंदौर एयरपोर्ट से 7:50 पर टेक ऑफ करेगी. जो अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 9:35 पर अबू धाबी एयरपोर्ट पर लैंड करेगी. इसी प्रकार अबू धाबी से इंदौर के लिए संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 10:35 पर टेक ऑफ करेगी. जो रात भारतीय समय के अनुसार रात 3:20 पर इंदौर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी।  माना जा रहा है कि इंदौर से अबूधाबी तक 3:15 घंटे का सफल रहेगा. जिसका किराए करीब 16500 रुपए बताया गया है. ट्रैवल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रमुख हेमेंद्र सिंह जादौन ने बताया "इस फ्लाइट से यात्रियों को दुबई और शारजाह जाने का नया विकल्प उपलब्ध हो सकेगा. वहीं इस रूट पर पर्यटन गतिविधियां भी पहले की तरह सुचारू रह सकेंगी। 

15 हजार राशन कार्डधारकों की बढ़ी मुश्किलें, जीवित होने का प्रमाण नहीं दिया तो अटक सकता है राशन

 दतिया सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन प्राप्त करने वाले हजारों हितग्राहियों के लिए जून माह बेहद महत्वपूर्ण है। शासन के निर्देश पर जिले में पांच वर्ष पहले कराई गई ई-केवाईसी को दोबारा अपडेट करने का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में 55 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनकी पुरानी ई-केवाईसी अब अमान्य मानी जा रही है। अब तक लगभग 35 हजार हितग्राहियों (MP Ration Beneficiary) का पुन: सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 15 हजार से अधिक हितग्राही अभी भी प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग ने दतिया के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र परिवारों को जागरूक कर जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूर्ण कराएं। शिकायतों के बाद उठाया कदम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया (MP Ration Distribution Update)का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों के नाम पर राशन जारी हो रहा है, वे वास्तव में पात्र और जीवित हैं। कई मामलों में मृत्यु, स्थानांतरण अथवा अपात्रता के बावजूद नाम सूची में बने रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधार कार्ड के साथ उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पीडीएस मशीन में जिन सदस्यों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उनके लिए ई- केवाईसी कराना अनिवार्य है। किन लोगों को तुरंत करानी होगी ई-केवाईसी  पीडीएस मशीन में जिन हितग्राहियों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले या राज्य से बाहर रहने वाले हितग्राही भी देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। खाद्य विभाग ने अपील की है कि जून माह के भीतर ई-केवाईसी जरूर करा लें, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलता रहे। फैक्ट फाइल कुल हितग्राही : 5,32,413 अब तक पूर्ण ई-केवाईसी : 4,39,898 शेष हितग्राही : 15,489 पुन: सत्यापन वाले हितग्राही : 55 हजार से अधिक ब्लॉकवार शेष ई-केवाईसी  दतिया : 5,489 सेवढ़ा : 5,419 भांडेर : 4,541 पारदर्शिता और प्रभावी होगी रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले अथवा राज्य से बाहर रह रहे हितग्राही देश के किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर अपनी ई- केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए मूल राशन दुकान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। दोबारा सत्यापन से राशन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। -जिला खाद्यआपूर्ति अधिकारी, दतिया

उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी! MP पुलिस में दोबारा शुरू हुई डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात देते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गृह विभाग ने ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रतिवर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें उप निरीक्षक (एसआई) के 10 और आरक्षक (कांस्टेबल) के 50 पद शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल तथा विश्व कप या विश्व चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। पहले मुख्य रूप से पदक विजेताओं को ही प्राथमिकता मिलती थी।  संशोधित नियमों के अनुसार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, ऊंचाई संबंधी शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) से भी छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। उप निरीक्षक पद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। वहीं आरक्षक पद के लिए राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे।  इस निर्णय से खिलाड़ियों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे खेल गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इसे खिलाड़ियों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय बताया है।  

IPL 2027 की संभावित तारीखों का खुलासा, 10 मार्च से आगाज के संकेत; BCCI सचिव का बड़ा बयान

मुंबई  देश के ज्यादातर हिस्सों में मई के महीने में पड़ने वाली भीषण गर्मी और मौसम के बदलते मिजाज से खिलाड़ियों और दर्शकों को बचाने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. बीसीसीआई अगले साल से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को तय समय से थोड़ा पहले शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने पीटीआई (PTI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में खुलासा किया कि बीसीसीआई भविष्य के आईपीएल सीज़नों के लिए 10 मार्च से 15 मई के बीच की समय-सीमा (विंडो) को ध्यान में रखकर योजना बना रहा है।  इंटरनेशनल कैलेंडर के चलते मैचों की संख्या 74 ही रहेगी बीसीसीआई सचिव ने शेड्यूल में बदलाव की बात तो कही, लेकिन इसके साथ ही यह भी पूरी तरह साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर की व्यस्तताओं और पाबंदियों के कारण आईपीएल के मैचों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. मैचों की कुल संख्या 74 ही बनी रहेगी और इसे बढ़ाकर 94 करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. आमतौर पर देखा जाए तो आईपीएल मार्च के आखिरी हफ्ते में शुरू होकर मई के बिल्कुल अंत तक चलता है, लेकिन सैकिया का मानना है कि टूर्नामेंट को थोड़ा पहले शुरू करने से मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों और पैसा खर्च करके स्टेडियम आने वाले दर्शकों, दोनों को ही बड़ी राहत मिलेगी।  मई के आखिरी हफ्ते की गर्मी और प्री-मानसून बनी वजह इंटरव्यू के दौरान देवजीत सैकिया ने इस फैसले के पीछे की वजह समझाते हुए कहा, "इस साल आईपीएल लगभग 28 या 29 मार्च को शुरू हुआ था और इसका समापन 31 मई को हुआ. हम इस बात पर लगातार चर्चा कर रहे हैं कि टूर्नामेंट के आखिरी दिनों में यानी 15 मई के बाद देश के कई हिस्सों में अचानक बारिश होने लगती है या प्री-मानसून सीजन दस्तक दे देता है, जिससे मैच प्रभावित होते हैं. दूसरी तरफ, मई के अंत में गर्मी का पारा भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जो न तो खिलाड़ियों की फिटनेस के लिए अच्छा है और न ही स्टैंड्स में बैठकर मैच देख रहे प्रशंसकों के लिए आरामदायक होता है।  शेड्यूल को दो हफ्ते पहले खिसकाने पर चल रही है चर्चा सैकिया ने आगे बताया कि बीसीसीआई मई के अंतिम दिनों में होने वाले बढ़ते तापमान और तपिश के प्रभाव को कम करने के लिए पूरे टूर्नामेंट के शेड्यूल को करीब दो हफ्ते पहले खिसकाने की रणनीति पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से बीसीसीआई और हमारी आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के बीच यह बातचीत चल रही है कि क्या हम टूर्नामेंट को मार्च के आखिरी हफ्ते के बजाय मार्च की शुरुआत में ला सकते हैं, ताकि सीजन का समापन मई के मध्य तक आसानी से किया जा सके।  सैकिया ने कहा कि उन्हें खिलाड़ियों और फ़ैन्स से IPL मैचों के दौरान भारत के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में गर्मी को लेकर शिकायतें भी मिली हैं. "मुझे फ़ैन्स और खिलाड़ियों से बहुत सी शिकायतें मिल रही हैं, क्योंकि सभी खिलाड़ी इतनी गर्मी में खेलने के लिए तैयार या अभ्यस्त नहीं होते हैं. उन्होंने कहा, "इसलिए, टूर्नामेंट के लिए अच्छा माहौल बनाने के लिए हम इसे 15 मई तक खत्म करना चाहते हैं. अभी हमारा पहला लक्ष्य यही है, और अगले साल होने वाले IPL के 20वें एडिशन के लिए यही मुख्य चिंता का विषय है, जो एक बड़ा इवेंट होगा। उन्होंने कहा, "आने वाले सालों में क्या स्थिति होगी, यह मुझे नहीं पता, लेकिन अभी मुझे इसे 74 से बढ़ाकर 94 करने की कोई संभावना नहीं दिखती, क्योंकि इसके लिए न सिर्फ़ भारत के बारे में सोचना होगा, बल्कि ICC के दूसरे क्रिकेट खेलने वाले देशों, खासकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, साउथ अफ़्रीका और वेस्ट इंडीज़ के खिलाड़ियों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।  "हम बाइलेटरल मैचों और दूसरे मल्टी-कंट्री टूर्नामेंट्स को भी खराब नहीं करना चाहते." सैकिया इस बात से संतुष्ट थे कि वेस्ट एशिया में संकट के बावजूद BCCI इस साल IPL का 19वां एडिशन सफलतापूर्वक पूरा कर पाया. साइकिया ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय घरेलू टूर्नामेंट मार्च के पहले हफ़्ते तक खत्म हो जाएं, यह सुनिश्चित करना क्यों ज़रूरी है।  उन्होंने कहा, "अगर आप हमारे घरेलू क्रिकेट को देखें, तो यह एक मज़बूत सिस्टम है. हम अगस्त के आखिर में ईरानी ट्रॉफ़ी और दूसरे मैचों के साथ शुरुआत करते हैं और यह रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल तक चलता है, जो मार्च के महीने में होता है. हमारे घरेलू क्रिकेट का सीज़न पहले से ही लगभग 7-8 महीने लंबा होता है. हमें कुछ मैचों को इस तरह से एडजस्ट करना होगा कि घरेलू क्रिकेट 10 मार्च तक खत्म हो जाए, ताकि हम तुरंत (IPL) शुरू कर सकें। 

कार खरीदारों के लिए खुशखबरी, 15 जुलाई से लागू होगा नया नियम, टैरिफ सिर्फ 10%

 नई दिल्ली 15 जुलाई से भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट प्रभाव में आएगा. इस एफटीए (FTA) के तहत भारत और यूके के बीच कई सामानों पर टैरिफ कम या जीरो होगा. ऑटोमोबाइल वर्ल्ड के लिए भी ये ट्रेड एग्रीमेंट बहुत मायने रखता है. क्योंकि इस एफटीए के बाद कई प्रीमियम कारों पर भारत में टैरिफ कम हो जाएगा।  इसका सीधा का मतलब है कि भारत में प्रीमियम कारें सस्ती होंगी. यूनाइटेड किंगडम के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस एंड ट्रेड के मुताबिक ब्रिटिश ऑटोमोबाइल कंपनियों की भारत में पहुंच आसान हो जाएगी. इन कारों पर कोटा के तहत टैरिफ 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पहुंच जाएगी।  इस एग्रीमेंट के बाद ब्रिटिश कार कंपनियों को भारत में बेहतर एक्सेस मिलेगा. वहीं कई भारतीय कंपनियों के लिए यूके में तमाम मौके खुल जाएंगे. भारतीय कंपनियों के लिए टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, इलेक्ट्ऱ़ॉनिक्स, फार्मा और दूसरे सेक्टर में एक बड़ा बाजार मिलेगा।  सस्ती होंगी कारें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू करने का ऐलान 17 जून को किया गया है और बिजनेसेस को 28 दिनों का वक्त तैयारी करने के लिए दिया गया है, जिससे वे अपने सिस्टम को तैयार कर लें और जरूरी रजिस्ट्रेशन कर लें. यूके सरकार इसको भारत का अब तक का सबसे व्यापक व्यापार समझौता बता रही है।  यूके सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ऑटोमोबाइल टैरिफ कोटा के तहत 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी आएगा. हालांकि, ये कोटा क्या और कितना होगा, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है. यानी इस टैरिफ कटौती के साथ ब्रिटिश कंपनियां कितनी गाड़ियां एक साल में भारत ला  भारत और यूके की इस डील का असर काफी पहले से दिखने लगा है. कंपनियों ने अपनी गाड़ियों की कीमतें कम करनी शुरू कर दी हैं. जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने 5 मई को दो रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती का ऐलान किया था, जो यूके से इंपोर्ट की जाती हैं।  कई कारें हुईं सस्ती कंपनी ने रेंज रोवर एसवी (Range Rover SV) की कीमत 75 लाख रुपये घटाकर 3.50 करोड़ रुपये कर दी है. पहले ये कार 4.25 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी. वहीं रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी की कीमतों में 40 लाख रुपये की कटौती की गई थी. इस कार की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटाकर 2.35 करोड़ रुपये कर दी गई है।  इसके अलावा ब्रिटिश सुपरकार निर्माता कंपनी मैकलारेन (McLaren) भी अपनी कारों की कीमतों को 38 फीसदी तक कम करने की तैयारी कर रही है. मैकलारेन 750एस कूपे की कीमत 3 करोड़ रुपये कम होने की उम्मीद है. ये कार पहले 7.94 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी, जो घटकर 4.94 करोड़ रुपये हो सकती है।  इसके अलावा 750एस स्पाइडर की कीमत 3.32 करोड़ रुपये घटकर 5.46 करोड़ रुपये हो सकती है. दूसरी कंपनियों ने अभी कीमतों में कटौती का ऐलान नहीं किया है. आने वाले दिनों में हमें इनके बारे में भी जानकारी मिल सकती है।  टैक्स कटौती और कोटा एफटीए के तहत पहले साल 3000सीसी के ऊपर के इंजन वाली पेट्रोल और 2500सीसी के ऊपर वाली डीजल कारों पर टैरिफ को 110 परसेंट से घटाकर 30 परसेंट किया जाएगा. ये रेट 10 हजार गाड़ियों के लिए होगा।  वहीं 1500सीसी से 3000सीसी तक वाली पेट्रोल और 2500सीसी तक इंजन वाली डीजल कारों पर टैरिफ 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी हो जाएगा. इसके लिए 5000 कारों का कोटा होगा. 1500सीसी इंजन तक वाली कारों पर भी 50 परसेंट टैरिफ पहले साल होगा. इसमें भी 5000 कारों का कोटा होगा।