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बिहार को हाईस्पीड रेल की सौगात, पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन से सफर होगा बेहद आसान

 पटना /नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को बिहार की राजधानी पटना से बुलेट ट्रेन के जरिये जोड़ने पर सरकार काफी गंभीरता से काम कर रही है.  रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि पटना एक बार बुलेट नेटवर्क से जुड़ जाएगा तो इससे बिहार को काफी सुविधा मिलेगी. उन्होंने कहा कि पटना से दिल्ली की यात्रा मात्र 4 घंटे 41 मिनट की रह जाएगी. उन्होंने कहा कि आगे पटना से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन का विस्तार किया जाएगा. आने वाले समय में इसके लिए भी तैयारी शुरू हो गई है. पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच में अगले साल शुरू होने वाली है।  रेल मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में बिहार में बुलेट ट्रेन आएगी. ये ट्रेन दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से वाराणसी, वाराणसी से पटना और पटना से सिलिगुड़ी तक जाएगी. इसके बाद दिल्ली से पटना की यात्रा मात्र 4 घंटे और 41 मिनट की रह जाएगी।  इससे पहले रेल मंत्री ने कहा था कि भारत ने अब स्वयं बुलेट ट्रेन बनाने की क्षमता रखता है. उन्होंने अगले साल मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर काम शुरू करने की घोषणा की है।  पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन (हाई-स्पीड रेल) प्रोजेक्ट भारत के पूर्वी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा है. यह अभी पूर्ण रूप से प्लानिंग और सर्वे स्टेज में है, यहां अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।  यह बुलेट ट्रेन दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा है. पटना इस रूट पर प्रमुख स्टेशन होगा. दिल्ली से पटना की दूरी अभी लगभग 1000 से 1100 किलोमीटर के बीच में है. इस यात्रा में अभी 12 से 17 घंटे लगते हैं. लेकिन बुलेट ट्रेन के बाद ये यात्रा 5 घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी।  बिहार दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है।  राज्य के एक दिन के दौरे पर आए वैष्णव ने छपरा से दिल्ली के लिए एक नई एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू करने की घोषणा की।  रेल मंत्री ने कहा, "राज्य से लोकोमोटिव (इंजन) एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. आज बिहार के मरहौरा प्लांट से 51वां लोकोमोटिव इंजन एक अफ़्रीकी देश को एक्सपोर्ट किया जाएगा." वैष्णव ने बताया कि बिहार में लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली रेल परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं।  पटना रेलवे स्टेशन पर बन रहे हैं 5 नए प्लेटफॉर्म रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चालू वित्त वर्ष में बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड रेलवे बजट आवंटित किया है।  उन्होंने बताया कि यात्रियों की क्षमता बढ़ाने के लिए पटना रेलवे स्टेशन पर पांच अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं. रेल मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की राजधानी के पास स्थित फतुहा स्टेशन का भी विकास किया जा रहा है। 

42 हजार से अधिक हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां, 38 हजार परिवारों का होगा गृह-प्रवेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल शनिवार, 20 जून को इंदौर जिले के सांवेर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां तथा 38 हजार से अधिक परिवारों को उनके नवीन पक्के आवासों में गृह-प्रवेश कराया जाएगा। साथ ही 2 हजार 935 करोड़ रुपये लागत की 48.10 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन परियोजना का भूमि-पूजन भी करेंगे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प तथा सभी पात्र परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना के निर्माण के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास को नई गति दे रही है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना मालवा अंचल की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। लगभग 48.10 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा। परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) पर विकसित किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने पर इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन और धार्मिक पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को भी ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के बनने से बेहतर और सुगम आवागमन सुविधा प्राप्त होगी। स्थानीय निवासियों एवं किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 18 अंडर-पास तथा 19 जंक्शन इम्प्रूवमेंट कार्यों का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त वेस्टर्न रिंग रोड तथा उज्जैन-बदनावर मार्ग के साथ ग्रेड सेपरेटेड जंक्शन विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके।    

रेल बजट जैसा तोहफा! छपरा-दिल्ली एक्सप्रेस लॉन्च, पटना स्टेशन होगा और आधुनिक

 पटना केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार, 19 जून को बिहार की राजधानी पटना में रेलवे विकास को नई गति देने वाली कई बड़ी घोषणाएं की हैं. रेल मंत्री ने कहा कि बिहार में रेलवे के 1.15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार को रेलवे बजट में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी गई है. उन्होंने कहा, बिहार में पूरी तरह से रेलवे विकास हो रहा है।  रेल मंत्री ने पटना के हार्डिंग पार्क इलाके में 5 नए प्लेटफॉर्म बनाने का ऐलान किया है. पटना स्टेशन का विस्तार होगा तो रेल क्षमता बढ़ेगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी और ट्रेनों का आना-जाना सुगम होगा. हार्डिंग पार्क में इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है।  रेल मंत्री ने कहा कि छपरा से दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के लिए नई एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की जा रही है. इससे यात्रियों को सीधा और आरामदायक सफर मिलेगा. रेल मंत्री ने बिहार में बने रेल इंजनों की सराहना की।  मढ़ौरा रेल इंजन कारखाने से आज 51वां लोकोमोटिव इंजन निर्यात के लिए रवाना हो रहा है. यह इंजन अफ्रीकी देश गिनी को भेजा जाएगा. वैष्णव ने कहा कि बिहार में बने इंजन अब विदेशों में भी जा रहे हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।  रेल मंत्री ने बताया कि बिहार में चल रही सभी रेलवे परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी. केंद्र सरकार बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. आने वाले समय में और नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।  दिल्ली और एनसीआर के यात्रियों को मिलेगी राहत रेल मंत्रालय के अनुसार छपरा और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। बढ़ती मांग को देखते हुए 12527/12528 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस-छपरा साप्ताहिक एक्सप्रेस तथा 14055/14056 मऊ-आनंद विहार टर्मिनस-मऊ एक्सप्रेस को मंजूरी दी गई है। नई सेवाओं से यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। छपरा-दिल्ली साप्ताहिक एक्सप्रेस का समय 12527 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार रात 8:50 बजे छपरा से रवाना होकर अगले दिन दोपहर 2:00 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में 12528 आनंद विहार टर्मिनस-छपरा एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार शाम 4:25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 9:40 बजे छपरा पहुंचेगी। इन स्टेशनों पर होगा ठहराव यह ट्रेन बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे के अनुसार उद्घाटन के अवसर पर इन ट्रेनों का संचालन विशेष उद्घाटन गाड़ियों के रूप में किया जाएगा। इससे यात्रियों को नई सेवाओं का लाभ जल्द मिल सकेगा।  

खान सर-रोशन सर विवाद के बीच सरकार का बड़ा कदम, कोचिंग होंगे शिफ्ट

पटना बिहार की राजधानी पटना में बड़े कोचिंग संचालक फैसल खान(खान सर) और रोशन आनंद(रोशन सर) के बीच विवाद के बीच सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोचिंग संस्थानों को पटना शहर से अलग जगह दिया जाएगा ताकि, इनका एक जगह पर केंद्र स्थापित हो सके। सीएम ने यह भी कहा कि टाउनशिप के निर्माण से हमारे शहर स्मार्ट होंगे। सभी चीजें व्यवस्थित ढंग से स्थापित होंगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को नगर विकास एवं आवास विभाग की विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के बाद अपनी बात रख रहे थे। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि पटना के सभी वार्ड में सब्जी हाट का निर्माण करें, जहां पर दूध, सब्जी और मछली आदि की एक जगह पर बिक्री हो। बिहार में सरकारी नौकरी में क्रेडिट की लड़ाई में खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक खान सर और ज्ञान बिन्दु के संचालक रोशन आनंद कुछ ऐसे उलझे कि सड़क पर हंगामा, प्रदर्शन से थाना, कोर्ट, कचहरी और जेल तक पहुंच गया। 4 जून को खान ग्लोबल स्टडीज में तोड़ फोड़ हुई जिसके आरोप में रोशन आनंद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसी दौरान एक वायरल वीडियो ने खान सर को फायरिंग का आरोपी बना दिया। उनके दो सुरक्षा गार्ड जेल चले गए और फैसल खान पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई। कोर्ट ने भले ही उन्हें गिरफ्तारी से राहत दे दिया हो लेकिन, बेल मिलने के बाद जेल से निकले रोशन आनंद ने फैसल खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी बीच कोचिंग संस्थानों को लेकर सम्राट सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। नगर विकास विभाग के कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा कि जितनी भी कोचिंग संस्थाएं हैं उनका भी एक ऑर्गनाइज्ड सेंटर होना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में गौरवशाली इतिहास रहा है। जितने भी कोचिंग संस्थाएं पटना शहर में संचालित हैं उन्हें सिटी एरिया से बाहर एक जगह पर होना चाहिए। हमारा आग्रह है कि वे पटना के बाहर चलें। वहां पूरी व्यवस्था बहाल की जाएगी तो ज्यादा से ज्यादा लोग वहां आ पाएंगे। सीएम ने कहा कि सभी लोग सिवरेज कनेक्शन से अपने अपने घरों को जोड़ें ताकि एसटीपी के माध्यम से गंदगी को साफ किया जा सके और गंगा नदी में गंदगी जाने से रोका जा सके। शहरी क्षेत्र में जहां भी सड़क या नाला को तोड़ दिया गया है उन्हें बरसात से पहले ठीक कर लें। बरसात की समाप्ति तक नई योजनाओं की शुरुआत नहीं करें। इससे आम जनों की परेशानी कम होगी। शहर को सुंदर और विकसित बनाने के लिए कुछ फेर बदल करना पड़ेगा। सीएम ने कहा कि पटना से बड़ा एक नया शहर बसाना है। 66 हजार एकड़ में नए पाटलिपुत्रा टाउनशीप में शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, रोजगार, पानी, बीजली सभी सुविधाएं बहाल की जाएंगी।

रुदौली में जनसभा के दौरान बोले रामभक्तों पर सवाल उठाने वालों का दोहरा चरित्र उजागर

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। रुदौली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों के अपमान की बात कर रहे हैं, वही पहले राम का नारा लगाने वालों और कारसेवकों पर गोली चलवाते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के दोहरे चरित्र को जनता भलीभांति जानती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के दोहरे चरित्र को देखो, कहती है कि राम भक्तों का अपमान हुआ है। कारसेवकों और रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग उपदेश देने चले हैं। हमने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। मैं सभी से कहूंगा कि कोई भी अनर्गल टिप्पणी न करें, जो रामभक्तों को आहत करे सपा-कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी योगी कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष किया गया है। कांग्रेस ने मंदिर निर्माण रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था और सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व तक पर सवाल उठाए गए थे। आज वही लोग अयोध्या और रामभक्तों की चिंता जताने का दिखावा कर रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। उन्होंने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। अगर किसी के पास चंदा या चढ़ावा चोरी से संबंधित कोई सबूत है तो वह जांच एजेंसी को सौंपे। जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो वह किसी भी कीमत पर नहीं बचेगा। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आए- योगी उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि जांच रिपोर्ट आने तक अनर्गल बयानबाजी से बचें और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि अयोध्या और रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली बातें नहीं होनी चाहिए। जनता को भी ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर बन न पाए, इसके लिए कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट में बेशर्मी के साथ कहा था कि राम तो हुए ही नहीं। वही कांग्रेस आज अयोध्या पर बहुत मचल रही है। कह रही है कि रामभक्तों का अपमान हुआ। झलकारी बाई की 22 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण इससे पहले मुख्यमंत्री ने मां कामाख्या धाम में पूजा-अर्चना की। उन्होंने राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का लोकार्पण किया और वीरांगना झलकारी बाई की 22 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। साथ ही 378 करोड़ रुपये से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

274 राजस्व गांवों और 6 वार्डों में विकास कार्यों पर अस्थायी रोक, सुनियोजित टाउनशिप पर जोर

 पटना  पटना के निकट प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप पाटलिपुत्र क्षेत्र में जमीन मालिकों को भी विशेष परिस्थितियों में राहत मिलेगी। जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और लीज की अनुमति दी गई है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए मालिकों को बाजार मूल्य या एमवीआर का दो गुना भुगतान मिलेगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि के लिए यह राशि बाजार मूल्य या MVR के चार गुना के बराबर होगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि के लिए तय मुआवजा राशि पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। पुनपुन नपं के छह वार्डाें की जमीन के लिए एमवीआर से दो गुना भुगतान इस व्यवस्था का लाभ पटना जिले के नौ प्रखंडों के 274 राजस्व गांवों को मिलेगा। इनमें दनियावां, धनरुआ, फतुहा, मसौढ़ी, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, फुलवारी, पुनपुन और संपतचक प्रखंड शामिल हैं। वहीं पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों की जमीन के लिए एमवीआर से दो गुना भुगतान का प्रावधान किया गया है। पटना मास्टर प्लान-2031 के तहत जोनल प्लान तैयार करने के उद्देश्य से इन 274 राजस्व गांवों और पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, विकास और भवन निर्माण संबंधी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से 30 मार्च 2027 तक रोक लगाई गई है ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में नौ प्रखंड के 274 गांव व 6 वार्ड यह फैसला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के सुनियोजित विकास और भविष्य की आधारभूत संरचना को ध्यान में रखकर लिया गया है। जोनल प्लान तैयार होने के बाद आगे की विकास योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। परियोजना में सबसे अधिक 85 राजस्व गांव पुनपुन प्रखंड से शामिल किए गए हैं। इसके अलावा फतुहा के 70, नौबतपुर के 49, धनरुआ के 24, मसौढ़ी के 14, संपतचक के 10, दनियावां और फुलवारी के आठ-आठ तथा पटना ग्रामीण के छह राजस्व गांव इस योजना का हिस्सा होंगे।

डिजिटलीकरण, क्षमता विस्तार और सुस्थिर खनन पहलों की समीक्षा की

हैदराबाद  एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने दोणिमलै कॉम्प्लेक्स की हाल ही में हुई एक यात्रा के दौरान परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की । इस दौरे से प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने का अवसर मिला, जो दोणिमलै को भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर में बदलने में मदद कर रही हैं । साथ ही, एनएमडीसी को भारत के सबसे बड़े और जिम्मेदार लौह अयस्क उत्पादक के रूप में सुस्थापित करती है । इस यात्रा के दौरान प्रबंधन ने कुमारस्वामी खदान से 10 एमटीपीए और दोणिमलै परिसर से 17 एमटीपीए के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से चल रही क्षमता-विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास की पहलों की समीक्षा की । इन पहलों से एनएमडीसी के 100 एमटीपीए खनन कंपनी बनने के विजन में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है । प्रबंधन ने 35% तक Fe युक्त लौह अयस्क, लौह अयस्क स्लाइम्स और निम्न श्रेणी के लौह-युक्त पदार्थों जैसे बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) और बैंडेड हेमेटाइट क्वार्ट्जाइट (बीएचक्यू) के उपयोग के लिए पहलों की भी समीक्षा की । परंपरागत रूप से, इन संसाधनों का सीमित उपयोग किया जाता था और मूल्यवान लौह सामग्री होने के बावजूद इन्हें अपशिष्ट के रूप में माना जाता था । लाभकारी और वैज्ञानिक खनिज प्रसंस्करण के माध्यम से, एनएमडीसी इन कम उपयोग किए गए संसाधनों को मूल्यवान कच्चे माल में बदल रहा है, मौजूदा खदानों से अधिक लौह अयस्क को पुनः प्राप्त कर रहा है, जबकि अपशिष्ट उत्पादन को कम कर रहा है । यह पहल खनन की सुस्थिर प्रथाओं का समर्थन करती है, खनिज संरक्षण में सुधार करती है, खनन कार्यों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करती है और भारत के इस्पात क्षेत्र की कच्ची सामग्री की बढ़ती आवश्यकताओं में योगदान करती है । कुमारस्वामी खदान में नई लागू की गई स्वचालित गेट प्रबंधन प्रणाली दौरे के दौरान समीक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु था । डिजिटल प्रणाली ने रियल टाइम निगरानी और सामग्री की आवाजाही के सत्यापन को सक्षम बनाकर लौह अयस्क प्रेषण में पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत बनाया  है । यह पहल यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि खनिज संसाधनों को उनके इच्छित गंतव्यों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाए, साथ ही मैनुअल हस्तक्षेप को कम किया जाए और परिचालन संबंधी निगरानी में सुधार लाया जाए । एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कार्यपालक निदेशकों के साथ मिलकर हाल ही में विकसित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हाई-राइज टावर शामिल हैं, जो कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास के प्रति एनएमडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता  है । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, एनएमडीसी का मानना है कि सतत विकास उत्पादन लक्ष्यों से परे होता है और इसमें कर्मचारियों के लिए बेहतर जीवन-स्तर बनाना, स्थानीय समुदायों का समर्थन करना और पर्यावरण प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित रखना शामिल है । इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा, "हमारा दृष्टिकोण ऐसे खनन संचालन का निर्माण करना है, जिस पर भावी पीढ़िया गर्व कर सकें । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, हम दोणिमलै को एक मॉडल खनन परिसर बनाने की आकांक्षा रखते हैं, जो जिम्मेदार खनन, नवाचार और कर्मचारी कल्याण के उच्चतम मानकों को दर्शाता है । जैसे-जैसे एनएमडीसी अपने 100 एमटीपीए विजन की ओर बढ़ रहा है, हम भारत के इस्पात उद्योग को उच्च-गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । साथ ही, हम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से हर संसाधन के मूल्य को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, यहां तक कि निम्न श्रेणी के अयस्क को उत्पादक परिसंपत्तियों में बदल रहे हैं, साथ ही सुस्थिर और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे    हैं ।

19 जून से 5 जुलाई तक तबादलों की मंजूरी, सभी विभागों में प्रक्रिया तेज

जयपुर राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर लगा बैन हट गया है. सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने आदेश जारी कर 19 जून से ट्रांसफर-पोस्टिंग की अनुमति दी है. इसके साथ ही लंबे समय से बैन हटने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिली है. आदेश के मुताबिक, तबादलों की अनुमति 5 जुलाई तक रहेगी. इस दौरान सभी विभाग अपने स्तर पर तबादला प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. अब तेज होगी ट्रांसफर की प्रक्रिया सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. ऐसे में आदेश जारी होने के साथ ही तबादलों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है. अब विभिन्न विभागों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, मंडलों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा. चिकित्सा विभाग में बैन, थर्ड ग्रेड टीचर्स का इंतजार लंबा हालांकि, थर्ड ग्रेड टीचर्स को अभी लंबा इंतजार करना होगा. इस बार भी शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों को तबादलों की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. इसके अलावा संभावित वर्षाकाल को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों पर तबादला प्रतिबंध अगले आदेश तक यथावत रहेगा. इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादलों में एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, मेडिकल बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और किडनी सहित अन्य प्राणघातक रोगों से पीड़ित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही दिव्यांग कर्मचारी, दीर्घावधि सेवा वाले कर्मचारी तथा राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी प्राथमिकता मिलेगी.

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, ट्रांसफर बैन हटा; 5 जुलाई तक जारी रहेगी तबादला प्रक्रिया

जयपुर   भजनलाल सरकार ने तबादलों से प्रतिबंध हटा दिया है । 19 जून से 5 जुलाई तक यह प्रतिबंध हटाया गया है । प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के मुताबिक शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी के वेतन श्रृंखला के शिक्षकों और वर्षा काल में संभावित बीमारियों के दृष्टिगत चिकित्सा विभाग के कार्मिकों के लिए स्थानांतरण पर प्रतिबंध अग्रिम आदेशों तक यथावत रहेगा ।यह आदेश प्रदेश के सभी निगमों, मंडलों, बोर्ड और स्वायत्तशाषी संस्थाओं पर भी लागू होगा । राजस्थान की भजनलाल सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर लंबे समय से लागू प्रतिबंध को अस्थायी रूप से हटा दिया है. सरकार के इस फैसले के बाद राज्यभर के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए तबादलों का रास्ता खुल गया है. प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 19 जून से 5 जुलाई 2026 तक तबादले किए जा सकेंगे. इस अवधि के दौरान विभिन्न विभागों में प्रशासनिक आवश्यकताओं और कर्मचारियों की मांग के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे।  हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस प्रक्रिया से फिलहाल बाहर रखा है. शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी अध्यापकों पर तबादला प्रतिबंध जारी रहेगा. इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों के तबादलों पर भी अग्रिम आदेश तक रोक बरकरार रखी गई है. ऐसे में इन दोनों वर्गों के कर्मचारियों को अभी तबादला प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल सकेगा।  इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा. इसके साथ ही राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी विशेष वरीयता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें एक ही स्थान या निकटवर्ती क्षेत्र में पदस्थापित करने पर विचार किया जा सके. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, बोर्डों, मंडलों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा।  सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा विधायक दल की बैठक में भी उठा था तबादले का मुद्दा तबादला बैन हटाने का फैसला अचानक नहीं लिया गया है. पिछले कुछ समय से जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की ओर से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा था. हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में भी तबादलों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था. कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देते हुए कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटाने की मांग की थी. विधायकों का कहना था कि लंबे समय से तबादले बंद होने के कारण कई विभागों में कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों को भी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक कारणों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले मंत्रिमंडल की बैठकों में भी कई मंत्रियों ने तबादला बैन हटाने की पैरवी की थी।  लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद लिया निर्णय सरकार स्तर पर लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद आखिरकार प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया. सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे विभागों में रिक्त पदों के संतुलन, कार्यकुशलता बढ़ाने और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान में मदद मिलेगी. अब 5 जुलाई तक राज्यभर में तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है और विभिन्न विभागों में स्थानांतरण संबंधी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। 

मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्यप्रदेश ने हासिल की बहुआयामी उपलब्धियां : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु सिकल सेल उन्मूनल मिशन भावी पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ऐतिहासिक पहल केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में किया सराहनीय कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने शहडोल से लांच किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन आनुवंशिक रोगों की जांच की उपलब्धि में मध्यप्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण राष्ट्रपति ने म.प्र. में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में हुई सामुदायिक भागीदारी को सराहा मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल सिकल सेल मुक्त मध्यप्रदेश का हमारा संकल्प जन सहयोग से होगा साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस का हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम ओंकारेश्वर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। मैं इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया। मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जाँच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिये जा चुके हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित response देने की दूरदर्शी सोच भी थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किये गये वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। ICMR, Tribal Health Research Institutes, AIIMS, NHM, WHO और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आंकलन सामने आया कि:-     भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं।     लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं।     सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय क्षेत्र में है।     अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, Genetic Science और डिजिटल मॉनिटरिंग को एकसाथ जोड़कर यह राष्ट्र व्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी:     पहलाः बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना।     दूसराः व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना।     तीसराः प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाये रखना। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी carrier भी पहचाने जा चुके हैं। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अनजाने ही अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं। संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्यप्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जाँच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया … Read more