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अयोध्या को बदनाम मत करो, 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और कर लो’, चढ़ावा चोरी मामले पर योगी का जवाब

अयोध्या  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे. राम मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि अयोध्या को बदनाम मत करो. अयोध्या का विकास कुछ लोगों से नहीं पच रहा. जब 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार कर लो. रुदौली में कामाख्या मंदिर के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा कि वे लोग उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने जय श्रीराम का नारा लगाने पर राम भक्तों पर गोली चलवाई थी. वे लोग ज्ञान दे रहे हैं, जिन्होंने राम मंदिर ना बने इसके लिए कोर्ट में वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी थी. मुख्यमंत्री का इशारा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तरफ था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि SIT जांच कर रही है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. अपराधियों को ऐसे सजा मिलेगी जो इतिहास बनेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के पास सबूत हो तो SIT को मुहैया कराए. किसी के बहकावे में ना आएं. इन लोगों ने अयोध्या को सकरी गलियों में धकेल कर रखा था, आज अयोध्या का नाम हो रहा है, इन्हें अच्छा नहीं लग रहा है.  SIT अपना काम कर रही है. किसी को अगर SIT से कोई शिकायत रहेगी तो उसको भी SIT से पूछने का मौका दिया जाएगा. जांच के दौरान किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें. किसी का चारित्रिक हनन नहीं किया जाना चाहिए. दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा।  आज विपक्ष रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहा है उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध किया. भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी की सरकार में रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं. इतना ही नहीं, जय श्रीराम के उद्घोष पर लाठियां बरसाई गईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यही लोग रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और यह जांच पूरी निष्पक्षता से होगी. उन्होंने रामभक्तों से मर्यादा और धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “जब हमारे पूर्वजों ने प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के लिए 500 वर्षों तक मर्यादा के साथ संघर्ष और इंतजार किया है, तो अब 15 दिन और धैर्य रखिए।  बाबर से प्यार करते हैं अखिलेश मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई दस्तावेजी प्रमाण है तो उसे एसआईटी को सौंपे और जांच पूरी होने तक कोई भी अनावश्यक बयानबाजी न करें. साथ ही उन्होंने लोगों से अयोध्या और राम मंदिर को बदनाम करने वाले दुष्प्रचार के बहकावे में न आने की भी अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबर को प्यार करने वाले अखिलेश यादव राम मंदिर की बात कर रहे हैं। 

भोपाल में विकास कार्यों पर फिर सवाल, करोड़ों का फुटपाथ तैयार; लोगों के लिए पहुंचना बना चुनौती

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है।  शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है।  स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है।  सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं।  रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है।  ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं? फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है।  रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।   

मीठापुर CSC, रिवर फ्रंट और जिग-जैग पार्क समेत कई योजनाएं शुरू, शहर को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को नगर विकास एवं आवास विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इस दौरान राज्यभर में 286 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को जनता को समर्पित किया गया. मुख्यमंत्री ने 238.75 करोड़ रुपये की लागत से 114 योजनाओं का उद्घाटन किया. वहीं 47.48 करोड़ रुपये की 43 नई योजनाओं का शिलान्यास भी किया. इनमें पटना स्मार्ट सिटी और पटना नगर निगम की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं. पटना स्मार्ट सिटी की 93 करोड़ की परियोजनाएं शुरू पटना स्मार्ट सिटी के कुल 9 प्रोजेक्ट्स को कार्यक्रम में शामिल किया गया. इनमें 6 परियोजनाओं का उद्घाटन और 3 का शिलान्यास हुआ. इन परियोजनाओं पर कुल 93.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इस दौरान रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, ग्रीन एरिया डेवलपमेंट, गार्डन और वॉकिंग पाथवे जैसी परियोजनाओं को जनता के लिए खोल दिया गया. साथ ही शहर के 12 प्रमुख स्थानों पर नए वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले बोर्ड लगाने की भी सौगात दी गई. मीठापुर में शुरू हुआ कॉमन सर्विस सेंटर कार्यक्रम की सबसे चर्चित परियोजनाओं में मीठापुर का नया कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) रहा. 10.68 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक भवन में कई सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी. करीब 26 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बने इस G+3 भवन में बैंक, कॉमर्शियल सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी. यहां ओपन एयर कैफे और ओपन एयर थिएटर भी बनाया गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि भविष्य में यह क्षेत्र मेट्रो नेटवर्क से भी जुड़ जाएगा, जिससे लोगों की आवाजाही आसान होगी. छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बना सेंटर मीठापुर इलाके में कई शिक्षण संस्थान हैं. इसी वजह से यहां छात्रों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को देखते हुए इस सुविधा केंद्र का निर्माण किया गया है. भवन के प्रत्येक फ्लोर पर पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं. इसके अलावा इलाके में सड़क, ड्रेनेज और जलापूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है. गंगा किनारे जिग-जैग पार्क का उद्घाटन पटना के लोगों को गंगा किनारे एक नया आकर्षण भी मिला है. मुख्यमंत्री ने दीघा से सभ्यता द्वार तक विकसित रिवर फ्रंट परियोजना का उद्घाटन किया. जेपी गंगा पथ पर 32.14 करोड़ रुपये की लागत से बने रिवर फ्रंट को जनता के लिए खोला गया. इसके साथ ही जुहू चौपाटी की तर्ज पर तैयार 550 मीटर लंबे जिग-जैग पार्क का भी उद्घाटन किया गया. यह पार्क कुर्जी मोड़ से एलसीटी घाट तक विकसित किया गया है. इसके निर्माण पर 2.54 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. पार्क में लगाए गए 2700 से ज्यादा पौधे जिग-जैग पार्क में हरियाली पर विशेष ध्यान दिया गया है. यहां 2700 से अधिक पौधे लगाए गए हैं. लोगों के टहलने और बैठने के लिए पर्याप्त खुली जगह छोड़ी गई है. पार्क में बेंच भी लगाए गए हैं ताकि लोग गंगा किनारे आराम से समय बिता सकें. डिलीवरी बॉय और ऑटो चालकों को मिला AC लाउंज पटना में पहली बार गिग वर्कर्स के लिए विशेष एसी लाउंज बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री ने इनका भी उद्घाटन किया. ये लाउंज गांधी मैदान गेट नंबर-4 और इनकम टैक्स गोलंबर के पास बनाए गए हैं. इनका निर्माण चेन्नई मॉडल पर किया गया है. इन लाउंज में डिलीवरी बॉय, कूरियर कर्मी, ऑटो चालक और बाइक राइडर्स मुफ्त में आराम कर सकेंगे. मोबाइल चार्जिंग और ठंडे पानी की सुविधा प्रत्येक लाउंज में करीब 15 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. दोनों लाउंज में एक साथ 30 लोग आराम कर सकेंगे. यहां मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, ठंडे पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. जीविका दीदियों को भी इससे जोड़ा जाएगा, जो लोगों को छाछ, आम पन्ना और अन्य पारंपरिक पेय पदार्थ उपलब्ध कराएंगी. बिहार की पहली स्वचालित बाइक पार्किंग बनेगी पटना में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए प्री-फैब्रिकेटेड टू-व्हीलर रोटरी पार्किंग सिस्टम का शिलान्यास भी किया गया. करीब 4.65 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह पार्किंग बिहार की पहली स्वचालित बाइक पार्किंग होगी. इसे मौर्यालोक, बोरिंग रोड और कदमकुआं वेंडिंग जोन के पास बनाया जाएगा. यह पार्किंग सटल डॉली सिस्टम और हाइड्रोलिक तकनीक से संचालित होगी. 250 नई दुकानों का भी शिलान्यास मुख्यमंत्री ने आधुनिक डिजाइन वाली दुकानों की परियोजना का भी शिलान्यास किया. इसके तहत 50 नई आधुनिक दुकानों और 200 प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 7.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे. दुकानों में बिजली, एलईडी लाइटिंग, ड्रेनेज, प्लंबिंग और ऊर्जा बचत से जुड़ी सुविधाएं होंगी. सभी दुकानों का डिजाइन एक जैसा रखा जाएगा, ताकि पूरा बाजार क्षेत्र व्यवस्थित और आकर्षक दिखे. पटना के विकास को मिलेगी नई रफ्तार नगर विकास विभाग की इन परियोजनाओं से पटना की आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी. रिवर फ्रंट, स्मार्ट सुविधाएं, पार्किंग सिस्टम, गिग वर्कर्स लाउंज और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी योजनाएं शहर को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं.

भीलवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर समेत सभी जिलों में सुबह 6 बजे से योग कार्यक्रम, तैयारियों के निर्देश जारी

 जयपुर 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2026 का आयोजन रविवार को प्रातः 6.00 बजे से राज्य में जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय एवं ग्राम पंचायत स्तर पर किया जायेगा। राज्यभर में कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला प्रभारी मंत्रिगण एवं बोर्ड, आयोग एवं निगम के अध्यक्ष एक दिन पूर्व, 20 जून को ही जिला मुख्यालय पहुंचेंगे। प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन ने बताया कि उपमुख्यमंत्री सुश्री दिया कुमारी अजमेर तथा डॉ. प्रेमचन्द बैरवा भीलवाड़ा जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ दौसा जिले में, मंत्री मदन दिलावर जोधपुर में, मंत्री किरोडी लाल अलवर में, मंत्री गजेन्द्र सिंह बीकानेर, मंत्री जोगाराम पटेल जयपुर जिले में, मंत्री सुमित गोदारा श्रीगंगानगर जिले में, मंत्री कन्हैयालाल नागौर में, मंत्री जोराराम कुमावत बाडमेर में, मंत्री हेमन्त मीणा उदयपुर, मंत्री सुरेश सिंह रावत भरतपुर जिले में, मंत्री बाबूलाल खराड़ी बांसवाडा जिले में, मंत्री अविनाश गहलोत चूरू जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आम जनता के साथ योगाभ्यास करेंगे। इसी प्रकार राज्यमंत्री गौतम कुमार (स्वतंत्र प्रभार) कोटा जिले में, राज्यमंत्री श्री हीरालाल नागर (स्वतंत्र प्रभार) टोंक जिले में, राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा (स्वतंत्र प्रभार) पाली में, राज्यमंत्री संजय शर्मा (स्वतंत्र प्रभार) सीकर में, राज्यमंत्री ओटा राम देवासी झालावाड में, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई सिरोही में, राज्यमंत्री विजय सिंह कोटपूतली-बहरोड में, राज्यमंत्री जवाहरसिंह बेढम करौली में एवं राज्यमंत्री डॉ. मंजू बाघमार चित्तौडगढ जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी जैसलमेर जिले में, राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत हनुमानगढ़ में, राज्य स्तरीय सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर सवाई माधोपुर में, राज्य स्तरीय अनु. जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष राजेन्द्र नायक अध्यक्ष, प्रतापगढ़ में, राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवन्त सिंह विश्नोई धौलपुर में, देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश भडाना जालौर में, श्रीयादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद टांक बांरा में, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी डूंगरपुर में तथा विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार झुन्झुनू जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में शामिल होंगे। ब्यावर, राजससमन्द, फलौदी, खेरथल-तिजारा, डीग, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा, सलुम्बर एवं बून्दी जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहकर अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

राज्य में अब कुल 21 विशेष अदालतें, मामलों की तेज सुनवाई और निपटारे पर जोर

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और नशे से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में 13 नई फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। न्याय प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन अदालतों का गठन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की शीघ्र सुनवाई और लंबित मामलों के बोझ को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। राज्य सरकार के मुताबिक फरीदाबाद, गुरुग्राम, पंचकूला, रोहतक, यमुनानगर और फतेहाबाद जिलों में एक-एक अतिरिक्त विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्णय लिया है। वहीं, फतेहाबाद में पहले से स्थापित अदालतों के अतिरिक्त दो नई और सिरसा में छह नई कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया है। इन अदालतों को विशेष रूप से नशा तस्करी, मादक पदार्थों की अवैध बिक्री, परिवहन और संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए अधिकृत किया गया है। राज्य में पहले से ही आठ फास्ट ट्रैक स्थापित हैं। इस प्रकार राज्य में अब कुल 21 अतिरिक्त फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें राज्य में कार्य करेंगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन अदालतों में अपर सत्र न्यायाधीश स्तर के न्यायिक अधिकारियों को विशेष न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह नियुक्तियां पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से की गई हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार राज्य में नशा तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान बड़ी संख्या में एनडीपीएस मामलों का पंजीकरण हुआ है। ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे, आरोपियों को शीघ्र सजा दिलाने व न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। जानकार कहते हैं कि नई अदालतों के गठन से लंबित मामलों का बोझ कम होगा, गवाहों के बयान समय पर दर्ज हो सकेंगे और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत मामलों का तेजी से निपटारा संभव हो सकेगा। इससे राज्य सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को भी मजबूती मिलेगी।  

दिल्ली एयरपोर्ट पर KZF आतंकियों की गिरफ्तारी, पंजाब में बड़े धमाके की साजिश से जुड़े तार

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से दो वांधित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पंजाब पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर प्रतिबंधित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) से जुड़े दो वांछित संचालकों को गिरफ्तार किया। इन्हें मलेशिया से डिपोर्ट किया गया था। अंबाला के गुरविंदर सिंह और पटियाला के मंजीत सिंह नाम के इन दो आरोपियों को डिपोर्ट कराने का काम पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और रॉयल मलेशिया पुलिस की मदद से पूरा किया। उन्हें बुधवार को दिल्ली लाया गया था। पंजाब डीजीपी ने किया पोस्ट पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफार्म पर एक पोस्ट में बताया कि गुरविंदर और मंजीत, KZF समर्थित उस टेरर मॉड्यूल के मलेशिया-स्थित मुख्य सदस्य थे जो पंजाब में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लाइनों समेत रेलवे के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की साजिश में शामिल थे। डी.जी.पी. ने बताया कि ये दोनों के.एफ.जे. से जुड़े एक टेररिस्ट मॉड्यूल से जुड़े थे। पंजाब पुलिस पहले ही इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर चुकी है, जो पंजाब में रेलवे लाइनों पर IED ब्लास्ट में शामिल था, जिसने 23 जनवरी को सरहिंद ब्लास्ट किया था और 27 अप्रैल को पटियाला में धमाके की कोशिश की थी। इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से RPG लॉन्चर, IED, RDX, हैंड ग्रेनेड जैसे खतरनाक हथियार बरामद किए गए थे। गौरव यादव ने आगे कहा कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि मलेशिया से काम कर रहे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स  हैंडलर इस सबके पीछे हैं, जो इस सब की फंडिंग भी कर रहे थे। ये दोनों डिपोर्ट किए गए आरोपी विदेशी अकाउंट के ज़रिए पंजाब में बैठे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स एक्टिविस्ट की 'टेररिस्ट फंडिंग' में अहम भूमिका निभा रहे थे, ताकि पंजाब में टेररिस्ट हमले करके शांति भंग की जा सके। दोनों आरोपियों को पटियाला कोर्ट में पेश किया गया है और पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड हासिल किया गया है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एक्स पर बताया कि इससे पहले, पंजाब पुलिस ने उस टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था जो 23 जनवरी, 2026 को फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद के पास रेलवे फ्रेट कॉरिडोर लाइन पर हुए IED धमाके और 27 अप्रैल, 2026 को पटियाला जिले के शंभू के पास उसी कॉरिडोर पर धमाके की कोशिश के लिए जिम्मेदार था। हथियारों का जखीरा बरामद डीजीपी ने लिखा कि जांच के दौरान, चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में मिलिटेंट हार्डवेयर बरामद किया गया, जिसमें RPG लॉन्चर, IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और गोला-बारूद के साथ हाई-एंड पिस्तौलें शामिल थीं। उन्होंने लिखा,     इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की आगे की जांच में मलेशिया से काम कर रहे KZF हैंडलर्स और फाइनेंशियल फैसिलिटेटर्स (आर्थिक मदद पहुंचाने वालों) की भूमिका का पता चला। डिपोर्ट किए गए आरोपी पंजाब में KZF ऑपरेटिव्स को विदेशी खातों के जरिए टेरर फंड पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते पाए गए, जिससे राज्य में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने और शांति व कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की योजनाओं को बढ़ावा मिला। दोनों आरोपियों को 18 जून, 2026 को पटियाला की सक्षम अदालत में पेश किया गया और आगे की पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। बड़े नेटवर्क का पता लगाने और साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।- गौरव यादव, पंजाब डीजीपी  

MP Weather Update: बारिश से पहले बढ़ी बेचैनी, उमस ने किया बेहाल; मौसम विभाग ने दी अहम चेतावनी

भोपाल  देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोग बड़ी शिद्दत से दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मानसून की प्रगति में एक 'अस्थायी ठहराव' देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 18 जून 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, रांची और मुजफ्फरपुर पर ही टिकी हुई है। आखिर वातावरण में नमी बढ़ने के बावजूद मानसून की रफ्तार क्यों थम गई है और मध्यप्रदेश में इसका क्या असर होने वाला है, आइए विस्तार से समझते हैं। मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों को कवर कर चुकी है और आने वाले 4-5 दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। क्यों थम गई मानसून की रफ्तार? मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून की गति धीमी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी का खामोश होना है। इस समय खाड़ी में कोई मजबूत निम्न दाब क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जो मानसूनी हवाओं को आगे धकेलने के लिए ऊर्जा देता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:     जेट स्ट्रीम का प्रभाव उपोष्ण पश्चिमी जेट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।     प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है और साल के उत्तरार्ध में अल नीनो परिस्थितियां बनने की संभावना है।     वहीं मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल हिंद महासागर में मानसून को सहारा नहीं दे पा रहा है।     सिस्टम की कमी: मध्य भारत में फिलहाल किसी मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है। मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ने पकड़ी भारी रफ्तार भले ही मानसून की आधिकारिक एंट्री में थोड़ा ठहराव आया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में उमस का ग्राफ अचानक बहुत ऊपर चला गया है, जो इस बात का सीधा संकेत है कि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। शाम के समय दर्ज की गई सापेक्षिक आर्द्रता के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं     बैतूल: 90 प्रतिशत     रायसेन: 77 प्रतिशत     पचमढ़ी: 73 प्रतिशत     भोपाल: 64 प्रतिशत खजुराहो-नौगांव में पारा 41 पार, पर तपन हुई कम वातावरण में बादलों और नमी की मौजूदगी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में खजुराहो 41.4°C और नौगांव 41.0°C सबसे गर्म दर्ज किए गए, जबकि पश्चिमी हिस्से में दतिया 41.2°C में तेज गर्मी रही। हालांकि, नमी बढ़ने से रातें अब भी गर्म बनी हुई हैं, जहां खजुराहो में न्यूनतम तापमान 28.0°C और सतना में 27.9°C दर्ज किया गया। शैलेन्द्र कुमार नायक, मौसम, जलवायु एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश? सिवनी: 22.6 मिमी श्योपुर: 20.4 मिमी बैतूल: 16.6 मिमी रीवा: 13.0 मिमी राजगढ़: 13.0 मिमी भोपाल: 14.0 मिमी सतना: 12.0 मिमी सागर: 8.7 मिमी अगले 2 से 3 दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, इसे 'ब्रेक मानसून' कहना गलत होगा, यह सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मध्यप्रदेश में मानसून के स्वागत के लिए माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वर्षा की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या विदर्भ के ऊपर कोई चक्रवाती घेरा मजबूत होगा, मानसून पूरी ताकत से एमपी में दाखिल हो जाएगा। इन जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना समेत कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है।     प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं।     भोपाल सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     अगले 2 दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के आसार।     किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

धुस्सी बांध सड़क परियोजना शुरू, जालंधर के ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत; सीचेवाल ने जताई खुशी

 जालंधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज जालंधर दौरे के दौरान शाहकोट में सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर बनने वाली 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का शिलान्यास किया। गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ेगी। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के लंबे प्रयासों और मान सरकार की इस पहल से बाढ़ प्रभावित इलाके के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। इससे उनकी वर्षों पुरानी मांग भी पूरी हो गई है। बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि इससे लोगों का सफर आसान होगा। भारी सुरक्षा के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को विशेष रूप से जालंधर दौरे पर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। जालंधर में सतलुज नदी के पूरे किनारे को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इसी कड़ी सुरक्षा के बीच उन्होंने शाहकोट पहुंचकर धुस्सी बांध सड़क का शिलान्यास किया। 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण इस प्रोजेक्ट के तहत सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक एक मजबूत और पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क लगभग 35 किलोमीटर लंबी होगी। इसके बनने से पूरे क्षेत्र और आसपास के लोगों की आवाजाही में बड़ा सुधार होगा, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। संत सीचेवाल के प्रयासों की सराहना इस शिलान्यास समारोह के दौरान राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल विशेष रूप से मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए संत सीचेवाल लंबे समय से लगातार प्रयास कर रहे थे। स्थानीय लोग उनके इन प्रयासों को बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। 2023 की बाढ़ के बाद उठी थी मांग सीचेवाल ने इस मौके पर 2023 की पुरानी आपदा को याद करते हुए कहा कि मंडाला छन्ना के पास अचानक धुस्सी बांध टूट गया था। बांध टूटने के कारण पूरे इलाके में बाढ़ आ गई थी, जिससे लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। तभी से बांध को मजबूत करने और उस पर पक्की सड़क बनाने की मांग लगातार उठ रही है। दर्जनों गांवों को मिलेगा सीधा फायदा संत सीचेवाल ने आगे बताया कि गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह पक्की सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में सीधे जोड़ेगी। इससे लोगों का सफर आसान होगा और बांध की मजबूती भी बढ़ेगी। इस इलाके की यह मांग पिछले कई सालों से लंबित थी, जिसे अब भगवंत मान सरकार ने पूरा कर दिया है। पिछली सरकारों के प्रति स्थानीय लोगों में था रोष इस मौके पर मंडाला छन्ना, गट्टा मुंडी कासू, गिदड़पिंडी समेत आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे कई सालों से इस सड़क के निर्माण की मांग कर रहे थे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया। मान सरकार का जताया आभार ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए कहा कि मौजूदा मान सरकार द्वारा इस सड़क का नींव पत्थर रख दिया गया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जिससे क्षेत्रवासियों को वर्षों पुरानी समस्या से निजात मिलेगी और उनका जीवन अधिक सुगम हो जाएगा।  

बिजली उत्पादन में बढ़ेगी दक्षता, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विकसित किया मॉनिटरिंग मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी। 4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है। कैसे होगी निगरानी इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा। क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है। निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।  

सिकंदरा थाना क्षेत्र के रवैय मुसहरी गांव में तनाव, पुलिस ने महिला को भीड़ से बचाकर अस्पताल पहुंचाया

जमुई जमुई जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित रवैय मुसहरी गांव में शुक्रवार सुबह एक युवक की मौत के बाद अंधविश्वास और अफवाहों ने तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। युवक की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने एक महिला को डायन बताकर उसके साथ मारपीट की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा। मृतक की पहचान रवैय मुसहरी निवासी भीम मांझी के 22 वर्षीय पुत्र मुश्क मांझी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार उसकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। महिला को पकड़कर गांव लाए, फिर की मारपीट जानकारी के अनुसार, कुछ ग्रामीणों ने युवक की मौत के लिए एक महिला को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। आरोप है कि ग्रामीण जानसिहडीह गांव निवासी अर्जुन मांझी की पत्नी अनवा देवी को पकड़कर रवैय मुसहरी ले आए और उसके साथ मारपीट की। घटना के दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसी ने मामले की सूचना सिकंदरा थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने महिला को अस्पताल भेजा पुलिस ने महिला को भीड़ से सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है कि मारपीट में महिला को चोटें आई हैं। वहीं ग्रामीणों और मृतक के कुछ परिजनों का आरोप है कि महिला ने मोहल्ले के कई लोगों को पानी पिलाया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौत के कारणों की जांच जारी सिकंदरा थाना पुलिस ने बताया कि युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें और कानून को अपने हाथ में न लें। घटना के बाद गांव में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।