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जल संरक्षण और सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए सरायकेला-खरसावां में नई योजना की शुरुआत

  कुचाई सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत छोटासेगोई पंचायत के कुलाचाकी गांव में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 48 लाख रुपये की लागत से बनने वाले चेकडैम (वीयर) जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया. खरसावां विधायक दशरथ गागराई की धर्मपत्नी और समाजसेवी बासंती गागराई और विधायक प्रतिनिधि अर्जुन उर्फ नायडू गोप ने संयुक्त रूप से शिलापट्ट का अनावरण कर योजना की आधारशिला रखी. चेकडैम से किसानों को मिलेगा लाभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी बासंती गागराई ने कहा कि चेकडैम निर्माण से क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा. राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतार रही है. उन्होंने कहा कि चेकडैम बनने से वर्षा जल का संचयन होगा, जिससे भू-जल स्तर में सुधार आएगा और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसका सीधा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिलेगा तथा खेती-किसानी को नई मजबूती मिलेगी. किसान हित योजनाओं और चेकडैम निर्माण पर जोर विधायक प्रतिनिधि अर्जुन गोप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है. स्थानीय विधायक दशरथ गागराई भी क्षेत्र के विकास के लिए सचेत हैं. इस योजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगी. कृषि को बढ़ावा मिलेगा. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. उन्होंने संवेदक को समय सीमा में पूरी गुणवत्ता के साथ चेक डैम का निर्माण करने को कहा. कार्यक्रम में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए इस मौके पर धर्मेंद्र सिंह मुंडा, सचिव मुन्ना सोय, मुखिया करम सिंह मुंडा, कारू मुंडा, राहुल सोय, नरेश मुंडा, बनवारी लाल सोय, संवेदक राकेश कुमार, पंकज कुमार, नित्यानंद शर्मा, गोवर सिंह मुंडा, जोन मुंडा, गुरूचरण मुंडा, रीसा गागराई, बुधू सोय, दुर्गाचरण गागराई, लखन मुंडा, निरंजन लेंका, कृष्णा हेंब्रम, संजय हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.

रुदौली में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण के दौरान सीएम योगी बोले 15 दिन रुकें, जांच करेगी सच उजागर

लखनऊ राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी की खबरों और एसआईटी जांच के बीच शुक्रवार को पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार बयान दिया। अयोध्या के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे सीएम योगी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से कहा कि आपने राम मंदिर के लिए 500 सालों तक इंतजार किया है। 15 दिन और इंतजार कर लीजिए। ट्रस्ट के कहने पर एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी दूध का दूध पानी का पानी करेगी। कोई अपराधी होगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अयोध्या और रामभक्तों को बदनाम करने की कोशिश न की जाए। सीएम योगी ने 15 दिनों तक किसी तरह की बयानबाजी नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि राम भक्तों और जयश्रीराम का नारा लगाने पर लाठी गोली चलाने वाले आज उपदेश देने चले हैं। कहा कि अयोध्या के बारे में जो समाचार पत्रों में देखने सुनने को मिला। उसके बाद ट्रस्ट के कहने पर हमने एसआईटी जांच बैठाई है। एसआईटी पूरे दूध का दूध पानी का पानी करेगी। कोई सबूत हो तो एसआईटी को दे दें सीएम योगी ने कहा कि जब तक जांच हो रही है कोई भी ऐसी अनर्गल बात न हो जो राम भक्तों की भावना को आहत करती हो। यह भी कहा कि किसी के पास इससे संबंधित दस्तावेजी सबूत हो तो एसआईटी को दे दें वह जांच करेगी। प्रभु श्रीराम ने मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा दी है, ऐसे में सभी को मर्यादा का पालन करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि जांच के बीच बयानबाजी होती है तो जांच प्रभावित करती है। जांच के बाद किसी को कोई बात कहनी होगी तो एसआईटी से कह सकते हैं। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या और श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। यह लोग नहीं चाहेंगे कि अयोध्या को सम्मान मिले। यह लोग अयोध्या को बदनाम करना चाहते हैं। अयोध्या और यहां के लोगों को अपमानित करते हैं। हम इनके बहकावे में कत्तई न आएं। इन लोगों का आचरण पहले से ही सभी के सामने है। राम भक्तों को बदनाम करने वाले बाबर को मानने वाले लोग कहा कि जो लोग रामभक्तों को अपमानित करते थे, अपराधियों के कब्र पर जाकर फातिया पढ़ते थे। जिन लोगों ने अब तक राम जन्मभूमि में दर्शन नहीं किया, अपने विधायकों को भी जाने से रोका, वह लोग बाबर को मानने वाले लोग हैं। उनके ही विधायक मनोज पांडेय ने जब सभी विधायकों को अयोध्या लाने की बात कही तो उन्हें अखिलेश ने फटकार दिया था। मनोज पांडेय को धुतकार कर भगा दिया था। आज मनोज पांडेय हमारी सरकार में मंत्री हैं। अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा कि यह लोग कभी अयोध्या नहीं आए और अयोध्या को बदनाम करने के लिए क्या-क्या कर रहे हैं, इसे देखते रहिए। उन लोगों की सोच कब्रिस्तान और कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने तक ही सीमित रही है। हम लोग अयोध्या के विकास में लगे हैं। आज एक ही विधानसभा में 126 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है। कांग्रेस का दोगला चरित्र कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वह लोग दोगले चरित्र के हैं। उन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर न बनने पाए, इसके लिए एड़ी चोटी का दम लगा दिया था। अयोध्या की पहचान का संकट खड़ा किया था। आज कांग्रेस बोल रही है कि राम भक्तों का अपमान हो गया। जब कांग्रेस कहती थी कि राम है ही नहीं, तब अपमान नहीं होता था? श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करने वाली कांग्रेस आज राम भक्तों के नाम पर मचल रही है।

जेनेवा में भारत ने पाकिस्तान और OIC को घेरा, UNHRC में PoK पर दिया करारा जवाब

 जेनेवा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने पाकिस्तान के सभी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का ये प्रोपेगैंडा उसकी अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश है।  दरअसल, पाकिस्तान ने UNHRC में कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया और जम्मू-कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे।  इसके जवाब में UN में भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा किए गए दावों पलटवार करते हुए कहा, 'भारत को पाकिस्तान और OIC द्वारा हमारे खिलाफ दिए गए बयानों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है. हम पाकिस्तान के बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं और हम OIC द्वारा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ को भी पूरी तरह खारिज करते हैं।  OIC के कोऑर्डिनेटर पद का गलत इस्तेमाल अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान द्वारा OIC कोऑर्डिनेटर की भूमिका का गलत इस्तेमाल केवल उसके इस धोखे को और पुख्ता करता है. भारत की ऐसे किसी भी प्रोपेगैंडा को कोई अहमियत देने की इच्छा नहीं है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों की वापसी है।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का ये झूठा प्रचार उसके अवैध कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे दमन की कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने आने से कभी नहीं छिपा सकता।  भारत ने मानवाधिकार परिषद के सामने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की दयनीय स्थिति को मजबूती से रखा. अनुपमा सिंह ने कहा कि रावलकोट में चल रही त्रासदी, सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की हत्या और वहां की गई बेरहम कार्रवाई उस सिस्टम का नतीजा है जो जबरदस्ती के अवैध कब्जे पर बना है. दशकों से सेना के कब्ज़े, डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग और बुनियादी आजादी से इनकार के कारण वहां के हालात बदतर हो चुके हैं।  'अधिकारों का मांग वालों पर चलाई गोलियां' काउंसिल में बात रखते हुए भारतीय राजनयिक ने कहा कि वहां हालात ऐसे मोड़ पर आ गए हैं, जहां आम जनता द्वारा रोटी, बिजली, अधिकारों और सम्मान की मांग का जवाब गोलियों और बेरहमी से दिया जाता है. एक अवैध और गैर-कानूनी कब्जा सिर्फ ताकत के दम पर ही कायम रखा जा सकता है. उन्होंने पाकिस्तान को एक 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का जीता-जागता उदाहरण बताया जो अपने ही बनाए आतंकवाद से परेशान है।  Pak ने आतंकवाद को बनाया सरकारी नीति अनुपमा सिंह ने कहा कि ये वही देश है, जिसके मौजूदा रक्षा मंत्री आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने और उन्हें तैनात करने की डींगें मारते हैं जो वहां की एक सरकारी नीति है. इसके बावजूद पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है, जो एक बड़ा विरोधाभास है।  सिंधु जल संधि पर भारत का रुख इसके साथ ही उन्होंने सिंधु जल संधि को पुरानी बताते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश सद्भावना और दोस्ती पर आधारित सहयोग की उम्मीद नहीं कर सकता।  जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर, टेक्नोलॉजी में तरक्की और टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत के कारण 1960 में हुई इस संधि की प्रासंगिकता पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है. अंत में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय इलाकों पर नजर रखने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने घर को ठीक करे, क्योंकि इस काउंसिल में उसके दिखावे का आकर्षण खत्म हो चुका है। 

पंजाब में सतलुज सफाई परियोजना को कोर्ट की हरी झंडी, विरोध में उतरी संघर्ष समिति

 रूपनगर  सतलुज नदी पर स्थित अगमपुर पुल के निकट डी-सिल्टिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ताजा आदेशों को लागू करने से पहले विभाग को मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए व कानून और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही कार्य किया जाना चाहिए। जिससे आगामी बरसाती मौसम में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान का सामना न करना पड़े। ये मांग संघर्ष समिति के सदस्यों ने करते हुए कहा कि प्रशासन पहले इस क्षेत्र का सीमांकन कर उसे पूरी तरह स्पष्ट करे और तारबंदी करने के बाद ही डी-सिल्टिंग का कार्य शुरू किया जाए। जिससे कि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। संघर्ष समिति ने यह भी सवाल उठाया कि सतलुज नदी का पानी पुल के पिल्लर नंबर-1 की ओर ही अधिक दबाव के साथ क्यों बह रहा है। क्या इसका कारण पुल के ऊपरी क्षेत्र में पूर्व में हुए अवैध खनन के कारण नदी की प्राकृतिक धारा का बदल जाना है। यदि ऐसा है तो विभाग इस तथ्य को सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है। 30 जून को दी गई थी डी-सिल्टिंग की अनुमति सदस्यों ने करते हुए कहा कि 8 जून को दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश में संशोधन करते हुए हाईकोर्ट ने पुल के पिलर नंबर-1 की मरम्मत व पुल से 35 से 50 मीटर अपस्ट्रीम तक सीमित क्षेत्र में 30 जून 2026 तक डी-सिल्टिंग की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 जून के बाद न्यायालय की अनुमति के बिना किसी प्रकार की डी-सिल्टिंग नहीं की जाएगी। इसके साथ ही रूपनगर के उपायुक्त को स्वयं मौके पर निगरानी रखने, अवैध खनन पर रोक सुनिश्चित करने व अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालती आदेश के बाद संघर्ष समिति ने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार और संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सार्वजनिक करने चाहिए। संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरदेव सिंह माजरी टिब्बा, यशवीर चंद भलाण, पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, एडवोकेट विशाल सैनी, सुरजीत सिंह ढेर, बलवीर सिंह शाहपुर, कीर्ति किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बड़वा, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता धर्मपाल सैनी माजरा व निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुख बाबा अच्छर सिंह महाकाल ने संयुक्त रूप से कहा कि विभाग द्वारा अदालत के समक्ष नए खसरा नंबर प्रस्तुत किए गए हैं। ऐसे में सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाए कि पुल से 35 से 50 मीटर तक डी-सिल्टिंग का वास्तविक क्षेत्र कौन-सा है। 2020 की पीडब्ल्यूडी विभाग की रिपोर्ट पर सरकार ने क्या कार्रवाई की पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने वर्ष 2020 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय स्वयं विभाग ने स्वीकार किया था कि अवैध खनन के कारण पुल के पिलर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे और पुल की सुरक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित करने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस रिपोर्ट के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की, समिति का गठन हुआ या नहीं और पिछले छह वर्षों में पुल की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए। उन्होंने मांग की कि यदि वर्ष 2020 में पिल्लर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे तो वर्ष 2026 में उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही पुल की वर्तमान स्थिति, नदी की जलधारा की दिशा तथा डी-सिल्टिंग के संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी भी जनता के सामने रखी जाए।  

PM मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- उनकी नेतृत्व शैली प्रभावशाली और दृढ़ है

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने शी जिनपिंग को ऐसा नेता बताया जो पूरी तरह अपने काम पर केंद्रित रहते हैं और हर मुद्दे को गंभीरता से संभालते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप ने बेहद सख़्त, निर्णायक और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाला नेता बताया. ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने देशों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि काफी मजबूत है, जिसकी वह व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हैं।  इससे पहले भी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी जमकर प्रशंसा की. लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी जितने शांत स्वभाव के नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के विपरीत, जो शांत, संयमित और बेहद प्रभावशाली हैं, मैं ऐसा नहीं हूं।   भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा "प्रधानमंत्री @narendramodi को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए @POTUS का आमंत्रण साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा!"

कच्चा तेल हुआ सस्ता, लेकिन पेट्रोल-डीजल के भाव जस के तस! 19 जून के ताजा रेट चेक करें

नई दिल्ली कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या अब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होगा? इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने आज  के लिए पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं. आज पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में गाड़ी की टंकी फुल कराने से पहले आइए जानते हैं आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल किस कीमत पर मिल रहा है और क्या कच्चे तेल की गिरती कीमतों का फायदा जल्द ग्राहकों तक पहुंचेगा।  देश के बड़े शहरों में क्या हैं नए रेट? सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी ताजा कीमतों के मुताबिक, आज पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।      दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.     मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.     कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है.     चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है. गुरुग्राम, नोएडा, जयपुर और हैदराबाद में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भुवनेश्वर और लखनऊ में पेट्रोल-डीजल थोड़ा सस्ता हुआ है। कच्चा तेल  79 डॉलर के करीब, एक हफ्ते में 9% की बड़ी गिरावट ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है.पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 9% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक है।  क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? मंत्री ने दिया जवाब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि घरेलू ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं. इसके अलावा परिवहन लागत, बाजार की स्थिति और पहले खरीदे गए कच्चे तेल की लागत जैसे कई अन्य कारक भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।  सुरेश गोपी के मुताबिक, कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लेता है. यह तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत आता है और वहां जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में भी कुछ समय लगेगा. मंत्री ने साफ कहा कि हाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसे केवल इसलिए तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल कुछ सस्ता हुआ है।  सरकार पर पड़ा 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सुरेश गोपी ने कहा कि पश्चिम एशिया में इस साल हुए युद्ध के दौरान ग्लोबल ऑयल मार्केट  में काफी अस्थिरता देखने को मिली, जिसका असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ा.उन्होंने बताया कि बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया. इसके कारण सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।  मंत्री ने यह भी कहा कि ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान किसी भी राज्य सरकार ने अपने टैक्स में कटौती करके राजस्व नहीं छोड़ा. केंद्र सरकार को भी देश चलाना है और तेल कंपनियों को भी वित्तीय रूप से मजबूत बनाए रखना जरूरी है।  देशभर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य, घबराकर  न करें खरीदारी सरकारी तेल कंपनियों ने कहा है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. रिफाइनरियां भी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.फ्यूल की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए तेल सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) लगातार सरप्राइज निरीक्षण कर रहे हैं. नियमों के उल्लंघन पर 14 पेट्रोल पंपों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 598 पेट्रोल पंपों को मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है।  आम लोगों को सलाह दी गई है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।  US-Iran शांति समझौते का क्या पड़ा असर? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता माना जा रहा है.इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हो गई है. यही जलमार्ग दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।  अमेरिका ईरान युद्ध के दौरान ईरान और अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस मार्ग पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।  क्या ग्राहकों को जल्द मिलेगा सस्ते तेल का फायदा? एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर राहत मिल सकती है.हालांकि फिलहाल सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है. इसलिए अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।   

15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश

 जोधपुर जोधपुर समेत राज्य के  कई जिलों में 21 जून को  रीनीट यूजी-2026 परीक्षा होगी। इसी दिन राज्यभर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम होगा। दोनों आयोजन का शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संचालन सुनिश्चित करने  के लिए जोधपुर जिला प्रभारी सचिव भवानी सिंह देथा ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर अटल सेवा केंद्र  में सम्बंधित अधिकारियों की बैठक ली, समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। प्रभ्ज्ञारी सचिव ने बताया कि रीनीट यूजी-2026 परीक्षा जिले के 46 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित होगी, जिसमें 15 हजार 407 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए हैं। प्रभारी सचिव ने परीक्षा के निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कदाचारमुक्त संचालन के लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रश्न पत्रों एवं गोपनीय सामग्री के सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, अभ्यर्थियों के बायोमीट्रिक सत्यापन, दोहरे स्तर की फ्रिस्किंग, परीक्षा केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था तथा सतत निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला कलक्टर आलोक रंजन को जिला स्तरीय समन्वय समिति के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, ड्यूटी मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति एवं उनके प्रशिक्षण, परीक्षा केन्द्रों के आसपास कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा नकल एवं संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने के निर्देश दिए। परीक्षा केन्द्रों के 300 मीटर परिधि क्षेत्र में ई-मित्र, फोटोकॉपी एवं साइबर कैफे सहित संबंधित गतिविधियों पर नियमानुसार नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा।  21 जून को सम्राट अशोक उद्यान में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की तैयारियों की भी प्रभारी सचिव ने समीक्षा की। उन्होंने योग संगम पोर्टल पर अधिकाधिक पंजीकरण करवाकर जनभागीदारी बढ़ाने तथा कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी उपखण्ड अधिकारियों को उपखण्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर योग दिवस कार्यक्रमों का प्रभावी आयोजन सुनिश्चित करने, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं आमजन की सहभागिता बढ़ाने तथा व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यक्रम स्थलों पर माइक, योगा मैट, पेयजल, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित विभागों को पारंपरिक समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रभारी सचिव ने कहा कि योग स्वस्थ जीवनशैली का आधार है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से आमजन को योग को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयास करते हुए दोनों आयोजनों को सफल बनाने का आह्वान किया।

फैमिली आईडी और रिकॉर्ड मिलान के साथ राशन डिपो की स्थिति की होगी जांच, डेटा होगा अपडेट

करनाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने प्रदेशभर में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो का विशेष सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारियों और खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षकों को अगले चार दिनों के भीतर सभी राशन डिपो का रिकॉर्ड सत्यापित कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार से इसकी शुरुआत होगी। सरकार की ओर से इस अभियान का उद्देश्य विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध राशन डिपो से संबंधित जानकारी को पूरी तरह शुद्ध, प्रमाणित और अद्यतन करना है, ताकि भविष्य में सरकारी नीतियां बनाने, योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक निर्णय लेने में सही एवं विश्वसनीय आंकड़ों का उपयोग किया जा सके। प्रदेश भर में राशन के करीब 9081 डिपो हैं। इनमें से करीब 9060 मैप भी किए जा चुके हैं। जबकि जिले में करीब 656 राशन डिपो हैं। इनसे करीब 4.72 लाख लोग राशन ले रहे हैं। अब इन सभी की जांच की जाएगी। फैमिली आईडी का भी होगा मिलान सत्यापन के दौरान प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान यानी डिपो की वर्तमान स्थिति की जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित डिपो वर्तमान में सक्रिय, रद्द, निलंबित (या स्वेच्छा से सरेंडर किया जा चुका है। अगर पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो उसे तत्काल अपडेट किया जाएगा। विभाग ने केवल डिपो की स्थिति की जांच तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रखी है। सत्यापन के दौरान प्रत्येक डिपो धारक की परिवार पहचान पत्र, पीपीपी यानी फैमिली आईडी और उसके परिवार के सदस्यों के विवरण का भी मिलान किया जाएगा। इससे विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी की भी पुष्टि हो सकेगी और भविष्य में किसी प्रकार की विसंगति की संभावना कम होगी। चार चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया विभाग ने सत्यापन के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की है। सबसे पहले संबंधित क्षेत्र का खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक यानी आईएफएस अपने अधिकार क्षेत्र के सभी राशन डिपो का भौतिक एवं रिकॉर्ड सत्यापन करेगा और रिपोर्ट तैयार कर संबंधित सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी यानी एएफएसओ को भेजेगा। इसके बाद एएफएसओ रिपोर्ट की जांच कर अपनी टिप्पणियां दर्ज करेगा और उसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के पास भेजेगा। डीएफएससी पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद रिकॉर्ड को स्वीकृत या अस्वीकृत करेगा। जिन रिकॉर्ड को मंजूरी मिलेगी, उन्हें विभाग का क्लीन और प्रमाणित डेटा माना जाएगा, जबकि जिन मामलों में कोई त्रुटि मिलेगी, उन्हें दोबारा सत्यापन के लिए संबंधित निरीक्षक के पास भेज दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अगले चार दिनों के भीतर सत्यापन, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर लें। विभाग का मानना है कि शुद्ध और प्रमाणित डेटा उपलब्ध होने से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड अपडेट रहेगा और भविष्य में योजनाओं के बेहतर संचालन तथा नीतिगत निर्णय लेने में आसानी होगी। -मुकेश कुमार, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, करनाल।  

इजरायल में ट्रंप की लोकप्रियता को झटका, सिर्फ 11% लोगों ने माना युद्ध का विजेता

यरुशलम मिडिल-ईस्ट में हालिया संघर्ष के बाद सामने आए एक इजरायली चैनल के सर्वे ने वहां की राजनीति और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चैनल 12 के सर्वे के मुताबिक, बड़ी तादाद में इजरायली नागरिक न तो इस जंग में अपने देश को स्पष्ट विजेता मानते हैं और न ही उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है कि वे ईरान के साथ किसी समझौते में इजरायल के हितों की रक्षा करेंगे।  सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिससे इजरायल की घरेलू राजनीति में बढ़ती असंतुष्टि के संकेत मिले हैं।  गुरुवार को पब्लिश हुए एक टेलीविज़न पोल में पाया गया कि बहुत कम इजरायली मानते हैं कि उनका देश ईरान के साथ हुई लड़ाई जीता है, या उन्हें भरोसा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामिक रिपब्लिक के साथ डील करते वक्त उनके हितों का ध्यान रखेंगे। . नेतन्याहू के बर्ताव पर सवाल! चैनल 12 न्यूज़ के मुताबिक, ज़्यादातर इजरायली नागरिकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायल के हितों को नुकसान पहुंचा है. ये आंकड़े उस मजबूत समर्थन से बिल्कुल अलग हैं, जो इजरायली लोग सालों से हर पोल में ट्रंप को देते आए हैं।   हालांकि, अब इस हफ्ते साइन किए गए US-ईरान मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की शर्तों को लेकर पूरे इजरायल में गहरी चिंता है, जबकि ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दोनों की तरफ से हाल ही में इजरायली अधिकारियों की कड़ी सार्वजनिक आलोचना से US-इजरायल संबंधों में दरार का संकेत मिलता है।  चैनल 12 के पोल में यह पूछा गया कि क्या नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायली हितों को फायदा हुआ या नुकसान; इसमें पाया गया कि 52% लोगों का कहना है कि इससे नुकसान हुआ, जबकि 24% को लगता है कि इससे मदद मिली और बाकी 24% को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।  यह पूछे जाने पर कि क्या वे ईरान के साथ समझौते में इजरायली हितों का ध्यान रखने के लिए ट्रंप पर भरोसा करते हैं? इस पर 71% लोगों ने कहा कि वे ऐसा नहीं करते हैं, जबकि केवल 13% ने कहा कि वे ऐसा करते हैं और अन्य 16% को नहीं पता. ये संख्या पिछले हफ्ते से इस सवाल पर ट्रंप के लिए गिरावट का संकेत देती हैं, जब आंकड़ा 62% से 21% था।  इन सवालों को एक सर्वे के हिस्से के रूप में शामिल किया गया था कि अगर अक्टूबर में आम चुनाव आज होते हैं, तो इजरायल के लोग किसको वोट देंगे, जिसमें दिखाया गया है कि जायोनी विपक्षी दल नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों की तुलना में ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के बहुमत से कम रहेंगे।  ‘बिबी का समर्थन करने की सबसे ज्यादा संभावना’ ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच मौजूदा मतभेद को और साफ करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि वे आने वाले चुनावों में नेतन्याहू का समर्थन 'शायद' करेंगे, लेकिन पहले यह देखना चाहते हैं कि उनके खिलाफ और कौन चुनाव लड़ रहा है।  ट्रंप ने 'कान' (Kan) पब्लिक ब्रॉडकास्टर को फोन पर दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू के निकनेम का इस्तेमाल करते हुए कहा, "मुझे देखना होगा कि कौन चुनाव लड़ रहा है, लेकिन मुझे बिबी बहुत पसंद हैं. सबसे ज्यादा संभावना यही है कि मैं उनका समर्थन करूंगा।  ट्रंप ने आगे कहा, "वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा और समझदारी से काम लेना चाहिए." ऐसा लगता है कि वे लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमलों का जिक्र कर रहे थे, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि वे बिना सोचे-समझे किए गए थे।   

लखनऊ से झांसी तक बेहतर सड़क संपर्क, औद्योगिक विकास और निवेश को मिलेगी रफ्तार

लखनऊ झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारे और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए 106 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा। परियोजना से क्षेत्र में निवेश, रोजगार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारे और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए 106 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा। परियोजना से क्षेत्र में निवेश, रोजगार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारा और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास क्षेत्र (बीडा) से बेहतर कनेक्टिविटी देगी। इससे झांसी, जालौन और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क संपर्कता मजबूत होगी। झांसी सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ जाएगी। दिल्ली, लखनऊ, आगरा और पूर्वांचल की ओर आवागमन आसान हो जाएगा। यूपीडा के निविदा दस्तावेजों के अनुसार, पहला खंड 50 किलोमीटर लंबा होगा।   यह जालौन जिले के फूलपुरा के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के चेनज 170+300 से शुरू होकर झांसी जिले के पिपरा गांव तक जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 2262.28 करोड़ रुपये है। दूसरा खंड 56.3 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी अनुमानित लागत 2,739.46 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। पिछले वर्ष ड्रोन सर्वे के दौरान 63 गांवों को चिह्नित किया गया था। परियोजना का महत्व यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा। मालवहन और कृषि उत्पादों के परिवहन में भी सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण और रक्षा औद्योगिक गलियारे को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा।   लागत और अन्य एक्सप्रेसवे से तुलना झांसी लिंक एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत करीब 47.05 करोड़ रुपये है। प्रति किलोमीटर लागत के हिसाब से यह उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे महंगा एक्सप्रेसवे है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पहले स्थान पर है, जिसकी प्रति किलोमीटर लागत करीब 64 करोड़ रुपये है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत लगभग 50 करोड़ रुपये है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत 33.9 करोड़ रुपये है।