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हरियाणा के 5 जिलों को NCR से बाहर करने की अटकलों पर विराम, CM सैनी ने रखा रोडमैप

चंडीगढ़. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं अहम बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई। केंद्रीय विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के भविष्य के विकास और ढांचागत योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सीएम सैनी ने दी जानकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि बैठक में लिए गए एक बड़े फैसले के तहत अब दिल्ली एनसीआर (NCR) का दायरे में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी पांच राज्य एनसीआर से बाहर नहीं जाएंगे। सीएम सैनी ने स्पष्ट किया कि आज की बैठक के निर्णयों के तहत, हरियाणा के एनसीआर (NCR) क्षेत्र में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को किया जाएगा विभाजित हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा एनसीआर क्षेत्र के हरियाणा से जुड़े जिलों में कई बदलाव नहीं हुआ है। इसे लेकर चर्चा जरूरी की गई है। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को विभाजित किया जाएगा। अरावली संरक्षण पर और जोर देते हुए परिवहन सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। बी-6 वाहनों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मेट्रो तथा नमो भारत के विस्तार पर भविष्य में बढ़ती आबादी को देखते हुए जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। बैठक केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुई। सीएम ने रेखा गुप्ता को किया सम्मानित बैठक के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सम्मानित किया और उनका आभार जताया। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण रही, जहाँ उन्होंने दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों के विकास को लेकर अपने सुझाव रखे।

एजुकेशन समिट में राज्यपाल का संबोधन, नई शिक्षा नीति को बताया भारत की पहचान

जयपुर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा ही ज्ञान का बड़ा आधार है। इसके जरिए भारत को विश्वभर में श्रेष्ठ बनाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के टेलेंट की दुनिया भर में मांग है। उन्होंने बच्चों की बौद्धिक क्षमता विशिष्ट क्षेत्रों में विकसित किए जाने पर जोर दिया। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान के आलोक में विकसित भारत के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में बच्चों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कार निर्माण के लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता जताई। राज्यपाल श्री बागडे मंगलवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित "एजुकेशन समिट" में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से विकास को सही मायने में गति दी जा सकती है। संवाद से सुसंवाद होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो आविष्कार हुए, उनका श्रेय पश्चिम ने ले लिया। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहला विमान मुंबई के संस्कृत विद्वान शिवकर बापूजी तलपड़े ने उड़ाया परंतु श्रेय राइट बंधुओं को मिला। इसी तरह गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भास्कराचार्य था, दुनिया में न्यूटन प्रसिद्ध हुए। उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान का नई पीढ़ी में प्रसार किए जाने पर जोर दिया राज्यपाल ने कहा कि विश्व में जब कहीं विश्वविद्यालय नहीं था, तब भारत में 19 विश्वविद्यालय थे। उन्होंने कहा कि ईस्वी सन 725 में रावल पिंडी में तक्षशिला विश्वविद्यालय विश्व का श्रेष्ठ शिक्षा केंद्र था। राज्यपाल ने बप्पा रावल की महानता की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अरबों को भारत से खदेड़ा। उनके नाम से ही बाद में पाकिस्तान का रावल पिंडी स्थान हुआ। उन्होंने कहा कि गुरुकुल पद्धति भारत की श्रेष्ठ शिक्षा पद्धति रही है। गुरुकुल में किसी एक विषय का नहीं सभी विषयों का ज्ञान दिया जाता था। उन्होंने "गुरुकुल गए रघुराई अल्प काल में शिक्षा पाई" चौपाई की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान राम ने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की, इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम बने। राज्यपाल ने प्राचीन ज्ञान परम्परा की चर्चा करते हुए कहा कि विश्व को शून्य का ज्ञान भारत ने दिया। उसी से पूरी दुनिया को गिनती करना आया।  दशमलव का ज्ञान, व्याकरण आदि से भारत ने ही विश्व को शिक्षा दी। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया की चर्चा करते हुए कहा कि मैक्समूलर ने उसमें लिखा है कि महाभारत और रामायण जैसे दो अद्भुत ग्रन्थ भारत ने विश्व को दिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान, आज का बर्मा, श्रीलंका, कंबोडिया, गांधार आदि प्राचीन भारत में ही थे। कश्मीर का शारदा पीठ देश में ज्ञान का बहुत बड़ा केंद्र था। बागडे ने विनोबा भावे के कहे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आजाद होने के साथ ही जैसे अंग्रेजों का झंडा उतारा गया और बदला गया उसी तरह देश की शिक्षा नीति बदली जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति हमें दी उसका मूल आधार ही यही था कि अंग्रेजी के ज्ञान के साथ पश्चिम को श्रेष्ठ  साबित किया जाए। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि घरेलू उद्योग बंद किए जाएं, ताकि भारत के लोग भूखे रहे और सदा अंग्रेजों पर आश्रित रहे और गुलाम बने रहे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीयता के मूल्यों में गूंथी हुई है। इसके आलोक में देश को हर क्षेत्र में अग्रणी करने के प्रयास किए जाएं इससे पहले राज्यपाल ने वहां शैक्षिक उन्नयन और कौशल शिक्षा से जुड़े विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया।

रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में आधुनिक अधोसंरचना विकसित करने की तैयारी

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की रिडेवलपमेंट नीति के तहत राज्य के विभिन्न शहरों में पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं का टेंडर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जारी कर दिया गया है। शहरी विकास, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। राज्य शासन ने इन परियोजनाओं के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी है। मंडल द्वारा परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन हेतु पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई है। 30 जून 2025 को मंत्रिपरिषद ने इन परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद 27 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप पर विस्तृत चर्चा कर अनुमोदन दिया गया। इन परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार इनकी अनुमानित कीमत लगभग 250.30 करोड़ रुपये है। योजनाएं रायपुर के बीटीआई रोड शंकर नगर, महासमुंद के क्लब पारा, राजनांदगांव के कैलाश नगर, कोरबा के कटघोरा तथा जगदलपुर के चांदनी चौक फेज-2 क्षेत्र में विकसित की जाएंगी। राजधानी रायपुर की शंकर नगर स्थित परियोजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। बीटीआई ग्राउंड और सिंधु भवन के समीप स्थित यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक एवं आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार होगा और शासकीय परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत जर्जर और अनुपयोगी सरकारी परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही वित्तीय संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे सरकारी भूमि का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रिडेवलपमेंट नीति के माध्यम से अनुपयोगी और जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक एवं उपयोगी अधोसंरचना में बदला जाएगा, जिससे शहरों की कार्यक्षमता और सौंदर्य दोनों में वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में रिडेवलपमेंट की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास हैं। विशेष रूप से शंकर नगर स्थित परियोजना राजधानी रायपुर के लिए आदर्श शहरी विकास मॉडल साबित होगी। मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने टीएल बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अगले चरण की 8 नई रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। इससे राज्य में शहरी अधोसंरचना विकास की प्रक्रिया को और गति मिलने की संभावना है।

लुधियाना के नए निगम कमिश्नर का एक्शन मोड, चार्ज लेते ही शहर की सड़कों पर पहुंचे

लुधियाना. नगर निगम लुधियाना के नए कमिश्नर ओजस्वी ने कार्यभार संभालने के अगले ही दिन एक्शन मोड अपनाते हुए मंगलवार सुबह शहर का दौरा किया। पंजाब सरकार की 'मिशन क्लीन' मुहिम के तहत उन्होंने निगम अधिकारियों के साथ विभिन्न इलाकों का निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था, सीवरेज, पेयजल लीकेज और टूटी सड़कों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर केवल मुख्य सड़कों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि मोहल्लों की अंदरूनी गलियों में भी पहुंचे। उन्होंने सीवरेज ओवरफ्लो, पानी की लीकेज, सड़कों पर गड्ढों और सफाई व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में सफाई व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि सोमवार को कार्यभार संभालने के बाद कमिश्नर ओजस्वी ने नगर निगम के अधिकारियों और शहर के तीनों मेयरों के साथ बैठक की थी। बैठक में शहर की प्राथमिक समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यभार संभालते समय ही कमिश्नर ने कहा था कि उनकी पहली प्राथमिकता शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना होगी। इसी दिशा में उन्होंने मंगलवार सुबह स्वयं फील्ड में उतरकर ग्राउंड जीरो पर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम में मेगा आई कैंप, विशेषज्ञ डॉक्टर कर रहे मोतियाबिंद और रेटिना उपचार

रांची जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना ने मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम में ‘दृष्टि 2026’ मेगा नेत्र चिकित्सा शिविर का शुभारंभ किया है. 16 से 19 जून तक आयोजित इस चार दिवसीय शिविर के माध्यम से झारखंड के लोगों को अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. शिविर का उद्घाटन सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, महानिदेशक सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाएं (DGAFMS) द्वारा किया गया. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम दे रही सेवा नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों की टीम पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रांची एवं आसपास के जिलों से आए नागरिकों को परामर्श, जांच और उन्नत उपचार दे रही है. शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन, ग्लूकोमा उपचार और रेटिना संबंधी रोगों के लिए एंटी-VEGF इंजेक्शन जैसी विशेष सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो आंखों की रोशनी सुधारने और अंधापन रोकने की संभावना को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. सेना की पहल से राहत विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को सीधे रांची तक पहुंचाकर भारतीय सेना ने लोगों को महानगरों में इलाज के लिए होने वाली लंबी और खर्चीली यात्राओं से राहत दी है. उद्घाटन समारोह में डीजीएएफएमएस ने पूर्वी कमान, मिलिट्री हॉस्पिटल नामकुम और विशेषज्ञ चिकित्सा टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.   बड़ी संख्या में लाभार्थी पहुंचे पहले ही दिन बड़ी संख्या में लोग शिविर में पहुंचे, जिससे इसकी जरूरत और महत्व साफ दिख गया. ‘दृष्टि 2026’ भारतीय सेना की उस सेवा भावना का सशक्त उदाहरण है, जो सीमाओं की सुरक्षा से आगे बढ़कर समाज के जरूरतमंद लोगों तक आशा, उपचार और बेहतर जीवन का संदेश पहुंचाती है.

DMF मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, कारोबारी शाश्वत लुणावत समेत कई ठिकानों पर दबिश

रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को ईडी ने एक साथ छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ईडी की टीमों ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर दबिश दी है। प्रदेशभर में करीब नौ ठिकानों पर छापेमारी की चर्चा है। कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की दबिश राजधानी रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की टीम ने सुबह से जांच शुरू की। जानकारी के अनुसार पांच अधिकारियों की टीम कई घंटों से घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई DMF घोटाले से जुड़े पहलुओं की जांच के तहत की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि शाश्वत लुणावत प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़े हैं और राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार संचालित करते हैं। ईडी की जांच केवल उनके निवास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की कार्रवाई जारी है। हालांकि ईडी की ओर से फिलहाल आधिकारिक रूप से कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रदेशभर में चल रही इस बड़ी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

मध्यप्रदेश बना देश का पहला नक्सलमुक्त राज्य, प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना: CM डॉ. यादव

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश ने ही नक्सलवाद को समाप्त किया है। लाल सलाम को आखिरी सलाम करने में मध्यप्रदेश ने बाजी मारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जून को नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के विकास के हर मामले में सदैव अग्रणी रहने की क्रियाशीलता की सराहना की। इस वर्ष बैठक का विषय "विकसित भारत @2047 के लिये समावेशी मानव विकास" था। पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद् की बैठक में भाग लिया। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई। देश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज करने पर चर्चा हुई। भविष्य में युवाओं के विकास पर सरकार का विशेष रूप से जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी को मध्यप्रदेश आयुष्मान योजना, नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन, पीएम मित्र पार्क निर्माण सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह मप्र सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में मिली विशेष उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में हो रहे उच्च कोटि के कामों की भी प्रशंसा की है। समान नागरिक संहिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों मांगे जा रहें है। अच्छी नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाये जायें। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित किये गये हैं। समान नागरिक संहिता की वेबसाइट (ucc.mp.gov.in) पर सुझाव देने की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में समान नागरिक संहिता के संबंध में और उसमें सुझाव देने के लिये अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस – स्वस्थ आयु के लिये योग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को प्रदेश में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी। विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग अपना चुके है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग दिवस की थीम 'स्वस्थ आयु के लिये योग' रखी गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए निर्धारित गतिविधियों का प्रदेश में अक्षरश: पालन किया जाएगा। एमपी टूरिज्म को मिला "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार" मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित '10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स (EEA) 2026' में "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार" प्राप्त हुआ है। एमपी टूरिज्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। इसे देश के इवेंट, एक्जीबिशन और माइस (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग एंड एक्जीबिशन) सेक्टर के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। पर्यटन निगम को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में 20 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और राज्य महत्व के बड़े सम्मेलनों के सफल एवं बेहतरीन प्रबंधन के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी। प्रदेश को मिला उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गत 15 जून को गोवा में ग्लोबल विंड डे – 2026 पर मध्यप्रदेश को उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान प्रदान किया है। हमारा मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में से है और हम प्रदेश में इस दिशा में लगातार काम कर रहें है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को यह केंद्रीय सम्मान प्राप्त होने पर विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी। प्रदेश में स्थापित होगा सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को जानकारी दी कि गत 15 जून को भोपाल में सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिये कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। प्रदेश में सायबर सुरक्षा के लिये एक सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में यह ठोस कदम है। यह सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। एमएसएमई यूनिट्स को प्रोत्साहन राशि का वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 14 जून को सिंगल क्लिक से प्रदेश की 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया है। इसमें 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को 2 करोड़ 2 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को 1 करोड़ 7 लाख रुपये मण्डी शुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों को विद्युत टैरिफ के रूप में 3 करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण भी किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी इस दौरान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक परिदृश्य बदलने के लिये कृत संकल्पित है और इस क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बड़े उद्योगों के अलावा हमारा पूरा ध्यान एमएसएमई की ओर भी है, जिनका प्रदेश के औद्योगिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।  

ट्रंप और ईरान समझौते पर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स बोले- यह इज्जत बचाने की रणनीति हो सकती है

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते को लेकर तरह-तरह की चर्चा है. इस बीच वेस्ट एशिया मामलों के एक्सपर्ट इसे अलग नजरिये से देखते हैं. उनका मानना है कि यह डील महज जंग से पहले की स्थिति पर वापसी भर है. आने वाले 60 दिन यह तय करेंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन उद्देश्यों को हासिल कर पाते हैं या नहीं, जिनके नाम पर उन्होंने ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था।  क्या है समझौते का मुख्य उद्देश्य? वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के मिडिल ईस्ट प्रोग्राम के वरिष्ठ फेलो विल टॉडमैन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि शुरुआती समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच दुश्मनी को खत्म करना, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है. उनके अनुसार यह समझौता मूल रूप से हालात को उसी स्थिति में वापस ले जाता है, जहां वे अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से पहले थे।  टॉडमैन ने कहा, 'अमेरिका अब तक उनमें से एक भी उद्देश्य या लक्ष्य नहीं पा सका, जिनका ऐलान उसने जंग के शुरू करने से पहले किया था.' उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद बनी परिस्थितियां बताती हैं कि इस मिलिट्री ऑपरेशन से अमेरिका को जैसी अपेक्षा थी, वैसी रणनीतिक सफलता हासिल नहीं हुई है।  दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को होर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमति बनी. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है. इस मार्ग के खुलने से ग्लोबल एनर्जी बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है और तेल आपूर्ति नॉर्मल होने का रास्ता साफ हो सकता है. हालांकि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं. ईरान ने संकेत दिया है कि समझौते को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया हस्ताक्षर समारोह के बाद शुरू होगी।  60 दिन तक बातचीत के बाद खुलेगी समझौते की राह बातचीत में मिडिएटर की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के अनुसार यह हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जा सकता है. समझौते में एक महत्वपूर्ण प्रावधान 60 दिनों की वार्ता अवधि (बातचीत के लिए 60 दिनों का समय) भी है. इस दौरान ईरान के एनरिच (हाई लेवल पर संवर्धित) यूरेनियम के भंडार और उसके परमाणु प्रोग्राम से जुड़े विवादित मुद्दों पर बातचीत होगी. यही वह स्टेप होगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कितनी प्रभावी शर्तें लागू करा पाते हैं।  खाड़ी देशों से संबंधों में नुकसान टॉडमैन का कहना है कि तीन महीने से अधिक चले इस युद्ध ने अमेरिका के पश्चिम एशियाई सहयोगियों के साथ संबंधों को भी नुकसान पहुंचाया है. उनके मुताबिक खाड़ी के कई अरब देशों को महसूस हुआ कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।  उन्होंने कहा, 'अरब खाड़ी देशों को लगता है कि अमेरिका ने उन्हें अकेला छोड़ दिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान निर्णय लेते समय उनके हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया.' टॉडमैन के अनुसार इसका परिणाम यह हो सकता है कि खाड़ी देश अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों के साथ भी रणनीतिक साझेदारियां विकसित करें।  विशेषज्ञ का मानना है कि अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच बना विश्वास का संकट जल्दी दूर होने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन या भविष्य की कोई भी अमेरिकी सरकार इस भरोसे की कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक पूंजी खर्च करने के लिए तैयार नहीं दिखती।  इस जंग से अमेरिका और इजरायल के बीच भी पनपे मतभेद ऐसे में आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के संबंध धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकते हैं. टॉडमैन ने यह भी कहा कि इस युद्ध ने अमेरिका और इजरायल के बीच भी एक असामान्य प्रकार का मतभेद पैदा कर दिया है. उनके अनुसार इजरायली सरकार को आशंका है कि मौजूदा समझौता ईरान से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं करता और भविष्य में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को भी सीमित कर सकता है।  उन्होंने कहा, 'इजरायल का मानना है कि समझौता ईरान के खतरे को पूरी तरह बेअसर नहीं बनाता. इसके अलावा इजरायल को लगता है कि लेबनान में उसका अभियान अभी अधूरा है.' लेकिन दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि लेबनान में संघर्ष आगे न बढ़े, क्योंकि इससे ईरान के साथ हुआ समझौता खतरे में पड़ सकता है।  विशेषज्ञ के अनुसार युद्ध का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा. इससे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच भी दूरी बढ़ी है. यूरोप के कई देशों ने युद्ध का समर्थन नहीं किया था और उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया था।  टॉडमैन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नाटो की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि गठबंधन ने युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया. उनके मुताबिक यह विवाद ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल युद्धविराम और होरमुज का खुलना एक पॉजिटिव संकेत है, लेकिन असली चुनौती अगले 60 दिनों की बातचीत में होगी।  अगर परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम भंडार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तो यह समझौता केवल अस्थायी राहत साबित हो सकता है. ऐसे में आने वाले दो महीने न सिर्फ अमेरिका और ईरान, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।   

रात में होने वाले विवाह समारोहों पर कथावाचक देवकीनंदन की आपत्ति, सनातन बोर्ड गठन की पैरवी

भोपाल  कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह, शादियों में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति, मंदिरों के प्रबंधन और राम मंदिर दान पात्र विवाद जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार समय का विभाजन देवताओं, पितरों और दैत्यों के समय में किया गया है। रात का समय दैत्यों का माना जाता है, इसलिए हिंदू समाज को रात में विवाह करने से बचना चाहिए। दैत्यों के समय में विवाह करके दैवीय और आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय परंपरा में 'गोधूलि बेला' को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय माना जाता था। उस समय विवाह के सभी प्रमुख संस्कार और फेरे दिन में ही संपन्न होते थे। मुगल आक्रांताओं के दौर में जब बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर खतरा मंडराने लगा था, तब मजबूरी और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों ने रात के समय छिपकर विवाह करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह एक परंपरा का रूप बन गई। देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और वैसा कोई खतरा नहीं है, इसलिए समाज को शोर-शराबे और अनावश्यक दिखावे से दूर रहकर फिर से दिन में विवाह करने की पवित्र परंपरा की ओर लौटना चाहिए। शादियों में मद्यपान के सेवन को लेकर भी देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। ऐसे पवित्र अवसर पर मद्यपान करना अत्यंत दूषित विषय है। इसका नकारात्मक प्रभाव केवल परिवार पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के जीवन पर भी पड़ता है। विवाह को जितना अधिक पवित्र रखा जाएगा, समाज उतना ही स्वस्थ और संस्कारित बनेगा। उन्होंने राम मंदिर दान पात्र विवाद पर बोलते हुए शास्त्रों का जिक्र किया और कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करता है, उसे 60 हजार वर्षों तक विष्ठा (मल) का कीड़ा बनकर कष्ट भोगना पड़ता है। यदि लोगों को इस बात का वास्तविक ज्ञान हो जाए तो कोई भी मंदिर का एक रुपया तक चुराने की हिम्मत नहीं करेगा। मंदिरों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने 'सनातन बोर्ड' के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संचालन धर्म के जानकार, मर्मज्ञ और धर्मनिष्ठ लोगों के हाथों में होना चाहिए। इस बोर्ड का अध्यक्ष चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बनाया जाना चाहिए, ताकि सनातन धर्म और धार्मिक संस्थाओं का संचालन सही दिशा में हो सके। 'फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं' न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अदालतों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि फैसला आने से पहले ही आरोपी की हार्ट अटैक से मौत हो जाए और भगवान राम अपनी दक्षिणा की प्रतीक्षा करते रह जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने श्रीराम की मर्यादा का उल्लंघन किया है और गलती की है, उनसे तुरंत धन वापस लिया जाना चाहिए। मामले को वर्षों तक अदालतों में घसीटने से बेहतर है कि दोषियों को तत्काल उनके पदों से हटाया जाए। 

हरियाणा राजनीति में बढ़ी नजदीकियां, सीएम आवास पर बिश्नोई परिवार के साथ डिनर

 पंचकूला हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई के परिवार के बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं। सोमवार रात को बिश्नोई परिवार ने मुख्यमंत्री आवास पर सीएम सैनी के साथ डिनर किया। खास बात यह है कि पिछले महज 15 दिनों के भीतर दोनों पक्षों के बीच यह तीसरी बड़ी मुलाकात है। इस मुलाकात की तस्वीरें खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने सोशल मीडिया (X) अकाउंट पर शेयर की हैं। मुख्यमंत्री आवास पर जुटे दोनों परिवार यह अनौपचारिक बैठक चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई। सीएम नायब सिंह सैनी और उनकी पत्नी सुमन सैनी ने बिश्नोई परिवार का स्वागत किया। डिनर के इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई, उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई और उनके बेटे व भाजपा विधायक भव्य बिश्नोई मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक रणधीर पनहार (पिराह) भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। किस बात से नाराज थे बिश्नोई भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा उनके पिता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण नाराज थे। सीएम सैनी ने की तारीफ मुख्यमंत्री ने कहा कि चौधरी भजनलाल की कार्यशैली हमेशा जनहित और विकास केंद्रित रही। चौधरी भजनलाल हमारे लिए बहुत सम्मानित हैं। हम सब उनका बहुत सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान को बीजेपी की ओर से बिश्नोई समाज को सकारात्मक संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। रेखा शर्मा ने जताया खेद इसी कड़ी में सांसद रेखा शर्मा ने भी अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनका वक्तव्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में दिया गया था वापस कांग्रेस ज्वाइन करने की कयासें चार साल पहले बीजेपी में शामिल हुए स्व. भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई भाजपा से अलग राजनीति करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार करने लगे थे। हिसार व भिवानी से सांसद रह चुके कुलदीप बिश्नोई ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि भाजपा अपनी पार्टी की राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा से माफी नहीं मंगवाती तो उनके पास राजनीति करने के तीन बड़े विकल्प मौजूद हैं। बता दें कि कुलदीप बिश्नोई राहुल गांधी के भी खास माने जाते थे।