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डैमेज बालों के लिए दही और शहद से नेचुरल हेयर मास्क

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पॉल्यूशन और केमिकल लोडेड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते-करते हमारे बाल बेजान और ड्राई हो जाते हैं. जब बाल डैमेज हो जाते हैं तो रिपेयर करने के लिए अक्सर हम महंगे ट्रीटमेंट लेते हैं या फिर हेयर स्पा का सहारा लेते हैं. अगर आपके बाल डैमेज हो चुके हैं और आप इन्हें नेचुरल तरीके से रिपेयर करना चाहते हैं, तो इसके लिए जितनी भी जरूरी चीजें चाहिए वे आपके किचन में ही मौजूद हैं. जब आप इन चीजों का इस्तेमाल करके हेयर मास्क बनाते हैं तो इससे आपके बालों को डीप नरिशमेंट मिलती है और वे पहले से काफी ज्यादा हेल्दी भी लगने लगते हैं. तो चलिए जानते हैं ऐसी कुछ चीजों के बारे में जिनका इस्तेमाल करके आप काफी आसानी से और मिनटों में ही एक असरदार हेयर मास्क तैयार कर सकते हैं. ड्राई बालों के लिए दही और शहद का मास्क अगर आपके बाल बहुत ज्यादा ड्राई और बेजान हो गए हैं, तो दही और शहद का मास्क आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है. दही में लैक्टिक एसिड होता है जो स्कैल्प को साफ करता है, जबकि शहद एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है जो बालों की मॉइस्चर को एब्जॉर्ब करके उन्हें सॉफ्ट बनाता है. इस मास्क को बनाने के लिए आधा कप फ्रेश दही लें और उसमें दो चम्मच शहद मिला लें. अब इन दोनों ही चीजों को अच्छी तरह मिक्स करके पेस्ट बना लें. अब इसे अपने स्कैल्प से लेकर बालों की पूरी लंबाई तक लगाएं. इसे करीबन 30 मिनट तक इसे लगा रहने दें और फिर किसी माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें. हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करने से बाल बेहद सॉफ्ट और शाइनी हो जाते हैं. मजबूत बालों के लिए अंडा और ऑलिव ऑयल अगर आप बालों के टूटने और झड़ने की समस्या से परेशान हैं, तो ऐसे में आपको अंडे और ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करके एक हेयर मास्क तैयार कर लेना चाहिए. अंडे में प्रोटीन की मात्रा बहुत ही ज्यादा पायी जाती है, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है. वहीं, ऑलिव ऑयल आपके बालों को अंदर से न्यूट्रिशन देता है. इसे बनाने के लिए एक कटोरी में एक अंडा तोड़ें और फिर इसमें दो चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाएं. इस मिश्रण को अच्छी तरह फेंट लें और फिर इसे अपने बालों में लगाएं और 20 से 25 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद बालों को ठंडे पानी और शैंपू से धो लें. इस बात का ख्याल रखें कि अंडा लगाने के बाद कभी भी गर्म पानी का इस्तेमाल न करें, नहीं तो अंडे की महक बालों से नहीं जाएगी. शाइनी और स्मूद बालों के लिए केला और नारियल तेल अगर आपको मालूम नहीं है तो बता दें पके हुए केले में आपको भरपूर मात्रा में पोटैशियम, नेचुरल ऑयल और विटामिन्स मिल जाते हैं, जो आपके बालों के ड्राइनेस को दूर करके उन्हें सिल्की बनाते है. नारियल तेल बालों को न्यूट्रिशन देकर उन्हें टूटने से बचाता है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए एक पका हुआ केला लें और उसे अच्छी तरह मैश कर लें ताकि उसमें कोई गांठ न रहे. अब इसमें एक से दो चम्मच नारियल का तेल मिलाएं. इस पेस्ट को अपने बालों पर लगाएं और कम से कम 30 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर नॉर्मल पानी से ही अपने बालों को अच्छी तरह से धो लें. यह मास्क नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है और बालों को गजब की शाइन देता है.

भारत ने अफगानिस्तान को हराया, लेकिन चर्चा में रहा रोहित-गिल का रनआउट मोमेंट

धर्मशाला भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ धर्मशाला वनडे में भले ही सात विकेट से आसान जीत दर्ज कर ली हो, लेकिन मैच के बाद सबसे ज्यादा चर्चा रोहित शर्मा के रन आउट और उस पर कप्तान शुभमन गिल के रिएक्शन की रही. धर्मशाला में हुए इस मुकाबले के दौरान एक छोटी सी गलतफहमी ने 'हिटमैन' की पारी का अंत कर दिया था. मैच के बाद गिल ने इस पूरे मामले पर मुस्कुराते हुए ऐसा जवाब दिया, जिसने माहौल हल्का कर दिया. बारिश से प्रभावित 25-25 ओवर के मुकाबले में अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 194 रन बनाए. जवाब में भारतीय टीम ने कप्तान शुभमन गिल की नाबाद 84 रनों की शानदार पारी के दम पर लक्ष्य को 13 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया. गिल को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया. भारत की पारी के छठे ओवर में यह घटना हुई. अफगानिस्तान के युवा स्पिनर अल्लाह गजनफर की गेंद को रोहित शर्मा ने मिडविकेट की ओर खेला और तेजी से रन लेने के लिए दौड़ पड़े. शुभमन गिल ने भी शुरुआत में रन लेने की हामी भरी, लेकिन कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद अचानक रुक गए और रोहित को वापस भेज दिया. तब तक रोहित काफी आगे निकल चुके थे. अफगानिस्तान के खिलाड़ियों ने तुरंत मौका भुनाया और राशिद खान के थ्रो पर विकेटकीपर ने गिल्लियां बिखेर दीं. रोहित 16 रन बनाकर रन आउट हो गए. आउट होने के बाद उनके चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दे रही थी. वह रिप्ले का इंतजार किए बिना सीधे पवेलियन लौट गए. पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन के दौरान जब शुभमन गिल से पूछा गया कि क्या उन्होंने इस रनआउट को लेकर रोहित शर्मा से बात की, तो भारतीय कप्तान ने हंसते हुए जवाब दिया. गिल ने कहा, 'मुझे पता है कि उन्होंने रिप्ले देख लिया था. उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं, सब ठीक है. अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए पिछले टी20 मैच में भी वह रन आउट हुए थे.' शुभमन गिल के इस जवाब ने सभी को हंसा दिया और यह संकेत भी दिया कि ड्रेसिंग रूम में इस घटना को लेकर कोई तनाव नहीं है. मैच के बारे में बात करते हुए गिल ने अफगानिस्तान के सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, 'यह मुकाबला किसी टी20 मैच जैसा था. एक समय ऐसा लगा कि गुरबाज मैच को हमसे दूर ले जाएंगे. उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की, लेकिन हमारे गेंदबाजों ने बेहतरीन वापसी की.' गुरबाज ने सिर्फ 51 गेंदों में 102 रनों की विस्फोटक पारी खेली और अफगानिस्तान को एक समय मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था. भारत की जीत में डेब्यूटेंट खिलाड़ियों गुरनूर बरार और हर्ष दुबे का भी अहम योगदान रहा. दोनों गेंदबाजों ने तीन-तीन विकेट लेकर अफगानिस्तान की पारी को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया. शुभमन गिल ने दोनों खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि गुरनूर ने नई गेंद और डेथ ओवरों में शानदार नियंत्रण दिखाया, जबकि हर्ष दुबे ने पहले ओवर में महंगे साबित होने के बावजूद शानदार वापसी की.

डील से पहले ईरान में बढ़ता विरोध आखिर क्या संकेत दे रहा है?

तेहरान  अमेरिका से शांति समझौता करने के खिलाफ ईरानी लोगों का एक वर्ग सड़क पर उतर गया है। ईरान के कई शहरों में डील के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरानी हितों के खिलाफ जाकर डील की जा रही है, जो नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर खासतौर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं। अमेरिका से समझौते में ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार गालिबाफ और अराघची के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई है। तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर में शनिवार को रैली हुई है। मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के सामने भी दर्जनों लोग अब्बास अराघची के विरोध में जमा हुए। फार्स न्यूज एजेंसी ने वीडियो जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी अराघची के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। विरोध करने वालों का मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव कमजोर होगा। अराघची और गालिबाफ निशाने पर मशहद में महिलाओं को झंडे लहराते हुए और 'बेईमान घुसपैठिए अराघची मुर्दाबाद और अराघची हाय हाय' के नारे लगाते हुए देखा गया है। एक और वीडियो में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि अराघची का समझौता ईरान को बेइज्जत करने वला है। उन्होंने उस समझौते में अमेरिका को बहुत ज्यादा और गैरजरूरी रियायतें दी हैं। ऐसे में गालिबाफ और अराघची इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समझौते से ईरान के हितों की रक्षा नहीं होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश अपनी पकड़ खो देगा। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की बात कही गई है। साथ ही समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का दावा भी किया जा रहा है। ईरान अमेरिका समझौता ईरान लोग ऐसे समय प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं, जब अमेरिका से उनके देश का समझौता बेहद करीब है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर रविवार को दस्तखत हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों पक्ष रविवार को डील साइन कर सकते हैं। ईरानी नेताओं ने रविवार को समझौते पर दस्तखत होने की बात नहीं कही है लेकिन माना है कि अमेरिका के साथ समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है। ईरान ने संकेत दिया है कि डील में अभी कुछ समय लग सकता है। ईरानी पक्ष के बयानों से रविवार को समझौता होना मुश्किल नजर आ रहा है लेकिन जल्दी ही डील होने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि 24 घंटे के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने इशारा किया कि रविवार को दस्तखत हो सकते हैं।  

अयोध्या में उठे सवाल, अब जांच के लिए मैदान में उतरी SIT

अयोध्या   अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी और उनके पास से लाखों रुपये बरामद होने के बाद जांच तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. ऐसे में जानिए, इस विवाद की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या-क्या घटनाक्रम सामने आए हैं? ऐसे हुई विवाद की शुरुआत जून की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई. इसके बाद मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. फुटेज में एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी, जिसके आधार पर आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की गई. शुरुआत में मामले को गोपनीय रखा गया. 7 जून को अखिलेश यादव की एंट्री से सुर्खियों में आया मामला राम मंदिर चंदा चोरी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके का कि अयोध्या में मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि यदि डबल इंजन सरकार की निगरानी व्यवस्था इतनी प्रभावी होती और दूरबीन व ड्रोन सही तरीके से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि चढ़ावे में चोरी होगी तो उसकी शिकायत भी होगी. इसके बाद अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी योगी सरकार पर निशाना साधा. संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में दान राशि की कथित चोरी बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात कही. 10 जून को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कही जांच कराने की मांग अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी की बात बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मानी. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच सरकार करा रही है. सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. 13 जून को CM योगी के आदेश के बाद SIT गठित 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है. अधिकारियों के मुताबिक SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया. यह कदम 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे "गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने" के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर IAS विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) IPS किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. राज्य सरकार के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने अयोध्या मंदिर परिसर में दान पेटियों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. 13 जून को मामले में हुई 2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी जांच के दौरान 13 जून को मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं. बताया जा रहा है कि कुछ रकम घर की आलमारी में रखी गई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी. बरामद धनराशि के स्रोत को लेकर फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है. मामले में एक और कर्मचारी को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है. दोनों कर्मचारियों की जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों की थी. बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों को प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संपत्तियों में असामान्य वृद्धि की चर्चा जांच एजेंसियों के रडार पर है. जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की भूमि खरीदी, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है. 5 दिनों के भीतर दो बार अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र इधर, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी पांच दिनों के भीतर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. हालांकि उन्होंने कथित धन गबन के मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है. फिलहाल राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब सभी की निगाहें संभावित SIT जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं.

वर्ल्ड कप में स्कॉटलैंड की जीत, लेकिन रेफरी के फैसलों पर उठा विवाद

बोस्टन फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप सी के मुकाबले में स्कॉटलैंड ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हैती को 1-0 से हराया। स्कॉटलैंड ने विश्व कप में यह 36 साल बाद जीत दर्ज की है। यह जीत स्कॉटलैंड के लिए कई मायनों में खास रही। टीम ने 1990 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप में जीत दर्ज की। इसके अलावा 1982 के बाद यह पहली बार है जब स्कॉटलैंड ने किसी वर्ल्ड कप के पहले मुकाबले में जीत हासिल की है। 1982 में टीम ने न्यूजीलैंड को 5-2 से हराया था। इसके अलावा 1998 के बाद यह स्कॉटलैंड का पुरुषों के वर्ल्ड कप में पहला मैच था। स्कॉटलैंड और हैती का मुकाबला विवादित रहा रेफरी के फैसलों की वजह से स्कॉटलैंड और हैती का यह मुकाबला विवादित रहा। मैच के 79वें मिनट में हैती के जीन-रिकनर बेलेगार्डे ने जोरदार किक मारा। बॉक्स के अंदर स्कॉटलैंड के डिफेंडर के हाथ में गेंद लगी। हैती के खिलाड़ियों की जोरदार अपील के बावजूद रेफरी ने उसपर ध्यान नहीं दिया। वीएआर ने भी इसमें कोई दखल नहीं दिया। बॉक्स के अंदर हैंडबॉल होने पर विपक्षी टीम को पेनल्टी मिलती है। इससे पहले 73वें मिनट में भी स्कॉटलैंड के डिफेंडर के हाथ में गेंद लगी थी। इस बार भी रेफरी ने पेनल्टी नहीं दी। अल्जीरिया के मुस्तफा घोरबल इस मैच में रेफरी की भूमिका में थे। केनी मैक्लीन ने पहले हाफ में जोसु कासिमिर के घुटने पर खतरनाक तरीके से टैकल किया। उन्हें रेड कार्ड मिल सकता था लेकिन रेफरी ने नहीं दिया। 29वें मिनट में हुए एकमात्र गोल 29वें मिनट में स्कॉटलैंड की टीम बढ़त हासिल करने में सफल रही। फॉरवर्ड खिलाड़ी चे एडम्स ने लंबी गेंद पर नियंत्रण बनाया और बेन गैनन-डोक को पास दिया। उनके क्रॉस को हैती के डिफेंडर ने ब्लॉक कर दिया, लेकिन गेंद जॉन मैकगिन के पास पहुंच गई। मैकगिन ने बॉक्स के किनारे से जोरदार शॉट लगाया, जो हल्के से डिफ्लेक्ट होकर गोलकीपर जॉनी प्लेसिड को चकमा देकर गोल पोस्ट में पहुंच गया।  

20 साल के इरानकुंडा बने स्टार, ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से दर्ज की जीत

 नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत जीत के साथ की। ऑस्ट्रेलिया ने वैंकूवर में तुर्किए को 2-0 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। ऑस्ट्रेलिया से नेस्टोरी इरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ ने 1-1 गोल किए और अहम मौकों पर ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर पैट्रिक ने कमाल का बचाव करते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, तुर्किए की 24 साल बाद विश्व कप में वापसी खराब रही। FIFA World Cup 2026: ऑस्ट्रेलिया ने तुर्किए को 2-0 से हराया दरअसल, इस मैच में तुर्किए के पास बॉल ज्यादा रही, जिससे लग रहा था कि वह मैच जीत सकती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की टीम का डिफेंस कमाल का रहा। कोच टोनी पॉपोविक की टीम ने मजबूत डिफेंस किया और जैसे ही मौके मिले तुरंत गोल कर दिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया की धमाकेदार जीत रही। नेस्टोरी ईरानकुंडा और कॉनर मेटकाफ ने गोल दागे और तब से टीम कभी पीछे नहीं रही। फर्स्ट हाफ में 27वें मिनट पर पहला गोल हुआ। 20 साल के इरानकुंडा फीफा विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की ओर से गोल दागने वाले सबसे युवा प्लेयर बने। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर पैट्रिक ने शानदार डिफेंस किया। तुर्किए के अब्दुलकेरिम बर्दाकसी ने गोल मार दिया था, लेकिन इसका बचाव ऑस्ट्रेलिया ने कर लिया और फिर काउंटर अटैक करना शुरू किया और इस तरह इरानकुंडा ने पहला गोल किया। इसके बाद तुर्किए ने मैच में वापसी करने के लिए पलटवार किया। मैच के 53वें मिनट में कॉर्नर किक में हैरी साउटर ने हेडर पर गोल करने की कोशिश की, जिससे गोलकीपर उगुरकान काकिर रोकने में नाकाम हुए। 56वें मिनट में तुर्किए के अर्दा गुलेर ने फ्रीकिक ली, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर बीच में नीचे झुककर डाइव लगाते हुए उनके इस गोल को रोक लिया। मैच के 75वें मिनट में मेटकाफ ने गोल करते हुए बढ़त को दोगुना किया। इस तरह मैच में मिली जीत के साथ ग्रुप-डी की अंक तालिका में 3 अंक के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरे पायदान पर पहुंच गई। इरानकुंडा का ऐतिहासिक कारनामा नेस्टोरी इरानकुंडा वर्ल्ड कप में गोल करने वाला सबसे युवा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन गए हैं। इरानकुंडा की उम्र 20 साल 125 दिन है। उसने ब्रेट होलमैन का रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं। होलमैन ने 2010 में घाना के खिलाफ गोल किया था। तब उसकी उम्र 26 साल 84 दिन थी।  

सुबह 6 बजे से शुरू होगी खास मुहिम, कई बड़े चेहरे होंगे शामिल

नई दिल्ली  यमुना सफाई के लिए दिल्ली सरकार रविवार को बड़ा जन-अभियान शुरू करने जा रही है। सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व में 'मां यमुना तट स्वच्छता अभियान' के तहत यमुना के 28 घाट, तटों और रिवरफ्रंट क्षेत्रों में एक साथ सफाई और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 'एक संकल्प-स्वच्छ यमुना' थीम पर आधारित इस अभियान में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसद-मंत्री समेत आम लोग, स्वयंसेवक और सामाजिक संगठन श्रमदान करेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सुबह 6 बजे गीता कॉलोनी स्थित ठोकर नंबर-14 घाट पर अभियान का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसकी स्वच्छता और संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। इसी सोच के साथ इस पहल को जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम के स्वच्छ भारत विजन से प्रेरित यह अभियान यमुना संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 'मेरी यमुना, मेरा कर्तव्य' अभियान के तहत 12 टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया था। इस बार अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यमुना को स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाया जा सके। यमुना सफाई अभियान के तहत चिल्ला गांव घाट, निजामुद्दीन घाट, गांधी नगर घाट, पुराना लोहे पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद घाट, सोनिया विहार के विभिन्न घाट, निगम बोध घाट, यमुना बैंक, कालिंदी कुंज समेत 28 प्रमुख स्थलों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया जाएगा। करीब 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों भी इस अभियान में भागीदार होंगे। इस दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट समेत दिल्ली सरकार के मंत्री अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहकर अभियान का नेतृत्व करेंगे। नागरिकों को यह संकल्प भी दिलाया जाएगा कि वे पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट यमुना में नहीं डालेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

‘झुकना बंद करो’अमेरिका से डील पर ईरान में बवाल, अराघची और गालिबाफ बने निशाने पर

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी जंग सुलझती नजर आ रही है, लेकिन अब ईरान में अमेरिका के साथ शांति समझौते के खिलाफ विरोध के सुर फूट रहे हैं। कट्टरपंथी ईरानियों का गुस्सा इस डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सांसद गालिबाफ के खिलाफ निकल रहा है। शनिवार को ईरान के कई शहरों में इन दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हई और शांति समझौते का विरोध किया गया। ईरान में यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर शेखी बघार रहा है। ट्रंप ने यहां तक कहा है कि ईरान के साथ समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में शांति समझौते को लेकर दो पक्ष बंटे हुए हैं। एक तरफ कुछ लोग शांति समझौते के लिए राजी हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस युद्ध में शहीद सुप्रीम लीडर और तमाम साथियों का बदला चाहते हैं। शनिवार को जब विदेश मंत्री अराघची मसहद शहर में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। उसी दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने नारे बाजी शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों में कई महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने काले चाहत पहने हुए थे और वह लाल झंडे लिए नारे लगा रही थीं। इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें प्रदर्शन कारी डेथ टू अराघची, अराघची शर्म करो, झुकना बंद करो और अराघची इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाती सुनी जा सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मसहद के एक निवासी ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी लगातार अराघची का विरोध कर रहे थे। अराघची के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा एएफपी की रिपोर्ट के मताबिक, ईरान में इस शांति समझौते को लेकर लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। दरअसल, प्रदर्शनकारियों का तर्क यह है कि जब युद्ध हो ही चुका है और अमेरिका झुक गया है तो फिर ट्रंप की शर्तों के आधार पर समझौता करने की जरूरत क्या है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अराघची और गालिबाफ जिस समझौते को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, वह ईरान के हितों को नहीं साधता। इससे होर्मुज पर भी ईरान की पकड़ कमजोर हो सकती है। भले ही प्रदर्शनकारी अराघची के ऊपर ईरान के साथ धोखेबाजी का आरोप लगा रहे हों लेकिन अराघची लगातार ईरान के पक्ष में बातचीत करने का दावा कर रहे हैं। अराघची और गालिबेफ के खिलाफ यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब दोनों ही पक्षों की तरफ से शांति समझौते को लेकर आम राय बन रही है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि जल्दी ही अमेरिका के साथ 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं, इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि जल्दी ही समझौता हो सकता है। ट्रंप ने भी अपने 80वें जन्मदिन के दिन समझौता करने दावा किया है।

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर राहत राशि में अनियमितता के गंभीर आरोप, CID जांच भी तेज

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच भाजपा के एक नेता ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर अम्फान चक्रवात राहत कोष में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी ने डायमंड हार्बर के बिष्णुपुर थाने में 17 पन्नों की शिकायत सौंपी. इस बीच पश्चिम बंगाल सीआईडी ने जाली हस्ताक्षर करने के मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए एक और नोटिस जारी किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के पीड़ितों के लिए जारी राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं. इसमें डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्री, एक ही मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भुगतान और एक ही आवासीय भवन से कई लोगों को लाभार्थी दिखाने जैसे आरोप शामिल हैं. अभिजीत दास बॉबी ने कहा, 'आज की शिकायत में मैंने विशेष रूप से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिष्णुपुर के दो ब्लॉकों का उल्लेख किया है, जहां लगभग 57 हजार लाभार्थियों के बीच 57.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे.' डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से दो बार अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके बॉबी ने आरोप लगाया कि राहत राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व द्वारा हड़प लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में यह खेल हुआ और इसमें ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (विकास) सहित कई सरकारी अधिकारी भी शामिल थे. 2020 में आया था अम्फान चक्रवात बता दें कि 20 मई 2020 को आए अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी. पूर्वी मेदिनीपुर और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में व्यापक नुकसान हुआ था और 96 लोगों की मौत हुई थी. भाजपा नेता ने दावा किया कि पूरे डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के आंकड़ों के आधार पर करीब 238 करोड़ रुपये के राहत घोटाले की आशंका है. उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की है. अभिजीत दास बॉबी ने कहा कि जल्द ही डायमंड हार्बर क्षेत्र के अन्य थानों में भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी. साथ ही उन्होंने पूरे खर्च का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की. अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर क्यों उठे सवाल? शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक राहत पोर्टल से डाउनलोड किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में हजारों स्वीकृत आवेदनों के 'Recommended By' कॉलम में अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय का नाम बार-बार दिखाई देता है. इससे यह सवाल उठता है कि राहत वितरण प्रक्रिया में उनकी भूमिका कितनी व्यापक थी और क्या उनके कार्यालय से जारी सिफारिशों ने सामान्य प्रशासनिक और भौतिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया. ममता बनर्जी सरकार ने अम्फान प्रभावित लोगों के लिए 6,250 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी और पीड़ितों के खातों में सीधे धनराशि भेजने का वादा किया था. इसके लिए अम्फान साइक्लोन राहत कोष भी बनाया गया था. वहीं केंद्र सरकार ने नेशनल डिजास्टर​ रिलीफ फंड (NDRF) से अम्फान राहत और पुनर्वास के लिए 3,077 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. राज्य सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 20,000 रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की व्यवस्था की थी. हालांकि आरोप है कि घरों के पुनर्निर्माण के लिए जारी राशि का कुछ हिस्सा पंचायत प्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के खातों में पहुंच गया. अम्फान राहत वितरण को लेकर वर्ष 2020 में राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इसके बाद ममता सरकार ने तृणमूल से जुड़े कुछ पंचायत पदाधिकारियों को निलंबित किया था और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था. एक मोबाइल नंबर से कई लाभार्थियों को भुगतान भाजपा नेता ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि भ्रष्टाचार एक सुनियोजित और संस्थागत तंत्र के जरिए किया गया. उन्होंने ऐसे दस्तावेज भी संलग्न किए हैं, जिनमें कथित तौर पर एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल 14 लाभार्थियों के लिए किया गया और उन सभी को मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के आधार पर 20-20 हजार रुपये दिए गए. इसके अलावा चार अन्य मोबाइल नंबरों के जरिए भी 6 से 9 लाभार्थियों को राहत राशि मिलने का आरोप लगाया गया है. बॉबी ने कहा, 'एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग गांवों के लाभार्थियों के लिए किया गया. ये सभी विसंगतियां सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं.' वहीं तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'यह हमारे नेता के खिलाफ भाजपा की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है. हम इसका कानूनी तरीके से मुकाबला करेंगे.'

नालंदा, गया और भोजपुर की विरासत का बढ़ा सम्मान, तीन अनूठे उत्पाद GI टैग से हुए सम्मानित

पटना बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के तीन विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस गौरवशाली सूची में नालंदा की विश्वप्रसिद्ध 'बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक', गयाजी का अनूठा 'पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट' तथा भोजपुर की ऐतिहासिक 'पीढ़िया पेंटिंग' शामिल हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और बिहार सरकार के संयुक्त व अथक प्रयासों से बिहार की इस अनमोल हस्तशिल्प विरासत को यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। इस जीआई टैग के मिलने से अब इन पारंपरिक कलाओं से जुड़े स्थानीय बुनकरों, मूर्तिकारों और कलाकारों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी। पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के मार्गदर्शन से पूरी हुई पंजीकरण प्रक्रिया इन पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और जीआई पंजीकरण की इस बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में देश के जाने-माने विशेषज्ञों का बड़ा योगदान रहा है। नाबार्ड ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि बिहार के इन तीनों उत्पादों के जीआई पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का अमूल्य मार्गदर्शन और विशेष तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। उनके कुशल दिशा-निर्देशन और वैज्ञानिक दस्तावेजों की तैयारी के कारण ही बिहार के इन तीन बेजोड़ शिल्पों को भौगोलिक संकेतक की सूची में शामिल कराना संभव हो पाया। बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का बढ़ेगा दुनिया में मान इस ऐतिहासिक टैग के मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब दुनिया भर के बाजारों में बिहार के इन तीनों विशिष्ट उत्पादों की प्रामाणिकता और शुद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकेगा। बौद्ध कला के प्रतीकों को समेटने वाली नालंदा की बावन बूटी साड़ी, पहाड़ों को तराशकर बनाई जाने वाली गयाजी की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की लोक परंपरा को दर्शाने वाली पीढ़िया पेंटिंग के नाम पर अब कोई भी नकली उत्पाद नहीं बेच पाएगा। कला समीक्षकों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल बिहार के पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी के स्थानीय युवाओं को भी अपने पारंपरिक रोजगार से जुड़ने की एक नई प्रेरणा मिलेगी।