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PM सूर्यघर योजना में छत्तीसगढ़ का बड़ा लक्ष्य, 1.3 लाख नहीं, अब 5 लाख छतों पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत मार्च 2027 तक प्रदेश के 1 लाख 30 हजार घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन हमारा प्रयास इससे भी आगे बढ़कर इसे 5 लाख छतों तक पहुँचाने का है। इस योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बड़ी सब्सिडी दी जा रही है। 1 किलोवॉट से 3 किलोवॉट क्षमता तक के सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार से लेकर 78 हजार रुपये तक की केंद्रीय सहायता सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार भी अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। इससे उपभोक्ताओं को कुल लागत का 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में आयोजित 97वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस “फोरम ऑफ रेगुलेटर्स” को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम अपने राज्य स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। इन 25 वर्षों में हमारी उत्पादन क्षमता करीब 30,000 मेगावाट तक पहुँच गई है। स्टेट सेक्टर, निजी क्षेत्र और केंद्रीय सेक्टर की भागीदारी से आज छत्तीसगढ़ की धरती से 30 हजार मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। हाल ही में हमने 32 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बिजलीघरों की स्थापना के लिए एमओयू किए हैं। इनमें ताप विद्युत, पंप स्टोरेज, परमाणु, बैटरी स्टोरेज और सौर ऊर्जा परियोजनाएँ शामिल हैं। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में 60 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन करने वाला राज्य बनने का है। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि प्रति व्यक्ति बिजली खपत के मामले में छत्तीसगढ़ देश से काफी आगे है। यहाँ खपत 2,211 यूनिट है, जबकि भारत में यह औसत केवल 1,255 यूनिट है। छत्तीसगढ़ अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन कर रहा है और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। हम अपने राज्य के साथ ही पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दो दिन पहले ही हमने कैबिनेट बैठक में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 2030 तक लागू रहने वाली नीति में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक नीति में प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री साय ने देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्युत नियामक आयोगों के अध्यक्षगण, पदाधिकारियों और विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति के लिए जो गहन विचार-विमर्श हुआ है, इसका उपभोक्ताओं सहित हम सभी को दूरगामी लाभ मिलेगा। उन्होंने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ को चुनने हेतु विशेष आभार भी प्रकट किया। इस अवसर पर केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष जिश्नु बरुआ, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष हेमंत वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव रोहित यादव सहित राज्य विद्युत नियामक आयोग के अन्य सदस्य एवं अन्य राज्यों से आए सदस्यगण उपस्थित थे।

मोहन भागवत का ट्रंप पर करारा कटाक्ष: डर है तो टैरिफ लगाओ!

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि यह टैरिफ भारत के बढ़ते प्रभाव के डर का नतीजा है. भागवत ने कहा, "दुनिया में लोगों को डर लगता है, भारत बड़ा होगा तो हमारा क्या होगा? तो लगाओ टैरिफ, डर लगता है उनको." उन्होंने आगे कहा कि "हमे चाहिए, मुझे चाहिए, यही व्यक्ति के झगड़े से राष्ट्र झगड़े का कारण होता है." भागवत ने ज़ोर देकर कहा कि दुनिया को आज समाधान चाहिए और भारत ही पूरी दुनिया को सही रास्ता दिखा सकता है. उन्होंने भारत के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि यहां लोग अभाव में भी खुश रहते हैं, और हालात बदलेंगे तो बदलेंगे. ट्रंप ने भारत पर लगाया है 50 फीसदी टैरिफ  आपको बता दें कि अमेरिका ने 2025 में भारत पर रिकॉर्ड स्तर के टैरिफ लगाए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें “रिसिप्रोकल टैरिफ” नीति के तहत लागू किया है. पहली बार जुलाई 2025 में यह टैरिफ लगाया गया था, जो 1 अगस्त से प्रभावी हुआ. उस समय अमेरिका ने कारण बताया गया कि भारत के ऊंचे टैरिफ और व्यापार घाटे का जवाब देना जरूरी है. इसके बाद अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने दूसरा टैरिफ लगाया, यह कहते हुए कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और इससे यूक्रेन युद्ध को फंड मिल रहा है. इन दोनों फैसलों के बाद अमेरिका ने भारतीय निर्यातों पर टैरिफ की दर 50% तक पहुंच गई है, जो अमेरिका के किसी भी बड़े व्यापारिक साझेदार पर लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ हैं.  

अब नहीं बख्शेंगे कोई! यूपी में CM योगी ने किया बड़ा एक्शन, SDM और दो अफसर सस्पेंड

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति' के तहत एक के बाद एक बड़ी कार्रवाइयां की जा रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर के SDM और दो राज्य कर अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, गन्ना विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद गोपनीय जांच के आदेश दिए गए हैं। SDM जयेंद्र सिंह सस्पेंड, सरकारी जमीन के मामले में फंसे मुजफ्फरनगर के उप जिलाधिकारी (SDM) जयेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी जमीन को गलत तरीके से संक्रमणीय (ट्रांसफरेबल) घोषित कर दिया और इससे कुछ प्रभावशाली लोगों को नाजायज फायदा पहुंचाया। शिकायतों की जांच के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। राज्य कर विभाग के दो अधिकारी भी सस्पेंड राज्य कर विभाग (वाणिज्य कर विभाग) में भी भ्रष्टाचार को लेकर दो बड़े अफसरों पर गाज गिरी है, जिनमें अरुण शंकर रॉय (अपर आयुक्त) – इन पर आरोप है कि इन्होंने बिल्डरों को गलत तरीके से टैक्स में छूट देकर बड़ा लाभ पहुंचाया। दूसरे सतीश कुमार – इन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि एक स्टिंग ऑपरेशन में इनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले, जिसके बाद सस्पेंशन और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की गई। दोनों अफसरों के खिलाफ जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटा दिया गया है। गन्ना विभाग में रिश्वतखोरी, जांच के आदेश अब गन्ना विभाग में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिन दो अफसरों के खिलाफ जांच शुरू हुई है, वे हैं रामकिशन (जिला गन्ना अधिकारी) संयुक्त गन्ना निदेशक। इन पर आरोप है कि इन्होंने ऑनलाइन माध्यम से रिश्वत ली, किसानों की योजनाओं में गड़बड़ी की। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय जांच के आदेश दिए हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक दोनों को पद से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम योगी का सख्त संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता है। जो भी अधिकारी जनता के साथ धोखा करेगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी। भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

बच्चों और पुलिस के बीच का फासला घटेगा, राजस्थान में शुरू हुआ ‘सद्भावना अभियान’

जयपुर राजस्थान पुलिस ने एक अनूठा अभियान शुरू किया है। बच्चों के मन से पुलिस का डर निकालकर उनमें भरोसा जगाने और समाज में सद्भावना फैलाने के उद्देश्य से प्रतापगढ़ पुलिस ने ‘सद्भावना अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत जिले के हर थाना प्रभारी ने एक-एक राजकीय स्कूल को गोद लिया है, जहां वे बच्चों के साथ सीधे संवाद कर पुलिस और बच्चों के बीच विश्वास और सहयोग का पुल बनाएंगे। बच्चों और पुलिस के बीच संवाद का सेतु इस पहल के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि वे बेझिझक पुलिस की मदद कैसे ले सकते हैं और किसी भी अपराध या समस्या की जानकारी कैसे दे सकते हैं। महीने में एक बार छात्र पुलिस स्टेशन का दौरा करेंगे, जहां उन्हें थाना परिसर, महिला डेस्क, साइबर डेस्क आदि के बारे में बताया जाएगा। महिला कांस्टेबल द्वारा विशेष परामर्श महिला कांस्टेबल्स बच्चों को POCSO एक्ट, सोशल मीडिया का दुरुपयोग, घरेलू हिंसा, बाल विवाह, मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति जैसे विषयों पर जागरूक करेंगी। साथ ही बच्चों और महिलाओं के कानूनी अधिकारों तथा नए आपराधिक कानूनों की व्यावहारिक जानकारी भी दी जाएगी। शिक्षा को प्रोत्साहन और करियर गाइडेंस अभियान के तहत छात्रों को बैग, स्टेशनरी और पुस्तकें भी वितरित की जाएंगी। 'सुरक्षा सखी' को बच्चों की पहली संपर्क सूत्र के रूप में नामित किया गया है ताकि वे अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकें। समय-समय पर करियर गाइडेंस और शैक्षिक अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी। अभियान की शुरुआत 9 सितंबर को राजकीय विद्यालय, मनोहरगढ़ से हुई, जहां कक्षा 1 से 12 तक के 600 से अधिक छात्र हैं। छोटे बच्चों को स्कूल बैग व स्टेशनरी वितरित की गई, जबकि वरिष्ठ छात्रों को पुलिस स्टेशन का भ्रमण कराया गया। इस दौरान शिक्षकों ने भी पुलिस से संवाद किया और विद्यालय संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। एसपी बोले– SHO बनेंगे बच्चों के मार्गदर्शक प्रतापगढ़ एसपी बी. आदित्य ने कहा- हर SHO ने स्वेच्छा से अपने गोद लिए स्कूल को अपराध मुक्त और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ली है। यह अभियान बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाकर बच्चों में पुलिस व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा करेगा। जब बच्चे हमारे पास आने से झिझकते हैं, तब हमने खुद पहला कदम उठाने का निश्चय किया ताकि समाज में वास्तविक ‘सद्भावना’ स्थापित हो सके।

किसानों पर विवादित बयान: कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से झटका

मंडी  बॉलीवुड एक्ट्रेस और BJP सांसद कंगना राणावत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कंगना रनौत के खिलाफ चल रहा मानहानि केस जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कंगना रनौत की मानहानि केस को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. बता दें कि किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत ने किसानों के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी, जिसके चलते उनके खिलाफ मानहानि का केस दायर किया गया था.   कंगना के वकील ने पेश की यह दलील बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में कगंना रनौत का पक्ष रखते हुए उनके वकील ने दलील दी थी कि उन्होंने महज एक ट्वीट को रि-ट्वीट किया था. कई और लोगों ने भी उस ट्वीट को रि-ट्वीट किया था. इस दलील के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह महज रि-ट्वीट नहीं था, बल्कि इसमे कंगना रनौत की टिप्पणी भी शामिल थी. यह ट्रायल का विषय है तो आप निचली अदालत में अपनी बात रखिए. वहां से फैसला आने के बाद ही आगे मामले को देखा जाएगा, अगर बेंच के पास आया तो.   कंगना के खिलाफ क्या है मामला? बता दें कि कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि की शिकायत साल 2021 में पंजाब की बठिंडा कोर्ट में 73 साल की महिंदर कौर ने दर्ज कराई थी. शिकायत में कहा गया कि कंगना ने एक पोस्ट को रि-ट्वीट करके उनके खिलाफ टिप्पणी की, जिससे उनकी मानहानि हुई है. कंगना ने अपने रि-ट्वीट में महिंदर कौर की फोटो वाले ट्वीट को रि-ट्वीट करके कहा था कि यह वही बिलिकिस बानो दादी हैं, जो शाहीन बाग प्रदर्शन का हिस्सा थीं. यह 100 रुपये में उपलब्ध हो जाती हैं. हाई कोर्ट खारिज कर चुकी याचिका बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से पहले पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट भी कंगना रनौत की याचिका खारिज कर चुकी है. हाई कोर्ट ने कंगना की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कंगना रनौत एक्ट्रेस हैं. उनके खिलाफ शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के आरोप लगे हैं. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कंगना के रि-ट्वीट और टिप्पणी से उसकी इमेज खराब हुई है. रि-ट्वीट और टिप्पणी करके कंगना की इमेज पर भी असर पड़ रहा है, शिकायतकर्ता ने किसी दुर्भावना से केस दर्ज नहीं कराया है। इसलिए मामले की जांच होनी चाहिए.  

हिमाचलवासियों के लिए अलर्ट: 21 जिलों में तेज बारिश, सुरक्षित रहें भूस्खलन और बिजली गिरने से

नई दिल्ली मानसून की विदाई का वक्त भले ही करीब हो, लेकिन उत्तर भारत का मौसम एक बार फिर असरदार करवट लेता नजर आ रहा है। दिल्ली समेत कई मैदानी राज्यों में बारिश थमने के बाद जहां उमस और गर्मी बढ़ती जा रही है, वहीं यूपी और बिहार में एक बार फिर बादल सक्रिय हो चुके हैं। दूसरी ओर, हिमाचल और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश अब लोगों की मुसीबतें बढ़ा रही है। दिल्ली में बारिश का इंतजार, उमस से बेहाल राजधानी राजधानी दिल्ली में बारिश का सिलसिला अब थमता दिख रहा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 3 से 4 दिन तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। तापमान: शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33°C तक पहुंचने की उम्मीद है। मौसम का हाल: गर्मी के साथ उमस लोगों को परेशान कर सकती है। बादलों की हल्की आवाजाही रहेगी, लेकिन कोई बारिश का पूर्वानुमान नहीं है। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर सक्रिय हुआ मानसून, 21 जिलों में अलर्ट उत्तर प्रदेश में गुरुवार से मौसम ने अचानक करवट ली है और मानसून फिर से सक्रीय हो गया है। आज शुक्रवार को पश्चिमी यूपी में तेज बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। पूर्वी यूपी में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। लखनऊ मौसम केंद्र के अनुसार, जिन 21 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, उनमें ये प्रमुख हैं: बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, सहारनपुर मुजफ्फरनगर, मेरठ, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, संत कबीरनगर, देवरिया चेतावनी: बिजली गिरने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। बिहार में मूसलधार बारिश का रेड अलर्ट बिहार में भी एक बार फिर भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, आज कई जिलों में मूसलधार बारिश हो सकती है।   प्रभावित जिले: पश्चिम चंपारण, बांका, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और सारण इन जिलों में बिजली गिरने की आशंका को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हिमाचल और उत्तराखंड में पहाड़ों पर बरस रहा कहर उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में बारिश की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही। हिमाचल प्रदेश: 12 से 14 सितंबर तक मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। आज के लिए ऊना, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में येलो अलर्ट है। बिजली गिरने और भूस्खलन की भी संभावना बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें बंद हो चुकी हैं और यातायात बाधित है। उत्तराखंड: देहरादून समेत 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज आंधी, बिजली गिरने और मूसलधार बारिश की चेतावनी दी गई है। पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। पंजाब में अब भी बाढ़ जैसे हालात हालांकि पंजाब में बारिश की तीव्रता कुछ कम हुई है, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। बांधों से लगातार छोड़ा जा रहा पानी कई निचले इलाकों में तबाही ला रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई गांव अभी भी जलमग्न हैं। फसलें और घर प्रभावित हुए हैं, और राहत कार्य जारी है। क्यों बदला मौसम अचानक? विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर के इस समय में मानसून की विदाई शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण दोबारा सक्रियता देखने को मिल रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में असामान्य बदलाव हो रहे हैं। इसकी वजह से देर से होने वाली भारी बारिश का खतरा बढ़ता जा रहा है, खासकर पहाड़ी और निचले इलाकों में।  

उद्धव ठाकरे पर भरोसा नहीं! मंत्री नितेश राणे ने शिवसेना (UBT)-MNS गठबंधन पर किया कटाक्ष

मुंबई  महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने उद्धव ठाकरे को अविश्वासनीय व्यक्ति करार देते हुए कहा कि उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही मनसे-शिवसेना (उद्धव) गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि कौन किसके साथ जाता है, यह उनके दल का विषय है. राणे ने आरोप लगाया कि मातोश्री पर गए कांग्रेस नेताओं को खुद उद्धव ठाकरे ने बाहर निकाला था. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस, मनसे उम्मीदवार को स्वीकार करेगी? महाराष्ट्र की सियासत में इंडिया गठबंधन में मनसे को भी शामिल करने की बात चल रही है. ऐसी अटकलें हैं कि निकाय चुनाव में मनसे के नेता राज ठाकरे इंडिया गठबंधन की पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. जो औरंगजेब की बात करेगा, उसे वापस भेजा जाएगा मालवणी/धाराशिव में औरंगजेब नारेबाजी पर नितेश राणे ने कहा, “हमारा देश हिंदू राष्ट्र है. यहां यदि कोई औरंगजेब का उदारीकरण करेगा, तो उन्हें पाकिस्तान भेजा जाएगा.” हैदराबाद गजट पर चुनौती पर उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने की आजादी है. किसी को भी कोर्ट जाने का अधिकार है.” रश्मी शुक्ला-नाना पटोले पर राणे ने कहा, “रश्मी शुक्ला के खिलाफ साजिश की जा रही है, यह हम पहले दिन से कह रहे हैं. अब सबके सामने आ गया है.” उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “नाना पटोले कितनी बार मुंह के बल गिरेंगे, इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए.” ओबीसी आरक्षण से नहीं होगी कोई छेड़छाड़ ओबीसी आरक्षण पर आश्वासन पर राणे ने कहा कि ओबीसी आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी. मंत्री नितेश राणे ने कोंकण में हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य कोंकण की इकोनॉमी को मजबूत करना है. इस चर्चा में कोंकण को काजू, आम और मछली का एक प्रमुख केंद्र बनाने और जयगढ़ बंदरगाह के विकास पर चर्चा हुई. इसके साथ ही जल परिवहन से जोड़ने के लिए एक डीपीआर तैयार करने पर भी बैठक में विचार किया गया.  

पशु चिकित्सक रिश्वत लेते धरा गया! उज्जैन में लोकायुक्त ने 9 हजार की रिश्वत लेते किया गिरफ्तार

उज्जैन मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद घूसखोरी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहें हैं। ताजा मामला उज्जैन से सामने आया है। यहां पशु चिकित्सक को गाय का पोस्टमार्टम करने के लिए घूस लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा है। 9 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को उज्जैन के इंगोरिया में पदस्थ पशु चिकित्सा मनमोहन सिंह पवैया को 9 हजार रुपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिन ने रंगें हाथ पकड़ा है। दरअसल, पशु चिकित्सा कार्यालय पर गाय का पोस्टमार्टम करने के एवज में मनमोहन सिंह पवैया ने 10 हजार की रिश्वत मांगी थी। उसी रिश्वत राशि में 9000 लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने डॉ मनमोहन सिंह पवैया को गिरफ्तार किया। शिकायत के बाद कार्रवाई बता दें कि, ग्राम सरसाना बड़नगर तहसील के रहने शख्स ने लोकायुक्त कार्यालय में मामले की शिकायत की थी। फरियादी की शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्ट चिकित्सक के खिलाफ एक्शन लिया। फिलहाल भ्रष्टाचार के विभिन्न अधिनियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

धर्म और जाति भूलो, वर्दी की गरिमा निभाओ! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को लगाई फटकार

मुंबई  सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को फटकार लगाई है. पुलिस को यह फटकार साल 2023 के मारपीट के एक मामले की जांच ना करने पर लगाई गई है. कोर्ट ने कहा, पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति को धर्म और जाति सहित सभी तरह के पूर्वाग्रहों से ऊपर उठना चाहिए और कानून के अनुसार कर्तव्य निभाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के गृह सचिव को निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की एक SIT गठित कर जांच कराए. कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर दिया है जिसमें मई 2023 में महाराष्ट्र के अकोला में हुए सांप्रदायिक दंगे की जांच में लापरवाह पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. अपने कर्तव्यों की निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण जांच के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता ने खुद को हत्या का चश्मदीद बताया और कहा कि असली दोषी के बजाय मुस्लिम व्यक्तियों पर FIR दर्ज की गई. याचिकाकर्ता ने दंगों के दौरान खुद पर हमले का भी आरोप लगाया था. इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि याचिकाकर्ता ने समय पर पुलिस को जानकारी नहीं दी. हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि पीड़ित के परिजन खुद कोर्ट नहीं पहुंचे और याचिका किसी “छिपे मकसद” से दायर लगती है. क्या था पूरा मामला? दरअसल, महाराष्ट्र के अकोला में 13 मई को दो समुदाय में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. जिसमें एक शख्स की मौत हो गई थी और 8 लोग घायल हुए थे. इस मामले में शुरू में पुलिस ने 6 FIR दर्ज की थी. इस मामले में महाराष्ट्र के अकोला दंगों में गंभीर रूप से घायल मोहम्मद अफजल मोहम्मद शरीफ ने याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने मामले की सही जांच नहीं की और गंभीर चोटों के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट की अनदेखी की. याचिका में पुलिस जांच में खामियों और न्याय मिलने में विफलता का मुद्दा उठाया गया है. याचिका में इसका भी ज़िक्र है कि घायल चश्मदीद गवाह (मो हम्मद अफ़ज़ल) को अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची से बाहर रखना और घटनाओं की जांच उसके पक्ष में न करना पुलिस अधिकारियों की बदनीयती का संकेत है. अब सुप्रीम कोर्ट नें इसी मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस को फटकार लगाई है.  

बस्तर दशहरा में शामिल होंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, तैयारियां तेज

रायपुर छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव इस बार ऐतिहासिक बनने जा रहा है। राज्य गठन के बाद पहली बार केंद्रीय मंत्री बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में जनता की बात सुनेंगे। सांसद महेश कश्यप ने गृहमंत्री को बस्तर दशहरा में आने का निमंत्रण दिया। इस दौरान अमित शाह ने बस्तर आने की बात कही। केंद्रीय गृहमंत्री ने 4 नवंबर को बस्तर आने की बात कही है। इस दौरान वे बस्तर में 3 घंटे रहेंगे, साथ ही मिशन 2026 के तहत नक्सल उन्मूलन अभियान पर चर्चा करेंगे। साथ ही जिस समय केंद्रीय गृहमंत्री का आगमन बताया जा रहा है उसी दौरान बस्तर में बस्तर दशहरा पर्व का प्रमुख रस्म मुरिया दरबार रहेगा, जिसमें अमित शाह जनता की बात सुनेंगे। इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहेंगे। मुरिया दरबार का आयोजन चार अक्टूबर को सिरहासार भवन में किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, प्रदेश मंत्रिमंडल के मंत्री एवं बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। बस्तर सांसद और दशहरा कमेटी के अध्यक्ष महेश कश्यप ने बुधवार को राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को उत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बार बस्तर दशहरा का हिस्सा होंगे। सांसद के मीडिया प्रभाग के अनुसार, बस्तर दहशरा में देश और प्रदेश के अन्य बड़े नेता भी पहुंचेंगे। बस्तर दहशरा का ऐतिहासिक महत्व बस्तर दशहरा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि आदिवासी परंपराओं, जनसंवाद और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। मुरिया दरबार में आमजन अपनी समस्याओं और सुझावों को सीधे तौर पर नेताओं और प्रशासन के सामने रखते हैं। अमित शाह की मौजूदगी से इस बार का आयोजन और भी खास होने जा रहा है। इस बार मुरिया दरबार में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर की जनता की समस्याएं सुनेंगे।