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मुख्य सचिव पद की दौड़ तेज, सुमिता मिश्रा बनाम सुधीर राजपाल पर टिकी निगाहें

जालंधर. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का सेवा-विस्तार 30 जून को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों सुमिता मिश्रा और सुधीर राजपाल को उनके उत्तराधिकारी के रूप में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। सुमिता मिश्रा वर्तमान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में वित्तीय आयुक्त हैं जबकि सुधीर राजपाल अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के पद पर कार्यरत हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारी राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। पूर्व में हालांकि यह देखा गया है कि राज्य के शीर्ष नौकरशाही पद पर नियुक्ति हमेशा केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं की गई है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को एक वर्ष का सेवा-विस्तार प्रदान किया था। उनका कार्यकाल 30 जून, 2025 को समाप्त होना था। जानकारी हो कि रस्तोगी 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। फरवरी 2025 में हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने रस्तोगी को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था। रस्तोगी को मुख्य सचिव का पद उस समय मिला था जब 1989 बैच के आईएएस अधिकारी एवं तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए गए थे।  

यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी, PRTC कर्मचारियों ने 3 दिन बस सेवा प्रभावित करने की चेतावनी दी

जालंधर. पनबस-पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जेलों में बंद कर्मचारियों को रिहा नहीं किया गया और कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 22, 23 और 24 जून को हड़ताल करते हुए सरकारी बसों का चक्का जाम किया जाएगा व मुख्यमंत्री के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। यूनियन नेताओं ने कहा कि इस संघर्ष की शुरूआत 10 जून से पंजाब भर के डिपूओं में रैलियां व सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शनों से होगी। प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि सरकार को बने चार वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन एक भी नई सरकारी बस नहीं डाली गई। इसके विपरीत किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा देकर विभाग को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनियन नेताओं और कर्मचारियों पर मामले दर्ज कर उन्हें जेलों में बंद किया जा रहा है, ताकि निजीकरण के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाया जा सके। प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि सरकार एक तरफ कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के दावे कर रही है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों की मूलभूत मांगों को लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन और अन्य लंबित मुद्दों पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जब तक सरकार अपने फैसलों को धरातल पर लागू नहीं करती, तब तक कर्मचारी संतुष्ट नहीं होंगे। सीनियर उपप्रधान हरकेश विक्की ने आरोप लगाया कि विभाग की अपनी बसों को डिपो में खड़ा कर निजी किलोमीटर स्कीम की बसों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे सरकार की निजीकरण संबंधी नीति स्पष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि नई किलोमीटर स्कीम की बसों को शुरू किया गया तो यूनियन काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन करेगी।

ईंधन की अवैध बिक्री पर सख्ती, डब्बों में पेट्रोल-डीजल बेचने पर होगी कार्रवाई

दंतेवाड़ा. पश्चिम एशिया में उपजे मौजूदा संकट और उससे उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ा फैसला लिया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग (मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर) द्वारा जारी निर्देशों के तहत राज्य में पेट्रोल और डीजल की खुले में बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर खाद्य शाखा दंतेवाड़ा द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य शासन ने ईंधन की आपूर्ति और वितरण को सुचारू बनाए रखने के लिए नए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की तेल कंपनियों और अन्य समानांतर कंपनियों के पेट्रोल-डीजल रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि: पेट्रोल और डीजल का विक्रय सीधे केवल उपभोक्ता के वाहन की टंकी में ही किया जाएगा। कोई भी रिटेल आउटलेट संचालक किसी भी व्यक्ति को ड्रम, केन (Jerrycan) या बोतल जैसे खुले बर्तनों में पेट्रोल-डीजल नहीं बेचेगा। यदि कोई संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चूंकि वर्तमान में रबी सीजन की फसल कटाई का काम चल रहा है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू होने वाली हैं, ऐसे में आम जनता और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए शासन ने कुछ महत्वपूर्ण मामलों में छूट का प्रावधान भी किया है। इन क्षेत्रों को मिलेगी नियमों से राहत: कृषक (किसान): खेती-किसानी और ट्रैक्टर/थ्रेशर आदि के लिए किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए। शासकीय एवं निर्माण कार्य: जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित रेलवे, सड़क निर्माण और भवन निर्माण जैसे समय-सीमा में पूरे होने वाले सरकारी कार्य। अत्यावश्यक सेवाएं: अस्पताल, मोबाइल टावर संचालन और अन्य जरूरी इमरजेंसी सेवाएं। कैसे मिलेगी खुले में ईंधन लेने की अनुमति? विज्ञप्ति के अनुसार, शासकीय कार्यों और अत्यावश्यक सेवाओं के लिए खुले में (ड्रम या केन में) डीजल-पेट्रोल की आवश्यकता होने पर सीधे ईंधन नहीं मिलेगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM द्वारा मांग का उचित परीक्षण किया जाएगा। एसडीएम की रिपोर्ट और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ही कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित कार्यों हेतु रिटेल आउटलेट से निर्धारित मात्रा में ईंधन विक्रय की विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

बंगाल में जांच एजेंसियों को बड़ी राहत! शुभेंदु सरकार ने CBI पर लगी रोक हटाई

 कोलकाता पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सीबीआई को जांच करने की पूरी छूट देने का बड़ा फैसला किया है. होम एंड हिल अफेयर्स विभाग की तरफ से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट, 1946 के तहत सीबीआई को राज्य में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों और उनसे जुड़े मामलों की जांच करने की अनुमति दी गई है।  इस नोटिफिकेशन का सीधा मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में कुछ मामलों की जांच करने के लिए फिर से सामान्य सहमति (General Consent) दे दी है, लेकिन यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है।  यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है. नोटिफिकेशन 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है।  किन मामलों में जांच कर सकेगी CBI?     केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     अगर किसी शख्स पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो, तो उनके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी. किन मामलों में CBI सीधे जांच नहीं कर सकेगी? पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच नहीं कर सकती है. ऐसे मामलों में सीबीआई को पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी. यह कहना कि 'बंगाल ने CBI को सभी मामलों की जांच की पूरी छूट दे दी' पूरी तरह सही नहीं होगा. नोटिफिकेशन पढ़ने पर साफ है कि छूट मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों के लिए दी गई है. राज्य सरकार के अधिकारियों पर CBI अभी भी बिना अनुमति सीधे जांच नहीं कर सकती।  भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की सीबीआई को दी खुली छूट  मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछली सरकार ने 4 वर्षों से सीबीआई की कार्रवाई को रोक रखा था. कानून के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या अभियोजन शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है।  ममता बनर्जी पर भ्रष्ट नौकरशाहों को संरक्षण देने का आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जान-बूझकर इन फाइलों को अटकाये रखा, ताकि उनके खास अधिकारियों को बचाया जा सके. मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल 3 प्रमुख विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच की सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दे दी गयी है. इसकी प्रतियां केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गयी हैं।  रडार पर शिक्षक भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड     शिक्षक भर्ती घोटाला (WBSSC) स्कूलों में अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है. इस केस में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई सीधे आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी।      नगर निकाय भर्ती घोटाला वो केस है, जिसमें बंगाल के विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई नौकरियों की बंदरबांट हुई थी. अब इसकी जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।  कानून का हथियार बनाकर भ्रष्टाचारियों को दिया गया था सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने कानून को ढाल बनाकर भ्रष्टाचारियों को कवच प्रदान किया था. उन्होंने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है. जो फाइलें सचिवालय की आलमारियों में बंद थीं, उन्हें अब खोल दिया गया है, ताकि जनता का पैसा लूटने वालों को सजा मिल सके। 

ममता बनर्जी को बड़ा झटका? 20 बागी सांसदों का ओम बिरला को पत्र, NDA में एंट्री की चर्चाएं तेज

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के बाद नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट होने का प्रोसेस शुरू हो गया है. तृणमूल कांग्रेस के 20 असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजा है और उन्होंने अलग गुट बनाने का प्रस्ताव दिया है. बताया जा रहा है कि इस गुट का नेतृत्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह बगावत ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी नई दिल्ली में ही मौजूद हैं. उनके साथ पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी हैं. इन सांसदों के पास दो विकल्प हैं. या तो ये टीएमसी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाएं या फिर विधानसभा की तरह अलग गुट बनाकर अलग हों।  तृणमूल कांग्रेस में बड़ी हलचल की खबर आ रही है. रिपोर्ट के अनुसार अब दिल्ली में भी टीएमसी में बड़ी टूट की आशंका है. टीएमसी  तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद अलग गुट बनाएंगे. ये 20 सांसद तृणमूल कांग्रेस से जल्द अलग होंगे. इस बाबत आज दिल्ली में अहम गतिविधियां हुईं. ये सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले की जानकारी देंगे. लेकिन स्पीकर अभी दिल्ली में मौजूद नहीं हैं, लोकसभा स्पीकर अभी चंडीगढ़ में हैं।  लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं. पार्टी में टूट के लिए कम से कम दो तिहाई सांसदों की जरूरत है. ये संख्या 19 होती है. इस बीच टीएमसी के बागी गुट ने 20 सांसदों के अपने साथ होने का दावा किया है।  इन बागी सांसदों का कहना है कि लोकसभा में वे अपने नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी को नहीं बल्कि काकोली घोष को चाहते हैं।  बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजने से पहले दिल्ली के मोतीलाल नेहरू मार्ग पर स्थित केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर सोमवार को एक बेहद गोपनीय बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।  बागी सांसद शाम 6.30 बजे टीएमसी एमपी शताब्दी राय के घर एक और मीटिंग करेंगे।   इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है. ये मुलाकात बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर हुई है. पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे हैं. सूत्रों के अनुसार इस मीटिंग में टीएमसी के लोकसभा के 14 सांसद मौजूद थे. इस मुलाकात में बीजेपी नेता और पूर्व त्रिपुरा सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे।  सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के 5 बागी सांसद सोमवार सुबह से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर मौजूद थे. इन पांच सांसदों के नाम बर्दमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा सांसद अरूप चक्रवर्ती हैं. दोपहर 12.00 बजे के बाद बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी उनके घर गए. इस बीच सूत्रों ने बताया कि लोकसभा के कुल 14 टीएमसी सांसदों ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की. दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी भूपेन्द्र यादव के घर से निकले।  इधर इस घटनाक्रम से पहले TMC से इस्तीफा देने वाले सुखेंदु शेखर से मिलने के लिए पार्टी के 5 सांसद पहुंचे. ये मुलाकात दिल्ली में हुई. सुखेंदु शेखर से मिलने आए सांसदों में बर्दमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा सासंद अरूप चक्रवर्ती शामिल थे।  रिपोर्ट के अनुसार TMC के बागी सांसद लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के बजाय काकोली घोष को पार्टी का नेता चाहते हैं।  बता दें कि राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने आज (सोमवार) ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा दिया है. इस बीच उनसे टीएमसी के पांच सांसद मिलने पहुंचे थे. इससे टीएमसी की राजनीति को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं।  बता दें कि TMC सांसदों में पहले ही विभाजन हो चुका है. तृणमूल कांग्रेस के विधायकों पर ममता बनर्जी की पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब पार्टी के संसदीय खेमे को भी एक और झटका लगा है।  ममता के सबसे विश्वस्त लेफ्टिनेंट फिरहाद हकीम ऋतब्रत से मिले इस बीच कोलकाता से खबर है कि ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त लेफ्टिनेंट और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने बागी विधायकों के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. ये मुलाकात विधानसभा में भी हुई है. फिरहाद हकीम ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है. फिरहाद हकीम ने कुछ दिन पहले ही कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दिया है।    आज सुखेंदु बोले, कल दूसरे ही बोलेंगे-ऋतब्रत वहीं राज्यसभा में एक दशक से ज़्यादा समय तक पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद और पार्टी, दोनों पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है. और पार्टी के 5 सांसदों से मुलाकात की है।  वहीं बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उन्होंने कई विधायकों से मुलाकात की है।  नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे और टीएमसी के राजनीतिक घटनाक्रम पर कहा कि, "यह सिर्फ़ सुखेंदु की बात नहीं है. असल में मैंने उनसे व्यक्तिगत रूप से बात नहीं की है. लेकिन उन्होंने जो कुछ भी कहा, मैं उससे ज़्यादातर सहमत हूं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर. उनकी बातें बिल्कुल सही थीं. संसद कोई क्विज़ शो की जगह नहीं है. सुखेंदु जो बता रहे हैं, उसका अनुभव मैंने खुद किया है. उनके जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया जाना निराशाजनक था, आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।  ये हो सकते हैं बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपे गए पत्र में जगदीश चंद्र बसुनिया, अरुप चक्रवर्ती, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और खलीलुर रहमान जैसे नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. वहीं काकोली घोष दस्तीदार, पार्थ भौमिक, अभिनेता-राजनेता देव और जून माल्या को लेकर भी असंतोष की अटकलें लगाई जा रही हैं।  तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, राज्यसभा सदस्य पद छोड़ा तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की … Read more

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात  आयुष शिक्षा को नई उड़ानः देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित होंगे संस्थान चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में  आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी -योगी   भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं सीएम योगी लखनऊ,  योगी सरकार आयुष चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। ये आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। योगी सरकार के निर्णय से न केवल प्रदेश में आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। नए महाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा। चार मंडलों में जमीन पहले से उपलब्ध प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को भी मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि प्रदेशवासियों को सुरक्षित, सस्ती तथा प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय के लिए पांच मंडलों में जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। देवीपाटन मंडल में गोंडा के विकास खंड वजीरगंज के ग्राम कोडर में लगभग 14.82 एकड़ भूमि, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़ भूमि, मेरठ मंडल के लिए गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़ भूमि, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ भूमि और बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि महाविद्यालय की  स्थापना के लिए चिन्हित की गयी है। इनमें से चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शिक्षा संस्थान शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी किए जाएंगे विकसित आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि सभी पांच मंडलों में आयुष महाविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध हो गयी है। वहीं वर्तमान में राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए आयुष महाविद्यालय केवल शिक्षा संस्थान नहीं होंगे, बल्कि शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहां आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आयुष शिक्षा को नई गुणवत्ता और पहचान मिलेगी।

Beach Vacation पर छाईं किश्वर मर्चेंट, स्टाइलिश बिकिनी लुक का वीडियो हुआ वायरल

मुंबई  मशहूर टीवी एक्ट्रेस किश्वर मर्चेंट इन दिनों अपने पति सुयश राय और बेटे संग वेकेशन पर हैं. किश्वर वेकेशन से लगातार फोटोज-वीडियोज शेयर करके फैंस को भी ट्रीट दे रही हैं. अब उन्होंने बिकिनी में अपना खास लुक शेयर किया है, मगर इसमें एक मजेदार ट्विस्ट है।  बिकिनी का वीडियो वायरल किश्वर ने अपने लेटेस्ट वीडियो में दिखाया है कि जब भी वो पति सुयश राय संग वेकेशन पर जाती हैं, तो दोनों अलग-अलग तरह से अपना टाइम स्पेंड करते हैं. किश्वर वेकेशन पर घूमते और चिल करते हुए फोटोशूट कराती हैं, जबकि उनके पति पूरा टाइम उनके कैमरामैन बनकर घूमते हैं।  किश्वर के नए वीडियो में देख सकते हैं कि फ्लोरल प्रिंटेड बिकिनी पहने वो बीच पर चिल करती हुई नजर आ रही हैं. वो इतराते हुए पोज देती दिखीं, जबकि उनके पति सुयश दौड़ते-भागते पत्नी किश्वर का फोटोशूट करते दिखाई दिए. कपल के इस अंदाज से कई लोग कनेक्ट कर रहे हैं. यही वजह है कि एक्ट्रेस का वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. कई सेलेब्स भी मजेदार अंदाज में वीडियो पर अपने रिएक्शन दे रहे हैं।  बिकिनी में छाईं किश्वर किश्वर के बिकिनी लुक की बात करें तो उन्होंने बिकिनी बॉटम संग ब्लू कलर का स्कार्फ भी कैरी किया है. ओपन हेयर और सटल मेकअप में वो स्टनिंग लगीं. चश्मा लगाए बीच पर उन्होंने टशन दिखाते हुए पोज दिए।  किश्वर मर्चेंट की बात करें तो वो 45 साल की हैं. वो मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं. मगर उन्होंने साल 2016 में दूसरे धर्म के सुयश राय संग शादी करके घर बसा लिया था. किश्वर के पति सुयश उनसे उम्र में 8 साल छोटे हैं. मगर धर्म और उम्र की दीवार कभी उनके रिश्ते के बीच नहीं आई. दोनों एक बेटे के पेरेंट भी बन चुके हैं और शादी के सालों बाद भी खुशहाल लाइफ जी रहे हैं। 

दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना: 80% से अधिक अंक पर छात्रों की माताओं को हर महीने 2100 रुपये

हिसार  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे 10वीं-12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं तो मां को दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत महिलाओं को हर माह 2100 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 148 पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों की लिस्ट जारी की है। मुख्यालय ने आदेश दिए हैं कि सूची में शामिल स्कूलों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों की लिस्ट तैयार की जाए जिन्होंने इस साल 10वीं-12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। हिसार जिले के 12 स्कूलों का नाम इसमें शामिल है। 17 प्वाइंटों पर मांगी होनहार की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए 17 बिंदुओं का एक फार्म तैयार किया है। जिसे समस्त डीईओ को जारी कर दिया गया है। प्रति कालम में होनहार के बारे में पूछा गया है, जिसमें नाम, पता, स्कूल का नाम, प्राप्त अंक, जन्म सहित अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। उपरोक्त फार्म को कक्षा टीचर व स्कूल मुखिया की तरफ से सत्यापित कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजनी होगी। जिसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। प्रदेश स्तर पर स्कूलों की संख्या अंबाला से 8 स्कूल, भिवानी से 7 स्कूल, चरखी दादरी से 3 स्कूल, फरीदाबाद से 5 स्कूल, फतेहाबाद से 6, गुरुग्राम से 4, हिसार से 12, झज्जर से 7, जींद से 7, कैथल से 6 स्कूल, करनाल से 8, कुरुक्षेत्र से 5, नूंह से 12 स्कूल, पलवल से 7, पंचकूला से 6 स्कूल, पानीपत से 6 स्कूल, रेवाड़ी से 5 स्कूल, रोहतक से 6 स्कूल, सिरसा से 7 स्कूल, सोनीपत से 7 स्कूल और यमुनानगर से 9 स्कूल शामिल हैं, जो कि सरकारी स्कूल की श्रेणी में है।   मुख्यालय की ओर से हमें पत्र मिला था। जिसमें हमसे पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के नाम मांगे गए थे, जिन्होंने 10वीं व 12वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हो। बीईओ को आदेश जारी कर दिए गए हैं।     – रामरतन, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार  

बस्तर में विकास कार्यों का जायजा ले रहे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, निर्माण कार्यों का लगातार निरीक्षण

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी  मिशन अमृत के तहत निर्माणाधीन इंटेक-वेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लिया जायजा, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का काम भी देखा  रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है।  उप मुख्यमंत्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा। करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।  तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम कम लागत, अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन से बढ़ रहा किसानों का भरोसा रायपुर,  कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इनके प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने वाले राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने पत्ता गोभी, धान तथा अन्य फसलों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे फसलों की वृद्धि और विकास में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। परिणामस्वरूप फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। धान की फसल में भी बेहतर वृद्धि तथा विकसित बालियों के रूप में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। राज्य सरकार एवं कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग करने वाले किसान अब अन्य कृषकों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।