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Saudi Real Estate बना भारतीय निवेशकों की पहली पसंद, शानदार रिटर्न और नए अवसरों ने बढ़ाया आकर्षण

दुबई  खाड़ी देशों के रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सऊदी अरब ने पहली बार विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों के लिए अपने प्रॉपर्टी बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। नए विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के लागू होने के साथ ही सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल भी शुरू कर दिया है। इस फैसले को सऊदी अरब के आर्थिक परिवर्तन कार्यक्रम ‘विजन 2030’ का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना, वैश्विक पूंजी आकर्षित करना और देश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के असर से दुबई का रियल एस्टेट बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब का नया कानून भारतीय प्रवासियों, एनआरआई निवेशकों और वैश्विक खरीदारों के लिए एक नए विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। दशकों बाद विदेशियों को मिला प्रॉपर्टी का मालिक बनने का अधिकार सऊदी अरब (Saudi Arabia Property News) में लंबे समय से लाखों विदेशी नागरिक काम करते रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल किराए के मकानों में रहने की अनुमति थी। अब पहली बार विदेशी नागरिकों को कानूनी रूप से आवासीय और निर्धारित श्रेणी की व्यावसायिक संपत्तियों का स्वामित्व प्राप्त करने का अवसर दिया गया है। भारतीय समुदाय सऊदी अरब में सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में शामिल है। ऐसे में इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों, कारोबारियों और लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों को मिलने की संभावना जताई जा रही है। अब वे केवल किराएदार नहीं बल्कि निर्धारित नियमों के तहत संपत्ति के मालिक भी बन सकेंगे। दुबई बाजार की सुस्ती के बीच सऊदी बना नया विकल्प पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर दुबई के रियल एस्टेट बाजार पर भी देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की सतर्कता बढ़ने से वहां संपत्तियों की खरीद-बिक्री की गति कुछ धीमी हुई है। इसी बीच सऊदी अरब ने विदेशी निवेशकों के लिए अपने बाजार को खोलकर क्षेत्रीय निवेश के समीकरण बदल दिए हैं। हालांकि एक्सपर्ट व्यू से दुबई की तुलना में सऊदी का रियल एस्टेट बाजार अभी शुरुआती चरण में है। यहां भविष्य की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन रीसेल मार्केट और लिक्विडिटी को परिपक्व होने में अभी समय लग सकता है। इसके बावजूद विजन 2030 के तहत हो रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस बाजार को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं। ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल से पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन रियल एस्टेट जनरल अथॉरिटी (REGA) ने विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के साथ ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ नाम का डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह ऑनलाइन बनाना है। विदेशी खरीदारों को अब विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। आवेदन, सत्यापन और पात्रता की अधिकांश प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी। किन लोगों को मिलेगा संपत्ति खरीदने का अधिकार नई नीति के तहत सऊदी अरब में वैध रूप से रह रहे विदेशी निवासी अपने रेजिडेंसी नंबर यानी इकामा के आधार पर सीधे आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल पर उनकी पात्रता का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। सऊदी अरब से बाहर रहने वाले विदेशी नागरिक भी निवेश कर सकेंगे, लेकिन उन्हें अपने देश में स्थित सऊदी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से डिजिटल पहचान प्राप्त करनी होगी। इसके बाद वे ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। विदेशी कंपनियों को भी पहली बार सऊदी अरब में सीधे प्रॉपर्टी खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें निवेश मंत्रालय (MISA) के ‘इन्वेस्ट सऊदी’ प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर राष्ट्रीय एकीकृत नंबर प्राप्त करना होगा। भारतीय निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला भारतीय निवेशकों के लिए यह निर्णय कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब में पहले से बड़ी भारतीय आबादी मौजूद है, जिससे किराए की मांग और आवासीय जरूरतें लगातार बनी रहती हैं। इसके अलावा देश में तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहर, औद्योगिक कॉरिडोर और पर्यटन परियोजनाएं भविष्य में प्रॉपर्टी की मांग को और बढ़ा सकती हैं।     रियल एस्टेट एक्स्पर्ट्स की माने तो लंबे समय के निवेश की सोच रखने वाले भारतीय निवेशकों के लिए यह बाजार बेहतर अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि निवेश से पहले स्थानीय कानून, कर व्यवस्था, स्वामित्व नियम और रीसेल शर्तों का विस्तृत अध्ययन करना आवश्यक होगा।     सऊदी अरब ने जिन क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोला है, उनमें दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें रेड सी प्रोजेक्ट, दिरियाह, अलउला और भविष्य का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट नियोम (NEOM) प्रमुख हैं। सरकार इन क्षेत्रों को पर्यटन, व्यापार, तकनीक और वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।     इन परियोजनाओं के विकसित होने के साथ आवासीय, व्यावसायिक और होटल सेक्टर में भी बड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। मक्का और मदीना के लिए अलग नियम हालांकि नई नीति के साथ कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। धार्मिक महत्व को देखते हुए मक्का और मदीना में संपत्ति स्वामित्व के नियम अलग रखे गए हैं। इन दोनों पवित्र शहरों में संपत्ति खरीदने का अधिकार सीमित श्रेणी के पात्र व्यक्तियों और सऊदी कंपनियों तक ही रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों की विशेष पहचान को सुरक्षित बनाए रखना है। सऊदी अरब के इस फैसले के प्रमुख फायदे     विदेशी नागरिकों को पहली बार कानूनी रूप से प्रॉपर्टी खरीदने का अवसर।     भारतीय प्रवासियों और एनआरआई निवेशकों के लिए नया निवेश विकल्प।     पूरी आवेदन प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनाई गई।     विजन 2030 के तहत विकसित हो रहे मेगा प्रोजेक्ट्स में निवेश की संभावना।     विदेशी कंपनियों को भी रियल एस्टेट बाजार में प्रवेश की अनुमति।     वैश्विक निवेश आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था को विविध बनाने की दिशा में बड़ा कदम। किन बातों का रखना होगा ध्यान     निवेश से पहले स्थानीय संपत्ति कानूनों का अध्ययन आवश्यक होगा।     शुरुआती वर्षों में बाजार … Read more

West Bengal Politics: सुवेंदु अधिकारी के नए कानून पर सियासी घमासान, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई का दावा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े धमाके की तरह होगा. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य के 54 साल पुराने कानून में बदलाव करने जा रही है. एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ लाने जा रहे हैं, जो अपराधियों की रीढ़ तोड़ देगा. इस नए कानून को उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कई गुना अधिक घातक और सख्त माना जा रहा है. इसे लेकर पूरे बंगाल के गुंडा-बवालियों में अभी से मौत का खौफ है. जानते हैं पूरी कहानी।  54 साल पुराने कानूनों की विदाई बंगाल राज्य सरकार1972 में बने कानून The West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972 उसमें संशोधन करने जा रही है.  इसे 1972 में पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित किया गया था और उसी वर्ष राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हुआ था।  इस कानून का संक्षिप्त इतिहास 1960 और 70 का दशक के दौर में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक आंदोलन और कानून-व्यवस्था की भारी समस्याएं थीं. सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) को बनाए रखने, उग्रवादी गतिविधियों को रोकने और अवैध हथियारों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार को विशेष शक्तियों की जरूरत थी, जिसके लिए यह कानून 1972 में लाया गया था।   ‘पश्चिम बंगाल में नया कानून? लेकिन अब बंगाल सरकार ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने जा रही है. उसने दशकों पुराने ढर्रे को बदल दिया है. 1972 के कानून अब आधुनिक संगठित अपराध और दंगाई मानसिकता से लड़ने के लिए नाकाफी साबित हो रहे थे. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बंगाल में ‘कानून का राज’ होगा, न कि ‘सिंडिकेट का राज’. 54 सालों से चली आ रही ढील अब हमेशा के लिए खत्म होने वाली है।  7 पीढ़ियों तक होगी वसूली, कोई नहीं बचेगा! इस कानून का सबसे खौफनाक पहलू इसका ‘रिकवरी मैकेनिज्म’ है. यदि कोई दंगाई सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई सिर्फ अपराधी से नहीं, बल्कि उसकी संपत्ति से होगी. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इसके प्रावधान इतने कड़े हैं कि एक बार दंगा करने पर अपराधी की आने वाली सात पीढ़ियां हर्जाना भरते-भरते कंगाल हो जाएंगी. यह केवल दंड नहीं, बल्कि ‘आर्थिक खात्मा’ है, जो दंगाइयों को कानून हाथ में लेने से पहले सोचने पर मजबूर कर देगा।  बुलडोजर मॉडल का भी ‘बाप’ है ये बिल उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ के मॉडल ने देशभर में दंगाइयों के बीच खौफ पैदा किया था, लेकिन सुवेंदु अधिकारी का यह नया बिल उससे भी दो कदम आगे है. इसमें ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन’ (बिना मुकदमे हिरासत) और ‘एक्सटर्नमेंट’ (जिले से निष्कासन) जैसी शक्तियां पुलिस को असीमित अधिकार देती हैं. यह बिल दंगाइयों को पनाह देने वालों के खिलाफ भी ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है. किसी को पनाह देना भी अब दो साल की सीधी जेल का निमंत्रण होगा।  विपक्ष की रूह क्यों कांप रही है? जैसे ही इस बिल का ड्राफ्ट सामने आया, विपक्ष के गलियारों में सन्नाटा पसर गया है. जिन नेताओं को लगता था कि वे दंगों के जरिए अपनी राजनीति चमका लेंगे, उनकी रूह अब कांप रही है. वे जानते हैं कि यह कानून न केवल गुंडों को खत्म करेगा, बल्कि उन बड़े चेहरों को भी बेनकाब करेगा जो दंगों को स्पॉन्सर करते हैं. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने साफ कर दिया है कि दंगा करना है, तो कीमत चुकाने के लिए तैयार रहो।  शांति और सुरक्षा का नया युग यह बिल बंगाल की बदलती तस्वीर का गवाह है. सरकार का कहना है कि यह कानून शरीफ नागरिकों की रक्षा के लिए एक ढाल है. जो बंगाल कल तक अराजकता की आग में जलता था. वह अब अपराधियों के लिए एक बड़ी जेल साबित होगा. सोमवार को जब यह कानून विधानसभा में बहस के लिए आएगा तो देखना यह होगा कि असल में क्या हुआ। 

मोदी सरकार में शिंदे की बढ़ी ताकत! NDA को अब नायडू-नीतीश की जरूरत नहीं? मंत्री पद पर बेटे की चर्चा तेज

नई दिल्ली 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए थे, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) 240 सीटों पर सिमट गई थी। पूर्ण बहुमत के 272 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा था। उस वक्त 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) और 12 सांसदों के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) 'किंगमेकर' बनकर उभरे थे। ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी बार बनी मोदी सरकार की चाबी इन्हीं दोनों नेताओं के हाथ में है और इनके बिना NDA का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, अब 2026 आते-आते सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। पश्चिम बंगाल और फिर महाराष्ट्र में एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने न सिर्फ मोदी सरकार को और मजबूत कर दिया है, बल्कि नायडू और नीतीश पर सरकार की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर दिया है। महाराष्ट्र: 'ऑपरेशन टाइगर' से उद्धव गुट में बड़ी सेंधमारी हाल ही में महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत एक बड़ा उलटफेर हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को तगड़ा झटका दिया है। उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर इन सांसदों ने आधिकारिक तौर पर अपना गुट बदल लिया है। शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसद:     ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव)     नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)     संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी)     संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)     भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)     संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम) इस बगावत के बाद लोकसभा में उद्धव गुट (UBT) के पास अब मात्र 3 सांसद बचे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है। दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जिसे इन 6 सांसदों ने आसानी से पार कर लिया। बंगाल में तो खेला ही हो गया, NDA में सबसे बड़ी पार्टी बनी NCPI पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। लोकसभा में TMC के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। इस बड़ी बगावत की अगुवाई बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर नेता कर रही हैं। इन सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। दल-बदल कानून के तहत संसद सदस्यता रद्द होने के खतरे से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक बेहद चालाक रणनीतिक कदम उठाया है। कानूनन दल-बदल से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ आना जरूरी था। इन सभी ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) नामक एक बेहद कम चर्चित और गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में अपने गुट का विलय कर लिया है। 2023 के आसपास पंजीकृत हुई यह गुमनाम सी पार्टी रातों-रात भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। 20 सांसदों के विलय के साथ ही यह अब लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और NDA के भीतर दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है। NDA का मजबूत अंकगणित और कैसे कम हुई निर्भरता? शिंदे के 6 नए सांसदों और NCPI के 20 सांसदों के NDA में शामिल होने से गठबंधन का कुल आंकड़ा लोकसभा में काफी मजबूत हो गया है। 2024 में सरकार गठन के समय NDA के पास लगभग 293 सांसद थे। अब यह आंकड़ा 318 तक पहुंच गया है। ऐसे में मौजूदा स्थिति यह है कि अगर आज चंद्रबाबू नायडू (16) और नीतीश कुमार (12) किसी बात पर नाराज होकर NDA से अपना समर्थन वापस भी ले लेते हैं, तब भी नए सांसदों और अन्य छोटे दलों के समर्थन से मोदी सरकार पूर्ण बहुमत (272) के आंकड़े के ऊपर ही रहेगी। यानी सरकार पर से 'किंगमेकर्स' का दबाव अब खत्म हो गया है। लोकसभा में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों और उनकी सीटों की मौजूदा स्थिति की टेबल नीचे दी गई है:   क्र. सं. राजनीतिक दल लोकसभा सीटें 1 BJP (भारतीय जनता पार्टी) 240 2 NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) 20 3 TDP (तेलुगु देशम पार्टी) 16 4 SHS (शिवसेना – शिंदे गुट) 13 5 JD(U) (जनता दल – यूनाइटेड) 12 6 LJP(RV) (लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास) 5 7 JD(S) (जनता दल – सेक्युलर) 2 8 JSP (जनसेना पार्टी) 2 9 RLD (राष्ट्रीय लोक दल) 2 10 AD(S) (अपना दल – सोनेलाल) 1 11 AGP (असम गण परिषद) 1 12 AJSU (ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन) 1 13 HAM(S) (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा – सेक्युलर) 1 14 NCP (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – अजीत पवार गुट) 1 15 SKM (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा) 1   कुल (Total NDA Seats) 318 NDA में बढ़ा शिंदे का रुतबा  इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अंदर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कद काफी बढ़ा दिया है। 2022 में विधायकों की बगावत के जरिए शिवसेना में दो फाड़ करने के बाद, अब लोकसभा में भी शिंदे ने यह साबित कर दिया है कि 'असली शिवसेना' उन्हीं के पास है और उनके पास जमीनी नेताओं का समर्थन है।  मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे को मिलेगा मंत्री पद का इनाम? उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने वाले इस गुप्त अभियान 'ऑपरेशन टाइगर' को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई महीनों से श्रीकांत शिंदे ही इस ऑपरेशन की रणनीति बना रहे थे। बागी सांसदों को दिल्ली लाने के लिए निजी विमान बुक करने से लेकर उनकी सुरक्षा और स्पीकर से मुलाकात तक का पूरा जिम्मा श्रीकांत शिंदे ने ही संभाला था। अब दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मोदी सरकार में जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार में शिवसेना (शिंदे गुट) को इसका बड़ा इनाम मिल सकता है। NDA के … Read more

Friday Horoscope 27 June 2026: जानें किस राशि पर रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा, किन्हें मिलेगी बड़ी खुशखबरी

मेष राशि- आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। जिस काम को लेकर पिछले कुछ दिनों से परेशान थे, उसमें राहत मिल सकती है। ऑफिस में काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें। घर का माहौल अच्छा रहेगा। पैसों के मामले में जल्दबाजी न करें। वृषभ राशि- मन थोड़ा हल्का रहेगा। परिवार के किसी सदस्य से अच्छी खबर मिल सकती है। नौकरी करने वालों का दिन सामान्य रहेगा। कारोबार में छोटी-सी कमाई भी खुशी दे सकती है। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन राशि- लोगों से खुलकर बात करें। आपकी बात का असर होगा। कोई नया काम शुरू करने का मन बन सकता है। खर्च और बचत में संतुलन बनाकर चलें। शाम तक कोई अच्छी खबर मिल सकती है। कर्क राशि- काम थोड़ा ज्यादा रहेगा, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। एक-एक करके सभी काम पूरे हो जाएंगे। परिवार का साथ मिलेगा। किसी पुराने दोस्त से बात हो सकती है। सेहत सामान्य रहेगी। सिंह राशि- मेहनत का फायदा मिलने के योग हैं। ऑफिस में आपकी बात सुनी जाएगी। कारोबार करने वालों को नया मौका मिल सकता है। घर में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा। कन्या राशि- जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, लेकिन आप उन्हें अच्छी तरह निभा लेंगे। नौकरी में मेहनत रंग लाएगी। घर में किसी शुभ काम की चर्चा हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। तुला राशि- किसी जरूरी काम में सफलता मिल सकती है। अगर कहीं पैसा फंसा हुआ है तो उसके मिलने की उम्मीद है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। बेवजह की बातों में समय खराब न करें। वृश्चिक राशि- नई उम्मीद के साथ दिन की शुरुआत होगी। किसी पुराने काम का अच्छा नतीजा मिल सकता है। दोस्तों से मुलाकात होगी। मन खुश रहेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। धनु राशि- दिन आपके पक्ष में रहेगा। कामकाज में अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। किसी अपने से मदद मिलेगी। खर्च सोच-समझकर करें। शाम का समय परिवार के साथ अच्छा बीतेगा। मकर राशि- आत्मविश्वास बना रहेगा। लंबे समय से रुका काम आगे बढ़ सकता है। नौकरी और कारोबार दोनों में स्थिति ठीक रहेगी। गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें। कुंभ राशि- किस्मत आपका साथ दे सकती है। नए काम की शुरुआत के लिए दिन अच्छा है। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। पैसों से जुड़ा कोई मामला आपके पक्ष में जा सकता है। मीन राशि- दिन राहत देने वाला रहेगा। कई दिनों से चली आ रही चिंता कम हो सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। कामकाज में धीरे-धीरे सफलता मिलेगी। आराम के लिए भी थोड़ा समय निकालें।

भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी: राजस्थान और कैलिफोर्निया मिलकर बनाएंगे स्मार्ट ग्रिड और क्लीन एनर्जी मॉडल

जयपुर राजस्थान की ऊर्जा यात्रा अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। यह सिर्फ एक सरकारी समझौता नहीं, बल्कि उस भविष्य की शुरुआत है, जहां बिजली सिर्फ पैदा नहीं होगी, बल्कि नई तकनीक के सहारे ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद भी बनेगी। इस बदलाव की कहानी हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के कैलिफोर्निया से जुड़ गई है। राजस्थान और अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC), कैलिफोर्निया ऊर्जा आयोग (CEC) और कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (CPUC) के बीच वर्चुअल माध्यम से सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी ऑनलाइन जुड़े और इसे दोनों राज्यों के लिए भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण समझौता बताया। सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर नहीं, तकनीक का होगा सीधा आदान-प्रदान इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राजस्थान को दुनिया के उन क्षेत्रों से सीखने का मौका मिलेगा, जिन्होंने ऊर्जा प्रबंधन में मिसाल कायम की है। कैलिफोर्निया लंबे समय से ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट बिजली व्यवस्था के लिए जाना जाता है। अब वही अनुभव राजस्थान के साथ साझा किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित करने और आधुनिक बिजली प्रबंधन से जुड़े शोध व अनुभव साझा किए जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार हो सकेगी। हजारों किलोमीटर की दूरी, लेकिन सोच और लक्ष्य एक ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि भले ही राजस्थान और कैलिफोर्निया भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन दोनों का लक्ष्य समान है। दोनों स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ भविष्य तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों राज्यों के नियामक ढांचे, नीतिगत अनुभव और जमीनी स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों को भी साझा करने का अवसर देगा। इससे राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा और नई गति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान पहले से बना रहा है हरित ऊर्जा में पहचान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राजस्थान आज देश के अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश में विशाल सौर ऊर्जा पार्क और अनुकूल पवन गति का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर हरित बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। सरकार केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों तक सुरक्षित, किफायती और निर्बाध बिजली पहुंचाने पर भी लगातार काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक पावर ग्रिड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और स्मार्ट मीटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू किया जा रहा है। रिकॉर्ड बिजली उत्पादन पर मिला वैश्विक सम्मान इसी बीच राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कोयला आधारित बिजली घरों ने रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उत्पादन कर नया इतिहास रचा है। इस उपलब्धि के लिए ‘मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को वैश्विक अवार्ड से सम्मानित किया। विद्युत भवन में आयोजित समारोह में संस्था के मैनेजर अरिहंत उपाध्याय और कोऑर्डिनेटर गरिमा जैन ने ऊर्जा मंत्री को सम्मान पत्र सौंपा। साथ ही उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेन्द्र श्रृंगी को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। 2 जून बना बिजली उत्पादन का ऐतिहासिक दिन ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 2 जून 2026 को प्रदेश की 7580 मेगावाट क्षमता वाली सभी 23 थर्मल इकाइयों ने 94.60 प्रतिशत उपयोग क्षमता के साथ रिकॉर्ड 7171 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। यह राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की सभी आठ इकाइयों ने भी अपनी कुल 2820 मेगावाट क्षमता में से 2790 मेगावाट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश न केवल हरित ऊर्जा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में भी नई मिसाल कायम कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ हुई यह तकनीकी साझेदारी और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन, दोनों मिलकर राजस्थान को आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत और आधुनिक ऊर्जा राज्यों की कतार में खड़ा कर सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग जमीन पर कितनी तेजी से बदलाव लाता है और प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को इसका कितना फायदा मिलता है।

क्या शुरू होने वाली है नई जंग? नेतन्याहू के बयान से भड़का ईरान, लेबनान में युद्ध के आसार तेज

बेरूत लेबनान दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व का एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण देश है. यहां इजरायल की सीमा से लगा दक्षिणी इलाका लंबे समय से तनाव का केंद्र रहा है. हिज्बुल्लाह ईरान समर्थित एक मजबूत संगठन है, यहां सक्रिय है. हाल के वर्षों में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार झड़पें हुई हैं।  2026  में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इजरायल ने साफ कहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, उसके सैनिक लेबनान के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेंगे. वहीं ईरान का रुख है कि इजरायल को पहले पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. यह जिद दोनों तरफ से नई जंग की स्क्रिप्ट लिख रही है।  विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं है. यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, हथियार नियंत्रण और बड़े देशों की रणनीति से जुड़ा मुद्दा है. लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और अगर नई जंग छिड़ी तो मानवीय संकट और बढ़ जाएगा।  इजरायल का रुख: सुरक्षा पहले, हथियार छोड़ो इजरायल बार-बार कह रहा है कि उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. हिज्बुल्लाह के पास हजारों रॉकेट और हथियार हैं जो इजरायल के शहरों को निशाना बना सकते हैं. इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना जरूरी है. अगर हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता तो इजरायली सेना वहां बनी रहेगी।  इजरायल का तर्क है कि पिछले समझौतों में हिज्बुल्लाह ने हथियार छोड़ने का वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया. इसलिए अब वे भरोसा नहीं कर रहे. इजरायल के अनुसार, हिज्बुल्लाह का हथियार रखना न सिर्फ इजरायल के लिए खतरा है बल्कि लेबनान की संप्रभुता को भी कमजोर करता है. इजरायल ने कई बार हवाई हमले किए हैं ताकि हिज्बुल्लाह की क्षमता कम हो. लेकिन इससे तनाव और बढ़ा है. अगर हिज्बुल्लाह फिर से हमला करता है तो इजरायल बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सकता है।  हिज्बुल्लाह और लेबनान की स्थिति  हिज्बुल्लाह खुद को लेबनान का रक्षक बताता है. उसके नेता कहते हैं कि इजरायल की मौजूदगी के खिलाफ वे हथियार नहीं छोड़ेंगे. हिज्बुल्लाह का मानना है कि इजरायल पहले लेबनान की जमीन छोड़े, तब बात हो सकती है. उन्होंने कुछ हथियार लेबनानी सेना को सौंपे लेकिन पूरी तरह से हथियार छोड़ने की बात नहीं मानी।  लेबनान सरकार कमजोर है. देश में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद हैं. हिज्बुल्लाह लेबनान की राजनीति में भी मजबूत है. अगर इजरायल नहीं हटता तो हिज्बुल्लाह समर्थकों में गुस्सा बढ़ेगा और नई लड़ाई शुरू हो सकती है. लेबनानी सेना दक्षिण में तैनात है लेकिन हिज्बुल्लाह की ताकत के आगे उसकी भूमिका सीमित लगती है।  ईरान का रणनीतिक खेल: इजरायल पहले हटे ईरान हिज्बुल्लाह का मुख्य समर्थक है. वह हथियार, पैसा और प्रशिक्षण देता है. ईरान का कहना है कि इजरायल को लेबनान से पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल हमले जारी रखता है तो वह जवाब देगा. ईरान-इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध लंबे समय से चल रहा है।  ईरान के लिए लेबनान सिर्फ एक मोर्चा है. वह पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. अगर इजरायल लेबनान में बना रहा तो ईरान दूसरे मोर्चों पर भी दबाव डाल सकता है. हाल के बयानों में ईरान ने कहा कि कोई भी समझौता लेबनान को कवर करे. इससे अमेरिका और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ा है।  नई जंग की संभावित स्क्रिप्ट: क्या हो सकता है? विश्लेषक मानते हैं कि अगर बात नहीं बनी तो नई जंग की स्क्रिप्ट इस तरह हो सकती है. पहले छोटी-छोटी झड़पें बढ़ेंगी. हिज्बुल्लाह रॉकेट दागेगा, इजरायल हवाई हमले करेगा. इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में और अंदर घुस सकती है. ईरान हिज्बुल्लाह को और मदद भेजेगा या दूसरे इलाकों से दबाव डालेगा।  इससे लेबनान में बड़े पैमाने पर तबाही होगी। हजारों लोग मारे जा सकते हैं, लाखों विस्थापित होंगे. बुनियादी ढांचा बर्बाद होगा. इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सैनिकों की तैनाती महंगी है. अमेरिका, जो शांति चाहता है, बीच में फंस सकता है।  संयुक्त राष्ट्र और अन्य देश सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दोनों पक्षों की जिद इसे मुश्किल बना रही है. अगर इजरायल हटने से इनकार करता रहा और हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ा तो युद्ध टलना मुश्किल होगा।  लेबनान की जंग सिर्फ दो देशों की नहीं है. यह पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करेगी. सऊदी अरब, तुर्की जैसे देश प्रभावित होंगे. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा. मानवीय संकट गहराएगा. लेबनान में पहले से लाखों शरणार्थी हैं. नई जंग से भूख, बीमारी और बेघर होने की समस्या बढ़ेगी. बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे, अस्पताल नष्ट हो जाएंगे।  क्या है समाधान? समाधान मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं. दोनों पक्षों को समझौता करना होगा. इजरायल को सुरक्षा गारंटी मिले और हिज्बुल्लाह हथियारों का कुछ हिस्सा लेबनानी सेना को सौंप दे. ईरान को भी आश्वासन चाहिए कि उसके हित सुरक्षित हैं. अमेरिका और अन्य शक्तियां मध्यस्थता कर सकती हैं. लेबनान की सरकार को मजबूत होना चाहिए ताकि वह अपने पूरे इलाके पर नियंत्रण रख सके. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आर्थिक मदद देकर लेबनान को स्थिर करना चाहिए। 

राजस्थान के 76 कस्बे बने नगर पालिका, विकास और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

जयपुर राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में अक्सर बड़े फैसलों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार जो हुआ, उसने सिर्फ सरकारी फाइलों का वजन नहीं बढ़ाया, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों को भी नया पता दे दिया, जो वर्षों से अपने कस्बे को शहर बनते देखने का इंतजार कर रहे थे। कस्बों से शहर बनने का सफर सोचिए… एक छोटा कस्बा, जहां सड़कें तो हैं लेकिन शहर जैसी व्यवस्था नहीं। जहां आबादी बढ़ती रही, बाजार फैलते रहे, मकान ऊंचे होते गए, लेकिन सरकारी सुविधाएं वहीं की वहीं अटकी रहीं। अब यही कस्बे नगर पालिका बनने जा रहे हैं। यानी अब इनके पास अपना प्रशासन होगा, अपने विकास की रफ्तार होगी और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का अलग तंत्र होगा। 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार राजस्थान सरकार ने प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी देकर पिछले 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में नगरीय निकायों की संख्या 309 से बढ़कर 385 हो जाएगी। इसके साथ ही इन नए निकायों के प्रशासनिक संचालन के लिए 684 नए पदों का भी सृजन किया गया है। यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि उन इलाकों के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है, जो लंबे समय से शहर जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे थे। सबसे ज्यादा फायदा किन जिलों को? सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा जयपुर और झुंझुनूं को मिला है। दोनों जिलों में सात-सात नई नगरपालिकाओं का गठन किया गया है। जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, गट्टू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगर पालिका का दर्जा मिला है। वहीं झुंझुनूं में सिंघाना, डूंडलोद, जाखल, सुलताना, बुहाना, मलसीसर और मण्ड्रेला अब नए शहरी निकायों के रूप में पहचान बनाएंगे। इन जिलों की भी बदलेगी तस्वीर दौसा, अलवर और टोंक में चार-चार नई नगरपालिकाएं बनाई गई हैं। अजमेर, बाड़मेर और बालोतरा में तीन-तीन नए निकाय बने हैं। इसके अलावा सीकर, बूंदी, जालौर, नागौर, बीकानेर, धौलपुर, करौली, उदयपुर, श्रीगंगानगर, कोटा, बारां, पाली, चूरू, प्रतापगढ़, सिरोही और कई अन्य जिलों के कस्बों को भी नगर पालिका का दर्जा देकर विकास की नई कतार में खड़ा कर दिया गया है। आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलेगा? असल बदलाव अब इन कस्बों की तस्वीर में दिखाई देगा। नगर पालिका बनने के बाद स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, नालियां, कचरा प्रबंधन और शहरी योजनाओं को लागू करना पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। लंबे समय से गांव और शहर के बीच झूल रहे इन इलाकों को अब अपनी अलग प्रशासनिक पहचान मिलेगी। 684 नई नौकरियों का रास्ता खुला सरकार ने सिर्फ नगरपालिकाओं की घोषणा कर औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि इनके संचालन के लिए 684 नए पदों को भी मंजूरी दी है। हर नई नगर पालिका में एक अधिशासी अधिकारी, सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक (स्वास्थ्य निरीक्षक), वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक और दो कनिष्ठ सहायकों के पद स्वीकृत किए गए हैं। यानी नए निकाय शुरुआत से ही प्रशासनिक ढांचे के साथ काम करेंगे। युवाओं के लिए क्यों है बड़ी खबर? इन पदों का एक और बड़ा असर युवाओं पर पड़ेगा। पिछले तीन वर्षों में स्वायत्त शासन विभाग में पहली बार इतनी बड़ी भर्ती का रास्ता खुला है। लंबे समय से सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला रोजगार की नई उम्मीद भी लेकर आया है। आउटसोर्सिंग पर भी बड़ा फैसला सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले से गठित छह नगरपालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, सफाई जमादार और सफाई कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इन निकायों के लिए पहले स्वीकृत 54 पदों से जुड़ी व्यवस्था भी निरस्त कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब नगरीय निकायों की प्रशासनिक संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहती है। आगे क्या बदलेगा? राजस्थान के तेजी से बढ़ते कस्बों के लिए यह फैसला सिर्फ सीमा बदलने का नहीं, बल्कि पहचान बदलने का है। जिन इलाकों में लोग वर्षों से बेहतर सड़क, नियमित सफाई, व्यवस्थित विकास और मजबूत स्थानीय प्रशासन की मांग कर रहे थे, वहां अब बदलाव की घड़ी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में यह फैसला जमीन पर कितना असर दिखाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

RBI New Rule: ₹25,000 तक का लाभ मिलेगा, भारतीय रिजर्व बैंक ने लागू किए नए नियम

  नई दिल्‍ली सोचिए एक दिन आपके फोन पर एक मैसेज आता है कि आपके 20,000 रुपये कट गए हैं, जबकि आपने कभी इसका पेमेंट नहीं किया था और ना ही कोई अप्रूवल दिया था. फिर तुरंत आप इसकी जांच करते हुए बैंक से बात करते हैं, बैंक भी ये बताने में असमर्थ होता है कि पैसे कैसे मिलेंगे।  आपने शिकायत भी दर्ज करा दी कि आपके खाते से 20,000 रुपये का ऑनलाइन फ्रॉड हो चुका है, लेकिन सवाल हमेशा से रहेगा कि आपको पैसा वापस मिलेगा या नहीं? क्‍योंकि ज्‍यादातर ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कस्‍टमर्स का पैसा रिकवर नहीं हो पाता है. हालांकि, अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सीधे तौर पर शामिल हो चुका है।   RBI ने एक नया नियम निकाला है, जिसके तहत अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड या UPI के जरिए स्‍कैम होता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपको मुआवजे का भुगतान करेगा. 24 जून 2026 को, आरबीआई ने नोटिफिकेशन जारी किया है। किस तरह के फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा ये नियम स्‍मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होते हैं और 1 जनवरी, 2027 से उस तारीख को या उसके बाद किए गए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए प्रभावी होंगे।  सरल शब्दों में कहें तो, इसमें आज आप जितने भी प्रकार के डिजिटल भुगतान करते हैं, वे सभी शामिल हैं, जैसे यूपीआई ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान, चाहे वे कार्ड स्वाइप या टैप करके किए गए हों या कार्ड की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करके किए गए हों. अगर आपने डिजिटल माध्यम से पैसे का लेन-देन किया है, तो इसे इस कैटेगरी में रखा जाएगा।  कौन करेगा भुगतान?  जब कोई धोखाधड़ी वाला लेनदेन होता है, तो नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है, आप, बैंक, या कोई और? RBI ने यह भी जानकारी दी है कि यह तय किस आधार पर किया जाएगा. आरबीआई का कहना है कि बैंक सिर्फ यह कहकर हट नहीं सकता कि फ्रॉड के दौरान कस्‍टमर्स लापरवाह थे, अब उन्‍हें साबित भी करना होगा।  RBI ने रखा तीन कंडीशन     अगर धोखाधड़ी बैंक की गलती के कारण हुई है, जैसे कि सुरक्षा में चूक, सिस्टम में गड़बड़ी, या बैंक द्वारा आपको धोखाधड़ी की सूचना न भेजना, तो नियम स्पष्ट है. बैंक को पूरे पैसे का भुगतान करना होगा, चाहे कस्‍टमर ने इसकी जानकारी दी हो या नहीं।      अगर धोखाधड़ी किसी तीसरे पक्ष, जैसे कि भुगतान ऐप, भुगतान गेटवे या दूरसंचार प्रदाता के कारण हुई है, न कि आपके या बैंक के कारण, तो भी आपको शून्य दायित्व और पूर्ण धनवापसी प्राप्त होगी, लेकिन केवल तभी जब कस्‍टमर धोखाधड़ी की घटना की तारीख से पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना देता है. पांच दिन बाद रिपोर्ट करें, और आपकी देनदारी बैंक की अपनी आंतरिक नीति के अनुसार तय की जाएगी।      अगर धोखाधड़ी आपकी लापरवाही के कारण हुई है, जैसे कि आपने अपना ओटीपी साझा किया, अपने बैंक से मिली स्पष्ट धोखाधड़ी की चेतावनी को अनदेखा किया, या कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड किया, तो नियम अधिक जटिल हैं, और यहीं पर इस अधिसूचना का वास्तव में नया हिस्सा सामने आता है।  आपकी गलती पर भी मिल सकती है रकम नए नियमों के तहत, भले ही आप तकनीकी रूप से लापरवाह रहे हों, जैसे कि आपने किसी फ़िशिंग लिंक पर क्लिक किया हो या कोई ऐसा ओटीपी शेयर किया हो जो आपको नहीं करना चाहिए था, फिर भी आपको मुआवजा मिल सकता है, बशर्ते नुकसान कम हो और आपने तुरंत कार्रवाई की हो।  कितना मिलेगा मुआवजा?  नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुआवजे का भुगतान पूरे लाइफ में एक ही बार किसी एक व्‍यक्ति को किया जाएगा. यह भुगतान 25,000 रुपये या 85 फीसदी जो भी कम हो किया जाएगा. अगर मान लीजिए किसी व्‍यक्ति के साथ 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है और कस्‍टमर ने शिकायत दर्ज कराई है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये का ही मुआवजा दिया जाएगा. अगर उसके साथ दोबारा फ्रॉड होता है तो उसे कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।  कौन कितना करेगा पेमेंट?  छोटे धोखाधड़ी के मामलों में, खासकर 29,412 रुपये से कम के नुकसान वाले मामलों में, जहां मुआवजा नुकसान का 85 प्रतिशत होता है. घरेलू धोखाधड़ी के मामलों में, 65 प्रतिशत रिजर्व बैंक द्वारा, 10 प्रतिशत ग्राहक के बैंक द्वारा और बाकी 10 प्रतिशत लाभार्थी बैंक द्वारा वहन किया जाएगा. लाभार्थी बैंक, वह बैंक है जिसने सबसे पहले आपका चोरी हुआ पैसा प्राप्त किया था।  29,412 रुपये और 50,000 रुपये के बीच के थोड़े बड़े नुकसान के लिए, जहां मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये है, RBI, ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक क्रमशः 19118 रुपये, 2941 रुपये और 2941 रुपये का योगदान करेंगे।   

सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील रसोइयों के लिए नया नियम, दस्तावेज अनिवार्य किए गए

 दारौंदा (सिवान)  बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों के लिए शिक्षा विभाग ने नया निर्देश जारी किया है। विभाग ने सभी रसोइयों की पे-आईडी (Pay ID) बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। इसके लिए स्कूलों को सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। ये दस्तावेज जमा करना होगा अनिवार्य पे-आईडी बनाने के लिए प्रत्येक रसोइया को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति संबंधित विद्यालय में जमा करनी होगी। विद्यालय प्रधानों को इन दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें स्कूल के अभिलेख में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। दस्तावेज नहीं तो अटक सकता है मानदेय शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन रसोइयों के पास आधार, पैन कार्ड या बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज नहीं होंगे, उनकी पे-आईडी नहीं बन पाएगी ऐसे में भविष्य में मानदेय का भुगतान प्रभावित हो सकता है। इसलिए जिनके दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द बनवाने की सलाह दी गई है। डिजिटल और पारदर्शी होगी भुगतान व्यवस्था विभाग का उद्देश्य रसोइयों के मानदेय भुगतान को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। पे-आईडी बनने के बाद भुगतान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और रिकॉर्ड का रखरखाव भी आसान हो जाएगा। इससे भुगतान में होने वाली देरी और तकनीकी समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा। स्कूलों में शुरू हुई दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया विभागीय आदेश के बाद प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में रसोइयों से जरूरी दस्तावेज लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्कूल प्रबंधन सभी रसोइयों से समय पर दस्तावेज जमा कराने की अपील कर रहा है, ताकि पे-आईडी बनाने का काम तय समय पर पूरा हो सके और भविष्य में मानदेय भुगतान में किसी तरह की परेशानी न आए।  

अयोध्या राम मंदिर विवाद पर देवरिया से योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

देवरिया  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाया है। अयोध्या के दौर पर आए अरविंद केजरीवल ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच करने वाली एसआईटी पर सवाल उठाए हैं। सीएम योगी ने कहा है कि, जब इन्हें कुछ नहीं मिला तो रामभक्तों पर आक्षेप कर रहे हैं,अयोध्या धाम को बदनाम कर रहे हैं। सीएम योगी ने देवरिया में एक जनसभा में यह बात कही। दिल्ली को बर्बादी के अलावा कुछ नहीं दिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'एक दिल्ली से सज्जन वहां आए हैं, अयोध्या। दिल्ली की जनता ने उन्हें 15 वर्ष अवसर दिया,लेकिन दिल्ली को उन्होंने बर्बादी,भ्रष्टाचार के सिवा कुछ नहीं दिया, मैं उनसे पूछना चाहूंगा, डबल इंजन की सरकार ने 9 वर्ष में अयोध्या को जो सवांरा है, देखें इस मॉडल को। फिर अपने कारनामों पर पश्चाताप करो। यह न्याय अयोध्या के साथ जो डबल इंजन की सरकार ने किया, अगर यही न्याय आम आदमी पार्टी दिल्ली के साथ करती तो दिल्ली भी चमकती, जैसे आज अयोध्या चमक रही है।' जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो सीएम योगी ने कहा कि, मैंने 19 जून को अयोध्या के दौरे पर कहा था, जन आस्था के साथ खिलवाड़ न हो। अयोध्या हम सबकी आस्था की प्रतीक है। अयोध्या पर आक्षेप मत करो, श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखो। मैंने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। एसआइटी रिपोर्ट आई, कार्रवाई प्रारंभ हो गई है। उन्होंने कहा कि, जन आस्था के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसके साथ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम करेंगे। आज मोहर्रम है, कहीं किसी का अता पता नहीं है, कोई शस्त्र नहीं निकल रहा, उत्सव के माहौल में कोई उपद्रव नहीं कर सकता, अगर करेगा तो सात पीढ़ियों तक भुगतेगा। आक्षेप लगाने वालों की मंशा अच्छी नहीं योगी ने कहा कि, जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है। ये वे लोग हैं जो लोग भगवान राम को नकार चुके थे, कहते थे कि राम हुए ही नहीं। ये लोग अयोध्या को नकारते रहे। दूसरा पक्ष वह है जो जय श्रीराम पर लाठी गोली चलाते थे, तुम बताओगे हमें आस्था। रामनवमी पर दंगा करवाते थे, कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाते थे। कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं था, बल्कि नोचा था। सरकार ने पहले दिन कहा था कि दूध का दूध पानी का पानी होगा। मैं फिर कहता हूं कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो, उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ मत करो, प्रमाण है तो एसआईटी को सबूत पेश करो।