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मछुआरों के लिए नई पहल, मुख्यमंत्री साय ने वितरित की आधुनिक उपकरण सामग्री

कोंडागांव/रायपुर. सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सोमवार को कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के मत्स्य पालकों एवं मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों को आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न आधुनिक उपकरण एवं सामग्री प्रदान की गई।  मुख्यमंत्री साय ने ग्राम मालाकोट के कमल सिंह नेताम एवं ग्राम जोबा के नरेंद्र कश्यप को मोटर साइकिल और आइस बॉक्स प्रदान किए। इन संसाधनों के माध्यम से अब दोनों हितग्राही अपनी मछलियों को सुरक्षित तरीके से दूरस्थ बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके व्यवसाय को नई गति मिलेगी। हितग्राहियों ने बताया कि पहले मछलियों के परिवहन और संरक्षण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आइस बॉक्स उपलब्ध होने से अब मछलियों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। वहीं मोटर साइकिल मिलने से परिवहन आसान होने के साथ-साथ समय और लागत की भी बचत होगी। आधुनिक जाल से बढ़ेगा उत्पादन कार्यक्रम में ग्राम बड़ेकनेरा के ललित बघेल एवं रामलाल नेताम को मछली पकड़ने के लिए आधुनिक जाल वितरित किए गए। हितग्राहियों ने बताया कि नए जाल मिलने से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी तथा व्यवसाय को और अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया जा सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मत्स्य पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है और सरकार इस क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन से प्राप्त यह सहयोग उनके व्यवसाय के विस्तार और आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक संसाधनों की मदद से वे अपने मत्स्य व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।

पार्टी में फूट की चर्चाओं के बीच TMC में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, ममता ने लिया बड़ा एक्शन

कोलकत्ता   पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टूटने और महाराष्ट्र की तरह पार्टी के सिंबल पर कब्जे की खबरों के बीच ममता बनर्जी के सबसे वफादार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मोर्चा संभाल लिया है. टीएमसी के पहले निर्वाचित विधायक और विधानसभा में मनोनीत नेता प्रतिपक्ष (LoP) चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को दल-बदल और बगावत की सभी अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का बहुमत आज भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है. संगठन पर पार्टी के पुराने वफादारों का ही नियंत्रण रहेगा।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने बड़ा एक्शन लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियों, पार्टी से जुड़े संगठनों को तत्काल प्रभाव से विलय कर दिया है. टीएमसी ने कहा है कि सभी कमेटियों और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन का पुनर्गठन किया जाएगा।  टीएमसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि गहन विचार-विमर्श के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां, साथ ही इसके सभी अनुषांगिक संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएंगे।  TMC ने कहा कि पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कार्य-निष्पादन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की एक व्यापक प्रक्रिया चलाएगी. इस प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर मुख्य संगठन और सभी अनुषांगिक संगठनों की संगठनात्मक संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी।  पार्टी अपने संगठन को सुदृढ़ बनाने और उसे नए उत्साह तथा उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बता दें कि बंगाल विधानसभा में हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को TMC में फूट का सामना करना पड़ रहा है. कुछ आनुषांगिक संगठन आलाकमान के फैसले से इतर दूसरे गुट के फैसलों के साथ सहमति जता रहे हैं। टीएमसी ने भंग की सारी कमेटियां और संगठन तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभी कमेटियों के साथ-साथ अपने सभी फ्रंटल संगठनों को भी तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला किया है. पार्टी ने कहा कि अब वह एक विस्तृत आंतरिक समीक्षा करेगी, जिसमें सभी स्तरों पर कामकाज और संगठनात्मक कार्यप्रणाली का मूल्यांकन शामिल होगा. इस प्रक्रिया के नतीजों के आधार पर, मुख्य संगठन और उससे जुड़े सभी विंग्स के लिए एक नए सिरे से तैयार संगठनात्मक ढाँचे की घोषणा बाद में की जाएगी।  पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘गहन विचार-विमर्श के बाद, यह फैसला किया गया है कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियां, और साथ ही उसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएँगे. पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कामकाज की समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का एक व्यापक अभियान चलाएगी. इस प्रक्रिया से सामने आए नतीजों के आधार पर, मुख्य संगठन और सभी फ्रंटल संगठनों के संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी।  उन्होंने आगे कहा, ‘पार्टी अपने संगठन को मज़बूत करने और उसे नए जोश और उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।  TMC के 16 फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन हैं. टीएमसी की फ्रंटल संगठन की संख्या लगभग 16 है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये संगठन पार्टी के विभिन्न वर्गों जैसे युवा, महिला, छात्र, मजदूर आदि को संगठित करते हैं।   कमेटियों की बात करें तो इसमें TMC की मुख्य कार्यकारी कमेटी है. इसके अलावा कोर कमेटी, स्टेट कमेटी, जिला और ब्लॉक कमेटी और अनुशासन समिति है. अब इन सभी का विलय कर दिया गया है और कमेटियों का गठन किया जाएगा।   पैसे और सत्ता के दम पर बगावत कराने की कोशिश : शोभनदेव शोभनदेव चट्टोपाध्याय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब निष्कासित और बागी नेताओं (ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा) के गुट 20 से 50 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं. शोभनदेव ने इन दावों के पीछे की इनसाइड स्टोरी को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाये।  नेता विपक्ष के पद के लिए 58 विधायकों ने रीताब्रता बनर्जी का समर्थन किया टीएमसी विधायकों की बैठक के बाद 58 सदस्यों के हस्ताक्षरों वाला एक संयुक्त पत्र विधानसभा स्पीकर को सौंपा गया है, जिसमें विपक्ष के नेता के तौर पर रीतातब्रता बनर्जी के नाम का प्रस्ताव किया गया है।   टीएमसी के करीब 60 विधायक बैठक के लिए विधानसभा पहुंचे टीएमसी के 80 विधायकों में से लगभग 60 विधायक बैठक के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे, जिससे इस बात की अटकलें तेज़ हो गई हैं कि वे शायद विधायक दल पर नियंत्रण हासिल करने और विपक्ष के नेता के पद पर दावा ठोकने की कोशिश कर सकते हैं।  तो ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 टीएमसी विधायकों का सपोर्ट? रिताब्रता बनर्जी ने 59 टीएमसी विधायकों के समर्थन का दावा किया है. ऐसे में अगर बनर्जी के बताए नंबर सही हैं, तो इससे विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखेगा, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 MLAs का सपोर्ट बचेगा. हालांकि, इन दावों को अलग से वेरिफाई नहीं किया गया है, और तृणमूल कांग्रेस ने भी अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

कर्नाटक की सियासत में नया अध्याय: डीके शिवकुमार ने संभाली कमान, 13 मंत्रियों का शपथ ग्रहण

कर्नाटक कर्नाटक में पिछले तीन साल से चल रहा मुख्यमंत्री पद का विवाद आखिरकार थम गया है। कांग्रेस के अहम रणनीति कार माने जाने वाले डीके शिवकुमार राज्य की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। बुधवार को कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में डीके शिवकुमार ने पद और गरिमा की शपथ ली। उनके साथ कर्नाटक कांग्रेस के बड़े दलित नेता जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही डीके के 13 और मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र का नाम भी शामिल है राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए निकले डीके शिवकुमार सबसे पहले अपनी मां के आवास पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेता समेत संत समाज उनकी प्रतीक्षा में था। शिवकुमार ने सबसे पहले वहां मौजूद संतों का अभिवादन किया। संतों ने मिलकर ‘होने वाले मुख्यमंत्री’ को पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद शिवकुमार मंच पर पहुंचे, जहां सबसे पहले उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का गले लगकर अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का स्वागत किया। संविधान की प्रति लेकर ली शपथ राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिवकुमार को बुलाया, तो डीके के हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति भी थी। इसी प्रति को हाथ में लेकर उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली, जिस वक्त डीके शपथ ले रहे थे उनके कार्यकर्ताओं के बीच में जबरदस्त जोश देखने को मिला। शपथ लेने के बाद डीके ने मंच पर जनता के सामने झुककर उनका अभिवादन किया। डीके के शपथ लेने के बाद जी परमेश्वरा ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद एक-एक करके बाकी मंत्रियों ने भी अपने पद की शपथ ली। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे यतींद्र भी शामिल थे। नए मंत्रियों में कौन-कौन शामिल? कर्नाटक में तीन साल के उठा पटक के बाद सत्ता संभालने वाले डीके शिवकुमार की टीम में नए नाम भी शामिल हुए हैं। उप मुख्यमंत्री के रूप में जी. परमेश्वर ने शपथ ली है। इसके अलावा के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायर गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्दारमैया, बैरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल ने भी मंत्री के रूप में पद और गरिमा की शपथ ली। वीआईपी रहा सीएम शिवकुमार का शपथ ग्रहण कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह भव्य रहा है। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य में मौजूद रहे। उनकी मां गौरम्मा, पत्नी उषा और उनके बच्चे शामिल थे। समारोह में धार्मिक गुरु, फिल्म जगत की हस्तियां, खिलाड़ी और उद्योगपति भी मौजूद थे। चालीस से अधिक धर्मगुरु समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा अभिनेता रविचंद्रन, अभिनेत्री जयमाला, किच्चा सुदीप, रम्या, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद और उद्योगपति अनिल कुंबले जैसी जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद थीं। परंपरा से हटकर शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम दिशा के बजाय पूर्व दिशा की ओर मुख करके आयोजित किया गया। यह निर्णय आध्यात्मिक और ज्योतिषीय सलाहकारों की सलाह पर लिया गया था। लोक भवन परिसर में स्थित 'ग्लास हाउस' में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जहां निर्धारित स्थानों पर लगभग 3,500 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। धर्मगुरुओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी, जबकि समारोह की कार्रवाई को सभी तक पहुंचाने के लिए छह एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से अधिक वीआईपी पास जारी किए गए थे। बता दें, तीन साल तक चली खींचतान के बाद सिद्दारमैया ने आखिर कार अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद शिवकुमार का राजतिलक तय माना जा रहा था। हालांकि, दिल्ली में पार्टी नेताओं ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन बाद में पूरा मामला खुल गया। दिल्ली से लौटकर आए सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दिया और इसके साथ ही पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया गया। शिवकुमार ने विधायकों के साथ अपना समर्थन दिखाते हुए राज्यपाल से शपथ के लिए समय मांगा। इसके बाद तीन जून की तारीख तय हुई। बुधवार तीन जून को पद और गरिमा की शपथ लेने के साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस का किंगमेकर आखिरकार किंग बन ही गया।  

चुनाव से पहले यूपी में बदलाव: मंत्रियों को नए जिलों का प्रभार, संगठन मजबूत करने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं। हाल ही में कैबिनेट में शामिल किए गए नए मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। कई वरिष्ठ मंत्रियों के जिलों के प्रभार भी बदले हैं। वहीं कुछ नए चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मिली जानकारी के अनुसार जयवीर सिंह, बेबी रानी मौर्य सहित कई मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया गया है। इन बदलावों को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासन और संगठन की कमान और मजबूत बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। योगी सरकार के वरिष्ठ मंत्री भूपेंद्र चौधरी को आगरा के साथ कासगंज की भी जिम्मेदारी दी गई है। हाल में योगी कैबिनेट में शामिल हुए मनोज पांडेय को सीतापुर का प्रभार मिला है। इसके साथ ही अजीत पाल को फतेहपुर, समेंद्र तोमर को मुजफ्फरनगर, हंसराज विश्वकर्मा को सोनभद्र और सुरेन्द्र दलेर को बुलंदशहर जिले का प्रभारी बनाया गया है। किसे मिला है कौन सा जिला योगी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों में सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती, सुरेश कुमार खन्ना को वाराणसी और लखनऊ, स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर, बेबी रानी मौर्य को इटावा और हाथरस, लक्ष्मी नारायण चौधरी को अलीगढ़ और फिरोजाबाद, जयवीर सिंह को झांसी और फर्रुखाबाद, धर्मपाल सिंह को गाज़ियाबाद और रामपुर, नन्द गोपाल गुप्ता "नन्दी" को मिर्जापुर और चित्रकूट, अनिल राजभर को आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर, राकेश सचान को रायबरेली और कन्नौज, अरविन्द कुमार शर्मा को जौनपुर और भदोही, योगेन्द्र उपाध्याय को कानपुर नगर, आशीष पटेल को गोंडा, संजय निषाद को कानपुर देहात, ओम प्रकाश राजभर को अम्बेडकरनगर, दारा सिंह चौहान को कुशीनगर और श्रावस्ती, सुनील कुमार शर्मा को सहारनपुर, अनिल कुमार को मुरादाबाद का प्रभारी बनाया गया है। वहीं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) में से नितिन अग्रवाल को लखीमपुर खीरी, कपिल देव अग्रवाल को बिजनौर, रवीन्द्र जायसवाल को गाजीपुर, सन्दीप सिंह को मथुरा, गुलाब देवी को अमरोहा, गिरीश चन्द्र यादव को सुल्तानपुर, धर्मवीर प्रजापति को मैनपुरी, असीम अरूण को हरदोई और मेरठ, जे.पी.एस. राठौर को संभल और बरेली, दयाशंकर सिंह को देवरिया और मऊ, नरेन्द्र कुमार कश्यप को शाहजहांपुर, दिनेश प्रताप सिंह को बांदा और बहराइच, अरुण कुमार सक्सेना को बदायूं, दयाशंकर मिश्र "दयालु" को बलिया और महराजगंज का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। वहीं राज्य मंत्री में मयंकेश्वर शरण सिंह को प्रतापगढ़, दिनेश खटीक को शामली, संजीव गोंड को चंदौली, बलदेव सिंह ओलख को पीलीभीत, जसवन्त सिंह सैनी को बागपत, रामकेश निषाद को हमीरपुर, मनोहर लाल मन्नू कोरी को महोबा, संजय सिंह गंगवार को जालौन, बृजेश सिंह को गौतमबुद्धनगर, के.पी. मलिक को हापुड़, सुरेश राही को बाराबंकी, प्रतिभा शुक्ला को अमेठी, राकेश राठौर को औरैया, रजनी तिवारी को उन्नाव, सतीश चन्द्र शर्मा को बलरामपुर, दानिश आजाद अंसारी को ललितपुर, विजय लक्ष्मी गौतम को संतकबीरनगर, कृष्णा पासवान को कौशाम्बी और कैलाश सिंह राजपूत को एटा जिले का प्रभार सौंपा गया है।

61 की उम्र में तीसरी बार दूल्हा बनेंगे आमिर खान? गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट संग शादी की तारीख आई सामने

बॉलीवुड के गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान एक बार फिर दूल्हा बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. आमिर खान और गौरी स्प्रैट काफी लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं और अब इस कपल ने शादी करने का फैसला कर लिया है. इसके साथ ही शादी की तारीख भी सामने आ चुकी है. जानकारी के मुताबिक, आमिर और गौरी स्प्रैट के बीच की नजदीकियां अब शादी के मुकाम तक पहुंच चुकी हैं. दोनों ने अपनी जिंदगी का यह बड़ा फैसला आपसी सहमति और पूरी समझदारी के साथ लिया है, जिसकी तैयारियां भी अब शुरू हो चुकी हैं. आमिर खान कब करेंगे शादी? इस कपल को लेकर आमिर खान के परिवार के एक बेहद करीबी सूत्र ने कुछ बेहद दिलचस्प जानकारियां शेयर की हैं. सूत्र के अनुसार, आमिर और गौरी पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से एक परिवार की तरह ही साथ रह रहे हैं. उन्होंने पिछले कुछ महीनों में मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर, आपस में एक बेहद खुशहाल, शांत और स्थिर जिंदगी बनाई है. दोनों के बीच का तालमेल बेहद शानदार रहा है. करीबी सूत्र ने बताया कि अब उन्होंने बस अपने परिवारों की मौजूदगी में इस खूबसूरत सफर को औपचारिक रूप देने का फैसला किया है.  इस शादी की तारीख और वेन्यू भी तय हो चुका है. आमिर खान और गौरी स्प्रैट का यह विवाह समारोह आने वाली 5 जुलाई को होगी. शाहरुख-सलमान आएंगे शादी में सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े आलीशान होटल या डेस्टिनेशन वेडिंग को नहीं चुना गया है, बल्कि यह पूरा कार्यक्रम आमिर खान के घर पर ही आयोजित होगा. हालांकि मेहमानों की लिस्ट अभी तक आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की गई है, लेकिन चर्चा है कि उनके अच्छे दोस्त सलमान खान और शाहरुख खान भी अपनी शादी में शामिल हो सकते हैं. आमिर ने गौरी पर क्या था? अपने हालिया इंटरव्यू में से एक में, आमिर ने अपने रिश्ते की गहराई के बारे में खुलकर बात की थी और इस बात का इशारा दिया कि शादी ही कमिटमेंट का एकमात्र पैमाना नहीं है. एक्टर ने कहा था, 'गौरी और मैं एक-दूसरे को लेकर बहुत सीरियस हैं और हम एक बहुत ही कमिटेड रिश्ते में हैं और हम पार्टनर हैं. हम साथ हैं. शादी की बात करें तो, मेरा मतलब है, मेरे दिल में, मैं पहले से ही उससे शादी कर चुका हूं. इसलिए हम इसे औपचारिक रूप देते हैं या नहीं, यह कुछ ऐसा है जिसका फैसला मैं समय के साथ करूंगा.' आमिर और गौरी का रिश्ता आमिर (61) और गौरी (46) के बीच उम्र का 14 साल का फासला होने के बावजूद उनके बीच काफी मजबूत रिश्ता है. उन्हें अक्सर अलग-अलग इवेंट्स में साथ देखा जाता है. अगर यह शादी होती है, तो यह एक्टर की पिछली दो शादियों के बाद उनकी जिंदगी का एक नया चैप्टर शुरू होगा. आमिर खान की तीसरी शादी आमिर की पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी, जो 1986 से 2002 तक चली. इस पूर्व जोड़ी के दो बच्चे हैं—जुनेद खान और इरा खान.गौरी से प्यार होने से पहले, आमिर की शादी फिल्ममेकर किरण राव से हुई थी. इस जोड़ी ने 2005 में शादी की थी और उनके बेटे आजाद का जन्म हुआ था. शादी के 16 साल बाद, 2021 में उन्होंने अलग होने का ऐलान कर दिया था. बता दें कि गौरी भी 6 साल के बेटे की मां हैं. हालांकि शादी खत्म होने के बावजूद, आमिर और किरण ने अपने रिश्ते को बनाए रखा है और अक्सर फिल्म्स प्रोजेक्ट्स पर साथ मिलकर काम करते हैं.

दिल्ली में दर्दनाक हादसा: होटल में आग से मचा कोहराम, जांच के आदेश

नई दिल्ली  दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में मंगलवार सुबह एक होटल में भीषण आग लग गई। इस घटना में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी हैं। घायलों का इलाज आसपास के अस्पतालों में चल रहा है। आग लगने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। देखते ही देखते आग की लपटों ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया। मौके पर पहुंची दमकल की कई गाड़ियां घंटों तक आग पर काबू पाने में जुटीं, जबकि पुलिस ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस भयावह घटना ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। धुएं के गुबार और चीख-पुकार से दहला इलाका प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगते ही इमारत से काले धुएं के घने गुबार उठने लगे। रेस्टोरेंट और आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। मौके पर चीख-पुकार का माहौल बन गया, जबकि कई लोग इमारत के भीतर फंसे लोगों को बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए। पूरे इलाके को सुरक्षा कारणों से घेर लिया गया और राहत-बचाव अभियान शुरू किया गया। सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को सुबह 9:45 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। मालवीय नगर के एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही बचाव दल की टीम को एक्टिव कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इमारत के निचले हिस्से में होटल/रेस्टोरेंट चल रहा था और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग वहीं से शुरू हुई। आग के कारणों की जांच की जा रही है। बिजली सप्लाई बंद कर आग पर पाया गया काबू राहत कार्य के दौरान बिजली विभाग ने तत्काल इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी, जिससे आग को फैलने से रोकने में मदद मिली। दमकल कर्मियों और अन्य एजेंसियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रशासन ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों के अनुसार कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की होगी जांच मालवीय नगर के विधायक सतीश उपाध्याय ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि प्रशासन और सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि रेस्टोरेंट या होटल निर्धारित नियमों और लाइसेंस शर्तों के तहत संचालित हो रहा था या नहीं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रेप पीड़िता की 31 हफ्ते से अधिक की प्रेग्नेंसी पर हाईकोर्ट सख्त, भ्रूण की धड़कन रोकने की अनुमति नहीं

जबलपुर  हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक होने के कारण गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया। बता दें कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की अनुमति के लिए मंडला जिला न्यायालय द्वारा भेजे गए प्रकरण की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में हाईकोर्ट कर रहा था। पीड़िता की उम्र 15 साल 10 माह है और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद एकलपीठ ने पाया कि 27 अप्रैल 2026 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की गर्भावस्था 26 हफ़्ते और 5 दिन थी। मेडिकल जांच को हुए 32 दिनों से अधिक का समय हो गया है। वर्तमान में उसकी गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक है। उसका हीमोग्लोबिन 7.5 है। मेडिकल बोर्ड की राय के अनुसार भ्रूण जीवित है और यह एक व्यवहार्य गर्भावस्था है। इस चरण में गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करना संभव नहीं है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता भी नहीं चाहती थी कि यह न्यायालय ऐसा कोई निर्देश जारी करे। सुनवाई के दौरान उसने न्यायालय को इस बारे में सूचित किया था। दिल की धड़कन रोकने का निर्देश न होने की स्थिति में जीवित भ्रूण को जीवन भर शारीरिक और मानसिक विकलांगता का गंभीर खतरा बना रहेगा। मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टें अपने आप में सब कुछ स्पष्ट कर देती हैं। बच्चे का जन्म जीवित अवस्था में होता है, तो राज्य उस बच्चे की पूरी देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 

RIMS में 75 से अधिक कर्मियों की भर्ती पर उठे सवाल, एसीबी जांच की मांग से मचा हड़कंप

 रांची  राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत समानता एजेंसी द्वारा बहाल किए गए करीब 75 से अधिक कर्मियों से कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में रिम्स निदेशक को एक लिखित शिकायत सौंपकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है। यह शिकायत शासी परिषद के सदस्य संजय सेठ के प्रतिनिधि ने शिकायत कर खुलासा किया है। मालूम हो कि इससे पहले भी बुंडू ट्रामा सेंटर में आउटसोर्स के माध्यम से बहाली में पैसे लेने का मामला आया था जिस पर कानूनी कार्रवाई चल रही है और और एक कर्मचारी अजय सेठ को भी हटाया गया है शिकायत क बाद निदेशक डा. राजकुमार ने जांच कमेटी गठित किया है। उधर समानता एजेंसी की और से इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। प्राप्त शिकायत के अनुसार रिम्स में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत मानव बल उपलब्ध कराने के लिए एम-एस समंता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर आपरेटर, लिफ्ट अपरेटर, मल्टी टास्किंग स्टाफ (वार्ड बाय), लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य पदों पर मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी को करीब 1000 मानव बल नियुक्त करना है, लेकिन अभी भी कई पद खाली रखे गए हैं। नियुक्ति के बदले लाखों रुपये लेने का आरोप शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि चयनित अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की राशि ली गई। आरोप है कि यह रकम संबंधित रिक्त पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित कराने के एवज में वसूली गई। शिकायतकर्ता ने कहा है कि कई युवाओं ने रोजगार पाने की उम्मीद में जमीन, गहने तक बेच दिए या कर्ज लेकर राशि का भुगतान किया। पत्र में कहा गया है कि बेरोजगारी और सीमित रोजगार अवसरों का लाभ उठाकर युवाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आरोप है कि आउटसोर्स व्यवस्था में मानव बल रखने के नाम पर एक संगठित रैकेट काम कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है। अधिकारियों को जानकारी होने का भी आरोप इस कथित वसूली की जानकारी आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को है। दावा किया गया है कि इस विषय की जानकारी मौखिक रूप से संस्थान स्तर पर पहले भी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले की सूचना रिम्स के तत्कालीन और वर्तमान प्रशासनिक पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नियुक्तियों की पारदर्शिता और संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। बताया जा रहा है कि अगर प्रबंधन सही से जांच करती है और सभी कर्मियों के रोजगार की सुरक्षा का वादा करती है तो सभी ऐसे पीड़ितों का नाम सामने लाया जाएगा। किन-किन पदों का किया गया उल्लेख शिकायत में जिन पदों पर कथित रूप से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से मानव बल रखने और अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से :     नर्सिंग स्टाफ     कंप्यूटर अपरेटर     वार्ड बाय     मल्टी टास्किंग स्टाफ     लिफ्ट आपरेटर     लैब टेक्नीशियन     पैरामेडिकल स्टाफ     अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन पदों के अलावा भी अन्य श्रेणियों में आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसकी जांच आवश्यक है। एसीबी जांच की मांग शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), झारखंड से कराई जाए। नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची, भुगतान विवरण, एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच हुए लेन-देन की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। यह भी मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों से कथित रूप से राशि ली गई है, उन्हें राहत प्रदान की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर फिर उठे सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि नियुक्ति के बदले पैसे लेने जैसे आरोप सही साबित होते हैं तो इसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर चयन होने की स्थिति में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आउटसोर्स एजेंसियों के चयन, नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और कार्य आवंटन की नियमित आडिट व्यवस्था होनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। अब निगाहें रिम्स प्रशासन पर शिकायत पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा शासी परिषद से जुड़े पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें रिम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि

मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें : सचिव राज्य निर्चाचन आयोग

मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें : सचिव राज्य निर्चाचन आयोग फोटोयुक्त मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 18 जून को होगा भोपाल  मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग दीपक सिंह ने यह बात पंचायत एवं नगरीय निकायों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा के दौरान कही। सिंह ने जिलेवार लंबित दावे-आपत्तियों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण कार्य में पूरी पारदर्शिता रहनी चाहिए। सिंह ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के संबंध में जो भी कार्यवाही करें, उसकी जानकारी स्टेरिंग कमेटी की बैठक के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में जरूर लायें। उन्होंने वर्किंग और नानवर्किंग ईव्हीएम की जानकारी देने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची को नियत समय पर जिले की वेबसाइट पर अपलोड करें। बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग शहडोल से वीडियो कांफ्रेंसिंग में शामिल हुए। इस दौरान उप सचिव राज्य निर्वाचन आयोग मनोज मालवीय, श्रीमती संजू कुमारी सहित अन्य अ‍धिकारी उपस्थित थे।  

मेहकप्रीत कौर की सफलता से बढ़ा उत्साह, NDA 2026 में लड़कियों के लिए क्या हैं नियम और मौके

 रूपनगर पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले के पपराली गांव की मेहकप्रीत कौर ने एयर फोर्स अकादमी (AFA) मेरिट लिस्ट में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-1 हासिल कर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए सीटों की संख्या अब भी बेहद सीमित है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करना एक असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है। क्या है NDA और क्यों है इतना महत्वपूर्ण? नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA), पुणे के खड़कवासला में स्थित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अधिकारी तैयार किए जाते हैं। एनडीए में 12वीं के बाद प्रवेश लिया जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) साल में दो बार इसकी परीक्षा आयोजित करता है। परीक्षा में गणित और जनरल एबिलिटी टेस्ट (GAT) के दो पेपर होते हैं। कुल 1800 अंकों में से 900 अंक लिखित परीक्षा और 900 अंक एसएसबी (SSB) इंटरव्यू के लिए निर्धारित हैं। लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को पांच दिवसीय एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जिसमें नेतृत्व क्षमता, मानसिक कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और शारीरिक फिटनेस का आकलन किया जाता है। वायुसेना में जाने के इच्छुक उम्मीदवारों को इसके अलावा कम्प्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली (CPSS) परीक्षा भी पास करनी होती है, जिसे जीवन में केवल एक बार दिया जा सकता है। महिलाओं के लिए सीटें अब भी सीमित साल 2021 तक महिलाओं को एनडीए परीक्षा के माध्यम से प्रवेश की अनुमति नहीं थी। अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महिलाओं को भी एनडीए परीक्षा में शामिल होने का अधिकार दिया। अदालत ने महिलाओं को बाहर रखने की नीति को लैंगिक भेदभावपूर्ण बताया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने महिलाओं के लिए सीमित सीटें निर्धारित कीं। शुरुआती चरण में सेना में 10, नौसेना में 3 और वायुसेना फ्लाइंग ब्रांच में केवल 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थीं। हालांकि समय के साथ इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन कुल सीटों में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी बहुत कम है। यही वजह है कि एयर फोर्स अकादमी मेरिट लिस्ट में AIR-1 हासिल करना बेहद बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। क्या है माई भागो AFPI? माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट (AFPI) पंजाब सरकार की एक अनूठी पहल है, जिसे विशेष रूप से लड़कियों को रक्षा सेवाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। संस्थान का NDA प्रिपरेटरी विंग 2023 में शुरू किया गया था और यह देश का पहला ऐसा संस्थान है जो केवल लड़कियों को एनडीए प्रवेश के लिए प्रशिक्षण देता है। यहां प्रवेश के लिए उम्मीदवार का पंजाब का निवासी होना और कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है। 11वीं में पढ़ रही छात्राएं भी आयु मानदंड पूरा करने पर आवेदन कर सकती हैं। प्रशिक्षण, हॉस्टल और भोजन का पूरा खर्च पंजाब सरकार वहन करती है। संस्थान में अत्याधुनिक साइबर लैब, इंडोर शूटिंग रेंज, फिटनेस सेंटर और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नाम पर समर्पित विशेष हॉस्टल भी बनाया गया है। चयन के बाद क्या होता है? एनडीए में चयनित उम्मीदवार तीन वर्ष तक खड़कवासला (पुणे) या भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला (केरल) में सैन्य और शैक्षणिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इसके बाद उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से स्नातक की डिग्री प्रदान की जाती है। फिर सेना के उम्मीदवार देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), नौसेना के उम्मीदवार एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी और वायुसेना के उम्मीदवार हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को 56,100 रुपये प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी मिलता है। मेहकप्रीत और कोमलप्रीत की सफलता बनी प्रेरणा एयर फोर्स अकादमी मेरिट लिस्ट में AIR-1 हासिल करने वाली मेहकप्रीत कौर अब हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में प्रशिक्षण लेंगी। वहीं NDA मेरिट में AIR-18 हासिल करने वाली कोमलप्रीत कौर खड़कवासला में तीन वर्षों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। इन दोनों छात्राओं की सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि अवसर और सही प्रशिक्षण मिले तो पंजाब के गांवों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्थान हासिल कर सकती हैं। यह उपलब्धि न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है, बल्कि रक्षा सेवाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।