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मानव तस्करी पर सख्ती: पुलिस मुख्यालय में राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित

मानव दुर्व्‍यापारके विरुद्ध प्रभावी विवेचना, समन्वय एवं पुनर्वास को लेकर पुलिस मुख्यालय में एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीड़ित-केंद्रित जांच, अंतरराज्यीय समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई पर दिया गया विशेष बल भोपाल  महिला सुरक्षा शाखा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय के नवीन भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में "Capacity Building Seminar on Investigation & Response to Human Trafficking Cases" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के अधिकारी, महिला अपराधों की विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का शुभारंभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा)अनिल कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मानव दुर्व्‍यापारएक बहुआयामी एवं संगठित अपराध है, जिसकी प्रभावी रोकथाम केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हो सकती। उन्होंने जागरूकता, रोकथाम, बचाव एवं पुनर्वास को मानव दुर्व्‍यापारनिरोधक तंत्र के चार प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि पुलिस, अन्य विभागों एवं समाज के समन्वित प्रयासों से ही इस अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने सभी जिलों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को और अधिक सक्रिय बनाते हुए लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा तथा पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। उप पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती सिमाला प्रसाद ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की भूमिका, सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा मानव दुर्व्‍यापारकी संवेदनशील एवं प्रभावी विवेचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गुमशुदगी के प्रकरण में मानव दुर्व्‍यापारकी आशंका का गंभीरता से परीक्षण कर पूरे नेटवर्क का पता लगाना आवश्यक है। उन्होंने घटना के बाद पहले 48 घंटे को "गोल्डन आवर" बताते हुए त्वरित कार्रवाई, पीड़ित-केंद्रित एवं निष्पक्ष विवेचना, जनजागरूकता तथा मानव दुर्व्‍यापारसे जुड़े अपराधियों का व्यवस्थित डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। डीआईजी डॉ. किरणलताकेरकेट्टा ने "Bridging the Gaps: Strengthening Investigation & Prosecution of Child Trafficking Cases" विषय पर व्याख्यान देते हुए बाल तस्करी के मामलों में सशक्त विवेचना, प्रभावी अभियोजन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। आवाज़ एनजीओ के निदेशक प्रशांत कुमार दुबे ने "Born to Live, Not to be Sold: Address the Trafficking of Newborn and Adolescent Girls"विषय पर व्याख्यान देते हुए मध्यप्रदेश के नवजात शिशुओं एवं किशोरियों की तस्करी, अवैध दत्तक ग्रहण (Illegal Adoption) तथा इससे जुड़े संगठित अपराधों के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ऐसे अपराधों की प्रभावी रोकथाम के लिए संवेदनशील एवं वैज्ञानिक विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई तथा विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), इंदौर डॉ. सीमा अलावा ने भी अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए अवैध दत्तक ग्रहण एवं बाल तस्करी से जुड़े मामलों में साक्ष्य संकलन, पीड़ित-केंद्रित जांच तथा पुलिस, न्यायपालिका एवं संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (IJM) की एडवोकेट तृप्ति पाटिल ने "AHTUs As Guardians of Childhood: Combating Trafficking through Early Intervention" विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि प्रारंभिक हस्तक्षेप, संवेदनशील समुदायों की पहचान तथा समय रहते की गई कार्रवाई से बाल तस्करी की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। कार्यशाला में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एएचटीयू की भूमिका केवल पीड़ित के रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित के सुरक्षित पुनर्वास, काउंसलिंग, संरक्षण, न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग तथा भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संस्थागत समन्वय, त्वरित जांच एवं समयबद्ध विचारण पर दिए गए निर्देशों की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई। प्रत्येक जिले की एएचटीयू को राज्य स्तर पर स्थापित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो (AHTB) के साथ सतत समन्वय बनाए रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी जिलों को लंबित मानव दुर्व्‍यापारप्रकरणों की समीक्षा कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों एवं अपराध के पैटर्न की पहचान कर लक्षित कार्रवाई करने के लिए भी निर्देशित किया गया। महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम सहित अन्य संबंधित विभागों तथा सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ नियमित समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानव दुर्व्‍यापारजैसे संगठित अपराधों की रोकथाम में पुलिस एवं अन्‍यविभागों तथा सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ही प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में नियमित समन्वय बैठकें आयोजित कर सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने तथा लंबित प्रकरणों की सतत समीक्षा किए जाने की आवश्यकता बताई गई। कार्यशाला के दौरान मानव दुर्व्‍यापारके मामलों में पुनर्वास की प्रक्रिया को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि केवल पीड़ित की काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों की भी समुचित काउंसलिंग की जानी चाहिए, ताकि पारिवारिक परिस्थितियों को समझते हुए पीड़ित का सफल एवं स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा) श्रीमती प्रियंका शुक्ला ने सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।  

4 जुलाई से दो दिन के मध्यप्रदेश दौरे पर रहेंगे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, अहम बैठकों का कार्यक्रम

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार दो दिवसीय प्रवास पर 4 जुलाई को आएंगे मध्यप्रदेश इंदौर में जुटेंगे 1500 से अधिक बीएलओ, करेंगे सीधा संवाद इंदौर भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार 4 और 5 जुलाई को दो दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आ रहे हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला मध्यप्रदेश दौरा है। दो दिवसीय दौरे के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त इंदौर में बूथ लेवल ऑफिस से बात करेंगे एवं दूसरे दिन ओंकारेश्वर और महेश्वर के भ्रमण पर रहोगे। इंदौर में जुटेंगे 5 जिलों के 1500 से अधिक बीएलओ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त 4 जुलाई को इंदौर पहुंचेंगे। यहां पर लता मंगेशकर सभागृह में आयोजित बीएलओ कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। इसे दौरान वे इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और खंडवा जिले के 1,500 से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के साथ संवाद करेंगे। उल्लेखनीय है कि ज्ञानेश कुमार देश के ऐसे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर चुनाव व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इससे पहले दिल्ली में भी बीएलओ और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के साथ सीधे संवाद की अनूठी पहल की थी। धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का करेंगे भ्रमण इंदौर में बीएलओ के साथ महत्वपूर्ण बैठक और चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ओंकारेश्वर और महेश्वर जाएंगे। इस दौरान वे ओंकारेश्वर में दर्शन और नर्मदा जी का पूजन करेंगे, जिसके बाद ऐतिहासिक महेश्वर किले का भी भ्रमण करेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सायंकाल इंदौर से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।  

बालाघाट बाढ़: फंसे ग्रामीणों के लिए देवदूत बनी मध्यप्रदेश पुलिस, सुरक्षित निकाले गए लोग

बालाघाट में बाढ़ में फंसे ग्रामीणों के लिए मध्यप्रदेश पुलिस बनी जीवनरक्षक 16 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया किरनापुर पुलिस, हट्टा पुलिस, एसडीआरएफ एवं हॉक फोर्स के संयुक्त अभियान से खेतों में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला वर्षा के मौसम में सावधानी रखने की अपील बालाघाट प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा के बीच मध्यप्रदेश पुलिस आपदा की प्रत्येक स्थिति में आमजन की सुरक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में बालाघाट जिले के थाना किरनापुर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे 16 ग्रामीणों का पुलिस, एसडीआरएफ एवं हॉक फोर्स के संयुक्त अभियान के माध्यम से सफलतापूर्वक सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा के कारण थाना किरनापुर क्षेत्र के ग्राम भानपुर में खेतों पर कृषि कार्य करने गए लगभग 16 ग्रामीण अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण चारों ओर से बाढ़ के पानी में घिर गए। नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से उनके वापस लौटने का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और सभी ग्रामीण बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही थाना किरनापुर पुलिस ने बिना विलंब किए थाना हट्टा पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) एवं हॉक फोर्स की टीम के साथ संयुक्त रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। तेज बहाव एवं विषम परिस्थितियों के बावजूद टीम ने साहस, सूझबूझ और उत्कृष्ट समन्वय का परिचय देते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर सभी 16 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाला तथा सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। समय पर की गई त्वरित कार्रवाई के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। जनसुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की अपील मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि लगातार वर्षा के दौरान नदी-नालों, पुल-पुलियों एवं जलमग्न मार्गों को पार करने का प्रयास न करें। खेतों अथवा अन्य स्थानों पर जाने से पूर्व मौसम एवं जलस्तर की जानकारी अवश्य प्राप्त करें तथा प्रशासन एवं पुलिस द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूर्णतः पालन करें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस द्वारा आवश्यक बैरिकेड एवं सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। आमजन से अनुरोध है कि प्रतिबंधित मार्गों से आवागमन न करें तथा किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल डायल-112 अथवा निकटतम पुलिस थाने को सूचना दें। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशवासियों की सुरक्षा के लिए 24*7 सतर्क एवं प्रतिबद्ध है तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्यरत है।  

मध्यप्रदेश में तबादला एक्सप्रेस: 9 IPS अफसरों के ट्रांसफर, जानें किसे मिली कौन-सी नई जिम्मेदारी

भोपाल  प्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात नौ IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए। रुचिवर्धन मिश्र पुलिस महानिरीक्षक भोपाल ग्रामीण जोन होंगी। वहीं, हरिनारायण चारी अब पुलिस मुख्यालय में एससीआरबी के स्थान पर प्रशासन का दायित्व संभालेंगे‌। शहडोल के पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव की जगह कुमार अग्रवाल और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के स्थान पर प्रियंका शुक्ला को भेजा गया है।गृह विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार चंद्रशेखर सोलंकी पुलिस महानिरीक्षक विशेष सत्र बल इंदौर रेंज को पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम जोन बनाया है। यशपाल सिंह राजपूत पुलिस अधीक्षक रेल इंदौर और रामजी श्रीवास्तव सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस अकादमी भौंरी होंगे। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन आदर्श कटियार को दूरसंचार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं, अनुराग पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन के पास पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल और आइएपीटीसी इंदौर का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद कुमार तिवारी पुलिस अधीक्षक इंदौर रेल के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे। भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर को मिली नई जिम्मेदारी इस फेरबदल में सबसे बड़ा नाम भोपाल के पूर्व पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र का है. उन्हें अब पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी रुचिवर्धन मिश्र को भोपाल (ग्रामीण) जोन की कमान सौंपी गई है. वह अपनी कार्यशैली के लिए भी प्रसिद्ध रहे हैं. चंद्रशेखर सोलंकी नर्मदापुरम जोन के आईजी बनाए गए हैं. वहीं सिमाला प्रसाद को खरगोन रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा मिथिलेश शुक्ला को सागर जोन की कमान मिली है।  इन जिलों के बदले गए एसपी (SP) गृह विभाग द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार शहडोल और शाजापुर जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को बदल दिया गया है. प्रियंका शुक्ला को अब शाजापुर का नया एसपी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले के एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  किस IPS को मिली कौन-सी जिम्मेदारी शासन स्तर पर हुए बड़े फेरबदल को आगामी कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।  किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी: चंद्रशेखर सोलंकी: इन्हें आईजी, नर्मदापुरम ज़ोन की जिम्मेदारी दी गई है. मिथिलेश शुक्ला: इन्हें आईजी, सागर जोन का नया कमान संभाला गया है. सिमाला प्रसाद: इन्हें डीआईजी (DIG), खरगोन रेंज के पद पर नियुक्त किया गया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर रहे हरिनारायण चारी मिश्र PHQ में IG (प्रशासन) बने हैं. रुचिवर्धन मिश्र को IG, भोपाल (ग्रामीण) जोन की जिम्मेदारी दी गई है. प्रियंका शुक्ला को एसपी, शाजापुर की जिम्मेदारी मिली है. संजय कुमार अग्रवाल एसपी, शहडोल बनाए गए हैं.

सिंधु जल विवाद में चीन की एंट्री क्यों? भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने ड्रैगन का क्यों लिया सहारा

नई दिल्ली  पाकिस्तान दशकों से सिंधु से अपनी प्यास बुझा रहा था. सिंधु जल समझौते से फायदा उठा रहा था. मगर वह अपनी औकात भूल गया. उसे यह याद नहीं रहा कि सिंधु जल समझौते की चाबी भारत के पास है. पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक करवाकर बहुत बड़ी गलती कर दी. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को दोतरफा मार मारी. पहले तो ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए. उसके बाद सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. भारत ने जब से सिंधु का पानी रोका है, तब से पाकिस्तान की हालत खराब है. वह पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तानी नेताओं के बयान में बार-बार सिंदु का दर्द झलक रहा है. अलग-अलग मंचों पर सिंधु का राग अलाप रहा है. जब इन सबसे भारत पर कोई असर नहीं पड़ा तो पाकिस्तान अब चीन के पल्लू में जा छिपा है. पाकिस्तान ने अबकी बार सिंधु जल विवाद पर सीधे चीन को घसीट लिया है।  दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद पुराना है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल सकती. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में चीन का नाम भी जोड़ दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि हिमालय से निकलने वाली नदियां सिर्फ भारत और पाकिस्तान की नहीं हैं, बल्कि चीन भी इनका बड़ा हितधारक है. सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान ने अचानक चीन को इस विवाद में क्यों घसीटा? पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है? सबसे पहले जानते हैं कि पाकिस्तान ने अब चीन का नाम कैसे और क्यों लिया है. दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां कुदरत की देन हैं. ये नदियां सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती हैं. उनका कहना है कि चीन से भी कई बड़ी नदियां निकलती हैं, इसलिए पानी का मुद्दा पूरी मानवता से जुड़ा है और चीन की भूमिका भी अहम है. यानी पाकिस्तान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है।  पाकिस्तान का पूरा बयान क्या है? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘चीन के बारे में दो सवाल थे. सबसे पहले हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों का पानी कुदरत की एक बड़ी देन है. हिमालयी नदी प्रणाली अल्लाह की एक नेमत है, जो सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती है. चीन की नदियां भी वहीं से निकलती हैं. इसलिए, यह पूरी इंसानियत की साझा विरासत है. पानी से जुड़े बड़े मुद्दों पर चीन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहेगा, क्योंकि वह सिर्फ़ दक्षिण एशिया (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली नदियों के मामले में ही नहीं, बल्कि हिमालय से चीन और सुदूर पूर्व (हमारे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) की ओर बहने वाली विशाल नदी प्रणालियों के मामले में भी एक अहम पक्षकार है।  चीन का नाम क्यों लिया? अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान ने चीन का नाम क्यों लिया. तो इसका जवाब सिंपल है- प्रेशर यानी दबाव. जी हां, सिंधु जल पर पाकिस्तान छटपटा रहा है. भारत ने जब से पानी रोका है, तब से वह बिलबिला रहा है. वह हर कोशिश कर रहा है मगर सिंधु का एक कतरा तक नहीं मिल पा रहा है. भारत साफ कर चुका है, पहले आतंकाद रोको, तभी पानी मिलेगा. इसलिए पाकिस्तान इस समय कूटनीतिक दबाव में है. भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मंचों पर घेरा है. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि चीन खुलकर उसके पक्ष में बोले और भारत पर दबाव बने।  पाकिस्तान को चीन से क्या उम्मीद यह हकीकत है कि चीन बहुत समय से पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है. यूं कहिए कि वह पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसलिए पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसके समर्थन में आवाज उठा सकता है. मगर बीते कुछ समय से भारत-चीन के रिश्ते भी बेहतर हुए हैं. अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन में नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे में पाकिस्तान का चीन खुलकर साथ दे और भारत का विरोध करे, इसकी संभावना बहुत कम है. इसलिए यहां पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है।  चीन क्यों नहीं देगा दखल भारत-पाकिस्तान के इस सिंधु जल मसले पर चीन के न बोलने की एक और वजह है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का आधार सिंधु जल संधि है. यह समझौता सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इसमें चीन किसी भी रूप में पक्षकार नहीं है. इसलिए चीन चाहकर भी दो देशों के मसले में मौजूदा हालात में न बोलेगा और न दखल देगा. वैसे भी लीगली भी देखें तो सिंधु जल संधि में चीन की कोई भूमिका नहीं है।  पाकिस्तान को किस बात का डर? पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी संजीवनी से कम नहीं है. पाकिस्तान बहुत हद तक सिंधु के पानी पर जिंदा है. पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. अगर भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का अधिकतम इस्तेमाल करता है या परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता हो सकती है. इस बार तो वैसे भी बाढ़ ने पाकिस्तान को बचा लिया. मगर बाढ़ नहीं आती तो पाकिस्तान में अभी त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा होता।  सिंधु जल पर भारत का रुख क्या है? सिंधु जल समझौते पर भारत का रुश साफ है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तब तक उसे एक बूंद भी सिंधु का पानी नहीं मिलेगा. भारत का तर्क है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते. भारत यह भी कह … Read more

PM मोदीआज करेंगे जोधपुर के नए टर्मिनल ‘खास महल’ का उद्घाटन, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

जोधपुर राजस्‍थान के जोधपुर शहर में एक ‘खास महल’ तैयार हुआ है. इस खास महल की भव्‍यता किसी राजमहल से कम नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को इसका उद्घाटन करने वाले हैं. जी हां, यहां पर हम बात जोधपुर के नए एयरपोर्ट की कर रहे हैं. करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से बने इस नए एयरपोर्ट की क्षमता हर साल 20 लाख यात्रियों को संभालने की है. इसका डिजाइन राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित है, जिसमें मेहराब और झरोखों का खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है. वर्ल्‍ड क्‍लास सुविधाओं से लैस यह टर्मिनल जोधपुर के पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई रफ्तार देने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  इसी एयरपोर्ट से मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम की शुरूआत करने जा रहे है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई 2026 की सुबह करीब 10:45 बजे वह जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देश में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम भी लॉन्च करेंगे। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन करीब 480 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। वर्ल्‍ड क्‍लाइस सुविधाओं से लैस यह एयरपोर्ट पैसेंजर्स के ट्रैवल एक्‍सपीरियंस को बेहतर बनाने के मकसद से डिजाइन किया गया है।  23 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह नया टर्मिनल हर साल करीब 20 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। इसमें आधुनिक चेक-इन सिस्टम, बेहतर वेटिंग एरिया, सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा के लिए कई नई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। एयरपोर्ट में दिखेगी शहर की एतिहासिक झलक: जोधपुर के नए एयरपोर्ट टर्मिनल का डिजाइन शहर की ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  इसकी प्रेरणा 1931 में महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा स्थापित 'जोधपुर फ्लाइंग क्लब' और राजपूताना स्थापत्य कला से ली गई है। टर्मिनल के इंट्री गेट पर विशाल नक्काशीदार गुंबद, कमल कलश, मेहराब और ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। टर्मिनल के अंदर स्थानीय कलाकारों की बनाई गई कलाकृतियां लगाई गई हैं. इनमें मरुधरा के पारंपरिक मोर, राजसी दरबार और मारवाड़ी संस्कृति को आधुनिक अंदाज में दर्शाया गया है। जोधपुर एयरपोर्ट को ऊर्जा बचत, जल संरक्षण और ग्रीन बिल्डिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसे 5-स्टार GRIHA रेटिंग मिल सके। जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल और मॉडिफाइड उड़ान स्‍कीम मिलकर राजस्थान सहित पूरे देश में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे। 

मोनोकनी में मलाइका अरोड़ा का सिज़लिंग अंदाज, समंदर किनारे Photos देख फैन्स बोले- Wow!

मुंबई  बॉलीवुड डीवा मलाइका अरोड़ा ने एक बार फिर अपने ग्लैमरस अवतार से बिजलियां गिराई हैं. 52 साल की एक्ट्रेस ने लेटेस्ट वीडियो में कहर बरपाया है मलाइका ने बीच वेकेशन की वीडियो पोस्ट कर अपने मूड का खुलासा किया है. इसमें वो रेड कलर की प्रिंटेड मोनोकनी में बोल्डनेस दिखा रही हैं।मलाइका समंदर किनारे काउच पर लेटी हैं. सनबाथ लेते हुए वो मजे ले रही हैं. मलाइका सनग्लासेज पहने, नो मेकअप लुक में नजर आईं। मलाइका लेटी हुई हैं. वो झूम रही हैं. खुशी में डूबी हुई हैं. मलाइका ने अपनी टोन्ड फिगर फ्लॉन्ट की है। मलाइका कैमरे पर पोज देते हुए चहक रही हैं. उनकी बोल्ड अदाएं देखकर फैंस का कहना है कि वो स्टनिंग लग रही हैं. किसी ने मलाइका को फायर कहा। एक्ट्रेस का पहले भी बोल्ड अवतार देखने को मिला है. शख्स ने पूछा कि मलाइका के साथ इस वेकेशन पर कौन है. यूजर्स को लगता है वो अपने मिस्ट्री बॉयफ्रेंड संग हैं।  मलाइका ने इससे पहले भी इंटरनेट पर अपने बोल्ड अवतार को दिखाया है. बिकिनी और मोनोकनी में वो अक्सर पोस्ट शेयर करती हैं। एक्ट्रेस की फिटनेस को देखकर लोग दंग हैं. उन्होंने 52 साल की मलाइका को लेकर कहा कि वो बढ़ती उम्र के साथ और जवां दिख रही हैं. यूजर ने लिखा- कोई नहीं कहेगा वो 1 बेटे की मां हैं। 

सीएम योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक छलांग

सीएम योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक छलांग जून 2026 में राज्य ने 71,888 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया  घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापना में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, अब महाराष्ट्र को पीछे छोड़ने की तैयारी लखनऊ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। जून 2026 में राज्य ने 71,888 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह न केवल उत्तर प्रदेश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन है, बल्कि किसी भी राज्य द्वारा एक माह में की गई घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है।    उत्तर प्रदेश में अब तक 10,89,716 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं तथा 6,36,745 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना पूरी की जा चुकी है। उत्तर प्रदेश लगातार कई महीनों से देश में सर्वाधिक मासिक स्थापनाएं दर्ज कर रहा है और घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में देश का सबसे तेजी से उभरता हुआ राज्य बन गया है।    इस वर्तमान रुझानों को देखते हुए अनुमान है कि जुलाई 2026 के अंत तक उत्तर प्रदेश कुल घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं में महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर देश का दूसरा सबसे बड़ा घरेलू रूफटॉप सोलर राज्य बन सकता है। इसके बाद राज्य का अगला लक्ष्य गुजरात को पीछे छोड़ते हुए कुल घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं में भारत का नंबर-1 राज्य बनना है।      घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां भी अभूतपूर्व हैं। राज्य में अब तक 2,148 मेगावाट से अधिक क्षमता स्थापित की जा चुकी है तथा ₹5,500 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं को वितरित की जा चुकी है। इस क्षेत्र में 7,000 से अधिक कंपनियां और वेंडर्स कार्य कर रहे हैं तथा 80,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। राज्य में घरेलू रूफटॉप सोलर से प्रतिदिन लगभग 96 लाख यूनिट निःशुल्क बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका अनुमानित मूल्य ₹6 करोड़ प्रतिदिन से अधिक है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में ₹40 करोड़ से अधिक का दैनिक कारोबार हो रहा है और 9,000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है, जो बड़े पैमाने पर भूमि आधारित विद्युत परियोजनाओं की तुलना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।     उत्तर प्रदेश की यह सफलता जागरूक उपभोक्ताओं, सोलर वेंडर्स, यूपीनेडा, बैंकिंग संस्थानों, डिस्कॉम एवं सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। घरेलू रूफटॉप सोलर क्षेत्र में राज्य की यह तेज प्रगति न केवल स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को भारत की घरेलू रूफटॉप सोलर क्रांति का नया नेतृत्वकर्ता भी बना रही है। मासिक स्थापना में देश का नंबर-1 बनने के बाद अब उत्तर प्रदेश का लक्ष्य कुल घरेलू रूफटॉप सोलर स्थापनाओं में भी भारत का नंबर-1 राज्य बनना है।

Regular, Premium या Racing Fuel? ₹82 से ₹170 तक बिक रहे 5 तरह के पेट्रोल का फर्क समझिए

नई दिल्ली इंडियन ऑटो मार्केट एक बड़े फ्यूल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है, जहां ट्रेडिशनल फॉसिल फ्यूल की जगह तेजी से इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को चलन में लाया गया है. प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने देश में कई तरह के पेट्रोल ऑप्शन को बेचने शुरू कराया है. आज भारतीय मार्केट में नॉर्मल ऑक्टेन रेटिंग से लेकर हाई-परफॉर्मेंस और फ्लेक्स-फ्यूल कैटेगरी के कुल 5 पेट्रोल ऑप्शन बिक रहे हैं।  आपकी गाड़ी के इंजन, उसकी क्षमता और पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी के आधार पर इन फ्यूल्स को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है और इनकी कीमतों में भी काफी ज्यादा अंदर है. आइए, भारत में उपलब्ध E20 से लेकर E85 तक के सभी प्रकार के पेट्रोल के बारे में जानते हैं. ये किस तरह की गाड़ियों के लिए हैं और इनकी फिलहाल कीमत क्या है? ये भी जानेंगे।  1. रेगुलर पेट्रोल (E20 – 91 Octane) ये भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला सामान्य पेट्रोल है, जिसका इस्तेमाल हर आम बाइक, स्कूटर और कार में होता है. देश के सभी पेट्रोल पंपों पर अब ये फ्यूल 20% इथेनॉल मिश्रण यानी E20 स्टैंडर्ड के साथ ही मिल रहा है. 91 ऑक्टेन रेटिंग वाला ये पेट्रोल रोजमर्रा की शहर में ड्राइविंग और ईको-फ्रेंडली सफर के लिए सबसे सस्ता और व्यावहारिक विकल्प है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹102.12/लीटर है।  2. प्रीमियम पेट्रोल (E20 – 95 Octane) इंडियन ऑयल का XP95 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power Petrol इस कैटेगरी में आते है. ये भी E20 स्टैंडर्ड (20% इथेनॉल) पर ही बेस्ड है, लेकिन इसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 होती है. इसमें स्पेशल डिटर्जेंट एडिटिव्स मिले होते हैं जो इंजन के वाल्व को साफ रखते हैं. ये मॉडर्न टर्बो-पेट्रोल कारों और प्रीमियम स्कूटर्स के लिए बेहतरीन माइलेज और स्मूथ परफॉर्मेंस देता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹109.24/लीटर है।  3. सुपर-प्रीमियम पेट्रोल (0% Ethanol – 100 Octane) इंडियन ऑयल का XP100 इस कैटेगरी का सबसे बड़ा उदाहरण है. ये भारत का इकलौता पेट्रोल है, जो पूरी तरह से इथेनॉल-मुक्त (0% Ethanol) होता है और इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 होती है. ये फ्यूल बेहद महंगा है और इसे खासतौर पर सुपरकार्स, रेसिंग बाइक्स और विंटेज कारों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उनके इंजनों को अधिकतम पावर मिल सके. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹170/लीटर है।  4. E85 पेट्रोल (Flex-Fuel) इसे फिलहाल फ्यूचर फ्यूल के हिसाब से देखा जा रहा है. E85 पेट्रोल केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) के लिए पेश किया गया है. इसमें 85% तक इथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल होता है. टोयोटा, मारुति और हीरो मोटोकॉर्प ने मार्केट में E85 पर चलने वाले कुछ मॉडल्स उतारे हैं. ये पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित और रेगुलर पेट्रोल से काफी सस्ता है, लेकिन इसे सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में ही डाला जा सकता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹82.12/लीटर है।  5. E100 (प्योर इथेनॉल फ्यूल) केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सहयोग से भारत में E100 यानी 100% शुद्ध इथेनॉल ईंधन को भी हरी झंडी मिल चुकी है. ये पूरी तरह से गन्ने, मक्के और कृषि अपशिष्ट से बनने वाला बायोफ्यूल है, जिसमें पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं होती. वर्तमान में चुनिंदा पायलट प्रोजेक्ट्स और विशेष रूप से डिजाइन की गई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स और कारों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है. इसकी कीमत अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

Oil Import पर घटेगी निर्भरता? SBI रिपोर्ट में 2030 तक भारत की बड़ी तैयारी का खुलासा

नई दिल्‍ली ईरान-अमेरिका जंग के दौरान भारत को कच्‍चे तेल के आयात में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देश से ज्‍यादा कीमत पर कच्‍चे तेल का आयात करना पड़ा, जिस कारण देश का आयात बिल काफी बढ़ गया।  अब देश अपने आयात बिल को कम करने पर फोकस कर रहा है. साथ ही एनर्जी को लेकर दूसरे देशों से निर्भरता को कम कर रहा है. जिसे लेकर सरकार ने इलेक्‍ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है और इसे प्रमोट भी कर रही है. नियामकी चीजों में ढील भी दी गई है. हर तरफ से सरकार का फोकस कच्‍चे तेल को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है. इस बीच, SBI की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया गया है।  SBI की रिपोर्ट कहती है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2030 तक भारत एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा, जिससे उसका आयात बिल 1 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है, जिससे भारत को एक बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, इसके लिए भारत को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं… 2030 तक हो सकता है ये बड़ा बदलाव दरअसल, रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ऐसा लगता है कि 2027 से 2030 के बीच 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं. अगर 2030 तक घरेलू ऑटो मार्केट में 20 फीसदी ईवी का हिस्‍सा होता है तो भारत का इम्‍पोर्ट बिल 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा।  रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मार्च से जून महीने के दौरान, हर महीने एवरेज 2.30 लाख ईवी वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. यह 2025 तक हर महीने 1.3 लाख था. इसका मतलब है कि हर महीने ईवी रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या में करीब 1 लाख की बढ़ोतरी हुई है।  चार्जिंग इंफ्रा बढ़ाने पर जोर  SBI की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अलग-अलग राज्‍यों में चार्जिंग स्‍टेशनों को लेकर लोड अलग-अलग है. कुछ राज्‍यों में हर चार्जिंग स्‍टेशन 200 से ज्‍यादा ईवी की सेवा देते हैं और दूसरे राज्‍यों में यह संख्‍या 50 वाहनों तक ही सीमित है. भारत में ईवी चार्जिंग की सफलता, चार्जिंग स्‍टेशनों और ईवी इंफ्रा पर निर्भर करेगी. भारत में कुल 29,151 चार्जिंग स्‍टेशन हैं. इसमें भी कर्नाटक और महाराष्‍ट्र में कुल देश का 35 फीसदी ईवी इंफ्रा डेवलप है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सबसे पहले हर राज्‍यों में चार्जिंग इंफ्रा को बढ़ाने पर जोर देना होगा।  दूसरे देशों पर निर्भरता होगी कम  अगर सरकार और राज्‍य पूरी क्षमता के साथ ईवी को प्रमोट करते हैं और उसके सफलता के लिए सही प्रयास किए जाते हैं तो यह कच्‍चे तेल के आयात में बड़ी कटौती कर सकती है. देश में पेट्रोल-डीजल पंपो की संख्‍या कम हो सकती है, क्‍योंकि ईवी के आने से ईंधन भरवाने की समस्‍या कम हो जाएगी. इस वजह से दूसरे देशों-खासकर मिडिल ईस्‍ट और अमेरिका जैसे दशों से कच्‍चे तेल की निर्भरता कम हो जाएगी।