samacharsecretary.com

विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 सपना टूटा, ट्रायल्स में युवा पहलवान मीनाक्षी से मिली हार

नई दिल्ली भारतीय कुश्ती में 30 मई (शनिवार) को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला. दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स ट्रायल्स के सेमीफाइनल में दिग्गज महिला पहलवान विनेश फोगाट को हार का सामना करना पड़ा. विनेश को युवा रेसलर मीनाक्षी गोयत ने विमेंस 53 किलो भारवर्ग के मुकाबले में 6-4 से हरा दिया. इस हार के साथ विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में जगह बनाने का सपना टूट गया. हालांकि मुकाबले के बाद उनका रिएक्शन सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया. हार के तुरंत बाद विनेश फोगाट मैट से बाहर गईं, लेकिन कुछ ही पलों बाद वह दोबारा लौट आईं. उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'मैं वापस आऊंगी.' विनेश का ये रिएक्शन तेजी से वायरल हो रहा है. मुकाबले की बात करें तो मीनाक्षी ने शुरुआत से ही बेहद आक्रामक कुश्ती दिखाई., उन्होंने विनेश को संभलने का मौका नहीं दिया और लगातार अंक बटोरती रहीं. विनेश ने अनुभव के दम पर वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन युवा पहलवान ने दबाव बनाए रखा और आखिर में 6-4 से मुकाबला जीत लिया. यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि मीनाक्षी पिछले कुछ समय से शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने 2026 एशियन रेसलिंग चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर पहले ही अपनी ताकत दिखा दी थी. किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए उस टूर्नामेंट के बाद अब एशियन गेम्स ट्रायल्स में विनेश फोगाट जैसी स्टार को हराकर उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि भारतीय महिला कुश्ती में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है. WFI से विनेश की हुई थी खटपट डब्ल्यूएफआई लगातार विनेश फोगाट की एंट्री का विरोध कर रहा था. महासंघ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने देने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन आखिर में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद विनेश के ट्रायल्स में उतरने का रास्ता साफ हुआ. तीन बार ओलंपिक खेल चुकी विनेश फोगाट पहले 57 किलोग्राम वर्ग में वापसी करने की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का फैसला किया था, लेकिन वहां भी डब्ल्यूएफआई ने उन्हें खेलने की अनुमति नहीं दी थी. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा और फिर कानूनी लड़ाई शुरू हुई. आखिरकार विनेश को राहत मिली और वह एशियन गेम्स ट्रायल्स में उतर सकीं.

तेज तूफान से बहल क्षेत्र में बड़ा नुकसान, 50 से ज्यादा ट्रांसफार्मर गिरे

बहल  तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने वीरवार देर शाम आए बहल क्षेत्र में भारी तबाही मचाते हुए बिजली वितरण व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जहां एक ओर मौसम में आए बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं ने बिजली विभाग के ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित रहा और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कई घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली वितरण निगम की बहल सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण बड़ी संख्या में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 340 बिजली के खंभे टूटकर या गिरकर क्षतिग्रस्त पाए गए हैं, जबकि कृषि सिंचाई के लिए लगाए गए 50 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर भी धराशाई हो गए। इससे कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर भी व्यापक असर पड़ा है। बहल सब डिवीजन के सहायक महाप्रबंधक ऋषभ कुमार ने बताया कि तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार विभाग को करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारियों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं। ऋषभ कुमार ने कहा कि अधिकांश गांवों में घरेलू बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। वहीं, कृषि और सिंचाई से संबंधित बिजली लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विभाग के फील्ड कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं और जल्द ही सभी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी।

गैस सिलेंडर की भारी किल्लत! डेढ़ महीने से सप्लाई ठप, लोगों की बढ़ी परेशानी

अमृतसर. शहर में एल.पी.जी. सिलैंडरों की सप्लाई को लेकर गहरा संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उपभोक्ताओं को 25 से 45 दिनों तक सिलैंडर का इंतजार करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या ने आम आदमी की रसोई तक को ठप्प कर दिया है लेकिन प्रशासन अब भी मूक-दर्शक बना हुआ है। गैस एजैंसियों के बाहर लंबी कतारें और बार-बार चक्कर काटते उपभोक्ता प्रशासन की नाकामी की गवाही दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई बार बुकिंग के बावजूद समय पर सिलैंडर नहीं मिल रहा जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक सप्लाई चेन में भारी अव्यवस्था और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह संकट और गहराता जा रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से लेने के बजाय इसे नजर-अंदाज कर रहे हैं। लगातार बिगड़ती गैस सप्लाई व्यवस्था ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मुद्दा बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी। सीधे-सीधे सिस्टम की विफलता समाज सेवक जय गोपाल लाली ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे सिस्टम की विफलता है। उन्होंने कहा कि गैस जैसी जरूरी सुविधा का इस तरह बाधित होना बेहद चिंताजनक है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जनता सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी। जिम्मेवार अधिकारियों पर हो करवाई समाज सेवक विक्रम सिंह गिल ने कहा कि प्रशासन की ढीली कार्यशैली के कारण आम आदमी परेशान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि गैस सप्लाई व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। जनता का आक्रोश बढ़ना तय ऑल इंडिया एंटी करप्शन मोर्चा के अध्यक्ष महंत रमेशानंद सरस्वती ने इस संकट को मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि जब रसोई ही ठप्प हो जाए तो आम परिवार कैसे गुजारा करेगा। प्रशासन को चाहिए कि तुरंत हस्तक्षेप कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले अन्यथा जनता का आक्रोश बढ़ना तय है।

अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की पहल, सुशासन तिहार में मिल रहा त्वरित समाधान

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने और जनता की समस्याओं को उनके घर के पास ही सुलझाने का महाअभियान ”सुशासन तिहार 2026” लगातार सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के विकासखंड नगरी के ग्राम पंचायत घठुला में आयोजित क्लस्टर स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते एक ही छत के नीचे 509 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई। इस शिविर में घठुला, लटियारा, पाईकभाठा, रतावा, पोड़ागांव, लखनपुरी, फरसगांव, पांवद्वार, गिधावा, बोरई, घुटकेल, मैनपुर, बिरनासिली एवं लिखमा सहित कुल 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिविर में न केवल लोगों की शिकायतें सुनी गईं, बल्कि विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की लाइव जानकारियां भी साझा की गईं, जिससे लोगों को जागरूक होने का अवसर मिला। शिविर के दौरान कुल 528 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 523 आवेदन विभिन्न मांगों से संबंधित और 05 आवेदन जनता की शिकायतों से जुड़े थे। शासन और प्रशासन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राप्त आवेदनों में से 509 का मौके पर ही निपटारा कर हितग्राहियों को तत्काल राहत प्रदान की गई, जबकि शेष बचे आवेदनों के लिए उपस्थित आला अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए।  हितग्राहियों को योजनाओं की  दी सौगात शिविर स्थल पर ही हितग्राहियों को योजनाओं की सौगात दी गई, जिसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को सुपोषण किट, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 03 ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण विभाग द्वारा 01 हितग्राही को दिव्यांग सहायक उपकरण और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को मनरेगा जॉब कार्ड का वितरण किया गया। शासन और जनता के बीच का फासला हुआ कम शिविर में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार का असली मकसद आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत समाधान करना है, जिससे शासन और जनता के बीच का फासला कम हो रहा है और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

सीमा सुरक्षा पर बड़ा सवाल! 600 किमी का डार्क जोन बना घुसपैठ का नया कॉरिडोर

 नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा दुनिया की सबसे लंबी और जटिल सीमाओं में से एक है. कुल 4,096 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर लगभग 600 किलोमीटर का इलाका अभी भी डार्क जोन बना हुआ है. इन इलाकों में पर्याप्त बाड़बंदी नहीं है. रोशनी कम है. मोबाइल नेटवर्क कमजोर है. इलाका नदियों, दलदल और घने इलाकों से भरा है. यही जगह घुसपैठियों, तस्करों और अन्य संदिग्ध तत्वों के लिए आसान प्रवेश द्वार बन गई है।  1947 के विभाजन के समय रेडक्लिफ लाइन से बनी यह सीमा 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद तय हुई.  सीमा का ज्यादातर हिस्सा घनी आबादी वाले इलाकों, खेतों, नदियों और गांवों से गुजरता है. दोनों तरफ परिवार बंटे हुए हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में लोग सीमा पार करते हैं. इससे सीमा पूरी तरह बंद करना मुश्किल हो जाता है. पहले चिटमहल (एन्क्लेव) की समस्या थी, जिसे 2015 के लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट से ज्यादातर सुलझा लिया गया. लेकिन अब भी सुरक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं।  600 किलोमीटर डार्क जोन कहां है? यह डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में है. राज्य की कुल 2,217 किलोमीटर सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है, लेकिन लगभग 600 किलोमीटर अभी बिना बाड़ का है।  क्या है यह 600 किलोमीटर का 'डार्क जोन' और यह कहां स्थित है? भारत-बांग्लादेश सीमा पांच भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है…     पश्चिम बंगाल: 2,217 किलोमीटर (सबसे लंबी सीमा)     त्रिपुरा: 856 किलोमीटर     मेघालय: 443 किलोमीटर     असम: 262 किलोमीटर     मिजोरम: 318 किलोमीटर यह 600 किलोमीटर का डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में फैला हुआ है. पश्चिम बंगाल की 2217 किमी लंबी सीमा में से लगभग 1600 किमी पर किसी न किसी रूप में बाड़ लगाई जा चुकी है, लेकिन लगभग 550 से 600 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी पूरी तरह से खुला या असुरक्षित है।  यह डार्क जोन विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों और जिलों में मौजूद है…      मुर्शिदाबाद और मालदा: इन जिलों में गंगा और पद्मा जैसी नदियां बहती हैं. नदी के बहाव के कारण यहां जमीन स्थिर नहीं रहती, जिससे पक्की बाड़ लगाना असंभव हो जाता है।      उत्तर और दक्षिण 24 परगना: सुंदरबन का दलदली इलाका और इछामती जैसी इकरूखी नदियां इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बनाती हैं।      कूचबिहार और जलपाईगुड़ी: उत्तरी बंगाल के इन जिलों में कई ऐसे गांव हैं जो ठीक जीरो लाइन (अंतर्राष्ट्रीय सीमा) पर बसे हैं, जहां बाड़ लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करना एक बड़ी चुनौती रहा है।  इसे 'डार्क जोन' क्यों कहा जाता है? इसे डार्क जोन कहने के पीछे केवल रात का अंधेरा ही एकमात्र कारण नहीं है. इसके कई तकनीकी और भौगोलिक कारण हैं…      नदी तटीय क्षेत्र (Riverine Terrain): जब नदियां अपना रास्ता बदलती हैं, तो पहले से लगाई गई बाड़ बह जाती है. पानी के बीच में खंभे गाड़ना व्यावहारिक नहीं होता।      खराब मोबाइल और संचार नेटवर्क: इन सुदूर इलाकों में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल बेहद कमजोर या न के बराबर हैं, जिससे सुरक्षा बलों को समय पर खुफिया जानकारी साझा करने में दिक्कत आती है।      फ्लडलाइट्स की कमी: कई दुर्गम और दलदली पैच ऐसे हैं जहां बिजली के खंभे और हाई-मास्ट फ्लडलाइट्स लगाना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पाया है।      सघन आबादी (Zero Line Villages): कई जगहों पर अंतरराष्ट्रीय सीमा लोगों के घरों के पीछे के आंगन या खेतों से होकर गुजरती है. ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन स्थानीय नागरिक है. कौन घुसपैठिया।  नदियों और दलदलों वाले करीब 175 किलोमीटर इलाके में पारंपरिक बाड़ लगाना लगभग नामुमकिन है. यही जगह घुसपैठ और तस्करी के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है।  वहां किस तरह की घुसपैठ होती है? डार्क जोन से कई तरह की अनधिकृत गतिविधियां होती हैं…     अवैध प्रवासन (Illegal Migration): आर्थिक मजबूरियों या अन्य कारणों से लोग रात के अंधेरे में घुसते हैं. वे पश्चिम बंगाल, असम आदि में बस जाते हैं. जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं।      तस्करी (Smuggling): सबसे बड़ा कारोबार. भारत से बांग्लादेश में गाय तस्करी, फेक इंडियन करेंसी (FICN), ड्रग्स (याबा, फेंसिडिल), सोना और हथियार. नदी वाले इलाकों में नावों से रात में तस्करी आसान होती है।      मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों को मजदूरी, जबरन शादी या शोषण के लिए ले जाया जाता है।      सुरक्षा खतरे: कभी-कभी चरमपंथी तत्व, जासूस या अपराधी भी घुसते हैं. डेमोग्राफिक चेंज और कट्टरपंथ की आशंका बढ़ रही है।      छोटी-मोटी घटनाएं: चोरी, अवैध व्यापार आदि. BSF हर साल हजारों प्रयासों को नाकाम करता है, लेकिन कुछ सफल हो जाते हैं. हाल के वर्षों में प्रयास बढ़े हैं।  भारत की तरफ: सीमा सुरक्षा बल (BSF) भारत की ओर से इस सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कंधों पर है. BSF के जवान इस डार्क जोन में निम्नलिखित रणनीतियों के तहत काम करते हैं…  चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग: पैदल गश्त के साथ-साथ नदी वाले इलाकों में BSF 'वाटर विंग' की स्पीड बोट और फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट्स (Floating BOPs) के जरिए गश्त करती है।  तकनीकी समाधान (Smart Fencing): जहां पारंपरिक कंटीली बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां BSF अब Comprehensive Integrated Border Management System (CIBMS) का उपयोग कर रही है. इसमें लेजर दीवारें (Laser Walls), थर्मल इमेजर, अंडरवाटर सेंसर और इंफ्रा-रेड कैमरे शामिल हैं, जो अंधेरे या कोहरे में भी हलचल को पकड़ लेते हैं।  ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम: आसमान से निगरानी रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. साथ ही, सीमा पार से आने वाले संदिग्ध ड्रोनों को मार गिराने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक भी तैनात की जा रही है।  स्थानीय प्रशासन से समन्वय: सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को तेज किया है, ताकि BSF को नई चौकियां (BOPs) बनाने और बचे हुए हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जमीन मिल सके।  बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) बांग्लादेश की ओर से सीमा की निगरानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) (जिसे पहले बांग्लादेश राइफल्स या BDR कहा जाता था) करती है। बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश … Read more

गर्मी से राहत लेने निकले लोग, मनाली से चारधाम तक सड़कों पर रेंगती दिखीं गाड़ियां

 मनाली/नैनीताल/चमोली उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए लाखों लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और जोशीमठ तक इस समय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है।  पहाड़ों में मौसम सुहावना है, कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोग लंबा सफर और घंटों का ट्रैफिक जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग रहे हैं।  मनाली-रोहतांग मार्ग पर थमी रफ्तार हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई का महीना खत्म होने के बावजूद रोहतांग में बर्फ मौजूद है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भीड़ का असर सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने से लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में करीब 50 किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा हो जाता है, लेकिन इन दिनों यही दूरी तय करने में 7 से 8 घंटे लग रहे हैं। कोलकाता से आए पर्यटक एस. मित्रा ने बताया कि रास्ते में कई घंटे जाम में फंसे रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि कुछ वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे जाम और बढ़ जाता है। स्थानीय पर्यटन कारोबारी हीरालाल का कहना है कि पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं। इससे ट्रैफिक प्रभावित होता है और जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। नैनीताल में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उत्तराखंड के नैनीताल में भी इस समय पर्यटकों की भारी भीड़ है। वीकेंड के दौरान शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। माल रोड, स्नो व्यू, केव गार्डन और चिड़ियाघर जैसे स्थानों पर दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। नैनी झील में बोटिंग के लिए लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से शाम तक झील के आसपास पर्यटकों की भीड़ बनी रहती है। ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसका फायदा स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा है। होटल, होमस्टे, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि लंबे समय बाद पर्यटन कारोबार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। हालांकि बढ़ती भीड़ के कारण शहर की सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों को शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने में काफी समय लग रहा है। कैंचीधाम में भी बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंचीधाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार भीड़ बढ़ रही है। आने वाले दिनों में स्थापना दिवस कार्यक्रम को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों पर बढ़ा दबाव चारधाम यात्रा के चलते उत्तराखंड के चमोली जिले में भी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, औली और माणा-नीति घाटी जाने वाले मार्गों पर लंबी वाहन कतारें देखी जा रही हैं। जोशीमठ क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर तक लंबा जाम लग रहा है। लोगों को घंटों तक सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है। बारिश और बर्फबारी भी नहीं रोक पा रही भीड़ ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम लगातार बदल रहा है। कई जगह हल्की बारिश हो रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बर्फबारी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बद्रीनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब जाने वाले रास्तों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखाई दे रही है। कई बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए पहाड़ सबसे बेहतर विकल्प हैं। यही वजह है कि लोग लंबी यात्रा और जाम की परेशानी के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।

मंत्री पटेल बोले- स्वच्छ और सुरक्षित रहें नदियों के स्रोत, तभी बचेगा पर्यावरण

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल अमरकंटक धाम में तीन दिवसीय ‘स्वच्छता व कुण्ड सेवा अभियान में स्वयं किया श्रमदान भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि माँ नर्मदा केवल आस्था की प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और अस्तित्व का आधार हैं। हमारी नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखने में प्रत्येक नागरिक को अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। मंत्री पटेल ने यह विचार अमरकंटक धाम स्थित माँ नर्मदा नदी के पावन उद्गम स्थल पर 29 से 31 मई तक आयोजित इस विशेष स्वच्छता अभियान में श्रमदान के दौरान व्यक्त कियें। मंत्री पटेल ने विशेष बल देते हुए कहा कि नदियों का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन का आधार है, क्योंकि यदि आज हम जल स्रोतों और उद्गम स्थलों को संरक्षित करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ जल संकट से बच सकेंगी। मंत्री पटेल ने स्वयं उपस्थित होकर जनभागीदारी के साथ सक्रिय रूप से श्रमदान किया। 'मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन' एवं 'निर्विकार पथ' के सेवाभावी कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर उद्गम और कुण्ड क्षेत्र की स्वच्छता, संरक्षण तथा सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया, जिससे यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। उल्लेखनीय है कि मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल लंबे समय से जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के माध्यम से पूरे प्रदेश में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन, नदियों की स्वच्छता और जनजागरण के कार्यों को व्यापक गति मिली है। अमरकंटक में माँ नर्मदा के उद्गम स्थल पर किया गया यह श्रमदान उसी पर्यावरण-संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा और जनसहभागिता से जल संरक्षण के इस प्रयास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।  

IPL में धमाकेदार प्रदर्शन का मिला इनाम, वैभव सूर्यवंशी बने झारखंड का नया चेहरा

रांची. क्रिकेट जगत में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी, अद्भुत प्रतिभा और कम उम्र में ही पूरे देश को प्रभावित करने वाले युवा क्रिकेट सितारे वैभव सूर्यवंशी को झारखंड का स्वास्थ्य विभाग सम्मानित करने के साथ-साथ विभाग का ब्रांड एंबेसडर भी बनाएगा। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि भले ही वैभव की टीम मैच हार गई हो, लेकिन उन्होंने करोड़ों भारतीयों का दिल जीता है। इतनी कम उम्र में बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज़ों का जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता से सामना करते हुए लगातार धुनाई करना, यह असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है। वैभव ने केवल अपना नाम ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, बिहार और पूरे हिंदुस्तान का नाम रोशन किया है। इसके लिए दिल से बधाई देते हुए मंत्री ने कहा है कि जल्द ही उन्हें झारखंड में सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मात्र 15 वर्ष की आयु में वैभव सूर्यवंशी ने जिस साहस, आत्मविश्वास और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवा ऊर्जा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का कार्य करेगा। वैभव सूर्यवंशी ने करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि मात्र 15 वर्ष की आयु में वैभव सूर्यवंशी ने जिस साहस, आत्मविश्वास और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवा ऊर्जा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन का संदेश देंगे वैभव स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का कार्य करेगा। एमएस धोनी भी रह चुके हैं ब्रांड एंबेसडर इससे पहले रांची के युवराज और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी झारखंड के विभिन्न विभागों के ब्रांड एंबेसडर रह चुके हैं। उन्हें राज्य सरकार की ओर से इनाम के अलावा आवासीय भूखंड समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। करोड़ों युवाओं की प्रेरणा बताया डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मात्र 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने जिस साहस, आत्मविश्वास और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। वैभव केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि युवा ऊर्जा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वैभव आने वाले समय में भारत का नाम विश्व क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे और देश को उन पर लंबे समय तक गर्व रहेगा।  

कोकर और जामचुआं सब स्टेशन से हजारों उपभोक्ताओं को राहत

रांची राजधानी रांची में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। शहरवासियों को जल्द ही दो नए बिजली सब स्टेशन की सौगात मिलने वाली है। कोकर और जामचुआं में बन रहे नए सब स्टेशन लगभग तैयार हो चुके हैं और इनके चालू होने के बाद शहर के हजारों उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी। बिजली विभाग के अनुसार कोकर सब स्टेशन से 10 एमवीए क्षमता के साथ बिजली आपूर्ति की जाएगी। इसका सीधा लाभ कोकर, लालपुर, बरियातू, खोरहाटोली, इंडस्ट्रियल एरिया, सुभाष चौक, भाभा नगर, तिरिल, पीस रोड और लालपुर चौक समेत आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को मिलेगा। विभाग का दावा है कि करीब 30 हजार से अधिक लोगों को बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज से मिलेगी राहत नए सब स्टेशन के चालू होने से लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और एक फेज में कम बिजली पहुंचने जैसी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। गर्मी के मौसम में बढ़ते लोड के कारण जिन इलाकों में बार-बार बिजली बाधित होती थी, वहां अब स्थिति बेहतर होगी। ग्रामीण इलाकों और उद्योगों को भी फायदा वहीं जामचुआं सब स्टेशन से भी 10 एमवीए बिजली आपूर्ति की जाएगी। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी। इसके अलावा रामपुर और जामचुआं क्षेत्र के छोटे उद्योगों को भी बेहतर बिजली सुविधा मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी ग्रिड से मिली अतिरिक्त ताकत इधर शहर की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए स्मार्ट सिटी परिसर में बने स्मार्ट ग्रिड को भी झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा चालू कर दिया गया है। इस स्मार्ट ग्रिड से शहर को 35 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगी है। विभाग का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान बढ़ते लोड को संभालने में यह ग्रिड काफी सहायक साबित हो रहा है और इससे राजधानी में बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत हुई है।

हथियार लहराने के मामले में जदयू विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक

 गोपालगंज मोकामा के बाहुबली जदयू विधायक छोटे सरकार अनंत सिंह को कोर्ट से फिर राहत मिली है। गोपालगंज के एमपी एमएलए कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक की सीमा पांच जून तक बढ़ा दिया है। मामले में आज(शनिवार, 30 मई को)अग्रिम जमानत के बिंदू पर सुनवाई हुई। अगली सुनवाई पांच जून को होगी। तबतक उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक की सीमा को बढ़ा दिया गया है। भोजपुरी गायक गुंजन सिंह को भी इसका फायदा मिला है। सरकारी वकील ने राहत देने का विरोध किया था। 2 मई को गोपालगंज जिले के सेमराव गांव में हथियार लहराने और अश्लील गानों के प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद मीरगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। केस की छानबीन अब सीआईडी करेगी। शनिवार को गोपालगंज एमपीएमएलए कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। उनके वकील राजेश पांडे ने अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रखने की अपील की। इस पर सरकारी वकील ने विरोध किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आई है इसलिए कोई राहत नहीं मिलना चाहिए। इसपर राजेश पांडे ने कहा कि पिछली सुनवाई पर ही 30 मई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी। इसे आगे बढ़ाया जाए। कोर्ट ने पिछले फैसले को बरकरार रखा। मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह की मौजूदगी में हथियार लहराने के मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच अब अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) करेगा। बिहार सरकार के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस चर्चित मामले को गोपालगंज पुलिस से हटाकर सीआईडी को ट्रांसफर कर दिया है। साथ ही अब इस केस में स्थानीय पुलिस की भूमिका समाप्त हो गई है। मीरगंज थाने के सेमराव गांव निवासी गुड्डू राय के घर बीते दो और तीन मई को आयोजित उपनयन संस्कार कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इसी दौरान विधायक अनंत सिंह की मौजूदगी में उनके समर्थकों पर सार्वजनिक रूप से हथियार लहराने का आरोप लगा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए मीरगंज थाने में चार मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के क्रम में पुलिस ने विधायक अनंत सिंह और उनके समर्थकों को नोटिस जारी कर 15 मई को हथियार के साथ मीरगंज थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि निर्धारित तिथि पर विधायक और उनके समर्थक थाने नहीं पहुंचे। मामले को लेकर कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामला राजनीतिक रूप से काफी चर्चित होने के कारण पुलिस मुख्यालय ने इसे गंभीर श्रेणी में रखते हुए सीआईडी को सौंपने का निर्णय लिया