samacharsecretary.com

UPTET 2026: AI निगरानी में पहले दिन की परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न, सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

तीन दिवसीय यूपीटीईटी-2026 की पहले दिन की परीक्षा एआई निगरानी में शांतिपूर्वक संपन्न 02 जुलाई को दो पालियों में 955 केंद्रों पर 6.84 लाख अभ्यर्थी शामिल, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए 03 जुलाई को दो पालियां, 04 जुलाई को एक पाली में होगी परीक्षा, जारी रहेंगे कड़े इंतजाम   लखनऊ  शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) की लिखित परीक्षा तीन दिन 02, 03 व 04 जुलाई 2026 को आयोजित की जा रही है। गुरुवार को पहले दिन  प्रथम पाली पूर्वाह्न 09:30 बजे से 12:00 बजे तक तथा द्वितीय पाली अपरान्ह 02:30 बजे से 05:00 बजे तक प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्वक, पारदर्शी एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि  परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से उनकी, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की गई। ए.आई. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत दृष्टि रखी गई। एआई की मदद से संदिग्धों की जाँच के पश्चात प्रथम पाली में 07 एवं द्वितीय पाली में 08 फर्जी परीक्षार्थी, जो दूसरे परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे, पकड़े गए। इनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही हेतु उन्हें स्थानीय पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सभी केंद्रों पर परीक्षा सुचारु, शुचितापूर्ण एवं निर्विघ्न रूप से संपन्न हुई।  पहले दिन की दोनों पालियों में कुल 8,07,636 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 6,84,614 यानी 84.76% अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 84.69% तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 84.86% रही। परीक्षा के सफल संचालन में जिला एवं पुलिस प्रशासन का सक्रिय सहयोग मिला। डॉ. प्रशांत कुमार ने जानकारी दी कि तीन दिवसीय यूपीटीईटी-2026 के तहत कल  03 जुलाई को भी दो पालियों में तथा 04 जुलाई को एक पाली में परीक्षा आयोजित होगी।  उन्होंने कहा कि शेष दो दिनों की परीक्षाएं भी इसी प्रकार एआई निगरानी, शुचिता व सुरक्षा के उच्च मानकों के साथ संपन्न कराई जाएंगी। अभ्यर्थियों से अपील है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- स्वस्थ छत्तीसगढ़ के लिए योग को बनाएं जनआंदोलन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया योग को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने संभाला पदभार रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और अनुशासित जीवन का आधार है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अग्रवाल को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में योग आयोग प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार को नई गति देगा तथा योग को गांव-गांव, विद्यालयों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयासों से भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। आज विश्व के 176 से अधिक देश 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाकर भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग और आयुर्वेद को नई दिशा देने के लिए आयुष मंत्रालय का गठन किया तथा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सशक्त बनाने के अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद एम्स की स्थापना का आग्रह किया गया है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र औषधीय वनस्पतियों से समृद्ध है, जिससे भविष्य में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बन सकता है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। विधायक किरण सिंह देव ने विश्वास व्यक्त किया कि संजय अग्रवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ योग आयोग प्रदेश के प्रत्येक गांव, शहर और परिवार तक योग की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कार्य करेगा। समारोह में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक किरण देव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बड़ी संख्या में योग साधक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

होम गार्ड्स की कराएं भर्ती, अग्निवीरों को दिया जाएगा सुरक्षा बलों की नियुक्ति में आरक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

"स्कूल चलें अभियान के दौरान ही कराएं सांदीपनि विद्यालय भवनों का लोकार्पण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव होम गार्ड्स की कराएं भर्ती, अग्निवीरों को दिया जाएगा सुरक्षा बलों की नियुक्ति में आरक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समय पाबंदी के लिए मंत्रालय, सतपुड़ा और विंध्याचल में लगाई जाएंगी बॉयोमेट्रिक मशीन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भेल से भूमि वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से करें समन्वय यूनियन कार्बाइड की भूमि पर बनेगा भव्य स्मारक ग्रामीण क्षेत्रों आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए चलेगा अभियान धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों पर धर्मशाला, सराय, अन्न क्षेत्र निर्माण के लिए धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को दें प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न प्रासंगिक विषयों की अद्यतन प्रगति एवं आगामी कार्यवाही की समीक्षा बैठक लेकर दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य शासन की प्राथमिकता वाले विषयों पर त्वरित कार्यवाही की जाए। अभियान चलाकर लक्ष्य पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन दिनों स्कूल चलो अभियान चल रहा है। 15 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के दौरान अधिकाधिक सांदीपनि विद्यालय भवनों को लोकार्पण एवं स्कूलों का युक्तियुक्तकरण कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को इसी सत्र में अधिकतम लाभ मिल  सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश का सबसे बड़ा उत्कृष्ट नवाचार है। स्कूल शिक्षा विभाग इसकी राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग के लिए कार्य योजना तैयार करे। उन्होंने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। यहां सती अनुसुईया मंदिर परिसर, सती अनुसुईया मल्टी फैसिलिटी सेंटर और गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर का निर्माण होना है, यह काम तेजी से पूरा कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना के लिए उत्तरप्रदेश सरकार तैयार है। जल्द ही दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री की बैठक में इस परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी धार्मिक महत्व के तीर्थ स्थलों (जैसे माँ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, दतिया, ओरछा, मैहर आदि) में धर्मशाला, सराय, अन्न क्षेत्र, प्याऊ, पेयजल टंकी, अस्पताल एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवन निर्माण के लिए धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया जाए। यह प्रोत्साहन रजिस्ट्री शुल्क में छूट, अनुदान या अन्य रियायत स्वरूप में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मंत्रालय में विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर विभागों की अद्यतन प्रगति एवं आगामी कार्य योजना (कार्यवाही) के संबंध में समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड (भेल) को शासन द्वारा दी गई जमीन की भेल के लिए वर्तमान में अनुपयोगी भूमि उनसे वापस लेने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय से समन्वय कर यह कार्रवाई जल्द से जल्द की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की रासायनिक कचरे से मुक्त भूमि पर एक भव्य स्मारक का निर्माण होना है, इसके लिए एप्को कार्य योजना तैयार करे और वर्तमान में गुजरात के भुज में तैयार म्यूजियम का मौका मुआयना कर भोपाल में भी ऐसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए विधिवत् प्रस्ताव दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए राज्य के 53 हजार गांवों में अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि इस अभियान व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए गाँव-गाँव शिविर लगाकर ग्रामीणों के पंजीयन किए जाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रकिया को और भी सरल बनाया जाए। ग्रीष्मकाल में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था के लिए पहले से बेहतर तैयारी कर ली जाए। इस वर्ष प्रदेश के किसी भी जिले में पेयजल परिवहन की स्थिति निर्मित नहीं हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में महाकालेश्वर मंदिर की तरह होमगार्ड्स के पदों का सृजन किया जाए और मंदिर समिति के वहन पर इनकी नियुक्ति की जाए। अग्निवीरों को मध्यप्रदेश पुलिस में विशेष सशस्त्र बल (आरक्षक पद) की नियुक्ति में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपर मुख्य सचिव गृह को निर्देशित किया कि वे इस संबंध में अतिशीघ्र कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन की व्यवस्था है कि सभी शासकीय सेवक कार्य दिवसों में सुबह 10 से शाम 6 बजे तक कार्यालय में रहकर अपने पदेन कार्य  सम्पन्न करें। समय की पाबंदी सबके लिए जरूरी है। राज्य मंत्रालय, विध्याचल एवं सतपुड़ा में  अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तय समय पर उपस्थिति एवं रवानगी के लिए बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभाग अपने-अपने स्कूल चला रहे हैं, इन सभी स्कूलों को युक्तियुक्तकरण किया जाए। सभी वर्गों के छात्रावासों को संयुक्त रूप से एक छात्रावास में परिवर्तित कर विद्यार्थियों को यहां रखा जाए। इससे उनमें समरसता का भाव विकसित होगा। इन्हें समरसता छात्रावास का नाम दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट एवं ममलेश्वर के विकास के लिए भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए वन भूमि का उपयोग कर लिया जाए। बताया गया कि इस कार्य के निमित्त भूमि आवंटन की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राम वन गमनपथ परियोजना एवं श्रीकृष्ण पाथेय के निर्माण में तेजी लाएं और इसे समय-सीमा में पूरा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन की दताना-मताना हवाई पट्टी के स्थान पर नवीन हवाई अड्डे के निर्माण कार्य में शीघ्र कार्यवाही की जाए। प्रयास करें कि यहां जल्द से जल्द यहां भूमि-पूजन कर लिया लाए। बताया गया कि नए हवाई अड्डे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए धारा 11 की कार्रवाई भी की जा चुकी है। जल्द ही नवीन हवाई अड्डे निर्माण का भूमि-पूजन करवाया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागों के अधिकारियों को दिए गए लक्ष्यों की जल्द से जल्द पूर्ति के लिए कार्य योजना बनाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिए।  

EPFO Rule Change: PF निकासी की 3 नई कैटेगरी, करोड़ों कर्मचारियों के लिए बदले नियम

 नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी (EPFO) ने अपने लगभग आठ करोड़ एक्टिव सदस्यों से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. इनमें एक सबसे अहम ये है कि 12% पीएफ अंशदान सिर्फ 15,000 रुपये प्रति माह की वेतन सीमा तक ही अनिवार्य है. इससे अधिक अंशदान अब स्वैच्छिक माना जाएगा. इससे कर्मचारियों को यह तय करने के लिए अधिक आजादी मिलेगी कि वे अपनी सैलरी का कितना हिस्सा अपने पीएफ खाते में जमा करना चाहते हैं।  EPFO Rule 2026 में संगठन ने अनिवार्य पीएफ कंट्रीब्यूशन के रूप में 1,800 रुपये की लिमिट को बरकरार रखा है. इसलिए अब 1 लाख रुपये प्रति माह का मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी को भी, ईपीएफ के तहत भविष्य निधि में सिर्फ 1,800 रुपये का योगदान देना होगा, जबकि ऐसे कर्मचारी जो रिटायरमेंट के लिए अधिक बचत (Saving) करना चाहते हैं, वे इस अनिवार्य राशि से अधिक योगदान कर सकते हैं, लेकिन इसको स्वैच्छिक माना जाएगा. ये अनिवार्य और अतिरिक्त पीएफ कंट्रीब्यूशन के बीच स्पष्ट अंतर दर्शाएगी।  कम या खत्म कर सकेंगे एक्स्ट्रा कंट्रीब्यूशन बीते कारोबारी दिन नोटिफाई EPF Scheme 2026 के प्रावधानों पर नजर डालें, तो एक कर्मचारी वैधानिक वेतन सीमा से अधिक वेतन पर स्वैच्छिक आधार पर एक्स्ट्रा पीएफ कंट्रीब्यूशन का ऑप्शन चुन सकता है. वहीं एंप्लॉयर चाहे तो स्वैच्छिक अंशदान के बराबर राशि दे सकते हैं, लेकिन ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य बिल्कुल भी नहीं है. कर्मचारी और नियोक्ता किसी भी समय एक्स्ट्रा कंट्रीब्यूशन को कम या बंद कर सकते हैं।  पीएफ निकासी कैटेगरी में कटौती पीएफ में जमा पैसों की निकासी के लिए पहले से तय 13 कैटेगरी को अब तीन तक सीमित कर दिया गया है. नई ईपीएफ योजना में केंद्रीय न्यासी बोर्ड यानी CBT द्वारा अक्टूबर में अनुमोदित निकासी सुधारों को भी लागू किया गया है. इन बदलावों का उद्देश्य निकासी प्रक्रिया को और सरल बनाना और सालाना निकासी की संख्या को बढ़ाना है।      Essential Needs: बीमारी, शिक्षा और विवाह     Housing Needs: खरीद, निर्माण और आवास संबंधित अन्य खर्च     Special Circumstances: पहले की तमाम कैटेगरी में शामिल अन्य आपात स्थितियां खाते में रखनी होगी 25% राशि  EPFO सदस्यों को कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के अंशदान सहित अपनी पात्र राशि का 100% तक निकालने की अनुमति होगी. हालांकि, उन्हें खातों में कुल योगदान का कम से कम 25% हिस्सा रखना होगा. इसका उद्देश्य रिटायरमेंट फंड का एक हिस्सा सुरक्षित रखना है. बता दें कि ईपीएफओ की सदस्यता से संबंधित नियमों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।  नियोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?  हर नियोक्ता को EPF Scheme 2026 के लागू होने के 15 दिनों के भीतर Form-V में कंसोलिडेटेड रिटर्न डिटेल पेश करनी होगी. रिटर्न में सभी कर्मचारियों का डेटा शामिल होना चाहिए, इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, UAN नंबर, ग्रॉस वेजेस और ईपीएफ वेजेस शामिल होंगे। 

पति ने तलाक के साथ भेजीं पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें, हाई कोर्ट की टिप्पणी से छिड़ी बहस

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट में एक अजीब मामला सामने आया है। एक शख्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में तलाक की अर्जी के साथ पत्नी की प्राइवेट तस्वीरें भी भेज दी। अदालत ने व्यक्ति के इस कदम पर हैरानी जताई। हालांकिइसके बावजूद पति और उसके वकील के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कृत्य गंभीर चूक की श्रेणी में आता है। लेकिन प्रतिवादी पति व वकील ने माफी मांग ली है। इसलिए उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई उचित नहीं है। हाई कोर्ट यह भी कहा कि इस तरह से संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सबमिट करना चाहिए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने की। अदालत ने अपने फैसले में माना कि हालांकि इस तरह के कृत्य को खुली मंजूरी नहीं दी जा सकती। लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वैवाहिक विवाद के मामलों में इस तरह की गलतियां अकसर हो जाती हैं। इन्हें सुधारा जाना चाहिए। इस मामले में वर्ष 2015 के दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। अदालत ने कहा- दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश होने चाहिए उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि संवेदनशील या निजी प्रकृति के दस्तावेजों को पहले अदालत की अनुमति लेकर सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता महिला का तर्क था कि प्रतिवादियों ने फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की अर्जी के साथ बिना किसी बदलाव के निजी तस्वीरें लगाकर उन निर्देशों का उल्लंघन किया। हालांकि हाई कोर्ट की पीठ ने गौर किया कि प्रतिवादियों का दावा है कि उन्हें उन निर्देशों की जानकारी नहीं थी। पीठ ने कहा कि इसके अलावा जब प्रतिवादी पति व उसके वकीलों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने कार्यों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की, बल्कि बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने फैमिली कोर्ट में उन तस्वीरों को सीलबंद लिफाफे में रखने के लिए एक अर्जी दाखिल की है। पीठ ने कहा कि इसे गंभीर चूक माना जा सकता है। लेकिन अवमानना की कार्रवाई शुरु करना उचित नहीं है। अदालत ने पति को चेतावनी दी पीठ ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि महिला से संबंधित मामलों में इस तरह की भविष्य में गलती नहीं होनी चाहिए। अवमानना ​​याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता महिला को अपनी पहचान छिपाने व संबंधित सामग्री की सुरक्षा के लिए फैमिली कोर्ट में जाने की छूट दी। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि वे तस्वीरों को खुले रिकॉर्ड से हटा दें। उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखें।

‘भारत में रहती तो CEO नहीं बनती’… इंदिरा नूयी के बयान ने मचाया बवाल, चीन की जमकर की सराहना

 कैलिफोर्निया पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूयी ने भारत को लेकर बेहद तीखे बयान दिए हैं। भारतीय मूल की इंदिरा नूयी ने एक इंटरव्यू में चीन को भारत की तुलना ज्यादा सुविधाजनक बताया है। उन्होंने भारत की कार्यसंस्कृति और सामाजिक व्यवस्था की भी तीखी आलोचना की है। इंदिरा नूयी ने 'हूवर इंस्टिट्यूशन' के एक विशेष इंटरव्यू में लीडरशिप, अपने अमेरिकी सफर और भारत को लेकर कई बेबाक और दिलचस्प टिप्पणियां की हैं। भारत में होती तो इतनी बड़ी कंपनी की CEO नहीं बन पाती नूयी ने अमेरिका के 'मेरिटोक्रेटिक' यानी योग्यता आधारित सिस्टम की तारीफ करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह अमेरिका नहीं आतीं, तो शायद इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। भारत की सामाजिक और कॉर्पोरेट व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए नूयी ने दावा किया कि उनके जैसी सफलता भारत में रहकर हासिल करना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा, "एक अप्रवासी अपनी जेब में बिना कुछ लिए आता है और एक प्रतिष्ठित अमेरिकी कंपनी का CEO बन जाता है… ऐसा दुनिया के किसी और देश में नहीं हो सकता। मैं दुनिया के किसी भी अन्य देश में, यहां तक कि भारत में भी कभी सीईओ नहीं बन सकती थी।" चीन की तारीफ, भारत को बताया 'गंदा' एक यात्री के तौर पर चीन और भारत की तुलना करते हुए नूयी ने कहा कि चीन बहुत 'सजातीय' और व्यवस्थित है, जबकि भारत पूरी तरह से 'अराजक' है। उन्होंने कहा, "चीन में काफी हद तक एक जैसी संस्कृति और लोग हैं। एक पर्यटक के तौर पर भारत की तुलना में चीन में समय बिताना आसान है। अगर आपको साफ-सुथरी और व्यवस्थित जिंदगी पसंद है, तो भारत में रहना आपके लिए नामुमकिन होगा। भारत की खूबसूरती उसकी अव्यवस्था में ही है। अगर आपको यह अव्यवस्था पसंद आती है, तो आप बार-बार यहां आना चाहेंगे।" उन्होंने सड़क पर कारों के बीच चलती गायों का उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग सिर्फ साफ-सफाई और व्यवस्था पसंद करते हैं, उनके लिए भारत को समझना मुश्किल होगा, लेकिन भारतीय लोग इसी तरह की अव्यवस्था के बीच रास्ते निकालना जानते हैं। 60 और 70 के दशक का भारत और महिलाओं की स्थिति अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए नूयी ने बताया कि औपनिवेशिक शासन के बाद का युवा भारत कैसा था। उनका जन्म भारत की आजादी के सात-आठ साल बाद हुआ था। उन्होंने बताया, "60 और 70 के दशक में भारत एक नया देश था और उस समय महिलाएं समाज में कोई बड़ी ताकत नहीं थीं। अधिकांश महिलाएं घर पर ही रहती थीं।" हालांकि, उन्होंने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पिता और दादा ने उन्हें "दुनिया जीतने और बड़े सपने देखने" के लिए प्रेरित किया, जिसने उन्हें अमेरिका जाने का साहस दिया। भारतीय लोकतंत्र: धीमी प्रगति, लेकिन यही इसकी ताकत है नूयी ने चीन के सेंट्रलाइज्ड विकास मॉडल और भारतीय लोकतंत्र की तुलना करते हुए बेहद दिलचस्प विश्लेषण किया। उन्होंने माना कि चीन ने सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था के कारण लाखों लोगों को गरीबी से निकाला और एक सुपरपावर बना। वहीं भारत को लेकर उन्होंने कहा, "भारत अभी भी एक विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि वहां लोकतंत्र का शासन है और जब हर किसी के पास वोट और अपनी बात कहने का अधिकार होता है, तो प्रगति धीमी होती है।" हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत के लोकतांत्रिक होने पर खुशी है क्योंकि सत्तावादी शासनों के पास 'सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण' का कोई तंत्र नहीं होता है, जो उनका सबसे बड़ा नुकसान है। उन्होंने एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका की तरह भारत के हर छोटे-बड़े कस्बे में एक 'कोर्टहाउस' होता है, जो लोगों को यह भरोसा देता है कि उनके पास अधिकार हैं। चीन में ऐसा नहीं है क्योंकि वहां सरकार ही नियम बनाती और फैसला करती है। भारत-अमेरिका संबंध: स्वाभाविक भागीदार भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर नूयी ने दोनों देशों को एक-दूसरे का 'नेचुरल पार्टनर' बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी 50% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। इसके साथ ही यहां दुनिया की सबसे बड़ी अंग्रेजी बोलने वाली आबादी है। उनके अनुसार, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग और AI के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाएं दुनिया के भविष्य के लिए बेहद अहम होने जा रही हैं। दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव पर उन्होंने सलाह दी कि, "अमेरिका और भारत के नेताओं को कोई भी कड़ा कदम उठाने या ईगो में आने से पहले एक-दूसरे की जगह खुद को रखकर सोचना चाहिए।" भू-राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए नूयी ने भारत की सुरक्षा को अमेरिकी हितों के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जब चीन के साथ जियो-पॉलिटिकल रेस की बात आती है, तो भारत एक धुरी बन जाता है। नूयी ने कहा, "यह देखते हुए कि भारत कितने 'खराब पड़ोस' में है, यह बेहद अहम है कि अमेरिका भारत की रक्षा करे और वहां लोकतंत्र को फलने-फूलने दे। कौन हैं इंदिरा नूयी? इंदिरा नूयी भारतीय मूल की एक बेहद प्रभावशाली अमेरिकी बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं। उन्हें मुख्य रूप से दुनिया की सबसे बड़ी फूड और बेवरेज कंपनियों में से एक, पेप्सिको की पूर्व सीईओ और चेयरपर्सन के रूप में उनके शानदार नेतृत्व के लिए जाना जाता है। शादी से पहले उनका नाम इंदिरा कृष्णमूर्ति था। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1955 को तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। उन्होंने 1975 में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 1976 में भारत के प्रतिष्ठित IIM कलकत्ता से पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (MBA) पूरा किया। 1978 में वह उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं। 1980 में उन्होंने प्रतिष्ठित Yale School of Management से पब्लिक और प्राइवेट मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। अपने शुरुआती दिनों में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने रिसेप्शनिस्ट के तौर पर भी नाइट शिफ्ट में काम किया था। येल से पढ़ाई के बाद उन्होंने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG), मोटोरोला और आसिया ब्राउन बोवेरी (ABB) जैसी दिग्गज कंपनियों में काम किया। उन्होंने रणनीतिक योजना के प्रमुख के रूप में 1994 में पेप्सिको जॉइन किया और कंपनी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। 2006 … Read more

Antitrust Case: Google हारा बड़ा कानूनी मुकदमा, EU कोर्ट ने ₹4.1 लाख करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा

 नई दिल्ली गूगल को यूरोप में एक बड़ा कानूनी झटका लगा है. यूरोपीय संघ (EU) की सबसे बड़ी अदालत ने एंड्रॉयड से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले में गूगल की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही कंपनी पर लगाया गया 4.1 अरब यूरो (करीब 4.10 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड जुर्माना बरकरार रहेगा. यह मामला पिछले आठ साल से चल रहा था।  यह जुर्माना पहली बार 2018 में यूरोपीय आयोग (European Commission) ने लगाया था. आयोग का आरोप था कि Google ने Android ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने सर्च और क्रोम ब्राउज़र को बढ़ावा दिया और दूसरी कंपनियों के लिए कंपटीशन करना मुश्किल बना दिया।  उस समय कंपनी पर 4.34 अरब यूरो का जुर्माना लगाया गया था. बाद में 2022 में एक निचली अदालत ने इसे घटाकर 4.1 अरब यूरो कर दिया, लेकिन जुर्माना खत्म नहीं किया. अब EU की सर्वोच्च अदालत ने भी इसी फैसले को सही माना है।  अदालत ने कहा कि गूगलग और उसकी पैरेंट कंपनी Alphabet की अपील खारिज की जाती है. कोर्ट के मुताबिक, एंड्रॉयड से जुड़े समझौतों के जरिए गूगल ने अपने प्रभुत्व का गलत फायदा उठाया और बाजार में कंपटीशन को प्रभावित किया।  गूगल पर क्या आरोप हैं? यूरोपीयन यूनियन का कहना था कि गूगल स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से ऐसी शर्तें रखता था, जिनके तहत गूगल प्ले स्टोर का लाइसेंस लेने के लिए गूगल सर्च और क्रोम को पहले से इंस्टॉल करना जरूरी होता था।  आयोग का मानना था कि इससे दूसरे सर्च इंजन और ब्राउज़र को बराबरी का मौका नहीं मिला और एंड्रॉयड बाजार में गूगल की पकड़ और मजबूत होती गई।  गूगल ने इस फैसले पर निराशा जताई है. कंपनी का कहना है कि एंड्रॉयड एक ओपन और फ्री प्लेटफॉर्म है, जिसने मोबाइल इंडस्ट्री में कंपटीशन बढ़ाने और हजारों कंपनियों को कारोबार करने का मौका दिया है।  गूगल का यह भी कहना है कि अदालत ने एंड्रॉयड को खुला और सभी के लिए उपलब्ध बनाए रखने में कंपनी के निवेश को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। यह फैसला Google के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले कुछ सालों में यूरोप ने कंपनी पर कई एंटी ट्रस्ट मामलों में कार्रवाई की है. एंड्रॉयड केस के अलावा गूगल शॉपिंग और ऑनलाइन ऐड्स से जुड़े मामलों में भी कंपनी को अरबों यूरो के जुर्माने का सामना करना पड़ा है।  यूरोपीयन यूनियन लगातार बड़ी टेक कंपनियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है और उनका मानना है कि बाजार में निष्पक्ष कंपटीशन बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। इस फैसले के बाद Android मामले में Google की कानूनी लड़ाई लगभग खत्म हो गई है और कंपनी को 4.1 अरब यूरो का जुर्माना भरना होगा. यह अब भी यूरोप में किसी टेक कंपनी पर लगाए गए सबसे बड़े एंटीट्रस्ट जुर्मानों में से एक है। 

India Tour of Sri Lanka: 9 साल बाद टेस्ट सीरीज का ऐलान, जानें कब और कहां होंगे मुकाबले

 कोलंबो भारतीय क्रिकेट टीम अगले महीने श्रीलंका दौरे पर जाने वाली है, जहां उसे दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है. यह सीरीज आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 का हिस्सा होगी. भारतीय टीम इस सीरीज में जीत हासिल कर अंकतालिका में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी। श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने गुरुवार (2 जुलाई) को इस सीरीज का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया. सीरीज का पहला टेस्ट 15 से 19 अगस्त तक गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. इसके बाद दूसरा और अंतिम टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में होगा. दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होंगे।  भारत अब तक दो बार वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल खेल चुका है, लेकिन एक भी बार खिताब जीतने में सफल नहीं रहा. मौजूदा डब्ल्यूटीसी चक्र में टीम इंडिया फिलहाल पांचवें स्थान पर है, जबकि श्रीलंका छठे नंबर पर मौजूद है. ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह सीरीज काफी अहम रहने वाली है।  शुभमन गिल की कप्तानी में भारत इस सीरीज में जीत दर्ज कर WTC फाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगा. शुभमन गिल की कप्तानी में भारत ने डब्ल्यूटीसी 2025-27 की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ 2-2 से टेस्ट सीरीज ड्रॉ कर की थी. इसके बाद टीम इंडिया ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज का क्लीन स्वीप किया।  साउथ अफ्रीका ने दिया था झटका हालांकि नवंबर 2025 में साउथ अफ्रीका ने भारत को उसके घर में ही दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप कर बड़ा झटका दिया. इस हार के बाद भारतीय बल्लेबाजों की स्पिन के खिलाफ कमजोरी पर सवाल उठे. पिछले महीने भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट जीतकर वापसी की. अब श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों की एक बार फिर कड़ी परीक्षा होगी।  गॉल और कोलंबो की पिचें परंपरागत रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं. ऐसे में श्रीलंका के स्पिन आक्रमण का सामना करना भारतीय बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं होगा. साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में स्पिन के सामने भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी उजागर हुई थी. अब देखना दिलचस्प होगा कि शुभमन गिल की टीम इस चुनौती से कैसे पार पाती है।  भारत ने आखिरी बार 2017 में श्रीलंका का टेस्ट दौरा किया था. तब विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने मेजबान श्रीलंका का 3-0 से क्लीन स्वीप किया था. करीब नौ साल बाद भारतीय टीम फिर श्रीलंका में टेस्ट सीरीज खेलने उतरेगी. ऐसे में फैन्स की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या शुभमन गिल की कप्तानी में टीम इंडिया इतिहास दोहरा पाएगी।     

2598 शिविरों में 1 लाख 25 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर निराकरण

भोपाल  बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को उनके घर के नजदीक ही निराकरण करने के उद्देश्य से मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संचालित “संपर्क अभियान 2026” को सफलता मिली है। 14 मई से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत भोपाल और ग्वालियर रीजन के 16 जिलों में व्यापक स्तर पर 2598 विशेष शिविर आयोजित किए गए। इनमें 1 लाख 25 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया। भोपाल रीजन भोपाल रीजन के अंतर्गत 191 शिविर शहर वृत्त भोपाल में आयोजित किए गए। इसमें 13046 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण किया गया। साथ ही बैतुल वृत्त में 230 शिविरों में 13403 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, सीहोर वृत्त में 168 शिविरों में 3908 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, राजगढ़ वृत्त में 189 शिविरों में 2542 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, नर्मदापुरम वृत्त में 175 शिविरों में 16884 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, रायसेन वृत्त में 133 शिविरों में 9907 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, भोपाल (ग्रामीण) वृत्त में 132 शिविरों में 4486 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, विदिशा वृत्त में 102 शिविरों में 6764 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण एवं हरदा वृत्त में 69 शिविरों में 11309 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण किया गया है। ग्वालियर रीजन ग्वालियर रीजन के अंतर्गत मुरैना वृत्त में 201 शिविरों में 6736 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, शहर वृत्त ग्वालियर में 154 शिविरों में 3626 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, भिंड वृत्त में 148 शिविरों में 3334 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, गुना वृत्त में 133 शिविरों में 5428 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, ग्वालियर (ग्रामीण) वृत्त में 131 शिविरों में 2530 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, श्योपुर वृत्त में 98 शिविरों में 3569 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, दतिया वृत्त में 91 शिविरों में 5431 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण, शिवपुरी वृत्त में 176 शिविरों में 4582 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण एवं अशोकनगर वृत्त में 77 शिविरों में 7616 उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण किया गया। शिकायतों और सेवाओं पर हुआ त्वरित काम इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट समाधान करना था। शिविरों में मुख्य रूप से उपभोक्ताओं को त्रुटिपूर्ण बिल, मीटर रीडिंग और अन्य बिलिंग संबंधी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया। साथ ही मात्र 5 रुपये में नवीन ग्रामीण घरेलू एवं कृषि पम्‍प कनेक्शन प्रदान किये गए। वहीं भार वृद्धि, नाम परिवर्तन, श्रेणी परिवर्तन, स्‍थाई कनेक्‍शन विच्‍छेदन, अस्थायी कनेक्शन, ई-केवायसी और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC), बंद/खराब मीटर बदलना, स्‍मार्ट मीटर संबंधी शिकायतें, सर्विस केबल सुधार, वोल्टेज की समस्या और ट्रांसफार्मर से जुड़ी शिकायतों, बिजली बिलों का आंशिक एवं पूर्ण भुगतान, अग्रिम भुगतान पर छूट, बकाया राशि भुगतान तथा अन्य जनहितैषी योजनाओं की जानकारी और लाभ प्रदान किया गया । नवीन विद्युत कनेक्शन मिलने से मिली राहत (डोलरिया, नर्मदापुरम) संपर्क अभियान के अंतर्गत नर्मदापुरम वृत्त के डोलरिया वितरण केंद्र के ग्राम बाईखेड़ी में आयोजित शिविर में भारती चौरे ने नवीन घरेलू विद्युत कनेक्शन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन पर विभागीय अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर उन्हें तत्काल नवीन विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया। स्वयं का विद्युत कनेक्शन मिलने पर उन्होंने राहत व्यक्त करते हुए कंपनी की त्वरित एवं जनहितकारी सेवा की सराहना की। एलटी केबल की समस्या का हुआ त्वरित समाधान (खुजनेर, राजगढ़) संपर्क अभियान के अंतर्गत राजगढ़ संभाग के खुजनेर वितरण केंद्र के कुलवाड़ मोहल्ला में आयोजित शिविर के दौरान उपभोक्ता किशनलाल पिता भेरूलाल ने जली हुई एलटी केबल की समस्या से संबंधित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जली हुई एलटी केबल को तत्काल बदल दिया। समस्या का शीघ्र समाधान होने पर उपभोक्ता ने संतोष व्यक्त करते हुए विभाग की त्वरित एवं सरल सेवा की सराहना की।  

मध्य प्रदेश का बैतूल बनेगा Green Model, 100 करोड़ की योजना सफल रही तो पूरे देश में होगी लागू

बैतूल बैतूल में विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर 100 करोड़ रुपए का ‘लैंडस्केप प्रोजेक्ट’ तैयार हो रहा है। इस परियोजना में पहली बार जंगल, वन्यजीव, जल, जैव विविधता और वन अधिकार पाने वाले हजारों परिवारों को एक ही विकास मॉडल में शामिल किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे देशभर के लिए मॉडल बनाया जा सकता है। अभी तक जंगलों का प्रबंधन अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से होता है, लेकिन इस परियोजना में पूरे सतपुड़ा से मेलघाट तक फैले जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, नदियां, गांव, खेती और वनाधिकार वाले क्षेत्रों को एक इकाई मानकर योजना बनाई जाएगी। यानी जंगल और गांव को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाएगा। एक ओर जंगलों के संरक्षण की जरूरत है, तो दूसरी ओर वन अधिकार अधिनियम के तहत हजारों परिवारों को जंगलों के आसपास रहने और आजीविका का अधिकार मिला है। अब पहली बार इस चुनौती का समाधान तलाशने की कोशिश बैतूल से शुरू हो रही है। पूरी परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व बैतूल के पूर्व मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) एवं वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) में सीनियर एडवाइजर राकेश भूषण सिन्हा कर रहे हैं। आखिर 'लैंडस्केप प्रोजेक्ट' है क्या? अब तक वन विभाग अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से वर्किंग प्लान तैयार करता रहा है। एक वन मंडल की योजना दूसरे से अलग होती है, लेकिन जंगल किसी प्रशासनिक सीमा को नहीं मानते। वन्यजीव, नदियां, पहाड़ और जैव विविधता पूरे क्षेत्र में फैली होती है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लेकर मेलघाट टाइगर रिजर्व तक के पूरे वन क्षेत्र को एक लैंडस्केप यानी एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र मानकर योजना बनाई जाएगी। इसमें जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, जल स्रोत, ग्रामीण आबादी, खेती, वनाधिकार वाले गांव और प्राकृतिक संसाधनों को एक साथ जोड़कर विकास और संरक्षण की रणनीति तैयार होगी। सबसे बड़ी चुनौती… जंगल भी बचें और वनवासी भी आगे बढ़ें राकेश भूषण सिन्हा बताते हैं कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जंगलों के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों को वन भूमि पर अधिकार मिले हैं। इसका उद्देश्य उन्हें सम्मानपूर्वक आजीविका उपलब्ध कराना था। अब चुनौती यह है कि इन परिवारों की आय बढ़े, लेकिन जंगलों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। दो राज्यों का साझा मॉडल सतपुड़ा और मेलघाट भले ही दो राज्यों में स्थित हों, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से दोनों एक ही लैंडस्केप का हिस्सा हैं। बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानते। ऐसे में यह परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करेगी। अभी तक दोनों राज्यों की योजनाएं अलग-अलग बनती रही हैं, जबकि नई व्यवस्था में साझा रणनीति के साथ काम होगा।   दक्षिण वन मंडल के डीएफओ अरिहंत ने बताया कि यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के संयुक्त प्रयासों से तैयार की जा रही है। इसका क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के साथ महाराष्ट्र के मेलघाट तक फैले वन्यजीव कॉरिडोर क्षेत्र में प्रस्तावित है।