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रायगढ़ के रामभांठा में ₹75 लाख से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, मंत्री ओपी चौधरी ने किया भूमिपूजन

रायगढ़ के रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन शाला नायक सुमन के हाथों कराया भूमिपूजन, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया सम्मानित शिक्षा की ताकत से ही मेरे जीवन में आया बदलाव, छोटे से गांव से निकलकर आईएएस और वित्त मंत्री बनने तक का सफर शिक्षा से ही हुआ संभव  : ओ.पी. चौधरी रामभांठा स्कूल को 10वीं से 12वीं तक उन्नयन की मिली सुविधा, क्षेत्र के बच्चों को उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में मिलेगी सहूलियत रायपुर,  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन हाई स्कूल भवन का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में उन्होंने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। नया स्कूल भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सपनों को साकार करने की मजबूत नींव बनेगा। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शाला नायक सुमन के हाथों नवीन भवन का भूमिपूजन कराया। उन्होंने सुमन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में इतनी ऊंचाई हासिल करें कि भविष्य में आप हमसे भी बड़े विकास कार्यों का भूमिपूजन करें। वित्त मंत्री के इस आत्मीय व्यवहार से विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल रहा। शिक्षा ने बदली मेरी जिंदगी, यही हर बच्चे की सफलता का आधार : वित्त मंत्री चौधरी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने अपने जीवन के संघर्षों और शिक्षा के महत्व को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति, समाज, प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। किसी भी देश के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंत्री चौधरी ने कहा कि मेरा जन्म रायगढ़ से लगभग 17 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बायंग में हुआ था। जब मैं आठ वर्ष का था, तब मेरे पिता का निधन हो गया। मेरी माताजी केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा ने मेरे जीवन को नई दिशा दी। शिक्षा की बदौलत मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचा और आज रायगढ़ के विधायक तथा छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रामभांठा विद्यालय का 12वीं तक उन्नयन, अब बच्चों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्ष 2025 में रामभांठा विद्यालय को हाई स्कूल से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के रूप में उन्नत किया गया। पहले यहां केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की सुविधा थी, लेकिन अब बारहवीं कक्षा तक शिक्षा की व्यवस्था होने से रामभांठा और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी सहूलियत मिल रही है। उन्होंने कहा कि 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाला नया भवन विद्यालय की अधोसंरचना को मजबूत करेगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शैक्षणिक अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी बच्चों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षक ही गढ़ते हैं समाज और राष्ट्र का भविष्य वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों के हाथों में होती है। शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करते हैं।  इस अवसर पर वित्त मंत्री चौधरी ने प्रतिभा सम्मान समारोह के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और सभी बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, बड़े सपने देखने तथा जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में रायगढ़ नगर निगम के महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविंद्र गबेल, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य नरेंद्र पटेल, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मध्य प्रदेश में बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक, रेस्टोरेंट से हॉस्टल तक नहीं बना सकेंगे

 इंदौर  मध्य प्रदेश में बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी रूल्स को लेकर बड़ी सख्ती की गई है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा नियम-2026 में अब नियमों को तोड़ने पर एफआईआर के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब इमारतों में जांच के बाद कमियों को दूर करने के लिए केवल 30 दिन का ही समय दिया जाएगा। नए नियमों के तहत अधिकारियों की ओर से होने वाली कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमियां दूर न करने पर इमारत या भवन को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई सील तोड़कर बिना किसी एनओसी के फिर से इमारत में अपना काम जारी रखता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं ऐसे मामले में बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। बेसमेंट में किचन और बैटरी रखने पर भी पांबदी नए नियमों के तहत इमारतों के बेसमेंट में किसी भी तरह के व्यावासायिक गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई गई। यहां किचन, रेस्टोरेंट, रूम, हॉस्टल नहीं बनेंगे। इसके साथ ही बेसमेंट में ज्वलनशील पदार्थ और बैटरी और यूपीएस भी नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी समय-समय पर इसको लेकर इमारतों की जांच करेंगे। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी। पेट्रोल-डीजल और ईवी के लिए सेंसर बेसमेंट में ईलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जिंग और पार्किंग के लिए रेट ऑफ राइज हीट सेंसर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही जहां बेसमेंट में पेट्रोल-डीजल वाहन पार्क होते हैं वहां कार्बन मोनोऑक्साइड सेंसर लगाना होगा। इससे धुआं उठने या जहरीली गैस बेसमेंट में होने की स्थिति में सेंसर तुरंत अलट करेगा। आम लोगों के लिए फायर सेफ्टी नियमों की 8 जरूरी बातें 1. घर और फ्लैट के लिए क्या नियम हैं? आवासीय भवनों पर भी फायर सेफ्टी नियम लागू होंगे। 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति फ्लोर 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा। निर्धारित दोनों सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाण पत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान हैं। 2. दुकानों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा जरूरी दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार फायर सेफ्टी इंतजाम करने होंगे। इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास शामिल हो सकते हैं। 3. अस्पतालों और स्कूलों में भी सुरक्षा मानक जरूरी अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों को अपनी श्रेणी के अनुसार फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य आग लगने पर मरीजों, बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। 4. फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहेगा? नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सामान्यतः पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी तीन साल तक वैध रहेगी। प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा। 5. हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। उसे सुरक्षा इंतजाम चालू रखने और सालाना घोषणा देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। 6. सुरक्षा में कमी मिली तो 30 दिन में सुधार करना होगा निरीक्षण में फायर सेफ्टी की कमियां मिलने पर सक्षम प्राधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन मिल सकते हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित कर आगे कार्रवाई की जा सकती है। 7. शादी, धार्मिक आयोजनों और पंडालों पर भी नियम लागू अस्थायी पंडाल, टेंट, मंडप और सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और तय लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है। 8. फायर टैक्स और सेवा शुल्क कितना लगेगा? नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2% की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, लेकिन आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है। कुछ फायर सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में सेवा शुल्क से छूट मिलेगी।। 1. हर इमारत के लिए अलग फायर सेफ्टी मानक नियमों में भवनों को उपयोग के आधार पर आवासीय, शैक्षणिक, संस्थागत, असेंबली, व्यावसायिक, बाजार, औद्योगिक, भंडारण और खतरनाक गतिविधियों वाली श्रेणियों में बांटा गया है। अग्निशमन उपकरणों की संख्या, निकास द्वार और सुरक्षा इंतजाम भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार तय होंगे। 2. फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी भवन मालिक की भवन मालिक या संचालक को फायर सेफ्टी इंतजाम चालू हालत में रखने होंगे। सालाना घोषणा में इनकी स्थिति की पुष्टि करनी होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी कमियों की रिपोर्ट तैयार कर साक्ष्य दर्ज कर सकते हैं और सुधार के निर्देश दे सकते हैं। नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसे सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। 3. आग लगने पर दमकल, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में समन्वय नियमों के तहत फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय किया जाएगा। आग की सूचना मिलने पर घटनास्थल, फंसे लोगों और संभावित नुकसान का ब्योरा दर्ज होगा। जरूरत के अनुसार बिजली बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और मलबा हटाने में संबंधित विभागों की मदद ली जा सकेगी। दमकल अधिकारी दूसरे फायर स्टेशनों से भी कर्मचारी और उपकरण बुला सकेंगे। आपात स्थिति में सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा। 4. फायर सेफ्टी के काम के लिए एजेंसी को लाइसेंस जरूरी फायर सेफ्टी का काम करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है। आवेदन शुल्क ₹10,000 है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा। … Read more

मुख्यमंत्री ने मां स्कंदमाता को बताया वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी

जब नारीशक्ति स्वस्थ-शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मां स्कंदमाता को बताया वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी  बेटियों की शिक्षा में निवेश उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का जरिया: सीएम 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं पूर्ववर्ती सरकारें: मुख्यमंत्री लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगतजननी मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप को वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी बताया। उन्होंने कहा कि मां स्कंदमाता की आराधना हमें यह पावन संदेश देती है कि जब नारीशक्ति स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल होता है। 2017 से पहले सिर्फ उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार सीएम ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि वर्ष 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय पूर्ववर्ती सरकारें केवल अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं। प्रदेश में माताओं का स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा घोर उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। अस्पतालों की बदहाली, दवाओं का अभाव और संस्थागत प्रसव की लचर व्यवस्था के कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में थी।  डबल इंजन सरकार ने बनाया समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र मुख्यमंत्री ने लिखा कि विगत साढ़े 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदला है। पहले सुविधाओं के अभाव में प्रदेश की लाखों बेटियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थीं, लेकिन विगत 9.5 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और सुरक्षित मातृत्व तक समग्र सुरक्षा एवं कल्याण चक्र तैयार किया है। बदले परिदृश्य पर कराया ध्यानाकर्षण मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद बदले परिदृश्य पर भी ध्यानाकर्षण कराया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प से प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का सैचुरेशन 36 से बढ़कर 96 फीसदी से अधिक हो गया है। स्कूल ड्रॉपआउट रेट 20 से घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गया है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से श्रमिक व वंचित वर्ग की बेटियों को आधुनिक, विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा मिल रही है। कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक पढ़ाई की सुविधा के विस्तार से बेटियों को अपनी शिक्षा पूरी करने के अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा में निवेश, उनके आत्मविश्वास और प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने का निवेश है।

पेशावर में निजी स्कूल की छत ढही, मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 पेशावर  पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक निजी स्कूल की छत अचानक गिरने से बड़ा हादसा हो गया. प्रांतीय राजधानी के दिर कॉलोनी इलाके में हुए इस हादसे में कम से कम 28 बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए. लेडी रीडिंग अस्पताल (LRH) के प्रशासन के मुताबिक, अस्पताल में 28 बच्चों के शव लाए गए. हादसे में एक महिला टीचर की भी मौत हुई है. जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर (CCPO) डॉ. मियां सईद ने बताया कि छत गिरने की घटना में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।  बाद में बढ़ा मौतों का आंकड़ा स्कूल की छत गिरने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. मलबे के नीचे कई बच्चों और स्कूल स्टाफ के फंसे होने की आशंका जताई गई. शुरुआत में लेडी रीडिंग अस्पताल प्रशासन ने हादसे में चार लोगों की मौत की जानकारी दी थी. हालांकि, बाद में अस्पताल ने बताया कि वहां 28 बच्चों के शव लाए गए हैं. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, हादसे में 28 बच्चे घायल भी हुए हैं. वहीं, पुलिस अधिकारी डॉ. मियां सईद ने घायलों की संख्या 40 से ज्यादा बताई. रिपोर्ट के मुताबिक घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।  मलबे में फंसे बच्चों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे के बाद बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे बच्चों व स्कूल कर्मचारियों की तलाश शुरू की. रेस्क्यू अधिकारियों ने बताया कि छत गिरने के बाद कई बच्चे मलबे के नीचे फंस गए थे. बचावकर्मी मलबे को हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे. हादसे में घायल बच्चों को इलाज मुहैया कराने के लिए अस्पताल में भी व्यवस्था की गई।  प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जताया दुख पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेशावर में स्कूल की छत गिरने से हुई मौतों पर गहरा दुख जताया. उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों समेत सभी मृतकों के लिए प्रार्थना की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की. प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता दी जाए. साथ ही, उन्होंने घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान में तेजी लाने को कहा। 

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट रायपुर,  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष तोमन साहू ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने राज्य के 13 जिलों में जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित किए जाने की जानकारी दी और इसका प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपा।         साहू ने राज्यपाल को जिलों में रेड क्रॉस की गतिविधियों और संचालित कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया। साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज्यपाल को आमंत्रित किया।         राज्यपाल डेका ने शेष जिलों में भी जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेड क्रॉस की गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य युगल सिन्हा उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर एक कॉल से दूर हुआ गांव का अंधेरा

सेवा की कहानी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर एक कॉल से दूर हुआ गांव का अंधेरा सुकमा के पुसपाल-चितलनार मार्ग पर सात दिनों में लगीं स्ट्रीट लाइटें, ग्रामीणों को मिली राहत रायपुर,   सुकमा जिले के कोकावाड़ा (जांगड़पाल) गांव के लोगों को वर्षों से अंधेरे में आवाजाही की परेशानी से महज एक फोन कॉल ग्रामवासियों के लिए राहत की सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर समस्या दर्ज कराने के बाद तत्काल मामले को संज्ञान में लाकर कार्यवाही प्रारंभ की गयी और सात दिनों के भीतर पुसपाल-चितलनार मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगा दी गईं। इससे करीब 450 की आबादी वाले इस गांव के लोगों की रात में आवाजाही आसान हो गई है।  छिंदगढ़ विकासखंड के पुसपाल-चितलनार मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से ग्रामीणों को रात में टॉर्च और वाहनों की हेडलाइट के सहारे आना-जाना पड़ता था। घने जंगलों से घिरे इस रास्ते पर सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और आपात स्थिति में मरीजों को लाने-ले जाने में परेशानी होती थी। गांव के युवा श्री रितेश यादव ने इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर अपनी यह समस्या दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। कलेक्टर श्री अमित कुमार की निगरानी में सात दिनों के भीतर मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगा दी गईं। अब सड़क पर रोशनी होने से ग्रामीणों को रात में आने-जाने में राहत मिली है।

मुखर्जी नगर में छात्रों के बीच पहुंचीं CM रेखा गुप्ता, मुफ्त लाइब्रेरी से लेकर महिला सुरक्षा तक दिए निर्देश

नई दिल्ली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स की समस्याएं जानने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने  मुखर्जी नगर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वह चाय की दुकान पर स्टूडेंट्स के बीच बैठीं और उनसे पढ़ाई, आवास, महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बातचीत की। स्टूडेंट्स ने मुफ्त लाइब्रेरी की कमी, पीजी के महंगे किराए, खराब सफाई व्यवस्था और पानी की क्वॉलिटी से जुड़ी समस्याएं उठाईं। सीएम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को इन समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए। फ्री लाइब्रेरी और सुरक्षा का मुद्दा उठा, सुनीं परेशानियां सीएम ने लंबे समय से बंद पड़े शौचालय को पिंक टॉयलेट के रूप में विकसित करने और नए शौचालयों का निर्माण कराने को कहा। उन्होंने मुखर्जी नगर, नेहरू विहार और पास की कॉलोनियों की गलियों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। PG के किराए और पानी की गुणवत्ता पर भी चर्चा मुख्यमंत्री ने स्टूडेंट्स से उनके रहने के इंतजाम और रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। स्टूडेंट्स ने बताया कि मुखर्जी नगर जैसे कोचिंग हब में PG का किराया काफी अधिक है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर आर्थिक दबाव पड़ता है। उन्होंने पढ़ाई के लिए मुफ्त लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई। इसके अलावा, इलाके में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई। सीएम ने संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं पर ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर जोर मुखर्जी नगर में बड़ी संख्या में छात्राएं भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आती हैं। ऐसे में महिला सुरक्षा, साफ-सफाई और सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता अहम मुद्दे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इलाके में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा। बंद पड़े शौचालय को पिंक टॉयलेट के रूप में विकसित करने और नए शौचालय बनाने के निर्देश भी इसी दिशा में दिए गए। साथ ही, मुखर्जी नगर, नेहरू विहार और आसपास की कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने पर जोर दिया गया। भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग को मिलेगी राहत, नागौर से सस्ता लिग्नाइट मिलने का रास्ता साफ

राजस्थान में कोयले की महंगाई से राहत की उम्मीद, नागौर लिग्नाइट माइंस दोबारा होंगी शुरू

भीलवाड़ा देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा का कपड़ा प्रोसेस उद्योग इन दिनों ईंधन की आसमान छूती कीमतों और घटती उपलब्धता के चलते गहरे संकट में घिर गया है। उत्पादन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी से वैश्विक और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। इसी बीच, नागौर स्थित राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएम) की लिग्नाइट माइंस की नीलामी होने के बावजूद अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी के कारण संचालन ठप हो गया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए नागौर लिग्नाइट माइंस को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे संकट से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। कागजी अड़चनों की भेंट चढ़ी नीलामी, आपूर्ति रुकते ही उछले दाम नागौर स्थित आरएसएमएम की लिग्नाइट माइंस की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन संबंधित दस्तावेजों और पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक अनुमतियों का समय पर नवीनीकरण नहीं कराया गया। यदि समय रहते आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती, तो माइंस के संचालन में यह गतिरोध उत्पन्न नहीं होता। माइंस बंद होते ही बाजार में स्थानीय लिग्नाइट की किल्लत पैदा हो गई और उपलब्ध विकल्पों की कीमतों में भारी उछाल आ गया। आयातित कोयले की किल्लत, बीकानेर पर बढ़ा पूरा दारोमदार वर्तमान में भीलवाड़ा के कपड़ा प्रोसेस उद्योगों में ऊर्जा की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से घरेलू कोयले और बीकानेर से आने वाले लिग्नाइट पर निर्भरता है। वहीं, इंडोनेशिया से आयात होने वाले कोयले की आपूर्ति वैश्विक कारणों से बुरी तरह प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कमी और स्थानीय स्तर पर नागौर से आपूर्ति ठप होने के कारण उपलब्ध कोयले के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा वित्तीय भार प्रोसेस हाउसों पर पड़ रहा है। वस्त्र नगरी के लिए संजीवनी बनेगी नागौर माइंस व्यापारियों का मानना है कि नागौर की आरएसएमएम लिग्नाइट माइंस का दोबारा संचालन भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा। नागौर से भीलवाड़ा की भौगोलिक दूरी कम होने के कारण परिवहन पर होने वाले भारी खर्च में कटौती होगी। भीलवाड़ा के उद्यमियों को ऐसे मिलेगी राहत भीलवाड़ा में प्रतिमाह लगभग 75 हजार टन कोयले और लिग्नाइट की खपत होती है। वर्तमान में बीकानेर से आने वाले लिग्नाइट, घरेलू कोयले और इंडोनेशिया से आयातित कोयले की कीमत 8,500 से 12,000 रुपए प्रति टन है। वहीं, नागौर के लिग्नाइट की कीमत मात्र 6,000 रुपए प्रति टन बताई जा रही है। ऐसे में यदि उद्यमियों को प्रतिमाह लगभग 50 हजार टन लिग्नाइट नागौर से मिलने लगे, तो भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिल सकती है और उत्पादन लागत में कमी आएगी। लघु उद्योग भारती ने उठाया मुद्दा लघु उद्योग भारती ने संगठन के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से विशेष आग्रह कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने उद्योगों के हित में संवेदनशीलता दिखाते हुए नागौर माइंस को तत्काल शुरू कराने के प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं। — रवीन्द्र जाजू, संयुक्त सचिव, राजस्थान प्रदेश, लघु उद्योग भारती

चुनाव आयोग का बड़ा कदम, मतदाता सूची से नाम हटाने के नियम सख्त; अब इन बातों का रखना होगा ध्यान

चंडीगढ़ मतदाता सूची से किसी का नाम हटवाने के लिए अब मनमाने ढंग से बड़ी संख्या में आवेदन नहीं किए जा सकेंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने फार्म-7 के जरिए दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों की संख्या तय कर दी है। इस कदम का उद्देश्य बिना ठोस आधार सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराने पर रोक लगाना और मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। नए निर्देश ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से दिए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहाना ने आयोग के निर्देशों की जानकारी दी। नई मतदाता सूचियों का प्रकाशन छह नवंबर को होगा। अभी तक करीब 34 लाख मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं, जो मौजूद नहीं हैं। राज्य में पिछली मतदाता सूचियों के आधार पर दो करोड़ छह लाख से अधिक मतदाता थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, फार्म-7 के जरिए मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति जताई जा सकती है या नाम हटाने की मांग की जा सकती है। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने या संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में दर्ज रहने की पात्रता न होने पर निर्धारित आधार और प्रक्रिया के तहत आपत्ति दी जा सकती है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़े दावे-आपत्तियों की निर्धारित अवधि में एक मतदाता अधिकतम 10 फार्म-7 आवेदन दे सकेगा। सूची के सामान्य अद्यतन के दौरान यह सीमा हर महीने पांच आवेदन होगी। फार्म वही व्यक्ति भर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज है।  

उत्तर-पूर्व दिशा में इन चीजों को रखने से बचें, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को बहुत ही शुभ मानते हैं। जानें यहां पर किन चीजों को रखने से बचना चाहिए?  ईशान कोण में क्या ना रखें? वास्तु शास्त्र में कुछ दिशाओं को बहुत ही शुभ माना जाता है और इन्हीं में से एक है ईशान कोण। शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ही ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा को बहुत ही खास मानते हैं और यहां पर कुछ चीजों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है। जानें ये दिशाएं कौन सी हैं? सबसे पवित्र कोना है ईशान कोण शास्त्र के अनुसार घर के उत्तर और पूर्व दिशा के बीच वाले कोने को ही ईशान कोण कहते हैं। मान्यता है कि यहां पर सबसे ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी रहती है। इस दिशा में पूजा करना और ध्यान वगैरह लगाना बहुत ही खास माना जाता है। ऐसे में इस दिशा को हमेशा खुला, साफ और हल्का रखने की कोशिश करनी चाहिए। ईशान कोण में ना रखें भारी सामा ईशान कोण की ओर आप भूलकर भी कोई भारी सामान ना रखें। इस दिशा में अलमारी, बेड, सोफा या फिर लोहे का कोई भी भारी सामान रखने से बचें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो घर में वास्तु दोष लगने का डर होगा। उत्तर-पूर्व दिशा में ना रखें जूते-चप्पल नियम के अनुसार घर की इस दिशा में कोई भी ऐसा सामान या चीज ना रखें जिससे गंदगी हो। यहां पर जूते-चप्पल ना निकालें। इसके अलावा कूड़ेदान रखने से भी बचें। आप इस दिशा को जितना साफ रखेंगे उतना ही अच्छा होगा और इससे घर का माहौल भी अच्छा बनेगा। ईशान कोण में ना बनवाएं ये 2 चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण की ओर कभी भी किचन ना बनवाएं। यहां पर बाथरूम भी बनवाना सही नहीं मानते हैं। अगर इस दिशा में ये गलती की जाए तो कई काम में बाधाएं आनी शुरू हो सकती है। ऐसे में घर बनवाते समय इन बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। सफाई से जुड़ी चीजें ना रखें ईशान कोण में कभी भी सफाई से जुड़ी चीजें जैसे झाड़ू या फिर पोछा वगैरह रखने से बचें। वास्तु मान्यता के हिसाब से ईशान कोण वाला कोना पवित्र होता है तो ऐसे में यहां पर इन चीजों को रखने से बचना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ये जगह हल्की और खाली ही रहे। ईशान कोण में क्या रखें? अब सवाल ये है कि आखिर ईशान कोण की साइड कौन सी चीजें रख सकते हैं? वास्तु नियम के हिसाब से यहां पर पानी से भरा कटोरा रख सकते हैं जिसे उरली भी कहा जाता है। आप हर सुबह इसका पानी बदलकर इसमें फूल डाल सकते हैं। इसके अलावा इस दिशा में तुलसी का पौधा रखना भी शुभ होता है।