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योगी सरकार ने ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए ₹1,242 करोड़ किए मंजूर

योगी सरकार का बड़ा फैसला, ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए 1,242 करोड़ रुपये की दी स्वीकृति स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल के लिए निर्धारित शर्तों और वित्तीय नियमों का पालन करने की भी शर्तें जल जीवन मिशन के तहत यूपी में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी योगी सरकार लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवारों को पेयजल की सुविधा लगातार मिलती रहे, इसके लिए योगी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण क्षेत्रों की पाइप पेयजल योजनाओं के संचालन और रख-रखाव के लिए 1,242 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस संबंध में राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक को शासनादेश जारी किया गया है। योगी सरकार के इस फैसले से गांवों में पानी की आपूर्ति करने वाली योजनाओं को सुचारु बनाए रखने और उनकी नियमित देखरेख में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण परिवारों को पेयजल सुविधा का लाभ लगातार उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो सकेगी। पेयजल योजनाओं के रखरखाव के लिए बड़ी धनराशि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पाइप पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,242 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य पेयजल योजनाओं को बेहतर ढंग से संचालित करना और गांवों में पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत करना है। वित्तीय नियमों का पालन जरूरी राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक को जारी शासनादेश में स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल के लिए निर्धारित शर्तों और वित्तीय नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है। राशि का उपयोग तय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। इससे सरकारी धन के निर्धारित मद में खर्च और योजनाओं के संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। ग्रामीण परिवारों को मिलेगा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का नियमित संचालन बेहद जरूरी है। इनकी देखरेख और रख-रखाव बेहतर होने से पानी की आपूर्ति में आने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को बनाए रखने और आम लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में मददगार साबित होगा।

रुपये की गिरती चाल पर RBI सख्त, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया क्या है केंद्रीय बैंक की रणनीति

नई दिल्ली भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव हो तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार या बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रहता है. ऐसे में भारत के लिए कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे जरूरी सामान खरीदना महंगा हो सकता है. इससे देश के आयात बिल और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फॉरेन करेंसी मार्केट में रुपये की चाल को व्यवस्थित रखने और जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठा रहा है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मनीकंट्रोल को दिए एक खास इंटरव्यू में साफ कहा है कि जरूरत पड़ने पर सेंट्रल बैंक और कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। आरबीआई गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल में उठाए गए कदमों का मकसद विदेशी निवेश को रोकना या देश से पैसा बाहर जाने पर पाबंदी लगाना नहीं है. आरबीआई चाहता है कि फॉरेन करेंसी मार्केट का इस्तेमाल उन लोगों और कंपनियों की जरूरत पूरी करने के लिए हो, जिन्हें आयात, निर्यात या दूसरे भुगतान के कारण रुपये और फॉरेन करेंसी की कीमत में बदलाव से बचाव करना है. सवाल यह है कि आरबीआई ने कौन-से नियम बदले हैं, रुपये पर इसका क्या असर हो सकता है और क्या ब्याज दरें भी बढ़ाई जा सकती हैं? फॉरेन करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी रोकने के लिए RBI का कदम आरबीआई ने हाल में फॉरेन करेंसी से जुड़े कुछ नियम सख्त किए हैं. अब रद्द किए गए फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर रोक लगाई गई है. इसके अलावा, फॉरेन करेंसी मार्केट में कुछ सौदों के लिए रिजर्व रखने की जरूरत से जुड़े नियम भी बदले गए हैं. डॉक्यूमेंट्स प्रोसेस को स्पष्ट किया गया है और संबंधित लीमिट को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर किया गया है. इन बदलावों का फोकस ऐसे डील्स पर लगाम लगाना है, जिनमें असली कारोबारी जरूरत के बजाय कीमतों में उतार-चढ़ाव से कमाई करने की कोशिश की जा रही हो। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने देखा कि फॉरेन करेंसी से जुड़े बड़ी संख्या में सौदे उसी दिन रद्द करके दोबारा बुक किए जा रहे थे. कुछ मामलों में करीब एक-तिहाई सौदे उसी दिन बंद या रद्द हो रहे थे, जिस दिन वे किए गए थे। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, अगर किसी कंपनी को आयात का भुगतान करने के लिए डॉलर की जरूरत है, तो वह आमतौर पर उस जरूरत से जुड़ा सौदा कुछ समय तक बनाए रखेगी. बार-बार सौदे रद्द करना और दोबारा करना सट्टेबाजी की ओर इशारा कर सकता है. इसी वजह से आरबीआई ने ये कदम उठाए हैं. हालांकि, हर सौदे को सट्टेबाजी मानना सही नहीं होगा. असली उद्देश्य जरूरत से ज्यादा और एकतरफा दांव को कम करना है। क्या विदेशी निवेशकों के लिए पैसा लाना-ले जाना मुश्किल होगा? आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि ये कदम कैपिटल कंट्रोल नहीं हैं. इसका मतलब है कि विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश करने या निवेश से पैसा निकालने पर सामान्य रूप से रोक लगाने का उद्देश्य नहीं है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों और बॉन्ड में पैसा लगा सकते हैं और जरूरत के मुताबिक उसे वापस भी ले जा सकते हैं. विदेशी निवेशक और नॉन रेसिडेंशियल अपने निवेश से जुड़े रिस्क से बचने के लिए हेजिंग भी कर सकते हैं. हेजिंग का मतलब है कि भविष्य में कीमत बदलने से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने की व्यवस्था करना है। आरबीआई गवर्नर का कहना है कि इन नियमों को विदेशी पूंजी के आने-जाने पर रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार को व्यवस्थित रखना है। क्या रुपये को किसी खास लेवल पर रोकना चाहता है RBI? सोमवार को रुपये में मजबूती देखने को मिली, लेकिन गवर्नर ने कहा कि आरबीआई रुपये को किसी खास कीमत या तय दायरे में रखने का लक्ष्य नहीं बनाता. सेंट्रल बैंक की कोशिश यह है कि रुपये में अचानक और जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो तथा सट्टेबाजी के कारण बाजार की सामान्य चाल प्रभावित न हो। संजय मल्होत्रा ने कहा कि फॉरेन करेंसी मार्केट भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जरूरत से ज्यादा निराशावादी नजर आ रहा है. उनके मुताबिक, भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है. सेवा निर्यात और विदेश में काम करने वाले भारतीयों से आने वाला पैसा अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यापार समझौते, कारोबार करना आसान बनाने वाले सुधार, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं और ऊर्जा के दूसरे स्रोतों को बढ़ावा देने जैसे कदम निर्यात को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे। क्या रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ेंगी? भारतीय रुपये पर दबाव आने की स्थिति में ब्याज दरें बढ़ाने के सवाल पर गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य महंगाई को काबू में रखना है. वित्तीय स्थिरता के रिस्क से निपटने के लिए आरबीआई के पास दूसरे नियामक और निगरानी से जुड़े उपाय भी हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्याज दरों और वित्तीय स्थिरता को पूरी तरह अलग नहीं रखा जा सकता. ब्याज दरों में बदलाव का असर बैंकों, कर्ज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, इसलिए मौद्रिक नीति बनाते समय वित्तीय स्थिरता को भी ध्यान में रखना जरूरी है. उन्होंने यह नहीं कहा कि रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें निश्चित रूप से बढ़ाई जाएंगी। आगे भी कदम उठा सकता है RBI, अर्थव्यवस्था पर भरोसा आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आरबीआई के पास बाजार में जरूरत के मुताबिक कदम उठाने के कई ऑप्शन हैं. हाल के कुछ आरबीआई के फैसलों का शुरुआती असर पॉजिटिव दिखा है. अगर सट्टेबाजी कम करने के लिए और कदम जरूरी हुए, तो केंद्रीय बैंक उन पर विचार करेगा। उन्होंने भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है. साथ ही, आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि बैंक अच्छी स्थिति में हैं, कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत हैं और घरेलू विकास भी अच्छा बना हुआ है. इसके बावजूद, दुनिया में बदलते हालात और फॉरेन करेंसी मार्केट की चुनौतियों पर नजर रखना जरूरी है। संजय मल्होत्रा ने कहा कि सरकार और आरबीआई मिलकर देश की … Read more

योगी सरकार की यूपी राइज पहल से युवाओं को मिलेगा नया अवसर, इनोवेशन पर जोर

यूपी राइज से उड़ान भरेंगे युवा, नवाचार से बनाएंगे रोजगार योगी सरकार की पहल युवाओं को दिखा रही है नई राह  -एचआरआईटी में युवाओं ने पेश किए एआई आधारित समाधान -विजेता टीम को प्रदान किया गया 25 हजार का पुरस्कार गाजियाबाद  युवाओं के आइडिया को नवाचार और नवाचार को रोजगार व उद्यमिता में बदलने की दिशा में योगी सरकार की पहल युवाओं को नई राह दिखा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को गाजियाबाद स्थित एचआरआईटी यूनिवर्सिटी में आयोजित यूपी राइज कार्यक्रम में युवाओं की प्रतिभा, तकनीकी सोच और उद्यमशीलता का अनूठा संगम देखने को मिला। खचाखच भरे ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों ने खेती, स्वास्थ्य, पशुपालन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एआई, कंप्यूटर विजन और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कार्यक्रम ने युवाओं को अपनी सोच को मंच देने, नए प्रयोग करने और भविष्य में अपने आइडिया को स्टार्टअप व रोजगार के अवसरों में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। आइडिया से स्टार्टअप तक, युवाओं को मिला मंच यूपी राइज में विद्यार्थियों ने दिखाया कि तकनीक का इस्तेमाल केवल नए उत्पाद बनाने के लिए नहीं, बल्कि समाज की जमीनी समस्याओं को हल करने के लिए भी किया जा सकता है। फसलों की बीमारियों की पहचान, प्याज की गुणवत्ता की जांच, बुजुर्गों की देखभाल और इलेक्ट्रॉनिक चिप में संभावित खराबी का पता लगाने जैसे नवाचार इसी सोच का उदाहरण बने। विभिन्न चरणों में सफल होने के बाद बुधवार को अंतिम चरण में पहुंची 12 टीमों ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान युवाओं के लिए विभिन्न गेम्स और फन एक्टिविटी भी आयोजित की गईं। इनके माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (सीएम युवा उद्यमी योजना), स्टार्टअप योजना सहित युवाओं के कल्याण, स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य युवाओं को उपलब्ध अवसरों से परिचित कराना और उन्हें नौकरी तलाशने के साथ अपना उद्यम शुरू करने के लिए भी प्रेरित करना रहा। प्याज की गुणवत्ता जांचने वाले आइडिया को पहला पुरस्कार प्रतियोगिता में टीम विजन-एक्स ने प्रथम स्थान हासिल किया। बीटेक द्वितीय वर्ष की छात्राओं विदिशा गुप्ता, दीपा, अंजली, वंशिका, तनिष्का और सोनिया ने 'ऑनियन ग्रेड' नामक एआई आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। टीम को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। यह प्रणाली प्याज की तस्वीर का विश्लेषण कर उसके आकार, रंग, आकृति, सड़न और क्षति के आधार पर उसे ग्रेड ए, बी, सी या रिजेक्ट श्रेणी में वर्गीकृत करती है। इससे प्याज की गुणवत्ता जांचने में एकरूपता लाने और किसानों व खरीदारों के बीच विवाद कम करने में मदद मिल सकती है। बुजुर्गों की देखभाल से चिप की निगरानी तक फर्स्ट रनर अप रही रक्षक टीम ने 'साथ केयर' (कर्तव्य) ऐप पेश किया। बीटेक तृतीय वर्ष के गगन दीप सिंह, आकर्ष श्रीवास्तव, दिवाकर सहाय निम, इशिता बलौदी और रुद्र कुमार के इस प्रोजेक्ट में दवाओं की स्कैनिंग, एक्सपायरी जांच, रिमाइंडर, आपातकालीन अलर्ट और मेडिकल रिपोर्ट समझने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सेकेंड रनर अप रही एल्गोरिथम आर्किटेक्ट टीम ने ड्रिफ्टगार्ड एआई सॉफ्टवेयर प्रस्तुत किया। जैना सचदेवा, कुशाग्र राणा, मोहम्मद अरसलान खान और मरियम फातिमा की टीम का यह सॉफ्टवेयर इलेक्ट्रॉनिक चिप और कंपोनेंट्स में असामान्य बदलावों की पहचान कर संभावित खराबी के संकेत देता है। खेती और आपदा प्रबंधन में भी तकनीक का इस्तेमाल विद्यार्थियों ने फसलों की बीमारियों की पहचान, ड्रोन तकनीक से खेती में सुधार, पशुओं की समस्याओं के समाधान और एआई आधारित शिक्षा से जुड़े नवाचार भी पेश किए। रिमोट सेंसिंग के जरिए प्राकृतिक आपदाओं की आशंका की पूर्व सूचना देने वाली वेबसाइट और बचाव के उपायों से संबंधित विचार भी सामने आए। दुर्जोय दत्ता ने साझा किया सफलता का सफर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बेस्टसेलिंग पुस्तकों के लेखक दुर्जोय दत्ता ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के साथ लेखन शुरू किया और आगे चलकर इसे व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने युवाओं को अपनी रुचि पहचानने और उसे करियर के अवसर में बदलने के लिए प्रेरित किया। युनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. नवीन राठी ने योगी सरकार की उपलब्धियों और नवाचार को प्रोत्साहन देने की सराहना की। उन्होंने कहा कि जेन-जी के युवाओं में समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान तलाशने की क्षमता है। कुलपति प्रो. डीके शर्मा भी मौजूद रहे। निर्णायक मंडल में हर्षित देसाई, ज्योति तिवारी और पूनम बंसल शामिल रहीं।

मजदूरों की हड़ताल और कच्चे माल में 35% तक उछाल, दिवाली से पहले महंगी होंगी साड़ियां

सूरत साड़ियों का समंदर कहे जाने वाले गुजरात के सूरत विश्व विख्यात है। यहां के रिंग रोड, स्टेशन एरिया, सारोली और सहारा दरवाजा जैसे इलाकों में खूब साड़ियां बनाई जाती हैं। हालांकि इन दिनों साड़ी कारोबारियों के सामने कई चुनौतियां है, जिससे उनके बिजनेस के साथ ही साड़ियों का प्रोडक्शन भी कम देखने को मिल रहा है। जिसका असर आम ग्राहकों पर भी देखने को मिलने वाला है। साड़ी इंडस्ट्री के सामने बड़ी चुनौतियां सूरत को देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की रीढ़ कहा जाता है। इन दिनों टेक्सटाइल और अन्य इंडस्ट्रियल क्षेत्रों के मजदूरों की ओर से 8 घंटे की ड्यूटी, साप्ताहिक छुट्टी (रविवार) और मजदूरी बढ़ाने के लिए हड़ताल जारी है, जिससे कारखाने बंद हैं और प्रोडक्शन या तो ठप पड़ा है या फिर बहुत ही कम आउटपुट है। इससे साड़ी इंडस्ट्री दबाव में है। रॉ मटेरियल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी सूरत के साड़ी मैन्युफैक्चरर उमाशंकर तिवारी ने जागरण बिजनेस से बातचीत करते हुए बताया कि मजदूरों की समस्या के साथ ही साड़ियों में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक, जरी, धागे, सितारा और अन्य सजावटी सामग्रियां जैसे जरूरी रॉ मटेरियल सहित डिजाइनिंग कॉस्ट में 30-35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। लागत बढ़ने प्रोडक्शन कॉस्ट में भारी-भरकम वृद्धि हुई है। महंगी होंगी साड़ियां? दीवाली, करवाचौथ और शादियों के सीजन के दौरान साड़ियों की भारी डिमांड बनी रहती है। प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने और साड़ी इंडस्ट्री के सामने कारीगरों और मजदूरों की समस्या का असर रिटेल प्राइस पर भी देखने को मिल सकता है। पीक सीजन में फैक्ट्रियों में साड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में कमी के कारण साड़ियों की कीमत में बढ़ोतरी हो सकती है। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक साड़ियों की कीमत में 30-40 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। क्या है साड़ी इंडस्ट्री का हाल? साड़ी कारखाना के मालिक उमाशंकर बताते हैं कि फैक्ट्रियों में 12-12 घंटे दो पाली में काम करने का नियम 3-4 दशक पुराना रहा है, 8 घंटे से अधिक काम करने पर हमेशा से कारीगरों को ओवर टाइम पे किया जाता है, हड़ताल और साप्ताहिक छुट्टी से महीने में 20 फीसदी से अधिक प्रोडक्शन कम हो सकता है। इससे साड़ी उद्योग के साथ खुदरा बाजारों में भी दबाव है।   

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर

सेवा संकल्प अभियान 2026 : सेवा की कहानी कभी बैनर की दीवारों के बीच गुजरती थी जिंदगी, आज पक्के आशियाने में संवर रहे आशा के सपने प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा आवास योजनाओं का लाभ वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर सुकन्या समृद्धि योजना में बेटियों के लिए कर रही हैं बचत, सुरक्षित भविष्य की दिशा में बढ़ाए कदम रायपुर,  कभी सड़क किनारे बैनर से बनी दीवारें ही उनके घर का सहारा थीं। न पक्की छत थी और न ही सुरक्षित आशियाना। हर दिन परिवार की जरूरतों को पूरा करने की चिंता और बेहतर भविष्य की उम्मीद के बीच जिंदगी गुजर रही थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। नवा रायपुर के सेक्टर-7 स्थित ग्राम चीचा की आशा के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना नई खुशियां लेकर आई है। कभी बैनर की दीवारों के बीच रहने वाली आशा आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ रह रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानियों से मिली राहत, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया आधार है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और आम नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से आशा जैसे परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल रहा है। बैनर की दीवारों से पक्के घर तक का सफर आशा के लिए अपना पक्का घर होना कभी एक बड़ा सपना था। सीमित संसाधनों के कारण उन्हें सड़क किनारे बैनर की दीवारों से बने अस्थायी घर में रहना पड़ता था। ऐसे घर में परिवार के साथ जीवन गुजारना आसान नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब उनके पास अपना पक्का आशियाना है, जहां वे परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रही हैं। आशा के लिए घर मिलने की खुशी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उनके परिवार के भविष्य को लेकर एक नई शुरुआत है। जिस परिवार के पास कभी रहने के लिए स्थायी ठिकाना नहीं था, आज उसके पास अपना घर है। आशा इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। अब बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटीं आशा अपना घर मिलने के बाद आशा अब अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। एक मां के रूप में उनकी इच्छा है कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और भविष्य में आत्मनिर्भर बनें। इसी सोच के साथ उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत अपनी बेटियों के लिए बचत शुरू की है। वे अपनी बच्चियों के खातों में ढाई-ढाई सौ रुपये जमा कर रही हैं। आशा के लिए यह बचत भले ही छोटी राशि से शुरू हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक मां के बड़े सपने जुड़े हैं। वे चाहती हैं कि आने वाले समय में बेटियों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए उनके पास आर्थिक सहारा हो। नियमित बचत के माध्यम से वे आज ही अपनी बेटियों के बेहतर कल की नींव रख रही हैं। एक योजना से मिला आशियाना, दूसरी से बेटियों के भविष्य को सहारा आशा की कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से आम परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया है, वहीं सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से वे बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक बचत कर रही हैं। इन दोनों योजनाओं ने उनके जीवन की दो महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को नई दिशा दी है। पहली, परिवार के लिए सुरक्षित घर और दूसरी, बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक तैयारी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और उन्हें बेहतर जीवन के अवसर मिलें। वहीं वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विजन के अनुरूप आवासीय विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सुरक्षित आवास और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हो सके। सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की प्रेरक कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आशा की यह कहानी बताती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ जरूरतमंद परिवारों के जीवन में ठोस बदलाव लेकर आता है। कभी बैनर की दीवारों के सहारे जीवन गुजारने वाली आशा आज अपने पक्के घर में रह रही हैं और अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आशा की जिंदगी में आया यह बदलाव केवल एक परिवार को आवास मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के संघर्ष, उम्मीद और सपनों के साकार होने की कहानी है। कभी उनकी सबसे बड़ी चिंता परिवार के लिए सुरक्षित छत थी, आज वे उस चिंता से आगे बढ़कर बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। बैनर की अस्थायी दीवारों से शुरू हुआ आशा का सफर आज पक्के घर की मजबूत दीवारों तक पहुंच चुका है। अब इसी घर में उनकी बेटियों के सुनहरे भविष्य के सपने भी आकार ले रहे हैं। आशा की यह कहानी बताती है कि जब जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलता है, तो केवल उनकी वर्तमान परिस्थितियां ही नहीं बदलतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की उम्मीदें भी मजबूत होती हैं।

सीएम योगी ने क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोरके दिए निर्देश

एयर शो की तैयारियों को लेकर सीएम योगी ने की समीक्षा,नमो घाट पर व्यवस्थाओं का किया स्थलीय निरीक्षण  क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर पार्किंग, रूट डायवर्जन, लाइफ जैकेट और ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देश 22, 24 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है,एयर शो 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने का कार्यक्रम वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वाराणसी दौरे और एयर शो के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोजन के दौरान आमजन को किसी तरह की परेशानी न हो। बैठक में वायुसेना के अधिकारी भी मौजूद थे। समीक्षा बैठक से पहले मुख्यमंत्री  नमो घाट पहुंचकर प्रस्तावित एयर शो की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने नमो घाट पर स्थलीय निरीक्षण कर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली, निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और सेना के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को तैयारियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने परियोजना के मानचित्र के माध्यम से प्रस्तावित व्यवस्थाओं और आयोजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी ,सीएम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान नमो घाट के साथ गंगा के अन्य प्रमुख घाटों पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।नमो घाट पर 22, 24 और 25 अक्टूबर 2026 को एयर शो आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। कार्यक्रम के अंतिम दिन, 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का  शामिल होना प्रस्तावित है।     यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश मुख्यमंत्री ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और रूट डायवर्जन की प्रभावी योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त पार्किंग स्थलों की व्यवस्था करने के साथ वहां स्पष्ट साइनेज भी लगाए जाएं, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा हो। आयोजन स्थल और घाटों पर समुचित बैरिकेडिंग के साथ पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार रखा जाए। घाटों पर पर्याप्त मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में आयोजित होने वाले विभिन्न त्योहारों और कार्यक्रमों को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की समुचित योजना बनाई जाए। एयर-शो जैसे बड़े आयोजन में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों, युवक मंगल दल और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए। उन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार रखने के निर्देश दिए। पार्किंग स्थलों पर पुलिस, यातायात पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए। घाटों की सफाई और शहर के सौंदर्यीकरण पर जोर मुख्यमंत्री ने नगर निगम को घाटों की विशेष सफाई कराने के साथ शहर में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने नमो घाट से अस्सी घाट तक घाटों की पेंटिंग कराने को कहा। इसके साथ ही एयरपोर्ट से शहर तक आने वाले प्रमुख मार्गों और अन्य महत्वपूर्ण सड़कों पर लगे विद्युत खंभों पर स्पाइरल लाइट लगाने तथा प्रमुख चौराहों का सौंदर्यीकरण कराने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। प्रशासन और पुलिस ने प्रस्तुतीकरण के जरिए बताईं तैयारियां बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की तैयारियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतीकरण की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के संबंध में जानकारी दी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि घाटों पर सिल्ट की सफाई कराई जा रही है। इसके अलावा 300 मोबाइल टॉयलेट और 400 वाटर टैंकर की व्यवस्था के साथ ही तीन हजार सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बैठक में जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद बैठक में प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, स्टाम्प राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु', एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, त्रिभुवन राम, सौरभ श्रीवास्तव और डॉ. सुनील पटेल, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह और जगदीश पटेल, जिलाध्यक्ष रामशकल पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, एडीजी जोन नवीन अरोड़ा, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा, डीआईजी वैभव कृष्ण, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, सीडीओ प्रखर कुमार, वायुसेना के अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

ट्रंप के समर्थन में फिर खुला एलन मस्क का खजाना, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ी तैयारी

न्यूयॉर्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपबल्किन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में जिताने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते है। इस बार वे पिछले चुनाव से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर तक के 3 महीने में ही रिपब्लिकन पार्टी को 276 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,600 करोड़ रुपए से ज्यादा चंदा दिया गया है। इतना पैसा अब तक किसी शख्स ने मिडटर्म चुनाव में खर्च नहीं किया। मस्क ने अकेले इतना चंदा दिया कि डेमोक्रेटिक पार्टी को उस तिमाही में अपने सभी चंदा देने वालों से मिलाकर भी इतनी रकम नहीं मिली। पिछले चुनाव से ₹700 करोड़ ज्यादा मदद दी मस्क ने 2025-26 में अब तक रिपब्लिकन पार्टी को करीब 366 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रुपए) दिए हैं। यह रकम 2023-24 के चुनाव में दिए गए उनके करीब 290 मिलियन डॉलर (करीब 2800 करोड़ रुपए) से ज्यादा है। मस्क की दी नई रकम से मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को आर्थिक बढ़त मिली है। वहीं इसके मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई भी अरबपति चंदा देने वाला व्यक्ति मस्क जितना पैसा खर्च नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट लीडरशिप फंड को 158 मिलियन डॉलर का योगदान दिया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका PAC को 76 मिलियन डॉलर दिए। यह राजनीतिक समूह रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करता है और कई चुनावी क्षेत्रों में पार्टी के पक्ष में अभियान चलाता है। मस्क ने 2024 में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने के लिए अमेरिका PAC की स्थापना की थी।अमेरिका PAC के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो के मुताबिक, इस तरह के बड़े आर्थिक योगदान से रिपब्लिकन पार्टी को अपना संदेश मतदाताओं तक पहुंचाने में मदद मिलती है। हालांकि, चुनाव में किसी पार्टी की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का रुख शामिल हैं। मस्क की राजनीतिक सक्रियता के पीछे उनके कारोबारी हितों को लेकर भी चर्चा होती रही है। उनकी कंपनी स्पेसएक्स को अमेरिकी सरकार से बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के बाद उनके प्रशासन में मस्क की भूमिका को लेकर भी बहस हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक सांसद मस्क के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स और डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) में उनकी भूमिका की जांच की मांग करते रहे हैं।गौरतलब है कि ट्रंप और मस्क के बीच पिछले साल गंभीर मतभेद सामने आए थे। हालांकि, बाद में दोनों के संबंध फिर बेहतर हुए। ट्रंप ने मस्क को नेशनल मेडल ऑफ साइंस से सम्मानित किया और उन्हें आज के दौर का एडिसन बताया।अब अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में मस्क की भारी फंडिंग ने राजनीतिक चंदे और बड़े कारोबारियों के प्रभाव को लेकर बहस तेज कर दी है। आने वाले चुनावों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिपब्लिकन पार्टी को मिले इस आर्थिक समर्थन का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है। मस्क के चंदे से यह भी साफ हुआ है कि वे अमेरिकी राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहना चाहते हैं। मई 2025 में उन्होंने कहा था कि भविष्य में वे राजनीतिक खर्च काफी कम कर देंगे। ट्रम्प की मस्क से फिर नजदीकी बढ़ी मस्क के पास कई बड़ी कंपनियां हैं, जिनमें से कुछ को अमेरिकी सरकार से बड़े ठेके भी मिले हैं। पिछले साल ट्रम्प के साथ विवाद के बाद से मस्क ने अपने राजनीतिक कामकाज को लेकर काफी कम सार्वजनिक बयान दिए थे। बता दें कि, दोनों के बीच पिछले साल विवाद इतना बढ़ गया था कि ट्रम्प ट्विटर छोड़ ट्रुथ पर अपना बयान जारी करने लगे। पिछले साल जनवरी में ट्रंप ने सरकारी खर्च कम करने के लिए मस्क को ‘डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी’ (DOGE) का इंचार्ज बनाया था, लेकिन कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच गंभीर मतभेद पनप गए. हालांकि बाद में मस्क ट्रंप के खेमे में लौट आए और उनके करीबी बने हुए हैं. ट्रंप ने मस्क को प्रतिष्ठित ‘नेशनल मेडल ऑफ साइंस’ से सम्मानित किया. SpaceX के प्रमुख और पांच अन्य टेक्नोलॉजी लीडर्स को सम्मान देने के समारोह में ट्रंप ने मस्क को “आज के दौर का एडिसन” बताया था।  हालांकि, चुनाव नजदीक आने के बाद अब दोनों के रिश्ते फिर सुधरते दिख रहे हैं। पिछले दो हफ्तों में दोनों तीन कार्यक्रमों में साथ दिखाई दिए और एक-दूसरे की तारीफ भी की। ट्रम्प मस्क को अपने साथ चीन के दौरे पर भी लेकर गए थे। मस्क के इतना पैसा खर्च करने से जाहिर है कि वे दक्षिणपंथी राजनीति के साथ अपनी भागीदारी बनाए रखना चाहते हैं। 3,000 लोगों की टीम घर-घर जाकर वोट मांग रही रिपब्लिकन पार्टी को ज्यादातर चंदा मस्क के बनाए राजनीतिक संगठन अमेरिका PAC के जरिए मिलता है। यह संगठन रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करता है। अमेरिका PAC के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो ने कहा कि अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी चुनाव जीत जाती है तो अमेरिका का कम्युनिष्ट, वोक और बिना सीमा वाला देश बनने का खतरा है। उन्होंने कहा कि मस्क के बड़े निवेश से रिपब्लिकन पार्टी को अपना पक्ष लोगों तक पहुंचाने का मौका मिला है, ताकि वह चुनाव में इतिहास के रुझान को बदलने की कोशिश कर सकें। मस्क सिर्फ बेहिसाब पैसा खर्च नहीं कर रहे, बल्कि उनकी टीम के 3000 लोग घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क भी कर रहे हैं। वे उन मतदाताओं को वोट डालने के लिए तैयार कर रहे हैं, जो आमतौर पर चुनाव में कम हिस्सा लेते हैं। टेक्सास में सबसे बड़ा दांव, एक उम्मीदवार पर ₹1500 करोड़ खर्च मस्क के चुनावी अभियान का सबसे दिलचस्प हिस्सा टेक्सास का सीनेट चुनाव है। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के समर्थन में करीब 1500 करोड़ रुपए के विज्ञापन अभियान की शुरुआत हुई है। मस्क के लिए टेक्सास का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि वे राज्य की राजधानी ऑस्टिन में रहते हैं और यहां उनका बड़ा कारोबारी निवेश है। उनकी टीम सिर्फ टीवी विज्ञापनों के जरिए प्रचार नहीं कर रही, बल्कि घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क भी कर रही है। प्रचारक लोगों के दरवाजों पर पर्चे लगा रहे हैं। इन पर्चों में दावा किया जा रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पूरे अमेरिका में चुनाव जीत रहे हैं और टेक्सास … Read more

CERT-In की सलाह, ऑनलाइन अकाउंट को हैकिंग से बचाने के लिए तुरंत एक्टिवेट करें टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन

 नई दिल्ली आज के समय में डिजिटल सेफ्टी बहुत ही जरूरी है. भारतीयों की सेफ्टी के लिए सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने जरूरी जानकारी शेयर की है. एजेंसी ने सभी की यूजर्स को अपने सभी अकाउंट पर सिक्योरिटी के लिए डबल लेयर लगाने को कहा है। CERT-In के मुताबिक, यूजर्स अपने सभी अकाउंट पर मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को इनेबल करने की सलाह दी है. जहां ये फीचर उपलब्ध है, वहां पर इसका जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।  CERT-In ने यह एडवाइजरी ऐसे समय पर जारी है, जब एजेंसी अक्टूबर 2026 को नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथन के रूप में मना रही है. इस साल की थीम 'साइबर हाइजीन की संस्कृति विकसित करें' पर है।  CERT-In ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके साइबर सिक्योरिटी जागरूकता पोस्टर शेयर किया है. साथ ही MFA की अहमियत को बताया है और SMS के जरिए मिलने वाले वेरिफिकेशन कोड की जगह ऑथेंटिकेटर ऐप्स और हार्डवेयर सिक्योरिटी इस्तेमाल करने की सलाद दी गई है. अनजान ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को अप्रूव करने से बचना चाहिए।  सेफ्टी के लिए फॉलो करें ये टिप्स  CERT-In के जागरुकता पोस्टर के मुताबिक, यूजर्स को उन जगह पर MFA को जरूर ऑन करना चाहिए, जहां वह सुविधा पहले से मौजूद है. इस प्रोसेस के तहत यूजर्स को पासवर्ड के अलावा ऑथेंटिकेशन का एक और स्टेप पूरा करना होता है. इससे अकाउंट डबल सिक्योरिटी लेयर में आ जाता है।  CERT-In ने SMS के जरिए मिलने वाले कोड की जगह पर ऐसे ऑथेंटिकेटर ऐप्स का इस्तेमाल करने का सलाह दी है, जो असल में टाइम बेस्ड वन टाइम पासवर्ड जनरेट करते हैं. साथ ही सिक्योरिटी हार्डवेयर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।   अनजान नोटिफिकेशन को अप्रूव नहीं करना चाहिए  CERT-In ने बताया है कि यूजर्स को अनजान MFA पुश नोटिफिकेशन से बचना चाहिए. साथ ही भूलकर भी ऐसे ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को अप्रूव करने से बचना चाहिए. सिर्फ उन्हें ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट को मंजूरी दें, जिन्हें उन्होंने खुद शुरू किया है।  CERT-In के पोस्टर में बताया है कि यूजर्स साइबर संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए CERT-In पर रिपोर्ट कर सकते हैं. इसके लिए  incident@cert-in.org.in पर भी ईमेल कर सकते हैं। 

मध्यप्रदेश की जेलों में राशन खरीदी पर सख्ती, रेट में अंतर और गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था

भोपाल   मध्य प्रदेश जेल विभाग में वर्षों से खाद्यान्न सप्लाई का टेंडर कॉर्टेल चलाने वालों पर विभाग लगाम लगाने जा रहा है। सालाना 2400 करोड़ के कॉर्टेल को खत्म करने नई टेंडर पॉलिसी बनाई है। सभी जेलों को केंद्र के खरीद पोर्टल (जेम) से खरीदी करना अनिवार्य किया है। अभी सभी जेलों में अपने स्तर पर टेंडर किए जाते हैं। शिकायतें आ रही थी कि कुछ अफसर मिलीभगत कर एक ही फर्म या संबंधित फर्मों को ठेका दे रहे हैं। इस नीति से इस पर अंकुश लगेगा। यह नए वित्तीय वर्ष में लागू होगा। फल-सब्जियां खरीद सकेंगे प्रदेश की जेलों में एक माह में करीब 200 करोड़ की खाद्यान्न सामग्री लगती है। नई नीति के अनुसार उप जेलें टेंडर अपने स्तर पर नहीं कर सकेंगी। उन्हें जिला या सेंट्रल जेल से सप्लाई की जाएगी। वे सिर्फ रोजमर्रा की सामग्री जैसे फल, दूध, सब्जियों की खरीदी अपने स्तर पर कर सकेंगे। इसलिए बदली नीति ओवर बिलिंगः जेल मुख्यालय ने पांच साल के सभी जेलों के सलाना टेंडर की जांच की तो कई खाद्य सामग्री में ओवर बिलिंग के मामले सामने आए। रेट असमानताः खाद्यान्न सामग्री के रेट में भी बड़ी असमानताएं मिलीं। चावल, दाल और गेहूं में 50 प्रतिशत तक का अंतर मिला। गुणवत्ताः गुणवत्ता की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं। शिकायतों के बाद बदली गई नीति अच्छा खाना देना हमारी प्राथमिकता है। लंबे समय से खाद्यान्न सामग्री की ओवर बिलिंग और गुणवत्ता की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए नई नीति बनाई है।-वरुण कपूर, डीजी, जेल एमपी में जेल की रसोई पर AI की नजर मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

पाकिस्तान में पानी की किल्लत बढ़ी, पंजाब-सिंध में सिंचाई पर संकट; भारत पर आरोपों के बीच नई रिपोर्ट

 नई दिल्ली पाकिस्तान में खेती के लिए पानी की भारी कमी का अंदेशा जताया जा रहा है. देश के पानी संबंधी संस्था ने रबी सीजन यानी सर्दियों की फसलों के समय पंजाब और सिंध में सिंचाई के लिए 22 प्रतिशत पानी की कमी बताई है. इससे गेहूं जैसी मुख्य फसल पर असर पड़ सकता है. खाने की दिक्कत हो सकती है. पाकिस्तानी नेता भारत पर आरोप लगा रहे हैं कि सिंधु जल संधि रोकने से यह समस्या आई है. लेकिन उनके अपने विभाग की रिपोर्ट कुछ और कहती है।   रबी सीजन अक्टूबर से मार्च तक चलता है. इसमें गेहूं, जौ, सरसों, चना जैसी फसलें बोई जाती हैं. पाकिस्तान की सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण यानी IRSA ने बताया है कि पंजाब और सिंध में 22 प्रतिशत पानी कम मिलेगा. पंजाब देश का सबसे बड़ा खेती वाला इलाका है. सिंध भी महत्वपूर्ण है।  पाकिस्तान की 80% से ज्यादा खेती सिंधु बेसिन के पानी पर निर्भर है. इसलिए पानी कम होने से फसलें कम होंगी. पिछले साल भी गेहूं का उत्पादन लक्ष्य से कम रहा था. देश को दो मिलियन टन से ज्यादा गेहूं की कमी झेलनी पड़ी थी और एक मिलियन टन आयात का ऑर्डर दिया गया. इस साल पानी और कम होने से स्थिति बिगड़ सकती है।  IRSA ने किसे जिम्मेदार ठहराया पाकिस्तान की अपनी संस्था IRSA ने साफ कहा है कि कमी की वजह भारत नहीं बल्कि देश के अंदर की समस्याएं हैं. नदी में आने वाला पानी अनुमान से 8 प्रतिशत कम रहा और पिछले साल से 22% कम. जलाशयों में पानी का भंडारण भी कम है. 30 सितंबर को 9.343 मिलियन एकड़ फीट पानी था जबकि उम्मीद 12.014 मिलियन एकड़ फीट की थी।  तरबेला बांध पर निर्माण के कारण पानी भरने की पाबंदी लगी हुई थी जिससे तीन मिलियन एकड़ फीट से ज्यादा पानी जमा नहीं हो सका. टनल 4 और टनल 5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है. ये मार्च 2025 तक पूरे होने थे लेकिन अभी तक नहीं हुए. इससे खरीफ सीजन में भी कमी रही।  तरबेला से पानी कम छोड़ने की वजह से मंगला बांध से ज्यादा पानी छोड़ा गया जिससे वह भी ठीक से नहीं भर पाया. अक्टूबर के शुरू में हुई बैठक में पंजाब और सिंध के लिए 22 प्रतिशत कमी मंजूर की गई. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को छूट दी गई।  भारत पर आरोप और सच्चाई पाकिस्तानी नेता बार-बार कहते हैं कि भारत सिंधु का पानी रोक रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पानी मोड़ने की कोशिश युद्ध का ऐलान माना जाएगा. विदेश मंत्री इशाक डार ने भी चेतावनी दी. लेकिन सच्चाई यह है कि भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित किया था।  उस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. संधि स्थगित करने का मतलब पानी रोकना नहीं है. नदियां पहले की तरह पाकिस्तान की तरफ बह रही हैं. सिर्फ आंकड़े बांटने और अग्रिम सूचना देने जैसे नियम रुक गए हैं. पानी का प्रवाह जारी है. IRSA की रिपोर्ट में भारत का नाम तक नहीं लिया गया. कमी की वजह घरेलू है।  पानी कम मिलने से गेहूं की बुआई और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती है. पिछले साल बिना पानी की कमी के भी उत्पादन कम रहा था. इस साल जलाशयों में पानी पिछले साल से 27 प्रतिशत कम है. गेहूं पाकिस्तान की मुख्य फसल है और ज्यादातर लोगों का खाना है. कमी होने पर आयात बढ़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।  चना, मसूर, तंबाकू, जौ जैसी दूसरी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं. खेती पर निर्भर लाखों किसानों की आय कम हो सकती है. देश की खाद्य सुरक्षा और कमजोर पड़ सकती है।  समस्या का असली कारण क्या है पाकिस्तान में पानी की व्यवस्था लंबे समय से ठीक नहीं चल रही. बांधों और नहरों का रखरखाव कमजोर है. नए प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं होते. बर्फ और ग्लेशियर पिघलने तथा बारिश पर निर्भर प्रवाह कम हो रहा है. जलवायु परिवर्तन का असर भी दिख रहा है. इसके बावजूद राजनीतिक नेता दोष दूसरों पर डालते रहते हैं।  अपने आंतरिक जांच में 26 प्रतिशत तक कमी का अनुमान था लेकिन सिंध के विरोध के बाद इसे 22 प्रतिशत कर दिया गया. यह दिखाता है कि समस्या घरेलू प्रबंधन की है. पानी की किल्लत सिर्फ पाकिस्तान की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की चिंता है. नदियों का सही इस्तेमाल और भंडारण हर देश की जिम्मेदारी है. पाकिस्तान अगर प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे करे और भंडारण बढ़ाए तो कमी कम हो सकती है।  भारत पर आरोप लगाने से समस्या हल नहीं होगी क्योंकि पानी तो बह रहा है. किसानों और आम लोगों को सही जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे समय रहते तैयारी कर सकें. खाद्य सुरक्षा हर देश के लिए जरूरी है. लंबे समय में जलवायु और प्रबंधन दोनों पर ध्यान देना होगा. फिलहाल पाकिस्तान की अपनी रिपोर्ट साफ कहती है कि कमी अंदरूनी वजहों से आई है।