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अब बिना रुके कटेगा टोल, बैरियर-फ्री सिस्टम लागू; 100 KM की रफ्तार पर सफर आसान

नई दिल्ली देश में हाईवे यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच NH-48 सेक्शन पर स्थित चोरयासी (चोर्यासी) टोल प्लाजा पर देश के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत की. ये पहल भारत के टोलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगी।  इस नई तकनीक के तहत अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुकने या धीमा करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. वाहन हाईवे की सामान्य गति (100 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक) से गुजरते हुए ही टोल का भुगतान कर सकेंगे. सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों, हाई-स्पीड RFID रीडर्स और अपडेटेड FASTag तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. ओवरहेड गैंट्री पर लगे कैमरे वाहन के नंबर प्लेट को कैप्चर करते हैं, FASTag से जुड़ी जानकारी पढ़ते हैं और बैकएंड सिस्टम से ऑटोमैटिक टोल की कटौती हो जाती है।  प्लाज़ा पर समय बचेगा सरकार का मानना है कि इस सिस्टम से यात्रा का समय कम होगा, हाईवे पर लगने वाला जाम घटेगा और ईंधन की बचत भी होगी. इसके साथ ही गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा और टोल प्रक्रिया में मानवीय दखल भी घटेगा. पारंपरिक टोल प्लाजा में गाड़ियां रुकने के कारण इंजन चलता रहता है, जिससे अनावश्यक ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।  गडकरी ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये कदम आम लोगों के लिए Ease of Living को बेहतर बनाएगा और व्यापार के लिए Ease of Doing Business को भी बढ़ावा देगा. इससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी गति मिलेगी. उन्होंने ये भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश में वर्ल्ड-क्लास और टेक्नोलॉजी आधारित नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही है।  ये नई पहल भारत के टोलिंग सिस्टम को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में हाईवे यात्रा और भी ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक कई और प्रमुख टोल प्लाजाओं को बैरियर-फ्री बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए. इससे न केवल यात्री सुविधा बढ़ेगी बल्कि भारत विश्व स्तर पर आधुनिक हाईवे मैनेजमेंट का एक बेहतरीन उदाहरण भी बनेगा। 

क्या 8वां वित्त आयोग बढ़ाएगा शिक्षकों की सैलरी 1.34 लाख तक? जानें सच

नई दिल्ली  8वें वित्त आयोग की एक महत्वपूर्ण मीटिंग 28 से 30 अप्रैल के बीच दिल्ली में हुई। इस मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने वित्त आयोग के सामने कई बड़े मुद्दे उठाए। जिस पर अब पे कमीशन को फैसला करना है। अगर वित्त आयोग कर्मचारी संगठनों की बात मांग लेता है कि सरकारी शिक्षकों की शुरुआती सैलरी 1.34 लाख रुपये हो जाएगी। 8th Pay Commission: टीचर्स की सैलरी 134500 रुपये? दिल्ली में हुई मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने शिक्षकों की सैलरी (लेवल 6) की बढ़ाकर 134500 रुपये करने की मांग की है। अगर यह डिमांड मान ली जाती है तब की स्थिति में शिक्षकों की सैलरी में तेज उछाल देखने को मिलेगा। इसी मीटिंग में फिटमेंट फैक्टर को 2.62 से 3.83 करने की मांग की गई है। जोकि मौजूदा समय के फिटमेंट फैक्टर 2.57 से अधिक है। वहीं, इसके अलावा सालाना 6 से 7 प्रतिशत सैलरी इंक्रीमेंट की भी मांग संगठनों ने वित्त आयोग के सामने रखा है। 50% डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA demands) पे कमीशन से डीए को लेकर भी डिमांड की गई है। संगठनों ने कहा कि भत्ता 50 प्रतिशत होने पर इसे बेसिक पे के साथ मिला दिया जाए। ऐसा होने पर कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय अच्छा लाभ मिल सकता है। HRA को 36% करने की मांग (8th Pay Commission HRA demands) टीचर्स से जुड़े संगठनों ने HRA को 12 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट भत्ता को बेसिक पे का 12 से 15 प्रतिशत करने की डिमांड की गई है। रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जाए (8th Pay Commission pension demands) शिक्षक संगठनों ने रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर 65 वर्ष करने की डिमांड की है। वहीं, ग्रेजुएटी लिमिट को भी 50 लाख रुपये करने की मांग हुई है। इन सबके अलावा संगठन ने एनपीएस और यूपीएस की जगह ओल्ड पेंशन स्कीम लाने की मांग की है। इंटरनेट के लिए मिले 2000 रुपये हर महीने (8th Pay Commission internet demands) डिजिटल अलाउंस के लिए शिक्षक संगठन ने हर महीने 2000 रुपये की मांग रखी है। छुट्टियों को भी बढ़ाने की मांग कर्मचारी संगठनों ने की है। बता दें, 8वें पे कमीशन का गठन पिछले साल नवंबर में किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय है। इस दौरान वित्त आयोग सभी से बात करेगा और सुझाव मांगेगा। यही वजह है कि बीते दिनों वित्त आयोग की एक बैठक दिल्ली में हुई है।

मुंबई में बड़ी कार्रवाई: 1745 करोड़ रुपये की कोकीन बरामद, अमित शाह ने NCB की सराहना की

मुंबई  नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को बधाई देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि हम नशीले पदार्थों के कार्टेल को पूरी तरह से कुचलने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। गृह मंत्री ने लिखा कि एनसीबी ने नशीले पदार्थों के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर शिकंजा कसते हुए मुंबई में 1745 करोड़ रुपये मूल्य की 349 किलोग्राम उच्च-गुणवत्ता वाली कोकीन जब्त की है। यह 'बॉटम-टू-टॉप' (नीचे से ऊपर) दृष्टिकोण का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें एजेंसी ने एक छोटी खेप का पता लगाते हुए एक विशाल नेटवर्क को बेनकाब किया।  इस शानदार सफलता के लिए टीम एनसीबी को बधाई। बता दें कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मुंबई में एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय नशीली दवाओं की तस्करी के रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 1745 करोड़ रुपये मूल्य की 349 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन जब्त की है। यह जब्ती एक छोटे कंसाइनमेंट को ट्रैक करते हुए, बड़े नेटवर्क तक पहुंचने वाली 'नीचे से ऊपर' रणनीति का हिस्सा है। यह मामला एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़ा है। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा था कि नार्को सिंडिकेट के खिलाफ जीरो टॉलरेंस। उन्होंने लिखा था कि एनसीबी ने तुर्की से कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को वापस लाने में एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि मोदी सरकार के ड्रग कार्टेल को पूरी तरह से खत्म करने के मिशन के तहत, हमारी नार्कोटिक्स विरोधी एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मजबूत नेटवर्क के ज़रिए सीमाओं के पार भी अपनी पकड़ बना ली है। अब वे कहीं भी छिप जाएं, ड्रग सरगनाओं के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है। बीते महीने 28 अप्रैल को एनसीबी की ओर से एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया था कि नई दिल्ली में 1 एनसीबी जोनल डायरेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2026 का समापन हुआ, जिसमें एनसीबी की सभी फील्ड इकाइयों ने अगले तीन वर्षों में पूरे देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग से प्रभावी ढंग से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। एनसीबी की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया था कि एनसीबी के डीजी ने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे गृह मंत्री अमित शाह के विजन के अनुरूप, नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर रोडमैप के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मासिक लक्ष्य हासिल करें।

LPG यूजर्स के लिए अपडेट: डबल गैस बंद, OTP आधारित डिलीवरी समेत 3 नए नियम लागू

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट से तेल-गैस की सप्‍लाई रुकने के बाद से सरकार और तेल कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी में कई बदलाव किया है, ताकि लोग पैन‍िक ना हों और व्‍यवस्‍था सही तरीके से चलती रहे. एक बार फिर LPG सिलेंडर को लेकर नियमों में बदलाव हुआ है, जो आज यानी 1 मई से प्रभावी है।  गैस की डबल सर्विस होगी बंद  सरकार ने दुरुपयोग को रोकने और सब्सिडी का बेहतर उपयोग तय करने के लिए एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखने वाले परिवारों की पहचान शुरू कर दी है. 14 मार्च को हुए संशोधन के अनुसार, पाइपलाइन से PNG सप्‍लाई लेने वाले परिवारों को अपने घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने होंगे और वे अब एलपीजी रिफिल या नए कनेक्शन के लिए पात्र नहीं होंगे।  तेल कंपनियों और डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स को ऐसे कंज्‍यूमर्स को एलपीजी आपूर्ति नहीं करने का आदेश दिया गया है. अब तक दोहरी आपूर्ति वाले 43,000 से अधिक यूजर्स ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।  सख्त बुकिंग नियम और ओटीपी डिलीवरी इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के तहत आने वाले देश भर के यूजर्स को अब बुकिंग अंतराल, ओटीपी बेस्‍ड डिलीवरी और अनिवार्य केवाईसी अपडेट से संबंधित नए नियमों का सामना करना पड़ेगा. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शहरी क्षेत्रों में बुकिंग अंतराल को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों तक कर दिया है।  कमर्शियल गैस के दाम बढ़े  मार्च 2026 से, तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में तीन बार बढ़ोतरी की है. पहली बढ़ोतरी 1 मार्च को 28 रुपये से 31 रुपये के बीच हुई, इसके बाद 7 मार्च को प्रति सिलेंडर 114.5 रुपये की एक और ब्‍बढ़ोतरी हुई और अप्रैल में प्रमुख महानगरों में 196 रुपये से 218 रुपये की एक और बढ़ोतरी हुई. अब 1 मई को एक और संशोधन किया गया है, सूत्रों के अनुसार 993 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।  क्‍यों बढ़े गैस के दाम?  पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह बढ़ोतरी की गई है. इस तनाव के कारण स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. यह एक ऐसा रास्‍ता है, जहां से भारत बड़े स्‍तर पर तेल-गैस का आयात करता था. सरकार ने सभी को आश्वस्त किया है कि कठिन वैश्विक स्थिति के बावजूद, वह घरेलू एलपीजी, पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस और परिवहन के लिए सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है. साथ ही कीमतों को भी स्थिर रखा है। 

अमेरिका को ईरान युद्ध में 24 हजार करोड़ रुपये का नुकसान, ट्रंप सरकार ने किया इसे गुप्त

वाशिंगटन ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. अमेरिका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, ईरान के मिसाइलों, ड्रोनों और एक दुर्भाग्यपूर्ण 'फ्रेंडली फायर' की वजह से अमेरिकी सैन्य उपकरणों को 2.3 अरब से 2.8 अरब डॉलर (लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है. यह अनुमान मुख्य रूप से हवाई उपकरणों का है. इसमें अमेरिकी ठिकानों पर हुए नुकसान या नौसेना के जहाजों का नुकसान शामिल नहीं है।  रक्षा मंत्री का दावा और अगले दिन ईरान का हमला 26 मार्च को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कैबिनेट बैठक में बड़े दावे किए. उन्होंने कहा कि इतिहास में कभी भी किसी देश की सेना को इतनी तेजी और प्रभावी ढंग से कमजोर नहीं किया गया. लेकिन ठीक अगले दिन, 27 मार्च को ईरान ने सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी एयरबेस 'प्रिंस सुल्तान' पर मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया।  इस हमले में एक बेहद महंगा E-3 AWACS रडार डिटेक्शन विमान नष्ट हो गया, जिसकी कीमत लगभग 5,920 करोड़ रुपये थी. यह विमान आकाश में उड़ने वाला कमांड सेंटर था, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमान और मिसाइलों का पता लगाता था।  कितना हुआ कुल नुकसान? CSIS के सीनियर एडवाइजर मार्क कैनशियन ने विस्तृत गणना की है. उनके अनुसार…     THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम का एक या दो पावरफुल रडार नष्ट हुए, जिनकी कीमत लगभग 4,100 करोड़ से 8,200 करोड़ रुपये के बीच है.     ईरान के हमलों और एक फ्रेंडली फायर घटना में लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.     फ्रेंडली फायर में कुवैत में तीन F-15 फाइटर जेट भी नष्ट हो गए. युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. ईरान ने न सिर्फ अमेरिकी ठिकानों पर, बल्कि अमेरिका के सैनिकों वाले खाड़ी देशों के ठिकानों पर भी हमले किए. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी प्रभावित किया, जिससे तेल परिवहन प्रभावित हुआ. CSIS विशेषज्ञ का कहना है कि ईरान का खाड़ी देशों पर हमला करना रणनीतिक गलती साबित हुआ, क्योंकि इससे खाड़ी देश अमेरिका के और करीब आ गए।  अमेरिका की मुश्किलें अमेरिका ने इस युद्ध में पूर्ण पारदर्शिता नहीं दिखाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन चुनावी कारणों से नुकसान की पूरी जानकारी छिपा रहा है. ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने ऑपरेशनल सफलताएं हासिल कीं, लेकिन रणनीतिक लक्ष्य अभी दूर दिख रहे हैं. 2003 के इराक युद्ध और अफगानिस्तान की तरह यहां भी ऑपरेशनल जीत रणनीतिक हार में बदल सकती है।  अभी अमेरिका ने क्षेत्र में 2003 के इराक युद्ध जितनी बड़ी सेना नहीं तैनात की है. ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने अमेरिकी हवाई उपकरणों को काफी नुकसान पहुंचाया है. CSIS रिपोर्ट अमेरिका के नुकसान का पहला विस्तृत अनुमान है. इसमें ठिकानों के इमारतों को हुए नुकसान और अन्य विशेष उपकरण शामिल नहीं हैं, इसलिए असली नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है।  ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को अब तक 19,400 से 23,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का सैन्य नुकसान हो चुका है. यह घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में मिसाइल और ड्रोन कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं. अमेरिका के लिए यह न सिर्फ आर्थिक, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती भी बन गया है. युद्ध अभी जारी है और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। 

SC ने पवन खेड़ा को दी अग्रिम जमानत, शर्त—पुलिस बुलाने पर थाने में हाजिर होना अनिवार्य

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. 30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।  अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, उसे आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता. अदालत ने निर्देश दिया है कि क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन केस नंबर 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।  कोर्ट ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि दोनों पक्षों (खेड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी) की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, लेकिन किसी की आजादी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. दरअसल, खेड़ा के खिलाफ यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइंया से जुड़े बयान को लेकर दर्ज किया गया था. खेड़ा ने रिंकी भुइयां सरमा पर आरोप लगाए थे कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां हैं।  जमानत की शर्तें – खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा. – जब भी पुलिस स्टेशन में बुलाया जाए, उपस्थित होना पड़ेगा. – वह किसी भी तरह से सबूतों को प्रभावित या छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे. – अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे. – साथ ही, ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शर्तें भी लागू कर सकता है. – अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है. – ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा. अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं है.   निचली अदालत ने नहीं मिली थी राहत आपको बता दें कि पवन खेड़ा ने इससे पहले असम की निचली अदालत और गुवाहाटी हाईकोर्ट में भी अग्रिम जमानत को लेकर याचिका दायर की थी. दोनों अदालतों से राहत ना मिलने की वजह से वो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए खेड़ा को अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। 

बर्फ से ढका हेमकुंड साहिब, सेना बर्फ काटकर रास्ता खोलने में जुटी

 जोशीमठ बर्फ और बदलते मौसम के बीच भारतीय सेना के जवान एक बार फिर अनुपम मिसाल पेश कर रहे हैं. सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा को सुगम बनाने के लिए सेना के 22 जवान लगातार बर्फ काटकर रास्ता बनाने के काम में जुटे हुए हैं।  गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब 15,210 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यहां ऑक्सीजन की भारी कमी, तेज हवाएं और ठंड हर समय चुनौती से भरा रहता है. फिर भी हर साल की तरह इस बार भी भारतीय सेना के जवान बिना रुके अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।  अटला कुड़ी ग्लेशियर पर चल रहा है मुश्किल काम सेना की टीम अटला कुड़ी ग्लेशियर क्षेत्र में काम कर रही है. हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग के करीब 3 किलोमीटर हिस्से में बर्फ को काटकर सुरक्षित रास्ता तैयार किया जा रहा है. यहां मौसम बहुत बदला-बदला सा है. कभी तेज बर्फबारी हो रही है तो कभी अचानक मौसम साफ और सुहावना हो जाता है।  हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा अधिक ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से ऑक्सीजन की भारी कमी के बीच काम करना आसान नहीं है. लेकिन इन परिस्थितियों के बावजूद जवान लगातार मेहनत कर रहे हैं।  बता दें कि 23 मई 2026 को इस बार गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. ऋषिकेश से पहला जत्था 20 मई को रवाना होने वाला है. हेमकुंड साहिब पहुंचने का रास्ता ऊंचे हिमालयी इलाके से होकर गुजरता है. सर्दियों में यहां भारी बर्फ जमा हो जाती है. बिना रास्ता साफ किए श्रद्धालु यात्रा नहीं कर सकते. इसलिए भारतीय सेना के जवान हर साल बड़ी मेहनत और लगन से बर्फ हटाकर, रास्ता सुरक्षित बनाकर यात्रियों के लिए तैयार करते हैं। 

अप्रैल में GST कलेक्शन 2.43 लाख करोड़ पर पहुंचा, अब तक का सबसे बड़ा उछाल

नई दिल्ली  ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। इससे भारत में आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है। देश में अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ रुपये के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। नए वित्त वर्ष के पहले महीने जीएसटी कलेक्शन में भारी उछाल इस बात का संकेत है कि देश की इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है। अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी की तेजी आई है। इससे पहले एक महीने में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन का रेकॉर्ड पिछले साल अप्रैल में बना था। उस महीने यह 2.37 लाख करोड़ रहा था। इस बार नेट जीएसटी कलेक्शन 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल की तुलना में 7.3 फीसदी अधिक है। अप्रैल में टोटल रिफंड भी 19.3 फीसदी बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नेट जीएसटी रेवेन्यू 2,10,909 करोड़ रुपये रहा। इसमें इम्पोर्ट लिंक्ड रेवेन्यू की मजबूत भूमिका रही। रेकॉर्ड पर जीएसटी कलेक्शन     अप्रैल में GST कलेक्शन 2.42 लाख करोड़ के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचा     यह कलेक्शन पिछले साल अप्रैल की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक है     पिछले साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन ₹2.37 लाख करोड़ रहा था     नेट जीएसटी कलेक्शन भी 7.3% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा     महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और यूपी सबसे आगे आयात से होने वाली कमाई में क्या रही खास बात? अप्रैल के जीएसटी कलेक्शन में एक खास बात आयात से जुड़ी जीएसटी रेवेन्यू के दबदबे का कायम रहना रहा। आयात पर आईजीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर लगभग 26% तो नेट कस्टम जीएसटी रेवेन्यू 42.9% की रफ्तार से बढ़ा, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद कारोबार की मजबूती को दिखा रहा है। डेलाइट इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स पार्टनर एमएस मणि के मुताबिक इससे आयात में तेजी का पता चलता है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि कस्टम कलेक्शंस के आंकड़े नहीं होने के चलते इस तेज उछाल के कारणों का सटीक पता लगाना मुश्किल है। घरेलू खपत स्थिर लेकिन ग्रोथ धीमी आयात ने ओवरऑस ग्रोथ को तगड़ा सपोर्ट मिला लेकिन घरेलू जीएसटी कलेक्शन इसकी तुलना में सुस्त रही। ग्रास डोमेस्टिक रेवेन्यू अप्रैल महीने में सालाना आधार पर 4.3% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा जिससे सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी खपत में स्थिर रुझान का संकेत मिला है। एमएस मणि का कहना है कि दरों में तेज कटौती के बावजूद घरेलू खपत पर जीएसटी कलेक्शन का बढ़ना खपत में अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है। हालांकि एक अहम बात ये है कि यह ग्रोथ सभी राज्यों में एक जैसी नहीं रही। कुछ बड़ी मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमिंग स्टेट्स में लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ रही जैसे कि गुजरात में 3% और महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में करीब 5% की ग्रोथ रही। ग्रास कलेक्शन में तेज उछाल लेकिन नेट रेवेन्यू की रफ्तार सुस्त मजबूत ग्रास के बावजूद नेट जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रही और यह सालाना आधार पर 7.3% बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसकी मुख्य वजह रिफंड की अधिक स्पीड रही। अप्रैल में सालाना आधार पर टोटल रिफंड 19.3% की रफ्तार से बढ़ा तो घरेलू रिफंड 54% से अधिक बढ़ गया। टैक्स कनेक्ट एडवायजरी सर्विसेज एलएलपी के विवेक जालान का कहना है कि नेट डोमेस्टिक कलेक्शंस में कोई खास बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि रिफंड में तेज बढ़ोतरी हुई। टॉप 5 राज्य अप्रैल में ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8 फीसदी उछलकर 57,580 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3 फीसदी तेजी के साथ 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। कस्टम से नेट रेवेन्यू यानी आयात पर जीएसटी में 42.9 फीसदी तेजी आई जबकि नेट डोमेस्टिक रेवेन्यू में केवल 0.3 फीसदी तेजी रही। इससे साफ है कि अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन में तेजी में एक्सटरनल ट्रेड की अहम भूमिका रही। जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (13,793 करोड़ रुपये), कर्नाटक (5,829 करोड़ रुपये), गुजरात (5,455 करोड़ रुपये), तमिलनाडु (4,724 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश (4,399 करोड़ रुपये) शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष (2025) में यह 20.55 लाख करोड़ रुपये था। नेट जीएसटी कलेक्शन 19.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 7.1% अधिक है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत देता है।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान: ईरान के मामले को युद्ध नहीं कहूंगा, फिर खुद की सराहना की

वाशिंगटन दुनियाभर में आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मामले को युद्ध मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के अभियान के बाद ईरान की नौसेना और थल सेना कमजोर हो गई है और अब वे समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। ईरान की सैन्य क्षमता पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी ड्रोन फैक्ट्रियों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा ईरान की परमाणु क्षमता को भी धराशायी कर दिया गया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा था कि टैरिफ का दबाव बनाकर उन्होंने युद्ध रुकवाया था। युद्ध रुकवाने के दावे करके वह कई बार नोबेल पुरस्कार की भी इच्छा जता चुके हैं। इस बार का शांति का नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं मिला तो वह काफी भड़के हुए थे। युद्ध को लेकर क्या कह रहे डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौते की शर्तें मानने को तैयार नहीं होता तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है। अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के श्री ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं। अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।

पाकिस्तान की हालत हुई दयनीय, सऊदी मदद भी नाकाम, ईरान युद्ध ने किया बर्बाद

करांची  अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से पाकिस्तान पर बड़ा असर दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में खुद ये बात कही है और चेतावनी दी है कि महंगे होते तेल और क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की आर्थिक हालत पतली कर दी है. कैबिनेट बैठक में उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल बिल करीब 300 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. ऐसे में हालात पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक टास्क फोर्स भी बनाई है. आपको बता दें कि पाकिस्तान इस वक्त महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर देख रहा है और तेल-गैस के लिए यहां त्राहिमाम मचा हुआ है।  शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.पाकिस्तान महंगाई की मार तो झेल ही रहा है, लेकिन शांति बनाने में भी वो सक्रिय है. शहबाज शरीफ ने बताया कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराई गई, जो 21 घंटे तक चली. इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता हो ही नहीं पाई. फिलहाल संघर्ष विराम बना हुआ है और पाकिस्तान किसी भी तरह से वार्ता को फिर से शुरू करना चाहता है।  तेल के बढ़ते दाम ने रुलाया प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं, इसलिए नए दाम तय करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से हालात पर काबू पाने की कोशिश जारी है. इस बीच उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ओर से उठाए गए कदमों के कारण पाकिस्तान में स्थिति अन्य देशों की तुलना में संतोषजनक है और कहीं भी लंबी कतारें नहीं हैं. हालांकि युद्ध से पहले और बाद की तुलना में 500 मिलियन डॉलर का उछाल आया है, जो अर्थव्यवस्था को की रीढ़ तोड़ रहा है. सरकार मितव्ययिता और बचत के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर रही है, इसके लिए एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है. सरकारी उपायों के चलते ईंधन की खपत में काफी कमी आई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही थी, लेकिन युद्ध के कारण प्रगति को नुकसान पहुंचा है।  ईरान-अमेरिका युद्ध में पाकिस्तान कर रहा मध्यस्थता     पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और तेल संकट के बीच इस पहल को काफी अहम माना जा रहा है, हालांकि ये कुछ खास परिणाम नहीं दे पाई है।      पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने की कोशिश की है. जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें युद्धविराम और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की गई. फिलहाल एक अस्थायी संघर्ष विराम बना हुआ है, जिसे बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।      पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था से परेशान है और शांति चाहता है और दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के लिए खूब उठापटक कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री के साथ संपर्क में रहकर आगे की रणनीति पर काम किया जा रहा है।