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थरूर ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल, आतंकवाद पर सख्त रुख जरूरी बताया

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भारत की विदेश नीति, विशेष रूप से पाकिस्तान और अमेरिका के साथ संबंधों पर अपनी बेबाक राय रखी है। थरूर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अगर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता किया भी है तो इससे भारत का कद छोटा नहीं होगा। आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी अक्सर पाकिस्तान की मध्यस्थता के बहाने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करती है और मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाती है। शशि थरूर ने पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह तब तक नहीं बदलेगा जब तक सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। शशि थरूर ने एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान को ओसामा बिन लादेन जैसे मामले में माफ कर दिया, जबकि वह वर्षों तक उनकी नाक के नीचे छिपा रहा। थरूर ने इसे पाकिस्तान का 'दोहरा चरित्र' करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता या कूटनीतिक नरमी नहीं दिखाएगा, जब तक वह अपनी धरती पर पनप रहे आतंकी समूहों को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पर्याप्त सबूत होने के बावजूद पाकिस्तान ने आज तक किसी भी दोषी को सजा नहीं दी है। ईरान-अमेरिका तनाव पर भारत की भूमिका जब उनसे पूछा गया कि भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका क्यों नहीं निभाई तो थरूर ने कहा, "भारत के संबंध सभी प्रमुख देशों के साथ अच्छे हैं। पाकिस्तान का ऐसा हाल नहीं है। अगर पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की तो इससे भारत का कद कम नहीं होता है।" ट्रंप की टिप्पणी पर चुप्पी की सलाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के संदर्भ में की गई विवादास्पद 'नरक' वाली टिप्पणी पर थरूर ने भारत सरकार को संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पोस्ट जैसी छोटी बातों पर भारत को आक्रामक होने की जरूरत नहीं है। यह हमारी कूटनीति के स्तर के अनुकूल नहीं है। अगर मैं सरकार में होता तो इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर देता।" आपको बता दें कि 2016 के ऊरी हमले और 2019 के पुलवामा हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान के प्रति 'आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते' की नीति अपनाई है। भारत का वैश्विक मंचों पर हमेशा यह रुख रहा है कि पाकिस्तान जब तक लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी गुटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करता तब तक कूटनीतिक सुधार संभव नहीं है।

खाड़ी में तनाव से कच्चे तेल पर संकट, उत्पादन 57% तक गिरने की आशंका

नई दिल्ली गोल्डमैन सैक्स रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने के कुछ ही महीनों के भीतर खाड़ी क्षेत्र का कच्चा तेल उत्पादन काफी हद तक ठीक हो सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युद्ध-पूर्व के स्तर तक पूरी तरह से वापसी में समय लग सकता है। अगर यह महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद रहता है तथा पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल के उत्पादन को और भी अधिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। रिसर्च में अनुमान लगाया गया है कि खाड़ी क्षेत्र का उत्पादन युद्ध-पूर्व के स्तर की तुलना में 14.5 मिलियन बैरल प्रति दिन यानी 57% तक गिर गया है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि अगर तेल संपत्तियों पर नए सिरे से कोई हमला नहीं होता है और आने वाले महीनों में यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से और सुरक्षित रूप से फिर से खुल जाता है, तो उत्पादन में तेजी से सुधार संभव है। उत्पादन में सुधार की गति परिवहन और कुओं से तेल निकलने की दर पर निर्भर करेगी। एक बार जब यह जलमार्ग फिर से खुल जाएगा, तो मुख्य बाधाएं पाइपलाइन की क्षमता, पहले से निकाले गए तेल को ले जाने के लिए खाली टैंकरों की उपलब्धता, और तेल क्षेत्रों में मरम्मत व रखरखाव के काम के लिए जरूरी सामग्री और कर्मचारियों को जुटाने से जुड़ी हो सकती हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में उपलब्ध खाली टैंकरों की क्षमता में लगभग 50 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि पूरी तरह से ठीक होने में कई तिमाहियां लग सकती हैं। माइंस हटाने का काम जारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईरानी बारूदी सुरंगों को हटाने का काम शुरू कर चुकी है। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को बहाल करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि इस मार्ग के बंद होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में है। समुद्र के नीचे बिछाई गई इन विस्फोटक सुरंगों को साफ करने में कम से कम 6 महीने लग सकते हैं। वहीं, जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने शनिवार को कहा कि उनका देश भूमध्य सागर में बारूदी सुंरग हटाने वाला पोत तैनात कर सकता है।

ईरान-पाकिस्तान वार्ता के बीच अब्बास अराघची का दोबारा इस्लामाबाद दौरा तय

नई दिल्ली अमेरिका के साथ वार्ता की उम्मीदों पर पानी फिरने के बाद ईरान के विदेश मंत्री पाकिस्तान से रवाना हो गए थे। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक ईरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक बार फिर पाकिस्तान का दौरा करेंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी की खबर। खबर में कहा गया है कि अराघची ओमान और रूस की यात्रा के बाद पाकिस्तान लौटेंगे। खबर के अनुसार वह संभवत: रविवार को इस्लामाबाद लौटकर उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे जो युद्ध खत्म करने से संबंधित विषयों पर विचार विमर्श के लिए तेहरान गया था। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब वह अपनी टीम पाकिस्तान नहीं भेजेंगे। वह फोन पर ईरान से वार्ता करने को तैयार हैं। ईरानी राष्ट्रपति से शहबाज शरीफ ने की बात पाकिस्तान पहुंचने के बाद ईरानी विदेश मंत्री पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से मिले थे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियां से फोन पर बात की है। शनिवार को उन्होंने फोन किया और कहा कि वह क्षेत्र में शांति के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं। दोनों के बीच करीब 50 मिनट तक वार्ता चली। ट्रंप बोले- खारिज कर दिया ईरान का प्रस्ताव इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा से वाशिंगटन आने के लिए एयर फोर्स वन विमान में सवार होने से पहले कहा, "उन्होंने हमें एक प्रस्ताव भेजा, जो बेहतर हो सकता था। दिलचस्प बात यह है कि जब मैंने इसे खारिज कर दिया तो 10 मिनट के अंदर हमें दूसरा प्रस्ताव मिला, जो काफी बेहतर है।' क्यों रद्द कर दी वार्ता? राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि ताजा प्रस्ताव में क्या है। उन्होंने बस यही कहा कि ईरान ने काफी पेशकश की हैं। ट्रंप ने हालांकि कहा कि उनकी एक शर्त यह है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ नए दौर की वार्ता इसलिए रद्द कर दी क्योंकि इसके लिए बहुत सफर करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा उनके वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की मुलाकात "देश के नेता से नहीं होने वाली थी।' खुली है फोनलाइन ट्रंप ने कहा कि अमेरिका टेलीफोन के जरिये समझौता करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "वे (ईरान) जब चाहें, हमें कॉल कर सकते हैं।" डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है। बता दें कि इस्लामाबाद में वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने ईरान के लिए नाकेबंदी कर दी। जब उसने नाकेबंदी नहीं हटाई तो ईरान ने एक बार फिर से होर्मुज को बंद कर दिया है जिससे पूरी दुनिया में तेल का संकट गहरा गया है।

लाल जोड़े में पहुंची मीरा परमार, वोट डालकर निभाया नागरिक कर्तव्य

गुजरात गुजरात के जामनगर में लोकतंत्र के प्रति समर्पण की खूबसूरत तस्वीर सामने आई. यहां एक युवती ने अपनी जिंदगी के सबसे खास दिन पर मतदान को प्राथमिकता दी. शादी की रस्मों और तैयारियों के बीच वह दुल्हन के जोड़े में सीधे मतदान केंद्र पहुंची और अपने वोट डाला. जामनगर नगर निगम क्षेत्र में स्थानीय स्वशासन चुनाव के लिए मतदान हो रहा था. इसी दौरान गुलाबनगर की रहने वाली मीरा परमार ने जिम्मेदार नागरिक होने का उदाहरण पेश किया. अपनी शादी के दिन जब आमतौर पर दुल्हन तैयारियों में व्यस्त रहती है, मीरा ने सबसे पहले मतदान केंद्र पहुंचने का फैसला किया. लाल जोड़े में मीरा जब पोलिंग बूथ पहुंचीं तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर हैरान रह गए. मतदान कर्मियों से लेकर अन्य मतदाता तक सभी ने उनके इस कदम की सराहना की. मीरा ने मतदान किया, उंगली पर स्याही लगवाई और फिर मुस्कुराते हुए कैमरे के सामने तस्वीरें भी खिंचवाईं. मीरा ने कहा कि मतदान हर नागरिक का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है. लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर भी महत्वपूर्ण है. उनका मानना है कि अगर हर नागरिक मतदान को प्राथमिकता दे, तो देश और समाज दोनों मजबूत होंगे. मीरा के इस फैसले का उनके परिवार और रिश्तेदारों ने भी खुलकर स्वागत किया. सभी ने उनकी जागरूकता और जिम्मेदारी की तारीफ की. परिवार का कहना है कि मीरा ने न सिर्फ अपने लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश दिया है. जामनगर जिला प्रशासन ने भी मीरा के इस कदम की सराहना की. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की पहल युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करने में बेहद कारगर साबित होती है. बता दें कि गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव के तहत 15 महानगरपालिकाओं, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों की 9,000 से अधिक सीटों के लिए मतदान हो रहा है. मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा. अब मीरा परमार की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. लोग उनकी सराहना कर रहे हैं.

कोल थॉमस एलन बैकग्राउंड खुलासा, लिंक्डइन और डोनेशन सामने

 वॉशिंगटन शनिवार रात व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन डिनर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित बाकी लोगों पर जानलेवा हमला करने वाले शूटर के बारे में कई खुलासे हो रहे हैं. सार्वजनिक रिकॉर्ड्स से पता चला है कि वह दक्षिणी कैलिफोर्निया का रहने वाला एक टीचर और वीडियो गेम डेवलपर था.यही नहीं उसने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को चंदा भी दिया था. मिल चुका टीचर ऑफ द मंथ का अवार्ड हमलावर टॉमस एलन को हिरासत में लेने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल खंगाली. प्रोफाइल सर्च करने पर पता चला कि टॉमस C2 एजुकेशन नाम की टेस्ट की तैयारी कराने वाली और ट्यूटरिंग कंपनी में पार्ट‑टाइम शिक्षक के रूप में काम करता था. कंपनी के सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 में C2 ने टॉमस एलन को “टीचर ऑफ द मंथ” भी घोषित किया था. हालांकि शनिवार देर रात C2 के दिए गए फोन नंबर पर संपर्क नहीं हो सका. कमला हैरिस को दिया था 25 डॉलर का दान   लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, कोल टोमस एलन ने 2017 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री प्राप्त की है. इसके बाद उसने पिछले वर्ष कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी‑डोमिंगुएज हिल्स से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की थी.  फेडरल इलेक्शन कमीशन (FEC) के रिकॉर्ड के अनुसार, एलन ने अक्टूबर 2024 में कमला हैरिस के राष्ट्रपति अभियान को 25 डॉलर का दान भी दिया था. अकेले ही मारने आया था शूटर वॉशिंगटन डीसी की मेयर म्यूरियल बोउजर ने सीएनएन को बताया कि फिलहाल अधिकारियों के पास इस बात का कोई संकेत नहीं है कि व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर की घटना में किसी और की भूमिका थी.उन्होंने कहा,“इस समय ऐसा मानने की कोई वजह नहीं है कि इसमें कोई और शामिल था.” वहीं, वॉशिंगटन डीसी के अंतरिम पुलिस प्रमुख जेफरी कैरोल ने भी कहा, “इस वक्त ऐसा प्रतीत होता है कि संदिग्ध अकेला व्यक्ति था, यानी एक ही शूटर आया था और उसके साथ कोई नहीं था.”

पायलट की सूझबूझ से बची 228 यात्रियों की जान, इमरजेंसी स्लाइड्स से सुरक्षित निकाले गए सभी यात्री

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार तड़के एक बड़ा विमान हादसा टल गया. जब स्विस इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट LX 147 के टेकऑफ के दौरान इंजन में खराबी आ गई. इसके बाद उसमें आग लग गई. पायलटों की सूझबूझ व त्वरित कार्रवाई के चलते विमान को रनवे पर ही रोक लिया गया. सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. हालांकि इस दौरान छह यात्री मामूली रूप से घायल हो गए. प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह फ्लाइट दिल्ली से स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख के लिए रवाना हो रही थी. विमान ने जैसे ही रनवे पर टेकऑफ के लिए गति पकड़ी तभी उसके एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद आग लगने की घटना सामने आई. स्थिति को भांपते हुए पायलट ने तत्काल टेकऑफ को रद्द कर दिया. आपातकालीन प्रक्रियाएं लागू कर दी गईं. विमान में कुल 228 यात्री सवार विमान में कुल 228 यात्री व चार बच्चे सवार थे. सभी यात्रियों को इमरजेंसी स्लाइड्स व सीढ़ियों के माध्यम से बाहर निकाला गया. निकासी के दौरान अफरा-तफरी की स्थिति में छह यात्रियों को हल्की चोटें आईं, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया. राहत की बात ये है कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई हैं. दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन ने जारी किया बयान दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन ने घटना पर बयान जारी करते हुए कहा कि आज सुबह के शुरुआती घंटों में दिल्ली एयरपोर्ट पर स्विस इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट LX 147 (दिल्ली-ज्यूरिख) से जुड़ी एक पूर्ण आपात स्थिति घोषित की गई थी. यह घटना रनवे 28/10 पर हुई. सभी निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का तत्काल पालन किया गया. यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. एयरपोर्ट संचालन सामान्य रूप से जारी रहा. एयरलाइन की ओर से भी बयान जारी कर कहा गया है कि घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है. इसके साथ ही प्रभावित यात्रियों को हर संभव सहायता, वैकल्पिक उड़ान, होटल व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. घटना के दौरान एयरपोर्ट की आपातकालीन सेवाएं तुरंत सक्रिय हो गईं और दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया. इस त्वरित प्रतिक्रिया के कारण बड़ा हादसा टल गया. विशेषज्ञों का कहना है कि टेकऑफ के दौरान इंजन फेल होना बेहद संवेदनशील स्थिति होती है, लेकिन पायलट व क्रू की ट्रेनिंग ऐसे ही हालात से निपटने के लिए होती है. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन यात्रियों की जान बचाने में कितना अहम होता है. फिलहाल तकनीकी टीम इस बात की जांच कर रही है कि इंजन में खराबी कैसे आई. आग लगने के पीछे क्या कारण रहे. घटना के बाद कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ाई गई लेकिन एयरपोर्ट का संचालन पूरी तरह सामान्य बना रहा.

भारत की वैज्ञानिक ताकत और शांति का संदेश: मन की बात में पीएम मोदी की बड़ी बातें

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों से लेकर वैश्विक मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दुनिया से भगवान बुद्ध के आदर्शों को अपनाने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत विंड एनर्जी में दुनिया की चौथी बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा “चुनावों की भागदौड़ के बीच, आपके संदेशों और पत्रों के जरिए हम नागरिकों की उपलब्धियों की खुशियां साझा करते रहे हैं। इस बार आइए ‘मन की बात’ की शुरुआत देश की ऐसी ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि से करें। कुछ दिन पहले भारत के परमाणु वैज्ञानिकों ने देश को एक और बड़ी उपलब्धि से गौरवान्वित किया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल कर ली है, जिसका मतलब है कि अब यह रिएक्टर संचालन के चरण में प्रवेश कर चुका है। पवन ऊर्जा में भारत अब बड़ी बात पीएम मोदी ने मन की बात में कहा कि आज वह एक ऐसी शक्ति की बात करना चाहते हैं जो दिखाई नहीं देती, लेकिन उसके बिना जीवन एक पल भी संभव नहीं है- यह शक्ति है पवन ऊर्जा। उन्होंने कहा कि यही ताकत भारत को आगे बढ़ा रही है और आज पवन ऊर्जा देश के विकास की नई कहानी लिख रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने हाल ही में इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है और देश की पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो गई है, जिससे भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है। वैश्विक तनाव पर बुद्ध का संदेश पीएम मोदी ने कहा कि मई का महीना एक शुभ अवसर के साथ शुरू हो रहा है और कुछ ही दिनों में हम बुद्ध पूर्णिमा मनाएंगे। उन्होंने देशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध ने हमें सिखाया कि शांति की शुरुआत हमारे भीतर से होती है और स्वयं पर विजय सबसे बड़ी जीत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया जिस तरह के तनाव और संघर्ष से गुजर रही है, उसमें बुद्ध के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। थलसेना, नौसेना और सीएपीएफ के बैंड्स की तारीफ की पीएम मोदी ने ने कहा कि हमारे देश में 23 जनवरी, यानी सुभाष चंद्र बोस की जयंती से लेकर 30 जनवरी महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तक ‘गणतंत्र उत्सव’ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस उत्सव का एक अहम हिस्सा बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी है, और इसके पीछे एक खास वजह है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समारोह विभिन्न बैंड्स के जरिए देश की विविध संगीत परंपराओं को दर्शाता है, और पिछले कुछ वर्षों में इसमें भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है, जिसे देशवासियों ने खूब सराहा है। उन्होंने बताया कि इस साल का बीटिंग रिट्रीट समारोह बेहद यादगार रहा, जिसमें वायुसेना, थलसेना, नौसेना और सीएपीएफ के बैंड्स ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।

व्हाइट हाउस गोलीबारी के बाद Donald Trump बोले- United States Secret Service ने बहादुरी से संभाला हालात

वाशिंगटन. ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है। वाइट हाउस में करेंस्पॉन्डेंट डिनर के दौरान उनके कक्ष के बाहर ही गोलीबारी होने लगी। इसके बाद सिक्रेट सर्विस ने तत्काल डोनाल्ड ट्रंप और अन्य लोगों को बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर ले गए। बताया गया है कि इस मामले में एक संदिग्ध को पकड़ लिया है और किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। घटना के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी देते हुए सीक्रेट सर्विस और एजेंसियों को धन्यवाद कहा है। बाहर निकालते वक्त गिर गए डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि डीसी में शाम के वक्त जो कुछ हुआ उसमें सीक्रेट सर्विस और अन्य एजेंसियों ने शानदार काम किया। उन्होंने तुरंत बहादुरी दिखाई। गोली चलाने वाले को पकड़ लिया गया है। एजेंसियां इस मामले में जल्द ही निर्णय लेंगी। इस घटना की वजह से इस शाम की सारी योजनाएं बदल गई हैं। बता दें कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के मुताबिक जब डोनाल्ड ट्रंप को सीक्रेट सर्विस के एजेंट बाहर निकाल रहे थे, उस वक्त वह गिर गए। उन्हें संभाला गया और फिर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। मेज के नीचे छिपे मेहमान रिपोर्ट के मुताबिक गोलीबारी की आवाज आते ही सुरक्षा एजेंसियों ने मेहमानों से मेज के नीचे छिपने को कहा। इसके बाद पूरे बैंक्वेट हॉल को घेर लिया गया। 'रास्ते से हटिए, छिप जाइए' जैसी आवाजें सुनने को मिल रही थीं। बता दें कि वाइट हाउस में राष्ट्रपति पत्रकारों के साथ डिनर का आयोजन करते हैं और इस दौरान उनके बीच संवाद भी होता है। हालांकि इस तरह की घटना की वजह से पूरे वाइट हाउस में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। अभी यह सामने नहीं आया है कि गोली चलाने वाला शख्स कौन था और उसका उद्देश्य क्या था। क्या है सीक्रेट सर्विस बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस (USSS) के पास रहता है। यह एक संघीय एजेंसी है जो कि होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के अंडर आती है। इसकी शुरुआत 1865 में हुई थी। पहल यह नकली नोटों पर विराम लगाने का काम करती थी हालांकि 1901 में तत्कालीनी राष्ट्रपति विलियम मैकिन्ले की हत्या के बादइसे राष्ट्रपति की सुरक्षा का कार्यभार सौंप दिया गया। सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति, उनके परिवार, राष्ट्रपति उम्मीदवार, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा में तैनात रहती है। सीक्रेट सर्विस के एजेंट सुरक्षा में हमेशा तैनात रहते हैं। राष्ट्रपति की विदेश यात्रा के दौरान भी सीक्रेट सर्विस के एजेंट उसके साथ जाते हैं। राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले ही एजेंट सक्रिय हो जाते हैं और हर संभावित खतरे की जानकारी इकट्ठी करते हैं। इसके बाद ही राष्ट्रपति उस देश की यात्रा करते हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर: 3 करोड़ लोग होंगे गरीब, पूरी दुनिया में मचेगी हलचल

  नई दिल्ली अमेरिका-ईरान के बीच 50 दिन से ज्यादा समय चले युद्ध में हालांकि फिलहाल सीजफायर चल रहा है, लेकिन ग्लोबल टेंशन बरकरार है. इस जंग का असर दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस संकट (Oil-Gas Crisis) के रूप में देखने को मिला, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया. इन सबसे बीच संयुक्त राष्ट्र के विकास प्रमुख की ओर से बड़ी चेतावनी दी गई है, जिसमें कहा गया है कि US-Iran War से पैदा हो रहे हालातों के चलते करीब 3 करोड़ लोग गरीबी में जा सकते हैं. रिपोर्ट में इसके पीछे की बड़ी वजहों का भी जिक्र किया गया है।  साल के अंत तक दिखेगा बड़ा असर रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के ग्रोथ चीफ अलेक्जेंडर डी क्रू ने मिडिल ईस्ट के खतरनाक प्रभाव की तरफ फोकस किया है और बड़ी चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि US-Iran War के चलते होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों के लगातार फंसने  के कारण सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि फर्टिलाइजर्स की सप्लाई भी प्रभावित हुई है, जो कि एग्रीकल्चर प्रोडक्शन पर सीधे असर डाल रही है. इस साल के अंत में फसलों की पैदावार पर इसका असर साफ देखने को मिलेगा।  क्रू ने आगे कहा कि भले ही अमेरिका और ईरान का ये युद्ध कल ही खत्म क्यों न हो जाए, लेकिन इसके पहले से ही दिख रहे प्रभाव आगे भी जारी रहेंगे, जो दुनिया के 30 मिलियन या 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी में धकेल सकते हैं. इस संघर्ष के अप्रत्यक्ष प्रभावों से आने वाले महीनों में खाद्य असुरक्षा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।  ग्लोबल फूड क्राइसिस का डर  संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) ने भी बीते सप्ताह कुछ ऐसी ही चेतावनी जारी की थी और इसमें कहा गया था कि मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक चलने वाला संकट ग्लोबल फूड क्राइसिस (Global Food Crisis) का कारण बन सकता है।  एफएओ के मुताबिक, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, सोमालिया, सूडान, तंजानिया, केन्या और मिस्र जैसे देशों में सबसे ज्यादा जोखिम नजर आ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ ही महीनों में खाद्य असुरक्षा का कोहराम देखने को मिलने लगेगा और सबसे बड़ी बात ये है कि इसके बारे में ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकते हैं।  GDP पर दबाव, दुनिया संकट में संयुक्त राष्ट्र विकास (UNDP) चीफ डी क्रू का कहना है कि Iran War के असर के चलते पहले ही ग्लोबल जीडीपी का 0.5% से 0.8% तक नष्ट हो चुका है. उन्होंने कहा कि जिन चीजों को बनने में दशकों का समय लग जाता है, उन्हें नष्ट होने के लिए आठ हफ्ते चलता यूएस-ईरान युद्ध ही काफी रहा।  बीते 28 फरवरी इस युद्ध की शुरुआत हुई थी, जबकि अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर स्ट्राइक शुरू की थी और ईरान के पलटवार के बाद दुनिया की लाइफलाइन वाले जाने वाले तेल-गैस रूट अवरुद्ध हो गई और एनर्जी समेत जरूरी सामग्रियों की सप्लाई चेन टूट सी गई। 

Donald Trump की मौजूदगी में फायरिंग, United States Secret Service की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

वाशिंगटन. वाशिंगटन हिल्टन होटल में शनिवार की रात 8:45 बजे (अमेरिकी समय के अनुसार) के करीब कॉरेस्पोंडेंट डिनर कार्यक्रम के दौरान जोरदार फायरिंग की आवाज सुनाई दी। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए थे। इस घटना की जानकारी मिलते ही राष्ट्रपति सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे सीक्रेट सर्विस के एजेंट ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति को सुरक्षित वहां से बाहर निकाल लिया। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। इस घटना पर राष्ट्रपति ट्रंप की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस घटना के करीब एक घंटे बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि एक शूटर को पकड़ लिया गया है। ट्रंप ने आगे कहा, "डीसी में आज की शाम काफी गहमागहमी भरी रही। सीक्रेट सर्विस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शानदार काम किया है।" रॉयटर्स के लिए काम करने वाले एक फ्रीलांस फोटोग्राफर ने आंखोदेखा हाल बताते हुए कहा कि होटल के भीतर फायरिंग की चार से छह राउंड आवाज सुनाई दी। हालांकि ये आवाजें मुख्य डाइनिंग हॉल के बिल्कुल पास नहीं थीं, लेकिन इनकी तीव्रता ने सभी को चौंका दिया। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि होटल परिसर के भीतर एक सशस्त्र हमलावर देखा गया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया। जैसे ही आवाजें सुनाई दीं, मेहमानों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। "गेट डाउन, गेट डाउन!" हॉल में मौजूद लगभग 2,600 मेहमान अपनी मेजों के नीचे छिप गए। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी और अमेरिका की पर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी कार्यक्रम स्थल से सुरक्षित निकाल लिया गया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा मंच से हटाए जाने से कुछ ही देर पहले मेलानिया ने भीड़ में किसी बात पर प्रतिक्रिया दी और उनके चेहरे पर चिंता के भाव दिखाई दिए। The empty stage is seen after President Donald Trump and other top leaders were evacuated from an annual dinner of White House correspondents on Saturday night(, April 25, 2026, in Washington/ AP Photo/Zeke Miller) प्रेस पूल ने सीक्रेट सर्विस के हवाले से बताया कि ट्रंप के डिनर के दौरान हुई कथित गोलीबारी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया। यह सुरक्षा घटना उस कमरे के बाहर हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य अधिकारी डिनर कर रहे थे। सीक्रेट सर्विस और अन्य अधिकारी बैंक्वेट हॉल पहुंचे। सैकड़ों मेहमान मेजों के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करने लगे। क्या होता है कॉरेस्पोंडेंट डिनर? वाशिंगटन डीसी में हर साल कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर का आयोजन किया जाता है, जिसकी मेज़बानी वाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन करता है। इस समारोह में पत्रकार, राजनेता और हॉलीवुड की मशहूर हस्तियां एक साथ जुटती हैं। यह समारोह प्रेस की आजादी का जश्न मनाता है, पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्तियां जुटाता है और इसमें हल्के-फुल्के अंदाज में राजनेताओं की रोस्टिंग (व्यंग्या) किया जाता है। अक्सर इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति भी शामिल होते हैं।