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वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: Morgan Stanley ने जताया भरोसा

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के बावजूद मॉर्गन स्टैनली ने भारत की FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत कर दिया है. यह आंकड़ा अप्रैल में दिए गए 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से ऊपर है. जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट ने जानकारी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमने के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. लेकिन मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि FY27 में भारत 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा. FY28 में यह ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।  अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा तेल की कीमतें जून 2026 तिमाही में सबसे हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कम होने की उम्मीद है. शुरुआती तिमाही में विकास थोड़ा धीमा पड़ सकता है, लेकिन बाद में सुधार होगा. घरेलू मांग, निवेश और नीतिगत सहायता से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी भी दी है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो विकास पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है।  ब्याज दरों बदलाव होने की संभावना कम मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वित्त वर्ष में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा. RBI नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य फैसले भी ले सकता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर कंट्रोल रखने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI सतर्क रहेगा. मिडिल ईस्ट संकट से ऊर्जा कीमतों में उछाल आने का खतरा है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है. फिर भी, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू फैक्टर्स से भारत इस चुनौती का सामना कर सकता है।  भारत को मिलेंगी नई संभावनाएं इस संकट के बावजूद भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में बेहतर है. मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, निवेश बढ़कर जीडीपी का 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे अगले पांच साल में अतिरिक्त 800 अरब डॉलर का पूंजी निवेश आ सकता है।  यह वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को नई संभावनाएं देगा. मध्यम अवधि में 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना संभव है. सरकार की सुधार नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और घरेलू खपत इस विकास को और मजबूत बनाएंगी।  आरबीआई ने दी चेतावनी हालांकि, Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा किसी भी संभावित आर्थिक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखे हुए है.  उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के जरिए आर्थिक विकास को बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।  आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। 

कोरोना के बाद नया खतरा? जानिए हंतावायरस कितना खतरनाक है और इसका इलाज कैसे होगा

 नई दिल्ली हंतावायरस से प्रभावित लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस की घटना ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. कुछ लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी समझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल अलग है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोविड-19 नहीं है. वर्तमान में हंतावायरस से पब्लिक हेल्थ का खतरा बहुत कम है।  हंतावायरस चूहों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है. यह मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है – एक फेफड़ों पर हमला करता है (Hantavirus Pulmonary Syndrome – HPS) और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है. यह वायरस चूहों के मूत्र, लार और मल से फैलता है. जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं तो इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले लेता है. कोविड-19 की तरह यह हवा में आसानी से नहीं फैलता।  कोविड-19 से सबसे बड़ा अंतर कोविड-19 हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता था. एक व्यक्ति से दूसरे में सामान्य बातचीत, खांसने या छींकने से भी संक्रमण हो जाता था. लेकिन हंतावायरस में इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत दुर्लभ है. सिर्फ एंडीज स्ट्रेन ही इंसान से इंसान में फैलता है. यह तब होता है जब लंबे समय तक बहुत करीबी संपर्क हो, जैसे घर में साथ रहना या घनिष्ठ संबंध. सामान्य मिलने-जुलने से यह नहीं फैलता।  वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं बना?  दुनिया भर में हर साल हंतावायरस से लगभग 60 हजार से एक लाख लोग संक्रमित होते हैं, फिर भी यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका में अभी तक इसका कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर एंडीज स्ट्रेन जो 40 प्रतिशत तक मौत का कारण बन सकता है. हंतावायरस ने एक बार फिर इस सवाल को उठा दिया है कि क्या हमें महामारी आने से पहले ही टीका तैयार करना चाहिए। मॉडर्ना की कोशिश और प्रीक्लिनिकल स्टेज 2023 से अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी वैक्सीन इनोवेशन सेंटर के साथ mRNA Access प्रोग्राम के तहत काम कर रही है. इस साझेदारी की औपचारिक घोषणा 2024 में की गई थी. चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस mRNA वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, यह वैक्सीन अब भी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और ह्यूमन ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं।  विशेष बात यह है कि यह वैक्सीन मुख्य रूप से हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) पैदा करने वाले स्ट्रेन पर काम कर रही है, न कि MV होंडियस क्रूज शिप वाले एंडीज स्ट्रेन पर, जो HPS (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) का कारण बनता है।  क्रूज संकट के दौरान शेयरों में उछाल MV होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने आने के बाद जब मॉडर्ना की इस साझेदारी की खबर आई, तो कंपनी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर हंतावायरस का खतरा बढ़ा तो मॉडर्ना का mRNA प्लेटफॉर्म काम आ सकता है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अभी तक यह सिर्फ शुरुआती चरण में है।  लक्षण और मौत का खतरा हंतावायरस के लक्षण शुरू में फ्लू जैसे होते हैं – बुखार, थकान, सिरदर्द. इसके 4-10 दिन बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है. HPS का मौत का दर करीब 40% है, जो कोविड-19 से ज्यादा है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से नहीं फैलता, इसलिए बड़े स्तर पर फैलने का खतरा बहुत कम है. कोविड-19 का इनक्यूबेशन पीरियड 2-14 दिन था, जबकि हंतावायरस का 1-8 हफ्ते तक।  कोविड-19 से मिला सबक कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि टीका बनाने का सबसे सही समय महामारी शुरू होने से पहले होता है. जब कोविड-19 आया तब mRNA टेक्नोलॉजी पहले से तैयार थी, जिसकी वजह से कुछ महीनों में ही वैक्सीन बन गई. हंतावायरस के मामले में भी यही स्थिति है. वैज्ञानिक सालों से इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार फंडिंग और प्राथमिकता न मिलने के कारण प्रगति धीमी रही है।  दुनिया भर में स्थिति वर्तमान में कोई भी देश हंतावायरस का स्वीकृत टीका नहीं दे रहा है. कुछ देशों में शोध चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन और इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी अभी दूर है. MV होंडियस वाली घटना ने वैश्विक स्तर पर इस दिशा में ध्यान खींचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हंतावायरस जैसे जानलेवा वायरस पर गंभीरता से निवेश किया जाए।  मॉडर्ना की यह कोशिश एक अच्छी शुरुआत है. अगर मानव परीक्षण सफल रहे तो mRNA आधारित हंतावायरस वैक्सीन बन सकती है. लेकिन इसमें अभी कई साल लग सकते हैं।  क्रूज शिप पर क्या हुआ? एमवी होंडियस क्रूज शिप पर कुल 11 मामले सामने आए हैं. तीन लोगों – एक डच जोड़े और एक जर्मन पर्यटक – की मौत हो चुकी है. शिप पर सवार सभी लोगों को उनके देशों में भेज दिया गया है. उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है. स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका समेत कई देशों में यात्री पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ यात्री अर्जेंटीना में शिप पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो गए थे, क्योंकि वहां यह वायरस पहले से मौजूद है।  महामारी बनने का खतरा? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हंतावायरस से महामारी बनना लगभग असंभव है. क्योंकि इंसान से इंसान में फैलाव बहुत कम और सीमित है. WHO, ECDC और अन्य एजेंसियां इसे अच्छी तरह नियंत्रित करने में सक्षम हैं. कोविड-19 पूरी दुनिया में फैल गया था क्योंकि यह हवा में आसानी से घूमता था. हंतावायरस ऐसा नहीं है।  क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जिन लोगों में लक्षण दिखें (बुखार, थकान, सांस लेने में दिक्कत) उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. क्वारंटाइन का समय 6 हफ्ते तक रखा जा रहा है क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन लंबा है. हंतावायरस खतरनाक है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 जैसा नहीं है. चूहों से बचाव, स्वच्छता और सतर्कता रखने से इसका खतरा बहुत कम किया जा सकता है. WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं। 

स्कूलों में हिजाब-जनेऊ की अनुमति, सिद्धारमैया सरकार ने हटाई पूर्व प्रतिबंध नीति

कर्नाटक कर्नाटक के स्कूलों में अब छात्र-छात्राओं के हिजाब या जनेऊ पहनने पर रोक नहीं लगेगी। राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने 2022 की भाजपा सरकार द्वारा लाए गए उस फैसले को पलट दिया, जिसमें स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। कर्नाटक शिक्षा विभाग द्वारा लाए जा रहे नए नियमों में छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म के साथ जनेऊ, हिजाब, पगड़ी, रुद्राक्ष और स्कॉर्फ पहनने की अनुमति दे दी है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे पर बात करते हुए कर्नाटक सरकार में शिक्षा मंत्री मधु बांगराप्पा ने कहा कि कि सरकार की तरफ से यह फैसला लिया गया है कि धार्मिक चिन्हों की वजह से छात्र-छात्राओं को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "पारंपरिक और धार्मिक प्रथाओं के कारण बच्चों को असुविधा नहीं होनी चाहिए। हमने स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विभाग को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले नियमों का ढांचा पूरा करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि ये नियम स्कूलों में यूनिफॉर्म व्यवस्था को बनाए रखते हुए पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों को सीमित अनुमति देंगे। वहीं इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार की तरफ से कहा गया कि इस फैसले का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रथाओं के सम्मान के बीच संतुलन बनाने के लिए है। माना जा रहा है कि यह फैसला राज्य में हिजाब के मुद्दे पर एक बार फिर से बहस तेज कर सकता है। भाजपा ने क्यों किया था हिजाब बैन का फैसला? कर्नाटक में 2021-22 के दौरान कॉलेज आने वाली मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने से रोका गया था। इसके बाद यह एक बड़ा सामाजिक और धार्मिक मुद्दा बन गया था। कॉलेज प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि यूनिफॉर्म नियम सभी छात्रों के लिए समान रूप से लागू होता है। इसका विरोध करते हुए छात्राओं ने कहा कि हिजाब उनके धर्म की पहचान का हिस्सा है। ऐसे में वह इसे नहीं हटाएंगी। कर्नाटक के साथ-साथ धीरे-धीरे यह विवाद पूरे राज्य में फैल गया। मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिजाब को पहनने के लिए की जा रही इस जिद के जवाब में कुछ हिंदू संगठनों ने भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आने की कोशिश की, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। इस विवाद को बढ़ता देख, तत्कालीन भाजपा सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक चिन्हों को पहनने पर रोक लगा दी। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा। इस मामले पर मार्च 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिजाब इस्लाम कि अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। इसके अलावा स्कूलों में यूनिफॉर्म लागू करना सरकार और प्रशासन का क्षेत्र है। ऐसे में राज्य सरकार का आदेश सही है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। यहां पर दो सदस्यीय बेंट ने एक-एक के मत से फैसला दिया। 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आ गई। इसके बाद नई सरकार ने हिजाब बैन के फैसले में छूट दे दी। इसके बाद यह मामला दब गया। हालांकि, अब जबकि फिर से यह फैसला सामने आया है, तो इस पर राजनीतिक विवाद की आशंका बनी हुई है।

नियुक्ति के अगले ही दिन झटका: CM विजय के ज्योतिषी की OSD पोस्ट गई

 चेन्नई तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय ने अपने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को नियुक्ति के 24 घंटे के अंदर ही पद से हटा दिया है. सीएम विजय ने मंगलवार को पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को मुख्यमंत्री ऑफिस में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के पद पर नियुक्त किया था. लेकिन उनकी ये नियुक्ति तुरंत ही विवादों के घेरे में आ गई थी. TVK में सीएम के प्रतिद्वंद्वी खेमे और गठबंधन के साथियों ने इस नियुक्ति की आलोचना की थी. इसके बाद सीएम विजय ने 24 घंटे से भी कम समय में ज्योतिषी पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल की नियुक्ति को रद्द कर दिया है।  सरकार के प्रधान सचिव ने एक पत्र में कहा है कि पंडित रिकी राधा की OSD के पद पर नियुक्ति को रद्द किया जाता है।  मंगलवार को जब सीएम विजय ने ज्योतिषी पंडित रिकी राधा की नियुक्ति को हरी झंडी दी तो उनके इस कदम से तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया. VCK, CPIM और CPI जैसी पार्टियों ने, जिन्होंने TVK सरकार को अपना समर्थन दिया था, इस कदम की खुलकर आलोचना की।  बुधवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले, VCK MLA वाणी अरसु ने सरकार से साइंटिफिक और लॉजिकल सोच पर फोकस करने और उन चीजों पर ध्यान न देने की अपील की जिन्हें ज़्यादातर अंधविश्वास माना जाता है।   उन्होंने कहा, "हमारी सरकार को साइंटिफिक सोच को महत्व देना चाहिए, ज्योतिष को नहीं। बता दें कि विजय की सरकार ने आज ही तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत हासिल की है।  फ्लोर टेस्ट से पहले तमिलनाडु सरकार के मंत्री निर्मल कुमार ने कहा था कि पंडित रिकी राधा हमारी पार्टी के प्रवक्ता रहे हैं. इसलिए हमने उनकी नियुक्ति की है. उनका ज्योतिषी होना उनके व्यक्तिगत जीवन की बात है. किसी भी व्यक्ति को OSD बनाया जा सकता है।  लेफ्ट पार्टियों, CPIM और CPI ने भी इस अपॉइंटमेंट पर VCK जैसी ही प्रतिक्रिया दी. स्टेट सेक्रेटरी पी शनमुगम ने कहा कि साइंटिफिक सोच और समझदारी भरी सोच को बढ़ावा देना सरकार की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च पर किसी ज्योतिषी को सरकारी पद पर अपॉइंट करने से सिर्फ़ अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा. CPI के स्टेट सेक्रेटरी एम वीरपांडियन ने भी ऐसी ही चिंता जताई. इस रिएक्शन ने पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की ज्योतिषियों पर कथित निर्भरता से भी तुलना शुरू हो गई है।  वहीं AIADMK के सांसद आईएस ईनाबदुरई ने कहा कि दूसरों का भविष्य देखने वाले पंडित रिकी राधा अपना ही भविष्य नहीं देख पाए. विजय सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।  सीएम विजय पर उनके ज्योतिषी का कितना प्रभाव था? पंडित रिकी राधा लंबे समय से विजय के पर्सनल ज्योतिषी और आध्यात्मिक सलाहकार रहे हैं. शपथ ग्रहण की तारीख/समय जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं में भी उनकी सलाह ली गई मानी जाती है. पंडित रिकी राधा  TVK के प्रवक्ता के रूप में भी सक्रिय थे।  पंडित रिकी राधा ने चुनाव से लगभग एक साल पहले ही थलपति विजय और उनकी पार्टी TVK की "सुनामी जीत" की भविष्यवाणी कर दी थी. यह सटीक साबित हुई।  तमिल भूमि के अधिकारों और सभी लोगों के कल्याण के लिए काम करेगी टीवीके सरकार: आधव अर्जुन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष विजय बुधवार (13 मई 2026) को राज्य विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। विश्वास मत से पहले TVK और AIADMK के कई विधायक तमिलनाडु सचिवालय स्थित विधानसभा परिसर पहुंचे। विजय की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। इसके बाद उन्हें कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML का समर्थन मिला जिससे गठबंधन की ताकत 121 सीटों तक पहुंच गई और उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। इस बीच AIADMK में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। खबरें हैं कि पार्टी के भीतर दो गुट बन गए हैं- एक सीवी षणमुगम के नेतृत्व में और दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री तथा पार्टी महासचिव एडापड्डी के पलानास्वामी के समर्थन में। षणमुगम ने आरोप लगाया था कि पार्टी के अधिकांश सदस्य DMK के समर्थन से सरकार बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ थे। राजनीतिक हलचल को और बढ़ाते हुए विजय ने मंगलवार को शण्मुगम के कार्यालय का दौरा भी किया जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं। AIADMK के एक विधायक ने समाचार एजेंसियों से कहा कि पार्टी से जुड़े सभी फैसले पलानास्वामी ही लेंगे और दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के साथ अब भी बहुमत मौजूद है।

किसानों से लेकर रेल यात्रियों तक खुशखबरी: केंद्र सरकार ने लिए कई बड़े फैसले

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आज बुनियादी ढांचे और कृषि क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी फैसलों को मंजूरी दी गई है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सरकार ने अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा के बीच देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को हरी झंडी दे दी है. करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल सफर की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि धोलेरा को भविष्य के सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।  धोलेरा रेल प्रोजेक्ट से कैसे बदलेगी गुजरात की तस्वीर? यह 134 किलोमीटर लंबी रेल लाइन गुजरात के अहमदाबाद जिले के 284 गांवों को सीधे जोड़ेगी. इससे करीब 5 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. यह प्रोजेक्ट आने वाले धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल मैरीटाइम कॉम्प्लेक्स को भी जोड़ेगा. सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार होगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि हर साल 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत भी होगी, जो पर्यावरण के लिए 10 लाख पेड़ लगाने जैसा होगा।  किसानों के लिए MSP में कितना हुआ इजाफा? सरकार ने साल 2026-27 के लिए खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों पर आधारित यह MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक रखी गई है।  कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के MSP को मंजूरी दी. सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा. 824.41 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।  कोयला गैसीकरण और नागपुर एयरपोर्ट पर क्या है प्लान? कैबिनेट ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली योजना को मंजूरी दी है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास 200 साल का कोयला भंडार है, जिसका उपयोग अब गैस बनाने में होगा. इसमें 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा. इसके अलावा, नागपुर एयरपोर्ट को अब पीपीपी मॉडल के तहत इंटरनेशनल स्तर पर विकसित किया जाएगा, जिससे विदर्भ क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। 

केंद्र ने बढ़ाए MSP रेट: धान समेत खरीफ फसलों के नए दाम जारी, किसानों को राहत

नई दिल्ली  केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) हेतु 2.60 लाख करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद किसानों को मजबूत आय सहायता देना है। MSP को कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया है। मंत्रिमंडल ने 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी। सरकार ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए खरीफ फसलों का MSP बढ़ा दिया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।  धान समेत अन्य फसलों की नई MSP सरकार ने बुधवार को 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया।पिछले वर्ष की तुलना में MSP में सबसे अधिक वृद्धि की सिफारिश सूरजमुखी के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए की गई है, जिसके बाद कपास (₹557 प्रति क्विंटल), नाइजर बीज (₹515 प्रति क्विंटल) और तिल (₹500 प्रति क्विंटल) का स्थान है। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, इस फैसले से किसानों को लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने की उम्मीद है, जबकि सालाना खरीद 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। सरकार ने यह भी बताया कि MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज्यादा है, जो 2019 में शुरू की गई उस नीति को जारी रखता है जिसका मकसद किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार इस संबंध में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में एक फैसला लिया गया। 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीज़न (सितंबर-अक्टूबर) के लिए, सामान्य और 'A-ग्रेड' किस्मों का समर्थन मूल्य 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर क्रमशः 2,441 रुपये और 2,461 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 37500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद भारत की आयातित प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही घरेलू कोयला भंडारों का ज्यादा साफ-सुथरे तरीके से इस्तेमाल करना है। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है, और यह सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देगी।

TCS विवाद के बाद प्रशासन सख्त, AIMIM नेता मतीन पटेल की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई

 नासिक महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस कर्मचारी से जुड़े कथित सेक्सुअल हैरेसमेंट और धर्मांतरण मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक रंग ले लिया है. मुख्य आरोपी निदा खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसकी मदद करने वालों पर कार्रवाई तेज की है. इसी कड़ी में AIMIM के पार्षद अब्दुल मतीन पटेल का नाम सामने आने के बाद नगर निगम ने उनके घर और ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है।  मतीन पटेल पर दर्ज हुआ था केस पुलिस के मुताबिक, मतीन पटेल पर आरोप है कि उन्होंने आरोपी निदा खान को नारेगाव स्थित कौसर पार्क इलाके में अपने घर में शरण दी थी. इस मामले में नासिक पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 249 के तहत केस दर्ज किया है. निदा खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मतीन पटेल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।  इधर, नगर निगम ने दावा किया कि पार्षद के घर और कार्यालय का निर्माण नियमों के विपरीत किया गया है. तीन दिन पहले नोटिस जारी किया गया था और तय समय सीमा पूरी होने के बाद बुधवार सुबह निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई करने पहुंची।  महिलाओं ने किया 'बुल्डोजर टीम' का स्वागत हालांकि, कार्रवाई के दौरान वहां एक अलग ही नजारा देखने को मिला. इलाके की कुछ महिलाएं निगम अधिकारियों के सामने फूल लेकर पहुंचीं और उनका स्वागत किया. महिलाओं ने अधिकारियों को संविधान की प्रतियां भी भेंट कीं. उनका कहना था कि कानून का पालन होना चाहिए, लेकिन कार्रवाई संविधान और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर की जानी चाहिए।  महिलाओं के इस अनोखे विरोध ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा. बुलडोजर कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ भी जमा हो गई, जिसके चलते प्रशासन पूरी सतर्कता बरतता नजर आया।  नगर निगम कर्मचारियों को महिलाओं ने दिया संविधान इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. AIMIM नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है और कानून से ऊपर कोई नहीं है।  फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कई पहलुओं से कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपी निदा खान से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है. वहीं, शहर में बुलडोजर एक्शन और महिलाओं द्वारा संविधान की कॉपी देकर किए गए विरोध की चर्चा लगातार बनी हुई है। 

पेंशन बढ़ोतरी के साथ ताबड़तोड़ एक्शन: CM सुवेंदु ने अवैध फैक्ट्रियों का ‘हुक्का-पानी’ किया बंद

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पद संभालने के बाद से ताबड़तोड़ फैसले लेते दिख रहे हैं. सबसे पहले उन्होंने हावड़ा के तिलजला, टॉपसिया इलाके में हादसे के बाद यहां संचालित तमाम अवैध फैक्ट्रियों का बिजली और पानी कनेक्शन काटने के आदेश दिए. वहीं विधवा भत्ता, बुढ़ापा भत्ता और विकलांगता भत्ता 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने का आदेश दिया है. नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा की पहली कार्यवाही के दौरान लंच में चावल, मछली, दाल, तले हुए आलू और सब्जियां शामिल थीं।  तिलजला-टॉपसिया की अवैध फैक्ट्रियों पर सख्ती मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तिलजला, टॉपसिया और आसपास के इलाकों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. मंगलवार को तपसिया स्थित एक बहुमंजिला फैक्ट्री में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन फैक्ट्रियों के पास वैध अनुमति, बिल्डिंग प्लान या फायर एनओसी नहीं है, उनकी बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की जान जोखिम में डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. फैक्ट्री मालिक सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और फोरेंसिक टीम ने मौके का निरीक्षण किया है।  चार विभागों की कमेटी गठित घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने चार विभागों की समन्वय समिति बनाई है. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. बिजली विभाग को CESC के साथ मिलकर उन भवनों का ऑडिट करने को कहा गया है जिनके निर्माण की मंजूरी नहीं है. सरकार पहले ऐसे भवन मालिकों को नोटिस देकर सुधार का अवसर देगी. इसके बाद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।  विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन हुआ डबल नई भाजपा सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए विधवा भत्ता, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांग भत्ता 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया है. इस निर्णय से लाखों लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा. सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जनहित से जुड़े कई और बड़े फैसलों की घोषणा की जा सकती है।  विधानसभा के मेन्यू में मछली नई विधानसभा की पहली कार्यवाही के दौरान विधायकों के लिए दोपहर के भोजन में चावल, मछली, दाल, आलू भुजिया और सब्जियां परोसी गईं. इस बंगाली मेन्यू ने भाजपा सरकार की ओर से एक स्पष्ट संदेश दिया कि वह बंगाल की संस्कृति और खानपान परंपरा का सम्मान करती है।  चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा सत्ता में आने पर मछली और मांस खाने पर रोक लगा सकती है. विधानसभा के इस मेन्यू ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।  राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश साथ-साथ शुभेंदु अधिकारी के शुरुआती फैसलों से स्पष्ट है कि उनकी सरकार कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ जनकल्याण और बंगाली अस्मिता पर भी बराबर जोर दे रही है. अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई, गरीबों के लिए राहत और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से संदेश इन सबने यह संकेत दिया है कि पश्चिम बंगाल की नई सरकार तेज, निर्णायक और प्रतीकात्मक राजनीति का संतुलित मिश्रण पेश कर रही है। 

अहमदाबाद-सूरत समेत कई जिलों में बदले कलेक्टर, गुजरात सरकार ने 72 IAS अफसरों का किया ट्रांसफर

अहमदाबाद  गुजरात सरकार ने मंगलवार देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 72 अधिकारियों का तबादला कर दिया है। 13 मई की रात सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्य के कई जिलों के कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और विभिन्न सरकारी विभागों के टॉप पदों पर बैठे लोग इस फेरबदल से प्रभावित हुए हैं। इसके तहत अहमदाबाद, सूरत, भरूच, नवसारी, मोरबी, दाहोद और जूनागढ़ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की गई है। अहमदाबाद के कलेक्टर सुजीत कुमार को अब राज्य कर (State Tax) का विशेष आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि उनकी जगह भव्य वर्मा को अहमदाबाद का नया कलेक्टर बनाया गया है। इसी तरह, सूरत के कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी को गांधीनगर में नागरिक आपूर्ति निदेशक के पद पर भेजा गया है और उनकी जगह तेजस दिलीपभाई परमार सूरत के नए कलेक्टर होंगे। कच्छ-भुज के कलेक्टर आनंद बाबूलाल पटेल को गांधीनगर में स्कूलों का आयुक्त नियुक्त किया गया है, साथ ही उन्हें पीएम-पोषण योजना और जीसीईआरटी (GCERT) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। गांधीनगर में विकास आयुक्त बनाए गए डीएन मोदी सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीएन मोदी को जामनगर नगर निगम के नगर आयुक्त पद से हटाकर गांधीनगर में विकास आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस पद पर वह केएल बचानी के अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी को खत्म करेंगे। वहीं, आनंद बाबूलाल पटेल को कच्छ-भुज के कलेक्टर पद से हटाकर गांधीनगर में स्कूल आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें पीएम-पोषण योजना (मिड-डे मील) आयुक्त और गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (GCERT) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इन पदों का अतिरिक्त प्रभार अब तक रचित राज के पास था। कई अन्य बड़े अधिकारियों का भी हुआ तबादला अहमदाबाद के कलेक्टर सुजीत कुमार का तबादला कर उन्हें अहमदाबाद में राज्य कर विभाग का विशेष आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस पद का अतिरिक्त प्रभार पी. भारती संभाल रही थीं। अजय प्रकाश को गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (GEDA) के निदेशक पद से हटाकर ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल विभाग में भेजा गया है। उन्हें वडोदरा स्थित गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया जाएगा। सूरत के कलेक्टर डॉ. सौरभ पारधी  को गांधीनगर में नागरिक आपूर्ति निदेशक और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में पदेन अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। वह इस पद पर मयूर मेहता की जगह लेंगे। बड़े पैमाने पर हुआ था IPS अफसरों का तबादला बता दें कि इसके पहले मार्च की शुरुआत में गुजरात में बड़े पैमाने पर IPS अफसरों का तबादला हुआ था। उस समय राज्य के IB चीफ के साथ-साथ कई रेंजेस के चीफ भी बदले गए थे। वहीं, लंबे समय से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे कई अधिकारियों को पोस्टिंग अलॉट की गई थी। नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में भी बदलाव नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अजय प्रकाश को गुजरात ऊर्जा ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है, जबकि जामनगर के नगर आयुक्त डी एनमोदी अब गांधीनगर में विकास आयुक्त की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा, अहमदाबाद नगर निगम (AMC) में भी नए उप-आयुक्तों की नियुक्ति की गई है और मिरांत जतिन पारिख को अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है। इन अधिकारियों के भी तबादले भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2013 बैच के अधिकारी और वर्तमान में दाहोद के कलेक्टर के रूप में कार्यरत योगेश बबनराव निर्गुडे का ट्रांसफर कर उन्हें एडिशनल डेवलपमेंट कमिश्नर गांधीनगर के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी इस नियुक्ति से स्तुति चरण, IAS, इस पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगी। इसी तरह अमित प्रकाश यादव, जो 2013 बैच के अधिकारी हैं और खेड़ा-नडियाद के कलेक्टर के पद पर तैनात थे, उनका ट्रांसफर कर उन्हें गांधीनगर में एडिशनल कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज नियुक्त किया गया है।

CBSE बोर्ड का 12वीं रिजल्ट जारी: इस बार घटा पास प्रतिशत, SMS से मिनटों में करें स्कोर चेक

नई दिल्ली CBSE यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। कुल 85.20% स्‍टूडेंट्स पास हुए हैं। यह पिछले साल से 3% कम है। कुल 94,028 छात्रों ने 90% से ज्‍यादा नंबर स्‍कोर किए हैं। वहीं, 17,113 बच्‍चों ने 95% से ज्‍यादा नंबर स्‍कोर किए हैं। इस बार कॉपियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के तहत चेक की गई हैं। कैंडिडेट्स cbse.gov.in पर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। अगर स्टूडेट्स के मोबाइल में इंटरनेट न हो या सर्वर डाउन हो तो सब्जेक्ट वाइज अंक जानने के लिए एसएमएस भेजकर रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, ऑनलाइन स्कोर कार्ड मान्य नहीं होगा। छात्रों के लिए अपने स्कूल से ओरिजिनल मार्कशीट लेना जरूरी है। मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं होगी CBSE बोर्ड मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं करता है। इसके अलावा रिजल्‍ट में कोई टॉपर भी घोषित नहीं किया जाता है। बोर्ड सभी स्‍कूलों और शैक्षणिक संस्‍थानों को ये निर्देश देता है कि किसी भी बच्‍चे को स्‍कूल या जिले का टॉपर घोषित न करें। लड़कियों का रिजल्‍ट लड़कों से 6.73% बेहतर लड़कियों का रिजल्‍ट 88.86% रहा है, जबकि लड़कों का रिजल्‍ट 82.23% रहा है। लड़कियों का रिजल्‍ट लड़कों से 6.73% बेहतर रहा है। ट्रांसजेंडर स्‍टूडेंट्स का रिजल्‍ट 100% है। त्रिवेंद्रम का रिजल्‍ट फिर बेस्‍ट, प्रयागराज फिर सबसे पीछे त्रिवेंद्रम रीजन में 95.62% स्टूडेंट पास हुए। जो देशभर में सबसे ज्यादा है। वहीं, प्रयागराज रीजन 72.43% रिजल्‍ट के साथ सबसे नीचे रहा है। पिछले साल भी त्रिवेंद्रम का रिजल्‍ट सबसे ज्‍यादा और प्रयागराज का सबसे कम रहा था। अपार आईडी न होने पर क्या करें यदि किसी के पास APAAR ID नहीं है, तो उन्हें अपना अकाउंट बनाना होगा। हालांकि, जिन छात्रों की APAAR ID CBSE से लिंक है, उन्हें रिजल्ट जारी होने के बाद डिजिलॉकर के 'Issued Documents' सेक्शन में अपनी मार्कशीट मिल जाएगी। कितनों की आई कंपार्टमेंट सीबीएसई 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित हो गए हैं. इस साल  1,63,800 बच्चों की कंपार्टमेंट आई है जिसमे प्रयागराज सबसे ऊपर है.  प्रयागराज — 16.76% दिल्ली ईस्ट — 12.57% बेंगलुरु — 12.14% पंचकूला — 12.30% लुधियाना — 11.42% रायपुर — 10.35% रांची — 9.67% लखनऊ — 9.30% चेन्नई — 9.23% पटना — 9.13% पुणे — 8.66% अजमेर — 8.44% नोएडा — 8.06% गुवाहाटी — 7.35% दिल्ली वेस्ट — 5.65% विजयवाड़ा — 5.44% अहमदाबाद — 5.41% गुरुग्राम — 4.52% देहरादून — 4.30% तिरुवनंतपुरम — 3.38%  टॉप 0.1% विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट मिलेगा सीबीएसई ने इस बार भी टॉपर्स की लिस्ट नहीं जारी करने का फैसला लिया है और न ही मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी. जिन छात्रों ने अपने विषयों में सबसे अधिक अंक हासिल किए हैं, उनमें से टॉप 0.1% विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा.  किस स्कूल का पास प्रतिशत है सबसे ज्यादा  केंद्रीय विद्यालय– 98.55% जवाहर नवोदय विद्यालय – 98.47% सरकारी विद्यालय – 89.55% सरकारी सहायता प्राप्त – 86.07% एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल – 85.55% स्वतंत्र विद्यालय – 84.22% शामिल हुए थे इतने लोग  सीबीएसई 12वीं क्लास में 17,80,365 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 17,68,968 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 15,07,109 छात्र पास हो गए हैं. इस साल पास प्रतिशत 85.20% रहा है. यह पिछले साल के पास प्रतिशत से कम है. पिछले साल पास प्रतिशत 88.39% था.  यहां देखें CBSE 12वीं का रिजल्‍ट     cbse.gov.in     results.nic.in     results.digilocker.gov.in     umang.gov.in     DigiLocker, UMANG ऐप ऐसे चेक करें SMS से रिजल्ट     अपने फोन में मैसेज बॉक्स ओपन करें।     इसमें सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 (रोल नंबर) टाइप करें और 7738299899 पर भेज दें।     कुछ ही सेकंड में 12वीं का रिजल्ट मोबाइल के इनबॉक्स में दिखाई देगा। ऐसे चेक करें डिजिलॉकर से रिजल्ट     डिजिलॉकर ऐप डाउनलोड करें या इसकी वेबसाइट पर जाएं।     अपने मोबाइल नंबर या आधार से साइन अप/लॉगिन करें।     “Education” सेक्शन में जाएं और CBSE को चुनें।     “Class XII Marksheet 2026” क्लिक करें।     अपना रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करें।     “Get Document” या “Fetch” बटन पर क्लिक करें।     डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी। इसे डाउनलोड या सेव करके रखें। हर विषय में 33% अंक लाना जरूरी सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को कुल अंको के साथ हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना होगा। इससे कम अंक आने पर उन्हें उस विषय में फेल माना जाएगा। जो छात्र 1 सब्जेक्ट में फेल होंगे, उन्हें कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होकर साल बचाने का मौका दिया जाएगा। लेकिन 2 या उससे अधिक सब्जेक्ट में फेल होने वाले छात्रों को दोबारा 12वीं क्लास में बैठना होगा। सीबीएसई 12वीं 2025 में 88.39% अंक प्राप्त किए थे। जिसमें साल 2024 की तुलना में 0.41% की बढ़ोतरी हुई थी। CBSE के 18 लाख से ज्यादा छात्रों को इंतजार  सीबीएसई 12वीं के 18.5 लाख से ज्यादा छात्रों को रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है. इस साल बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत 17 फरवरी से हुई थी, जो 10 अप्रैल तक चलीं. बोर्ड ने बताया कि पहली बार 12वीं की कॉपियां डिजिटल तरीके से चेक हो रही हैं. ऐसे में छात्रों को उम्मीद थी कि रिजल्ट जल्दी जारी हो सकता है, हालांकि ऐसा नहीं हुआ।  CBSE 12वीं में कुल इतने छात्रों ने हासिल किया 90-95% स्कोर सीबीएसई ने आज रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल लड़कियों ने फिर बाजी मारी है. आपको बता दें कि इस साल  95 प्रतिशत से ज्यादा नंबर हासिल करने वाले छात्रों की संख्या 17113 है. वहीं 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने वाले कुल छात्र 94028 हैं।     फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका एक या अधिक विषयों में पास नहीं होने वाले छात्रों को इस बार भी कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा। इससे उनका साल खराब नहीं होगा और वे अपने अंक सुधार सकेंगे। बोर्ड जल्द ही कंपार्टमेंट परीक्षा का शेड्यूल जारी करेगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।