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7th Pay Commission: DA का इंतजार क्यों बढ़ा, अप्रैल के 10 दिन भी हो गए, किस वजह से फंसा मामला?

नई दिल्ली अप्रैल 2026 आधा बीतने को है लेकिन अभी तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ है. आमतौर पर हर साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में यह फैसला सामने आ जाता है, लेकिन इस बार देरी ने कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है. खासकर इसलिए क्योंकि 31 दिसंबर 2025 के बाद 7वां वेतन आयोग खत्म हो चुका है और 8वां वेतन आयोग अभी लागू नहीं हुआ है।  पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो 2025 में डीए बढ़ोतरी का ऐलान 28 मार्च को हुआ था और आदेश 2 अप्रैल को जारी हुआ था. वहीं 2024 में भी 3 अप्रैल तक आदेश जारी हो गया था. यहां तक कि कोविड के समय 2020 में भी अप्रैल में औपचारिक आदेश जारी किया गया था. ऐसे में 2026 में यह देरी असामान्य मानी जा रही है।  क्या इस बार डीए बढ़ोतरी नहीं होगी विशेषज्ञों का कहना है कि डीए बढ़ोतरी रुकने की संभावना बेहद कम है. डीए का निर्धारण महंगाई के आंकड़ों के आधार पर होता है और यह प्रक्रिया 7वें वेतन आयोग की अवधि खत्म होने के बाद भी जारी रहती है. यानी कर्मचारियों को उनका हक मिलना तय माना जा रहा है।  कितनी बढ़ सकती है डीए एआईसीपीआई इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।  देरी की वजह क्या है एक्सपर्ट्स के मुताबिक, देरी की सबसे बड़ी वजह प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है. फाइल अप्रूवल, आंतरिक मंजूरी और फैसलों की टाइमिंग इस बार थोड़ा आगे खिसक गई है. बैंक बाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का कहना है कि यह देरी इंटरनल प्रोसेस के कारण हो सकती है. वहीं, आईएसएफ की सुचिता दत्ता का कहना है कि संभवत: सरकार डीए बढ़ाने से पहले मंहगाई के आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा कर रही है. कर्मा मैनेजमेंट के प्रतीक वैद्या का कहना है कि इस देरी की तुलना कोविड-19 के समय से करना ठीक नहीं है।  8वें वेतन आयोग से जुड़ी टाइमिंग सरकार फिलहाल अगले वेतन आयोग की दिशा में काम कर रही है. माना जा रहा है कि डीए बढ़ोतरी के ऐलान को इस बड़े बदलाव के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि एक साथ व्यापक नीति का संकेत दिया जा सके।  सरकार का फिस्कल बैलेंस भी अहम महंगाई, सरकारी खर्च और बजट संतुलन को ध्यान में रखते हुए भी सरकार फैसला ले रही है. डीए बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ता है, इसलिए इसे सोच-समझकर तय किया जाता है।  कब तक आ सकता है ऐलान रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल के दूसरे हफ्ते से लेकर मिड अप्रैल के बीच कभी भी डीए बढ़ोतरी का ऐलान हो सकता है. यानी कर्मचारियों को ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।  देरी से होगा क्या नुकसान सबसे अहम बात यह है कि देरी से कर्मचारियों को कोई नुकसान नहीं होगा. डीए 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा और बीच के समय का पैसा एरियर के रूप में दिया जाएगा. यानी घोषणा चाहे देर से हो, लेकिन फायदा पूरा मिलेगा। 

भारत का सूरज बनने की राह, यूरेनियम के लिए अब नहीं होगी विदेशों पर निर्भरता; अमेरिका-चीन की चिंता बढ़ी

बेंगलुरु  सौ बात की एक बात ये कि ईरान युद्ध और चुनाव की ख़बरों में ज़्यादातर लोगों का ऐसी ख़बर पर ध्यान नहीं गया जो शायद देश की कई सालों की सबसे बड़ी ख़बर है. कल्पक्कम रिएक्टर में क्या हुआ? बहुत आसान हिंदी में समझाते हैं. भारत का अपना परमाणु बिजली बनाने वाला फ़ास्ट ब्रीडर रीऐक्टर क्रिटिकल हो गया. पब्लिक को ये साइंस का इतना जटिल मामला लगता है कि उससे हुआ क्या है वो पता ही नहीं चलता. तो ज़्यादा कॉम्प्लेक्स चीज़ों में ना भी जाएं तो मोटे तौर पर ख़बर ये हैं कि ये समझ लो कि एक तरह से भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसा रास्ता खोल दिया कि आगे चल कर हम सालों-साल तक अपनी बिजली बना सकते हैं जितनी भी देश को चाहिए. ये ऐसा कमाल है जो दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां नहीं कर पा रही हैं।  तो ज़्यादा साइंस में ना जाते हुए इसकी बेसिक चीज़ को समझें तो ये समझिये कि परमाणु रिएक्टर को समझ लीजिए कि एक तरह की परमाणु भट्टी है जिसमें बिजली बनाई जाती है. भट्टी वैसी नहीं जैसी दूसरी भट्टियां होती हैं, सिर्फ़ समझने के लिए उसको हम भट्टी कह रहे हैं. ये तो पब्लिक अब काफ़ी समझ ही गई है कि परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया भर में इतना कंट्रोल इसलिए रहता है क्योंकि परमाणु तकनीक से बेतहाशा ऊर्जा बनती है. उससे परमाणु बम भी बना सकते हैं और बिजली भी बना सकते हैं. ईरान यही तो कह रहा है कि वो तो परमाणु कार्यक्रम चलाएगा क्योंकि उसको उससे बिजली बनानी है. अमेरिका और इज़रायल कह रहे हैं कि वो परमाणु कार्यक्रम से बिजली बनाने की आड़ में असल में परमाणु बम बनाना चाहता है. तो वो तो ख़ैर वहां की बात रही ।  हम बात कर रहे हैं अपने परमाणु कार्यक्रम की. तो परमाणु रिएक्टर में क्या होता है कि ईंधन डालते हैं और ईंधन से बिजली बनती है. ईंधन क्या होता है परमाणु रिएक्टर में? ईंधन होता है यूरेनियम नाम का तत्व. यूरेनियम डालते हैं तो अंदर बिजली बनती है और प्लूटोनियम नाम का कचरा निकलता है. दिक़्क़त क्या है कि भारत में यूरेनियम है नहीं. बहुत थोड़ा है. तो यूरेनियम दूसरे देशों से लेना पड़ता है. और वो कोई आसान काम नहीं क्योंकि परमाणु कार्यक्रमों पर कई कंट्रोल वैसे ही लगे हुए हैं. भारत ने अमेरिका के साथ नयूक्लियर डील भी की थी कि उससे कुछ आसानी हो यूरेनियम मिलने में. क्योंकि देश को अगर विकसित बनाना है तो जो सबसे ज़रूरी चीज़ चाहिए वो है बिजली. हम पानी से बिजली बना रहे हैं, कोयले से बनाते हैं, अब सोलर बिजली भी बन रही है, हवा से भी बनती है पवनचक्कियों से ।  सारा खेल यूरेनियम का लेकिन परमाणु बिजली भी चाहिए. उसमें यूरेनियम का चक्कर है. यूरेनियम हमारे पास है नहीं. लेकिन भारत के एक और रेडियोऐक्टिव तत्व है जिसको परमाणु रिएक्टर में इस्तेमाल कर सकते हैं, वो तत्व है थोरियम. लेकिन थोरियम से चलने वाले रिएक्टर पर दुनिया में ज़्यादा रिसर्च ही नहीं हो पाई. मतलब तकनीक परफ़ेक्ट नहीं हो पाई है थोरियम से बिजली बनाने की. तो अभी की स्थिति ये हैं कि यूरेनियम से बिजली बनती है और कचरे में प्लूटोनियम निकलता है. प्लूटोनियम भी रेडियोऐक्टिव कचरा होता है इसलिए उसको बहुत ही एहतियात से नष्ट करना पड़ता है. लेकिन एक तकनीक ये होती है कि प्लूटोनियम से ही बिजली बना दें तो? यानी यूरेनियम से जो कचरा निकला फिर उस कचरे से ही बिजली बना दें. यानी कचरे को ही ईंधन बना दें. और फिर जो बिजली बने और फिर उससे जो कचरा निकले उससे फिर बिजली बना दे. फिर जो कचरा निकले उस कचरे से बिजली बना दें. फिर कचरा निकले तो उससे बिजली बना दें. मतलब एक चेन ही बन जाए. जब तक कचरा पूरा इस्तेमाल नहीं हो जाता तब तक ईंधन डालना ही ना पड़े. थ्योरी में तो ये कर सकते हैं. लेकिन कई देश लगे हुए थे कोई उस तरह से कर नहीं पा रहा था. कुछ देश सफल हुए भी लेकिन भारत अपनी तकनीक से लगा हुआ था कि ये कर लें तो फिर तो थोड़े से ही ईंधन से काम चल जाएगा ।  कल्पक्कम भारत का सबसे आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर है. कल्पक्कम है तमिलनाडु में चेन्नई के पास. वहाँ भारत का सबसे आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर है, जिसका नाम है PFBR, प्रोटोटाइप फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर. ये 500 MW बिजली बनाने वाला रिएक्टर है. इसे भारतीय वैज्ञानिकों ने पूरी तरह खुद डिजाइन किया और बनाया है. 6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे ये रिएक्टर ‘क्रिटिकल’ हो गया. क्रिटिकल मतलब क्या? मतलब वही कमाल कर दिखाया वैज्ञानिकों ने जिसकी हम बात कर रहे थे. कि ईंधन के कचरे को ही ईंधन बनाने में सफल हो गए. क्रिटिकल होने का मतलब है कि अब न्यूक्लियर रिऐक्शन खुद-ब-खुद चलने लगा है. यानी अब रिएक्टर ऐसे ख़ुद-ब-ख़ुद बिजली बनाने की तरफ एक क़दम और करीब पहुंच गया है. अब समझिए ये क्यों इतना बड़ा काम है।  भारत का न्यूक्लियर कार्यक्रम तीन चरणों का भारत का न्यूक्लियर कार्यक्रम तीन चरणों का है. इसे डॉ. होमी भाभा ने बनाया था. पहले चरण में हमारे पुराने रिएक्टर यूरेनियम से बिजली बनाते हैं. इसमें कुछ प्लूटोनियम नाम का पदार्थ बन जाता है, जो कचरा है उनका. दूसरा चरण अब शुरू हो रहा है और ये कल्पक्कम वाला रिऐक्टर उसका हिस्सा है. ये रिऐक्टर उसी प्लूटोनियम वेस्ट को ईंधन की तरह इस्तेमाल करता है. इसलिए ऐसे रिऐक्टर को ‘ब्रीडर’ कहते हैं. क्योंकि ये बिजली भी बनाता है और बिजली बनाने वाला और ईंधन भी बनाता है. और सबसे बड़ी बात ये कि ये जो कचरे से ईंधन बनाता है वो जितना ईंधन डालो उससे ज़्यादा ईंधन बना कर देता है. और साथ में बिजली भी बनाता है. मतलब इसका परीक्षाण सफल तो हो गया अब जब इसको पूरी तैयार कर लिया जाएगा तो एक बार ईंधन डालो, फिर ये खुद अपना ईंधन बढ़ाता रहेगा. इससे देश का कुल ईंधन स्टॉक बढ़ता ही चला जाएगा. ये दूसरा चरण है. इसके बाद आएगा तीसरा चरण. भविष्य में।  भारत में थोरियम समुद्र के किनारे ढेर सारा पड़ा उसमें क्या है कि भारत में थोरियम नाम का पदार्थ समुद्र के किनारे ढेर सारा … Read more

अमेरिका की नई योजना: 50 साल पुराना फौजी भर्ती सिस्टम अब होगा बदलने

वाशिंगटन अमेरिका अपने फौजी भर्ती के सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव दशकों में पहली बार हो रहा है और इसे वियतनाम युद्ध के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।  अभी तक अमेरिका में 18 से 25 साल के हर लड़के को खुद जाकर एक सरकारी सूची में अपना नाम दर्ज कराना पड़ता था. इसे 'सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम' में रजिस्ट्रेशन कहते हैं. लेकिन अब सरकार इस पूरी प्रोसेस को बदलने जा रही है. नए नियम के तहत यह रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाएगी, यानी लड़के को खुद कुछ नहीं करना होगा, सरकार खुद उसका नाम दर्ज कर लेगी. यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो सकता है।  सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम क्या होता है और यह क्यों जरूरी है? सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम एक अमेरिकी सरकारी व्यवस्था है. इसका सीधा मतलब है एक ऐसी सूची जिसमें उन लड़कों के नाम होते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर फौज में बुलाया जा सकता है।  अमेरिका में अभी फौज में जाना जरूरी नहीं है, यानी कोई जबरदस्ती नहीं है. लेकिन अगर कभी देश पर बड़ा संकट आए और फौज को बहुत ज्यादा जवानों की जरूरत पड़े, तो सरकार इसी सूची से लोगों को बुला सकती है. इसे 'ड्राफ्ट' कहते हैं।  अमेरिका ने आखिरी बार ड्राफ्ट वियतनाम युद्ध के दौरान लागू किया था, जो करीब 50 साल पहले की बात है. उसके बाद से अमेरिका ने कभी किसी को जबरदस्ती फौज में नहीं बुलाया. लेकिन सूची बनाने का काम जारी रहा।  अभी का नियम यह है कि 18 साल का होने के 30 दिन के अंदर हर लड़के को खुद जाकर इस सूची में नाम दर्ज कराना होता है. अगर कोई ऐसा नहीं करता तो यह कानूनी जुर्म है. इसके लिए जुर्माना, जेल और सरकारी नौकरियों और सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ सकता है।  नया बदलाव क्या है और कैसे काम करेगा नए नियम के तहत अब यह रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी. सरकार खुद अपने पास मौजूद डेटा का इस्तेमाल करके योग्य लड़कों के नाम सूची में दर्ज कर लेगी।  यह बदलाव अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस ने 2026 के राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में मंजूरी दी है. इस कानून में कहा गया है कि सरकार के अलग-अलग विभागों के पास जो डेटा है, जैसे कि पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या दूसरे सरकारी रिकॉर्ड, उसे आपस में जोड़कर सीधे सेलेक्टिव सर्विस की सूची में नाम डाले जाएं।  कुछ अमेरिकी राज्यों में पहले से ही ऐसा होता है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते वक्त सेलेक्टिव सर्विस में रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाती है. लेकिन अब यह पूरे देश में एक जैसा होगा. सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम का कहना है कि यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो जाएगा।  यह बदलाव अभी क्यों हो रहा है? यह सवाल जरूरी है कि आखिर अमेरिका को अभी यह बदलाव क्यों करना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया में बढ़ता तनाव. इस वक्त पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में हालात बहुत गंभीर हैं. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चल रहा है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका पहले से ईरान पर हमले कर चुका है।  ऐसे माहौल में अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अगर कभी बड़े पैमाने पर फौज की जरूरत पड़े तो उसके पास एक पूरी और सटीक सूची हो।  पुराने सिस्टम में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि कई लड़के खुद रजिस्ट्रेशन नहीं कराते थे, चाहे लापरवाही से या जानबूझकर. इससे सूची अधूरी रहती थी. नए सिस्टम से यह समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी।  इसका मतलब क्या है, क्या अमेरिका फिर से जबरदस्ती फौज भर्ती करेगा यह साफ कर देना जरूरी है कि इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अभी किसी को जबरदस्ती फौज में भर्ती करेगा. अमेरिकी फौज अभी भी पूरी तरह स्वेच्छा पर आधारित है, यानी जो चाहे वो जाए. ड्राफ्ट यानी जबरदस्ती भर्ती तभी होती है जब कांग्रेस इसकी अनुमति दे और राष्ट्रपति इस पर दस्तखत करें. अभी ऐसा कोई आदेश नहीं है।  यह बदलाव सिर्फ तैयारी है, एहतियात है. सरकार चाहती है कि अगर कभी ऐसी नौबत आए तो सूची पहले से तैयार हो और कोई नाम छूटे नहीं।  लेकिन इस बदलाव ने अमेरिका में एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है. कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह आने वाले किसी बड़े युद्ध की तैयारी का संकेत है. दुनिया में जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए यह बदलाव सिर्फ एक कागजी काम नहीं लग रहा। 

बंगाल में UCC और 45 दिन में सातवां वेतन, महिलाओं को 3000 रुपये की सहायता… बीजेपी का मेनिफेस्टो जारी किया अमित शाह ने

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र (घोषणापत्र) जारी कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी का संकल्प पत्र जारी किया. इस मौके पर अमित शाह ने कहा- ‘पिछला 15 साल बंगाल की जनता के लिए डराने वाले रहे. कम्युनिष्ट शाषण से मुक्ति के लिए बंगाल की जनता ने ममता दीदी को सरकार सौंपा था. पांच साल कम पड़े ऐसा कहकर दूसरा मेंडेट भी प्राप्त किया. इसके बाद अपने सिंडिकेट, गुंडे और घुसपैठिए की मदद से तीसरी बार भी बहुमत हासिल किया. मगर इन 15 साल में बंगाल की जनता ने जिन आशाओं के साथ सत्ता सौंपी थी वो भयभित है, निराश है जनता और मन से परिवर्तन चाहती है।  अमित शाह ने आगे कहा कि पिछले 15 साल में बीजेपी ने रचनात्मक विपक्ष के रूप में मान्यता हासिल की है. आज हम पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में काम कर रहे हैं. इन्हीं 10 सालों में पूरे देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकाभिमुक्त शासन कैसे हो सकता है इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित किया है. ना केवल देश की सारी समस्याओं का निराकरण करने में सफलता प्राप्त करना. इसके अलावा पूरी दुनिया में विकास की रेस में पिछड़े देश को सारे घाटे की भरपाई करते हुए फ्रंट रनर के रूप में स्थापित करने का काम नरेंद्र मोदी ने किया है।  शाह ने आगे कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक फैले देश में हर तबके, हर वर्ग, हर जाति के लोगों की सभी आकांक्षाओं को संयोज कर, एक मजबूत शिक्षित और विकसित भारत का रूप देश की जनता के सामने रखा है. इसके लिए हमने 12 साल में अत्यंत प्रयास किया है. पिछले दिनों हमने बंगाल की जनता के सामने चार्चशीट रखी थी, जो इस बात की परिचायक थी कि ममता बनर्जी की सरकार को लेकर पूरे बंगाल में घोर निराशा व्याप्त है. वहीं बीजेपी का संकल्प पत्र भरोसे की शपथ है. हमारा संकल्प पत्र बंगाल का विकसित बनाने का रोडमैप है. बंगाली नये वर्ष के दिन इस संकल्प के हमारी यात्रा प्रचार के जरिए शुरू होगी और गुरुदेव की जन्म जयंती के आसपास ही भय के कोहरे से बाहर आकर भरोसे का शासन बंगाल में प्रस्थापित करेगी. हमें पूरा विश्वास है कि बंगाल की जनता हमें पांच साल सेवा करने का मौका देगी।  बीजेपी के संकल्प पत्र की जरूरी घोषणाएं- :     हमारी सरकार घुसपैठ के प्रति जीरो टॉलरेंस के साथ आगे बढ़ेगी. मैं बंगाल की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि एक बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाइए हम डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट पॉलिसी के तहत चुन-चुनकर एक-एक घुसपैठिए को बंगाल के बाहर निकालने का काम करेंगे.     सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशन भागियों के लिए डीए सुनिश्चित किया जाएगा. 45 दिन के अंदर 7वां वेतन आयोग लागू किया जाएगा.     मध्यम वर्ग, लोअर मिडिल क्लास और गरीब में महिलाओं की हालत बहुत दयनीय है. बीजेपी की सरकार बनी तो हर माता-बहन के बैंक खाते में हर महीने एक से पांच तारीख तक 3 हजार रुपये ट्रांसफर करेगी.     नरेंद्र मोदी ढेर सारी योजनाएं जिसमें आयुष्मान भारत समेत तमाम योजनाओं को बंगाल में लागू करेंगे.     महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए मुफ्त एनबीटी टीकाकरण, कैंसर की स्क्रिनिंग, हर प्रसूता को इंट्यूशनल डिलिवरी का फायदा हम सुनिश्चत करेंगे.     हम छह माह के अंदर पश्चिम बंगाल के अंदर UCC कॉमन सिविल कोड लागू करेंगे. हम बंगाल में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून लागू करेंगे.     हम सुनिश्चित करेंगे कि बंगाल सीमा के माध्यम से भारत के बाहर एक भी गौर तस्करी ना हो.     एक करोड़ स्वरोजागर और रोजगार पैदा करेंगे. इसके लिए इंडस्ट्री लगाएंगे, स्टॉर्टअप को बढ़ावा देंगे.     बेरोजगार युवाओं को 3 हजार रुपये मासिक सहायता दी जाएगी.     टीएमसी के 15 साल के भ्रष्टाचार को लेकर श्वेतपत्र जारी करेंगे. भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों में भेजेंगे.     जितनी भी राजनीतिक हिंसा हुई है, चाहे वो किसी भी दल के खिलाफ हुई हों, उसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में कमिशन बनाकर सारे केस को त्वरित गति से अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।      काननू और व्यवस्था के ऊपर एक श्वेतपत्र जारी करेंगे. इसके दो हिस्से होंगे. पहले पार्ट में पिछले 15 साल में किस प्रकार से कानून व्यवस्था को कैसे पाताल लोक तक गिराया गया. दूसरे पार्ट में कानून व्यवस्थ को सुनिश्चित करने का तरीका बताएंगे.     तीन श्वेतपत्र भ्रष्टाचार के खिलाफ, राजनीतिक हिंसा के खिलाफ और कानून और व्यवस्था को रीस्टोर करने के लिए तीनों श्वेतपत्र बंगाल की बहुत सारी समस्याओं का एक साथ समाधान करेंगे. ऐसा बीजेपी को भरोसा है।      महिला सुरक्षा के लिए बंगाल में ही पुलिस बटालियन, दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड और आत्म रक्षा प्रशिक्षण के लिए एक अलग से स्क्वाड बनाया जाएगा।      धान, आलू और आम की खेती के लिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल पाए इसके लिए एक योजना लेकर आएंगे. हर किसान का एक-एक दाना धान बंगाल सरकार 3100 रुपये की दर से खरीद लेगी, जिससे धान किसानों को सस्ते दरों पर अपनी फसल ना बेचनी पड़े.     बंगाल की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पहले सौ दिनों में एक रोडमैप लेकर आएंगे.     बंगाल को ब्लयू इकोनॉमी का प्रमुख निर्यातक केंद्र बनाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए एक योजना दी जाएगी.     पुराने चाय बागानों को पुर्नजीवन और दार्जलिंग टी ब्रांड को विश्व प्रसिद्ध बनाने के लिए हम एक कमिशन बनाएंगे. यह कमिशन चाय बागानों के श्रमिक, चाय के उचित मूल्य और विश्व के बाजार में चाय के निर्णात की भावनाओं को तलाशेगा. यह रिपोर्ट एक साल में सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि बाकी बचे चार साल में चाय बागानों को खुशहाल बनाया जा सके.     जूट उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार की योजनाओं को हम बंगाल में नीचे तक लागू करवाएंगे.     उत्तर बंगाल के अलग-अलग जिलों में एम्स, आईआईएम, आईआईटी और फैशन डिजाइनिंग के संस्थान खोले जाएंगे.  

आर्मी चीफ का बयान: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में नमाज के वक्त नहीं करते थे हमला, सबका मालिक एक

नई दिल्ली पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों के मासूम पर्यटकों पर किए गए हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर सीमा पार पल रहे आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूद कर दिए। 'ऑपरेसन सिंदूर' को लेकर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में कई ऐसी बातें बताई जिससे भारतीय सेना की बहादुरी के साथ ही उसकी इंसानियत भी नजर आती है। जनरल द्विवेदी ने कहा, 'जब भी हमें अपने टारगेट पर हमला होता था तो यह समय कुछ भी हो सकता था लेकिन इतना ध्यान जरूर रखा जाता था कि यह नमाज का वक्त ना हो। अगर आतंकी कैंप में भी लोग नमाज पढ़ रहे हों तो हमला ना किया जाए। क्योंकि सबका मालिक एक है।' आर्मी चीफ ने आगे कहा, भारतीय सेना को अगर पता चलता था कि नमाज हो रही है तो हमले का समय बदल दिया जाता था। उन्होंने कहा कि भले ही स्थिति युद्द वाली रही हो लेकिन भारतीय सेना ने संयम बरता और दुश्मनों की भी इबादत का सम्मान किया। बदल गया है युद्ध इससे पहले रण संवाद मंच को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर, विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की दिशा में भारत की प्रगति का सबसे शक्तिशाली साधन था। लेकिन हमें विभिन्न क्षेत्रों का एकीकरण और तालमेल का लक्ष्य प्राप्त करना होगा।’ सेना प्रमुख ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद गठित युद्ध सूचना संगठन और मनोवैज्ञानिक रक्षा प्रभाग के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ''हमारे प्रयासों का 15 प्रतिशत हिस्सा दुष्प्रचार अभियान से निपटने पर केंद्रित था।' हालांकि, उन्होंने चेताया कि प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, विशेष रूप से रणनीतिक, परिचालन और सामरिक स्तरों पर संचालन में समन्वय स्थापित करने और 'हाइब्रिड या ग्रे-ज़ोन' युद्ध के बढ़ते प्रचलन से निपटने में। उन्होंने कहा, 'ये आमतौर पर पारंपरिक सैन्य सीमा से नीचे होते हैं, जिनका उद्देश्य दुश्मन की कमजोरियों का फायदा उठाना होता है।' थलसेना प्रमुख ने कहा कि एमडीओ की उनकी कल्पना ऐसी नहीं है जिसमें सेना के छह अलग अलग क्षेत्र अलग-अलग समानांतर काम करें, बल्कि सभी ''बदलते हालात के हिसाब से लगातार आपसी तालमेल में हों, जहां परिस्थिति के अनुसार महत्व बदलता रहे और नेतृत्व भी बदलता रहे।'' उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौगोलिक सीमाओं या किसी एक सेना की प्रधानता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विभिन्न क्षेत्र, हितधारकों और संघर्ष के अलग-अलग स्तर के बीच लगातार होने वाले आपसी समन्वय से परिभाषित होता है। युद्धक्षेत्र में हो रहे बदलावों पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि एमडीओ के कारण युद्ध का स्वरूप ऐसा हो गया है, जहां अलग-अलग स्तर और दिशाओं में एक साथ ऑपरेशन चलते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कमांडरों को सामरिक से लेकर रणनीतिक स्तर तक, विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी विकसित करनी चाहिए। एकीकरण के परिचालन महत्व को रेखांकित करते हुए, जनरल द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बताया जनरल द्विवेदी ने कहा, ''यह जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) से मिली जानकारियों का मेल था जिसने थल सेना और वायु सेना की संयुक्त कार्रवाई को लक्ष्य निर्धारित करने में मदद की, वहीं नौसेना की तैनाती में बदलाव ने रणनीतिक आकलन को आकार दिया। किसी एक क्षेत्र ने इस अभियान का फैसला नहीं किया।''जनरल द्विवेदी ने एकीकृत युद्ध समूहों, रुद्र ब्रिगेड, ड्रोन इकाइयों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संरचनाओं और साइबर ऑपरेशन नोड्स के संचालन सहित कई संरचनात्मक सुधारों का भी जिक्र किया।

रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर, पुतिन का बड़ा ऐलान; शांति का दौर कितने दिन चलेगा?

मॉस्को  ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद अब दुनिया को एक और खुशखबरी मिली है. जी हां, अब रूस-यूक्रेन के बीच भी सीजफायर हो गया है. हालांकि, यह टेंपररी सीजफायर है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मानें तो रूस अब 2 दिनों तक यूक्रेन पर कोई अटैक नहीं करेगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर दो दिन के सीजफ़ायर का ऐलान किया. क्रेमलिन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यूक्रेन भी इसका पालन करेगा।  क्रेमलीन की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया. रूसी बयान में कहा गया, ‘ऑर्थोडॉक्स ईस्टर की आने वाली छुट्टी के सिलसिले में 11 अप्रैल को शाम 4 बजे से 12 अप्रैल को दिन खत्म होने तक सीजफायर का ऐलान किया जाता है. हम मानते हैं कि यूक्रेनी पक्ष भी रूसी संघ का उदाहरण अपनाएगा.’ यानी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे की युद्धविराम की घोषणा की है।  ईस्टर ईसाइयों के लिए एक बड़ा त्योहार है. यह रविवार को मनाया जाएगा. ऑर्थोडॉक्स चर्चों द्वारा अपनाए गए जूलियन कैलेंडर के अनुसार यूक्रेन और रूस में ईस्टर 12 अप्रैल को पड़ता है।  यूक्रेन ने सीजफायर पर क्या कहा वहीं, रूसी राष्ट्रपति के बयान पर जेलेंस्की का भी बयान आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के फैसले पर कहा कि कीव ने बार-बार ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है और उसी अनुसार कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन ने बार-बार कहा है कि हम समान कदम उठाने के लिए तैयार हैं. हमने इस साल ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था और हम उसी अनुसार कार्रवाई करेंगे. लोगों को एक ऐसा ईस्टर चाहिए जिसमें कोई खतरा न हो और शांति की ओर वास्तविक कदम बढ़ें. रूस के पास भी मौका है कि वह ईस्टर के बाद हमलों पर वापस न लौटे।  पुतिन का यह कदम क्यों अहम पुतिन का यह कदम जेलेंस्की के उस प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान एक-दूसरे की ऊर्जा संरचना पर हमले रोकने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया था, जो मॉस्को और कीव के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है, क्योंकि युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है।  कब से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से ही युद्ध जारी है. रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनों के सीजफायर का ऐलान तब हुआ है, जब इससे पहले ईरान और अमेरिका सीजफायर पर सहमत हुए हैं. बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 15 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया. ईरान और अमेरिका के बीच आज इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. तब से ही युद्ध जारी था। 

हाई कोर्ट का अहम आदेश: पहली बार उम्मीदवार के सामने होगी EVM की जांच

मुंबई  भारत में जब से चुनाव के लिए ईवीएम का इस्तेमाल शुरू हुआ है, पहली बार है जब इसकी चुनाव के बाद जांच होने जा रही है। जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन ने ईवीएम की जांच करने का आदेश दिया है। सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री आरिफ नसीम खान की उपस्थिति में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ईवीएम की जांच करेगा। दरअसल खान ने चांदीवली विधानसभा चुनाव के नतीजों को चुनौती दी है। विधानसभा चुनाव में खान शिवसेना विधायक दिलीप लांडे के खिलाफ चुनाव हार गए थे। 12 फरवरी को हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि ईवीएम की जांच होनी चाहिए। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने भी ईवीएम से छेड़छाड़ और वोट चोरी का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा है कि आवेदक के लिए जब भी ईवीएम की जांच की अनुमति का आदेश दिया जाता है, उसके दो महीने के अंदर ही चुनाव आयोग को मशीनों का निरीक्षण पूरा करवना होगा। चुनावी इतिहास में पहली बार कोर्ट ने कहा कि भारत में इस तरह से कभी उम्मीदवार और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में ईवीएम की जांच नहीं की गई है। मुंबई उपनगर जिले की डिप्टी रिटर्निंग ऑफिसर अर्चना कदम ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को यह 'डायग्नोस्टिक चेक' होगा। कांग्रेस पार्टी ने कहा था कि उसके उम्मीदवार अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम और वीवीपैट यूनिट्स की जांच की मांग करें। क्या है पूरा मामला और क्यों अहम है यह आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन ने इस मामले में सुनवाई करते हुए ईवीएम के निरीक्षण का आदेश दिया. यह आदेश 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में चांदीवली सीट पर इस्तेमाल हुई मशीनों के संदर्भ में दिया गया है. याचिकाकर्ता नसीम खान ने ईवीएम के साथ कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. हालांकि कोर्ट ने उनके भ्रष्ट चुनावी आचरण से जुड़े अन्य आरोपों को खारिज कर दिया।  इस फैसले के बाद राज्य चुनाव आयोग ने सभी संबंधित उम्मीदवारों को सूचित किया है कि ईवीएम की जांच दो दिन तक चलेगी. यह जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा की जाएगी, जो इन मशीनों का निर्माता है. जांच प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ता के विशेषज्ञ और चुनाव अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, इससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।  चुनाव नतीजे और विवाद की जड़ चांदीवली सीट पर हुए चुनाव में शिवसेना के दिलीप भाऊसाहेब लांडे को 1,24,641 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के नसीम खान को 1,04,016 वोट मिले. इस हार के बाद नसीम खान ने परिणाम को चुनौती दी और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।  क्या पहली बार किसी कोर्ट ने EVM जांच का आदेश दिया है? हा, यह भारतीय चुनावी इतिहास में पहली बार है जब किसी हाईकोर्ट ने ईवीएम की तकनीकी जांच की अनुमति दी है. इससे पहले ईवीएम को लेकर कई याचिकाएं दाखिल हुईं, लेकिन इस तरह की प्रत्यक्ष जांच का आदेश नहीं दिया गया था. यह फैसला न्यायपालिका की सक्रियता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।  जांच की प्रक्रिया कैसे होगी? ईवीएम की जांच 16 और 17 अप्रैल को निर्धारित की गई है. इसमें मशीनों की डायग्नोस्टिक जांच होगी, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के विशेषज्ञ करेंगे. इस दौरान याचिकाकर्ता के प्रतिनिधि और चुनाव अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।  इस फैसले का आगे क्या असर हो सकता है? इस आदेश के बाद भविष्य में अन्य चुनावी मामलों में भी ईवीएम जांच की मांग बढ़ सकती है. इससे चुनाव आयोग पर पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव आएगा और राजनीतिक दलों को भी अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने होंगे. यह फैसला चुनावी सुधारों की दिशा में एक नई बहस को जन्म दे सकता है।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था नसीम खान ने सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा था कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 5 फीसदी (कंट्रोल यूनिट, वीवीपैट और बैलेट यूनिट) के बर्न्ट मेमोरी, माइक्रोकंट्रोलर की जांच चुनाव परिणाम आने के बाद ईवीएम निर्माता कंपनियों और इंजीनियरों को करनी चाहिए। हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए खान ने कहा, यह एक बड़ा फैसला है। अब तक किसी कोर्ट ने ईवीएम की जांच का आदेश नहीं दिया। यह पहले आदेश है और हम इसका स्वागत करतेहैं। खान ने कहा कि कम से कम 20 ईवीएम की जांच होगी। बता दें कि चांदीवली सीट पर शिवसेना के दिलीप भाऊसाहेब लांडे को कुल 1,24,641 वोट मिले थे। मोहम्मद आरिश नसीम खान 104016 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन को 288 में से 230 सीटें मिली थीं। बीजेपी 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। वहीं शिवसेना (यूबीटी) को 20, एनसीपी (SP) को 10 और कांग्रेस को 16 सीटें हासिल हुई थीं।

ईरान का अमेरिका के लिए कड़ा संदेश, ब्लड मनी की मांग; इरादे किए साफ

तेहरान  पाकिस्तान में बातचीत से पहले ईरान ने अपने इरादे बता दिए हैं। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का कहना है कि आक्रमण करने वालों को बगैर सजा दिए छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान शहीदों के लिए ब्लड मनी की भी मांग करेगा। इसके अलावा भी उन्होंने कई मांगें रखी हैं। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है और पाकिस्तान में आगे की वार्ता होनी है। खामेनेई ने इस युद्ध में ईरान की जीत का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, 'आज तक के हालातों को देखते हुए यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि आप ईरान की बहादुर जनता, इस मैदान में असली विजेता रहे हैं।' रखी हैं ये मांगें खामेनेई ने कहा, 'हम अपराधी हमलावरों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे। हम हर चोट का हर्जाना, शहीदों के लिए ब्लड मनी और इस जंग में अपाहिज हुए सैनिकों के लिए मुआवाजा जरूर लेंगे। साथ ही, हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन को यकीनन एक नए स्तर पर ले जाएंगे।' उन्होंने साफ किया है कि अस्थायी सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है। ईरान ने रख दी लेबनान वाली शर्त ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू करने के लिए लेबनान में इजरायली हमलों का तुरंत रुकना एक अहम शर्त है। उन्होंने कहा कि ईरान की 10-सूत्रीय योजना के तहत प्रस्तावित युद्धविराम 'ईरानी नेतृत्व और जनता के बलिदान का परिणाम' है। उन्होंने कहा कि अब देश कूटनीति, रक्षा तथा जनभागीदारी के स्तर पर एकजुट रहेगा। ट्रंप जता चुके हैं आशंका अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते के प्रभावी होने को लेकर आशंका जताई है। उन्होंने गुरुवार को कहा, 'ईरान बहुत खराब काम कर रहा है। ईरान तेल को होर्मुज से गुजरने देने के संदर्भ में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे शर्मनाक कहेंगे।' उन्होंने कहा, 'हमारे बीच ऐसा कोई समझौता नहीं है।' पाकिस्तान की वार्ता पर नजर अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को वार्ता की मेजबानी करने जा रहे पाकिस्तान ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हालांकि, शीर्ष ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर किए गए इजराइली हमले वार्ता को निरर्थक बना सकते हैं। अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए सशर्त युद्ध-विराम पर सहमत हो गए। इसके बाद, मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्ध-विराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बैठक होनी है।

नेतन्याहू की धमकी से पाकिस्तान हड़बड़ाया, ख्वाजा आसिफ को डिलीट करनी पड़ी सोशल मीडिया पोस्ट

तेलअवीव  पाकिस्तान में होने वाली 'इस्लामाबाद वार्ता' से पहले इजरायल के खिलाफ विवादित टिप्पणी करना पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को भारी पड़ गया है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय से मिली कड़ी फटकार के बाद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को अपने एक्स हैंडल से इजरायल विरोधी पोस्ट डिलीट करने के लिए मजबूर होना पड़ा।  इस घटना को पाकिस्तान के एक कूटनीतिक सरेंडर के रूप में देखा जा रहा है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने एक पोस्ट में इजरायल को 'मानवता के लिए अभिशाप' बताया था. इस बयान पर इजरायल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया।  बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इन टिप्पणियों को 'अपमानजनक' करार देते हुए कहा कि ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकती, खासकर उस देश की ओर से जो चल रहे राजनयिक प्रयासों में खुद को एक 'तटस्थ मध्यस्थ' के रूप में पेश कर रहा है।  यह विवाद ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है. इजरायल की फटकार के बाद रक्षा मंत्री का पोस्ट डिलीट करना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान इस समय किसी भी वैश्विक दबाव को झेलने की स्थिति में नहीं है।  विशेषज्ञों का मानना है कि इस तीखी प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान की उस छवि को नुकसान पहुंचाया है, जिसमें वह खुद को एक जिम्मेदार शांतिदूत साबित करने की कोशिश कर रहा था।  एक्सपर्ट मानते हैं कि पाकिस्तान, जो खुद को क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया में एक जिम्मेदार और संतुलित खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है, वह किसी भी तरह के कूटनीतिक विवाद से बचना चाहेगा. यही कारण है कि इजरायल की कड़ी आपत्ति के बाद तुरंत कदम उठाते हुए विवादित पोस्ट को हटा दिया गया। 

ब्रिगेडियर बने कर्नल श्रीकांत पुरोहित, रिटायरमेंट पर रोक का आदेश

 नई दिल्ली, भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर रैंक पर प्रमोशन की मंजूरी दे दी है. कर्नल पुरोहित लंबे समय तक कानूनी लड़ाई और विवादों में रहे हैं. अब उनके याचिका की सुनवाई के बाद उन्हें प्रमोशन देने का फैसला लिया गया है।  कर्नल पुरोहित 31 मार्च, 2026 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने उनकी प्रमोशन की याचिका पर विचार किया और उनकी रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी।  17 साल के लंबे सफर के बाद कर्नल पुरोहित को ये प्रमोशन मिलना, उनकी जिंदगी के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है. उन्होंने एक हाई-प्रोफाइल विस्फोट मामले में आरोपी होने से लेकर एक सीनियर कमांडर के तौर पर अपनी जगह बनाई है।  2008 में मालेगांव विस्फोट मामले में गिरफ्तारी के बाद उनका करियर पूरी तरह रुक गया था. हालांकि 2017 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वो सेवा में वापस तो आ गए, लेकिन उनकी सीनियरिटी और प्रमोशन सालों तक लटके रहे।  बरी होने के बाद मिली नई दिशा कर्नल पुरोहित को 31 जुलाई, 2025 को मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया था. अदालत ने सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष के मामले में विरोधाभासों का हवाला दिया था. इसके बाद, सितंबर 2025 में उन्हें पूर्ण कर्नल के पद पर प्रमोट किया गया।  कर्नल पुरोहित 31 मार्च, 2026 को रिटायर होने वाले थे. हालांकि, 16 मार्च, 2026 को जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाया कि पुरोहित के पास अपने जूनियर्स के बराबर फायदे और प्रमोशन पाने का पुख्ता मामला है. ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि प्रमोशन से जुड़ी उनकी शिकायत का समाधान होने तक उनकी रिटायरमेंट को स्थगित रखा जाए।  इंडिया टुडे के सूत्रों के मुताबिक, सेना की ओर से ब्रिगेडियर रैंक की मंजूरी उनके जेल और ट्रायल के दौरान खोए गए सालों की एक तरह से भरपाई है. अगर उनका करियर बाधित नहीं होता, तो उनके बैच के साथी अब तक वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर पहुंच चुके होते.सामान्य परिस्थितियों में वो अब तक मेजर जनरल के पद तक पहुंच सकते थे।