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रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव, भारत बोला- 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

नई दिल्ली अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में ‘सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पारित होने के बाद भारत ने वाशिंगटन को दो टूक शब्दों में कड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा. 16 सितंबर 2026 को पारित इस अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले मुल्कों पर कड़े अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।  नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय, व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इस संवेदनशील मसले पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर कई दौर की बेबाक बातचीत हो चुकी है. भारत ने अमेरिका को स्पष्ट समझा दिया है कि ऐसे एकतरफा फैसलों का असर न केवल द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी भारी उथल-पुथल मच सकती है. सरकार ने उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर इस कानून से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।  MEA के मुताबिक, भारत बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुरूप ऊर्जा के विविध स्रोतों से खरीद जारी रखेगा. मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर विभिन्न अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है. भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभावों को भी स्पष्ट रूप से अमेरिका के सामने रखा है।  भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।  विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में Sanctioning Russia and Iran Act के पारित होने का संज्ञान लिया है. भारत इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. अमेरिकी कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है और इससे भारत समेत अन्य देशों पर असर पड़ सकता है। 

₹25,000 सैलरी वालों के लिए जरूरी खबर, नए EPFO नियम से ऐसे तय होगी पेंशन

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने  प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले लोगों को एक बड़ा तोहफा दिया. पेंशन कटौती के लिए अनिवार्य सैलरी लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. सरकार का कहना है कि इससे 51 लाख कर्मचारियों के लिए पेंशन कटौती अनिवार्य हो जाएगी और सरकार को अनुमानित 11,339 करोड़ रुपये का बोझ उठाना होगा।  पेंशन में योगदान पेंशन के लिए कंट्रीब्‍यूशन कर्मचारी की सैलरी से नहीं, बल्कि नियोक्‍ता के योगदान से जाएगा. नियोक्‍ता अपने 8.33 फीसदी पेंशन में योगदान देगा और बाकी पीएफ अकाउंट में जमा करेगा. ऐसे में बिना इन हैंड सैलरी कटे, कर्मचार‍ियों को पेंशन कटौती का लाभ दिया जाएगा. केंद्र सरकार के अनुसार, कर्मचारियों के सोशल सिक्‍योंरिटी को बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है।  रिटायरमेंट के बाद पेंशन इस नए नियम को आज यानी 17 सितंबर 2026 से लागू कर दिया गया है. अब ऐसे में ज्‍यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि अगर उनका बेसिक और डीए मिलाकर सैलरी 25,000 रुपये की कैटेगरी में आती है, तो रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन कितनी बनेगी?  EPS के तहत पेंशन का फार्मूला?  एमप्‍लॉई पेंशन स्‍कीम (EPS) के तहत पेंशन कैलकुलेट करने का एक खास फार्मूला दिया गया है, जिसके तहत आप आप अपनी सैलरी और साल के अनुसार ये अनुमान लगा सकते हैं कि आपकी कितनी सैलरी कटेगी?  मासिक पेंशन = पेंशन योग्‍य सैलरी × पेंशन योग्‍य सेवा के साल ÷ 70 20 साल या उससे अधिक की सेवा पर 2 साल का अतिरिक्त सर्विस वेटेज भी मिलता है।  अब अगर 58 साल रिटायरमेंट की उम्र मानी जाए, तो कितनी पेंशन बनेगी?  अगर आप 25 साल के हैं और आपकी बेसिक और डीए मिलाकर 25,000 रुपये है, तो आपके पेंशन योग्‍य साल- 33 साल होगा. इसपर 2 साल का बोनस भी दिया जाएगा. ऐसे में अनुमानित पेंशन ₹12,500 महीना होगा.  इसी तरह, अगर आपकी उम्र 30 साल है और आपकी Basic + DA 25,000 रुपये है, तो पेंशन योग्‍य सर्विस- 28 साल होगी. इसपर 2 सला का बोनस भी दिया जाएगा. ऐसे में अनुमानित पेंशन  ₹10,714 मंथली होगा।  यहां देखें पूरा कैलकुलेशन 25 साल की उम्र में पेंशन कैलकुलेशन ₹25,000 × 35 ÷ 70 = ₹12,500 प्रति महीना  30 साल की उम्र में पेंशन कैलकुलेशन  ₹25,000 × 30 ÷ 70 = ₹10,714 प्रति महीना कब मिलेगी इतनी पेंशन?        यह तभी संभव है, जब 25000 रुपये आपकी पेंशन योग्‍य सैलरी रहे. वास्तविक EPS गणना में अंतिम अवधि की पेंशन योग्‍य सैलरी और सेवा अ‍वधि देखी जाती है. अगर ये दोनों इस सेनारियो में फिट बैठते हैं तो आपकी पेंशन ऊपर बताए गए कैलकुलेशन के आधार पर मिलेगी। 

PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर अमित शाह ने की तारीफ, वडनगर में कही बड़ी बात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर देश के शीर्ष राजनेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें शुभकामनाओं से सराबोर कर दिया है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया पर उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की मंगलकामना की. नेताओं ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति, 7.8 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती साख को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका कर्मठ जीवन 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को सिद्धि तक ले जाने की सबसे बड़ी प्रेरणा है।  सुशासन और वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव नेताओं ने अपने शुभकामना संदेशों में रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासन को केवल फाइलों और दफ्तरों तक सीमित रखने के बजाय सीधे आम नागरिकों की जरूरतों से जोड़ा है. उनके नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी और पारदर्शी नीतियों के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है. आधारभूत ढांचे का आधुनिकीकरण हो या गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाएं, पिछले वर्षों में उठाए गए कदमों ने नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है. इसके साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया भर में जो पहचान मिली है, उसने हर देशवासी के भीतर राष्ट्रगौरव का नया भाव जगाया है।  2047 तक विकसित भारत के संकल्प को नई गति केंद्रीय मंत्रियों ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री का यह अनथक समर्पण देश को आगामी दशकों में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. 7.8 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर और वैश्विक मंचों पर भारत का स्वतंत्र व निर्णायक रुख उनके मजबूत नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि वे स्वामी विवेकानंद के उस सपने को साकार कर रहे हैं, जिसमें भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की बात कही गई थी. दिग्गजों ने महादेव से प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री इसी ऊर्जा और अटूट संकल्प के साथ दीर्घायु होकर निरंतर राष्ट्रसेवा में जुटे रहें।  मल्लिकार्जुन खरगे ने की पीएम मोदी के दीर्घायु होने की कामना पीएम मोदी जन्मदिन लाइव: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके अच्छे स्वास्थ्य एवं दीर्घायु होने की कामना की. खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं. ईश्वर से प्रार्थना है कि वह स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों.” भाजपा ने उनके जनप्रतिनिधि के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की घोषणा की है जिसके तहत जनभागीदारी, कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने और युवाओं की भागीदारी पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।   नितिन नवीन बोले – 140 करोड़ देशवासियों की अगुलाई करने वाले PM मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।  पीएम मोदी जन्मदिन लाइव: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लिखा, “राष्ट्रसेवा और समर्पण के पर्याय, 140 करोड़ देशवासियों के नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. ‘नेशन फर्स्ट’ के संकल्प के साथ आपकी यह यात्रा सेवा, सुशासन और जनकल्याण की एक प्रेरक गाथा रही है. यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशवासियों के उस सामूहिक स्वप्न की भी यात्रा है, जिसे आपने अपने कर्म और साधना से दिशा दी है.” उन्होंने लिखा, “आपके मार्गदर्शन में भारत विकास और आत्मनिर्भरता के नए आयाम गढ़ रहा है तथा विश्व पटल पर अपनी नई पहचान और सामर्थ्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है. ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा की शक्ति प्रदान करें।  आप मां भारती की सेवा करते हुए दीर्घायु हों, निर्मला सीतारमण ने PM को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं पीएम मोदी जन्मदिन लाइव: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. इस चुनौतीपूर्ण समय में भी आप हमारे देश को ‘विकसित भारत’ की ओर मजबूती से आगे ले जा रहे हैं. आपने हर कदम पर राष्ट्र को सर्वोपरि रखा है. सरकारी खजाने से खर्च होने वाले हर पैसे से जन-कल्याण सुनिश्चित किया है. मैं प्रार्थना करती हूं कि आप मां भारती की सेवा करते हुए दीर्घायु हों और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें।   राष्ट्रपति मुर्मु ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं, कहा- 'आपने स्थापित किए सुशासन के नए प्रतिमान' पीएम मोदी जन्मदिन लाइव: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वे सांस्कृतिक गौरव की भावना के साथ आधुनिक प्रगति के मार्ग पर चलते हुए हमारे देशवासी, विरासत और विकास के समन्वय को साकार कर रहे हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. विगत 25 वर्षों में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल में आपने सुशासन के अनेक नए प्रतिमान स्थापित किए हैं व समावेशी विकास को अभूतपूर्व गति और नई दिशा प्रदान की है.” उन्होंने आगे लिखा, “सांस्कृतिक गौरव की भावना के साथ आधुनिक प्रगति के मार्ग पर चलते हुए हमारे देशवासी, विरासत और विकास के समन्वय को साकार कर रहे हैं. मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की प्रार्थना करती हूं, ताकि आप जन-सेवा और राष्ट्र-निर्माण के अपने अभियान को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।   पीएम मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर भाजपा का आज से 'सेवा संकल्प अभियान' पीएम मोदी जन्मदिन लाइव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सेवा के 25 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी गुरुवार से अपना विशेष एक महीने का अभियान ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करने जा रही है. 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन मनाया जा रहा है, जबकि अक्टूबर में उनकी सार्वजनिक सेवा के 25 साल पूरे हो रहे हैं. इस ऐतिहासिक मौके को यादगार बनाने के लिए पार्टी एक महीने तक सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम चला रही है।  9 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय … Read more

ED का गोपाल कांडा से जुड़े ठिकानों पर छापा, 661 निवेशकों से ₹248.46 करोड़ जुटाने का मामला

गुरुग्राम प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के पूर्व राज्य मंत्री गोपाल कांडा के ठिकानों पर गुरुवार को छापेमारी की है। जांच एजेंसी गुरुग्राम स्थित वाटिका लिमिटेड द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट में हुई हेराफेरी की जांच कर रही है। इस मामले में निवेशकों को कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए लुभाया गया था। उन्हें समय पर कब्जा, पक्का रिटर्न, लीज रेंटल और सेल डीड पूरा करने का भरोसा दिया गया था। जांच के दायरे में आए चार प्रोजेक्ट्स में 661 निवेशकों से लगभग 248.46 करोड़ जमा किए गए, लेकिन आज तक न तो कब्जा दिया गया और न ही सेल डीड पूरी की गई। इसी मामले में ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत गुरुग्राम में गोपाल कांडा से जुड़ी तीन जगहों पर छापेमारी की है। इनमें उनका घर, फार्महाउस और ऑफिस शामिल है। आरोप है कि डायवर्ट किए गए फंड को बाद में गोपाल कांडा से जुड़ी अलग-अलग कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया था। यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी सिरसा से पूर्व विधायक के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी हुई थी। अगस्त 2023 में ईडी की टीमों ने 21 घंटे तक उनकी संपत्तियों के दस्तावेज खंगाले थे। ईडी के अधिकारियों ने सिविल लाइन स्थित उनके घर और एमडीएलआर एयरलाइंस के कार्यालय में एक साथ कार्रवाई शुरू की थी। कौन हैं गोपाल कांडा? आपको बता दें कि गोपाला कांडा का सिरसा जिले में काफी प्रभाव है। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के गोकुल सेतिया ने उन्हें हराया था। मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) कैंडिडेट ने अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद भी वह चुनाव हार गए थे। गोपाल कांडा पहले भी कई मामलों में फंस चुके गोपाल कांडा पहली बार तब सुर्खियों में आए थे जब 2012 में पूर्व एयर होस्टेस गीतिका शर्मा की आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में उनका नाम सामने आया था। उस समय वह 23 साल की थीं। कांडा को दिल्ली पुलिस ने इस मामले गिरफ्तार किया था, लेकिन 2023 में एक अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

सेमीकॉन इंडिया 2026 शुरू, प्रधानमंत्री मोदी ने किया उद्घाटन, 300 कंपनियों की भागीदारी

 नई दिल्ली सेमीकॉन इंडिया 2026 की शुरुआत हो चुकी है. इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है. 3 दिवसीय कार्यक्रम 17 सितंबर से 19 सितंबर तक चलेगा. इस इवेंट में 52 देश की 300 से अधिक कंपनियां शामिल होने जा रही है।  सेमीकॉन इंडिया 2026 में इंडियन कंपनियां, इन्वेस्टर्स, रिसर्चर और कई स्टूडेंट शामिल होंगे. इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सहयोग, इन्वेस्टमेंट और प्रतिभा के विकास को बढ़ावा देना है. सेमीकॉन इंडिया 2026 की थीम  'सिलिकॉन से सिस्टम तक: इको सिस्टम का निर्माण' है।  सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियां और स्टार्टअप हिस्सा लेंगी और करीब 50 हजार विजिटर्स पहुंचने की उम्मीद है. इसमें 52 देशों से 400 से अधिक एग्जीक्यूटिव्स शामिल होंगे, साथ ही 150 से अधिक स्पीकर्स भी शामिल होने जा रहे हैं।  सेमीकॉन इंडिया 2026 का क्या उद्देश्य है? सेमीकॉन इंडिया 2026 एक व्यापक मूल्य-श्रृंखला दृष्टिकोण अपनाएगा, जिसमें सेमीकंडक्टर सामग्री, उपकरण और चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक की यात्रा प्रदर्शित की जाएगी। नया 'रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक' मूल्य श्रृंखला अनुभव सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में इस पूरी यात्रा को प्रस्तुत करेगा। 600 से अधिक कंपनियां ले रही हैं भाग सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियां भाग लिया है और लगभग 50,000 आगंतुक शामिल हुए हैं। इनमें 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल हुए हैं। प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन का प्रतिनिधित्व करने वाले 6 कंट्री पवेलियन, साथ ही 12 स्टेट बूथ, एक स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 कार्यक्रम क्यों शोकेश होगा   सेमीकॉन इंडिया 2026 इवेंट के दौरान सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन को दिखाया जाएगा. सेमीकंडक्टर मटेरियल और चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग तक के कंप्लीट प्रोसेस को दिखाया जाएगा. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के पूरे सफर को दिखाया जाएगा।  जानकारी के मुताबिक, इस बार सैंड टू सिलिकॉम टू सिस्टम वैल्यू चैन एक्सपीरियंस के जरिए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के इस पूरे सफर को दिखाया जाएगा।  ये देश लगाएंगे अपने पवेलियन  सेमीकॉन इवेंट में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन का प्रतिनिधित्व करने वाले छह कंट्री पवेलियन मौजूद हैं. साथ ही 12 स्टेट बूथ, एक स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन मौजूद हैं।  सेमीकंडक्टर क्या है?  सेमीकंडक्टर, असल में एक इलेक्ट्रिसिटी का ट्रैफिक कंट्रोलर होता है. इसका इस्तेमाल मोबाइल से कार तक में किया जाता है. अब अधिकतर एडवांस्ड मशीनों में चिपसेट का इस्तेमाल किया है. इसको सिलिकॉन से तैयार किया  जाता है. सिलिकॉन से तैयार किए गए वेफर पर अरबों छोटे-छोटे ट्रांजिस्टर बनाए जाते हैं।   

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के जंगली इलाके में गुरुवार को सुरक्षा बलों के साथ चल रहे एनकाउंटर में दो आतंकवादी मारे गए. सेना ने आज सुबह यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध आतंकवादियों की मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद बुधवार रात करीब 9 बजे मजालता के दूर-दराज के ब्रटेल सोन और खुब्बन इलाकों में सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया।  इंडियन आर्मी की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ऑपरेशन सोहन में अब तक दो आतंकवादी मारे जा चुके हैं. पोस्ट में लिखा,'16/17 सितंबर 2026 की दरमियानी रात को एक जॉइंट इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन में कन्फर्म इनपुट्स से उधमपुर के ब्रटल इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी का इशारा मिला।  खराब मौसम, मुश्किल इलाके और खराब विजिबिलिटी के बावजूद व्हाइट नाइट कॉर्प्स जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने एक टारगेटेड काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान दो आतंकवादी मारे गए.' सेना ने कहा कि ऑपरेशन अभी भी जारी है, और इलाके में सर्च और सर्विलांस ऑपरेशन जारी हैं. इसमें आगे कहा गया, 'किसी भी खतरे को ट्रैक करने और उसे बेअसर करने के लिए सिक्योरिटी फोर्स तैनात हैं।  इससे पहले अधिकारियों ने कहा कि बुधवार देर रात ऑपरेशन शुरू होने के तुरंत बाद जंगल में सिक्योरिटी फोर्स ने एक संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाते हुए कुछ राउंड फायरिंग की और धमाके सुने। 

EPFO Salary Limit बढ़ी, ₹25 हजार हुई वेतन सीमा; लाखों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने EPFO में अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को दी मंजूरी। वर्तमान व्यवस्था में ₹15,000 प्रति माह तक की वेतन सीमा EPF की अनिवार्य कवरेज के लिए अहम आधार रही है। यह सीमा सितंबर 2014 में बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी और इसके बाद इसमें बदलाव नहीं हुआ। पिछले सालों में वेतन और आय के स्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए अब सरकार ने इस सीमा को ₹25,000 करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था से ₹15,000 से ₹25,000 के बीच कमाने वाले कई नए कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ सकेंगे। हालांकि, नई सीमा लागू होने की विस्तृत प्रक्रिया और जरूरी प्रशासनिक कदम EPFO तथा श्रम मंत्रालय की ओर से पूरे किए जाएंगे। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा रिटायरमेंट सेविंग से जुड़ा हो सकता है। EPFO के तहत कर्मचारी को EPF (Employees’ Provident Fund) के साथ EPS (Employees’ Pension Scheme) और EDLI (Employees’ Deposit Linked Insurance Scheme) से जुड़े लाभ मिलते हैं। ऐसे में नए कर्मचारियों के लिए लंबे समय में रिटायरमेंट फंड और सामाजिक सुरक्षा का आधार मजबूत हो सकता है। सरकार का कहना है कि वेतन बढ़ने और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को भी बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बनाना जरूरी है। सरकार के अनुसार इस बदलाव से रोजगार के औपचारिकीकरण को भी बढ़ावा मिल सकता है। जब कर्मचारी EPFO जैसी व्यवस्था से जुड़ते हैं, तो उनकी बचत, पेंशन और बीमा सुरक्षा अधिक व्यवस्थित तरीके से होती है। कंपनियों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ने से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने और स्थिर वर्कफोर्स तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी और EPF में होने वाले योगदान पर असर उनकी वेतन संरचना और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इस फैसले से सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त खर्च आएगा। सरकार ने अनुमान लगाया है कि इससे सालाना करीब ₹11,339 करोड़ का सरकारी खर्च होगा, जबकि मौजूदा बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ है। पांच साल में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ बताया गया है। EPFO पहले से ही भारत की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है और करोड़ों कर्मचारियों तथा पेंशनरों को कवर करता है। आपको बता दें कि ₹15,000 से ₹25,000 की वेतन सीमा बढ़ना लाखों कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि, कर्मचारियों के लिए इसका वास्तविक वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए नियमों के तहत योगदान की कैलकुलेशन कैसे होती है और वेतन संरचना पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। सरकार और EPFO अब इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

भारत में बनेगा मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर, ₹27,000 करोड़ से खुलेंगे 90,000 रोजगार के रास्ते

 मुंबई महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जल्द ही एक बड़ा शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट आकार ले सकता है. दिघी में करीब ₹27,000 करोड़ के निवेश से ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने की तैयारी है. महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से करीब 90,000 रोजगार के मौके बन सकते हैं. प्रोजेक्ट को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड(MDL) आगे बढ़ाएगी और यहां बड़े कमर्शियल जहाजों के निर्माण के लिए आधुनिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी।  महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंगलवार को जारी रिलीज के मुताबिक, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने नेशनल शिपबिल्डिंग इंडस्ट्रियल पार्क एंड मरीन लॉजिस्टिक्स (NSHIPML) के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है. यह समझौता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुआ. इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मकसद देश में बड़े स्तर पर जहाज बनाने की क्षमता बढ़ाना और शिपबिल्डिंग से जुड़ी पूरी इंडस्ट्री को मजबूत करना है।  ₹27,000 करोड़ का निवेश, बड़े जहाज बनेंगे प्रस्तावित प्रोजेक्ट में करीब ₹27,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा. सरकार के मुताबिक, दिघी में बनने वाले क्लस्टर में बड़े कमर्शियल वेसल्स यानी कारोबारी जहाज बनाए जा सकेंगे. इस प्रोजेक्ट से भारत की मैरीटाइम इंडस्ट्री से जुड़ी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही जहाज निर्माण से जुड़े दूसरे कारोबार, सप्लाई चेन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।  सालाना 2 मिलियन ग्रॉस टन क्षमता का लक्ष्य समझौते के तहत MDL ने दिघी में कम से कम 2 मिलियन ग्रॉस टन सालाना शिपबिल्डिंग क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसका मतलब है कि क्लस्टर को काफी बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना है. यहां सिर्फ जहाज बनाने की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि शिपबिल्डिंग से जुड़े दूसरे कामों के लिए भी जरूरी ढांचा तैयार किया जाएगा. दिघी का ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर महाराष्ट्र मेरिटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके लिए NSHIPML को स्पेशल पर्पज कंपनी (SPC) के तौर पर बनाया गया है. सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों के साथ भी जुड़ा है।  शिपबिल्डिंग के साथ पूरा इकोसिस्टम बनेगा सरकारी रिलीज के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इसके साथ मैरीटाइम इंडस्ट्री को जरूरी सपोर्ट देने वाला इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन नेटवर्क भी विकसित होगा. इससे जहाज निर्माण के लिए जरूरी सामान, सेवाओं और दूसरी औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे भारत में शिपबिल्डिंग की क्षमता बढ़ेगी और नई तकनीक व निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।  90 हजार रोजगार के मौके बनने की उम्मीद इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा असर रोजगार के मोर्चे पर भी देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र सरकार ने करीब 90,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद जताई है. इनमें शिपबिल्डिंग के अलावा सप्लाई चेन और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी शामिल हो सकते हैं. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन ने कहा कि कंपनी सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से दिघी में आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग सुविधा तैयार करने की दिशा में काम करेगी. MoU पर कैप्टन जगमोहन और NSHIPML के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप पी ने हस्ताक्षर किए।  भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए अहम दिघी का यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक शिपयार्ड बनाने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उससे जुड़े उद्योगों का नेटवर्क तैयार करने की योजना है. अगर प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है तो इससे महाराष्ट्र के साथ-साथ देश के शिपबिल्डिंग और समुद्री उद्योग को भी फायदा मिल सकता है। 

Sahara Refund को लेकर बड़ा सवाल, क्या दोबारा करना पड़ेगा क्लेम? समझें पूरा नियम

नई दिल्ली चाय की दुकान चलाने वाले कुशीनगर जिले के दिनेश का सहारा में 4 लाख रुपये से अधिक फंसे हैं। नगर पंचायत मथौली बाजार के प्रमोद जायसवाल और उनके परिवार के कई सदस्यों के भी सहारा में फंसे लाखों रुपये अभी तक रिफंड नहीं हुए। जबकि, इन लोगों ने सहारा रिफंड पोर्टल पर अप्लाई कर चुके हैं। दिनेश और प्रमोद जैसे लाखों निवेशकों के मन अब भी एक ही सवाल गूंज रहा है कि आवेदन किए कई महीने गुजर गए तो क्या फिर से अप्लाई करना पड़ेगा? इसका सीधा जवाब है नहीं। अगर आपने साल 2023 या 2024 या फिर 2025 में क्लेम कर दिया था और अभी तक पैसा नहीं आया, तो सिर्फ पैसा नहीं आने के कारण नया क्लेम न करें। पहले पुराने क्लेम का Status देखें। जिन लोगों ने पहले CRCS-Sahara Refund Portal पर क्लेम कर दिया है, उन्हें सामान्य स्थिति में दोबारा नया क्लेम दाखिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन यहां एक जरूरी अंतर है। क्लेम पहले से जमा है और कोई कमी/Deficiency नहीं बताई गई है तो दोबारा आवेदन न करें। पुराने क्लेम की प्रोसेसिंग का इंतजार करें। अगर पोर्टल पर दिए गए स्टेटस या आपके रजिस्टर्ड नंबर पर मिले SMS में कोई कमी बताई गई है तो उसी पुराने क्लेम को Resubmission Portal पर सुधारकर दोबारा जमा करना करें। अगर Payment Failed दिख रहा है तो इसके लिए भी Resubmission Portal के जरिए निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। अगर पहले कभी क्लेम नहीं किया तो क्या करें अगर अबतक आपने क्लेम नहीं किया है तो नया क्लेम CRCS-Sahara Refund Portal पर करना है। Resubmission में नया क्लेम जोड़ना संभव नहीं है। वह पुराने क्लेम की कमी दूर करने के लिए है। अभी सबसे जरूरी काम ये करना है अगर आपने पहले क्लेम किया था तो पहले अपना CRN डालकर Status/Remarks चेक करें। अगर वहां Deficiency या Resubmission Required जैसा मैसेज नहीं है, तो केवल नए सिरे से आवेदन करने की जरूरत नहीं है। बता दें सरकार ने 8 सितंबर 2026 को बताया कि अब तक ₹9,267 करोड़ 41.56 लाख जमाकर्ताओं को वापस किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 20 लाख आवेदन प्रोसेसिंग के लिए बाकी थे। सहारा रिफंड क्लेम स्टेटस को ऐसे जांचें     सबसे पहले पहले अपना पुराना क्लेम चेक करें। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल CRCS-Sahara Refund पर जाएं।     यहां अपने रजिस्टर्ड मोबाइल/आधार से लॉगिन करके Claim/Refund Status देखें।  Status में क्या लिखा हो तो क्या करें?     अगर लिखा है Under Process / Processing तो नया आवेदन न करें, पुराने क्लेम की प्रक्रिया का इंतजार करें।     अगर लिखा है Verified / Eligible तो भुगतान की प्रक्रिया का इंतजार करें।     अगर लिखा है Payment Processed/Success तो अपने आधार से लिंक्ड बैंक खाते में पेमेंट को चेक करें।     अगर लिख है Deficiency Communicated तो कमी दूर करके Resubmission Portal पर दोबारा जमा करें।     अगर लिखा है Rejected/Deficiency तो पोर्टल पर बताई गई वजह देखें और यदि Resubmission उपलब्ध है तो सुधार करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ कमी पाए जाने वाले पुराने क्लेम को सुधारने के लिए Resubmission Portal का इस्तेमाल करना है। Deficiency आई है तो कहां जाएं यह नया क्लेम करने वाला पोर्टल नहीं है। यह पहले जमा किए गए क्लेम में बताई गई कमी को सुधारकर फिर जमा करने के लिए है। सितंबर 2026 की सरकार की सूचना भी यही कहती है।

2020 संपर्क कार्यालय विस्फोट मामले में नॉर्थ कोरिया पर भारी जुर्माना, कोर्ट ने सुनाया फैसला

सियोल नॉर्थ कोरिया ने 2020 में गुस्से में साउथ कोरिया का एक साझा संपर्क कार्यालय ही उड़ा दिया था. अब करीब 6 साल बाद इस मामले में साउथ कोरिया की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने नॉर्थ कोरिया को 44.6 अरब वॉन (करीब 32. 5 करोड़ डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया है. रकम कएसोंग में बनाए गए संयुक्त संपर्क कार्यालय को उड़ाने से हुए नुकसान के लिए है।  हालांकि इस फैसले का असर फिलहाल प्रतीकात्मक ही माना जा रहा है. इसकी वजह यह है कि साउथ कोरिया के पास नॉर्थ कोरिया से इस रकम की वसूली कराने का कोई साफ रास्ता नहीं है. दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते बेहद खराब हैं. ऐसे में कोर्ट का आदेश लागू कराना बड़ी चुनौती है।  यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार साउथ कोरिया की सरकार ने नॉर्थ कोरिया के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा किया था. इससे पहले कुछ लोग मानवाधिकार उल्लंघन और दूसरे मामलों को लेकर नॉर्थ कोरिया की सरकार पर मुकदमा कर चुके हैं।  साउथ कोरिया ने 2023 में यह केस दायर किया था. सरकार ने कहा था कि नॉर्थ कोरिया ने कएसोंग में संपर्क कार्यालय को उड़ाकर गैरकानूनी और हिंसक कार्रवाई की. इससे दोनों देशों के बीच हुए पुराने समझौतों का उल्लंघन हुआ. साथ ही आपसी सम्मान और भरोसे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा।  दरअसल, यह संयुक्त संपर्क कार्यालय कएसोंग में बनाया गया था. इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क का रास्ता बनाए रखना था. लेकिन 2020 में दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बिगड़ने लगे।  जून 2020 में नॉर्थ कोरिया ने विस्फोट करके इस इमारत को उड़ा दिया. उस समय इमारत खाली थी. कोरोना महामारी के कारण नॉर्थ कोरिया ने जनवरी में ही दफ्तर बंद कर दिया था।  नॉर्थ कोरिया साउथ कोरिया से इस बात पर नाराज था कि वह उत्तर कोरियाई लोगों को सीमा पार गुब्बारों के जरिए प्योंगयांग विरोधी पर्चे भेजने से नहीं रोक रहा था. इसी मुद्दे को लेकर उसने सियोल के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई थी।  न्यूक्लियर वार्ता टूटने के बाद बढ़ा तनाव दफ्तर को उड़ाने की घटना को सिर्फ सीमा विवाद के तौर पर नहीं देखा गया था. उस समय अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु वार्ता भी ठप हो चुकी थी।  2018 में नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पहली शिखर वार्ता हुई थी. तत्कालीन साउथ कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई थी।  लेकिन 2019 में किम और ट्रंप की दूसरी मुलाकात के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. नॉर्थ कोरिया प्रतिबंधों में बड़ी राहत चाहता था. बदले में वह अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्से को छोड़ने की बात कर रहा था. अमेरिका ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. नॉर्थ कोरिया ने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को और तेज कर दिया।  साउथ कोरिया में पिछले साल सत्ता बदलने के बाद नॉर्थ कोरिया को लेकर सरकार का रुख कुछ नरम हुआ. मौजूदा राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की. लेकिन नॉर्थ कोरिया ने अब तक इन अपीलों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. किम जोंग उन ने साउथ कोरिया को अपना सबसे शत्रुतापूर्ण देश तक बताया है।  नॉर्थ कोरिया ने इसी दौरान रूस और चीन के साथ अपने रिश्ते भी मजबूत किए हैं. रूस के साथ उसकी सैन्य साझेदारी बढ़ी है. अमेरिका की ओर से भी किम के साथ फिर बातचीत शुरू करने में रुचि दिखाई गई है. लेकिन प्योंगयांग ने अभी तक बातचीत के अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है।  साउथ कोरिया ने कहा- बातचीत से ही सुलझेगा मामला साउथ कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू होनी चाहिए।  मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण और उत्तर के बीच सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और सहयोग के जरिए किया जाना चाहिए. वहीं नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने अदालत के इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।  इस तरह 2020 में उड़ाया गया एक दफ्तर अब दोनों देशों के बिगड़े रिश्तों और रुकी हुई बातचीत का प्रतीक बन गया है. अदालत का फैसला साउथ कोरिया के पक्ष में आया है, लेकिन नॉर्थ कोरिया से रकम की वसूली और दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करना अभी भी बड़ी चुनौती है।