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China-Bangladesh डील से बढ़ी चिंता, J-10CE लड़ाकू विमान के जरिए भारत को घेरने की रणनीति!

ढाका  साउथ एशिया के डिफेंस मार्केट में इन दिनों तगड़ी हलचल है. पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए बांग्लादेश भी चीन का लड़ाकू विमान J-10CE को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है. बांग्लादेश वायु सेना चीन से ऐसे 24 फाइटर जेट्स खरीदने की डील के बेहद करीब है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस लड़ाकू विमान के फुस्स हो जाने के बावजूद, ड्रैगन ने उल्टा नैरेटिव सेट करके इस जेट को जी-जान से प्रमोट किया. अब ढाका उसके जाल में फंस गया है. करीब 40 मिलियन डॉलर कीमत वाला ये सौदा अगर पक्का हुआ तो भारत की दोनों सरहदों पर चीनी हथियारों का पहरा मजबूत हो जाएगा।  बांग्लादेश में चीन का डिफेंस जाल बांग्लादेश की सेनाएं पहले से ही बड़े पैमाने पर चीनी हथियारों पर निर्भर हैं. चीन धीरे-धीरे बांग्लादेश के तीनों सेनाओं में घुस चुका है. थल सेना की बात करें तो बांग्लादेश का पूरा टैंक बेड़ा चीनी मूल का है, उनकी एयर डिफेंस और आर्टिलरी में भी चीनी उपकरणों की भरमार है. नौसेना के क्षेत्र में भी बांग्लादेश ने चीन से ही पनडुब्बी हासिल की थीं।  अब इस प्लानिंग को आगे बढ़ाते हुए बांग्लादेशी वायु सेना को भी पूरी तरह चीनी रंग में रंगने की तैयारी है. बांग्लादेश के पास फिलहाल रूसी मिग-21 का चीनी वर्जन F-7 फाइटर्स है, जिसे वो काफी समय से बदलने की कोशिश में था. हालांकि उसने यूरोफाइटर जैसी पश्चिमी तकनीकों पर भी विचार किया लेकिन चीन ने नई चाल चल दी. चीन ने बांग्लादेश को कम कीमत और आसान शर्तें ऑफर कीं और आखिरकार पासा चीन के पक्ष में झुकता दिख रहा है।  J-10CE, जिसे चीन में ‘विगोरस ड्रैगन’ के नाम से जाना जाता है, कोई साधारण विमान नहीं है. ये चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) का सबसे भरोसेमंद फाइटर जेट है. ये विमान चीन की खतरनाक PL-15 मिसाइलों से लैस होता है।  चीन का गिरता एक्सपोर्ट और तीन देशों का खतरनाक नेक्सस स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर चीनी हथियारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है. ऐसे में चीन के लिए ये डील संजीवनी की तरह है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन जितने भी हथियार एक्सपोर्ट करता है, उसका 80% हिस्सा एशिया में ही आता है।  भारत के लिए क्या बदलेगा? चीन के कुल सैन्य निर्यात का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ तीन देश खरीदते हैं- पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर और पूर्व डीजी आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर के मुताबिक, चीन ने भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ एक खतरनाक मिलिट्री नेक्सस बना लिया है, जिस पर भारत को कड़ी नजर रखनी होगी।  अगर बांग्लादेश-चीन की ये डील फाइनल होती है तो भारत के पश्चिमी बॉर्डर यानी पाकिस्तान और पूर्वी बॉर्डर यानी बांग्लादेश दोनों तरफ चीनी फाइटर जेट्स तैनात हो जाएंगे यानी चीन की एंट्री हो जाएगी. भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि संकट के समय भारत को दोतरफा हवाई खतरों का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में चीनी तकनीशियनों और सैन्य विशेषज्ञों की मौजूदगी बढ़ेगी जो भारतीय सीमा के बेहद करीब रहकर खुफिया कूटनीति और निगरानी को अंजाम दे सकते हैं। 

कतर का बड़ा प्रस्ताव, खाड़ी देशों के निवेश से ईरान की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है $300 बिलियन का सहारा

दोहा  कतर का मानना है कि खाड़ी देशों से ईरान से जुड़े इन्वेस्टमेंट मैकेनिज्म को फंड करने में मदद के लिए कहा जा सकता है. कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने खुद इस पर सहमति जताई है।  अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुलरहमान अल थानी का मानना है कि खाड़ी राज्य, ईरान के आर्थिक सुधार के लिए वित्तीय मदद दे सकते हैं. कतर के प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है।  दरअसल ये प्रस्तावित ढांचा 300 अरब डॉलर के निवेश कोष की रिपोर्टों से जुड़ा हुआ है. इस फंड का मकसद जंग के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना और वहां मची अफरा-तफरी को संभालना है।  ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर बना कतर इस मामले में कतर ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर की तरह काम कर रहा है. इसके साथ ही, कतर ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कराने और क्षेत्र में तनाव कम करने से जुड़ी वार्ताओं में भी सीधे तौर पर शामिल रहा है।  कतर ने खाड़ी देशों को तीन सुझाव दिए हैं, जिसके जरिए वो ईरान की मदद कर सकते हैं।      खाड़ी देश कई इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए ईरान मदद कर सकते हैं.     वो फाइनेंसिंग मैकेनिज्म का हिस्सा बन सकते हैं,     खाड़ी देश आर्थिक विकास से जुड़ी पहलों में सहयोग दे सकते हैं. वार्ता के नतीजों पर टिका है भविष्य हालांकि, इस योजना को लेकर अभी तक किसी भी तरह की कमिटमेंट या फंडिंग का ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे किसी भी फंड का बनना पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा. ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच होने वाले अंतिम समझौते को किस तरह लागू किया जाता है।   

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए PM मोदी को ईरान का निमंत्रण, बढ़ी कूटनीतिक चर्चा

नई दिल्ली  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई कर आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है। 28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।  

बिल गेट्स के निजी जीवन पर बड़ा खुलासा, शादी के बाद तीन महिलाओं से रिश्तों का जिक्र

वाशिंगटन  माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने अपने तीन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का खुलासा किया है. गेट्स ने यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन पर आरोप लगाया कि वो उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के बारे में जानता था. बिल गेट्स की मानें तो एपस्टीन उन्हें ब्लैकमेल करने की साजिश रच रहा था।  जेफरी एपस्टीन के नेटवर्क और उसके संपर्कों की जांच कर रही यूएस हाउस ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बिल गेट्स को लेकर ये खुलासा हुआ है. हाल ही में न्याय विभाग ने कुछ नए दस्तावेज जारी किए थे, जिसके बाद एपस्टीन के साथ बिल गेट्स के पुराने संबंधों की फिर से जांच शुरू हुई।  इसी सिलसिले में सांसदों ने गेट्स का बयान दर्ज किया. वो 10 जून को खुद इस कमेटी के सामने पेश हुए थे. इस दौरान गेट्स ने बताया कि एपस्टीन को उनके दो रूसी महिलाओं के साथ अफेयर्स के बारे में पूरी जानकारी थी।  इन तीन महिलाओं संग चल रहा था गेट्स का अफेयर गेट्स ने बताया कि उनका रूसी ब्रिज खिलाड़ी मिला अंतोनोवा और न्यूक्लियर फिजिसिस्ट करीमा निगमातुलिना के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. गेट्स ने मेडिकल इंडस्ट्रलिस्ट एलिस जैकब्स नेसेलरॉड के साथ भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने की पुष्टि की।  जारी किए गए गवाही के ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक, बिल गेट्स ने कहा, 'इन अफेयर्स का एपस्टीन के साथ मेरी बातचीत से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन ये मेरे परिवार के लिए दर्दनाक थे. एपस्टीन मेरी बेवफाई की जानकारी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था. इसके साथ ही उसने कई झूठ भी जोड़े थे. ताकि वो मुझ पर दोबारा उसके साथ जुड़ने के लिए दबाव बना सके।  हालांकि बिल गेट्स ने एपस्टीन के किसी भी जुर्म में शामिल होने से साफ इनकार किया. उन्होंने माना कि उसके साथ संपर्क बनाए रखना एक गलती थी. गेट्स ने बताया कि वो फिलांथ्रोपी के कामों पर चर्चा को लेकर एपस्टीन से मिलते थे. उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि वो दोषी ठहराया गया था. मुझे इसके बारे में पता था. मैं एक सीमित भूमिका में उससे मिलने का रिस्क उठाने के लिए तैयार था।  क्या एपस्टीन ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की? बिल गेट्स ने दावा किया कि एपस्टीन उनकी पर्सनल लाइफ की जानकारी का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था. एपस्टीन उनके अफेयर्स के बारे में जानने के बाद उन्हें ब्लैकमेल करने के बारे में सोच रहा था. हालांकि, उसने ऐसा कभी नहीं किया. गेट्स ने कहा, 'उसने मुझे कभी ब्लैकमेल नहीं किया, लेकिन इन ईमेल्स को देखने से ये खतरा पैदा होता है कि उसने मुझे ब्लैकमेल करने के बारे में सोचा था। 

आवास योजना में कट मनी विवाद, आरोपों के बाद TMC नेताओं ने लौटाई रकम

 कूचबिहार पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में सीतलकुची ब्लॉक की भैरथाना ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 194 के तहत आने वाले छोटे बांगदाकी गांव में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद 'आवास योजना' के तहत घर बनाने की सुविधा दिलाने के बदले ग्रामीणों से 'कट मनी' यानी गैर-कानूनी कमीशन या रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के तीन स्थानीय नेताओं- मनोज अधिकारी, उत्तम बर्मन और क्षितीश देब शर्मा ने सरकारी आवास योजना का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों से पैसे लिए थे।  खबरों के मुताबिक, जनता के भारी दबाव और बढ़ते गुस्से की वजह से इन तीनों नेताओं ने हाल ही में कई स्थानीय निवासियों को करीब 90,000 रुपए वापस किए।  आरोपों पर क्या बोले TMC नेता? पैसे वापस करने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में इस पर बहस छिड़ गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताओं के द्वारा हर लाभार्थी से रिश्वत के तौर पर 8,000 से 10,000 रुपए तक वसूले जाते थे।  आरोपों के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी नेता मनोज अधिकारी ने कहा, "पार्टी के निर्देशों के मुताबिक कुछ फंड इकट्ठा किए गए थे. हालांकि, निवासी अब अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, इसलिए हम उन्हें पैसे लौटा रहे हैं।  TMC के ही एक अन्य नेता उत्तम बर्मन ने भी इसी बात को दोहराया. वहीं, TMC नेता क्षितीश देब शर्मा के बेटे अक्षय देब शर्मा ने बताया कि उस खास दिन कई निवासियों को कुल 13,000 रुपए वापस किए गए थे। 

IAEA का ईरान को सख्त संदेश, परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर नहीं होगा समझौता

 टोक्यो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है।  ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था।  ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा।  ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी 'डाउनब्लेंड' करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है।  उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। 

8th Pay Commission: महंगाई के असर से बदल सकते हैं वेतन के नियम, कर्मचारियों की नई मांग

नई दिल्ली ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (AIDEF) ने आठवें वेतन आयोग से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला कर्मचारियों और पेंशनर्स पर महंगाई के बोझ का सही कैलकुलेशन नहीं करता है।  महंगाई के अनुसार ज्‍यादा खर्च  अभी महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन भत्ता (DR) में संशोधन अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस्‍ड है. यह इंडेक्‍स कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती कीमतों के लिए नुकसान की भरपाई करने और महंगाई के खिलाफ उनकी खरीदने की क्षमता की रक्षा के लिए है।  मौजूदा फॉर्मूले में बड़ी खामियां             हालांकि, आठवें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने दूसरे डिमांड में AIDEF ने कहा कि मौजूदा फॉर्मूले में महत्वपूर्ण कमियां हैं और यह कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बदलते खर्च करने के तरीकों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखा सकता है।    देखें ये आंकड़े        फेडरेशन के अनुसार, 2022-23 में पेश किए गए संशोधित कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स में फूड आइटम्‍स और मौसमी एग्री प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को पर्याप्‍त तौर पर नहीं बताता है. एआईडीईएफ ने बताया कि खाद्य और पेय पदार्थों का भार अब सूचकांक में 36.75% है, जबकि आवास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी कैटेगरी को ज्‍यादा वेटेज दिया गया है।    पेंशनर्स के लिए चुनौती AIDEF ने पेंशनभोगियों के चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनमें से कई अपनी मंथली इनकम का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और देखभाल सेवाओं पर खर्च करते हैं. अगर इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतें महंगाई से ज्‍यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई राहत में बदलाव उतना नहीं होता है।  मौजूदा फॉर्मूले की जांच की मांग इन चिंताओं को देखते हुए, AIDEF ने मौजूदा महंगाई फॉर्मूले की जांच करने और सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च को मैनेज करने के लिए बदलने के लिए कहा है।  हर राज्‍य में आयोग की हो रही बैठक गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग की बैठक कई राज्‍यों में पूरी हो चुकी है, जिसमें सैलरी बढ़ोतरी, महंगाई भत्ते में इजाफा और फिटमेंट फैक्‍टर समेत कई मांग रखी गई है. 

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज फीस मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS याचिका खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने EWS आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेज फीस को लेकर याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों में अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो स्कॉलरशिप समेत अन्य विकल्प जैसे सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपनी फीस से चलते हैं और अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फीस लेने से रोका गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा।  जो वहन नहीं कर सकते हैं फीस  इस मु्द्दे पर फैसला देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकता है, तो स्कॉलरशिप, सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं।  देश को डॉक्टरों की जरूरत उन्होंने आगे कहा कि देश को अधिक डॉक्टरों की जरूरत है और निजी मेडिकल कॉलेज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस अधिक है केवल इसलिए उन्हें सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने का आदेश नहीं दिया जा सकता. हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ा कोई व्यापक कानूनी प्रश्न भविष्य में उठाया जा सकता है।  राजस्थान का भी उठा मामला वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को वैध माना था और कहा था कि राज्य की फीस नियामक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार ही फीस तय की गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 8 लाख रुपये के वार्षिक आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के बीच कथित विरोधाभास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। 

मंगेतर सिया के जन्मदिन को खास बनाना चाहता था केतन, महाबलेश्वर में की थी बड़ी बुकिंग

 पुणे जिस सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल किले से धक्का देकर मार दिया, उसने सिया के बर्थडे पर ग्रैंड सेलिब्रेशन की तैयारी कर रखी थी. जांच में सामने आया है कि 19 जून को केतन अग्रवाल ने महाबलेश्वर के एक बड़े रिजॉर्ट में लगभग 40 से 50 कमरे बुक किए थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिया गोयल पर केतन अग्रवाल की हत्या की मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है।  इस पूरे मामले की जांच करने वालों का दावा है कि सिया ने इस पूरे कांड की साजिश इसलिए रची, क्योंकि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी. वह अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ रिलेशन रखना चाहती थी।  पुलिस ने कहा कि सिया ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की प्लानिंग की. जांच के दौरान सामने आया कि सिया पहले 31 मई को केतन के साथ ट्रेकिंग के लिए लोहागढ़ किले गई थी. पुलिस को शक है कि इसी दौरान केतन को चट्टान से नीचे धकेलने का खयाल सबसे पहले उसके मन में आया था।  इसके बाद 14 जून को दोनों ने फिर से फोटोशूट के बहाने लोहागढ़ किले का विजिट किया. इस दौरान सिया ने यह कहकर हंगामा कर दिया कि उसके पास एक सांप आ गया है, लेकिन केतन को घाटी में धकेलने की प्लानिंग नाकाम रही. बाद में 18 जून को सिया के बर्थडे से एक दिन पहले वह केतन को एक बार फिर लोहागढ़ किले ले गई. पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी के साथ मिलकर उसने केतन को चट्टान से नीचे धकेल दिया गया।  मंगेतर के साथ सिया की रोमांटिक पोस्ट पुणे में मंगेतर की हत्या करने वाली 20 साल की सिया गोयल ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो। दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। उसने केतन को टैग भी किया था। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को केतन की मौत के दिन लोहगढ़ किले पर एक युवक 33°C तापमान में हुडी पहनकर आया था। पुलिस ने जांच में इसे ही आधार बनाकर एक-एक कड़ियां जोड़ीं। आखिरकार सिया और उसे बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को केतन की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। 19 जून को सिया का बर्थडे, केतन से पहले से सेलिब्रेशन शुरू कर दिया सोशल मीडिया पर सिया और उसके मंगेतर केतन का रिश्ता किसी परफेक्ट लव स्टोरी जैसी थी। 19 जून को सिया का बर्थडे था। केतन ने एक महीने पहले यानी 19 मई से ही काउंटडाउन सेलिब्रेशन शुरू कर दिया था। वह रोज उसे अलग-अलग तरीके से अपनी मंगेतर सरप्राइज देता। सिया सोशल मीडिया पर इसके वीडियो पोस्ट करती थी। ये पोस्ट अब वायरल हो रहे हैं। एक पोस्ट में केतन अपनी कार फूलों से सजाकर सिया को गिफ्ट देता दिखा। सिया ने इसका वीडियो पोस्ट कर लिखा- उसने 'पसंद है तुम्हें' वाली बात को बहुत सीरियसली से ले लिया। बैकग्राउंड में 'पसंद है तुम्हें' गाना भी बज रहा था। एक स्टोरी में उसने केतन की तस्वीर को ‘दैट स्माइल’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। केतन की मौत के अगले दिन सिया ने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट लिखी- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ पिता ने बयां किया दर्द, बोले- बेटा कोहिनूर था केतन के पिता विशाल अग्रवाल से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि 26 साल का बेटा गुजर गया, ये दुख समंदर से बड़ा है. मेरा बेटा मेरे बुढापे का सहारा था, मेरा वंशज था. विशाल अग्रवाल ने कहा कि मेरी चिता को वही मुखाग्नि देने वाला था. आज वही चला गया. मेरा सब खत्म हो गया. उन्होंने बताया कि केतन पढ़ाई में होशियार था. उसने यूएस से एमबीए किया था. इसके बाद वह मेरे बिजनेस में ही हाथ बंटा रहा था. बेटा मेरे लिए कोहिनूर था, जिसे धोखे से मार दिया।  कॉल रिकॉर्ड से प्रेमी का खुलासा, 2004 कॉल्स और 238 घंटे बातचीत हुई पुलिस को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल कम्युनिकेशन डेटा की जांच से पता चला सिया चेतन नाम के लड़के से लगातार संपर्क में थी। दोनों के बीच 1 जनवरी से 18 जून तक 2004 कॉल्स हुए। इससे दोनों के बीच गहरे संबंध के संकेत मिले। पुलिस ने चेतन की तस्वीरों और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की। जब उसकी तस्वीरों को CCTV फुटेज में दिख रहे हुडी वाले युवक से मैच किया गया तो हत्या का शक और मजबूत हो गया। इसके बाद पुलिस ने चेतन चौधरी को हिरासत में लिया। प्रेमी बोला- सिया बदनामी के कारण भागकर शादी के खिलाफ थी पूछताछ में चेतन से जब पूछा गया कि सिया और तुमने भागकर शादी क्यों नहीं की। इस पर उसने बताया कि सिया सगाई तोड़कर भागने के पक्ष में नहीं थी। उसे लगता था कि इससे उसके परिवार की बदनामी होगी। इसके बाद पुलिस ने सिया और चेतन दोनों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया। रियल एस्टेट कारोबारी थे केतन, शादी के लिए 17 करोड़ में पैलेस बुक था केतन अग्रवाल पुणे के गहुंजे के रहने वाले थे। वे रियल एस्टेट कारोबारी और सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर विशाल अग्रवाल के बेटे थे। विशाल पुणे के रियल एस्टेट सर्कल में ‘लैंड बैंक’ माने जाते हैं। केतन भी कंपनी में डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के पद पर थे। उन्होंने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से BBA किया था। अमेरिका के बैब्सन F.W. ओलिन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एंटरप्रेन्योरशिप में MS (मास्टर ऑफ साइंस) की डिग्री ली। सिया ड्राई फ्रूट्स कारोबारी की बेटी है। नवंबर में दोनों की शादी होनी थी। इसके लिए राजस्थान में 17 करोड़ रुपए का एक पैलेस बुक किया जा चुका था। मेहमानों के लिए दो चार्टर्ड प्लेन बुक थे। बहन को हुआ शक, 4 दिन बाद पहुंची थी सिया पुलिस जांच में 18 जून की … Read more

पाकिस्तान को भारत का सख्त संदेश, ख्वाजा आसिफ के बयान पर PoK का मुद्दा उठाकर दिया जवाब

 नई दिल्ली भारत ने  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया युद्ध संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा कि पीओके में अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की ओर से ऐसी बयानबाजी की जा रही है. साथ ही भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही कार्रवाई का मुद्दा भी उठायाव्।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों को लेकर हमने रिपोर्ट्स देखी हैं. इस तरह के बयान पाकिस्तान की अपनी विफलताओं को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की हताश कोशिश हैं. हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं.' रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदा हालात पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीतियों का नतीजा हैं।  उन्होंने कहा, 'पीओके में चल रहे घटनाक्रम पाकिस्तान की उस नीति का सीधा परिणाम हैं, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करना और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन शामिल रहा है.' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने पीओके में सरकारी विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति रोकी है, इंटरनेट सेवाएं बंद की हैं और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया है।  रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों, गलत नीतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।  भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस चेतावनी के तीन दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सिंधु जल संधि को लेकर भारत की किसी कार्रवाई से पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित होती है तो उनका देश सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है. एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा था, 'जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, जिसमें पानी भी शामिल है, खतरे में है, हम भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करेंगे. निश्चित रूप से करेंगे।