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कोलकाता हादसे का भयावह मंजर, चश्मदीद बोला- मलबे में दबे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे

कोलकाता कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया. यहां एक निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड के गिरने से 18 लोग घायल हो गए और कई अन्य के फंसे होने की आशंका है. हादसे से बचाए गए लोगों में से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है. मलबे के नीचे फंसे लोगों को ढूंढने और निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. हालांकि अभी यह सामने नहीं आ सका है कि इमारत के भीतर कितने लोग फंसे थे. घायलों को उपचार के लिए शहर के SSKM Hospital भेजा गया है। मलबे से निकाले गए 18 घायलों को SSKM अस्पताल में भेजा गया है।   पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना स्थल पर राहत व बचाव कार्य का जायजा लिया।   केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने कहा, 'अभी-अभी यह हादसा हुआ है. इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम राहत और बचाव अभियान है. बचाव कार्य जारी है और हमारी सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है.' उन्होंने कहा, कि हो सकता है कि इस निर्माण की अनुमति पिछली सरकार के दौरान दी गई हो. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में यह भी देखा गया था कि कोलकाता नगर निगम ने कई ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दी थी जो अवैध थे. सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और सभी पहलुओं को देखेगी।  मजदूरों पर गिरे बीम और भारी स्लैब सामने आया है कि शेड में काम कर रहे मजदूरों पर लोहे के बड़े भारी बीम और कंक्रीट के स्लैब गिर पड़े, जिससे उन्हें निकलने का मौका नहीं मिला और वह मलबे में ही दबे रह गए. ढांचा गिरने के तुरंत बाद, बचाव दल मौके पर पहुंचा और लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें मलबे के नीचे से मदद के लिए चीखें सुनाई दे रही थीं, क्योंकि बचाव दल अंदर दबे लोगों तक पहुंचने के लिए जी-जान से काम कर रहे थे।  मलबे में दबे लोगों की चीख-पुकार घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल उज्ज्वल कुमार ने हादसे के बाद का भयावह मंजर बताया. उन्होंने कहा कि मलबे के नीचे दबे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे. उन्होंने और उनके साथियों ने मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों को पानी पिलाया और राहत कार्य में मदद की।  ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम मौके पर मौजूद एक शख्स ने बताया कि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था. पहली और दूसरी मंजिल पर कंक्रीट के स्ट्रक्चर का काम पूरा हो चुका था. नीचे काम करते हुए लोगों पर ही पूरी इमारत ढह गई. दमकल विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि कंक्रीट डालने के काम के दौरान शेड ढह गया और उन्होंने यह भी कहा कि घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।  भारी बीम बन रही रेस्क्यू ऑपरेशन में रोड़ा भारी बीम और मोटी सरिया के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है इसलिए उन्हें हटाने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि फंसे हुए लोगों तक पहुंच बनाने के लिए  ड्रिलिंग की जा रही है. कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम के एक सदस्य ने कहा, 'मलबे के नीचे से लोगों के शोर सुनकर आवाज की दिशा में काम किया जा रहा है.' पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थिति पर नज़र रखने और बचाव एवं राहत कार्यों के समन्वय के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है. राज्य मंत्री इंद्रनील खान ने बचाव कार्यों की समीक्षा करने के लिए घटनास्थल का दौरा किया।  कैसे हुआ हादसा, होगी जांच- इंद्रनील खान इंद्रनील खान ने कहा है कि, 'हम हादसे के कारणों और किसी भी तरह की गड़बड़ी की जांच भी करेंगे, लेकिन अभी हमारी प्राथमिकता लोगों को बचाना है.' शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं, जबकि भाजपा नेता राकेश सिंह इससे पहले ही वहां का दौरा कर चुके थे. पिछले छह से सात महीनों से गोदाम का निर्माण कार्य चल रहा था. यह ज़मीन बेहेरा ब्रदर्स कंस्ट्रक्शन के शंभू बेहेरा की है, जबकि इस प्रोजेक्ट को डिवेलप असगर खान कर रहे थे. असगर खान का इलाके में दबदबा बताया जाता है. सामने आ रहा है कि इमारत के बनाए जाने में सुरक्षा मानकों और सुरक्षित निर्माण के तौर-तरीकों का पालन नहीं किया गया था. इन दावों पर आगे की जांच की जा रही है।  सरकार करेगी पूरे मामले की जांच- केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार इस हादसे को लेकर केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने कहा, 'अभी-अभी यह हादसा हुआ है. इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम राहत और बचाव अभियान है. बचाव कार्य जारी है और हमारी सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है.' उन्होंने कहा, कि हो सकता है कि इस निर्माण की अनुमति पिछली सरकार के दौरान दी गई हो. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में यह भी देखा गया था कि कोलकाता नगर निगम ने कई ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दी थी जो अवैध थे. सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और सभी पहलुओं को देखेगी।  तारातला में निर्माणाधीन गोदाम का शेड गिरने के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं. हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। 

रास लाफान हादसे पर कतर के अमीर ने PM मोदी से की बात, भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली  कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दर्दनाक हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत की हो गई है। इस बीच मंगलवार को कतर के अमीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास फोन करके इस हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कतर और भारत नागरिकों की भलाई और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए हादसे को लेकर कतर के अमीर ने जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- 'मैं कतर के अमीर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने फोन करके कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना जताई। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और एक-दूसरे के साथ एकजुटता से खड़े हैं।' 12 भारतीय नागरिकों की मौत     कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में पुष्टि करते हुए बताया, ''रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।''     अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है। दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक है रास लाफान रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ, जब फैसिलिटी में कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सपोर्ट टर्मिनल के कुछ हिस्सों को फिर से चालू करने का काम चल रहा था, तभी धमाका हुआ। कंपनी के मुताबिक, रविवार रात इसी काम के दौरान बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई। बरजान फैसिलिटी कतर के गैस आधारभूत संरचना का एक अहम हिस्सा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1.4 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रतिदिन है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को चलाने के लिए किया जाता है, जो इस सूखे खाड़ी देश में पानी की आपूर्ति करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा जवाब, पाकिस्तान-चीन को घेरा; जम्मू-कश्मीर पर स्पष्ट रुख

नई दिल्ली जम्‍मू-कश्‍मीर पर भारत के रुख से पूरी दुनिया वाकिफ है. हर कोई जानता है कि नई दिल्‍ली को उसके स्‍टैंड से कोई नहीं डिगा सकता, लेकिन पाकिस्‍तान अपने यार चीन के साथ मिलकर अक्‍सर ही साजिश रचता रहता है. संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्‍तान ने चीन के साथ मिलकर फिर से जम्‍मू-कश्‍मीर का मुद्दा उठाया. हर बार की तरह इस बार भी भारत ने पाकिस्‍तान के साथ ही चीन को इस कदर रगड़ा कि उनको कोई जवाब नहीं सूझ पड़ा।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित अरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया. भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती. ‘Bridging the Implementation Gap: Security Council Resolutions and Maintenance of International Peace and Security’ विषय पर आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की. इस पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पहले भी भारत का अभिन्न हिस्सा था, आज भी है और आगे भी भारत का ही रहेगा।  UN को भी दिखाया आईना भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए. पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।  पाकिस्‍तान का दांव फिर धराशायी भारत ने यह भी कहा कि जब UN80 पहल के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा के जनादेशों की समीक्षा की जा रही है, तो सुरक्षा परिषद के जनादेशों को भी उसी गंभीरता से परखा जाना चाहिए. भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश करता रहा है. भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर पर उसका रुख अडिग है और यह विषय पूरी तरह संप्रभु भारतीय अधिकार-क्षेत्र के भीतर आता है। 

बारिश से बेहाल मुंबई, जलभराव के चलते रेलवे ट्रैक डूबे और अंधेरी सबवे बंद

 मुंबई  मानसून की पहली बारिश मंगलवार को मुंबई में आफत बनकर आई। सड़कें, रेलवे ट्रैक और सबवे सभी जगहों पर पानी भर गया और शहर के कई हिस्सों में जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए मुंबई में भारी बारिश का अनुमान लगाते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। पूरे राज्य में बारिश का मौसम बने रहने के कारण महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। जलभराव से रोजमर्रा की जिंदगी बाधित मंगलवार तक हुई भारी बारिश के कारण मुंबई के कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया। सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया और सिविक अधिकारियों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाने के कारण यात्रियों को ट्रैफिक में रुकावटों का सामना करना पड़ा। एवरार्ड नगर में पानी से भरे सबवे को भी आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। साकी नाका मेट्रो स्टेशन इलाके समेत शहर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरों में भारी बारिश का रोजमर्रा की आवाजाही पर असर साफ दिखा। 'नहीं ढूंढ़ पाए समस्या का अस्थाई समाधान' अंधेरी अंडरपास की स्थिति के बारे में बात करते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अधिकारी ऋतिक ने कहा, "हम पानी भरने की इस गंभीर समस्या का कोई अस्थायी समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। हमारे अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए यहां तैनात रहते हैं कि गाड़ियां यहां से न गुजरें। लेकिन कुछ रिक्शा चालक फिर भी अपनी गाड़ियों को वहां से निकालने की कोशिश करते हैं। एक रिक्शा सबवे के बीच में फंस गया था। उसकी जान खतरे में थी। हमारे दो अधिकारियों ने उसे बाहर निकालने में मदद की।" बीएमसी के एक और अधिकारी रॉबर्ट ने कहा, "हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अंडरपास के अंदर कोई भी गाड़ी न जाए। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।" रेल सेवा जारी रही बीएमसी ने कहा कि पानी से भरे अंधेरी अंडरपास को छोड़कर सभी सबवे चालू रहे, जबकि शहर भर में रेल सेवा सामान्य रूप से चलती रही। जोरदार बारिश के बावजूद, वेस्टर्न रेलवे ने पुष्टि की कि सुबह के व्यस्त समय में हार्बर लाइन और चर्चगेट-दहानू कॉरिडोर समेत मुख्य रूटों पर सबअर्बन ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं। हालांकि, रात भर लगातार हुई बारिश के कारण मुंबई और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में जलभराव हो गया। भारी बारिश से थमी मुंबई की रफ्तार वसई, विरार और नालासोपारा क्षेत्रों में बुधवार रात से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है. जलभराव के कारण स्थानीय सेवाएं प्रभावित हुईं और यात्रियों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पहली ही तेज बारिश ने कई क्षेत्रों में परेशानी बढ़ा दी है. वहीं, भवानी पार्क इलाके में एक पेड़ भी गिर गया, जिसे हटाने के लिए दमकल विभाग की टीम युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटी हुई है. लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।  मुंबई में रेड वॉर्निंग के बीच बुधवार शाम से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इसी दौरान दादर स्टेशन के पूर्वी इलाके में भारी बारिश के कारण एक बड़ा पेड़ गिरकर एक कार पर आ गिरा, जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ. सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ की शाखाएं काटकर उसे हटाने का काम शुरू कर दिया. लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की भी खबरें हैं।   मुंबई में मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक लगातार जारी रही. मुंबई में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. भारी बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई. पनवेल से नवी मुंबई आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी रही. सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक समय लगा।   बारिश का असर मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं पर भी साफ दिखाई दिया. पश्चिमी रेलवे की लोकल ट्रेनें 20 से 25 मिनट की देरी से चल रही हैं. वहीं सेंट्रल लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार और भी ज्यादा प्रभावित हुई है तथा कई ट्रेनें लगभग 30 मिनट की देरी से चल रही हैं. सेंट्रल रेलवे की सेवाओं में भी व्यवधान दर्ज किया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।  सबसे बड़ा असर हार्बर लाइन पर देखने को मिला. रेलवे प्रशासन ने जानकारी दी है कि तकनीकी कारणों के चलते हार्बर लाइन की सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं. प्रशासन के अनुसार भारी बारिश और उससे जुड़े तकनीकी कारणों की वजह से यह कदम उठाया गया. इससे नवी मुंबई और मुंबई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।  बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आंकड़ों के अनुसार 23 जून सुबह 8 बजे से 24 जून रात 2 बजे तक शहर क्षेत्र में औसतन 78 मिमी बारिश दर्ज की गई. पूर्वी उपनगरों में 87 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 113 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. रात 1 बजे से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा बारिश भांडुप कॉम्प्लेक्स में 40 मिमी दर्ज हुई. इसके अलावा एस वार्ड में 35 मिमी, टी वार्ड में 31 मिमी और मिथागर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 29 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।  पश्चिमी उपनगरों में आनंद नगर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 32 मिमी, दिंडोशी वसाहत और दहिसर में 30 मिमी तथा मालवणी फायर स्टेशन क्षेत्र में 26 मिमी बारिश हुई. वहीं शहर क्षेत्र में काला किला धारावी में 19 मिमी, आदर्श नगर स्कूल वर्ली में 16 मिमी तथा दादर और वर्ली फायर स्टेशन क्षेत्र में 15 मिमी बारिश दर्ज की गई. मिटी नदी का जलस्तर भी बढ़कर 1.83 मीटर तक पहुंच गया है, जिस पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।  मुंबई में कितनी बारिश हुई? बीएमसी के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 23 जून को सुबह 8:00 बजे से रात 11:00 बजे के बीच शहर … Read more

Mundra Port Drug Case में बड़ा खुलासा, दिल्ली के नाइट क्लबों पर ED का एक्शन

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े ड्रग्स मामलों में से एक, गुजरात के मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को दिल्ली में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीमों ने दिल्ली में पांच अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह कार्रवाई करीब 21,000 करोड़ रुपये की कीमत के 3,000 किलो ड्रग्स की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और उससे हुई कमाई के निवेश को लेकर की गई है। जांच एजेंसियों को इस मामले में कुछ बेहद चौंकाने वाले इनपुट मिले थे, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया। जानकारी के मुताबिक ईडी इस बात की पड़ताल कर रही है कि नशीले पदार्थों की तस्करी से कमाए गए काले धन को कहां-कहां सफेद किया गया। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी को पुख्ता शक है कि ड्रग्स के इस अवैध धंधे से हुई मोटी कमाई को दिल्ली के नामी नाइट क्लबों में इनवेस्ट किया गया था। हरप्रीत सिंह तलवार के ठिकानों पर रेड ईडी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को हुई इस छापेमारी का मुख्य फोकस मामले से जुड़े दो बड़े किरदारों पर रहा। ED ने हरप्रीत सिंह तलवार, शम्सुद्दीन और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार को गिरफ्तार भी किया था। वह हाल ही में जमानत पर बाहर आया था। क्या है 21 हजार करोड़ का मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस? यह पूरा मामला भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी से जुड़ा हुआ है। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जांच एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत करीब 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस भारी-भरकम ड्रग्स की खेप की कीमत लगभग 21,000 हजार करोड़ आंकी गई थी। एनआईए के साथ-साथ ईडी भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इस केस की जांच कर रही है। कांग्रेस ने पीएम मोदी पर बोला था हमला कांग्रेस ने 2022 में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खूब हमला बोला था। मुंद्रा पोर्ट और गुजरात के अन्य बंदरगाहों से लगातार भारी मात्रा में मिल रही ड्रग्स की खेपों को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा था कि गुजरात में व्यापार करने की सहूलियत की जगह 'इज ऑफ डूइंग ड्रग बिजनेस' चल रहा है। राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा था, "गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर तीन बार में हजारों करोड़ की ड्रग्स बरामद हुई। कानून-व्यवस्था की ऐसी धज्जियां उड़ने पर भी प्रधानमंत्री आखिर कब तक चुप रहेंगे?"

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट! इस हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, जल्द हो सकता है समझौता

नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट सामने आया है. फरवरी 2025 में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने के बाद अब इस हफ्ते अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत आ रहे हैं. इस दौरान वह क्रेंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्‍य सीनियर सिटीजन अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।  दोनों देश अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत अंतरिम व्यापार समझौते और संयुक्त बयान पर बातचीत करेंगे. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच डील को आगे बढ़ाएंगे. 21 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय की ओर से इसकी जानकारी दी गई. साथ ही भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी सोशल मीडिया पोस्‍ट के जरिए इसकी जानकारी दी है।  भारत और अमेरिका के बीच इस डील पर अपडेट तब आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई थी. अमेरिका की ओर से कहा गया है कि जेमिसन ग्रीयर का भारत दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 13 फरवरी 2025 को हुई बैठक के बाद, डील को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हो रहा है. इस बैठक के तहत डील पर विस्‍तार से आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।  सर्जियो गोर ने एक्स पोस्ट पर क्या कहा? सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'नई दिल्ली में राजदूत ग्रीर का स्वागत करने के लिए उत्साहित हूं। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई बैठकें निर्धारित हैं।' ग्रीर की पीयूष गोयल के साथ बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अगले महीने की महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अंतरिम समझौता भविष्य के लिए अहम मंत्रिस्तरीय स्तर की यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच चल रही अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत का हिस्सा है। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करेगा। बीते रविवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि उनके अमेरिकी समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत के लिए मेरे समकक्ष कल दिल्ली आ रहे हैं।' बीटीए का पहला चरण अगले महीने तक होगा पूरा इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मुख्य उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते पर वार्ता को आगे बढ़ाना होगा। पीयूष गोयल ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया था कि बीटीए का पहला चरण अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है। यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका की ओर से सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में घोषित यह अस्थायी टैरिफ 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (एमएफएन) शुल्क दरों के अतिरिक्त लगाया गया था। 150 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर सकता है।   यह नई मंत्रिस्तरीय बातचीत 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में हुई मुख्य वार्ताकार स्तर की बैठकों के बाद हो रही है। उन बैठकों में भी प्रस्तावित व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई थी।भारत और अमेरिका दोनों आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से चरणबद्ध व्यापार व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। साथ ही दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। और कहां फंसा है पेच? अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने मार्च में भारत समेत कई देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत एकतरफा जांच दो मामलों में शुरू की थी। ये जांच ग्लोबल सप्लाई चेनों में कथित बंधुआ मजदूरी और ‘अत्यधिक उत्पादन क्षमता’ से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। यूएसटीआर ने 2 जून को भारत समेत 54 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था। यह टैरिफ बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में लगाने की बात कही गई थी। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है। इस पर हितधारक 22 जून तक सुनवाई में भाग लेने के अनुरोध और बयान जमा कर सकते हैं। यूएसटीआर 7 जुलाई को सुनवाई करेगा। दूसरी जांच की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है। क्‍यों महत्‍वपूर्ण है ये बैठक?  भारत और अमेरिका एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. कुछ सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा 190 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है. दोनों सरकारों ने आन वाले सालों में व्‍यापार को और बढ़ाने की इच्‍छा जताई है. इस कारण जेमिसन ग्रीर की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्‍योंक इससे व्‍यापार वार्ता की दिशा का संकेत मिल सकता है।  अभी तक डील पर क्‍या हुआ है?  भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौते का ऐलान किया गया है, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी नहीं हुई है. इस डील पर दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं, जल्‍द ही इस डील पर फाइनल मोहर लग सकती है. वहीं भारत अमेरिका से टैरिफ को और कम करने की मांग रख सकता है, जबकि अमेरिका भारत से एग्री के कुछ प्रोडक्‍ट्स को परमिशन देने की मांग कर रहा है। 

गुजरात में AAP विधायक दोषी करार, पत्नी सहित 9 आरोपियों को 7 साल कैद और ₹96 हजार जुर्माना

नर्मदा  गुजरात में नर्मदा जिले की एक कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और अन्य को 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई है। इन पर वन विभाग के अधिकारियों से मारपीट, धमकी देने और वसूली करने का आरोप था। सजा के अलावा विधायक की पत्नी और अन्य पर 96 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कुल 9 आरोपियों में 4 महिलाएं शामिल हैं। मामला 30 अक्टूबर 2023 का है। आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल की जमीन पर हुए अतिक्रमण हटा दिए थे। इसके बाद विधायक चैतर वसावा ने पांच अधिकारियों को अपने घर बुलाया था। प्राथमिकी के मुताबिक, चैतर वसावा और उनके साथियों ने अधिकारियों के साथ मारपीट की और उनसे प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने के नाम पर वसूली की थी। हवाई फायरिंग के भी आरोप लगे थे अभियोजन पक्ष के अनुसार, चैतर वसावा ने इस दौरान हवाई फायरिंग भी की थी। आरोप है कि जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, उसके लिए उनके पास वैध लाइसेंस नहीं था। इसके चलते उन पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा दंगा, वसूली, सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने और धमकी देने जैसी धाराएं भी लगाई गईं। आरोप है कि अगले दिन उनके निजी सहायक ने वन अधिकारियों से दोबारा मुआवजे की मांग की थी। अधिकारी ने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे इस घटना के अगले ही दिन, चैतर वासावा के पीए और अन्य लोगों ने दो अधिकारियों से 30-30 हजार रुपए की फिरौती मांगी थी। चूंकि वन कर्मचारियों के पास कैस पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया और दो अधिकारियों ने 30-30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। कोर्ट में इसे सबूत के तौर पर पेश किया गया था मामले में कौन-कौन आरोपी था इस मामले में चैतर वसावा के अलावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा, पीए जितेंद्र वसावा और 6 ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था। शकुंतला वसावा उस समय नर्मदा जिला पंचायत की सदस्य थीं। घटना के बाद कुछ आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, चैतर वसावा कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। उन्होंने 14 दिसंबर 2023 को सरेंडर किया था। बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत से चर्चा में आए थे चैतर वसावा AAP के टिकट पर साल 2022 के विधानसभा चुनाव में डेडियापाड़ा सीट से जीतकर चर्चा में आए थे। उनकी जीत ने दक्षिण गुजरात के आदिवासी इलाके में AAP को मजबूत आधार दिया था। चैतर वसावा ने खुद को आदिवासी भूमि अधिकारों के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, अब अदालत के फैसले ने उनकी राजनीतिक राह मुश्किल कर दी है।

1 जुलाई से बदलेंगे कई नियम! LPG, रेलवे टिकट और आधार समेत इन 7 बदलावों का पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली जून का महीना कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है और फिर जुलाई की शुरुआत होने वाली है. हर महीने की तरह इस बार भी 1 जुलाई से कई अहम फाइनेंशियल नियमों में बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ सकता है।  नौकरीपेशा कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, टैक्सपेयर्स और बैंक ग्राहकों समेत करोड़ों लोगों के लिए ये बदलाव जानना बेहद जरूरी है. कुछ नियम आपके खर्च को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि कुछ बदलाव आपके निवेश, बैंकिंग और वित्तीय योजनाओं से जुड़े हो सकते हैं. ऐसे में जुलाई शुरू होने से पहले इन नए नियमों की जानकारी रखना आपके लिए जरूरी साबित हो सकता है।  आधार कार्ड से जुड़ा नियम 1 जुलाई 2026 से आधार कार्ड में ई-मेल आईडी अपडेट कराना और आसान हो जाएगा. यूआईडीएआई (UIDAI) ने जानकारी दी है की आधार मोबाइल ऐप के जरिए ई-मेल अपडेट करने पर लगने वाला 75 रुपये का चार्ज अगले छह महीने तक नहीं लिया जाएगा. यह सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी. इस कदम का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने आधार रिकॉर्ड अपडेट रखवाना है और डिजिटल सर्विसेस तक उनकी पहुंच को बेहतर बनाना है।  रेलवे यात्रियों के लिए बदलेगा नियम 1 जुलाई 2026 से रेलवे में बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माना और सख्त हो सकता है. केंद्र सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बिना टिकट सफर करने पर न्यूनतम जुर्माना ₹250 से बढ़ाकर ₹500 किया जा सकता है. इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करना, ट्रेन में हंगामा करना, भीख मांगना, अवैध फेरी लगाना या महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में सफर करने जैसी गलतियों पर भी भारी जुर्माना लग सकता है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से रेलवे में अनुशासन और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है।  एफडी के नियमों में बदलाव पिछले महीने आरबीआई की एमपीसी बैठक के बाद कुछ बैंकों ने इंटरेस्ट रेट में बदलाव किए थे. जुलाई की शुरुआत के साथ एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) से जुड़े नियमों और ब्याज दरों में बदलाव देखने को मिल सकता है. बैंक समय-समय पर अपनी एफडी दरों की समीक्षा करते हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार इनमें बदलाव करते हैं. ऐसे में निवेशकों को नई एफडी कराने या पुरानी एफडी को रिन्यू कराने से पहले बैंक की ताजा ब्याज दरों और नियमों को चेक जरूर कर लेना चाहिए।  क्रेडिट कार्ड से जुड़ा नियम 1 जुलाई 2026 से एसबीआई कार्ड अपने कुछ क्रेडिट कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट नियमों में बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव खास तौर पर PhonePe SBI Credit Card PURPLE और PhonePe SBI Credit Card SELECT BLACK कार्डधारकों पर लागू होगा. नए नियमों के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की सीमा तय की जाएगी और कुछ अतिरिक्त प्रकार के लेनदेन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. ऐसे में इन कार्डों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को नए नियमों की जानकारी पहले से ले लेनी चाहिए, ताकि उनके रिवॉर्ड बेनिफिट्स पर पड़ने वाले असर को समझा जा सके. इसके अलावा भी कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड्स के नियमों से जुड़े बदलाव जुलाई के महीने में कर सकते हैं।  LPG के दाम में बदलाव जून के पहले हफ्ते में ही देशभर में घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर महंगा हो गया था. सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी. पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार था जब रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए. इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़त की गई थी. नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है. अब जुलाई के महीने में भी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव होने की उम्मीद है. अगर मिडिल ईस्ट का टेंशन पूरी तरह खत्म नहीं होता है और ऊर्जा सप्लाई में परेशानी आती है तो एलपीजी की कीमतों में बदलाव हो सकता है।  पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर भारत में पेट्रोल के दामों पर भी दिखा. मई 2026 में पेट्रोल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई. 25 मई को हुई बढ़ोतरी के अनुसार पेट्रोल 2.46 रुपये से 2.95 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हुआ. इससे पहले 23 मई को 0.87 रुपये से 1.46 रुपये था और उससे पहले 0.82 रुपये से 1.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. अब जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव हो सकता है।  ATF फ्यूल की कीमतों में बदलाव हफ्तेभर पहले ही केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी की थी. नई दरों के अनुसार, डीजल के निर्यात पर 14 रुपये प्रति लीटर और ATF के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया था. हालांकि, पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया. सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इन दरों की समीक्षा करती रहती है. ऐसे में नए महीने की शुरुआत में भी एटीएफ की कीमतों में बदलाव हो सकता है। 

जम्मू रेलवे स्टेशन की भीड़ से राहत, अमरनाथ यात्रा के लिए तवी फ्रंट बना नया हब

जम्मू  श्री अमरनाथ जी की वार्षिक यात्रा 2026 को लेकर जम्मू शहर में तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन द्वारा तवी रिवर फ्रंट को एक मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।तवी रिवर फ्रंट पर करंट पंजीकरण, आरएफआईडी कार्ड जारी करने और देश-विदेश से आने वाले भक्तों के लिए अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए युद्ध स्तर पर टेंट सिटी तैयार की जा रही है। भगवती नगर चौथे पुल से लेकर वेयर हाउस के नजदीक तक टेंट सिटी बन रही है। तवी किनारे पर जगह-जगह सुरक्षाबलों की तैनाती करने के साथ मोबाइल शौचालय भी तैनात कर दिए गए हैं। लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। जोर-शोर से यहां टेंट लगाने के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की कवायद जारी है। इस नए केंद्र के बनने से रेलवे स्टेशन और अन्य जगहों पर होने वाली भारी भीड़ से राहत मिलेगी। अमरनाथ यात्रा आगामी 3 जुलाई से औपचारिक रूप से शुरू होने जा रही है, जिसे लेकर पूरा जम्मू शहर बम-बम भोले के जयकारों से गूंजने के लिए तैयार है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस ने संभाला मोर्चा यात्रा की संवेदनशीलता को देखते हुए जम्मू पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है। सुरक्षा कारणों के चलते तवी रिवर फ्रंट के पूरे इलाके को पुलिस द्वारा सील कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है और बिना आधिकारिक अनुमति के किसी भी बाहरी व्यक्ति या वाहन को क्षेत्र में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस बार तवी रिवर फ्रंट पर आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल करंट पंजीकरण और टोकन की सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके ठहरने, खान-पान और चिकित्सा की भी उत्तम व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही इस बार तवी तट पर तीर्थयात्रियों के लिए विशेष आकर्षण भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि जम्मू पहुंचने वाले भोले के भक्त यहां से एक दिव्य और सुखद स्मृति लेकर लौटें। करंट पंजीकरण के लिए टोकन वितरण 30 जून को शुरू होगा और उसके बाद नान केवाईसी पंजीकरण को ईकेवाईसी पंजीरकण में बदलने का काम 1 जुलाई से शुरू होगा।  

अमेरिका ने कर दिया 300 अरब डॉलर का ऐलान, अब खाड़ी देशों की जेब पर नजर! जवाब देंगे मार्को रुबियो?

वाशिंगटन/तेहरान  मध्य पूर्व युद्ध को खत्म करने वाले समझौते की सबसे बड़ी शर्त रही- ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की. ईरान को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ये रकम काफी है लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि इस भारी-भरकम राशि का खर्चा कौन उठाएगा? इस्लामाबाद MoU में लिखा है कि अमेरिका अपने खाड़ी के साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक ठोस योजना तैयार करेगा. इस योजना को अंतिम समझौते के साथ 60 दिनों के अंदर लागू किया जाएगा।  इसके अलावा अमेरिका सभी जरूरी लाइसेंस, छूट और अनुमतियां भी देगा ताकि पैसे के लेन-देन में कोई रुकावट न आए. इस फंड के अलावा अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते ही ईरान पर लगी सभी प्रकार की पाबंदियां हटा ली जाएंगी और उसे तुरंत तेल बेचने की छूट मिल जाएगी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि ईरान को ये सब पाने के लिए 60 दिनों में शर्तों का पालन करना होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का एक भी डॉलर ईरान को नहीं जाएगा. तो फिर ईरान को इतने पैसे देगा कौन? कौन देगा ईरान को 300 बिलियन डॉलर?     ईरान की इस डील को लेकर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेरिका इसके पैसे अपने अमीर खाड़ी देशों से वसूलेगा. आपको बता दें कि ये वही देश हैं, जहां अमेरिका के मिलिट्री बेसेज हैं और जिन पर युद्ध के दौरान ईरान ने हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं. युद्ध के तबाह हो चुके ईरान को इस फंड की बहुत जरूरत है, लेकिन खाड़ी देश अभी तैयार नहीं दिख रहे।      सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने पिछले हफ्ते इस फंड पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने ये कहकर बात टाल दी कि पहले विश्वास बहाल करना होगा. ईरान के हमलों के बाद रिश्ते सुधारने की बातचीत जरूरी है, उसके बाद ही आर्थिक सहयोग और निवेश की बात हो सकती है. सऊदी अरब अपनी घरेलू परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है।      वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पहले ही ईरान से युद्ध क्षतिपूर्ति मांगी थी, हालांकि समझौते से पहले उसका रुख कुछ नरम हुआ था. UAE युद्ध से पहले ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी था, बावजूद इसके उसे ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा।  मार्को रुबियो देंगे इस सवाल का जवाब? अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन सवालों के बीच तीन दिन के खाड़ी देशों के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे यूएई, कुवैत और बहरीन के नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं. उनकी इस यात्रा का मकसद ही अपने साझेदार देशों में ये विश्वास जगाना है कि तेहरान के साथ अमेरिका की डील से उनका कोई नुकसान नहीं होगा. उन्होंने इस देशों को साफ करना होगा कि 300 अरब डॉलर का इंवेस्टमेंट पैकेज आएगा कहां से और उसे कैसे इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के लिए तो ये डील है लेकिन खाड़ी देशों के सर्वाइवल का सवाल है क्योंकि तेहरान ये रकम मिलने के बाद खुद को खड़ा तो करेगा लेकिन उनकी सेना और क्षेत्रीय प्रभाव भी मजबूत होगा. कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई और सऊदी जैसे देश खाड़ी की सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं, ऐसे में ईरान का मजबूत होना उनके लिए सिरदर्द है।  क्या-क्या आ रही हैं चुनौतियां?     खाड़ी देशों को डर है कि पैसा ईरान के हथियारों और प्रॉक्सी समूहों पर खर्च न हो जाए. इसलिए उन्हें मजबूत गारंटी चाहिए. जब तक उन्हें ये विश्वास मिल नहीं जाता, तब तक वे शायद ही अपना कोष ईरान के लिए खोलें।      समझौते में ईरान के फ्रोजन असेट्स को पूरी तरह उपलब्ध कराने का वादा है. जेडी वेंस ने कहा कि कतर और जेयर्ड कुश्नर ने इसके लिए एक दिलचस्प समाधान निकाला है. अमेरिका और कतर इस प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।      वेंस के मुताबिक अगर पैसे छोड़े गए तो वे ईरानी लोगों को खाना खिलाने और अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने में लगाए जाएंगे. ईरान इस पैसे से अमेरिका से सोयाबीन, मक्का और गेहूं खरीद सकेगा. हालांकि तेहरान के केंद्रीय बैंक ने इससे इनकार कर दिया है।  समझौते की 60 दिनों का मियाद अब शुरू हो चुकी है. अगर इस दौरान अच्छी प्रगति हुई तो 300 अरब डॉलर का फंड ईरान को नया जीवन दे सकता है, लेकिन अगर विश्वास की कमी बनी रही तो यह सिर्फ कागजी वादा बनकर रह सकता है. यह फंड मध्य पूर्व में स्थायी शांति का आधार बन सकता है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को समझौता करना होगा. फिलहाल सवाल यह है कि क्या खाड़ी देश ईरान को फिर से खड़ा करने के लिए अपना खजाना खोलेंगे?