samacharsecretary.com

सियासी बदलाव लगभग तय! सिद्दरमैया को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, डीके शिवकुमार की ताजपोशी संभव

 नई दिल्ली कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच शुरुआत में ढाई- ढाई साल की सत्ता की शर्त के साथ शुरू हुई कांग्रेस सरकार में आखिरकार तीन साल बाद बदलाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद आखिरकार सिद्दरमैया राज्य की सत्ता छोड़ राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि राज्य के मंत्रिमंडल और राज्यसभा में दूसरे सदस्यों के नामांकन में भी सिद्दरमैया की पसंद को माना जाएगा। कांग्रेस हाई कमान की बैठक में फैसला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं के साथ पहले अलग-अलग और फिर एक साथ बैठक की। शुरुआत में सिद्दरमैया इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें मना लिया। ध्यान रहे कि नेतृत्व बदलाव को लेकर पार्टी में पहले भी बैठकें होती रही थीं, लेकिन सिद्दरमैया तब राजी नहीं हुए थे और उन्हें बिना सहमत किए कांग्रेस बदलाव का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। वैसे भी कर्नाटक विधानसभा में सिद्दरमैया के समर्थकों की संख्या ज्यादा है। सोमवार को कर्नाटक के दोनों ही नेता अपने समर्थक विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे। केसी वेणुगोपाल ने बताया- राज्यसभा सीटों पर हुई चर्चा बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने हालांकि मीडिया से कहा कि आप लोग जो भी अंदाजा लगा रहे हैं, वह सिर्फ अंदाजा है, कोई सच्चाई नहीं है। आज हमने कर्नाटक की राज्यसभा सीटों और काउंसिल सीटों पर चर्चा की। उनके साथ सिद्दरमैया और शिवकुमार भी थे। वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक की राज्यसभा और काउंसिल सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी दूसरी सीटों के साथ की जाएगी। आज हमने यही तय किया है। किसी और बात पर चर्चा नहीं हुई। लेकिन, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया अगले कुछ दिनों में इस्तीफा देंगे। गौरतलब है कि एक जून को राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होगी और इसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिवकुमार का शपथग्रहण तब होगा जब सिद्दरमैया राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे।

बॉर्डर चेकपोस्टों पर सख्ती बढ़ी, अवैध प्रवासियों में खौफ का माहौल

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का घुसपैठियों पर एक्शन शुरू हो गया है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति का जमीनी असर दिखने लगा है. राज्य सरकार की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाने की घोषणा के बाद, बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों में भारी हड़कंप मच गया है. मंगलवार सुबह उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट और मालदा के सीमावर्ती इलाकों में सैकड़ों बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं वापस अपने देश लौटने के लिए सीमा पर जुटने लगे. दूसरी ओर, मालदा के इंग्लिश बाजार टाउन में राज्य का पहला होल्डिंग सेंटर पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जहां कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी के बीच संदिग्ध प्रवासियों को रखा जा रहा है।  बांग्लादेशी घुसपैठिया बॉर्डर पर जुटने लगे. नए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पुलिस को बिना वारंट संदिग्धों को गिरफ्तार करने की खुली छूट दी गई है. हालांकि, सीएए के दायरे में आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को इस कार्रवाई से पूरी तरह बाहर रखा गया है, लेकिन अवैध रूप से रह रहे अन्य प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान अब राजनीतिक बयानों से निकलकर कड़े प्रशासनिक एक्शन में बदल चुका है।  दरअसल, यह नजारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का हालिया आदेश के बाद सामने आया है। 21 मई 2026 को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को आदेश दिया कि कहीं भी कोई बांग्लादेशी घुसपैठी पकड़ा जाए, तो सीधा सीमा सुरक्षा दल (BSF) को सौंप दो। उन्होंने कहा कि अब इन्हें अदालत नहीं ले जाया जाएगा बल्कि सीधे वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने यह आदेश पिछले साल अप्रैल में संसद में पारित आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत दिया। इस कानून के तहत विदेशियों के भारत में प्रवेश, प्रवास और निकास को नियंत्रित किया जा सकता है। इस आदेश के बाद बंगाल सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए ‘होल्डिंग सेंटर‘ बना रही है, जिसमें ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ के तहत देश से निकाला जाएगा।  इस फ्रेमवर्क के तहत, जिन लोगों पर अवैध रूप से देश में घुसने का शक है, उन्हें 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. इस दौरान, जिला मजिस्ट्रेट और तय अधिकारी उनकी पहचान की जांच करते हैं, बायोमेट्रिक जानकारी इकट्ठा करते हैं, और उन्हें वापस भेजने से पहले उनका रिकॉर्ड सेंट्रल डेटाबेस में अपलोड करते हैं।  मालदा के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, “हिरासत केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया है. अभी वहां नौ बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है. जरूरी जांच और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. हिरासत में लिए गए लोगों के साथ तय कानूनी नियमों के मुताबिक ही बर्ताव किया जा रहा है।  इस नए कदम को 'इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, 2025' से भी जोड़ा जा रहा है. इस एक्ट ने इमिग्रेशन और विदेशी नागरिकों से जुड़े कई पुराने कानूनों की जगह ले ली है।  इस कानून ने निगरानी, ​​​​हिरासत और देश-निकले के लिए एक टेक्नोलॉजी-बेस्ड ढांचा पेश किया. इसके साथ ही, हेड कांस्टेबल या उससे ऊपर के रैंक वाले पुलिस अधिकारियों को संदिग्ध उल्लंघन पट्टियों को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार भी दिया।  डिपोर्टेशन पर पॉलिटिक्स सियासी स्तर पर इन डेवलपमेंट्स ने बंगाल में घुसपैठ और सिटिजनशिप पर लंबे वक्त से चल रही बहस को और तेज कर दिया है. बीजेपी नेताओं ने इस ड्राइव का स्वागत किया है और दावा किया है कि राज्य गैर-कानूनी माइग्रेशन और एक्सट्रीमिस्ट नेटवर्क के लिए कमजोर हो गया है।  नॉर्थ मालदा से बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने कहा, "हमारे देश और हमारे राज्य को सुरक्षा की जरूरत है. बंगाल रोहिंग्या, आतंकवादियों और 'जिहादी' एलिमेंट्स के लिए एक कॉरिडोर बन गया था। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि सिटिजनशिप (अमेंडमेंट) एक्ट के तहत सुरक्षित कम्युनिटीज इस कार्रवाई के दायरे से बाहर रहेंगी।  केंद्र सरकार के बाद के एक छूट आदेश के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दी गई है, जो 31 दिसंबर, 2024 से पहले भारत में दाखिल हुए थे।  जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है और होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचता दिख रहा है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रियाएं शुरू होने की संभावना है।  सीएए के दायरे से बाहर के लोग सीधे होंगे गिरफ्तार बंगाल में अवैध प्रवासियों को पकड़ने के लिए जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा के बाद शुरू हुई है. सीमा पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े जाने और जेल जाने के डर से ये प्रवासी अब खुद ही अपनी पहचान उजागर कर वापस लौटने की गुहार लगा रहे हैं. इस पूरी कार्रवाई की नींव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई थी. मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम यानी सीएए (CAA) के दायरे से बाहर के सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।  24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए राज्य के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग की फॉरेनर्स ब्रांच ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इस कड़ी में मालदा जिला पूरे राज्य में पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जहां होल्डिंग सेंटर ने बकायदा काम करना शुरू कर दिया है. मालदा के इंग्लिश बाजार टाउन के चंदन पार्क में बनाए गए इस सेंटर में 24 घंटे की सीसीटीवी निगरानी रखी जा रही है. इसकी सुरक्षा में 12 सशस्त्र पुलिसकर्मियों सहित नागरिक सुरक्षा स्टाफ और सिविक वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है।  क्या है इमिग्रेशन एक्ट 2025 इस पूरे अभियान को कानूनी तौर पर बेहद मजबूत और प्रभावी बनाने का काम नए ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025’ ने किया है. इस नए कानून ने पुराने और जटिल … Read more

होर्मुज को लेकर भारत के लिए बड़ी खबर, 1 जून से नए रूट की संभावनाएं तेज

नई दिल्‍ली  भारत पिछले कुछ दशक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे युद्ध ने तेल और गैस सहित तमाम सेक्‍टर पर जबरदस्‍त असर डाला है. चौतरफा मुश्किलों से घिरे भारत के लिए अगले महीने की शुरुआत से एक राहत भरी खबर आ रही है. भारत और खाड़ी देश ओमान के बीच मुक्‍त व्‍यापार समझौता 1 जून, 2026 से लागू हो जाएगा. इस समझौते की सबसे खास बात ये है कि ओमान होर्मुज के दायरे से बाहर है तो इस समझौते से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को क्‍या फायदा मिलने वाला है।  भारत और ओमान के बीच 18 दिसंबर, 2025 को कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) हुआ था, जो 1 जून से प्रभावी हो जाएगा. भारत ने पिछले कुछ समय से ओमान के अलावा कई देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता किया है. जाहिर है कि इस समझौते से दोनों ही देशों को एक-दूसरे के बाजार में बिना टैरिफ चुकाए अपने सामान बेचने का मौका मिलेगा, लेकिन ओमान इस मामले में कुछ खास है. इसकी सबसे बड़ी वजह उसका होर्मुज के दायरे से बाहर होना. इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच बिना होर्मुज की बाधा के ही कारोबार किया जा सकता है।  एफटीए से क्‍या होगा फायदा इस मुक्‍त व्‍यापार समझौते में ओमान ने भारत के 98.08 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्‍म कर दिया है. इससे भारत का ओमान को किया जाने वाला 99.38 फीसदी एक्‍सपोर्ट पूरी तरह टैरिफ फ्री हो जाएगा. इसका मतलब है कि भारत का लगभग पूरा ही निर्यात टैरिफ फ्री हो जाएगा. भारत ने भी ओमान से आने वाले 77.79 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्‍म कर दी है, जो कुल आयात का 94.81 फीसदी होता है. भारत ने कुछ संवेदनशील सेक्‍टर जैसे डेयरी प्रोडक्‍ट, चॉकलेट और ज्‍वैलरी सेक्‍टर को इस एफटीए से बाहर रखा है।  भारत के किस सेक्‍टर को होगा फायदा     टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर, फुटवेयर     जेम्स एंड ज्वेलरी     इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल्स, प्लास्टिक, फर्नीचर     फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज     एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स (चावल, अनाज आदि)     भारतीय प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी आसान होगी और IT, हेल्थकेयर, एजुकेशन, लॉजिस्टिक्स आदि में बेहतर एक्सेस मिलेगा.     ओमान में 100% FDI की सुविधा कई सेक्टरों में मिलेगी.     दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार अभी करीब 10.6 अरब डॉलर है, जबकि इस समझौते से यह बढ़कर 12.5 अरब डॉलर पहुंच सकता है. होर्मुज संकट में कैसे मददगार होर्मुज से आवाजाही पर असर की वजह से भारत का आयात काफी प्रभावित हो रहा है. अभी शिपिंग रूट बदलने पड़ रहे, जिससे इंश्‍योरेंस की कॉस्‍ट बढ़ रही है और आयात महंगा हो रहा है. ओमान के साथ समझौता होने से वहां के पोर्ट खासकर सलालाह और दुक्‍म को भारत अपने हब के रूप में इस्‍तेमाल कर सकता है. यह दोनों पोर्ट होर्मुज स्‍ट्रेट से बाहर हैं और हिंद महासागर के रास्‍ते सीधे जुड़े हुए हैं. भारत इन पोर्ट के जरिये खाड़ी देश, अफ्रीका और यूरोप को अपना सामान भेज भी सकता है और वहां से मंगवा भी सकता है।  कम हो जाएगी होर्मुज पर निर्भरता ट्रेड मार्केट एक्‍सपर्ट तो इस समझौते को ओमान ट्रेड कॉरिडोर भी कहने लगे हैं. उनका कहना है कि पेट्रोकेमिकल्‍स सहित तमाम सामान को ओमान के रास्‍ते डायवर्ट करके निर्यात अथवा आयात किया जा सकता है. इससे होर्मुज पर निर्भरता कम हो जाएगी और भारत को व्‍यापार का नया रास्‍ता मिलेगा. ओमान हमेशा से न्‍यूट्रल और मीडिएटर की भूमिका निभाता है. इस समझौते से उसका भारत के साथ संबंध तो बेहतर होगा ही, सामान के साथ व्‍यापार के नए कॉरिडोर को खोलने में भी मदद मिलेगी। 

उड़ान से पहले IndiGo प्लेन में धुआं फैलने से हड़कंप, एयरपोर्ट स्टाफ ने संभाला मोर्चा

नई दिल्ली बेंगलुरु हवाई अड्डे पर IndiGo की एक फ्लाइट को आपातकालीन स्थिति में खाली कराया गया है, क्योंकि प्लेन से धुआं निकलता दिखाई दिया। इंडिगो की यह फ्लाइट 6E 6017, बेंगलुरु से चेन्नई जा रही थी और उड़ान भरने के लिए रनवे की ओर बढ़ रही थी। तभी प्लेन से अचानक धुआं निकलता दिखाई दिया। इस घटना के होते ही प्लेन से सभी यात्री और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन अभी इस घटना के पीछे की वजह पता नहीं चली है। सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया बाहर IndiGo ने एक बयान में कहा, 'सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, तुरंत लोगों को बाहर निकाला गया और सभी संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।' इंडिगो ने बताया, 'सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं और उन्हें टर्मिनल पर ले जाया गया है, जहां हमारी टीमें उनकी देखभाल कर रही हैं ताकि उनकी भलाई सुनिश्चित की जा सके।' एयरलाइन ने बताया कि इस फ्लाइट को ऑपरेट करने के लिए दूसरा विमान उपलब्ध कराया गया है। इंतजार के दौरान यात्रियों को जलपान कराया जा रहा है।

गरीबों के लिए नई योजना, ₹5 में फिश-राइस देने का CM शुभेंदु अधिकारी ने किया ऐलान

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य की 400 कैंटीनों में 5 रुपये में माछ भात (मछली और चावल) मिलेगा. वहीं अवैध बांग्लादेशियों को लेकर उन्होंने सख्त बयान दिया और कहा कि उन्हें सीधे बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. जेल में रखकर  उन पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया जाएगा।   अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने माछ-भात को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार 5 रुपये में माछ-भात मुहैया कराएगी. उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्यभर में 400 कैंटीन खोली जाएंगी, जहां सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  शुभेंदु सरकार का ये फैसला राजनीतिक लिहाज से भी काफी मायने रखता है, क्योंकि बंगाल की संस्कृति में मछली का एक अपना महत्व है. बंगाल में 'माछे-भात बंगाली' कहावत भी चलती है. बंगाल में माछ-भात को सांस्कृतिक पहचान माना जाता है।  अब सरकार ने सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात देने का ऐलान किया है. कल्याणी में एक बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सब्सिडाइज्ड फूड की सुविधा पूरे बंगाल में बनी डेडिकेटेड कैंटीनों में शुरू की जाएगी, जहां 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार कल (27 मई) से 'अन्नपूर्णा योजना' के लिए फॉर्म जारी करेगी, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाएंगे। फॉर्म भरते ही 3,000 रुपये ट्रांसफर होने शुरू हो जाएंगे। सीएम ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पूरे बंगाल में 400 विशेष कैंटीनों में 5 रुपये में मछली-चावल का भोजन मिलेगा। लक्ष्मी भंडार योजना की भी शुरुआत होगी। इसकी कल विस्तृत जानकारी मिलेगी। आपको कल ही फॉर्म की एक प्रति भी मिलेगी। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों व्यवस्थाएं रहेंगी। क्या है सरकार का प्लान? बताया जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद ही शुभेंदु अधिकारी ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया था. ममता सरकार में 5 रुपये में अंडा-भात मिलता था, लेकिन अब यहां इतने ही रुपये में मछली को शामिल किया जाएगा।  बंगाल में ममता सरकार के दौर में सरकारी कैंटीन बनाई गई थीं, जहां दिहाड़ी मजदूर, मजदूर, ऑटो-रिक्शा चलाने वाले और गरीब लोग 5 रुपये में अंडा-भात खा सकते थे. अब राज्य की 400 कैंटीनों में माछ-भात दिया जाएगा।  ममता बनर्जी ने फैलाया था डर बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान मछली बड़ा मुद्दा बनी थी. तब टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने मांस-मछली खाने को लेकर डर फैलाया था।  ममता बनर्जी ने कई चुनावी रैलियों में आरोप लगाया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आ गई तो मांस, मछली और अंडा खाने पर बैन लगा देगी. उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी वाला अपनी मर्जी का खाना दूसरों पर थोपते हैं।  इसके बाद बीजेपी के तमाम नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि ऐसा कुछ नहीं होगा. बीजेपी सांसद रवि किशन ने तो यहां तक कह दिया था कि बंगाल के लोग 4 मई के बाद 4 गुना मछली खाएंगे. उन्होंने कहा था कि जहां-जहां एनडीए सरकार है, वहां से मछली लाकर बंगाल के कुएं-तालाबों में डालेंगे। 

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ईरान ने MQ-9 ड्रोन गिराने का किया दावा

तेहरान  खाड़ी में चल रहे बवाल के खत्म होने के आसार नजर आ ही रहे थे कि अचानक अमेरिका की ओर से हुए हमले ने एक बार फिर से खाड़ी में गोले-बारूद की आवाज गुंजा दी है. पहले अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपनी रक्षा में दक्षिणी ईरान की नावों पर हमला किया है. इसके जवाब में अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है. IRGC ने ये भी दावा किया हैहा कि उसने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, IRGC ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।  इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. अल जजीरा के मुताबिक खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा. बकरीद के मौके पर जारी अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि समय को पीछे नहीं मोड़ा जा सकता और अब क्षेत्र के देश पहले जैसे हालात स्वीकार नहीं करेंगे. ईरानी सरकारी टीवी और AFP की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का प्रभाव पश्चिम एशिया में लगातार कमजोर हो रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उसकी स्थिति पहले से कम होती जा रही है।  हमलों के साथ वार्ता भी है जारी इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने को लेकर बातचीत भी आगे बढ़ती दिख रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौता ज्ञापन पर कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, हालांकि अंतिम समझौता अभी दूर है. बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस युद्ध रोकना और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना है. इसके बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्र में तनाव कम करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।  परमाणु मुद्दे पर अटकी हुई है बात दरअसल परमाणु मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा. इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और हिज्बुल्लाह जैसे ईरान समर्थित समूहों को लेकर भी मतभेद जारी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक अगर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसे अंतिम स्वीकृति के लिए मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा. वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि खामेनेई पहले ही इस समझौते की व्यापक रूपरेखा को समर्थन दे चुके हैं। 

शादी में दिखी मिसाल, बेटे के विवाह पर 3500 ग्रामीणों को मिला बीमा सुरक्षा का गिफ्ट

 नांदेड महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कंधार तालुका स्थित बहादरपुरा गांव में एक शादी सामाजिक सरोकार और मानवता की मिसाल बन गई. आमतौर पर शादी समारोहों में लाखों रुपये सजावट, आतिशबाजी और भव्य आयोजनों पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन बहादरपुरा के पेठकर परिवार ने अपने बेटे सिद्धेश्वर पेठकर के विवाह को समाज सेवा से जोड़ते हुए एक अनोखी पहल की।  पेठकर परिवार ने पूरे गांव का कराया बीमा सिद्धेश्वर पेठकर और मंजुषा के विवाह समारोह के अवसर पर परिवार ने पूरे गांव के करीब 3500 लोगों का दुर्घटना बीमा कराने का निर्णय लिया. इस पहल का उद्देश्य गांव के लोगों को भविष्य में किसी भी दुर्घटना या अप्रिय घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है. परिवार का मानना है कि शादी केवल व्यक्तिगत खुशी का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम होना चाहिए।  गांव में जैसे ही इस पहल की जानकारी सामने आई, लोगों में खुशी और गर्व का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी शादी में ऐसा सामाजिक संदेश देखा है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह पहल आने वाले समय में अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।  पेठकर परिवार ने बताया कि आज के समय में अचानक होने वाली दुर्घटनाएं कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल देती हैं. ऐसे में यदि पहले से बीमा जैसी सुविधा उपलब्ध हो तो कठिन समय में लोगों को सहारा मिल सकता है. इसी सोच के साथ विवाह समारोह को सामाजिक सुरक्षा अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया गया।  चर्चा में बनी ये पहल परिवार के इस कदम की इलाके में व्यापक चर्चा हो रही है. सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना की है. लोगों का कहना है कि अगर समाज के सक्षम लोग अपने निजी आयोजनों को सामाजिक हित से जोड़ें, तो कई जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है।  बहादरपुरा गांव में अब यह शादी केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है. “वधू का आगमन हुआ और गांव सुरक्षित हो गया”. यह संदेश अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. पेठकर परिवार की इस अनोखी पहल ने यह साबित कर दिया कि खुशियों के अवसर पर समाज के बारे में सोचने से बदलाव की नई शुरुआत की जा सकती है। 

क्वाड बैठक में अमेरिका का बड़ा संदेश, मार्को रुबियो बोले- रूस-चीन भी नहीं चाहेंगे होर्मुज बंद हो

नई दिल्ली दिल्ली में आज क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हो गई. इस बैठक की शुरुआत में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और कहा कि क्वाड देशों के बीच साझा गतिविधियों और साझा चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की जा रही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में कई बड़े मौके और चुनौतियां सामने हैं, जिन पर मिलकर काम करने की जरूरत है।  वहीं इस बैठक में शामिल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हर हाल में खुला रहना चाहिए और रहेगा. उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जो कुछ हो रहा है, वह गैरकानूनी, अस्थिर और दुनिया के लिए अस्वीकार्य है।  माना जा रहा है कि बैठक का सबसे बड़ा फोकस चीन के बढ़ते प्रभाव और खासकर क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में उसके दबदबे को चुनौती देना होगा. दरअसल, पिछले साल क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स पहल शुरू की गई थी. अब इस बैठक में सप्लाई चेन को विविध बनाने और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान हो सकता है. अमेरिका इस पहल की अगुवाई कर रहा है और माना जा रहा है कि QUAD देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।  इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा होगी. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को देखते हुए क्वाड देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति बना सकते हैं. इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, ट्रांसनेशनल क्राइम, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।  समुद्र, मिनरल्स और ऊर्जा… QUAD ने खोला नया मोर्चा, जयशंकर बोले- हुई बेहद अहम बैठक दिल्ली में हुई QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चारों देशों के बीच बेहद ‘उपयोगी और उत्पादक’ चर्चा हुई है. भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई बड़े फैसलों पर सहमति बनाई है।  इंडो-पैसिफिक में क्वाड की नई रणनीति, अमेरिका ने लॉन्च किया सर्विलांस प्लान दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह साझेदारी अब सिर्फ चर्चा का मंच नहीं रह गई है, बल्कि ‘फ़ोरम ऑफ एक्शन’ बन चुकी है. उन्होंने भारत को सफल मेज़बानी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि बैठक में बेहद उपयोगी और सार्थक चर्चा हुई. रुबियो ने कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया चारों देश मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  अमेरिकी विदेश मंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि QUAD देशों ने इंडो-पैसिफिक सर्विलांस लॉन्च करने का फैसला किया है. उनका कहना था कि इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम समुद्री क्षेत्र है, जहां से करीब 60 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है. ऐसे में समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।  रुबियो ने कहा कि बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क लॉन्च करने का भी फैसला लिया गया है. माना जा रहा है कि इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक सप्लाई चेन को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि QUAD सिर्फ सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और अन्य देशों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।  इंडो-पैसिफिक पर क्वाड का फोकस, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर बनी रणनीति दिल्ली में आयोजित क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक खत्म होने के बाद भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने साझा बयान जारी किया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वांग और जापान के विदेश मंत्री मोटेगी ने बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया।  इस बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि QUAD देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि चारों देशों ने सुरक्षित समुद्री व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।  जयशंकर ने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए सप्लाई चेन को मजबूत और भरोसेमंद बनाना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि QUAD देशों ने इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. विदेश मंत्री के मुताबिक बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, फर्टिलाइजर्स और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. माना जा रहा है कि चीन पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क तैयार करने को लेकर QUAD देशों के बीच रणनीतिक तालमेल और मजबूत हुआ है।   

बंजर से उपजाऊ बनेगा लद्दाख, इगू-फे नहर का पानी लाएगा हरित क्रांति

 स्पितुक   उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की देखरेख में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्पितुक इलाके की बंजर भूमि को हरा भरा बनाने की दिशा में अभियान ने जोर पकड़ लिया है। लद्दाख के स्पितुक गांव में लगभग 800 एकड़ बंजर व क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वाकांक्षी पारिस्थितिक व भूमि पुनर्स्थापन अभियान छेड़ दिया गया है। यह जानकारी रविवार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सरल व किफायती फ्रेशवाटर इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से सदियों से सूखी पड़ी भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना है। इस पहल के तहत हाल ही में पुनर्जीवित किए गए इगू–फे नहर से अतिरिक्त पानी को साधारण मशीनों की मदद से स्पितुक क्षेत्र की बंजर भूमि तक पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर मीठे पानी के प्रवाह से सूखी मिट्टी में नमी लौटने से नुकसान दायक तत्व बाहर निकल जाएंगे व प्राकृतिक वनस्पति का विकास शुरू हो जाएगा। 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही इससे धीरे-धीरे यह बंजर इलाका उपजाऊ व नमी-संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकेगा। उपराज्यपाल ने स्पितुक इलाकों का दौरा कर क्षेत्र में हरियाली लाने की दिशा में हो रहे कार्याें के बारे में जानकारी ली। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने का अभियान लद्दाख में पहले से सफल रहे प्रोजेक्ट हिम सरोवर की उपलब्धियों को आगे बढ़ाता है। यह इगू–फे नहर पुनर्जीवन परियोजना का पूरक भी है। इस नहर के जरिए इस समय लद्दाख में 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही है। बंजर इलाकों में नहर से पानी पहुंचने से वहां पर पेड़ पौधे लगाने की मुहिम जोर पकड़ लेगी। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने की परियोजना से भूजल स्तर में सुधार, मिट्टी का कटाव रोकने, भूमि की उर्वरता बढ़ाने व टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है। पहल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह माडल भविष्य में लद्दाख सहित अन्य शुष्क क्षेत्रों में भी पारिस्थितिक बदलाव व बंजर भूमि पुनर्जीवन के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

मुसलमानों को बनाया निशाना! शरिया स्कीम के जरिए हजारों करोड़ की ठगी का आरोप

 नई दिल्ली शरिया कानून के मुताबिक ब्याज (रिबा) कमाना हराम होता है और कई मुसलमान इस वजह से अपना पैसा बैंकों में भी जमा नहीं कराते हैं। ऐसे ही मुसलमानों को टारगेट करके एक महिला ने 6 हजार करोड़ रुपये जुटा लिए और 3000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। लालच दिया जाता था कि शरिया के नियमों का पालन करते हुए निवेश पर सालाना 36 फीसदी का मुनाफा मिलेगा। शुरुआत में कुछ लोगों को इसी तरह मोटा मुनाफा देकर विश्वास जीता गया और फिर हजारों करोड़ रुपये डकार लिए गए। पीटीआई के मुताबिक, ईडी ने कहा कि शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य पर 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक मुनाफे का वादा करके लोगों से 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाने का आरोप है। हालांकि, वे मूल राशि भी वापस करने में विफल रहे जिससे 1.72 लाख से अधिक निवेशकों से 3,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में ईडी की अब तक की जांच और अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि पिछले सप्ताह गुरुग्राम से गिरफ्तार की गई नौहेरा शेख ने शरिया कानून के मुताबिक मुसलमानों को निवेश और भारी मुनाफे का लालच दिया था और हजारों करोड़ रुपये जुटा लिए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से बेल खारिज किए जाने और सरेंडर के आदेश के बाद नौहेरा एक महीने से अधिक समय से फरार चल रही थी। महाठगी की आरोपी शेख ने अदालतों और जांच एजेंसियों को कई बार गच्चा दिया था। उसने सुप्रीम कोर्ट को यह कहकर भी भ्रमिक करने की कोशिश की कि उसने हैदराबाद पुलिस के सामने सरेंडर किया था, लेकिन उसे हिरासत में लेने से इनकार कर दिया गया। नौहेरा शेख की 400 करोड़ की संपत्ति जब्त नौहेरा शेख के पास मौजूद 400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और पीड़ितों को इसे लौटाने की प्रक्रिया चल रही है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नौहेरा शेख, उसके परिजनों और अन्य ने लाखों लोगों को अपनी पोंजी स्कीम में निवेश के लिए लालच दिया और उनकी कमाई हड़प ली। शुरुआत में निवेश करने वालों को भारी-भरकम मुनाफा भी दिया गया, लेकिन बाद में करीब 1.7 लाख जमाकर्ताओं ने अपनी गाढ़ी कमाई शरिया वाले निवेश के नाम पर गंवा दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच का आदेश दिया था और ईडी से कहा था कि जब्त संपत्तियों की नीलामी करके पीड़ितों को रकम लौटाई जाए। आरोपी और उसके सहयोगियों ने कई शपथ पत्र दायर करके संपत्तियों की बिक्री में देरी की भरसक कोशिश की। उसके एक सहयोगी ने अपना नाम 'कल्याण बनर्जी' बताते हुए खुद को पीएमओ का अधिकारी बताने की कोशिश की। उसे जनवरी में गिरफ्तार कर लिया गया था। हीरा ग्रुप के जरिए की गई ठगी 2024 में जब एजेंसी ने नौहेरा के घर पर छापेमारी की तो 12 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गईं, जिनमें बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज बेंज जैसी महंगी कारें शामिल थीं। 92 लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया था। नौहेरा शेख ने 'हीरा ग्रुप' नाम से कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए इतनी बड़ी रकम की ठगी की गई। शेख ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। उसने खासतौर पर मुसलमानों को टारगेट बनाया जो शरिया के कानून के मुताबिक निवेश करना चाहते थे। ईडी के मुताबिक उसने 36 फीसदी सालाना मुनाफे का लालच दिया। लेकिन बाद में लोगों को मूलधन भी वापस नहीं कर पाई। गुरुग्राम में पहचान बदल रह रही थी नौहेरा गुरुग्राम में पकड़ी गई नौहेरा शेख यहां अपनी पहचान बदलकर रह रही थी। ईडी और हरियाणा पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन के दौरान पकड़ी गई नौहेरा शेख सेक्टर 45 में रह रही थी। फर्जी आधार के जरिए उसने अपना नाम शेख खामर जहां बताया था।