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Crude Oil सस्ता होने से खुशखबरी, पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्‍ली  कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लुढ़ककर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 4.55% की गिरावट के साथ 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.73% टूटकर 92.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. दोनों ही अनुबंधों के लिए 7 मई के बाद का यह सबसे निचला स्तर है. क्रूड की कीमतों में आई यह गिरावट भारत के लिए बड़ी राहत है।  भारत के लिहाज से सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट टल सकता है. तनाव से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी का परिवहन इसी मार्ग से होता था. इस रूट के सुचारू होने से भारत में गैस और तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी, जिससे देश में एलपीजी की किल्लत का खतरा पूरी तरह टल जाएगा और आपूर्ति चेन मजबूत होगी।  अमेरिका-ईरान में शांति की उम्मीद से टूटे दाम तेल की कीमतों में यह बड़ी गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर “काफी हद तक बातचीत पूरी” कर चुके हैं. इस समझौते के तहत मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।  भले ही ते बाजार इस खबर से झूम उठा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अभी पूरी तरह जश्न मनाना जल्दबाजी होगी. राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों से ईरान के साथ किसी भी समझौते में जल्दबाजी न करने को कहा है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रुकावटों समेत कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों में मतभेद अभी भी बरकरार हैं।   

EV Buyers Alert: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी में होने जा रहा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर मिलने वाली सब्सिडी को और बढ़ा सकती है। भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के लिए अतिरिक्त फंड की डिमांड करने की तैयारी में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल वाहनों की जगह EV टू-व्हीलर अपनाएं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सस्ता हो सकता है। यही वजह है कि EV कंपनियों के शेयरों में भी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार पहले ही PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत FY2026 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी के लिए करीब ₹10,900 करोड़ आवंटित कर चुकी है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग के बाद इस योजना को जुलाई तक बढ़ा दिया गया था। अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार इस योजना को और मजबूत बनाना चाहती है। हालांकि, अतिरिक्त फंड कितना होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों से मंत्रालय इस पर चर्चा कर रहा है कि किन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर इस सूची में सबसे ऊपर है। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हों, ताकि तेल आयात पर दबाव कम किया जा सके। खास बात यह है कि अब EV केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि जरूरत बनते जा रहे हैं। हाल के आंकड़े भी यही कहानी बताते हैं। मई के पहले आधे हिस्से में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में 13.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल टू-व्हीलर बिक्री में 5.5% की गिरावट रही। इसका मतलब साफ है कि लोग अब पेट्रोल स्कूटर की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटर को प्राथमिकता देने लगे हैं। एथर (Ather Energy) के चीफ बिजनेस ऑफिसर रवनीत सिंह फोकेला ने कहा कि पहले हर घर में पेट्रोल वाहन जरूरी माना जाता था, लेकिन अब हर परिवार कम से कम एक EV रखना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि EV अब घर की दूसरी गाड़ी के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑफिस जाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने या रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल स्कूटर चलाने में प्रति किलोमीटर कई रुपये खर्च होते हैं, वहीं EV स्कूटर की लागत करीब 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक आ जाती है। रात में घर पर चार्जिंग कर लेना और पेट्रोल पंप की लाइन से बचना लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। अगर सरकार सब्सिडी और बढ़ाती है, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमतों में और कमी आ सकती है। इससे ओला (Ola Electric), एथर (Ather Energy), TVS iQube, बजाज चेतक (Bajaj Chetak) जैसे ब्रांड्स को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। भारत की EV क्रांति अब अगले बड़े चरण में प्रवेश करती दिख रही है, जहां सरकार, कंपनियां और ग्राहक तीनों मिलकर क्लीन मोबिलिटी को नई रफ्तार देने की तैयारी में हैं।

Heatwave से परेशान लोगों को राहत, IMD ने बताया कब और कहां होगी बारिश

नई दिल्ली इस समय पूरा उत्तर और मध्य भारत भीषण लू और टेम्परेचर का टॉर्चर झेल रहा है और फिलहाल इससे राहत मिलने के आसार दिखाई नदीं दे रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले 7 दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, IMD ने इसी बीच मॉनसून पर बड़ी खुशखबरी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो-तीन दिन में मॉनसून भारत में यानी केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके लिए अनुकूल मौसमी स्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन में कहा है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान, असम, मेघालय, लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। दिल्ली में पिछले 14 सालों सबसे गर्म रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (25 मई) को न्यूनतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 5.7 डिग्री अधिक है और लगभग 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई। IMD के अनुसार, इस महीने में न्यूनतम तापमान मई के महीने में इससे पूर्व आखिरी बार 26 मई, 2012 को न्यूनतम तापमान इससे अधिक 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। IMD के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मई महीने की शुरुआत में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जब इस साल 21 मई को न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस था। सोमवार को दिल्ली में आंधी-बरिश आईएमडी के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है, लोदी रोड में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। वहीं, रिज में यह 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 4.4 डिग्री अधिक है और आयानगर में यह 32 डिग्री सेल्सियस बना रहा जो सामान्य से 5.3 डिग्री अधिक है। IMD के एक अधिकारी ने कहा, ''सफदरजंग, लोदी रोड और आयानगर में गर्म रात की स्थिति दर्ज की गई है।'' IMD ने 25 मई को शाम के समय बहुत हल्की बारिश या धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई है, जिससे मामूली राहत मिल सकती है। IMD का येलो अलर्ट आईएमडी के अनुसार, गर्म रात तब घोषित की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहता है और न्यूनतम तापमान में सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है। आईएमडी ने सोमवार को लू चलने की आशंका जताते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है जिसके कारण अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले 3-5 दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। IMD के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में विदर्भ के ब्रह्मपुरी में सबसे अधिक 47.1°C तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि 29 मई से अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। गर्मी के बीच राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आगे बढ़ रहा है। 24 मई तक मॉनसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E से लेकर 17°N/95°E तक पहुँच चुकी है। अगले 2-3 दिनों में इसके दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट एक तरफ जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों में असम और मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा (21 सेमी या अधिक) दर्ज की गई है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में भी भारी से बहुत भारी बारिश हुई है। IMD ने केरल, माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी अगले 4-5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और आसपास के क्षेत्रों पर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है।इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है। पंजाब-हरियाणा से लेकर पश्चिमी यूपी तक बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, इससे कुछ राहत मिल सकती है। IMD के मुताबिक, 25 से 27 मई के दौरान उप-दहमालयी पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा 25 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होने की भी संभावना है। इसके अलावा 28 से 30 मई के बीच, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज-बिजली के साथ मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान है।

कांगो-युगांडा में इबोला का कहर, भारत सतर्क; मेडिकल सहायता भी भेजी गई

नई दिल्ली वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला फैलने को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 17 मई को WHO ने बढ़ते इन्फेक्शन और मौतों की संख्या को देखते हुए इसे इंटरनेशनल लेवल की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के तहत लिया गया था।  संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि आपको बता दें, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. कांगो के अधिकारियों ने कहा है कि देश के पूर्वी हिस्से में इबोला ('बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन) के संदिग्ध मामलों की संख्या अब 900 से ज्यादा हो गई है. कांगो के कम्युनिकेशन मंत्रालय ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि 904 संदिग्ध मामले और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं. अधिकारियों ने पहले 700 से ज्यादा संदिग्ध इबोला मामलों और 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घोषणा की थी, जिनमें से ज्यादातर इतुरी प्रांत में थीं, जहां यह बीमारी फैली हुई है, जहां यह बीमारी एंडेमिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि इस बीमारी के फैलने से अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए बहुत ज्यादा खतरा है, लेकिन दुनिया भर में बीमारी फैलने का खतरा कम है. देश में हेल्थ अथॉरिटीज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे इस बीमारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।  भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता इस बीच, भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए इबोला से प्रभावित देशों DRC और युगांडा को मदद दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप के बीच, भारत ने दुनिया भर में एकजुटता दिखाते हुए मानवीय और मेडिकल सहायता दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कन्फर्म किया है कि भारत ने 'अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (अफ्रीका CDC) को तुरंत मेडिकल सप्लाई और सेफ्टी किट की पहली खेप भेज दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कंसाइनमेंट में मेडिकल सप्लाई, सेफ्टी किट और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए दूसरे जरूरी इक्विपमेंट शामिल हैं।  भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भारत सरकार द्वारा मदद भेजने के साथ ही, सरकार ने अपने नागरिकों के लिए DRC, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर इबोला से प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।  देश के सभी राज्यों में हाई अलर्ट भारत सरकार की इस एडवाइजरी के बाद, देशभर के सभी राज्यों की सरकारें भी अलर्ट मोड में आ गई हैं. पूरे देश में एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के कांगो और युगांडा में इबोला फैलने को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है. राहत की बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, सुरक्षा और सावधानी के तौर पर, सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (खासकर दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट) समेत और बंदरगाहों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।  कांगो, युगांडा और साउथ सूडान (जिन्हें हाई-रिस्क वाले देश माना गया है) से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और डिटेल्ड मेडिकल जांच जरूरी कर दी गई है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने हेल्थ डिपार्टमेंट को तैयार कर दिया है, इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध मामले को संभालने के लिए खास आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल (जैसे जयपुर में RUHS अस्पताल) तैयार रखे गए हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने राज्यों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं, जिसमें यात्रियों को सलाह दी गई है कि अगर उनमें इबोला के कोई भी लक्षण दिखें, तो वे 21 दिनों तक खुद पर नजर रखें।  इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन बेहद खतरनाक इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन वास्तव में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस स्ट्रेन से होने वाली मौतों की दर (केस फैटालिटी रेट) लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक होती है, जो इसे अत्यंत घातक बनाती है. जहां इबोला के कुछ अन्य स्ट्रेन (जैसे जायर स्ट्रेन) के लिए टीके और इलाज मौजूद हैं, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी लाइसेंस्ड टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. यह वायरस किसी इन्फेक्टेड या मरे हुए व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या शरीर के दूसरे लिक्विड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके लक्षण 21 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू हो सकते हैं. इन लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं, जिसके बाद गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के कई अंगों का काम करना बंद कर देना (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। 

सुप्रीम कोर्ट की NTA को फटकार, NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले हुए नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) से कोई सबक नहीं सीखा है. साथ ही, मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कराने के लिए टेस्टिंग एजेंसी की जगह एक मज़बूत और स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडी) बनाने की अर्जी पर केंद्र, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और सीबीआई से जवाब मांगा है।  यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच के सामने आया. बेंच ने निर्देश दिया कि अर्जी की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा दूसरी पार्टियों को भी दी जाए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो नीट एग्जाम कराने के लिए जिम्मेदार है, से कहा कि वह 2024 में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के पालन पर गुरुवार तक एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे कहा कि, यह दुख की बात है कि, उन्होंने (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने अपना सबक नहीं सीखा है. यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट के समझ आ चुका है. एक कमेटी, एक मॉनिटरिंग कमेटी थी जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें मान लिया गया था. हम चाहते हैं कि एनटीए कमेटी द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के पालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे।  बेंच ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की वकील तन्वी दुबे के जरिए फाइल की गई याचिका पर नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी एक जैसे मामलों को एक साथ जोड़ रहा है. मेडिकल बॉडी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह नीट यूजी कराने के लिए एनटीए को पुनर्गठन करने या उसकी जगह एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली लाने का निर्देश दे. कोर्ट ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से 22.7 लाख से ज़्यादा छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला हो रहा है।  मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए एनटीए ने 3 मई को जो अंडरग्रेजुएट स्तर का नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) लिया था, उसे 12 मई को पेपर लीक के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था, जिसकी अब सीबीआई जांच कर रही है। 

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, बोले- अब हर मौत का हिसाब होगा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों को लेकर ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने चेतावनी दे दी है कि 2021 चुनाव के बाद हुए कथित हमलों की कानूनी जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी है। खास बात है कि 2026 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अधिकारी पहली बार रविवार को नंदीग्राम पहुंचे थे। हमलों का रखा है रिकॉर्ड नंदीग्राम में अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने उसके कार्यकर्ताओं पर हुए तृणमूल कांग्रेस के कथित हमलों का रिकॉर्ड रखा है। उन्होंने कहा, '2021 विधानसभा चुनावों के बाद कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को तोड़ा गया और कई पार्टी समर्थकों को मारा गया। सभी का हिसाब रखा गया है और सभी को कानूनी न्याय मिलेगा।' उन्होंने कहा, 'अगर आप चाहें, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों की ईंटें खींच लें, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना। भाजपा ऐसे कामों को बढ़ावा नहीं देती है। मुझे सब याद है और मैं किसी भी बात को नहीं छोड़ूंगा।' मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मेरे लिए वोट करने में कई लोग मारे गए हैं।' उन्होंने कहा, 'मैंने पूरा रिकॉर्ड रखा है। भरोसा कीजिए, मैं नंदीग्राम का कर्ज चुकाऊंगा।' नंदीग्राम से वादा रविवार को नंदीग्राम में आयोजित रैली में, अधिकारी ने विधायक पद से अपने इस्तीफे को लेकर समर्थकों के बीच फैली चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि सीट छोड़ने से इस क्षेत्र से उनका जुड़ाव कमजोर नहीं होगा। नंदीग्राम को अपना 'घर' और अपने राजनीतिक उत्थान की जन्मस्थली बताते हुए अधिकारी ने कहा कि 2003 से संघर्ष के दौरान बना उनका रिश्ता भवानीपुर जाने के बावजूद पहले की तरह कायम रहेगा। अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। जीत के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी। इससे पहले 2021 में भी नंदीग्राम में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को मामलू अंतर से हरा दिया। हालांकि, 2026 में उन्होंने बनर्जी के सामने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की है। छोटे भाई को दी जिम्मेदारी खास बात है कि सीएम अधिकारी ने नंदीग्राम की जिम्मेदारी छोटे भाई सोमेंदु अधिकारी को दी है। उन्होंने कहा, 'फिलहाल मेरे ऊपर पूरे राज्य की ज़िम्मेदारी है। सरकार चलाने के काम के दबाव के कारण मैंने सोमेंदु अधिकारी को यह खास जिम्मेदारी सौंपी है। नंदीग्राम में पंचायत, प्रशासन और जनता की सेवा से जुड़े मामलों में पांच विधायक उनकी मदद करेंगे।'

गर्मी का कहर शुरू, नौतपा के पहले दिन ही हीटवेव अलर्ट; लेकिन राहत की भी खबर

नई दिल्ली आज यानी 25 मई से नौतपाक की शुरुआत हो गई है। यह 2 जून तक जारी रहेगा। यानी इन 9 दिनों में भयंकर गर्मी पड़ने वाली है। हिंदू पंचांग के मुताबिक ये ऐसे 9 दिन होते हैं जिनमें सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और ऐसे में तेज धूप के साथ ही गर्म हवाएं गर्मी को चरम पर पहुंचा देती हैं। अगर ज्योतिषीय गणना की बात करें तो रोहिणी नक्षत्र लगते ही नौतपा की शुरुआत हो जाती है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। वहीं 28 से 30 मई के बीच तेज आंधी की भी चेतावनी जारी की गई है। कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ रही है। रविवार को यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग का कहना है कि 28 मई तक अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। इसके बाद बारिश से तापमान में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। वहीं 25 मई को बादल छाने की संभावना है। हालांकि गर्मी से राहत की संभावना कम ही है। यहां भयंकर लू का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार बिहार, झारखंड और ओडिशा में मौसम करवट ले सकता है। यहां मध्यम बारिश की संभावना है। ओडिशा और झारखंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भयंकर गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में तापमान 47 से 48 डिग्री तक जा सकता है। राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 48 डिग्री तक जाने की संभावना है। कहां है बारिश का अनुमान आईएमडी के मुताबिक पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघायलय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा हवाओं की स्पीड भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक जा सकती है। बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण के राज्यों में बारिश दक्षिण के राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके अलावा हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और तेलंगाना में भी बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र में 47.2 डिग्री तक पहुंचा पारा कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ''अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।'' पश्चिमी विक्षोभ दिलाएगा राहत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 28-29 मई को एक नए पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते राज्य के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश में, राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधिक है, और न्यूनतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.2 डिग्री अधिक है। बांदा राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक है।

हिमंत सरकार का बड़ा कदम! UCC बिल पर विपक्ष का जोरदार विरोध, आदिवासियों को राहत

गुवाहाटी  असम कैबिनेट की मंजूरी के ठीक दो हफ्ते बाद राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन के पटल पर द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026 पेश किया। इस बेहद अहम विधेयक पर 27 मई को चर्चा और इसे पारित किए जाने की संभावना है। हालांकि, विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि इसे प्रस्तुत करने से पहले हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए।  इससे पहले 13 मई को मुख्यमंत्री सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। तब सरकार ने घोषणा की थी कि 21 से 26 मई तक चलने वाले मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान यह कानून लाया जाएगा। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसे सत्र के अंतिम दिन पेश किया जाएगा। कानून के पांच मुख्य आधार राज्य सरकार के मुताबिक, इस विधेयक के मसौदे को असम की विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता और सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल तैयार किया गया है। यह नया कानून मुख्य रूप से नागरिक समाज से जुड़े पांच बड़े मुद्दों को नियमित करेगा। बहुविवाह का खात्मा: राज्य के भीतर बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह कानूनी रोक लगेगी। शादी की समान उम्र: विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू होना। तलाक और निकाह का पंजीकरण: सभी शादियों और तलाकों का सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा। बेटियों को बराबर का हक: पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार। लिव-इन का कानूनी हिसाब: बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों यानी लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े नियम और पंजीकरण अनिवार्य। यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा असम यदि यह विधेयक पास हो जाता है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश में यूसीसी विधेयक पारित करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड ने साल 2024 में यूसीसी लागू किया था। वह संविधान के नीति निदेशक तत्वों के तहत ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना था। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा। इस साल जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में यूसीसी लागू होने का एक वर्ष पूरा होने पर इसकी सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस कानून ने महिलाओं को सशक्त बनाया है और उनकी सुरक्षा बढ़ी है। सीएम धामी ने कहा था कि यूसीसी को लेकर लोगों की तमाम शंकाएं और अफवाहें खत्म हो चुकी हैं। पांच लाख से अधिक मामलों में निजता के उल्लंघन का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अब ऑनलाइन माध्यम से रिकॉर्ड संख्या में शादियां पंजीकृत हो रही हैं। महज एक साल में 4,74,447 विवाह ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं। दूसरी ओर, गुजरात विधानसभा ने भी इसी साल मार्च में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और समानता देने के उद्देश्य से यूसीसी विधेयक पारित किया है। भाजपा का राष्ट्रव्यापी एजेंडा  ये विधेयक देश भर में समान नागरिक संहिता लागू करने के भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्य के अनुरूप हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में मुर्शिदाबाद की रैली में कहा था कि तुष्टिकरण की राजनीति को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी लागू किया जाएगा। हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 82 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन में एनडीए की कुल सीटें 102 तक पहुंच गई हैं। विपक्ष का कड़ा विरोध और सियासी सरगर्मी सत्र की शुरुआत से ही इस विधेयक को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार ने पहले ही सत्र में यूसीसी लाकर जनता से किया अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा निभाया है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और राइजोर दल जैसे विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने कानून को लाने की टाइमिंग और इसके सामाजिक असर को लेकर सदन में विरोध दर्ज कराया है। 

इबोला संकट के बीच कांगो में बवाल, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

 बुनिया दुनिया एक बार फिर महामारी के खतरे का सामना कर रही है. अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इबोला वायरस को इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी  घोषित किया है. WHO प्रमुख ने बताया कि कांगो में इबोला के 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 101 मामलों की पुष्टि की गई है।  कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के इतुरी प्रांत में रवामपारा और मोंगबवालु इलाकों में उपचार केंद्रों को जलाए जाने की घटना भी सामने आई है. जहां सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. कुछ समुदायों में बढ़ता विरोध महामारी से निपटने की कोशिशों को और जटिल बना रहा है।  लोगों के गुस्से की बड़ी वजह इबोला से संदिग्ध मौतों के अंतिम संस्कार को लेकर बनाए गए सख्त नियम माने जा रहे हैं. क्योंकि बीमारी के और फैलाव को रोकने के लिए प्रशासन जहां संभव हो, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया खुद संभाल रहा है।   लोग स्थानीय सरकार की विफलता और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, इबोला को लेकर जांच प्रक्रिया में खामियों का मामला भी सामने आया है. कई चुनौतियों और गलतियों की वजह से संक्रमण की पहचान में देरी हुई है।   कई लोगों ने इस बीमारी के फैलने की गति को लेकर चिंता व्यक्त की है, खासकर इसलिए कि इबोला को अभी भी उन वायरसों में से एक माना जाता है जिनकी मृत्यु दर बहुत अधिक है और जिन देशों में इसका प्रकोप हुआ है वहां सामाजिक जीवन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में वर्तमान में इबोला के 82 पुष्ट मामले और 7 मौतें दर्ज की गई हैं, साथ ही लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौतें भी निगरानी में हैं। वहीं, पड़ोसी देश युगांडा में 5 मामलों की पुष्टि हुई है, जो सीमा पार संक्रमण फैलने के बढ़ते खतरे का संकेत देता है। अफ्रीकी संघ (एयू) ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस प्रकोप को नियंत्रण में नहीं लाया गया तो क्षेत्र के कम से कम 10 देश – जिनमें इथियोपिया, केन्या, रवांडा और दक्षिण सूडान शामिल हैं – प्रभावित होने के जोखिम का सामना कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सीमाओं और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को देखते हुए, बीमारियों के प्रकोप के राष्ट्रीय सीमाओं से परे फैलने का खतरा बहुत वास्तविक है, जो मध्य और पूर्वी अफ्रीका में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। * एक संबंधित घटनाक्रम में, अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मध्य और पूर्वी अफ्रीका में तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप से निपटने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए 314 मिलियन डॉलर से अधिक की तत्काल धनराशि की अपील जारी की है। योजना के अनुसार, उपर्युक्त धनराशि का अधिकांश हिस्सा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा को बीमारी के उपचार, महामारी विज्ञान निगरानी, ​​​​नियंत्रण और प्रसार की रोकथाम के लिए आवंटित किया जाएगा। प्राथमिकता वाले उपायों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट प्रबंधन प्रणाली की स्थापना, क्षेत्र के देशों के बीच समन्वित सीमा नियंत्रण को मजबूत करना, इबोला बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए विशेष रूप से एक वैक्सीन पर अनुसंधान में तेजी लाना, अतिरिक्त त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती और व्यापक प्रकोप की आशंका में आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति का भंडारण करना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इबोला के खतरे का स्तर बढ़ाकर "बहुत उच्च" कर दिया है, जबकि कई पड़ोसी देश इस प्रकोप को पूरे क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य नियंत्रणों को कड़ा करने और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से यात्रा पर प्रतिबंध लगाने सहित निवारक उपायों को बढ़ा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इस आउटब्रेक का जोखिम कांगो के लिए बहुत ज्यादा है। लेकिन दुनिया के बाकी देशों में फैलने का खतरा अभी कम है। इस आउटब्रेक को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जा चुका है। स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले पूर्वी कांगो में स्वास्थ्य कर्मी और ईबोला ट्रीटमेंट सेंटरों पर हमले हो रहे हैं। पिछले हफ्ते दो शहरों में दो केंद्रों को आग लगा दी गई। इस इलाके में सालों से सशस्त्र विद्रोही समूहों की हिंसा, लोगों का विस्थापन और सरकार की नाकामी चल रही है। अंतरराष्ट्रीय मदद में कटौती ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और कमजोर कर दिया है। लोगों में गुस्सा और शक की भावना है। कई लोग विदेशी मदद समूहों पर भरोसा नहीं करते। एक घटना में रवाम्पारा में युवकों का एक समूह अपने दोस्त का शव वापस लेने के लिए केंद्र जलाने आया। वे आरोप लगा रहे थे कि मदद करने वाले लोग ईबोला के बारे में झूठ बोल रहे हैं। दफनाने की प्रक्रिया पर विवाद ईबोला फैलने से रोकने के लिए सरकार और मदद एजेंसियां संदिग्ध मरीजों के दफनाने का जिम्मा खुद ले रही हैं। पारंपरिक तरीके में परिवार वाले शव को तैयार करते हैं और लोग जमा होते हैं, जो संक्रमण बढ़ा सकता है। इस वजह से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। अब उत्तर-पूर्वी कांगो में शोक सभा और 50 से ज्यादा लोगों के जमा होने पर पाबंदी लगा दी गई है। कुछ दफनों की सुरक्षा के लिए सैनिक और पुलिस तैनात किए गए हैं। क्या है इलाके की स्थिति बताया जाता है कि पूर्वी कांगो में कई विद्रोही समूह सक्रिय हैं। कुछ विदेशी देशों से जुड़े हैं, कुछ ISIS से लिंक रखते हैं। रवांडा समर्थित M23 विद्रोही कुछ हिस्सों पर काबिज हैं। इटूरी प्रांत में कांगो सरकार का नियंत्रण है, लेकिन वह कमजोर है। एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) नामक युगांडन इस्लामिस्ट समूह यहां हमले करता रहता है। डॉक्टर विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, सुरक्षा की वजह से डॉक्टर और नर्स भाग गए हैं। स्वास्थ्य केंद्र ओवरलोड हो गए हैं और कुछ जगहों पर हालात बहुत खराब हैं। UN के मुताबिक, इटूरी में करीब 10 लाख लोग हिंसा से विस्थापित हो चुके हैं। बुनिया शहर के आसपास के डिस्प्लेसमेंट कैंप्स में फैलने का डर है, जहां पहले मामले आए थे। सामग्री की कमी मदद करने वाली टीमों के पास जरूरी उपकरण नहीं हैं – फेस शील्ड, प्रोटेक्टिव सूट, … Read more

नमाज और सड़क विवाद पर मौलाना साजिद रशीदी का बयान वायरल, बयान पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने सड़क पर नमाज को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया है। रशीदी ने शिफ्ट में नमाज को जायज बताते हुए कहा कि सड़क नापाक होती है और इसलिए वहां मुसलमानों के इबादत नहीं करनी चाहिए। रशीदी ने कहा कि सड़क पर जानवर भी चलते हैं और लोग थूकते, पेशाब भी करते हैं। उन्होंने मुसलमानों को उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ पार्टियां उन्हें पिटवाना चाहती हैं। एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में मौलाना रशीदी ने सड़क पर नमाज ना पढ़ने की सीएम योगी की हिदायत का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'योगी जी का बयान बिलकुल सही है। हमने कोरोना काल में भी नमाजे शिफ्ट में पढ़ी है। उन्हें पता है कि शिफ्ट में नमाज हो सकती है, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है। पूरे देश और प्रदेश में किसी मौलवी ने उनका खंडन नहीं किया। कोई खंडन कर रहा है तो वह कांग्रेस-सपा के लोग या उनसे जुड़े नेता। उनको पता नहीं दीन के बारे में कि नमाज शिफ्ट में भी पढ़ने का प्रावधान है।' मौलाना साजिद रशीदी ने इस्लाम के दो सिद्धांतों का जिक्र करते हुए बताया कि क्यों सड़क पर नमाज पढ़ना जायज नहीं है। उन्होंने कहा, 'इस्लाम का बुनियादी सिद्धांत है कि नमाज नापाक जगह पर नहीं पढ़ी जा सकती है। सड़क पाक नहीं हो सकती है, कैसे पाक होगी जब उस पर लोग, जानवर चलते हैं, थूकते हैं और पेशाब भी करते हैं। सबकुछ होता है तो कैसे नमाज होगी। दूसरा सिद्धांत यह है कि वह मुसलमान नहीं हो सकता है जिससे किसी दूसरे को तकलीफ पहुंचे। अगर आप सगर जाम कर रहे हैं तो तकलीफ होती है लोगों को। एंबुलेंस फंस रही है, किसी को कहीं जाना है।' अपराध में शामिल थे मुसलमान: रशीदी मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि कुछ समय पहले तक अधिकतर मुसलमान अपराधों में लिप्त थे, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद अब वे शिक्षा की राह पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कुछ साल पहले तक तो मुसलमान गोली भी चलाता था, डकैत भी था। कैराना (पश्चिमी यूपी का एक इलाका) का तो पूरा क्षेत्र इसी में लगा था। 60-70 फीसदी यही करते थे। आज है कोई? अब मुसलमान ने सोच लिया है कि सही जिंदगी जीने का तरीका शिक्षा है।' रशीदी ने कहा कि पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने जो फ्री हैंड दिया था मुसलमानों को उससे कई कमियां आ गईं। उससे मुसलमानों का भला नहीं हुआ, शिक्षा से दूर हो गए। रोजगार छोड़ दिया, लूट-पाट वाली बुराइयां आ गईं। आज मुसलमान 15-20 साल से और जब से भाजपा सरकार आई है मुसलमानों ने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। चाहे गरीब मजदूर है वह भी पढ़ा रहा है। बुलडोजर ऐक्शन पर क्या कहा रशीदी ने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन उन लोगों के खिलाफ ही हो रहा है जो गलत काम में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा, 'जब मैं रेप, चोरी, डकैती, बदमाशी में नहीं पकड़ा जाऊंगा तो क्यों बुलडोजर चलेगा। बुलडोजर तो उस पर चलता है ना जो गलती करता है। मुसलमानों की खैर इसी में है कि सही रास्ते पर चलें। पहले कोई मुसलमान लड़का थाने में आ गया तो नेता का फोन आता था कि इसे छोड़ दो हमारा आदमी है। वह बाहर निकल कर एक और मर्डर करता था, एक और करता था, कातिल बन जाता था। बदमाश बन जाता था, उसे पीछे से समर्थन था। आज तो सीधा एनकाउंटर है। कौन बदमाशी करेगा। अक्लमंदी इसी में है कि हवा के खिलाफ मत चलो।' सपा से जुड़े एक सवाल पर रशीदी ने कहा कि, हमें नहीं चाहिए ऐसी पार्टी जिसका मकसद यह हो कि मुसलमान नमाज के लिए सड़क पर उतरे, उनकी पिटाई हो, मुकदमे लगे, जेल जाएं और उनके घर टूटे। अखिलेश यादव बनवा देंगे घर किसी का। आजम खान को तो बचा नहीं पाए।