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छात्रों के लिए बड़ा अपडेट! 28 मई की CUET UG परीक्षा स्थगित, जल्द आएगी नई डेट

 लखनऊ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (यूजी) के तहत 28 मई को होने वाली परीक्षा को ईद-उल-अजहा (बकरीद) के चलते स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जानी थी। अब जल्द ही इसकी नई तिथि घोषित की जाएगी। इसकी सूचना रविवार को एनटीए ने अपनी वेबसाइट पर जारी की है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे एनटीए की अधिकारिक वेबसाइट (https://nta.ac.in) और https://cuet.nta.nic.in/) को नियमित रूप से देखते रहें। क्यों टाली गई परीक्षा NTA के मुताबिक, सरकार की ओर से ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी की तारीख में बदलाव किया गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए 28 मई 2026 को होने वाली CUET-UG परीक्षा की दोनों शिफ्ट्स को स्थगित कर दिया गया है।  दोनों शिफ्ट्स प्रभावित एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि 28 मई को निर्धारित सुबह और दोपहर दोनों शिफ्ट्स की परीक्षाएं अब नहीं होंगी. इस दिन परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों पर यह फैसला लागू होगा. न्यूज एजेंसी ANI ने भी इस जानकारी अपने एक्स हैंडल से शेयर किया है।  नई तारीख का इंतजार NTA ने कहा है कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें, ताकि उन्हें ताजा अपडेट मिल सके।  क्या है CUET-UG परीक्षा CUET-UG (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) देशभर में आयोजित होने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है. इसके जरिए केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों समेत 280 से ज्यादा संस्थानों में स्नातक कोर्स में दाखिला मिलता है।  आधिकारिक नोटिस भी जारी NTA ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी किया है, जिसमें 22 मई के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के मेमोरेंडम का हवाला दिया गया है. साथ ही छात्रों को हेल्पलाइन नंबर और ईमेल के जरिए सहायता लेने की सुविधा भी दी गई है.

मेडिकल साइंस का कमाल… चीन में मौजूद डॉक्टर ने हैदराबाद में किया ऑपरेशन

हैदराबाद तकनीक और मेडिकल साइंस ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया है. चीन के वुहान में मौजूद भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने हैदराबाद में मौजूद एक मरीज की रोबोट की मदद से सफल सर्जरी की. खास बात यह रही कि डॉक्टर और मरीज के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी थी।  रिपोर्ट के मुताबिक, यह यूरेट्रल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी थी, जिसमें यूरेटर (किडनी से यूरिन ब्लैडर तक ले जाने वाली नली) को दोबारा ब्लैडर से जोड़ा गया. यह ऑपरेशन चीन में विकसित रोबोटिक तकनीक और हाई-स्पीड 5G इंटरनेट की मदद से किया गया. पूरा ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला. इस दौरान वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल और हैदराबाद की मेडिकल टीम के बीच लगातार समन्वय बना रहा।  इस उपलब्धि को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने वुहान में बैठकर हैदराबाद के मरीज की सिर्फ 90 मिनट में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।  ऑपरेशन शुरू होने से पहले वुहान और हैदराबाद के डॉक्टरों ने ऑनलाइन मरीज की मेडिकल रिपोर्ट्स की संयुक्त समीक्षा की. इसके बाद रोबोटिक आर्म्स की मूवमेंट को लेकर पूरी योजना तैयार की गई. हैदराबाद में मौजूद मेडिकल स्टाफ ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया और ऑपरेशन थिएटर में रोबोटिक सिस्टम को तैयार किया।  इस रोबोटिक सिस्टम में बेहद बारीक सर्जिकल उपकरण और हाई-डेफिनिशन 3D कैमरे लगे थे, जो हैदराबाद से लाइव तस्वीरें वुहान भेज रहे थे. डॉ. गौस वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल में एक कंट्रोल कंसोल पर बैठे थे, जहां से उन्होंने पूरे ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया।   200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड रोबोट ले रहे थे निर्देश रिपोर्ट के अनुसार, 5G नेटवर्क की मदद से डॉक्टर के निर्देश सिर्फ 200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड के भीतर हैदराबाद पहुंच रहे थे. इतनी कम देरी की वजह से रोबोटिक आर्म्स लगभग उसी समय डॉक्टर के हाथों की हरकतों को दोहरा पा रहे थे. यही वजह रही कि हजारों किलोमीटर दूर बैठने के बावजूद सर्जरी के दौरान सटीकता और नियंत्रण बनाए रखा जा सका।  हैदराबाद में मौजूद डॉक्टरों की टीम भी पूरे समय ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रही और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मदद के लिए तैयार थी.यह सर्जरी International Hepato-Pancreato-Biliary Association के चीनी चैप्टर की 10वीं कांग्रेस के दौरान दिखाई गई 26 सर्जरी में से एक थी. इनमें भारत, ब्राजील, जॉर्जिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञों के साथ लाइव अंतरराष्ट्रीय रिमोट सर्जरी भी शामिल थीं।  टोंगजी हॉस्पिटल में सर्जरी विभाग के निदेशक चेन शियाओपिंग ने कहा कि AI, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन तकनीकें दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम को तेजी से बदल रही हैं। 

चीखों से गूंजा महाबलेश्वर… खाई में समाई स्कॉर्पियो, रस्सियों से निकाले गए शव

 महाबलेश्वर महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में रविवार देर रात एक भयावह सड़क हादसे ने आठ लोगों की जिंदगी छीन ली. पोलादपुर-आंबेनळी घाट मार्ग पर एक स्कॉर्पियो कार अनियंत्रित होकर लगभग 700 से 800 फीट गहरी खाई में जा गिरी. हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार सभी लोगों की मौत की आशंका ताई जा रही है. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया।  बताया जा रहा है कि हादसा देर रात करीब 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हुआ. रात का अंधेरा और घाट क्षेत्र का दुर्गम रास्ता बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बन गया. सूचना मिलते ही महाबलेश्वर ट्रैकर्स की टीम, स्थानीय पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे. गहरी खाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद सावधानी के साथ चलाना पड़ा।  मृतकों की पहचान सातारा जिले के कोरेगांव तहसील के आसगांव गांव के रहने वाले लोगों के रूप में हुई है. इनमें 25 वर्षीय महेश अनिल पवार, 21 वर्षीय आदित्य अशोक सालुंखे, 25 साल के रितेश राजेंद्र लोखंडे, 20 साल के सुहास जितेंद्र लोखंडे, 18 साल के अंश समीर चव्हाण, 21 साल के उत्कर्ष आनंद शिंगटे, 25 साल के अनिल अभिमन्यू शिंगटे और 35 वर्षीय नितीन किसन नायकोंडे शामिल हैं।  कोंकण से लौटते समय तड़के हुआ हादसा यह दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो गाड़ी सतारा जिले के कोरेगांव तालुका के आसगांव की है. यह हादसा तब हुआ जब ये सभी लोग कोंकण से वापस सतारा की ओर लौट रहे थे. आंबेनली घाट में तड़के करीब 2:45 बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ. यह घटना उसी क्षेत्र में हुई है, जहां साल 2018 में दापोली कृषि विश्वविद्यालय की बस खाई में गिरी थी।  खाई अत्यधिक गहरी होने के कारण बचाव दल ने शुरुआत में दूरबीन की मदद से तलाश शुरू की, जिसमें पहला शव दिखाई दिया. बेहद कठिन परिस्थितियों में रेस्क्यू टीम को करीब 500 से 700 फीट की गहराई पर 2 शवों को ढूंढने में सफलता मिल चुकी है. पोलादपुर पुलिस और बचाव दल द्वारा दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी और बाकी शवों को बाहर निकालने के लिए खोजी अभियान लगातार जारी है।  सभी मृतक सतारा के रहने वाले शुरुआती जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो गाड़ी सतारा जिले की है. गाड़ी में सवार पर्यटक सतारा, आसगांव और कोरेगांव इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं. बचाव दल द्वारा स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार अन्य यात्रियों के शवों को ढूंढने का काम लगातार जारी है।  पोलादपुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी आनंद रावड़े ने बताया कि मृतक सतारा के आसगांव के थे. 24 तारीख को तड़के वे हरणे बीच से वापस सतारा की ओर जा रहे थे, तब पोलादपुर मार्ग से आंबेनळी घाट में दाबेली गांव की सीमा में उनकी गाड़ी पर से नियंत्रण छूट गया और गाड़ी गहरी खाई में गिर गई।  सुबह करीब छह बजे से चार अलग-अलग रेस्क्यू टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान में जुटी हुई हैं. अब तक दो शवों को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी शवों को खाई से बाहर लाने की प्रक्रिया जारी है. स्थानीय प्रशासन और पुलिस लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहकर राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं।  फिलहाल दुर्घटना की असली वजह सामने नहीं आई है. पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि घाट मार्ग के खतरनाक मोड़, रात का समय या वाहन के नियंत्रण खोने जैसी परिस्थितियां हादसे की वजह बन सकती हैं. इस हादसे के बाद मृतकों के गांव में शोक की लहर है और परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। 

मिथाइल मेथाक्रायलेट लीक से दहशत, विस्फोट का खतरा बढ़ा

नई दिल्ली  कैलिफोर्निया में एक केमिकल फैक्ट्री के खराब वाल्व ने लाखों जिंदगियों और छह शहरों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। ऑरेंज काउंटी की इस फैक्ट्री से मिथाइल मेथाक्रायलेट नाम के बेहद खतरनाक और आग पकड़ने वाले केमिकल का रिसाव हो रहा है। खराबी इतनी बड़ी है कि रिसाव को पूरी तरह बंद करना नामुमकिन हो चुका है। अब डर इस बात का है कि अत्यधिक दबाव या गर्मी के कारण यह स्टोरेज टैंक कभी भी फट सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए लगभग 40,000 लोगों को फौरन अपने घर खाली करने का सख्त आदेश जारी किया है। प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां फायर अथॉरिटी के अधिकारियों ने साफ किया है कि इस वक्त वे दो सबसे बुरे हालातों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। पहला खतरा यह है कि टैंक का ढांचा पूरी तरह ढह जाए, जिससे आसपास के पार्किंग एरिया में 6,000 से 7,000 गैलन जहरीला केमिकल फैल जाएगा। दूसरा और सबसे भयानक खतरा यह है कि कड़कती गर्मी के चलते टैंक के अंदर का तापमान और दबाव बढ़ जाए, जिससे उसमें जोरदार धमाका हो जाए। अगर ऐसा ब्लास्ट होता है, तो पास में ही मौजूद ईंधन और अन्य रसायनों के टैंक भी आग की चपेट में आ जाएंगे, जिससे यह हादसा एक बड़ी तबाही में बदल सकता है। पर्यावरण और इंसानी सेहत पर मंडराता खतरा इस जहरीले लिक्विड को पर्यावरण में तबाही मचाने से रोकने के लिए बचाव दल युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। केमिकल को स्थानीय नालियों, नदियों या समंदर में बहने से रोकने के लिए रेत की बोरियों की मजबूत दीवारें बनाई गई हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तापमान बढ़ने पर इस केमिकल से निकलने वाली भाप हवा को पूरी तरह जहरीला बना देगी। इसके संपर्क में आने से लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ, आंखों में चुभन और तेज जलन, उल्टी आने जैसा महसूस होना और असहनीय सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। 15% आबादी ने घर छोड़ने से किया इनकार यह पूरी घटना लॉस एंजिल्स से करीब 38 मील दूर गॉर्डन ग्रोव शहर में हुई है। यह इलाका मशहूर डिज़नीलैंड थीम पार्क के काफी करीब है। राहत की बात यह है कि अधिकारियों ने फिलहाल डिज़नीलैंड को इस खतरे के दायरे से बाहर बताया है। इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच पुलिस के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। आदेश के बावजूद इलाके के करीब 15 फीसदी लोगों ने अपने आशियाने को छोड़ने से साफ मना कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षित निकाले गए लोगों के ठहरने के लिए दो बड़े शेल्टर होम तैयार किए हैं और लोगों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में न डालें और इस सरकारी आदेश का पूरी गंभीरता से पालन करें।

यूक्रेन-रूस युद्ध तेज: कीव में तबाही, हाइपरसोनिक ‘ओरेशनिक’ मिसाइल के इस्तेमाल का दावा

 नई दिल्ली  यूक्रेन की राजधानी कीव में रविवार रात विनाशकारी हमले देखने को मिले, जब रूस ने ड्रोन और मिसाइलों की भारी बौछार कर दी। यह हमला हाल के हफ्तों में कीव पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। हमले के बाद शहर के कई हिस्सों में आग, धमाकों और धुएं का भयावह मंजर देखने को मिला। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक क्रूज मिसाइल को कीव के मध्य हिस्से में गिरते देखा जा सकता है। मिसाइल के टकराते ही जोरदार विस्फोट होता है। धमाकों की आवाज रातभर कीव में गूंजती रही। 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों से कीव पर हमला यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने इस हमले में करीब 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन की एयर डिफेंस प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कई हथियार अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, हमले में राजधानी कीव समेत कई अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया। कीव के लुकियानिव्स्का मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक बिजनेस सेंटर और बाजार पूरी तरह तबाह हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि एक छोटा कैफे, जिसे रूसी हमलों के बाद छह बार दोबारा बनाया और खोला गया था, इस हमले में फिर से नष्ट हो गया। चार लोगों की मौत, दर्जनों घायल यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतें, स्कूल, बाजार और व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हो गए। हमले के दौरान दहशत में लोग मेट्रो स्टेशनों और भूमिगत बंकरों की ओर भागते नजर आए। रातभर सायरन बजते रहे और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह हमला किसी सैन्य लक्ष्य पर नहीं बल्कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। एंड्री सिबिहा ने बताया कि कीव के अलावा चेर्कासी, खार्किव, क्रोपिवनित्स्की, ओडेसा, पोल्टावा, सूमी और झितोमिर क्षेत्रों पर भी हमले किए गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने इस बार 'ओरेशनिक' नामक शक्तिशाली हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया। क्या है Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल? 'ओरेशनिक' रूस की नई हाइपरसोनिक मिसाइल मानी जा रही है। यह ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से उड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल जमीन के कई मंजिल नीचे बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम है। रूस ने पहली बार नवंबर 2024 में यूक्रेन के ड्नीप्रो शहर पर इस मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इसके बाद जनवरी में पश्चिमी यूक्रेन के लवीव क्षेत्र में भी इसके उपयोग की खबरें सामने आई थीं।      'यूक्रेन के हमलों के जवाब में किया अटैक' रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को पुष्टि की कि उसने ओरेशनिक समेत कई मिसाइल प्रणालियों का उपयोग कर यूक्रेन के सैन्य कमांड सेंटर, एयरबेस और सैन्य उद्योग से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। हालांकि रूस ने इन ठिकानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। मॉस्को ने कहा कि यह हमला रूस-नियंत्रित इलाकों पर यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और अधिक खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हथियार युद्ध को और विनाशकारी बना सकते हैं, क्योंकि इन्हें रोकना पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बेहद मुश्किल होता है।

NEET-UG में बड़े बदलाव की तैयारी, CBT मोड पर जल्द फैसला संभव

 नई दिल्ली पेपर लीक के बाद नीट-यूजी की परीक्षा से जुड़े उन सभी सुधारों को अब रफ्तार मिल सकती है, जिन पर स्वास्थ्य मंत्रालय अब तक चुप्पी साधे हुआ था। इनमें इस परीक्षा को अगले साल से कंप्यूटर के जरिए कराने का ऐलान सरकार ने कर दिया है, हालांकि इसके बाद भी परीक्षा को कई सत्रों और चरणों कराने के साथ ही परीक्षा के प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा निर्धारित करने जैसे सुझाव अभी भी लंबित है। माना जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही उच्चस्तरीय समिति की इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय ले सकता है। इससे जहां अगले साल से नीट-यूजी की परीक्षा कंप्यूटर के जरिए होगी, वहीं कई अन्य बड़े बदलाव भी दिखेंगे। नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर पिछले दिनों संसदीय समिति के सामने पेश हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ( एनटीए) के अधिकारियों ने 2024 में नीट-यूजी पेपर लीक के बाद डा राधाकृष्णन की अगुवाई में गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को साझा किया। साथ ही बताया कि समिति ने नीट-यूजी परीक्षा में सुधार से जुड़े तीन अहम सुझाव स्वास्थ्य मंत्रालय को भी दिए थे। इनमें परीक्षा को पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर के जरिए कराने का, परीक्षा को कई सत्रों व चरणों में कराने का और अंतिम सुझाव परीक्षा के प्रयासों और अधिकतम उम्र सीमा को निर्धारित करने को लेकर था। जो स्वास्थ्य मंत्रालय के पास लंबित है। सूत्रों के मुताबिक, एनटीए ने संसदीय समिति को बताया कि इन सिफारिशों को मंजूरी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को नए सिरे से प्रस्ताव दिया गया है। गौरतलब है कि मेडिकल के स्नातक कोर्सों में दाखिले से जुड़ी नीट-यूजी की परीक्षा स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन है। इसके लिए मानक आदि का निर्धारण स्वास्थ्य मंत्रालय ही करता है। एनटीए सिर्फ उसके मानक के अनुरूप नीट-यूजी की परीक्षा कराता है। नीट-यूजी को अगले साल से कंप्यूटर के जरिए कराने के ऐलान से पहले शिक्षा मंत्रालय इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ कई बार बैठक भी कर चुका है। लेकिन कुछ निर्णय नहीं हो पाया था। प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा तय हुई तो कम होंगे आवेदक भी एनटीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने यदि नीट-यूजी के प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा तय कर दी तो परीक्षा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या काफी कम हो जाएगी। अभी इस परीक्षा में हर साल 22 से 23 लाख छात्र शामिल होते है। अभी इस परीक्षा के प्रयासों की कोई संख्या तय नहीं है, ऐसे में बड़ी संख्या में आवेदक इसमें पांच से अधिक बार शामिल होते है। वही परीक्षा में शामिल होने की न्यूनतम उम्र तो 17 वर्ष निर्धारित की गई है लेकिन अधिकतम उम्र की कोई सीमा तय नहीं है। ऐसे में 50-60 साल के लोग भी आवेदन करते रहते है। जेईई मेन व नीट-यूजी को एक साथ कराने का भी सुझाव नीट-यूजी में सुधार को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति ने कई दीर्घकालिक सुझाव भी दिए थे। इनमें जेईई मेन और नीट-यूजी को एक साथ कराने का भी सुझाव दिया है। एनटीए ने संसदीय समिति को इसकी भी जानकारी दी है। साथ ही बताया कि उसने इस दिशा में मंथन शुरू किया है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में इसे कराना थोड़ा कठिन है, क्योंकि मौजूदा समय में नीट-यूजी या जेईई मेन में शामिल होने वाले बड़ी संख्या में छात्र ऐसे होते है जो 12 वीं की पढ़ाई मैथ और बायोलाजी में दोनों की करते है। साथ ही दोनों ही परीक्षाओं में शामिल होते है। दोनों ही में जिन परीक्षा में उन्हें अच्छी रैंकिंग मिलती है, वह उस क्षेत्र में दाखिला लेते है।  

कॉकरोच जनता पार्टी मामला गरमाया: याचिका में FIR और स्वतंत्र जांच की अपील

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें CJP से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में फर्जी कानून डिग्रियों के इस्तेमाल, प्रतिरूपण और सर्वोच्च न्यायालय की संस्थागत पहचान के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित लोगों ने खुद को वकील या कानूनी विशेषज्ञ बताकर जनता को गुमराह किया और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई। याचिका में CBI को निर्देश देने की अपील की गई है कि जाली डिग्रियों के कथित उपयोग और आपराधिक साजिश की गहन जांच की जाए। सोशल मीडिया पर गरमाया विवाद यह याचिका ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर CJP का विवाद चरम पर है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की 'व्यवस्था पर हमला करने वालों' वाली टिप्पणी के बाद मुद्दा सुर्खियों में आ गया। खुफिया ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार के निर्देश पर गुरुवार को CJP के आधिकारिक एक्स हैंडल को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह कार्रवाई की। खुफिया एजेंसियों ने CJP पर 'भड़काऊ' सामग्री फैलाने और देश की संप्रभुता को चुनौती देने का आरोप लगाया था। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंग्यात्मक और मीम-आधारित डिजिटल आंदोलन है, जिसकी शुरुआत बोस्टन विश्वविद्यालय के छात्र अभिजीत दीपके ने की थी। यह खुद को ‘बेरोजगार युवाओं की आवाज’ बताता है। पिछले सप्ताह यह आंदोलन खासकर जेन-जी युवाओं के बीच तेजी से वायरल हुआ। व्यंग्य, सत्ता-विरोधी टिप्पणियों और मीम्स के जरिए यह एक बड़े डिजिटल विरोध में बदल गया और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लाखों फॉलोअर्स हासिल किए। प्रतिबंध लगने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके ने नया हैंडल ‘Cockroach is Back’ शुरू किया और समर्थकों से इसमें शामिल होने की अपील की। क्या है संस्थापक का आरोप? शनिवार को अभिजीत दीपके ने कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि कई अकाउंट्स हटाए जाने और हैकिंग की घटनाओं के बाद अब संगठन की किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि उनका व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक कर लिया गया है। दीपके ने ‘एक्स’ पर लिखा कि कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ कार्रवाई। इंस्टाग्राम पेज हैक किया गया। मेरा व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक किया गया। ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाई गई। बैकअप अकाउंट पर भी रोक लगा दी गई। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल हम अपने सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इस पोस्ट के बाद किसी भी पोस्ट को CJP का आधिकारिक बयान न माना जाए। संगठन की वेबसाइट (cockroachjanataparty.org) भी बंद कर दी गई है।

चीन से आतंकी नेटवर्क तक पहुंचा हाई-टेक कैमरा, NIA ने शुरू की सप्लाई चेन जांच

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। अमेरिका में निर्मित GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक रूप से चीन के एक अधिकृत वितरक को भेजा गया था, वह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के पास कैसे पहुंच गया, इसकी जांच एजेंसी तेजी से कर रही है। NIA के जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल एक कैमरे की सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-विरोधी ताकतों को सीमाओं के पार हाई-टेक उपकरण मुहैया कराने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को उजागर कर सकता है। दरअसल, पिछले साल जुलाई में दाचीगाम जंगलों में मुठभेड़ के दौरान मारे गए लश्कर आतंकियों के पास से बरामद उच्च गुणवत्ता वाले GoPro कैमरे ने इस पूरे प्रकरण को नई दिशा दी है। आतंकी संगठन अब हमलों को रिकॉर्ड कर दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए इन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। GoPro कंपनी का बयान NIA ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी कंपनी GoPro Inc. से संपर्क किया। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में साफ बताया कि उक्त कैमरा चीन में स्थित अपने अधिकृत वाणिज्यिक वितरक को भेजा गया था। अब जांच एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि चीन से प्राप्त यह उपकरण लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक कैसे पहुंचा। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कैमरे पाकिस्तानी सेना द्वारा खरीदे गए होने और बाद में आतंकी संगठनों को सौंपे जाने की प्रबल आशंका है। बता दें कि भारत और चीन के बीच आपसी कानूनी सहायता संधि (MLAT) न होने के कारण यह मामला राजनयिक स्तर पर उठाया जा रहा है। आरोपपत्र के बाद भी जांच जारी NIA ने पहलगाम आतंकी हमले का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें हमले के तात्कालिक परिचालन संबंधी तथ्य स्थापित किए गए हैं। हालांकि, उपकरण की खरीद और आपूर्ति शृंखला की जांच अभी भी चल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन से आयातित एक सामान्य व्यावसायिक उत्पाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन तक कैसे पहुंचा? पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकतर मृतक पर्यटक थे। इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान नियंत्रित क्षेत्रों में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

पीएम मोदी की सहानुभूति पर चीन की प्रतिक्रिया, संकट में सहयोग की सराहना

नई दिल्ली  चीन ने अपने शांक्सी प्रांत में हुए भीषण कोयला खदान हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम कई लोगों की जान जा चुकी है और दो लोग अभी भी लापता हैं। भारत में चीन के राजदूत जू फेईहोंग ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी के पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की सहानुभूति और समर्थन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। भारत का समर्थन हमारे लिए महत्वपूर्ण चीनी राजदूत जू फेईहोंग ने पीएम मोदी के संदेश के लिए उनका धन्यवाद करते हुए एक्स पर लिखा कि शांक्सी प्रांत में खदान दुर्घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवेदना संदेश के लिए हम उनकी सराहना करते हैं। इस कठिन समय में भारत के लोगों की सहानुभूति और समर्थन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। हमारी संवेदनाएं पीड़ितों, लापता लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम बचाव और राहत कार्यों में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवेदना संदेश इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को इस हादसे पर अपना शोक संदेश भेजा था। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था कि चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान दुर्घटना में लोगों की मौत से दुखी हूं। भारत के लोगों की ओर से, राष्ट्रपति शी चिनफिंग और चीन के लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को इस दुखद घड़ी में शक्ति प्रदान करे। मैं शेष सभी लापता व्यक्तियों के शीघ्र और सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना करता हूं। शुक्रवार शाम को हुआ था भयानक विस्फोट चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह गैस विस्फोट शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 7:29 बजे किनयुआन काउंटी की लियुशेनयु कोयला खदान में हुआ था। शनिवार को अधिकारियों ने पुष्टि की कि हादसे में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य लापता हैं। इस घटना में घायल कुल 128 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें से दो की हालत बेहद नाजुक और दो की गंभीर बनी हुई है कंपनी की लापरवाही आई सामने घटना की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि खदान के भीतर जहरीली और हानिकारक गैसें लंबे समय तक सुरक्षित सीमा से अधिक बनी हुई थीं, जिससे दोबारा आपदा होने की आशंका बढ़ गई थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि खदान का संचालन करने वाली कंपनी द्वारा कानूनों का गंभीर उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई है। सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, किनयुआन का प्रशासन संभालने वाले चांगझी शहर के मेयर चेन शियांगयांग ने बताया कि कंपनी के जिम्मेदार लोगों को नियंत्रण में ले लिया गया है। इसके साथ ही, व्यापक सुरक्षा जांच पूरी होने तक कंपनी की कोयला खदानों में उत्पादन पूरी तरह से रोक दिया गया है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दिए सख्त जांच के आदेश चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों को बचाने और घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए चौतरफा प्रयास करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने विस्फोट के कारणों की गहन जांच करने और कानून के अनुसार जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम ने कहा है कि वे दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाएंगे, स्थानीय अधिकारियों, उद्योग रेगुलेटर्स और संबंधित कंपनी की जिम्मेदारियों की जांच करेंगे और प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त सजा सुनिश्चित करेंगे।

मतांतरण पर Amit Shah की सख्त चेतावनी, जनजातीय महाकुंभ में दिया बड़ा बयान

नई  दिल्ली राजधानी दिल्ली में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित विशाल जनजातीय महाकुंभ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आदिवासी समाज को सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए मतांतरण और सांस्कृतिक विघटन पर तीखा प्रहार किया। देशभर से पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक गीतों के साथ पहुंचे जनजातीय समुदायों के बीच शाह ने कहा कि यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला सबसे बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन है। इस समागम में विष्णुदेव साय, मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप समेत सैकड़ों जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हुए।