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SBI रिपोर्ट में खुलासा: पारंपरिक अपराध कम हुए, साइबर अपराधों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में अपराध, अर्थव्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और तकनीक के बीच के रिश्ते पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।  SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 के दौरान 58.86 लाख संज्ञेय (Cognizable) अपराध दर्ज किए गए. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. देश की कुल अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और निगरानी तंत्र में सुधार इसके प्रमुख कारण हैं।  हालांकि कुल अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साइबर क्राइम के मामले 1 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।  रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में ऐसे 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 4.41 लाख रह गए. यह करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि चुनौती का स्तर अभी भी बहुत बड़ा है और इसे सफलता नहीं माना जा सकता।  एएनआई के मुताबिक, SBI का मानना है कि UPI, FASTag और डिजिटल निगरानी जैसे साधनों ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. डिजिटल ट्रेल की वजह से अपराध करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं।  रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन क्षेत्रों में अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहां अपराध में हल्की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि निगरानी बढ़ने से अपराध कम होने की संभावना बढ़ती है।  स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के सभी 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं. ये सेंटर डेटा, तकनीक, निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़ते हैं. इसका मकसद शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।  रिपोर्ट के अनुसार 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. SBI का कहना है कि ये सुविधाएं लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं।  रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच दिलचस्प संबंध का उल्लेख किया गया है. अध्ययन बताते हैं कि अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे विकास की गति धीमी हो सकती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है।  SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर अल्पकाल में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 0.11 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी अपराध कम होने का फायदा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था और विकास दर को भी मिलता है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध श्रम बाजार में बाधा पैदा करते हैं और महिला कार्यबल की भागीदारी को प्रभावित करते हैं. NCRB 2024 के अनुसार पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,227 मामले और 1,21,166 पीड़ित दर्ज किए गए।  वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि करीब 27.88 करोड़ विवाहित महिलाओं में से 24 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया. इसका अनुमानित वार्षिक बोझ करीब 6.69 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और श्रम नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

कागज नहीं, प्लास्टिक करेंसी! RBI की चर्चा के बीच जानिए कितने टिकाऊ होते हैं ये नोट

 नई दिल्ली भारत में भी अब 'प्लास्टिक' के नोट आने वाले हैं, जैसे कई दूसरे देशों में छापे जाते हैं. खास मैटेरियल से बने ये नोट जल्दी से फटते नहीं हैं और अगर पानी में गिर जाए तो खराब नहीं होते हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बता दिया है कि इस तरह के नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी शुरुआती फेज में है. अभी भले ही इसमें टाइम लगेगा, लेकिन भारत के करेंसी नोट भी अलग मैटेरियल के होंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये नोट प्योर प्लास्टिक से बनाए जाएंगे या फिर कुछ अलग मैटेरियल के होंगे और इस पर कितना काम हो चुका है? अभी आरबीआई का क्या कहना है? हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है. पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसे लेकर आकलन कर रहा है. इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी. दरअसल, सरकार इस पर लंबे वक्त से काम कर रही है।  इससे पहले इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था. हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था।  किस मैटेरियल के होंगे ये नोट? जिन नोटों की चर्चा हो रही है, उन्हें पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये कागज के बजाय एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने मुद्रा नोट होते हैं. ये आम कागजी नोटों (जो कपास और लिनन से बनते हैं) की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं. ये पानी में भीगने या वॉशिंग मशीन में धुल जाने पर भी खराब नहीं होते हैं. ये नोट थोड़े चिकने होते हैं।  इन नोट्स को बनाने में BOPP यानी पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलिमर नोटों में पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) ही वह मुख्य आधार है, जो इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों से अलग बनाता है. इन्हें प्लास्टिक का कहा जा सकता है, लेकिन ये पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट नहीं होते हैं जबकि ये उसी मैटेरियल का सबसे अच्छा रूप है. पॉलिमर नोट आम प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग या पीवीसी) से काफी अलग होते हैं. इसकी परत आम प्लास्टिक की तरह मोटी या सख्त नहीं, बल्कि कागज जितनी पतली होती है. यह सामान्य प्लास्टिक की तरह जेब की गर्मी या धूप से आसानी से पिघलता या सिकुड़ता नहीं है।  इस प्लास्टिक फिल्म पर स्याही को रोकने के लिए खास तरह की लेयर की कोटिंग की जाती है, इस पर छपाई टिकी रहती है. पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसके बाद से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों ने भी अपनी मुद्रा के लिए पॉलिमर तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है. अब भारत भी इस पर विचार कर रहा है। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8th Pay Commission से वेतन में हो सकती है बंपर बढ़ोतरी

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की जा रही है। अगर सरकार सबसे अधिक प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹68,940 हो सकता है। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में परिवर्तित किया जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर वेतन, पेंशन, भत्ते और एरियर तय होते हैं। 7वें वेतन आयोग में कितना था फिटमेंट फैक्टर? 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। 8वें वेतन आयोग के लिए क्या हैं मांगें? विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।विशेषज्ञों का फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 1.92 है। जबकि, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) का 3.00 और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) का 3.25 है। वहीं, जम्मू-कश्मीर कर्मचारी मंच का अनुमान 3.05 और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी समन्वय समिति का 2.86 से 3.68 है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)ने 3.83 का अनुमान लगाया है। फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितना हो सकता है वेतन? मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 को आधार मानें तो संभावित वेतन इस प्रकार हो सकता है… 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480 3.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹54,000 3.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹58,500 3.68 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹66,240 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹68,940 अगर सरकार 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू करती है, तब भी न्यूनतम मूल वेतन ₹46,260 तक पहुंच सकता है। वहीं, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर मंजूर होने पर वेतन में करीब 283 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते भी बढ़ेंगे फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की समीक्षा होगी और मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू होने के बाद DA की गणना फिर से शुरू होगी। कर्मचारियों की निगाह सरकार के फैसले पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, वेतन और पेंशन में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है।

मोदी सरकार में बदलाव के संकेत, राज्यसभा चुनाव के बाद कई मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं

नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही एनडीए सरकार में कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अटकलें हैं कि इस बार कई राज्य मंत्रियों को बदला जा सकता है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि किन मंत्रालयों में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे, लेकिन कहा जा रहा है कि इसकी संख्या एक दर्जन मंत्रियों तक जा सकती है। खास बात है कि 18 जून को राज्यसभा चुनाव हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी कैबिनेट को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कम से कम 2 कैबिनेट मंत्री और 3 राज्य मंत्रियों परिषद से बाहर हो सकते हैं। अटकलें ये भी हैं कि एक वरिष्ठ मंत्री को दक्षिण भारतीय राज्य में पार्टी की कमान भी सौंपी जा सकती है। दूसरे दलों को भी मिलेंगे पद रिपोर्ट के मुताबिक, सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि मोदी सरकार की नई कैबिनेट में JD(U), TDP, NCP और RLM जैसे सहयोगी दलों (Allies) को जगह मिल सकती है। इसमें भी नीतीश कुमार की JD(U) और चंद्रबाबू नायडू की TDP को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। जबकि, सहयोगी दलों के ज्यादातर नेताओं को राज्य मंत्री का पद मिलने की उम्मीद है। राज्यसभा चुनाव कहा जा रहा है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे कई मंत्रियों को इस साल या 2027 की शुरुआत में संगठन में भेजा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि 70 साल से ज्यादा उम्र के कुछ राज्यसभा सांसदों को बदलने पर विचार किया जा सकता है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि भाजपा मोर्चा नेताओं को कैबिनेट में पहली बार शामिल किया जा सकता है। इन मंत्रालयों में बदलाव के आसार रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे, वित्त, कॉर्पोरेट अफेयर्स, कोयला, टेक्सटाइल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, ग्रामीण विकास, रसायन और उर्वरक, सहकारिता, मत्स्य पालन, जल शक्ति, कृषि और पर्यावरण, कानून और अन्य में बदलाव के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। राज्यसभा चुनाव 18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। जिन 26 सीटों के लिए चुनाव एवं उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं।

होम लोन लेने वालों के लिए बड़ा अपडेट! नए CIBIL नियम के बाद बढ़ सकता है ब्याज का बोझ

 नई दिल्ली RBI के ECL नियम लागू होने के बाद बैंकों को ज्यादा प्रावधान करना होगा, कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों के लिए बढ़ सकती हैं ब्याज दरें अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है तो आने वाले समय में होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशन लोन लेना पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए 'ECL Direction-2026' के लागू होने के बाद बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को कर्ज देने में अधिक सतर्कता बरतेंगे. बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को या तो लोन मिलने में दिक्कत होगी या फिर उन्हें ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ेगा।  कई मामलों में बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलेटरल की भी मांग कर सकते हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात है कि देश में करीब 62 फीसदी लोन आवेदकों का CIBIL स्कोर 730 से कम है. ऐसे में अगले साल से बड़ी संख्या में लोगों के लिए होम, ऑटो और एजुकेशन लोन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम RBI का 'Expected Credit Loss (ECL) Direction-2026' 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. वर्तमान व्यवस्था में बैंक किसी लोन के एनपीए (Non-Performing Asset) बनने के बाद उसके लिए प्रावधान करते हैं. आमतौर पर ये स्थिति तब आती है, जब ग्राहक 90 दिनों तक किश्त नहीं चुकाता.  नई व्यवस्था में बैंकों को संभावित डिफॉल्ट का अनुमान पहले ही लगाना होगा और उसके हिसाब से अलग से रकम रखनी होगी. यानी लोन डूबने का इंतजार नहीं किया जाएगा और संभावित नुकसान के लिए पहले से तैयारी करनी होगी. जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है और कुल मिलाकर करीब 42 हजार करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है।  प्रीमियम ग्राहकों पर रहेगा ज्यादा फोकस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए नियम लागू होने के बाद बैंक उन ग्राहकों से ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं जिनमें डिफॉल्ट का जोखिम अधिक है. वहीं, बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को ब्याज दरों में रियायत और बेहतर शर्तों पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है. इसी वजह से बैंक 730 या उससे ज्यादा CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों पर ज्यादा फोकस करेंगे. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक देश में करीब 7 करोड़ ऐसे ग्राहक हैं जिनका क्रेडिट स्कोर 730 या उससे ज्यादा है।  बैंक कैसे लगाएंगे भविष्य के जोखिम का अनुमान? ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंक मौजूदा भुगतान स्थिति देखने के साथ कई दूसरे इंडिकेटर्स का भी एनालिसिस करेंगे जिनमें शामिल हैं- -ग्राहक का भुगतान रिकॉर्ड -CIBIL स्कोर में बदलाव -आय में कमी या अस्थिरता -नौकरी जाने का जोखिम -लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो  -मौजूदा कर्ज की स्थिति इन आंकड़ों के आधार पर बैंक तय करेंगे कि भविष्य में डिफॉल्ट की आशंका कितनी है.  डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा प्रावधान नए नियमों के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की स्थिति में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रकम अलग रखनी होगी. उदाहरण के तौर पर, 25 लाख रुपये के होम लोन पर: – 30 दिन की EMI डिफॉल्ट होने पर अभी करीब 10 हजार रुपये का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 25 हजार रुपये हो जाएगा. – 31 से 60 दिन तक डिफॉल्ट रहने पर ये रकम 10 हजार रुपये से बढ़कर 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. 90 दिन से ज्यादा के डिफॉल्ट की स्थिति में अभी 3.75 लाख रुपये (15%) का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा इससे बैंकों की लागत बढ़ेगी और वे कर्ज देने के दौरान वो ज्यादा सावधानी बरतेंगे.  आम ग्राहकों पर क्या असर होगा? जानकारों का मानना है कि ECL फ्रेमवर्क बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और जोखिम की पहचान पहले करने की दिशा में बड़ा कदम है. हालांकि इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका क्रेडिट स्कोर कमजोर है. ऐसे ग्राहकों को समय पर EMI भुगतान, क्रेडिट कार्ड बिल की नियमित अदायगी और कम कर्ज देनदारी बनाए रखने पर ध्यान देना होगा. बेहतर CIBIL स्कोर ही भविष्य में सस्ती ब्याज दर और आसान लोन मंजूरी की सबसे बड़ी कुंजी बन सकता है.  1 अप्रैल 2027 से नियम लागू होने के बाद बैंकों की लोन देने की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां फोकस लोन डिस्ट्रीब्यूशन के साथ ही ग्राहक की क्रेडिट क्वालिटी और जोखिम क्षमता पर रहेगा। 

ऊर्जा सुरक्षा पर चीन की बड़ी चाल, ‘समुद्री दैत्य’ से होर्मुज पर निर्भरता घटाने की तैयारी

बीजिंग  होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल-गैस की किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग ने दुनिया के कई देशों को आर्थिक मंदी के मुहाने पर ला खड़ा किया है. डर यह जताया जा रहा है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री ट्रेड रूट में शामिल होर्मुज अगर जल्द नहीं खुला तो पेट्रोल,एलपीजी और एनएलजी की किल्लत और गहरा सकती है. इन्हीं चिंताओं के बीच चीन ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा दांव खेला है. चीन की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनी ने समुद्र में दैत्याकार जहाज उतारने की तैयारी शुरू कर दी है. दुनिया के इस सबसे बड़े जहाज से एक ही बार में 2.71 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस यानी एनएलजी लाई जा सकेगी. यह जहाज न केवल शिपबिल्डिंग उद्योग में नया रिकॉर्ड बनाएगा, बल्कि वैश्विक गैस सप्लाई चेन को भी नई मजबूती देगा।  क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट? हाल के महीनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने दुनिया को यह एहसास कराया कि तेल-गैस की सप्लाई कितनी संवेदनशील है. दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा और LNG की महत्वपूर्ण खेपें इसी रास्ते से गुजरती हैं. ऐसे में होर्मुज की नाकेबंदी से एशिया और यूरोप के कई देशों में गैस की कमी पैदा हो गई है।  यही वजह है कि LNG परिवहन क्षमता बढ़ाने को अब ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा माना जा रहा है. चीन का नया जहाज इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो एक बार में पहले की तुलना में कहीं ज्यादा LNG ढो सकेगा।  कितना विशाल है यह जहाज? नया LNG कैरियर 344 मीटर लंबा होगा और इसकी क्षमता 2,71,000 क्यूबिक मीटर LNG होगी. तुलना करें तो आज दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक LNG जहाजों की क्षमता करीब 1,70,000 से 1,80,000 क्यूबिक मीटर होती है. एक आधुनिक गैस कैरियर औसतन करीब 174,000 क्यूबिक मीटर LNG लेकर चलता है।  इस लिहाज से चीन का नया जहाज मौजूदा मानक जहाजों की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत अधिक LNG ढो सकेगा. इसका मतलब है कि एक ही यात्रा में अधिक गैस पहुंचाई जा सकेगी, जिससे परिवहन लागत कम होगी और सप्लाई चेन अधिक प्रभावी बनेगी।  एलएलजी जहाज क्यों कहलाते हैं ‘क्राउन ज्वेल’? LNG कैरियर बनाना आज भी बेहद जटिल है. प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस पर तरल रूप में सुरक्षित रखना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. इसके लिए विशेष टैंक, उन्नत इंसुलेशन सिस्टम और अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों की जरूरत होती है. यही वजह है कि इसे शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री का ‘क्राउन ज्वेल’ यानी सबसे प्रतिष्ठित जहाज माना जाता है।  ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के इस नए जहाज में NO96 Super+ मेम्ब्रेन कंटेनमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, जो गैस को सुरक्षित रखने के साथ-साथ रिसाव और ऊर्जा हानि को भी कम करेगा।  पर्यावरण के लिहाज से भी खास जहाज में डुअल-फ्यूल इंजन सिस्टम होगा, जिससे यह पारंपरिक ईंधन और एलएनजी दोनों पर चल सकेगा. कंपनी का दावा है कि इससे ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम होंगे. यह जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के Tier-III पर्यावरण मानकों का भी पालन करेगा।  ऐसे समय में जब दुनिया हरित ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, LNG को कोयले और तेल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है. इसलिए LNG परिवहन क्षमता बढ़ना एनर्जी ट्रांजिशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।  समुद्र में चीन की बढ़ती ताकत एक समय एलएनजी जहाज निर्माण पर दक्षिण कोरिया और कुछ पश्चिमी कंपनियों का लगभग एकाधिकार था. लेकिन अब चीन तेजी से इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एनएलजी शिपबिल्डिंग बाजार में चीन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।  चीन अखबार के मुताबिक, हुडोंग-झोंगहुआ शिपबिल्डिंग कंपनी के पास फिलहाल लगभग 60 LNG जहाजों के ऑर्डर हैं और उसके शिपयार्ड 2030 तक पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं. इससे साफ है कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में चीन अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है।  होर्मुज संकट और एनएलजी का भविष्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है तो LNG परिवहन क्षमता दुनिया के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी. यूरोप, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को ऊर्जा सुरक्षा के लिए अधिक बड़े और अधिक कुशल एलएनजी जहाजों की जरूरत होगी।  ऐसे में चीन का यह मेगा एलएनजी कैरियर सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक ऊर्जा राजनीति और सप्लाई चेन की नई तस्वीर का प्रतीक माना जा रहा है. 2028 में इसकी पहली डिलीवरी होने के बाद यह दुनिया की एलएनजी लॉजिस्टिक्स क्षमता को एक नया आयाम दे सकता है।   

घर का सपना होगा पूरा? PM आवास योजना के लिए नया सर्वे अभियान शुरू, बन रही नई लिस्ट

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों की पहचान को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास (P&RD) विभाग ने पहली बार सेल्फ-सर्वे सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत पात्र नागरिक खुद अपने घर से आवेदन कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन शिकायतों को कम करना है, जिनमें अक्सर आरोप लगाए जाते थे कि आवास योजना के लाभार्थियों के चयन में पक्षपात, राजनीतिक हस्तक्षेप या गलत जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। अब लाभार्थियों को किसी मध्यस्थ या स्थानीय सिफारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे डिजिटल माध्यम से अपनी पात्रता दर्ज करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। नई व्यवस्था के तहत इच्छुक आवेदकों को अपने मोबाइल फोन में ‘AwaasPlus 2024’ और ‘AadhaarFace RD’ ऐप डाउनलोड करने होंगे। इसके बाद आधार बेस्ड पहचान सत्यापन पूरा कर डिजिटल आवेदन जमा करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार द्वारा नियुक्त सर्वेक्षक संबंधित परिवार के घर पहुंचकर दी गई जानकारी की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि आवेदक योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं। इस प्रक्रिया के जरिए सरकार फर्जी दावों को रोकने और सही लाभार्थियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। खास बात यह है कि यह मॉडल पहले से कई राज्यों में लागू है और अब पश्चिम बंगाल ने भी इसे अपनाने का फैसला किया है। सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि तकनीकी जानकारी या स्मार्टफोन की कमी के कारण कोई पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रह जाए। ऐसे लोगों के लिए डोर-टू-डोर सर्वे की व्यवस्था की गई है। सर्वेक्षक गांव-गांव जाकर उन परिवारों की जानकारी एकत्र करेंगे, जो स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवार केवल तकनीकी बाधाओं के कारण लाभ से वंचित न हों। सरकार का दावा है कि इस पहल से आवास योजना का दायरा और अधिक व्यापक तथा समावेशी बनेगा। लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली भी लागू की है। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सर्वे किए गए कम से कम 10% परिवारों का दोबारा सत्यापन ब्लॉक या सब-डिवीजन स्तर के अधिकारियों से कराया जाए। इसके अलावा ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वतंत्र रूप से 5% मामलों की जांच करेंगे, जबकि जिला स्तर के अधिकारी 2% आवेदनों का प्रत्यक्ष सत्यापन करेंगे। इस बहु-स्तरीय जांच व्यवस्था का मकसद किसी भी तरह की गड़बड़ी, त्रुटि या गलत चयन को रोकना है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में सर्वे टीमों का गठन कर दिया गया है और लाभार्थियों की पहचान का काम शुरू हो चुका है। यह सर्वेक्षण 20 जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि नई सेल्फ-सर्वे प्रणाली से सही लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, शिकायतें कम होंगी और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचेगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह कदम ग्रामीण आवास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

भारत ने उठाई PoK की आवाज, मुनीर की कथित बर्बरता पर पाकिस्तान को घेरा

 नई दिल्ली भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से ध्यान हटाने के लिए फ़ेक न्यूज़ और गलत जानकारी फैला रहा है. रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के कुछ दिनों बाद भी वहां तनाव बना हुआ है।  इस इलाके से आ रही खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने 'पाकिस्तान से आने वाली फ़ेक न्यूज़ और वीडियो का एक पैटर्न' देखा है और इसे अपनी नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश बताया है।  जायसवाल ने कहा, "इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान से आने वाली फ़ेक न्यूज़ और वीडियो का एक पैटर्न देख रहे हैं. यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाने की एक हताश कोशिश है।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की कथित बर्बरता की खबरों का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।  उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की गंभीर बर्बरता की खबरें हैं. हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और ज्यादतियों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।  ये बयान रावलकोट में पाकिस्तानी बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के कुछ दिनों बाद आए हैं, जिसमें कथित तौर पर कम से कम 27 लोग मारे गए. जहां आधिकारिक आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 27 बताई गई है, वहीं सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में दावा किया गया है कि हताहतों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।  यह इलाका तनावपूर्ण बना हुआ है क्योंकि प्रदर्शनकारी समूह पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ़ लामबंद हो रहे हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे PoK में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तावित 'लॉन्ग मार्च' को रोक देंगे, जबकि आयोजकों ने प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया है। 

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम, ओमान-गुजरात पाइपलाइन से बदलेगा भारत का गैस नेटवर्क

अहमदाबाद  वेस्‍ट एशिया में तनाव के बीच एनर्जी संकट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है. खासकर भारत जैसे देश, जो मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई रुकने के बाद सबसे ज्‍यादा प्रभातिव हुए है. इसी के मद्देनजर, भारत तेजी से अपने एनर्जी सप्‍लाई को निर्बाध करने में जुटा हुआ है. अब ओमान से गुजरात के बीच एक लंबी पाइपलाइन बिछने जा रही है।  यह अरब सागर के पार लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी एक गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन होगी. यह ओमान और गुजरात को जोड़ने की लंबे समय से चर्चित योजना है, क्योंकि भारत तेजी से अनिश्चित भू-राजनीतिक तना के बीच अधिक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।  पिछले तीन दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गई है, लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यावसायिक  दिक्‍कतों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई. अब, इस प्रस्ताव को सपोर्ट करने वाले प्राइवेट ग्रुप SAGE द्वारा मार्ग और इसकी इंजीनियरिंग चुनौतियों का वैल्‍यूवेशन करने के लिए समुद्र तल सर्वे के साथ-साथ तकनीकी और वित्तीय अध्ययन पूरा करने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली है।   कितना आएगा खर्च?  अनुमान है कि इस प्रोजेक्‍ट के तहत करीब  40,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन, अब तक के सबसे गहरे समुद्री मार्गों में से एक होगी. यह नेचुरल गैस की निर्बाध सप्‍लाई करेगी. अगर ये पाइपलाइन बन जाती है, तो इससे खाड़ी देशों और भारत के बीच एक सीधा ऊर्जा गलियारा स्थापित हो सकता है, जिससे देश की होर्मुज जलडमरूमध्‍य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो जाएगी।  यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है? भारत आयातित ऊर्जा पर काफी हद तक निर्भर है. देश अपनी ज्‍यादातर कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है और प्राकृतिक गैस, विशेष रूप से एलएनजी की विदेशी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है. इन आयातों का एक बड़ा हिस्‍सदा खाड़ी देशों से आता है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे मार्ग, होर्मुज के माध्‍यम से भारत पहुंचता है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट ग्‍लोबल मार्केट्स पर तुरंत असर डाल सकता है. इससे शिपिंग कॉस्‍ट, ईंधनी की कीमतें और आप‍ूर्ति चेन प्रभावित हो सकती हैं।  कैसी दिखेगी ये पाइपलाइन?  प्रस्‍तावित प्रोजेक्‍ट, अरब सागर में फैले एक पानी के नीचे के नेटवर्क के माध्‍यम से ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी. इसकी सबसे खास बात, इसकी गहराई है. मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक नीचे होने की संभावना है, जिससे यह अब तक प्रस्तावित सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी. इतनी गहराई ज्‍यादातर अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में पाई जाने वाली गहराइयों से कहीं अधिक है और इसके लिए अत्यधिक विशेष इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होगी।  गैस आने में कितना होगा खर्च?  इस पाइपलाइन के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के तहत प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से भारत को अपने ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने में मदद मिलेगी. साथ ही ओमान को एक स्थिर निर्यात बाजार भी मिलेगा. परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, परिवहन लागत 2-2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के बीच हो सकती है. हालांकि अंतिम लागत फंडिंग व्यवस्था, निर्माण व्यय और भविष्य में गैस की कीमतों पर निर्भर करेगी। 

भारत ने जोजिला टनल में रचा इतिहास, अब सालभर आसान होगा लद्दाख और श्रीनगर का सफर

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली 'जोजिला सुरंग' का अंतिम 'ब्रेकथ्रू' आज पूरा हो गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।  इस कामयाबी के साथ ही कश्मीर और लद्दाख के बीच ऑल-वेदर रास्ता बनने का सालों पुराना सपना हकीकत के बेहद करीब पहुंच गया है. इस मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एलजी मनोज सिन्हा ने खुशी जाहिर की. वहीं, नितिन गडकरी ने भी इस टनल की अहमियत बताई।  एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, 'ये एक ऐतिहासिक तारीख है कि आज लद्दाख के लोगों को ऑल वेदर कनेक्टिविटी के लिए अंतिम चरण के पड़ाव को मंत्री जी (नितिन गडकरी) ने पूरा किया. मैं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिल से बधाई देता हूं।  मनोज सिन्हा ने इंजीनियरों को दी बधाई सिन्हा ने सुरंग के निर्माण में जुटे कार्यबलों की तारीफ करते हुए आगे कहा, 'मैं इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले सभी इंजीनियरों को बधाई देता हूं, जिन्होंने इतनी ऊंचाई पर मुश्किल परिस्थितियों में काम किया है. हम सभी जानते हैं कि कनेक्टिविटी से ही विकास होता है. पिछले 12 सालों में इस क्षेत्र में बहुत काम हुआ है।  एशिया ही नहीं, दुनिया के इतिहास में नंबर-1 बनेगी ये टनल- गडकरी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस ब्रेकथ्रू को भारतीय इंजीनियरिंग के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना बताया. उन्होंने कहा, 'आज का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास का सुनहरा दिन है. क्योंकि ये टनल 14 किलोमीटर लंबी है और स्टेट ऑफ आर्ट है. मुझे अभी बताया गया कि अब तक हम इसे एशिया का सबसे लंबा टनल कह रहे थे. लेकिन ये वर्ल्ड के इतिहास में भी नंबर 1 पर जाएगा, ये जानकर मुझे बहुत खुशी है. ये लेह और लद्दाख के लोगों के लिए लाइफलाइन है।  कंपाने वाली ठंड में इंजीनियर्स और मजदूरों ने किया कमाल केंद्रीय मंत्री ने सुरंग बनाने के दौरान आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों और टीम की कड़ी मेहनत को भी सराहा. उन्होंने बताया, 'यहां की ऊंचाई लगभग 3 हजार मीटर है. जब काम हो रहा था, तो यहां -4 डिग्री या उससे भी कम तापमान के हालात थे. ऐसी कड़ाके की ठंड में हमारे इंजीनियर्स, मजदूर, ठेकेदारों और डॉक्टर्स ने बहुत मेहनत से काम किया है।  गडकरी ने आहे बताया कि ये टनल वर्ल्ड क्लास सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिहाज से बनाई गई है और इससे लद्दाख-लेह को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिलेगी।  जोजिला सुरंग की अहमियत इस अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ ही पहाड़ के दोनों छोर अब आपस में पूरी तरह मिल गए हैं. अब सुरंग के अंदर सड़क बनाने, लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को लगाने का काम तेजी से पूरा हो पाएगा. इस सुरंग के पूरी तरह चालू होने से सर्दियों में लद्दाख का देश से संपर्क कटना हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।