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“लीडर पर हमला परमाणु युद्ध”, किम की मौत पर ऑटोमैटिक न्यूक्लियर स्ट्राइक का आदेश

नई दिल्ली उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया है. अब अगर किम जोंग उन की हत्या हो जाती है या विदेशी हमले में देश की कमांड व्यवस्था नष्ट हो जाती है, तो सेना को ऑटोमैटिक परमाणु हथियारों से जवाबी हमला करना होगा. इसके लिए किसी अलग आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी. दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने यह जानकारी दी है. यह बदलाव ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद किया गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके कई सलाहकार मारे गए थे. नया संवैधानिक प्रावधान क्या कहता है? उत्तर कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक 22 मार्च को प्योंगयांग में हुई थी. इसी में यह संशोधन पास किया गया.नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (NIS) ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि अब न्यूक्लियर फोर्सेस पर नियंत्रण अगर दुश्मन के हमले से खतरे में पड़ जाए तो ऑटोमैटिक और तुरंत परमाणु हमला किया जाएगा. नए नियम के मुताबिक, किम जोंग उन के कमांड सिस्टम को खतरा होने पर कोई इंतजार नहीं होगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अपने आप हो जाएगा. इससे पहले यह नीति मौखिक रूप से हो सकती थी, लेकिन अब इसे संविधान में लिखित रूप से मजबूत कर दिया गया है. ईरान की घटना क्यों बनी वजह? ईरान पर हालिया हमलों ने उत्तर कोरिया को बड़ा सबक दिया. अमेरिका और इजरायल ने जिस तेजी से ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाया, उसे देखकर किम जोंग उन और उनकी सरकार डर गई. प्रोफेसर आंद्रेई लैंकोव ने कहा कि ईरान घटना उत्तर कोरिया के लिए वेक-अप कॉल साबित हुई. उन्होंने देख लिया कि नेतृत्व को एक साथ खत्म करने वाले हमले कितने प्रभावी हो सकते हैं. उत्तर कोरिया अब ऐसी स्थिति से बचना चाहता है. अगर किम या उनकी कमांड टीम मारी जाती है तो देश का परमाणु जवाब अपने आप एक्टिव हो जाएगा. किम की हत्या करना कितना मुश्किल है? किम जोंग उन अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं. वे हमेशा भारी सुरक्षा घेरे में रहते हैं. वे हवाई यात्रा से बचते हैं. ज्यादातर बख्तरबंद ट्रेन से सफर करते हैं. उत्तर कोरिया की सीमाएं पूरी तरह बंद हैं. विदेशी लोग बहुत कम आते हैं. उनकी निगरानी सख्ती से की जाती है. ईरान में इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ट्रैफिक कैमरों को हैक करके नेताओं की लोकेशन पता की थी, लेकिन प्योंगयांग में सीसीटीवी और इंटरनेट की व्यवस्था बहुत सीमित है. इसलिए वहां ऐसी जानकारी हासिल करना बेहद कठिन है. फिर भी उत्तर कोरिया सैटेलाइट तकनीक और अन्य खुफिया खतरे से चिंतित है. दक्षिण कोरिया की सीमा पर नया खतरा उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास नई आर्टिलरी तैनात करने की घोषणा की है. किम जोंग उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया जहां नई 155 मिलीमीटर की सेल्फ-प्रोपेल्ड गन का परीक्षण हुआ. यह तोप लगभग 60 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है. इससे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल और आसपास के महत्वपूर्ण इलाके इसके दायरे में आ जाएंगे. उत्तर कोरिया का कहना है कि यह नया हथियार उनकी जमीनी सेना को बड़ी ताकत देगा. उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं. 1950-53 का युद्ध केवल संघर्षविराम पर खत्म हुआ था. शांति संधि नहीं हुई. हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने एकीकरण की पुरानी बातों को अपने संविधान से हटा दिया है. दक्षिण कोरिया को मुख्य दुश्मन बताता है. दक्षिण कोरिया की शांति पहल के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी आक्रामक नीति जारी रखे हुए है. परमाणु हथियारों को लेकर नया प्रावधान पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है. दुनिया के लिए क्या मतलब? यह बदलाव दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपने नेता की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को कितनी अहमियत देता है. अगर किम पर हमला होता है तो परमाणु युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की सेना नेतृत्व के प्रति वफादार है. किसी भी हमले को अस्तित्व का खतरा मानकर जवाबी कार्रवाई करेगी.   यह घटनाक्रम पूर्वी एशिया में सुरक्षा की स्थिति को और जटिल बना रहा है. दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों इस विकास पर नजर रखे हुए हैं. यह संवैधानिक बदलाव उत्तर कोरिया की 'अगर मैं मरा तो सब कुछ नष्ट' वाली नीति को और मजबूत करता है. दुनिया के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है.

शपथ लेते ही एक्शन में सीएम विजय, सचिवालय पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था पर की बड़ी बैठक

 तमिलनाडु   तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने शपथ लेने के तुरंत बाद राज्य सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अपनी पहली आधिकारिक बैठक की अध्यक्षता की। अपनी पहली बैठक दौरान सीएम विजय ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। दरअसल, आज यानी रविवार को टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ लेने के बाद तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने सचिवालय की पहली बैठक की अध्यक्षता की और कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मौजूदा सुरक्षा और प्रशासनिक स्थितियों के बारे में जानकारी दी। यह विजय की सरकार प्रमुख के रूप में पहली आधिकारिक समीक्षा थी। मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का एकमात्र उद्देश्य तमिलनाडु की प्रगति और जन-कल्याण है। पीएम मोदी को दिया धन्यवाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। विजय ने एक पोस्ट में कहा, "मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाओं के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हार्दिक धन्यवाद देता हूं।" अपनी सरकार की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए विजय ने कहा कि उनके प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य तमिलनाडु के लोगों का कल्याण और प्रगति होगा। उन्होंने राज्य के निरंतर विकास के लिए केंद्र सरकार के सक्रिय समर्थन और सहयोग की आशा भी व्यक्त की। 17वीं विधानसभा का पहला सत्र 11 मई से 17वीं तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र सोमवार, 11 मई, 2025 को सुबह 9.30 बजे चेन्नई स्थित सचिवालय के विधानसभा कक्ष में आयोजित करने के लिए बुलाया गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस दिन नव निर्वाचित विधायक सत्र के दौरान शपथ ग्रहण करेंगे। विधानसभा सचिवालय ने सभी निर्वाचित सदस्यों को शपथ ग्रहण के समय अपना चुनाव प्रमाण पत्र साथ लाने का निर्देश दिया है। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव मंगलवार, 12 मई को सुबह 9:30 बजे होंगे।

तमिलनाडु में शपथ समारोह पर विवाद, ‘तमिल थाई वाजथु’ की अनदेखी से सियासत गरमाई

चेन्नई  तमिलनाडु में जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनते ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। CPI केराज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने रविवार को कहा कि सरकारी समारोहों में प्रोटोकॉल में 'तमिल थाई वाजथु' (तमिलनाडु का राज्य गीत) को सबसे पहला स्थान दिया जाना चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह के बाद जारी एक पत्र में वीरपांडियन ने समारोह के दौरान गीतों के बजाए जाने के क्रम पर आपत्ति जताई। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया गया, जबकि 'तमिल थाई वाजथु' तीसरे नंबर पर बजाया गया। CPI नेता ने कहा कि यह क्रम तमिलनाडु की पुरानी परंपरा का उल्लंघन है, जहां सरकारी समारोहों की शुरुआत पारंपरिक रूप से 'तमिल थाई वाजथु' से होती है और समापन राष्ट्रगान से होता है। वीरपांडियन ने पत्र लिखकर उठाए सवाल वीरपांडियन ने पत्र में लिखा कि राजभवन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' गीती को प्राथमिकता देना और तमिल गीत को तीसरे स्थान पर रखना,स्थापित परंपरा का उल्लंघन है। तमिलनाडु सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार था। टीवीके को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 'तमिल थाई वाजथु' को ही प्राथमिकता दी जाए। 'तमिल थाई वाजथु' सबसे पहले बजाया जाए- वीरपांडियन उन्होंने लिखा कि इस तरह की गलती को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और प्रोटेम स्पीकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कल होने वाले विधानसभा सत्र में, जो विधायकों के शपथ ग्रहण के लिए बुलाया गया है, साथ ही सभी सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में 'तमिल थाई वाजथु' सबसे पहले बजाया जाए और राष्ट्रगान अंत में बजाया जाए। वीरपांडियन ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे के ऐतिहासिक और वैचिरिक निहितार्थ हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही यह तय हो गया था कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता, क्योंकि यह गीत एक विशिष्ट देवी को समर्पित था और इसका स्वरूप सांप्रदायिक-धार्मिक था। यह विवाद विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शुरू हुआ, जिसमें लोगों की भारी भीड़ और कई प्रमुख राजनेता भी शामिल हुए थे।

IRGC की धमकी के बाद अमेरिका-ईरान टकराव और तेज, समुद्री रूट पर खतरा

नई दिल्ली  ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों या कमर्शियल जहाजों पर कोई भी और हमला इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों पर जोरदार हमला करने की वजह बनेगा। यह चेतावनी फारस की खाड़ी में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच दी गई है। एक्स पर जारी एक बयान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना कमान ने कहा, "चेतावनी! ईरान के तेल टैंकरों और कमर्शियल जहाजों के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता का नतीजा, इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों में से किसी एक और दुश्मन के जहाजों पर जोरदार हमले के रूप में सामने आएगा।" अमेरिका पर हमला करने के लिए मिसाइलें और ड्रोन लॉक इसके तुरंत बाद, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया कि ईरानी मिसाइलें और ड्रोन पहले से ही इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। पोस्ट में कहा गया, "IRGC एयरोस्पेस फोर्स की मिसाइलों और ड्रोनों ने इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और दुश्मन के हमलावर जहाजों को लॉक कर लिया है। हम फायर करने के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।" अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने दी चेतावनी यह चेतावनी तब आई है जब एक दिन पहले ही यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने कहा था कि अमेरिकी नौसेना बलों ने ओमान की खाड़ी में ईरान के खिलाफ चल रहे नाकाबंदी अभियानों के तहत ईरान के झंडे वाले दो तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया। CENTCOM के अनुसार, खाली टैंकरों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोक दिया गया। CENTCOM ने बताया कि 13 अप्रैल से अब तक अमेरिकी बलों ने ईरान के चार जहाजों को निष्क्रिय किया है और नाकाबंदी के इस दौर में 58 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला है। ये ताजा घटनाक्रम इस हफ्ते की शुरुआत में होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी नौसेना बलों और ईरानी संपत्तियों के बीच हुई गोलीबारी के बाद सामने आए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की कि होर्मुज से गुजरते समय अमेरिकी नौसेना के तीन विध्वंसक जहाजों पर हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने कहा कि ये जहाज सफलतापूर्वक वहां से गुजर गए।

अमेरिका-ईरान टकराव के बीच समुद्र में नई सैन्य हलचल

तेहरान  ईरान ने अपनी हल्की पनडुब्बियों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात करने का फैसला लिया है। फारस खाड़ी की डॉल्फिन कहे जाने वाली ये पनडुब्बियां दुश्मन के जहाजों और युद्धपोतों को निशाना बना सकती हैं। ईरान की ओर से यह ऐलान ऐसे समय किया गया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका के साथ उसका तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बलों में इस हफ्ते गोलाबारी के बाद होर्मुज के आसपास भारी तनातनी है। ऐसे में ईरान की ओर से पनडुब्बियों की तैनाती समुद्र में चल रहे टकराव को और ज्यादा बढ़ा सकती है। ईरान नेवी के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी की ओर से रविवार को ऐलान किया गया है कि स्वदेशी रूप से निर्मित हल्की पनडुब्बियां 'फारसी खाड़ी की डॉल्फिन' को होर्मुज जलडमरूमध्य में उतार दिया गया है। बयान में कहा गया है कि खतरों, क्षमताओं और ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर इन सबमरीन को तैनात और विस्तारित किया जा रहा हैं। अलर्ट पर रहती हैं ये पनडुब्बी भारत में ईरान के दूतावास के एक्स अकाउंट पर बताया गया है कि फारसी खाड़ी की डॉल्फिन हर समय अलर्ट पर रहती हैं और कार्रवाई के लिए तैयार रहती हैं। ये हल्की पनडुब्बियां होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जलक्षेत्र में समुद्र तल पर लंबे समय तक विश्राम (बॉटम रेस्ट) कर सकती हैं। इससे यह दुश्मन जहाजों पर नजर रख पाती हैं। ईरानी नेवी की ओर से बताया गया है कि उसकी ये पनडुब्बियां ना सिर्फ दुश्मन जहाजों को ट्रैक करती हैं बल्कि साथ ही जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकती हैं। दुश्मन के जहाजों को ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करना इन पनडुब्बियों की क्षमता का ही एक अहम हिस्सा है, जो समुद्र में इनकी ताकत बढ़ाता है। पानी के नीचे कर रहीं गश्त बयान में कहा गया है कि ईरान की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में 'डेना' डिस्ट्रॉयर पर मारे गए लोगों को समर्पित एक ऑपरेशन के दौरान ये पनडुब्बियां पानी की सतह पर आईं। कई सैन्य-गठन अभ्यास करने के बाद वे अपने मिशन को जारी रखने के लिए फिर से पानी के नीचे चली गईं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का अहम समुद्री रूट है। खाड़ी देशों से दुनिया के बड़े हिस्से में इसी रास्ते से तेल-गैस पहुंचता है। अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने यहां यातायात रोक दिया है। अमेरिका ने भी इसे ब्लॉक करते हुए दुनिया के जहाजों को इससे ना गुजरने देने का ऐलान कर दिया है। इसके चलते यह इलाका संवेदनशील बना हुआ है। एनर्जी सप्लाई पर संकट ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई को संकट में डाल दिया है। खाड़ी देशों के होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर तेल-गैस की कीमत पर हो रहा है। इसका सीधा असर साउथ एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्से के साथ-साथ अमेरिकी बाजार पर भी हुआ है। भारत में भी इसका प्रभाव देखा गया है।  

“इंजन में आग लग गई है…” विमान हादसे के बाद पायलट की घबराई आवाज ने दहलाया

नई दिल्ली अमेरिका के डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सुरक्षा बाड़ फांदकर रनवे पर पहुंचे एक अज्ञात व्यक्ति की विमान से टकराकर मौत हो गई। फ्रंटियर एयरलाइंस की फ्लाइट 4345 से हुई यह टक्कर के बाद विमान के इंजन में आग लग गई। इस घटना के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) का ऑडियो सामने आया है, जिसमें पायलट की घबराहट और यात्रियों द्वारा बयां किएक गए मंजर दिखाई दे रहे हैं। कब की है घटना? एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, अज्ञात व्यक्ति ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार रात लगभग 11:19 बजे हुई घटना से ठीक पहले एक बाड़ फांदकर सक्रिय रनवे क्षेत्र में प्रवेश करके हवाई अड्डे की सुरक्षा का उल्लंघन किया था। फ्रंटियर एयरलाइंस का विमान उस व्यक्ति से टकराने के समय चल रहा था। ऑडियो आया सामने एटीसी ऑडियो में, फ्रंटियर फ्लाइट 4345 के पायलट को कंट्रोल टावर को यह सूचित करते हुए सुना जा सकता है कि विमान एक व्यक्ति से टकराने के बाद रनवे पर रुक गया था और उसके एक इंजन में आग लग गई थी। फ्रंटियर विमान 4345 के पायलट ने कहा, हमने अभी-अभी किसी को टक्कर मारी दी है… हमारे इंजन में आग लग गई है। हम रनवे पर रुक रहे हैं रनवे पर बिखरे मिले शरीर के अंग डेनवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फ्रंटियर फ्लाइट 4345 द्वारा रनवे पर दौड़ रहे एक व्यक्ति को टक्कर मारने के बाद के भयावह क्षणों को एयर ट्रैफिक कंट्रोल के चौंकाने वाले ऑडियो में कैद किया गया है। बताया जाता है कि टक्कर इतनी भीषण थी कि शरीर के अंग रनवे पर बिखरे पड़े मिले ऑडियो रिकॉर्डिंग में एयरपोर्ट के एक कर्मचारी ने कहा, "रनवे पर मुझे कुछ अंग मिले हैं। मेरा मानना है कि विमान ने किसी व्यक्ति को टक्कर मारी है। रनवे पर मानव अवशेष दिखाई दे रहे हैं।" फ्लाइटअवेयर के अनुसार , दुर्घटना के समय विमान लगभग 149 मील प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहा था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि वह व्यक्ति आंशिक रूप से विमान के इंजनों में से एक में खिंच गया था।

बेंगलुरु में पीएम मोदी की यात्रा से पहले हड़कंप, विस्फोटक सामग्री बरामद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र की बेंगलुरु यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों में उस समय हड़कंप मच गया, जब उनके निर्धारित रूट के पास से जिलेटिन की छड़ें बरामद हुईं. यह घटना शहर के बाहरी इलाके कनकपुरा रोड की बताई जा रही है, जहां प्रधानमंत्री को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गुजरना था. विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है. उससे फिलहाल गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है. शुरुआती जांच के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है ताकि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान किसी भी तरह की चूक न हो. सुरक्षा जांच के दौरान मिलीं जिलेटिन स्टिक्स यह घटना रविवार सुबह की बताई जा रही है. बेंगलुरु के कग्गलीपुरा इलाके के पास थाथागुनी क्षेत्र में सुरक्षा जांच चल रही थी, तभी पुलिस को संदिग्ध विस्फोटक सामग्री दिखाई दी. यह स्थान उस मार्ग के बेहद करीब है, जहां से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरने वाला था. इसी रास्ते से आगे Art of Living Foundation केंद्र भी पड़ता है, जहां प्रधानमंत्री का कार्यक्रम निर्धारित था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिलेटिन की छड़ें एक पुल के पास कंपाउंड वॉल के किनारे फेंकी गई थीं. सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया. इलाके की घेराबंदी कर पूरी जांच की गई. राहत की बात यह रही कि विस्फोटक सामग्री प्रधानमंत्री के काफिले के वहां पहुंचने से पहले ही बरामद कर ली गई. धमकी भरे फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला इस पूरे मामले की शुरुआत एक संदिग्ध फोन कॉल से हुई. जानकारी के अनुसार तड़के सुबह एक अज्ञात व्यक्ति ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में कॉल कर दावा किया कि एचएएल एयरपोर्ट और आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के आसपास विस्फोट हो सकते हैं. फोन कॉल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं और बताए गए इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. हालांकि एचएएल एयरपोर्ट के आसपास कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन कनकपुरा रोड के पास जिलेटिन स्टिक्स बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया. तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को कोरामंगला इलाके के एक घर से हिरासत में लिया. पहले भी कर चुका है ऐसी हरकतें पूछताछ में सामने आया है कि पकड़ा गया व्यक्ति पहले भी वीआईपी दौरों के दौरान इसी तरह के धमकी भरे कॉल कर चुका है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अतीत में भी उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात सामने आने पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था. हालांकि इस बार मामला ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सिर्फ धमकी ही नहीं दी गई, बल्कि मौके से वास्तविक विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने यह विस्फोटक सामग्री कहां से हासिल की और उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है. पुलिस कई एंगल से कर रही जांच मामले की जांच फिलहाल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में चल रही है. डीसीपी स्तर के अधिकारी संदिग्ध और उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं. जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस जिलेटिन स्टिक्स के स्रोत और उन्हें वहां रखने के उद्देश्य का पता लगाना है. इसके साथ ही पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं यह किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं था. अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की किसी सुरक्षा चूक को रोका जा सके.

H-1B वीजा नियम सख्त, संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी

नई दिल्ली  अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी श्रम विभाग ने एच1बी वीजा धारकों के न्यूनतम वेतन में 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है। प्रशासन का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और उनके वेतन हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, ताकि विदेशी कामगार कम वेतन पर उनकी जगह न ले सकें। श्रम विभाग के अनुसार, मौजूदा वेतन स्तर लगभग 20 साल पहले तय किए गए थे, जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। नए प्रस्ताव 'इम्प्रू¨वग वेज प्रोटेक्शन' के तहत एंट्री-लेवल से लेकर अनुभवी पेशेवरों तक, सभी चार श्रेणियों के वेतन में वृद्धि की जाएगी। जहां पहले एंट्री-लेवल (लेवल-1) के लिए न्यूनतम वेतन 73,279 डालर था, उसे बढ़ाकर 97,746 डालर करने का प्रस्ताव है। इसी तरह, सबसे अनुभवी पेशेवरों (लेवल-4) का वेतन 1,44,202 डालर से बढ़कर 1,75,464 डालर हो सकता है। यह बदलाव न केवल एच1बी बल्कि एच1बी1, ई-3 और प्रोग्राम इलेक्ट्रानिक रिव्यू मैनेजमेंट (पीईआरएम) जैसे प्रोग्राम्स पर भी लागू होगा। इस प्रस्ताव ने उद्योग जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन में इस भारी बढ़ोतरी से छोटी कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं, खासकर फ्रेशर्स को नियुक्त करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इस प्रस्ताव पर 26 मई तक आम जनता की राय मांगी गई है, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि 2020 में भी ट्रंप प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसे बदलाव की कोशिश की थी, जिसे कानूनी चुनौतियों के कारण रोकना पड़ा था। हाल ही में, सितंबर 2025 में एक राष्ट्रपति आदेश के जरिये एच1बी उम्मीदवारों पर एक लाख डालर का शुल्क भी लगाया गया था। अब वेतन वृद्धि का यह नया प्रस्ताव विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका की राह को और भी चुनौतीपूर्ण बनाने वाला साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट पर सख्त हुए सूर्यकांत, फेक न्यूज फैलाने वालों को दी चेतावनी

 नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से प्रसारित किए जा रहे एक जातिवादी और भ्रामक बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस तरह की पोस्ट को नीच, ढीठ और शरारतपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानून की पूरी शक्ति के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के साथ एक काल्पनिक उद्धरण जोड़ना न केवल बेईमानी है, बल्कि सामाजिक उकसावे की एक जानबूझकर की गई साजिश है। सीजेआई ने विशेष रूप से एक्स पर @UnreservedMERIT नामक एक अकाउंट द्वारा किए गए पोस्ट का उल्लेख किया। इस पोस्ट में हिंदी में एक बयान को CJI सूर्यकांत के नाम से प्रचारित किया जा रहा था, "अगर कोई समाज अपने लोगों के बीच से IAS, IPS, CJI, राष्ट्रपति और PM पैदा करने के बाद भी खुद को शोषित ही मानता है तो गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है।" CJI का कड़ा रुख मुख्य न्यायाधीश ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह से निराधार, दुर्भावनापूर्ण और स्पष्ट रूप से गलत करार दिया। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों का अपमान बताते हुए कहा, "देश के चीफ जस्टिस के नाम से एक काल्पनिक उद्धरण बनाना सरासर बेईमानी, जानबूझकर किया गया सामाजिक उकसावा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अवमानना है। इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना आचरण न्यायपालिका और कानून के शासन में जनता के विश्वास की नींव को कमजोर करता है।" CJI ने सभी जिम्मेदार नागरिकों, मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से आग्रह किया है कि वे इस तरह की झूठी और मनगढ़ंत सामग्री को साझा या प्रचारित करने से बचें। उन्होंने चेतावनी दी कि यह फर्जी टिप्पणी उनके विचारों और चरित्र को नहीं दर्शाती है। कानून की पूरी ताकत का होगा सामना बयान में अंत में यह स्पष्ट किया गया कि जो लोग इस तरह की फर्जी खबरों और भ्रामक टिप्पणियों को फैला रहे हैं, उन्हें कानून की पूरी ताकत का सामना करना होगा। CJI के कार्यालय ने इस मामले को गंभीर मानहानि और न्यायिक कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य माना है।

विजय बने मुख्यमंत्री, तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन पर पीएम मोदी ने दी बधाई

तमिलनाडु तमिलनाडु में 10 मई से विजय थलापति का राज शुरू हो चुका है। विजय के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें तमिलनाडु का पद भार ग्रहण करने के लिए बधाई दी और साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से पूरी मदद करने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "श्री सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत बधाई। उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। केंद्र सकार तमिलनाडु सरकार और वहां के लोगों की भलाई के लिए लगातार काम करती रहेगी।"    तमिलनाडु की नई नवेली सरकार को बधाई देने के साथ ही एक दूसरे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को एक परजीवी पार्टी बताते हुए अन्य विपक्षी पार्टियों को चेताया भी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दशकों तक डीएमके के साथ खड़ी रही, लेकिन हवा बदलते ही उसने पाला भी बदल लिया। कांग्रेस को लेकर चेताया कर्नाटक में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "तमिलनाडु की मौजूद स्थिति को देखिए। वहां पर पिछले पच्चीस से तीस वर्षों तक कांग्रेस और डीएमके के बीच घनिष्ठ संबंध रहे। डीएमके के साथ गठबंधन ने कई बार कांग्रेस को संकटों से उबारा। वास्तव में, 2014 से पहले दस वर्षों तक कांग्रेस का जो शासन चला, वह काफी हद तक डीएमके के समर्थन के कारण ही कायम रहा। लेकिन जैसे ही राजनीतिक हवा ने रुख बदला, कांग्रेस पार्टी ने डीएम के को धोखा दे दिया। सत्ता की लालसा में चूर कांग्रेस ने पहले ही मौके पर डीएमके को छुरा घोंपा। अब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एक और पार्टी की जरूरत है, जिसके सहारे वह आगे बढ़ सके।" विजय की ऐतिहासिक शपथ इससे पहले, अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने रविवार सुबह चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुए एक भव्य कार्यक्रम में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ ही नौ नए मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस दौरान हजारों की संख्या में समर्थक वहां मौजूद थे। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पर पहुंचे। शपथ के साथ ही विजय तमिलनाडु के नौवें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। अपने पहले ही भाषण में उन्होंने साफ कर दिया कि सत्ता का एक ही केंद्र होगा, और वह स्वयं विजय ही होंगे। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं। बाद में पार्टी को विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन मिला, जिससे उसकी सीटों की संख्या 120 हो गई और उसने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। विजय का शपथ ग्रहण तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है, क्योंकि लगभग 70 वर्षों में यह पहली बार है कि डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन से बाहर की कोई सरकार राज्य में सत्ता में आई है।