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सैकड़ों फ्री टीवी चैनल बंद होने की आशंका, 1.3 करोड़ दर्शकों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली Free TV Channels: भारत में स्मार्ट टीवी ने लोगों के टीवी देखने का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है। अब सिर्फ इंटरनेट की मदद से दर्शक सैकड़ों चैनल और कंटेंट आसानी से देख पा रहे हैं। लेकिन अब इस सुविधा के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह फ्री सिस्टम आगे भी जारी रहेगा या नहीं। TRAI के नए नियम पर विचार टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) इस पर विचार कर रही है कि स्मार्ट टीवी ऐप्स को भी DTH और केबल टीवी की तरह नियमों के दायरे में लाया जाए। इस पर अंतिम फैसला 4 मई 2026 को आ सकता है। अगर यह नियम लागू होता है, तो कई फ्री चैनलों पर शुल्क लग सकता है। क्यों खत्म हो सकता है फ्री चैनलों का दौर? हाल ही में सामने आई जानकारी के मुताबिक Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या स्मार्ट टीवी ऐप्स को भी DTH और केबल की तरह नियमों के दायरे में लाया जाए. इस मामले पर अंतिम फैसला 4 मई 2026 को आ सकता है. अगर ऐसा होता है तो अब तक मुफ्त में मिलने वाले कई टीवी चैनलों पर शुल्क लग सकता है।  कितने लोग होंगे प्रभावित? बताया जा रहा है कि भारत में करीब 13 करोड़ से ज्यादा लोग स्मार्ट टीवी के जरिए बिना किसी केबल या DTH कनेक्शन के 150 से अधिक चैनल मुफ्त में देख रहे हैं. इन यूजर्स को बस इंटरनेट और कुछ ऐप्स की जरूरत होती है जिससे वे न्यूज, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और अन्य कई तरह के चैनल आसानी से एक्सेस कर लेते हैं।  DTH और स्मार्ट टीवी में क्या है फर्क? जहां एक तरफ DTH और केबल कंपनियां हर चैनल के लिए पैकेज बनाकर पैसे लेती हैं, वहीं स्मार्ट टीवी ऐप्स पर कई चैनल बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होते हैं. DTH कंपनियों को सरकार को भारी फीस देनी पड़ती है और उन्हें सख्त नियमों का पालन करना होता है जबकि स्मार्ट टीवी ऐप्स पर अभी तक ऐसे नियम लागू नहीं हैं. यही कारण है कि अब इस असमानता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।  क्या सभी यूजर्स पर पड़ेगा असर? हालांकि यह बदलाव बड़ा लग रहा है लेकिन हर यूजर पर इसका असर जरूरी नहीं है. आज के समय में ज्यादातर लोग स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए करते हैं. कई यूजर्स तो सिर्फ OTT कंटेंट या गेमिंग के लिए टीवी का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें फ्री चैनलों की जानकारी भी नहीं होती।  आने वाले समय में स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल देखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसका असर हर किसी पर नहीं पड़ेगा. Telecom Regulatory Authority of India का फैसला यह तय करेगा कि भारत में टीवी देखने का अनुभव कितना बदलने वाला है।  करोड़ों यूजर्स पर असर भारत में करीब 13 करोड़ से ज्यादा लोग स्मार्ट टीवी के जरिए बिना DTH या केबल कनेक्शन के 150 से अधिक चैनल मुफ्त में देख रहे हैं। ये यूजर्स सिर्फ इंटरनेट और कुछ ऐप्स की मदद से न्यूज, एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स चैनल आसानी से देख लेते हैं। बदलाव होने पर इन पर सीधा असर पड़ सकता है। DTH और स्मार्ट टीवी में अंतर DTH और केबल टीवी में हर चैनल के लिए पैकेज लेना पड़ता है और कंपनियों को सरकार को शुल्क भी देना होता है। वहीं स्मार्ट टीवी ऐप्स पर कई चैनल अभी मुफ्त में उपलब्ध हैं और उन पर नियम भी कम हैं। इसी असमानता को दूर करने के लिए नए नियमों पर चर्चा हो रही है। आगे क्या असर हो सकता है? अगर नए नियम लागू होते हैं तो स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनलों का उपयोग महंगा हो सकता है। हालांकि इसका असर सभी यूजर्स पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि कई लोग अब OTT प्लेटफॉर्म जैसे Netflix, Amazon Prime Video और YouTube का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। TRAI का फैसला आने वाले समय में टीवी देखने के अनुभव को पूरी तरह बदल सकता है।

महंगाई का कहर: पाकिस्तान ने अपने ही लोगों पर डाला भारी बोझ, 11,000 करोड़ की रकम जुटाई

इस्लामाबाद पाकिस्‍तान के कटोरे में एक बार फिर अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भीख का पैसा डाल दिया है. इसके लिए पाकिस्‍तान को अपने ही लोगों का खून चूसना पड़ा. महंगाई बढ़ानी पड़ी और जब उसने आईएमएफ के सभी जरूरी मानक पूरे कर दिए तो अब 1.21 अरब डॉलर यानी करीब 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज उसे दिया गया है. आईएमएफ ने दो अलग-अलग चल रहे फाइनेंसिंग अरेंजमेंट्स के तहत पाकिस्‍तान के लिए यह कर्ज मंजूर किया है और माना जा रहा है कि अगले सप्‍ताह पैसे मिल जाएंगे।  आईएमएफ ने सितंबर 2024 में एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत 37 महीनों में 7 अरब डॉलर देने पर सहमति जताई थी. इसके अलावा रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत 1.4 अरब डॉलर देने का फैसला किया था. IMF के कार्यकारी बोर्ड ने EFF के तहत पाकिस्तान को लगभग 1 अरब डॉलर और RSF के तहत लगभग 21 करोड़ डॉलर देने पर सहमति दी है. इस तरह, कुल मिलाकर उसे 1.20 अरब डॉलर का कर्ज दिया गया है।  पाकिस्‍तान को कुल कितना पैकेज पाकिस्तान अब तक IMF से दो कर्ज पैकेजों के तहत कुल 8.4 अरब डॉलर में से 4.5 अरब डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपये) का कर्ज ले चुका है. एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, यह पैसा अगले हफ्ते की शुरुआत में जारी किया जाएगा, जिससे पाकिस्‍तान के सेंट्रल बैंक का रिजर्व बढ़कर 17 अरब डॉलर हो जाएगा. हालांकि, यह भारत के 700 अरब डॉलर के रिजर्व के मुकाबले बहुत छोटा हिस्‍सा है।  कर्ज पाने के लिए जनता पर जुल्‍म पाकिस्‍तान को भले ही आईएमएफ से 1.20 अरब डॉलर का कर्ज मिल गया हो, लेकिन इस कर्ज को पाने के बाद भी पाक सरकार को पुराने वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों पर टिके रहना पड़ा और स्थिरता के रास्ते पर बने रहने की प्रतिबद्धता का पालन करना होगा. भले ही इन नीतियों के खिलाफ जनता लगातार आवाज उठा रही है, क्‍योंकि इससे बेरोजगारी, गरीबी और आर्थिक असमानता बढ़ रही है. IMF की मंजूरी तब मिली जब सरकार ने वित्तीय और मौद्रिक लक्ष्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन दिखाया, लेकिन इस वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में सरकार के इस रवैये को लेकर अलग-अलग स्‍वर उठ रहे हैं।  आईएमएफ के पैमाने पर खरा उतरा देश IMF मिशन ने जुलाई-दिसंबर 2025 की अवधि में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा की थी, जिसमें 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की तीसरी समीक्षा शामिल थी. पाकिस्तान ने दिसंबर 2025 के अंत तक सभी क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया पूरे किए और नेट इंटरनेशनल रिजर्व्स के फ्लोर पर भी बेहतर प्रदर्शन किया. साथ ही जनरल गवर्नमेंट का प्राइमरी बैलेंस टारगेट भी आसानी से हासिल किया. सरकार ने दिसंबर 2025 के अंत तक आठ में से छह इंडिकेटिव टारगेट्स पूरे किए, लेकिन फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू सबसे कमजोर कड़ी रहा. FBR द्वारा जुटाए गए नेट टैक्स रेवेन्यू और रिटेलर्स से इनकम टैक्स रेवेन्यू IMF के लक्ष्यों से कम रहे। 

मुंबई की नन्ही पर्वतारोही ग्रिहिता ने जीती छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी, बेटियों को किया प्रेरित

कुसमी महाराष्ट्र के मुंबई की 11 वर्षीय पर्वतारोही ग्रिहिता विचारे ने छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी ‘गौरलाटा पीक’ (Gaurlata peak) भी फतह कर लिया। इसके साथ ही उसने नया इतिहास रच दिया। बलरामपुर जिले के सामरी क्षेत्र अंतर्गत चांदो मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत ईदरीपाठ के इस दुर्गम पर्वत शिखर पर पहुंचकर ग्रिहिता ने साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। वह ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ का संदेश लेकर यहां पहुंची थी। चोटी फतह करने के बाद ग्रिहिता के चेहरे पर मुस्कान देखी गई। इसके पूर्व ग्रिहिता ने देश-विदेश के सर्वश्रेष्ठ चोटी पर पहुंचकर परचम लहराया है। बता दें कि बेटी बचाओ-बेटी बचाओ का संदेश लेकर निकली ग्रिहिता के पिता सचिन विचारे भी इस अभियान में शामिल रहे। ग्रिहिता के पिता ने बताया कि उसे शुरु से ही पर्वतारोहण (Gaurlata peak) करने का शौक था। उसकी लगन व जज्बा देख उन्होंने उसका पूरा सपोर्ट किया और आगे भी करते रहेंगे। कम उम्र में ही ग्रिहिता (Gaurlata peak) अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई कठिन पर्वतारोहण अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं। इनमें एवरेस्ट बेस कैंप, अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो तथा मलेशिया की माउंट किनाबालु जैसी प्रसिद्ध चोटियां भी शामिल हैं। सरपंच संघ के अध्यक्ष ने किया स्वागत गौरलाटा अभियान के दौरान सरपंच संघ कुसमी के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने ग्रिहिता का स्वागत करते हुए उन्हें आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतिभाएं देश (Gaurlata peak) और समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इनके साहसिक अभियान युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में ग्रिहिता माउंट एवरेस्ट जैसे विश्व के सर्वोच्च शिखर पर भी सफलता का परचम लहराकर देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी। प्राकृतिक धरोहर को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान ग्रिहिता की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, पर्वतारोही प्रेमियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। वहीं इस अभियान को छत्तीसगढ़ के पर्वतीय पर्यटन (Gaurlata peak) और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘आज बंगाल का स्वतंत्रता दिवस है’, बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी का बयान चर्चा में

ढाका पूर्व केंद्रीय मंत्री और बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को ‘बंगाल का स्वतंत्रता दिवस’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्यभर की महिलाओं ने खुशी जाहिर की है और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को अपना आशीर्वाद दिया है। कोलकाता में ANI से बातचीत करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा, 'आज बंगाल का स्वतंत्रता दिवस है। महिलाओं की आंखों में खुशी के आंसू इस बात का संकेत हैं कि उन्हें आजादी मिल गई है। उनका विशेष आशीर्वाद हमारे साथ है।'   उन्होंने आगे कहा, जब भारत आजाद हुआ था, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस तरह की आजादी की कल्पना की थी, सही मायनों में आज बंगाल को वही आजादी मिली है। यही कारण है कि आज भारी संख्या में लोग सड़कों पर निकले हैं। यह भाजपा कार्यकर्ताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कड़ी मेहनत का परिणाम है।' इससे पहले, सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। भाजपा के पांच नेताओं दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक ने भी मंत्री पद की शपथ ली। पीएम मोदी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री रहे उपस्थित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे। इसके अलावा त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सहित कई अन्य नेता समारोह में शामिल हुए। समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के दिवंगत कार्यकर्ताओं देबासिस मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के परिजनों से भी मुलाकात की। शुभेन्दु अधिकारी ने कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 207 सीटें हासिल कीं और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। वहीं, टीएमसी को 80 सीटों पर जीत मिली। सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों से हराया, साथ ही नंदीग्राम विधानसभा सीट भी बरकरार रखी।

हंता वायरस बढ़ने पर सख्ती, WHO ने जारी किए बचाव और सुरक्षा नियम

नई दिल्ली हंता वायरस को लेकर एक नई खबर आई है। अब तक हम यही जानते थे कि यह वायरस चूहों की गंदगी से फैलता है, लेकिन WHO के चीफ डॉ. टेड्रोस ने बताया है कि इसका एंडिस वायरस वाला रूप अब इंसानों के जरिए भी एक-दूसरे में फैल सकता है। MV Hondius जहाज पर इसके 8 मरीज मिले हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए WHO ने सख्त नियम बना दिए हैं ताकि इसे दुनिया में फैलने से रोका जा सके। राहत की बात बस इतनी है कि यह कोविड की तरह हवा की रफ्तार से नहीं फैलेगा, लेकिन फिर भी बहुत सावधान रहने की जरूरत है। इंसान से इंसान में फैलने वाला वायरस WHO के मुताबिक, एंडिस वायरस दुनिया का ऐसा हंता वायरस है जो एक बीमार इंसान से दूसरे स्वस्थ इंसान के शरीर में जा सकता है। अगर कोई इस वायरस से बीमार व्यक्ति के बहुत करीब रहता है या उसके संपर्क में आता है, तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। इस वायरस का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शरीर में जाने के बाद इसके लक्षण दिखने में 6 हफ्ते (42 दिन) तक लग सकते हैं। यानी मरीज को खुद पता नहीं चलेगा कि वह बीमार है और वह अनजाने में दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है। 42 दिनों तक डॉक्टर्स करेंगे मॉनिटरिंग WHO का कहना है कि जो लोग मरीजों के साथ रहे हैं, उन्हें कम से कम 42 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इस वायरस को पनपने में लंबा समय लगता है। हालांकि, अभी आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी रखकर इसकी चेन तोड़ी जा सकती है। हंता वायरस की शुरुआत कहां से हुई? National Library of Medicine के अनुसार, हंता वायरस कोई बिल्कुल नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतन नदी (Hantan River) के नाम पर रखा गया है। साल 1976 में पहली बार डॉक्टर हो वांग ली ने एक बीमार चूहे के शरीर में इस वायरस की पहचान की थी। 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान करीब 3,000 अमेरिकी और कोरियाई सैनिक एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आ गए थे। उस समय इसे कोरियाई रक्तस्रावी बुखार कहा गया था, जो बाद में हंता वायरस के रूप में पहचाना गया। साल 1993 में अमेरिका के फोर कॉर्नर्स इलाके में भी इस वायरस ने कोहराम मचाया था, जहां अचानक कई स्वस्थ लोगों की मौत फेफड़ों में पानी भरने (Hantavirus Pulmonary Syndrome) की वजह से हो गई थी। WHO के नए नियम     जिस भी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखें, उसे तुरंत बाकी लोगों से दूर एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया जाए।     जहाज पर मौजूद लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने कमरों (कैबिन) में ही रहें।     कमरे से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी है।     मरीजों की देखभाल करने वालों को पीपीई किट पहनने को कहा गया है।     कमरों और सामान को बार-बार साफ करें। डिस्क्लेमरःइस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

ना कारण, ना मोहलत: UAE ने पाकिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर बांधा

दुबई अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच खुद को मध्यस्थ यानी बिचौलिए के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिश उसी पर भारी पड़ गई है। पाकिस्तान के इस कदम से मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ उसके कूटनीतिक संबंध बिगड़ गए हैं। यूएई से बड़े पैमाने पर पाकिस्तानी कामगारों को डिपोर्ट (निर्वासित) किया जा रहा है। यूएई क्यों है पाकिस्तान से खफा? खाड़ी में कई हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई इस बात से बेहद नाराज है कि पाकिस्तान ने अमीराती क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा नहीं की। इसी नाराजगी के चलते यूएई की तरफ से पाकिस्तानियों पर यह सख्त कार्रवाई की जा रही है। बिना कारण बताए हजारों पाकिस्तानियों को किया डिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स ने कई पाकिस्तानी कामगारों और समुदाय के नेताओं से बातचीत के आधार पर बताया है कि हाल के हफ्तों में हजारों पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को यूएई से निकाल दिया गया है। कई लोगों का दावा है कि उन्हें डिपोर्ट करने से पहले बिना कोई कारण बताए हिरासत में रखा गया था। पाकिस्तानी शिया नेताओं का कहना है कि उनके समुदाय के लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि उनके ईरान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। सामुदायिक संगठनों का अनुमान है कि मध्य-अप्रैल से लेकर अब तक हजारों परिवार इस निर्वासन से प्रभावित हो चुके हैं। हालांकि, यूएई ने अभी तक इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी ऐसे किसी सामूहिक निर्वासन अभियान के दावों को खारिज किया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका इस मुद्दे ने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि यूएई से आने वाला पैसा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी जीवन रेखा है। वर्तमान में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी यूएई में रहते और काम करते हैं। अकेले पिछले साल ही इन पाकिस्तानी कामगारों ने 8 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम अपने देश भेजी थी। पाकिस्तान की कूटनीति और डगमगाती अर्थव्यवस्था इस समय खाड़ी देशों के बदलते रुख के बीच फंसी हुई है। एक तरफ जहां पाकिस्तान ने सऊदी अरब से अपनी नजदीकियां बढ़ाई हैं, वहीं दूसरी तरफ यूएई (UAE) का रवैया उसके प्रति बेहद सख्त हो गया है। दशकों से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को कर्ज का 'रोल-ओवर' करके सहारा देने वाले यूएई ने अपना 3.5 अरब डॉलर का कर्ज तुरंत वापस ले लिया है। अप्रैल 2026 में पाकिस्तान को मजबूरन यह भारी-भरकम कर्ज यूएई को चुकाना पड़ा, जिसके लिए उसे सऊदी अरब से मिली नई आर्थिक मदद (डिपॉजिट) का सहारा लेना पड़ा। यूएई का यह कदम साफ दर्शाता है कि पाकिस्तान का सऊदी की तरफ अधिक झुकाव और ईरान विवाद में उसकी मध्यस्थता वाली भूमिका के चलते अबू धाबी का रुख अब 'मुफ्त मदद' से बदलकर 'सख्त वसूली' वाला हो गया है। अमेरिका 'प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस' की तैयारी में यह निर्वासन का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ बातचीत विफल होती है, तो वॉशिंगटन "प्रोजेक्ट फ्रीडम" को फिर से शुरू कर सकता है। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए बनाई गई एक समुद्री सुरक्षा पहल है। खाड़ी में जारी अस्थिरता के बीच ट्रंप ने साफ किया है कि इस ऑपरेशन को "प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस" के नाम से और भी व्यापक रूप में वापस लाया जा सकता है।

भाषा राजनीति के बीच बड़ा खुलासा, महाराष्ट्र में 80 हजार विद्यार्थी मराठी में नहीं हो सके पास

मुंबई महाराष्ट्र में जहां एक तरफ मराठी भाषा को लेकर हमेशा राजनीति गरमाई रहती है वहीं, अब शिक्षा से जुड़ी बहुत हैरान करने वाली खबर सामने आई है। महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं क्लास के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं। इस साल पूरे राज्य का रिजल्ट काफी अच्छा रहा है लेकिन 80 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स अपनी मातृभाषा मराठी के पेपर में ही फेल हो गए हैं। राज्य में साइनबोर्ड से लेकर रोजगार तक हर जगह मराठी को अनिवार्य करने की राजनीति के बीच बच्चों का अपनी ही भाषा में न्यूनतम पासिंग मार्क्स भी न ला पाना शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कैसा रहा इस बार का ओवरऑल रिजल्ट इस साल 10वीं की परीक्षा के लिए 16 लाख 14 हजार 50 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 16 लाख 164 स्टूडेंट्स एग्जाम देने पहुंचे थे। इनमें से कुल 14 लाख 52 हजार 246 स्टूडेंट्स ने एग्जाम पास की है। राज्य का कुल पास परसेंटेज 90.75 रहा है जो एक शानदार आंकड़ा है। रेगुलर स्टूडेंट्स ने 92.09 परसेंट के साथ बहुत बेहतरीन परफॉर्मेंस दि है लेकिन, मराठी सब्जेक्ट में इतने सारे बच्चों का फेल होना इस शानदार सफलता के बीच चिंता का कारण बन गया है। आखिर क्यों मातृभाषा में फेल हो रहे बच्चे शिक्षा विशेषज्ञों ने मराठी में इतने भारी पैमाने पर स्टूडेंट्स के फेल होने के कुछ मुख्य कारण बताए हैं:     इंग्लिश मीडियम के स्कूलों और पढ़ाई की तरफ पेरेंट्स और स्टूडेंट्स का तेजी से बढ़ता हुआ रुझान।     सोशल मीडिया का लगातार बढ़ता प्रभाव जो बच्चों को उनकी मूल भाषा के साहित्य से काफी दूर कर रहा है।     मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में खुद से लिखने की आदत खत्म हो रही है जिससे राइटिंग प्रैक्टिस छूट गई है।     प्रैक्टिस न होने के कारण बच्चे अपनी मातृभाषा की व्याकरण और स्पेलिंग में सबसे ज्यादा गलतियां कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर बदलाव की जरूरत यह चौंकाने वाले नतीजे इस बात का साफ संकेत हैं कि भाषा को लेकर केवल कड़े राजनीतिक नियम बनाना ही काफी नहीं है। सरकार और शिक्षा विभाग को जमीनी स्तर पर स्कूलों में मातृभाषा को ज्यादा प्रभावी तरीके से पढ़ाने और स्टूडेंट्स में इसके प्रति रुचि जगाने के लिए तत्काल कुछ ठोस कदम उठाने होंगे ताकि, भविष्य में ऐसे नतीजे दोबारा देखने को न मिलें।

F/A-18 सुपर हॉर्नेट से अमेरिका का पहला हमला, ब्लॉकेड में 3 ईरानी जहाज रोके गए

वाशिंगटन अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी झंडे वाले टैंकरों पर F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों से पहला हमला किया है. यह अप्रैल 2026 में शांति वार्ता के टूटने के बाद ईरान पर लगाए गए नौसैनिक ब्लॉकेड को और सख्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. 6 मई और 8 मई 2026 को अमेरिका ने M/T हसना, M/T सी स्टार III और M/T सेव्दा नाम के तीन टैंकरों को निशाना बनाया।  इन हमलों में २० मिलीमीटर की तोप से गोलीबारी और सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. अमेरिकी विमानों ने टैंकरों को डुबोने की बजाय उन्हें न चलने लायक बनाकर रोकने की रणनीति अपनाई. विमानों ने टैंकरों के रडर (पतवार), धुआं निकालने वाली चिमनी और इंजन से जुड़े हिस्सों को निशाना बनाया।  इससे जहाजों की दिशा नियंत्रण और गति बंद हो गई, लेकिन बड़े आग या तेल रिसाव से बच गए. यह रणनीति जानबूझकर अपनाई गई ताकि पर्यावरण को नुकसान कम हो और जहाज पर सवार लोगों की जान बच सके. USS अब्राहम लिंकन और USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश एयरक्राफ्ट कैरियर से ये हमले किए गए।  6 मई का हमला 6 मई को M/T हसना नाम के टैंकर पर F/A-18 सुपर हॉर्नेट ने अपनी 20 मिलीमीटर M61A2 वल्कन तोप से हमला किया. विमान ने कम ऊंचाई से उड़कर टैंकर के रडर को निशाना बनाया. कई गोली मारकर स्टियरिंग सिस्टम को नष्ट कर दिया गया. टैंकर ईरानी बंदरगाह की तरफ जा रहा था, लेकिन अमेरिकी चेतावनी मानने से इनकार कर दिया था. अमेरिकी नौसेना द्वारा व्यापारी जहाज पर तोप से सीधा हमला करने का दुर्लभ मामला है।  8 मई के हमले 8 मई को दो और टैंकरों – सी स्टार III और सेव्दा – पर हमला किया गया. इस बार तोप की जगह सटीक गाइडेड बमों का इस्तेमाल हुआ. विमानों ने दोनों टैंकरों की चिमनियों (स्मोकस्टैक) को निशाना बनाया. इससे जहाजों का इंजन सिस्टम, वेंटिलेशन और प्रोपल्शन बंद हो गया. सी स्टार III बहुत बड़ा VLCC टैंकर था जबकि सेव्दा पुराना लेकिन बड़ा Suezmax टैंकर था. दोनों ईरानी तेल परिवहन से जुड़े थे।  ब्लॉकेड की पूरी कहानी अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता टूट गई. इसके बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों आने-जाने वाले जहाजों पर नौसैनिक ब्लॉकेड लगा दिया. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बाद यह कदम उठाया गया. अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास माइन्स साफ करने का काम शुरू किया. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत विफल रही. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी तेल निर्यात रोकने का आदेश दिया।  इस ब्लॉकेड में 20 से ज्यादा युद्धपोत, 200 के करीब विमान, खुफिया विमान, माइन्स साफ करने वाले जहाज और मरीन कमांडो शामिल हैं. अब तक 70 से ज्यादा व्यापारी जहाजों को रोका, मोड़ा या जब्त किया जा चुका है. 19 अप्रैल को USS स्प्रुएंस डिस्ट्रॉयर ने M/V तौस्का नाम के जहाज पर चेतावनी के बाद गोली चलाई थी।  डोनाल्ड ट्रंप ने हमले पर क्या कहा?     अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा कि ईरान की ओर से घातक हमले के बाद भी तीनों जहाज सुरक्षित होर्मुज से निकल आए हैं. उन्होंने कहा कि तीन अमेरिकी डिस्ट्रॉयर होर्मुज से गुजरते समय हमले की चपेट में आए, लेकिन उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया।      डोनाल्ड ट्रंप ने इस झड़प के बाद ईरान को चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और ज्यादा ‘कड़ा और हिंसक’ जवाब देगा।      ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को कम करके दिखाने की कोशिश भी की. उन्होंने ABC न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘यह सिर्फ एक छोटा सा झटका है’ और जोर दिया कि सीजफायर अभी भी लागू है. ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर हमले को ‘लव टैप’ नाम दिया।  अमेरिका की नई रणनीति अमेरिका इस बार मिशन किल रणनीति अपना रहा है. मतलब जहाज को पूरी तरह नष्ट करने की बजाय उसे चलने लायक न बनाना. इससे बड़े युद्ध का खतरा कम रहता है. पर्यावरण प्रदूषण भी नियंत्रित रहता है. F/A-18 विमान, डिस्ट्रॉयर, ई-2D हॉकआई, EA-18G ग्राउलर और हेलीकॉप्टरों का पूरा नेटवर्क इस्तेमाल किया जा रहा है. यह तरीका भविष्य में अन्य समुद्री ब्लॉकेड के लिए नया मॉडल बन सकता है।  ईरान की क्रांतिकारी गार्ड नौसेना (IRGC) ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास विदेशी युद्धपोतों को दुश्मन माना जाएगा. दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होने के कारण यहां कोई भी गलती बड़े युद्ध में बदल सकती है. अभी तक टैंकर खाली थे, इसलिए तेल रिसाव का खतरा कम था। यह घटना ईरान पर अमेरिकी दबाव को बढ़ाती है. इससे ईरानी तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा. अमेरिका दिखाना चाहता है कि वह ब्लॉकेड को सख्ती से लागू करेगा लेकिन अनावश्यक नुकसान से बचना भी चाहता है। 

रूस की विजय दिवस परेड शांत, सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों का आदला-बदली होगा

मॉस्को  यूक्रेन युद्ध के लगातार जारी रहने और सुरक्षा खतरों के बीच रूस ने शनिवार को अपना विजय दिवस परेड बेहद सीमित रूप में आयोजित किया. हर साल 9 मई को मॉस्को के रेड स्कॉयर पर होने वाली यह परेड रूस के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में मानी जाती है. यह दिन सोवियत संघ की नाजी जर्मनी पर जीत और दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लाखों लोगों की याद में मनाया जाता है. लेकिन इस बार का आयोजन पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई दिया।  आमतौर पर रूस इस परेड में अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करता रहा है. टैंक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें रेड स्कॉयर पर दिखाई जाती थीं। हालांकि इस साल सुरक्षा कारणों और यूक्रेन हमले के खतरे की वजह से टैंक या भारी सैन्य वाहन सड़क पर नहीं उतारे गए।  इसके बजाय रूस ने अपनी सैन्य ताकत को बड़े डिजिटल स्क्रीन और सरकारी टीवी प्रसारण के जरिए दिखाया. इसमें Yars इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, आर्कान्जेस्क परमाणु पनडुब्बी, पेरेसवेत लेजर हथियार, सुखोई Su-57 फाइटर जेट, एस-500 मिसाइल सिस्टम और कई ड्रोन व आर्टिलरी सिस्टम शामिल थे।  परेड में रूसी सैनिकों और नौसेना के जवानों ने मार्च किया. इनमें कुछ ऐसे सैनिक भी शामिल थे जो यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रेड स्क्वायर में व्लादिमीर लेनिन समाधि के पास बैठे दिखाई दिए. उनके साथ रूसी युद्ध वेटरन्स भी मौजूद थे. इस बार परेड में नॉर्थ कोरिया के सैनिक भी शामिल हुए. रिपोर्ट के मुताबिक ये सैनिक रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हैं।  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लगभग आठ मिनट का भाषण दिया. उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध में जीत हासिल करेगा. उन्होंने कहा कि 'विशेष सैन्य अभियान' चला रहे रूसी सैनिक NATO समर्थित ताकतों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आगे बढ़ रहे हैं. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल करने वाली पीढ़ी आज के सैनिकों को प्रेरणा दे रही है।  इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की जानकारी दी. उन्होंने ने कहा कि वे इस युद्धविराम को और लंबे समय तक बढ़ते देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे विनाशकारी संघर्ष बन गया है. उनके मुताबिक हर महीने हजारों युवा सैनिक मारे जा रहे हैं।  रूस और यूक्रेन दोनों ने हाल के दिनों में एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए थे, लेकिन शनिवार से शुरू हुए नए सीजफायर के उल्लंघन की कोई बड़ी रिपोर्ट सामने नहीं आई।  रूस ने यूक्रेन को चेतावनी दी थी कि अगर उसने विजय दिवस परेड को निशाना बनाया तो कीव पर बड़ा मिसाइल हमला किया जाएगा. मॉस्को ने विदेशी दूतावासों को भी सतर्क रहने को कहा था।  वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने व्यंग्यात्मक अंदाज में बयान जारी करते हुए कहा कि रूस की 9 मई की परेड 'होने दी जाएगी' और यूक्रेनी हथियार रेड स्कॉयर को निशाना नहीं बनाएंगे. परेड के दौरान मॉस्को में सुरक्षा बेहद कड़ी रही। शहर के कई रास्ते बंद किए गए और सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहे. रॉयटर्स की तस्वीरों में हथियारबंद सैनिक पिकअप ट्रकों पर तैनात दिखाई दिए।   सैन्य गतिविधियां रुकेंगी और कैदियों की अदला-बदली होगी रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 4 साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन का सीजफायर होगा. यह युद्धविराम 9 मई, 10 मई और 11 मई तक लागू रहेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों ने तीन दिन के सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप ने बताया कि रूस में यह समय विक्ट्री डे के जश्न का है. वहीं यूक्रेन भी दूसरे विश्व युद्ध का एक अहम हिस्सा रहा है, इसलिए यह समय दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस सीजफायर के दौरान सभी तरह की सैन्य गतिविधियों को रोका जाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 1,000 कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी।  ट्रंप ने पुतिन को कहा थैंक्यू ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह अनुरोध उन्होंने खुद किया था और इसके लिए उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का धन्यवाद किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम लंबे समय से चल रहे इस खतरनाक युद्ध को खत्म करने की शुरुआत साबित हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए बातचीत लगातार जारी है. उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि शांति की दिशा में कोशिशें हर दिन आगे बढ़ रही हैं और दुनिया इस युद्ध के अंत के और करीब पहुंच रही है। 

तमिलनाडु राजनीति में बदलाव: वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से विजय की पार्टी मजबूत

तमिलनाडु तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय के मुख्यमंत्री बनने और सरकार गठन का रास्ता शनिवार को पूरी तरह साफ हो गया है. वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) ने उनकी पार्टी टीवीके (TVK) को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है. दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं. इससे पहले विजय लगातार तीन दिनों तक राज्यपाल से मुलाकात के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों का समर्थन नहीं दिखा पाए थे. अब वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन के बाद विजय के पास 120 विधायकों का समर्थन हो गया है. इसके साथ ही चार दिनों से जारी राजनीतिक असमंजस खत्म हो गया. विजय की पार्टी टीवीके ने विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपने और सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से आज शाम 6 बजे मुलाकात का समय मांगा था. हालांकि, टीवीके को आज राज्यपाल से मिलने का समय नहीं मिला. इससे पहले विजय ने दो बार राज्यपाल से मुलाकात की थी. लेकिन बहुमत के लिए विधायकों की संख्या पूरी नहीं होने के चलते उन्हें राज्यपाल की ओर सरकार गठन का न्योता नहीं मिला था. तमिलनाडु में TVK बनी सबसे बड़ी पार्टी दो साल पुरानी विजय की टीवीके ने इस चुनाव में डीएमके और एआईएडीएमके जैसी द्रविड़ राजनीति के धुरंधरों को पीछे छोड़ते हुए 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में सफलता हासिल की. हालांकि, विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक छोड़नी होगी, इसलिए पार्टी के विधायकों की वास्तविक संख्या 107 है. डीएमके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 5 सीटें जीतीं. त​मिलनाडु चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस डीएमके से अलग होकर, टीवीके को समर्थन देने वाली पहली पार्टी बनी थी. वामदलों ने भी अपने चार विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है. अब वीसीके और आईयूएमएल के जुड़ने से टीवीके बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है. बता दें कि 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है. विजय के पास 120 विधायकों का समर्थन टीवीके के 107, कांग्रेस के 5, वामदलों के 4 और वीसीके-आईयूएमएल के 2-2 विधायकों के समर्थन से विजय के पास अब 120 विधायकों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े से 2 ज्यादा है. वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन इस बात से नाराज थे कि विजय ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के बजाय व्हाट्सऐप संदेश के जरिए समर्थन मांगा था. आईयूएमएल ने भी शुरुआत में सख्त रुख अपनाते हुए खुद को डीएमके के साथ बताया था. लेकिन शनिवार सुबह टीवीके नेताओं की वीसीके और आईयूएमएल नेतृत्व से मुलाकात के बाद स्थिति बदल गई. वीसीके ने भले ही बिना शर्त समर्थन दिया हो, लेकिन पार्टी नेता वन्नी अरसु ने स्थानीय मीडिया से कहा कि सरकार में शामिल होने को लेकर फैसला बाद में लिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी चाहती है कि विजय द्वारा खाली की जाने वाली सीट से थोल थिरुमावलवन चुनाव लड़ें और आगे चलकर उपमुख्यमंत्री बनें.