samacharsecretary.com

पुतिन का बड़ा दांव! Admiral Nakhimov की वापसी से बदला समुद्री शक्ति संतुलन

मॉस्को  समंदर के रास्ते एक ऐसी खौफनाक खबर आ रही है, जिसने अमेरिकी जैसे सुपरपावर की रातों की नींद उड़ा दी है. रूस ने करीब 30 साल बाद अपने एक ‘दैत्य’ को समंदर में उतार दिया है, जो अकेले ही अमेरिकी नेवी के पूरे बेड़े को पलक झपकते ही तबाह कर सकता है. रूस ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जंगी जहाज ‘एडमिरल नाखिमोव’ को अपने फाइनल सी-ट्रायल के लिए रवाना कर दिया है. समंदर का ये सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकेंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा! समंदर में लौटा पुतिन का 28,000 टन का महादानव! रूस का ये कीरोव-क्लास क्रूजर (Kirov-class cruiser) कोई आम जहाज नहीं है. ये दुनिया का इकलौता और सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड कॉम्बैट शिप है. इसका वजन करीब 28,000 टन है. आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न ‘अर्ली बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर’ (Arleigh Burke-class destroyers) जहाजों से भी बड़ा और भारी है।  सोवियत संघ के जमाने का ये दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका हुआ था लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में ये अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।  रूस की 176 मिसाइलों का जाल, जिरकॉन काल! इस महाविनाशक जहाज के अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता. इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं. इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का नेवल वर्जन तैनात है, जो जमीन पर मौजूद S-400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है।  इसके अलावा, बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ‘जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें’ (Zircon Hypersonic Cruise Missile) भरी गई हैं. ये मिसाइल साउंड की रफ्तार से 9 गुना तेजी (Mach 9) से उड़ती है और 1,000 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को संभलने का एक सेकेंड का मौका भी नहीं देती।  रूस का ‘तख्त’ और बदलती कूटनीति का दांव सेवेर्नोए डिजाइन ब्यूरो के सीईओ आंद्रेई द्याचकोव के मुताबिक, इस जहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि ये आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है. हालांकि, रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था।  यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वां जहाज ‘प्योत्र वेलिकी’ को समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा, क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था. सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस ने कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया है, इसलिए अपनी धाक जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमोव को चमकाने में झोंक दी।  रूस धोएगा पुराने घाव साल 2022 में यूक्रेन के मामूली मिसाइल हमले में रूस का ‘मोस्कवा’ जहाज डूब गया था, जिससे रूसी नौसेना की साख पर बट्टा लगा था. इसके बाद रूस ने अपना पूरा ध्यान गुपचुप तरीके से हमला करने वाली यासेन-एम क्लास पनडुब्बियों पर लगा दिया था. अब एडमिरल नाखिमोव को सीधे रूस के आर्कटिक बेड़े में शामिल किया जा रहा है।  दरअसल, अमेरिका और नाटो (NATO) देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में रूस का ये न्यूक्लियर पावर्ड दैत्य समंदर के उस बेहद ठंडे रास्ते की पहरेदारी करेगा और अमेरिका को उसकी हद में रहने की सख्त चेतावनी देगा। 

आज का मौसम: मॉनसून की रफ्तार तेज, देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी

तिरुवनन्तपुरम दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल में दस्तक देते ही उत्तर भारत का मौसम भी करवट लेने लगा है। मौसम विभाग ने 5 जून को यूपी, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं मॉनसून केरल के बाद अब कर्नाटक, तमिलनाडु के इलाकों की ओर आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून का असर उत्तर और पश्चिमी भारत में दिखाई देगा। अगले 24 घंटे में कम से कम 16 राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। इसकेसाथ ही 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। केरल और कर्नाटक में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान केरल और कर्नाटक के बड़े इलाके में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं तमिलनाडु के भी बड़े क्षेत्र में बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एक सप्ताह भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि कम से कम 9 जून तक वे बंगाल की खाड़ी में ना उतरें। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट मौम विभाग ने कहा है कि 5 जून को दक्षिण में केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के असम, अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, और सिक्किम में बारिश का अनुमान है। उत्तर भारत की बात करें तो पंजाब. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कम से कम 16 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में 4 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 और 6 जून को भी ादल छाए रहेंगे। हवा की गति 40 से 60 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इसके अलावा 5 जून को दोपहर में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश और हवा की वजह से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी। यूपी का मौसम पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 ओर 6 जून को आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी कया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक लखनऊ,वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बलिया, जौनपुर और गाजीपुर में 5 जून को बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, अलीगढ़, आगरा और मथुरा में भी मध्यम बारिश का अनुमान है। हवाओं की गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रह सकती है। पूर्वी यूपी में 7 से 10 जून तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार का मौसम बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में आंधी के साथ बारिश का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बड़े इलाके में आंधी के साथ बारिश की संभावना है। पहाड़ी इलाकों का मौसम हिमाचल प्रदेश के मंडी, शिमला, कांगड़ा. चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ सकती है। इसके अलावा हवाओँ की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटे की रहने की संभावना है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग, चोमील, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, पिथौरागढ़. उत्तर काशी और टिहरी जिलों में मध्यम बारिश की संभावा है। 5 जून को कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

एनएमडीसी ने मनाया पर्यावरण दिवस 2026

हैदराबाद  भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक और एक जिम्मेदार खनन कंपनी एनएमडीसी ने हैदराबाद में अपने मुख्यालय और देश भर में स्थित अपनी परियोजनाओं में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया,  जो सतत खनन और पर्यावरण प्रबंधन के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है । कंपनी ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जो पर्यावरण सुस्थिरता की दिशा में सामूहिक कार्रवाई के महत्व को उजागर करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम  “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” पर केंद्रित रहा । समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जो हरित भविष्य के निर्माण के लिए एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है । श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन), श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), श्री अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), और श्री सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने पर्यावरण की शपथ दिलवाते हुए कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सुस्थिर प्रथाओं को बढ़ावा देने में योगदान करने के लिए प्रेरित किया ।  कार्यक्रम के भाग के रूप में, पर्यावरण के प्रति जागरूकता संबंधी अनेक वीडियो दिखाए गए और एनएमडीसी की पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और सुस्थिर खनन प्रथाओं के लिए चल रही पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वृत्तचित्र दिखाया गया । अपनी सभी परियोजनाओं में, एनएमडीसी ने वृक्षारोपण अभियान चलाए और कर्मचारियों तथा छात्रों के लिए पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और सुस्थिरता पर अभिनव सोच को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। कंपनी ने सुस्थिर विकल्पों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का वितरण भी किया । अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पृथ्वी अपने अस्तित्व के अधिकांश समय तक मनुष्यों के बिना जीवित रही है और अस्तित्व उल्लेखनीय रहा है । मुझे यकीन है कि अगर भविष्य में मनुष्य का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो भी पृथ्वी का अस्थित्व आराम से बना रहेगा । इसलिए, यह हमारे ही हित में है कि हम भूमंडल की देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि यह यह हमारे रहने योग्य बना रहे। यह पृथ्वी के लिए नहीं बल्कि मानवता की उत्तरजीविता की रणनीति है । व्यावसायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार से हम जो भी कदम उठाते हैं, उसे उठाने से पहले हम उनपर जिम्मेवारीपूर्वक विचार अवश्य करें ।“  पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार संगठन के रूप में, एनएमडीसी जिम्मेदार खनन में विश्वास रखता है और उसका पालन करता है । आज हम जो करते हैं वह हमें गर्व महसूस कराता है, न केवल इसलिए कि हम व्यवसाय में निरंतर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि हम पर्यावरण और समुदायों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं ।“  इस अवसर पर वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर एनएमडीसी की आंतरिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने रचनात्मकता और भागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना को बढावा देने का प्रयास किया ।  आज जब देश एक सुस्थिर भविष्य की ओर बढ़ रहा है, एनएमडीसी यह प्रदर्शित करता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण प्रबंधन साथ-साथ चल सकते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पृथ्वी की सतह से नीचे जो पोषित होता है वह उसके ऊपर मौजूद जीवन में भी सार्थक योगदान देता है ।

सीमा पर बढ़ी सख्ती: घुसपैठियों की वापसी को लेकर BSF-BGB के बीच विवाद की स्थिति

कलकत्ता भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती के बाद सीमा पर टकराव की नौबत है. बांग्लादेश गार्ड बॉर्डर (BGB) अपने ही नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं दे रहा है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से सैकड़ों बांग्लादेशी घर वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन BGB इन्हें बांग्लादेशी मानती ही नहीं है।  BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स पर अपने 33 लोगों को बांग्लादेश में घुसने नहीं दिया. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बार्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को अंदर भेजने की बीएसएफ की कोशिश को सफल नहीं होने दिया।  अखबार ने लिखा है, "BGB अधिकारियों के अनुसार आज सुबह-सुबह भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की, जिसे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने रोक दिया. BGB-16 और 61 बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि ये घटनाएं सुबह करीब 5:00 बजे बॉर्डर पर अलग-अलग जगहों पर हुईं।  BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने दावा किया कि सभी लोगों को ज़ीरो लाइन पर रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और BGB हाई अलर्ट पर है; साथ ही इस घटना को लेकर BSF के साथ बातचीत भी चल रही है।  BGB मीडिया सेल ने दावा किया कि सबसे पहले BGB-61 तीस्ता बटालियन के तहत बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) इलाके से 11 लोगों को बांग्लादेश की तरफ पुश-इन करते हुए देखा गया. आगे BGB ने दावा किया कि फिर उसी समय पैशात्तीबारी BOP इलाके से भी 10 और लोगों को अंदर धकेला जा रहा था।  जानकारी मिलने के बाद BGB की पेट्रोलिंग टीमें तुरंत दोनों जगहों पर पहुंचीं और स्थिति को काबू में किया. BGB ने उन लोगों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और वे भारतीय सीमा में ही रहे।  पश्चिम बंगाल में अवैध रुप से घुसे बांग्लादेशियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद देश में अवैध रूप से घुसे कई बांग्लादेशी स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार और सेना इन लोगों को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है।  अखबार के अनुसार दुर्गापुर और दिघलतारी BOP की BGB KR पेट्रोलिंग टीमों ने भारतीय सीमा की तरफ से बॉर्डर पिलर 925 और 927 के पास 12 लोगों बांग्लादेश में घुसने से रोक दिया।  बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने बंगाबाडी बॉर्डर इलाके में 28 लोगों बांग्लादेश घुसने रोक दिया।  इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर BGB और BSF के बीच एक फ्लैग मीटिंग हुई. बंगाबाड़ी बॉर्डर पर हुई इस मीटिंग में BSF ने BGB को बताया कि वे इस मुद्दे पर अपने सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे।  भारत में इस समय सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस/प्रशासनिक अभियान चलाये जा रहे हैं. ये अभियान अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित हैं। 

GDP में शानदार उछाल: चौथी तिमाही के दम पर FY26 में 7.7% की वृद्धि, FY27 में 6.6% ग्रोथ का अनुमान

नई दिल्‍ली  भारत की वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रोथ बढ़कर 7.7% हुई। मार्च तिमाही के आंकड़े पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहे। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आर्थिक विकास दर 2025-26 में बढ़कर 7.7% हो गई, जो एक साल पहले 7.1% थी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के कारण इस रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में यह 8% थी। भारत अब नई जीडीपी (GDP) सीरीज के तहत आंकड़े जारी कर रहा है। इसमें महंगाई मापने वाले बास्केट में हालिया बदलाव, 2022-23 को नया आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाना और अपडेटेड बैक-सीरीज डेटा शामिल है। यह सब महामारी के बाद खपत के बदलते पैटर्न और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेज़ी से विस्तार को बेहतर ढंग से समझने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही. हालांकि, यह इससे पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के 8% के मुकाबले थोड़ी कम है. इसका मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में आई कमी रही. मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जो तीसरी तिमाही में 12.8% पर थी, वह आखिरी तिमाही में गिरकर 7.3% पर आ गई।  फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.9% रही GVA ग्रोथ ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) की बात करें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसकी ग्रोथ रेट 7.9% दर्ज की गई. चौथी तिमाही में भी जीवीए ग्रोथ 7.9% रही, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देती है. बता दें कि जीवीए से पता चलता है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे खेती, उद्योग) में कुल कितनी असली कमाई या वैल्यू जुड़ी।  पूरे साल की यह ग्रोथ सरकार के फरवरी के दूसरे अनुमान 7.6% से भी ज्यादा है। वहीं पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2024-25 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.1% रही थी। नॉमिनल जीडीपी में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार कायम रखी है। वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी के 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 318.07 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया था। यह स्पष्ट रूप से 8.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर को रेखांकित करता है। जीडीपी के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। 7.8 प्रतिशत की मजबूत तिमाही वृद्धि और 7.7 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर न सिर्फ भारतीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह देश के लगातार बढ़ते आर्थिक परिदृश्य को भी मजबूती प्रदान करता है।  मैन्युफैक्चरिंग में दिखी सुस्ती     वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। यह तीसरी तिमाही की 8% की ग्रोथ के मुकाबले थोड़ी कम है।     तिमाही-दर-तिमाही आधार पर विकास दर में आई इस गिरावट की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दर्ज की गई सुस्ती है।     मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ जहां तीसरी तिमाही में 12.8% के उच्च स्तर पर थी, वह चौथी तिमाही में घटकर 7.3% पर आ गई है। GVA ग्रोथ 7.9% रही, नॉमिनल जीडीपी की रफ्तार भी धीमी     आर्थिक विकास को करीब से दर्शाने वाली ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA) ग्रोथ पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.9% दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में भी GVA की विकास दर ठीक इतनी ही यानी 7.9% रही।     दूसरी ओर, अगर मौजूदा बाजार भाव पर आधारित नॉमिनल जीडीपी की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें 8.9% की बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले वित्त वर्ष-25 के 9.7% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से कम है। भविष्य का अनुमान: वित्त वर्ष-27 में 6.6% रह सकती है ग्रोथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जारी अनुमानों के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास की यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले साल देश की ग्रोथ रेट 110 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.10% घटकर 6.6% पर आ सकती है। RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की जीडीपी दर में कमी का अनुमान जताया है. आरबीआई के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है. पहले आरबीआई ने रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी का अनुमान जारी किया था।  नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी हुआ डेटा सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे साल के जीडीपी आंकड़ों को एक नए बदलाव के साथ पेश किया है। इस बार पूरे साल के डेटा को नए बेस ईयर 2022-23 के पैमाने पर कैलकुलेट करके जारी किया गया है। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत 'बैक-सीरीज' डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग … Read more

लोनधारकों को राहत या इंतजार? RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर

नई दिल्ली केंद्रीय बैंक RBI ने 3 से 5 जून तक चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट 5.25 पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार सुबह 10 बजे MPC मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेपो रेट नहीं बढ़ाने के फैसले को जानकार, एक राहत की तरह मान रहे हैं. इस फैसले से स्‍पष्‍ट है कि अगर आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है, तो आपके लोन की EMI नहीं बढ़ेगी।  कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?  केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से कम कर दिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है।      जून 2026 तिमाही: 6.6%     सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%     दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%     मार्च 2027 तिमाही: 6.8%   इस साल अनुमान से ज्‍यादा रह सकती है महंगाई महंगाई दर पर RBI का अनुमान है कि इस साल देश में महंगाई थोड़ी ज्‍यादा रह सकती है. इसमें तेल और गैस की बढ़ी कीमतों का बड़ा रोल रहेगा. मार्च में महंगाई दर 3.4 फीसदी और अप्रैल में 3.5 फीसदी रही थी, जबकि इससे पहले फरवरी 2026 में महंगाई दर 3.2 रही थी.  ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्‍य से कम थे. हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है. RBI के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5.1 फीसदी रह सकती है।      जून 2026 तिमाही: 4.2%     सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%     दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%     मार्च 2027 तिमाही: 5.4% हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। RBI MPC मीटिंग के अन्य बड़े फैसले     ग्रोथ का अनुमान घटाया: वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।     स्टांस 'न्यूट्रल' रखा: महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।     महंगाई को लेकर चिंता: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं।     कमजोर मानसून का डर: पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।     सर्विस सेक्टर मजबूत: अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और GST रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

Flex Fuel वाहनों को मिलेगा बढ़ावा, E85 पेट्रोल लॉन्च को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी

  नई दिल्ली पेट्रोल के बढ़ते खर्च से अगर आप भी परेशान रहते हैं, तो आने वाले समय में राहत की खबर मिल सकती है. सरकार अब ऐसे फ्यूल पर बड़ा दांव लगाने जा रही है जो पेट्रोल से काफी सस्ता होगा और देश में पहले से मौजूद इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा देगा. बात हो रही है E85 फ्यूल की, जिसमें 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है. सरकार इसकी कीमत कम रखने, देशभर में फ्यूल स्टेशन बढ़ाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी में जुटी है. हीरो की नई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स और मारुति की फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर इसी बदलाव की शुरुआत मानी जा रही हैं।  दरअसल, केंद्र सरकार E85 फ्यूल को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है. आज मारुति सुजुकी ने अपनी मशहूर फैमिली कार Maruti Wagon R के नए फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) वर्जन को पेश किया. इस मौके पर मौजूदा केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि, "E85 फ्यूल सामान्य पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता होगा. उनका कहना है कि यह फ्यूल केवल उन वाहनों में इस्तेमाल किया जाएगा जो E85 के अनुकूल होंगे. सरकार जल्द ही ऐसी नीतियां लाने पर काम कर रही है जिससे लोगों के लिए इस नए फ्यूल को अपनाना आसान और किफायती बन सके।  पुरी ने कहा कि, "आज देश में तकरीबन 30 करोड़ दोपहिया वाहन और तकरीबन 37 लाख पैसेंजर वाहन मौजूद हैं. जब फ्लेक्स फ्यूल का इस्तेमाल इन वाहनों में बड़े पैमाने पर होगा तो इसका असर भी बड़ा होगा. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से देश में एथेनॉल की खपत में बड़ा इजाफा हो सकता है." केंद्रीय मंत्री के अनुसार यदि नए बिकने वाले वाहनों में से 50 प्रतिशत वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस हो जाते हैं, तो इथेनॉल की मांग में करीब 400 करोड़ लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की फ्यूल इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।  E85 फ्यूल क्या है और क्यों है खास? E85 एक विशेष प्रकार का फ्यूल है जिसमें 85 प्रतिशत तक इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है. यह फ्यूल केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है. सरकार जल्द ही E85 से जुड़े ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है. वहीं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय पहले ही E85, E100, बायोडीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दे चुका है।  सरकार E85 फ्यूल की उपलब्धता बढ़ाने की भी योजना बना रही है. शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 E85 फ्यूल स्टेशन शुरू किए जाएंगे. इसके बाद इस साल दिसंबर तक इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 500 स्टेशन करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार की योजना है कि वर्ष 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में करीब 5,000 E85 फ्यूल स्टेशन स्थापित किए जाएं। फलेक्स-फ्यूल वाहनों की एंट्री सरकार की इस पहल के साथ वाहन निर्माता कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च करने लगी हैं. हीरो मोटोकॉर्प ने हाल ही में स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किए हैं. ये मोटरसाइकिलें E20 से लेकर E85 तक के इथेनॉल बलेंडिंग पर चल सकती हैं. HF Deluxe Flex Fuel की कीमत 72,792 रुपये रखी गई है, जबकि Splendor+ Flex Fuel की कीमत 82,710 रुपये ( एक्स-शोरूम) तय की गई है।  वहीं आज मारुति सुजुकी ने अपनी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल कार को भी पेश किया है. यह देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार मानी जा रही है. कंपनी के 1.2-लीटर K12N पेट्रोल इंजन पर बेस्ड यह कार E20 से E85 तक के इथेनॉल ब्लेंडिंग पर चल सकती है. फिलहाल इसे केवल फ्लीट ऑपरेटरों और ओला-उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. बाद में कंपनी इसे प्राइवेट व्हीकल के तौर पर भी लॉन्च कर सकती है।   

₹2.25 लाख करोड़ की निकासी के बाद सरकार का बड़ा दांव, क्या फिर लौटेंगे विदेशी निवेशक?

 नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के निकलने का सिलसिला लगातार जारी है और FPIs की भारी बिकवाली का दबाव शेयर मार्केट में साफ नजर आ रहा है. इस साल सिर्फ फरवरी महीने को छोड़ दें, तो हर महीने एफपीआई ने बाजार से पैसे निकाले हैं. अब इन निवेशकों की वापसी के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे इन निवेशकों के यू-टर्न (FPIs U-Turn) की उम्मीद जागी है।  दरअसल, विदेशी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत मोदी सरकार (Modi Govt) ने भारतीय सरकारी बांडों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर पूंजीगत लाभ कर यानी कैपिटल गेन टैक्स को हटाने का निर्णय लिया है।  मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी सूत्रों के हवाले से ये बात सामने आई है कि कैश फ्लो को बढ़ावा देने, भारतीय करेंसी रुपये (Indian Rupee) को सपोर्ट करने और ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल की हाई कीमतों के प्रभाव से इकोनॉमी को बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के तहत मोदी कैबिनट ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।  इसे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसका सीधा उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स के जटिल जंजाल को कम करना है ताकि वे अपनी पूंजी भारत से बाहर ले जाने के बजाय यहीं निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों. एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों को मिलने वाली इस प्रस्तावित टैक्स राहत से न सिर्फ घरेलू शेयर बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ेगी, बल्कि रुपये पर बना भारी दबाव भी काफी हद तक कम हो जाएगा।  रिजर्व बैंक भी कर सकता है महत्‍वपूर्ण घोषणा सरकार का यह अध्यादेश भारतीय रिजर्व बैंक के साथ बनाई गई एक संयुक्त और समन्वित रणनीति का हिस्सा है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है. शुक्रवार को एमपीसी के फैसलों की घोषणा होगी. ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक इस अध्यादेश को सपोर्ट करने वाले कुछ और बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय बदलावों का ऐलान भी कर सकता है।  अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने की तैयारी विदेशी निवेशकों को लुभाने और रुपये को मजबूत करने के साथ ही सरकार विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य नीतिगत कदमों पर भी काम कर रही है. विभिन्न उद्योगों और कारोबारों को मंदी से बचाने के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट लाइन दी जा सकती है. वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण संकट से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए विशेष राहत पैकेज लाया जा रहा है. कैबिनेट ने आयकर अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी है, जिससे इन बदलावों को लागू किया जा सके. बता दें कि राष्ट्रपति से अप्रूवल मिलने के बाद यह निर्णय प्रभावी हो जाएगा।  सरकार ने क्यों लिया फैसला?  मोदी सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जबकि देश वेस्ट एशिया संघर्ष से विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली से जूझ रहा है. इसके साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से लेकर बढ़ती ऊर्जा लागत की मार भी पड़ रही है।  सूत्रों के अनुसार, इन सबके बीच सरकार का उद्देश्य भारतीय ऋण बाजारों में अधिक विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना है, जिससे Iran War के चलते पैदा हुए चुनौतियों का कुछ समाधान किया जा सके. इस कदम के तहत सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह समाप्त करेगी।  अभी कितना लगता है टैक्स?  गौरतलब है कि फिलहाल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए बॉन्ड और लिस्टेड शेयरों पर 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना होता है. इसके अलावा, उन्हें सरकारी बॉन्ड से मिले ब्याज पर 20% का विदहोल्डिंग टैक्स भी चुकाना पड़ता है. इस पर पहले मिलने वाली 5% की रियायत को सरकार ने 2023 में समाप्त कर दिया था।  2026 में अब तक ₹2.50 लाख करोड़ निकाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs का बीते लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार को लेकर मूड खराब है. इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2026 में फरवरी महीने को छोड़कर हर महीने बिकवाली हुई है और अब तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. इस हिसाब ये साल विदेशी निवेश जाने के मामले में अब तक के सबसे खराब सालों में से एक बन गया है। 

किसानों के लिए बड़ी अपडेट, PM Kisan की नई किस्त की तारीख पर आया ताजा संकेत

नई दिल्ली  PM Kisan Yojana 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त का इंतजार क्या खत्म होने वाला है? ऐसे सवाल इस समय देशभर के करोड़ों किसानों के मन में उठ रहे हैं। अगर आप भी किसान हैं और पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके मतलब की हो सकती है। दरअसल, अब तक पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) की 22 किस्तें जारी हो चुकी है। हर किस्त के जरिए किसानों के खाते में 2 हजार रुपये की राशि भेजी जाती है। हालांकि, कई बार तकनीकी कारणों से लाखों किसानों की कई किस्तें अटक भी चुकी हैं। लेकिन आगामी किस्त में उन किसानों के खाते में पिछली किस्त का भी पैसा आ जाता है। अगर आपकी भी 22वीं किस्त अटक गई है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, 23वीं किस्त में पिछली किस्त का पैसा आ सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर 23वीं किस्त का इंतजार कब खत्म होगा? PM Kisan Yojana 23rd Installment: कब खत्म होगा 23वीं किस्त का इंतजार? पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त के तहत आखिर किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये कब क्रेडिट होंगे? यह सवाल हर किस्त से पहले होता है कि आखिर पैसा कब आएगा। दरअसल, केंद्र सरकार के तहत आने वाला कृषि मंत्रालय ही इस योजना को देखता है। वही किसानों का डेटा तैयार करता है और किस्त भेजने की पूरी तैयारी करता है। इस समय भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। वह समय-समय पर अलग-अलग राज्य जाकर किसानों के साथ बातचीत करते हैं। कई तरह के कृषि कार्यक्रमों में भी वो शामिल होते है। इन कार्यक्रमों के जरिए वह किसानों से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताते हैं। कई बार पीए किसान योजना का भी जिक्र करते हैं। हालांकि, अभी 23वीं किस्त को लेकर उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। और ना ही कृषि मंत्रालय की ओर से यह सूचना दी गई है कि 23वीं किस्त का पैसा कब आएगा। लेकिन पीएम किसान योजना के शुरू होने के बाद से ही वित्त वर्ष की पहली किस्त भेजने को जो समय रहा है वह जून-जुलाई का रहा है। यानी हर साल वित्त वर्ष की पहली किस्त फरवरी या मार्च और कैलेंडर वर्ष की दूसरी किस्त जून या जलुाई में जारी होती रही है। अगर थोड़ा लेट हुआ तो यह तारीख अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह तक भी गई है। लेकिन अधिकतर जून और जुलाई में ही आने का ट्रेंड रही है। पिछले साल (2025) 20वीं किस्त 2 अगस्त को जारी हुई थी। उससे पहले 2024 में 17वीं किस्त 18 जून को जारी की गई थी। ऐसे में अगर पिछली तारीखों को देखें तो संभावना है कि पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त 18 जून के बाद आ सकती है। यानी किसानों का इंतजार 18 जून के बाद खत्म हो सकता है। हालांकि, किसानों को आधिकारिक सूचना आने तक इंतजार करना चाहिए। कैसे चेक करेंPM Kisan Yojana का ताजा स्टेटस पीएम किसान योजना का ताजा स्टेटस चेक करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें। स्टेप 1: PM-KISAN के आधिकारिक पोर्टल https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। स्टेप 2: होमपेज पर “Know Your Status” (अपनी स्थिति जानें) विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप 3: अब, दिए गए फ़ील्ड में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।  अगर आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं है “Know Your Registration Number” (अपना रजिस्ट्रेशन नंबर जानें) पर क्लिक करें मोबाइल नंबर या आधार कार्ड से खोजें OTP का इस्तेमाल करके वेरीफाई करें, और आप अपना रजिस्ट्रेशन नंबर देख पाएँगे। स्टेप 4: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP का इस्तेमाल करके अपना वेरिफिकेशन पूरा करें। स्टेप 5: वेरिफिकेशन के बाद, आप स्क्रीन पर अपनी PM-KISAN की जानकारी देख पाएंगे, जिसमें ये शामिल हैं: किसान का नाम रजिस्ट्रेशन की स्थिति eKYC की स्थिति किस्त के भुगतान का इतिहास बैंक खाते की जानकारी लंबित या अस्वीकृत स्थिति (यदि कोई हो)

मानसून ने पकड़ी रफ्तार, देश में बारिश की शुरुआत; यूपी और बिहार के लिए बड़ा अपडेट

तिरुवनन्तपुरम झुलसाती गर्मी, तपती सड़कें और उमस भरी हवाओं के बीच आखिरकार वह खबर आ गई जिसका पूरे देश को इंतजार था. दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है. इसके साथ ही भारत में बारिश के सबसे बड़े मौसम की शुरुआत हो चुकी है. मौसम विभाग (IMD) की घोषणा के बाद केरल के कई इलाकों में तेज बारिश शुरू हो गई है और आसमान में घने बादलों ने गर्मी की तपिश को काफी हद तक कम कर दिया है. हर साल की तरह इस बार भी मानसून की एंट्री सिर्फ मौसम की खबर नहीं है, बल्कि करोड़ों किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए राहत और उम्मीद का संकेत है. खेतों से लेकर शहरों तक अब नजरें बारिश के अगले दौर पर टिक गई हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेगा. ऐसे में अब छाता और रेनकोट निकालने का वक्त आ गया है।  IMD ने गुरुवार को पुष्टि की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में आधिकारिक रूप से प्रवेश कर लिया है. इसके साथ ही लक्षद्वीप और तटीय इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं. मौसम विभाग ने 4 जून से 9 जून के बीच केरल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. कई जगहों पर 7 सेंटीमीटर से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है. IMD के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. विभाग ने कहा है कि इन इलाकों में तेज बारिश के साथ जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।  मानसून की एंट्री के साथ बदला मौसम का मिजाज     केरल में मानसून की एंट्री के बाद मौसम पूरी तरह बदल गया है. कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर केरल के कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में भी भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है. जैसे-जैसे मानसून मजबूत होगा, वैसे-वैसे बारिश का दायरा बढ़ता जाएगा।      IMD ने अपने बयान में कहा कि ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में प्रवेश कर चुका है और अगले कुछ दिनों में इसके तेजी से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं.’ विभाग के मुताबिक, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय हो रहा है।      मानसून की यह शुरुआत देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद अहम मानी जाती है. भारत की लगभग आधी आबादी किसी न किसी रूप में खेती पर निर्भर है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश की करीब 51 प्रतिशत खेती बारिश पर आधारित है. ऐसे में मानसून अच्छा रहने का मतलब है बेहतर फसल, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार में सकारात्मक असर।      पिछले कुछ दिनों से मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी मानी जा रही थी. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे एक टाइफून और लक्षद्वीप के पास बने चक्रवाती परिसंचरण की वजह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खिंच गई थी. इसी कारण मानसून की शुरुआती प्रगति कमजोर पड़ी. हालांकि अब परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और मानसून तेजी पकड़ रहा है।  UP-बिहार में कब आएगा मानसून? मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक 12 से 15 जून के बीच हो सकती है, हालांकि राज्य के कुछ इलाकों में यह थोड़ा पहले भी पहुंच सकता है. मानसून के पूरे बिहार में सक्रिय होने में इसके बाद करीब 2 से 3 दिन का समय लग सकता है. वहीं उत्तर प्रदेश में मानसून चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।   पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून 15 से 20 जून के बीच पहुंचने की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी एंट्री 20 से 25 जून तक हो सकती है. मानसून के पहुंचने के साथ दोनों राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।  कई राज्यों में आंधी-तूफान और तेज बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों के लिए भी अलर्ट जारी किया है. IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. कई जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।  मौसम विभाग ने सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों के लिए भी अलर्ट जारी किया है।  किसानों और आम लोगों के लिए क्यों अहम है मानसून? भारत में मानसून सिर्फ मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है. अच्छी बारिश होने पर खेती बेहतर होती है, जलाशयों में पानी भरता है और बिजली उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है. ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ती है और इसका असर पूरे आर्थिक ढांचे पर दिखाई देता है।  यही वजह है कि हर साल मानसून की एंट्री पर पूरे देश की नजर रहती है. इस बार भी मानसून की शुरुआत को राहत भरी खबर माना जा रहा है. हालांकि मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है क्योंकि भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।  आने वाले दिनों में तेजी से आगे बढ़ेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अब मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और जुलाई के मध्य तक देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लेगा. अगले कुछ दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के कई इलाकों में भी तेज बारिश शुरू हो सकती है. फिलहाल केरल में मानसून की धमाकेदार एंट्री ने गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत दी है. अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि मानसून की रफ्तार आगे कैसी … Read more