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अंबाला से चला प्रहार,गोल्डन ऐरो स्क्वाड्रन ने दुश्मन के ठिकाने किए तबाह

अंबाला भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद राफेल लड़ाकू विमानों ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी पहली ही अग्निपरीक्षा दी। इसमें सफलता प्राप्त करते हुए वायु वीरों ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंबाला स्थित 17 स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर न केवल आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, बल्कि उनके सैन्य एयरबेस और डिफेंसिव एयर पावर को भी पूरी तरह पंगु बना दिया। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन के म्यूजियम में अब इस शौर्य गाथा को ऑपरेशन सिंदूर वॉल के जरिए सार्वजनिक किया गया है। जल, थल और नभ का संयुक्त प्रहार 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों समेत 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस बर्बरता का जवाब देने के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन सिंदूर का बिगुल फूंका। रणनीति के तहत अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को फ्रंटलाइन बेस बनाया गया, जहां से राफेल और जगुआर विमानों ने दुश्मन पर गहरा प्रहार करने की कमान संभाली। राफेल और गोल्डन ऐरो की पहली जंग वायुसेना में शामिल होने के बाद राफेल का यह किसी युद्ध जैसी स्थिति में पहला मुकाबला था। एयर कमोडोर बी. सतीश (वीएम) के नेतृत्व में गोल्डन ऐरो स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में सटीक लक्षित हमले किए। राफेल की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी की मिसाइलों के आगे दुश्मन का रडार तंत्र फेल हो गया। स्क्वाड्रन ने पाकिस्तानी सैन्य एयरबेस और उनके महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे पर लंबे समय तक हमले जारी रखे, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई की क्षमता ध्वस्त हो गई। पदकों से चमकी अंबाला की वीर धरा इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में अदम्य साहस दिखाने के लिए अंबाला वायुसेना स्टेशन को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कुल 26 राष्ट्रपति पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें वीर चक्र ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू और स्क्वाड्रन लीडर सार्थक कुमार के नाम हुआ। युद्ध सेवा पदक ग्रुप कैप्टन विकास वर्मा को मिला। वहीं वायु सेना पदक से ग्रुप कैप्टन दीपक चौहान, स्क्वाड्रन लीडर कौस्तुभ नलबड़े, मिहिर विवेक चौधरी और अमन सिंह नवाजे गए। मेंशन-इन-डिस्पैचेस से ग्रुप कैप्टन इंद्रजीत सिंह और विंग कमांडर एमआई संचिया समेत 19 जांबाज को सम्मानित किया गया। सभी वायु वीरों को दिल्ली में सम्मान मिला। म्यूजियम में दर्ज हुआ इतिहास अंबाला एयरबेस के म्यूजियम में बनी विशेष दीवार अब इन वीरों के नाम और उनके बलिदान की गवाह बन गई है। यह दीवार न केवल राफेल की मारक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि उन तकनीकी श्रेष्ठताओं (उन्नत मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम) का भी विवरण देती है, जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाया। अंबाला ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह देश की रक्षा पंक्ति का सबसे मजबूत और अभेद्य किला है।  

क्या आपको चाहिए लोअर बर्थ? IRCTC से जानें आसान तरीका

 नई दिल्ली अक्सर लोग स्वास्थ्य कारणों से या कंफर्ट की वजह से लोअर बर्थ लेना चाहते हैं. लेकिन, कई बार समय पर ट्रेन की टिकट समय पर बुक करने के बाद भी लोअर बर्थ नहीं मिल पाती है. दरअसल, रेलवे की ओर से सीनियर सिटीजन को लोअर बर्थ में प्राथमिकता दी जाती है. अगर आप भी परिवार में किसी सीनियर सिटीजन के लिए टिकट बुक कर रहे हैं तो आप आईआरसीटी की ओर से बताए गए तरीके से आसानी से लोअर बर्थ बुक कर सकते हैं. तो जानते हैं क्या है वो तरीका।  हाल ही में सोशल मीडिया पर किसी यूजर ने आईआरसीटीसी से लोअर बर्थ के बारे में सवाल किया था और सीनियर सिटीजन की टिकट को लेकर पूछा था. इसके जवाब में आईआरसीटीसी ने जवाब दिया है और बताया है कि किस तरह से लोअर बर्थ अलॉट की जाती है।  आईआरसीटीसी ने अपने एक्स अकाउंट पर बताया, 'आप लोअर बर्थ पाने के लिए सीनियर सिटीजन कोटा में टिकट बुक कर सकते हैं. जनरल कोटा में भी आप लोअर बर्थ की प्रेफरेंस दे सकते हैं, लेकिन बर्थ का अलॉटमेंट सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करता है. अगर आप सीनियर सिटीजन के लिए टिकट इसके बाद आप 'रिजर्वेशन चॉइस' में 'Book only if lower berth is allotted' विकल्प चुन सकते हैं।    साथ ही आईआरसीटी ने बताया कि जनरल कोटा में लोअर बर्थ का आवंटन पूरी तरह उपलब्धता पर निर्भर करता है और इसमें किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता. अगर बुकिंग के समय आपको लोअर बर्थ नहीं मिलती है तो आप यात्रा के दौरान ड्यूटी पर मौजूद कोच टीटीई (TTE) से संपर्क कर सकते हैं. वे जरूरतमंद यात्रियों की मदद करने के लिए अधिकृत होते हैं।  कैसे बुक करते हैं ट्रेन टिकट? ट्रेन टिकट बुक करने के लिए सबसे पहले आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप पर अकाउंट बना लें और अगर अकाउंट है तो लॉगिन करें. इसके बाद “From” और “To” स्टेशन यात्रा की तारीख डालकर ट्रेन सर्च करें और अपनी पसंद की ट्रेन व क्लास चुनें. सीट उपलब्धता देखने के बाद “Book Now” पर क्लिक करें और यात्री का नाम, उम्र, जेंडर जैसी जानकारी भरें।  अगर लोअर बर्थ चाहिए तो प्रेफरेंस में चुन सकते हैं और 'रिजर्वेशन चॉइस' में Book only if lower berth allotted ऑप्शन भी सिलेक्ट कर सकते हैं. इसके बाद यूपीआई, कार्ड या नेट बैंकिंग से पेमेंट करें. पेमेंट सफल होने पर टिकट कन्फर्म हो जाता है और आपको एसएमएस, मेल से टिकट मिल जाती है। 

IMF की वॉर्निंग: युद्ध से वैश्विक संकट गहरा, भविष्य और खराब होने का अंदेशा

  नई दिल्ली    अमेरिका और ईरान के बीच हमलों की खबर से एक बार फिर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की तमाम कोशिशें होर्मुज स्ट्रेट पर आकर फेल हो रही हैं. न तो डोनाल्ड ट्रंप Hormuz Strait पर पीछे हटने को तैयार हैं, न ही ईरान हथियार डालने के मूड में नजर आ रहा है।  मिडिल ईस्ट में गहराए इस तनाव को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने बड़ी चेतावनी दी है. आईएमएफ चीफ ने कहा है कि अगर ये युद्ध 2027 तक चला, तो इसके सबसे बुरे परिणाम देखने को मिलेंगे।  अनुमान से ज्यादा बुरे परिणाम आईएमएफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया में महंगाई पहले से ही बढ़ रही है. इस बीच मिडिल ईस्ट युद्ध एक और बड़ा संकट बनकर सामने आया है. IMF Chief क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच ये युद्ध 2027 तक खिंचता है और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनुमान से कहीं ज्यादा बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  जॉर्जीवा ने आगे कहा कि US-Iran War को लेकर अब तक जो पूर्वानुमान जताए गए थे, वो धरे रहते जा रहे हैं. इसके साथ ही इनमें जाहिर किए गए ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में गिरानट के बाद इसके 3.1 फीसदी और महंगाई के 4.4 फीसदी रहने के अनुमान पीछे छूटते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर बीतते दिन के साथ ये अनुमान बेकार होते जा रहे हैं।  IMF Chief के मुताबिक, युद्ध का जारी रहना, तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक पर बने रहना और इसके चलते महंगाई के बढ़ते दबाव का साफ मतलब है कि हालात आगे खराब होने वाले हैं और आईएमएफ का आउटलुक अब आधार बन चुका है. इसमें कहा गया है कि 2026 में वैश्विक ग्रोथ 2.5 फीसदी तक गिर सकती है, जबकि महंगाई का बम फूट सकता है और ये 5.4 फीसदी पर पहुंच सकती है।  Hormuz बंद होने से बिगड़ेंगे हालात शेवरॉन (Chevron) के चेयरमैन और सीईओ माइक विर्थ ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति में भौतिक कमी दिखाई देने लगेगी, जिसके माध्यम से युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता था. विर्थ के मुताबिक, लंबे समय तक युद्ध चला तो दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ने लगेंगी, सबसे पहले एशिया में बुरा असर देखने को मिलेगा।  IMF की हालात पर पैनी नजर क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि IMF इस संघर्ष के सप्लाई चेन पर पड़ने वाले धीमे असर पर बारीकी से नजर रख रहा है. इसके असर को देखें, तो खाद पहले से ही 30% से 40% महंगी हो चुकी है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम 3% से 6% तक बढ़ सकती हैं. सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि दूसरे बिजनेस भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।  उन्होंने आगे कहा, 'मैं जिस बात पर जोर देना चाहती हूं, वह यह है कि यह वाकई बहुत गंभीर मामला बनता जा रहा है. कई पॉलिसी मेकर्स अभी भी ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, मानो यह संकट कुछ ही महीनों में खत्म हो जाएगा. वे उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे तेल की डिमांड लगातार हाई पर बनी हुई है। 

अमित शाह तय करेंगे बंगाल का सीएम, ये नेता हैं संभावित दावेदार

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में 15 साल के बाद सत्ता परिवर्तन हो गया है और बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख भी फाइनल हो गई है. सूबे के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनने जा रही है. ऐसे में सभी की मन में एक ही सवाल है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता की कमान सौंपी जाएगी।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद बंगाल के पर्यवेक्षक के तौर पर आज गुरुवार शाम कोलकाता पहुंच रहे हैं. इस दौरान वो बीजेपी विधायकों के साथ बातचीत कर मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे. मुख्यमंत्री की रेस में कई नेताओं के नाम चल रहे हैं, जिसमें ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे है।  बंगाल में सीएम की रेस में शुभेंदु अधिकारी ही नहीं बल्कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से लेकर दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉलऔर सुकांत मजूमदार जैसे आधा दर्जन नेताओं के नाम शामिल है. ऐसे में सवाल उठता है कि अमित शाह के सियासी क्राइटेरिया में कौन नेता फिट बैठेगा?  बंगाल सीएम के लिए शाह की क्राइटेरिया? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले फेज की वोटिंग के बाद ही अमित शाह ने संकेत दे दिए थे कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा? कोलकाता में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान अमित शाह से पूछा गया था कि बीजेपी सत्ता में आती है तो बंगाल में कौन मुख्यमंत्री होगा. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा था कि जो भी होगा बंगाल की धरती का बेटा है, बंगाल में पढ़ा-लिखा है, बंगाली बोलता है और बीजेपी का कार्यकर्ता है, वही मुख्यमंत्री होगा? अमित शाह ने कहा था कि मैं बंगाल के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि अगला मुख्यमंत्री कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो बंगाल में पैदा हुआ और पढ़ा-लिखा हो, और बंगाली अच्छी तरह बोलता हो. इस तरह से अमित शाह ने बीजेपी के सीएम बनाने की क्राइटेरिया बता दी थी. अब बीजेपी सत्ता में आई है तो उस लिहाज से नए मुख्यमंत्री का चयन होगा, जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए खुद पर्यवेक्षक के तौर पर कोलकाता जा रहे हैं, जहां विधायकों से बातचीत करके नए सीएम के नाम का ऐलान करेंगे?  शुभेंदु अधिकारी बनेंगे अमित शाह की पसंद अमित शाह के क्राइटेरिया में शुभेंदु अधिकारी सबसे फिट बैठते हैं. भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर शुभेंदु अधिकारी ने अपनी ताकत साबित की है. बंगाल से दिल्ली तक के सियासी कॉरिडोर में सबसे ज्यादा चर्चा शुभेंदु की हो रही है. सुवेंदु अधिकारी ने 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराया था और विपक्ष के नेता बने थे और इस बार उन्होंने नंदीग्राम से जीतने के साथ-साथ भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15,000 से ज्यादा वोटों से मात दी है. ऐसे में सुवेंदु अधिकारी के नाम को नजरअंदाज करना मुश्किल है।  शुभेंदु अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के क्राइटेरिया में भी फिट बैठ रहे हैं. बंगाल में जन्म लिए हैं और बंगाल में पढ़े लिखे हैं. यही नहीं बीजेपी में आए हुए भी उन्हें छह साल हो गए  हैं. अमित शाह को ऐसे नेता पसंद आते हैं, जो 'आक्रामक' होनेके साथ प्रशासन पर मजबूत पकड़ रखता हो. शुभेंदु के पास मंत्री रहने का भी अनुभव है और वे राज्य के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं.'हिंदुत्व' और 'विकास' के समन्वय के लिए वे शाह की पहली पसंद हो सकते हैं।  समिक भट्टाचार्य कहीं छुपे रुस्तम न साबित हों? पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी जहां नैचुरल दावेदार हैं तो वहीं उनके बाद समिक भट्टाचार्य का नाम है. समिक भट्टाचार्य एक ऐसा नाम हैं,जिन्हें बीजेपी का 'बौद्धिक चेहरा'माना जाता है. चुनाव नतीजों के बाद जब अमित शाह कोलकाता में मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन कर रहे हैं, तो समिक भट्टाचार्य का नाम 'डार्क हॉर्स' (छुपा-रुस्तम) के रूप में तेजी से उभरा है. संघ और बीजेपी दोनों की पसंद माने जाते हैं।  समिक भट्टाचार्य के पास बंगाली-शिक्षिक मिडिल-क्लास और सभी ग्रुप्स के बीच कोऑर्डिनेशन बनाए रखने की क्षमता है. भट्टाचार्य पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से एक अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने शाह और सुनील बंसल मार्गदर्शन में पार्टी के पुराने नेताओं को एक साथ रखकर कमल खिलाने में कामयाब रहे.समिक में बंगालियों और बंगाली कल्चर को रिप्रेजेंट करने की काबिलियत है. अमित शाह ये भी जानते हैं कि बंगाल की सत्ता चलाने के लिए केवल आक्रामकता काफी नहीं है,बल्कि बंगाल के प्रबुद्ध समाज (इंटेलिजेंटिया) को साथ लेना भी जरूरी है।  दिलीप घोष बीजेपी के'जमीनी योद्धा' और कैडर की पसंद बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी सीएम की रेस में है. बंगाल में बीजेपी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में दिलीप घोष का अहम रोल रहा है. वे 'खालिस बंगाली' अंदाज में बात करते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. अमित शाह को ऐसा व्यक्ति पसंद है जो मुश्किल वक्त में पार्टी के साथ खड़ा रहा हो. हालांकि, दिलीप घोष की बेबाक बयानबाजी कभी-कभी अनुशासन के आड़े आती है, लेकिन उनकी 'फाइटिंग स्पिरिट' उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।  सुकांत मजूमदार 'संगठन'और 'शालीनता' का मेल पश्चिम बंगाल में सीएम की रेस में अमित शाह किसी ऐसे चेहरे की तलाश में हैं, जो विवादों से दूर रहे और संगठन के साथ तालमेल बिठा सके, तो सुकांत मजूमदार रेस में आगे हैं. वे पढ़े-लिखे हैं (प्रोफेसर रहे हैं) और पश्चिम बंगाल के भद्रलोक समाज में उनकी अच्छी छवि है. सुकांत एक 'लो-प्रोफाइल' लेकिन मेहनती नेता हैं, जो संघ (RSS) और पार्टी के बीच सेतु का काम कर सकते हैं. बीजेपी अपने फैसले से अक्सर चौंकाती रही है।  अग्निमित्रा पॉल 'महिला शक्ति' और नया प्रयोग बीजेपी पश्चिम बंगाल में 'महिला मुख्यमंत्री' का कार्ड खेलते हैं, तो अग्निमित्रा पॉल बड़ी दावेदार होंगी. दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बनी है. बंगाल में उन्होंने महिला सुरक्षा और 'आरजी कर' जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को पुरजोर तरीके से घेरा है. बंगाल में 'नारी शक्ति' ने बीजेपी को वोट दिया है. ममता बनर्जी के जवाब में एक महिला मुख्यमंत्री देना शाह की 'मास्टरस्ट्रोक' वाली राजनीति का हिस्सा हो सकता है।  उत्पल महाराज को बंगाल का योगी कहा जाता है? पश्चिम बंगाल में एक नाम और भी चर्चा में है, जो उत्पल महाराज है. उन्हें बंगाल का योगी … Read more

विजय ने खेली दोहरी रणनीति, TVK के हाथ में लड्डू; अंदरखाने क्या हो रहा है

चेन्नई तमिलनाडु चुनाव के नतीजे आ गए. अब सरकार कैसे गठित हो, इसकी कवायद है. विधानसभा नतीजों ने तमिलनाडु में सरकार गठन की प्रक्रिया को फंसा दिया है. तमिलनाडु चुनाव रिजल्ट में किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है टीवीके. जी हां, यह थलापति विजय की पार्टी है. एक्टर से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. अब यह सरकार बनाने को रेडी है. मगर नंबर गेम में टीवीके फंस गई है. अब तमिलनाडु में गठबंधन वाली सरकार ही एकमात्र विकल्प है. इस स्थिति को देखते हुए थलापति विजय ने डबल चाल चल दी है. हकीकत तो यह है कि टीवीके के दोनों हाथ में लड्डू है. चलिए जानते हैं तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर अंदरखाने क्या बातचीत हो रही।  दरअसल, तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर पेच फंसा हुआ है. तमिलनाडु में अब ऐसी चीज होने जा रही है, जो उसने दशकों से नहीं देखी थी. जी हां, एक गठबंधन सरकार. एक्टर विजय की पार्टी टीवीके पहली बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरी. पहली बार में ही एक्टर विजय ने अपना लोहा मनवा दिया. उसकी आंधी ऐसी चली कि डीएमके और एआईएडीएमको को समझ नहीं आया कि ये कैसा सियासी तूफान आया. जब तक समझ पाते तब तक टीवीके शतक मार चुकी थी।  टीवीके को बहुमत नहीं, फिर भी दोनों हाथ में लड्डू जी हां, तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK ने चुनाव में 108 सीटें जीतीं. उसने सत्ताधारी DMK को काफी पीछे छोड़ दिया, जो 59 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही. हालांकि, 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत से टीवीके दूर रह गई. विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटे हैं. टीवीके के पास 10 सीटों की कमी है. इसलिए अब लोगों का ध्यान जश्न से हटकर गठबंधन बनाने पर चला गया है. अब विजय 10 सीटों के उपाय में लगे हैं ताकि किसी तरह सरकार गठन हो सके. फिलहाल, टीवीके के पास दोनों हाथ में लड्डू है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हो या एआईएडीएमके दोनों एक्टर विजय को सपोर्ट दे सकते हैं. टीवीके की दोनों से बातचीत कर रही है।  थलापति विजय की किससे बातचीत जी हां, कांग्रेस और AIADMK…दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने मंगलवार को कहा कि थलापति विजय ने सरकार बनाने में समर्थन के लिए उनकी पार्टियों से संपर्क किया. कांग्रेस तो पहले ही इशारा कर चुकी है कि वह टीवीके को सरकार बनाने में मदद कर सकती है. इससे पहले मंगलवार सुबह को विजय अपनी पार्टी के दफ़्तर पहुंचे थे और नए चुने गए विधायकों के साथ बैठक की थी. तब से ही गठबंधन बनाने की योजनाएं बन रही हैं।  कांग्रेस और एआईएडीएमके दोनों विकल्प इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों ने बताया कि एक प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर दोनों पार्टियां गठबंधन करने का फैसला करती हैं तो टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को दो कैबिनेट पद दिए जा सकते हैं. कांग्रेस ने पांच सीटें जीती हैं. इस व्यवस्था के लिए दूसरे छोटे दलों के समर्थन की भी जरूरत होगी, ताकि विधानसभा में इस गुट के पास बहुमत हो सके. हालांकि, बाद में सूत्रों ने बताया कि कई छोटे दलों की हिचकिचाहट की वजह से TVK अब AIADMK के साथ गठबंधन करने पर विचार कर रही है. यहां बताना जरूरी है कि AIADMK के पास 47 सीटें हैं।  कांग्रेस सपोर्ट को रेडी शाम होते-होते कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य कांग्रेस इकाई को विजय के समर्थन के अनुरोध पर अंतिम फ़ैसला लेने का निर्देश दिया गया है. वेणुगोपाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के बाद कहा कि टीवीके के अध्यक्ष थलापति विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से समर्थन मांगा है. कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से फैसला करने को कहा है. वहीं दूसरी ओर लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन की पत्नी लीमा रोज मार्टिन ने बताया कि विजय की पार्टी और AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच बातचीत चल रही है।  अगर गठबंधन हुआ तो सहयोगी को क्या मिलेगा? वहीं, टीवीके के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है. टीवीके का कहना है कि कांग्रेस ने गठबंधन पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है. अभी तक CPI, CPM, VCK और IUML का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं है. सूत्रों के अनुसार टीवीके का जिसके साथ गठबंधन होगा, उस दल को चार से छह मंत्री पद देने की योजना है. ऐसा करने के पीछे दो मुख्य मकसद हैं. पहला सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल जुटाना और दूसरा- शासन-प्रशासन के क्षेत्र में अपने अनुभव की कमी की भरपाई करना। 

भारत-वियतनाम रिश्तों में मजबूती, 13 समझौते और जल्द ही UPI का फास्ट पेमेंट सिस्टम से कनेक्शन

नई दिल्ली  वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के भारत दौरे को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में गति देने वाला माना जा रहा है. भारत और वियतनाम अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों के बीच बुधवार को 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।  पीएम मोदी ने बताया कि हमारी साझा विरासत को जीवंत रखने के लिए, हम वियतनाम के प्राचीन चम्पा सभ्यता के मी सॉन और न्हान टवर मंदिरों का पुनर्निमाण कर रहे हैं. अब हम चम्पा सभ्यता की मनुस्क्रिप्ट को भी डिजिटलाइज करेंगे, और इस अमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करेंगे।  मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत के लिए दोनों देशों का नजरिया एक जैसा है और दोनों पक्ष कानून के राज, शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देते रहेंगे. ऐसा समझा जाता है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में चीन की बढ़ती मिलिट्री ताकत पर भी चर्चा हुई।  लाम, एक उच्च स्तर प्रतिनिधिमंडल के साथ, मंगलवार को भारत की अपनी तीन दिन की यात्रा पर निकले. इस महीने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह देश की उनकी पहली सरकारी यात्रा है।  पीएम मोदी ने अपने मीडिया स्टेटमेंट में कहा कि भारत और वियतनाम ने रिश्तों को बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है।  मोदी ने कहा, "वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और विज़न ओशन का एक अहम स्तंभ है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी, हम एक जैसी सोच रखते हैं." उन्होंने कहा, "हमारे मजबूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग के जरिए, हम कानून के राज, शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देते रहेंगे।  प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वियतनाम के सहयोग से आसियान (Association of Southeast Asian Nations) के साथ अपने संबंधों को और बढ़ाएगा. उन्होंने कहा कि वित्तीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए हमने दोनों देशों के सेंट्रल बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।  उन्होंने कहा कि भारत का यूपीआई और वियतनाम का फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द ही जुड़ जाएगा. अपनी बात में लैम ने कहा कि दोनों पक्ष राजनीतिक विश्वास को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए।  पिछले साल, दोनों पक्षों ने सबमरीन सर्च, रेस्क्यू और व्यवस्था के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए एक आशय का पत्र (LoI) पर भी हस्ताक्षर किया। 

असम में 12 मई को होगी शपथ ग्रहण समारोह, पीएम मोदी की उपस्थिति तय; नया CM चयन की तारीख का खुलासा

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की और उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। फिलहाल वह नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभार संभालेंगे। जानकारी मिल रही है कि नई सरकार का शपथ समारोह 12 मई को होगा और इस आयोजन में पीएम नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के तमाम सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि लगातार तीसरी बार हिमंत बिस्वा सरमा को ही मुख्यमंत्री का पद मिलने की संभावना है। हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद एक फिर से राज्य की जनता का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि असम के लोगों ने हमारी सरकार पर भरोसा जताया है। उन्होंने पीएम मोदी के प्रति अपना समर्थन जताया है। जनता चाहती है कि असम में विकास की गंगा बह रही है, वह जारी रहे। असम के सीएम को लेकर जब हिमंत बिस्वा सरमा से पूछा गया तो उन्होंने अपने बारे में कुछ भी नहीं कहा। उनका कहना था कि राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक होगी। इस मीटिंग में ही असम के नए मुख्यमंत्री का चुनवा किया जाएगा। भाजपा इससे पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में भी नेतृत्व को लेकर चौंका चुका है। ऐसे में हिमंत बिस्वा सरमा रिपीट होंगे या नहीं। इसे लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है। हालांकि सीएम हिमंत ही रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हिमंत बिस्वा सरमा की पिछले दो कार्यकालों में एक सख्त नेता की छवि बनी है। इसके अलावा हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर भी उन्हें देखा जा रहा है। बांग्लादेशी घुसपैठियों का मसला हो या फिर आबादी के संतुलन का विषय हो। हिमंत बिस्वा सरमा ने हमेशा सख्ती के साथ बात रखी है। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज कर पाना मुश्किल है। असम में यदि भाजपा ने लगातार तीसरी बार सफलता हासिल की है तो उसका श्रेय भी एक हद तक हिमंत बिस्वा सरमा को ही दिया जा रहा है। बंगाल में 9 मई को शपथ समारोह, कई नामों पर कयास बता दें कि बंगाल में 9 मई को ही शपथ समारोह होना है और शुक्रवार को मुख्यमंत्री चुनने के लिए विधायक दल की मीटिंग होगी। बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के अलावा समिक भट्टाचार्य, दिलीप घोष समेत कई नेताओं को रेस में माना जा रहा है। यहां तक कि रूपा गांगुली और अग्निमित्रा पॉल जैसी महिला नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं।

LPG कनेक्शन बचाने के लिए जरूरी, सरकार का नया नियम लागू; जानें क्या करना होगा

नई दिल्ली अगर आपके घर में भी रसोई गैस सिलेंडर (LPG) और पाइप वाली गैस (PNG) दोनों का इस्तेमाल हो रहा है, तो आपके लिए बड़ी खबर है। भारत सरकार अब एक घर, एक कनेक्शन (One Household, One Connection) के नियम को बेहद सख्ती से लागू कर रही है। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी एक परिवार के लिए सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर और पीएनजी कनेक्शन दोनों को एक साथ रखना अब पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके चलते सरकार ने गैस के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि गैस सिलेंडर केवल उन जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, जहां अभी तक पीएनजी की पाइपलाइन नहीं बिछी है। दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों में गैस कंपनियां अब ऐसे घरों की पहचान कर रही हैं, जो दोनों कनेक्शन का एक साथ फायदा उठा रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत ऑयल कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को साफ निर्देश दिए गए हैं कि पीएनजी वाले घरों को नया एलपीजी सिलेंडर जारी या रीफिल न किया जाए।     एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करें- अगर आपके घर में पीएनजी (पाइपलाइन गैस) चालू हो चुकी है, तो आपको तुरंत अपना पुराना एलपीजी गैस कनेक्शन सरेंडर (वापस) करना होगा।     स्वेच्छा से छोड़ रहे हैं लोग- अब तक देश भर में 43,000 से अधिक उपभोक्ता स्वेच्छा से अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर चुके हैं, लेकिन सरकार के पास मौजूद डेटा के अनुसार ऐसे घरों की संख्या काफी अधिक है।     कार्रवाई की चेतावनी- अगर कोई परिवार इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है और बिना किसी पूर्व सूचना के उसका कनेक्शन भी रद्द किया जा सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और लगभग 60% एलपीजी विदेशों (मुख्य रूप से सऊदी अरब और यूएई) से आयात करता है। ईरान-इजराइल तनाव और वैश्विक संकट के कारण गैस सप्लाई काफी सीमित हो गई है। इसका असर न केवल घरों पर, बल्कि होटलों, रेस्तरां और कॉमर्शियल यूनिट्स पर भी पड़ रहा है, जहां एलपीजी की कम आपूर्ति के चलते वैकल्पिक ईंधन अपनाने को कहा जा रहा है। इसलिए, अगर आपके पास भी डबल कनेक्शन है, तो परेशानी से बचने के लिए जल्द से जल्द एक कनेक्शन सरेंडर कर दें। सबसे अधिक घरों में 14.2 किलो वाला सिलेंडर इस्तेमाल होता है। आज दिल्ली में यह एलपीजी सिलेंडर ₹913 में मिल रहा है। वहीं, छोटे परिवार या अस्थायी उपयोग के लिए 5 किलोग्राम का सिलेंडर ₹339 में उपलब्ध है।

भारत से नहीं, अब चीन से संपर्क करेंगे: बंगाल में बीजेपी जीत पर बांग्लादेश की प्रतिक्रिया

ढाका  पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के तुरंत बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश की तरफ से एक बड़ा बयान आया है। बांग्लादेश ने दोनों देशों के बीच सालों से अटके तीस्ता समझौते को लेकर कहा है कि इसके लिए अब वह भारत का इंतजार नहीं करेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने एक बयान में यह बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि तीस्ता समझौते के लिए बांग्लादेश अब भारत का इंतजार नहीं कर सकता और इसीलिए अब चीन का रुख करेगा। डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने इस समझौते को अपने देश के लिए बहुत जरूरी बताया। बता दें कि खलीलुर रहमान जल्द ही चीन के दौरे पर जाने वाले हैं। बीजिंग की आधिकारिक यात्रा से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चीन में बातचीत के एजेंडे में तीस्ता परियोजना भी होगी। बंगाल में बीजेपी की सरकार पर क्या बोले रहमान? बांग्लादेशी विदेश मंत्री का यह बयान तब आया है जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। भाजपा की जीत पर पूछे गए सवालों पर रहमान ने कहा, “देखिए, पश्चिम बंगाल में अभी सरकार नहीं बनी है। वे क्या सोचते हैं या क्या करेंगे, यह उन्हें कहना है। उनका मन पढ़ना मेरा काम नहीं है। हम हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकते, हमें अपना काम करना है।” तीस्ता पर क्या है विवाद? गौरतलब है कि तीस्ता नदी को लेकर दोनों देशों के बीच काफी समय से बात चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे नदी में बराबर हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार इसका विरोध करती है। 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब बांग्लादेश गए थे, तब इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश हुई थी। एक योजना के तहत तीस्ता का करीब 37.5 फीसदी पानी बांग्लादेश को और 42.5 फीसदी भारत को मिलने की योजना पर बात हुई थी। हालांकि बंगाल के विरोध के कारण यह बात आगे नहीं बढ़ सकी। 1983 में हुआ था अस्थायी समझौता इससे पहले 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी देने की बात थी। वहीं बाकी 25 फीसदी का हिसाब बाद में तय होना था। लेकिन यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के समय भी बांग्लादेश को उम्मीद थी कि कोई हल निकलेगा, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बता दें कि भारत और बांग्लादेश आपस में बीच 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो पर ही समझौता हुआ है, गंगा और कुशियारा। अन्य नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर अब भी विवाद चल रहा है। चीन के पास पहुंचा बांग्लादेश तीस्ता समझौते में देरी को देखते हुए बांग्लादेश ने 2019 में 'तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना' शुरू की और शेख हसीना की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन से मदद मांगी थी। अब रहमान ने एक बार फिर चीन से सहयोग लेने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक रहमान तीन दिवसीय इस दौरे पर वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान तीस्ता समझौते पर मदद के अलावा बांग्लादेश चीन से कम ब्याज दर पर कर्ज की मांग करेगा। वहीं बांग्लादेश चीन से निवेश भी मांगेगा। इससे पहले जुलाई के विद्रोह के बाद चीन की ओर से निवेश की गति धीमी रही है, जिसे अब नई सरकार फिर से रफ्तार देना चाहती है। वहीं चीन ने भी बांग्लादेश को करीबी पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार बताते हुए संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है।

दुल्हन की अनोखी शादी: पहले 8 दूल्हों संग हो चुके फेरे, अब नौवां

बीड महाराष्ट्र के बीड़ जिले में फर्जी शादी कराकर युवाओं को लूटने वाला एक बड़ा गैंग सामने आया है. इस गैंग ने ग्रामीण इलाकों के कई युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाया. ताजा मामला गेवराई तहसील के उमापुर गांव से सामने आया है, जहां एक युवती ने आठ बार शादी करने के बाद नौवीं बार उमापुर के एक युवक को अपने जाल में फंसाया और उससे लाखों रुपये ऐंठ लिए।  उमापुर के रहने वाले युवक की शादी के लिए कुछ एजेंटों ने मध्यस्थता की. शादी तय करने के नाम पर युवक से लाखों रुपये लिए गए. इसके बाद बाकायदा शादी हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद दुल्हन और उसके साथ आए एजेंटों का असली चेहरा सामने आ गया. जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस लड़की से युवक की शादी हुई, वह पहले आठ अलग-अलग लोगों से शादी कर चुकी थी. हर बार यह गैंग शादी के कुछ दिनों बाद पैसे और जेवर लेकर फरार हो जाता था।  इस धोखाधड़ी का शिकार हुआ उमापुर का युवक अब परेशान हो रहा है. उसने इस मामले की शिकायत एसपी से की. एसपी को जो एप्लिकेशन युवक ने दिया है, उसमें कहा है कि मेरे साथ लाखों की धोखाधड़ी हुई है. अब मेरे सामने कोई रास्ता नहीं बचा है. मुझे न्याय चाहिए।  युवक ने कहा कि उसे अंधेरे में रखकर शादी कराई गई थी. जिस युवती से शादी हुई, उसकी यह नौवीं शादी थी. इस पूरे मामले को लेकर चकलांबा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई है. युवक का कहना है कि दुल्हन एक और दूल्हे अनेक बनाकर यह गिरोह युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है।  यह गैंग खासतौर पर ग्रामीण इलाकों के उन युवकों को निशाना बनाता था, जिन्हें शादी के लिए दुल्हन ढूंढने में परेशानी होती है. यह गैंग एजेंटों के जरिए युवकों को निशाना बनाया जाता है. गरीबी का हवाला देकर लाखों रुपये वसूले जाते हैं और शादी के कुछ दिन बाद दुल्हन गायब हो जाती है. शिकायत के आधार पर पुलिस अब इस गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।