samacharsecretary.com

एक दिन में दो खुशखबरी! ट्रेड डील को हरी झंडी और सरकार ने दिया आर्थिक तोहफा

नई दिल्‍ली  भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को एक ही दिन में दो-दो खुशखबरी मिली है. पहले तो अमेरिका के साथ ट्रेड डील लगभग कन्‍फर्म होने की खबर आई, जिससे टैरिफ 50 से घटकर 15 तक आ सकता है. अब सरकार ने भी निर्यातकों को मिलने वाली टैक्‍स व शुल्‍क में छूट का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत निर्यातकों के लिए दो योजनाओं आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल के तहत अधिसूचित दरों की समीक्षा के लिए पूर्व सचिव नीरज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है. सरकार अभी निर्यात किए जाने वाले उत्‍पादों पर शुल्क एवं टैक्‍स की छूट योजना (आरओडीटीईपी) उन कर, व शुल्क को लौटाने (रिफंड) का प्रावधान करती है जो निर्यातकों द्वारा वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में खर्च किए जाते हैं. इनका कंपेनसेशन केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य तंत्र के तहत नहीं किया जाता है. अब इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है. वर्तमान आरओडीटीईपी दरें 0.3 से 4.3 फीसदी के बीच हैं. कपड़ा निर्यातकों के लिए अलग योजना परिधान यानी कपड़ा निर्यातकों के लिए साल 2021 में राज्य एवं केंद्रीय कर एवं शुल्क में छूट (आरओएससीटीएल) योजना की घोषणा की गई थी. इसके तहत उन्हें अपने निर्यात पर केंद्रीय एवं राज्य करों में छूट मिलती है. आरओएससीटीएल योजना के तहत, परिधानों के लिए छूट की अधिकतम दर 6.05 प्रतिशत है, जबकि सिले हुए (मेड-अप) कपड़ों के लिए यह 8.2 प्रतिशत तक है. परिधान और सिले हुए कपड़े जैसे घरेलू वस्त्र इस योजना के अंतर्गत आते हैं. दरों को निर्धारित करने पर बात करेगी समिति सरकारी आदेश के अनुसार, समिति के दो सदस्य सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के पूर्व प्रधान मुख्य आयुक्त एस.आर. बरुआ और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के पूर्व सदस्य विवेक रंजन हैं. इसमें कहा गया कि समिति प्रशासनिक मंत्रालयों, निर्यात संवर्धन परिषदों, जिंस बोर्ड, व्यापार निकायों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करेगी ताकि आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी दरों पर उनके विचार हासिल किए जा सकें. मौजूदा तरीकों की होगी समीक्षा समिति के सदस्‍य निर्यातित उत्पाद पर लगने वाले केंद्रीय, राज्य व स्थानीय स्तर पर शुल्क/कर/उपकर की गणना के लिए तौर-तरीके तय करेगी जिसमें निर्यातित उत्पाद के उत्पादन में प्रयुक्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर पूर्व चरण के लिए वसूले गए अप्रत्यक्ष कर भी शामिल होंगे. समिति घरेलू शुल्क क्षेत्रों विशेष आर्थिक क्षेत्रों और अग्रिम प्राधिकरण धारकों से निर्यात के लिए आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल योजनाओं के तहत अधिकतम दरों की सिफारिश करेगी. समिति अपनी मुख्य रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक सरकार को सौंप देगी. क्‍या होगा इसका फायदा इन योजनाओं के तहत स्थानीय कर के वापस मिलने (रिफंड) से वैश्विक बाजारों में भारतीय कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलती है. इस साल अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 3.02 प्रतिशत बढ़कर 220.12 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 4.53 प्रतिशत बढ़कर 375.11 अरब डॉलर रहा है. फिलहाल भारत का व्यापार घाटा 154.99 अरब डॉलर है, जिसे नीचे लाने के लिए ही सरकार प्रोत्‍साहन योजनाएं चलाती है.  

8th Pay Commission लाएगा रिकॉर्ड बढ़ोतरी — जानें कितना बढ़ेगा आपका बेसिक पे

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे इंतज़ार के बाद अब आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिया गया है। मंगलवार को केंद्र ने आयोग की नियम और शर्तों (Terms of Reference) को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब आयोग अगले डेढ़ साल यानी 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। करीब 1 करोड़ से अधिक लोगों को होगा फायदा इस फैसले से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनर्स प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। यह आयोग कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों की समीक्षा करेगा और ज़रूरी सुधारों का सुझाव देगा। जनवरी 2025 में हुई थी मंजूरी  आठवें वेतन आयोग के गठन को इस साल जनवरी में कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी थी। इसके बाद से मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कर्मचारी संगठनों से लगातार सुझाव लिए जा रहे थे। अब जब आयोग की ToR तय हो गई है, तो इसके कामकाज की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। ऐसे तय होगी नई बेसिक सैलरी कर्मचारियों की नई बेसिक पे तय करने में फिटमेंट फैक्टर अहम भूमिका निभाएगा। फॉर्मूला होगा — नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक पे × फिटमेंट फैक्टर उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹25,500 है और फिटमेंट फैक्टर 2.86 तय होता है, तो उसकी नई बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग ₹72,930 तक पहुंच सकती है। मंत्रालयों से मिले इनपुट वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अनुसार, सरकार ने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और राज्य सरकारों से इस संबंध में इनपुट मांगे थे। सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए आयोग का दायरा और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। हर दशक में आता है बड़ा बदलाव पारंपरिक रूप से हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। पिछली बार यानी सातवां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना था और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई थीं। अब आठवां आयोग उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों के लिए नए वित्तीय ढांचे की रूपरेखा तैयार करेगा।

सोने-चांदी की चमक फीकी: रिकॉर्ड स्तर से कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

इंदौर  ग्‍लोबल संकेतों के कारण सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट जारी है. MCX पर कल अचानक सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. सोना 3000 रुपये से ज्‍यादा तो वहीं सिल्‍वर के रेट में भी 3000 रुपये की गिरावट आई थी. यह गिरावट वैश्विक बाजारों में कमजोरी के चलते हुआ. वहीं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव कम होने की उम्मीद और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भी इन धातुओं के दाम में भारी गिरावट है.  MCX पर कीमतों में गिरावट मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.7% की गिरावट के साथ 1,20,106 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला. चांदी भी 0.69% की गिरावट के साथ 1,42,366 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली. बाजार बंद होने के समय सोना 2.06% की गिरावट के साथ 1,18,461 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी 1.36% की गिरावट के साथ 1,41,424 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. आज सोने और चांदी के भाव में मामूली तेजी देखी जा रही है. रिकॉर्ड हाई से इतना सस्‍ता हुआ सोना-चांदी MCX के मुताबिक, सोने का रिकॉर्ड हाई लेवल 1.32 लाख रुपये से ज्‍यादा का है, जो अब घटकर 1.18 रुपये आ चुका है. ऐसे में देखा जाए तो रिकॉर्ड हाई से सोने की कीमतों में 13 हजार रुपये से ज्‍यादा की गिरावट आई है. वहीं चांदी अपने रिकॉर्ड हाई 1.70 लाख प्रति किलो से घटकर 1.41 लाख रुपये प्रति किलो आ चुकी है. ऐसे में देखा जाए तो चांदी के भाव में रिकॉर्ड हाई से करीब 29 हजार रुपये की गिरावट आई है. क्‍यों गिर रहा सोने-चांदी का भाव?  यह गिरावट दो महीने की मज़बूत तेजी के बाद आई है और व्यापारी मुनाफावसूली के कारण है. मेहता इक्विटीज़ लिमिटेड के उपाध्यक्ष (कमोडिटीज़) राहुल कलंत्री ने कहा कि दो महीने की मज़बूत तेजी के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर भारी बिकवाली का दबाव रहा क्योंकि दोनों मेटल्‍स प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे गिर गईं. सोना 4,000 डॉलर और चांदी 47 डॉलर प्रति औंस पर आ चुकी है. यह गिरावट मज़बूत डॉलर सूचकांक और चीन व भारत के साथ अमेरिकी व्यापार वार्ता को लेकर नए सिरे से आशावाद के कारण हुई है. एक्‍सपर्ट ने कहा कि गाजा शांति वार्ता में तेजी से बदलते भू राजनीतिक चिंताएं भी कम हुई हैं, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग में कमी आई है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कमजोर रुपया निचले स्‍तरों पर सर्राफा कीमतों को कुछ सहारा दे रहा है. कलांत्री ने कहा कि ग्‍लोबल स्‍तर पर सोने को 3,940-3,905 डॉलर के आसपास सपोर्ट मिला है, जबकि रेस‍िस्‍टेंस 4,055-4,100 डॉलर के आसपास है.  केंद्रीय बैंकों पर नजर  निवेशक की नजर केंद्रीय बैंकों के रेट कटौती को लेकर है. हाल ही में आए नरम महंगाई के आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की उम्मीद है, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौजूदा नीतियों को बरकरार रखने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो सोने-चांदी के भाव में और भी गिरावट आ सकती है.  शॉर्ट टर्म में अभी और गिरावट के संकेत एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई ने कहा कि निकट भविष्य का रुझान इस बात पर निर्भर करता है कि व्यापार वार्ता और नीतिगत घोषणाएं किस प्रकार सामने आती हैं. उन्‍होंने कहा कि संभावित अमेरिका-चीन व्‍यापार समझौते और मजबूत अमेरिकी डॉलर को लेकर आशावाद के बीच सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर होने से सोने की कीमतों में गिरावट जारी है. उन्‍होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है. आगे कहा कि अगर फेडरल रिजर्व अपेक्षा से कम ब्‍याज दरों में कटौती का संकेत देता है तो इससे सोने की कीमतों पर और ज्‍यादा दबाव पड़ सकता है.

चार्जिंग की चिंता खत्म: इलेक्ट्रिक कार अब चलते-चलते होगी चार्ज

पेरिस कल्पना कीजिए, आपकी इलेक्ट्रिक कार तेज रफ्तार में हाईवे पर दौड़ रही है और बिना रुके उसकी बैटरी अपने आप चार्ज हो रही है. न कोई केबल, न कोई चार्जिंग स्टेशन, न इंतज़ार. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि फ्रांस की धरती पर हकीकत बन चुका है. दुनिया का पहला ऐसा मोटरवे अब फ्रांस में चालू हो गया है, जो चलते हुए वाहनों को वायरलेस तरीके से चार्ज करता है. यह प्रयोग न सिर्फ तकनीकी रूप से क्रांतिकारी है, बल्कि यह भविष्य की सड़कों का खाका भी पेश करता है. जहां सड़कें खुद सोर्स ऑप एनर्जी (ऊर्जा का स्रोत) की तरह काम करेंगी. फ्रांस ने सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है. फ्रांस ने दुनिया का पहला ऐसा मोटरवे शुरू किया है, जिसमें डायनामिक वायरलेस चार्जिंग सिस्टम लगाया गया है. यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों को चलते-चलते चार्ज करने की सुविधा देती है, यानी अब कार या ट्रक को चार्जिंग स्टेशन पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कहां और कैसे शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट पेरिस से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित A10 मोटरवे पर इस अनोखे प्रयोग की शुरुआत हुई है. विंसी ऑटोरूट्स (VINCI Autoroutes) के नेतृत्व में इलेक्ट्रिऑन, विंसी कंस्ट्रक्शन, गुस्टाव आइफ़ेल यूनिवर्सिटी और हचिन्सन जैसी संस्थाओं ने मिलकर “चार्ज ऐज यू ड्राइव” नामक इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है. यह पहल अब लैब टेस्टिंग से आगे बढ़कर रियल टाइम ट्रैफिक सिचुएशन तक पहुंच गया है. करीब 1.5 किलोमीटर लंबे इस हाइवे सेक्शन में सड़क के अंदर कॉइल्स (Coils) को एम्बेड किया गया है. इन कॉइल्स से होकर गुजरने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों, जैसे ट्रक, बस, पैसेंजर कार और यूटिलिटी व्हीकल को चलते समय ही बिजली मिलेगी. शुरुआती परीक्षणों में यह तकनीक बेहद सफल साबित हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम ने 300 किलोवॉट से अधिक की पीक पावर और औसतन 200 किलोवॉट की एनर्जी ट्रांसफर की क्षमता दिखाई है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट विंसी ऑटोरूट्स के सीईओ निकोलस नॉटेबेयर के अनुसार, “अगर यह तकनीक फ्रांस के मेन रोड नेटवर्क पर चार्जिंग स्टेशनों के साथ लागू होती है, तो भारी वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन की स्पीड कई गुना बढ़ेगी. इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आएगी.” Electreon के सीईओ ओरेन एज़र ने इसे “इलेक्ट्रिक रोड टेक्नोलॉजी के इतिहास का निर्णायक मोड़” बताया और कहा कि “दुनिया में अभी कोई भी तकनीक इतनी सस्टेनेबलिटी और पावर के साथ डायनामिक चार्जिंग नहीं दे सकती.” कैसे काम करती है यह तकनीक इस डायनामिक इंडक्शन चार्जिंग में सड़क की सतह के नीचे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कॉइल्स लगाए जाते हैं. जब कोई इलेक्ट्रिक वाहन इन कॉइल्स के ऊपर से गुजरता है, तो मैग्नेटिक फील्ड के माध्यम से बिजली वाहन में लगे रिसीवर तक पहुंचती है. यह एनर्जी या तो सीधे मोटर को चलाती है या फिर बैटरी में स्टोर हो जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि वाहन को चार्जिंग के लिए रुकना नहीं पड़ता. वह लगातार चलता रहता है और यात्रा के दौरान ही चार्ज होता जाता है. इससे न केवल वाहनों का डाउनटाइम घटता है, बल्कि छोटी और हल्की बैटरियों का इस्तेमाल भी संभव हो पाता है. ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए इसका मतलब है – ज्यादा लोड कैपेसिटी, कम बैटरी लागत और संसाधनों की बचत. इस सिस्टम में ज्यादा सटीक तकनीकी तालमेल जरूरी है. सड़क के नीचे लगे ट्रांसमिट कॉइल और वाहन में लगे रिसीवर कॉइल के बीच बिजली का आदान-प्रदान रियल टाइम में सेंसर और सॉफ्टवेयर के जरिए कंट्रोल होता है. अन्य देशों में भी प्रयोग फ्रांस का यह प्रयोग दुनिया में पहला है, जो मोटरवे पर लाइव ट्रैफिक में डायनामिक चार्जिंग का परीक्षण कर रहा है. लेकिन अन्य देश भी इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं. जर्मनी A6 मोटरवे पर इलेक्ट्रॉन की ही तकनीक से 1 किलोमीटर लंबा ट्रायल शुरू करने जा रहा है. इटली के लोम्बार्डी एरिया में “Arena del Futuro” प्रोजेक्ट ट्रकों और बसों के लिए इसी तरह के चार्जिंग सिस्टम का परीक्षण कर रहा है. स्वीडन, अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और इज़राइल भी अपने-अपने स्तर पर इस तकनीक को परख रहे हैं. ये सभी प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक रोड सिस्टम (ERS) की तकनीकी के स्टैंडर्ड, कॉस्टिंग और व्यवहार्यता तय करने में मदद करेंगे. क्या होंगे फायदे इलेक्ट्रिक रोड सिस्टम का ये प्रोजेक्ट कई मायनों में बेहद ही उपयोगी और लाभदायक साबित होगा, जैसे- इससे छोटी बैटरियों के इस्तेमाल से लिथियम और कोबाल्ट जैसे आयातित खनिजों पर निर्भरता घटेगी. भारी वाहनों को लगातार ऊर्जा मिलती रहेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इलेक्ट्रिफिकेशन की लागत कम होगी. EV के प्रयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने में मदद मिलेगी. आने वाले महीनों में यह पायलट प्रोजेक्ट सड़क की टिकाऊपन, पावर डिलीवरी, रखरखाव और वास्तविक लागत का डाटा एकत्र करेगा. यह 1.5 किलोमीटर का सेगमेंट सिर्फ शुरुआत है. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यही तकनीक भविष्य में फ्रांस, यूरोप और संभवतः पूरी दुनिया में हज़ारों किलोमीटर की सड़कों पर लागू हो सकती है. यानी फ्यूचर का रोडमैप तैयार है, जहां सड़कें सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत भी बनेंगी.

Gold-Silver Rate Today: सोना ₹3200 और चांदी ₹3800 गिरी, निवेशकों में मची हलचल

मुंबई  सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला (Gold-Silver Price Crash) जारी है. सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर टेक्निकल इश्यू के चलते देर से कारोबार की शुरुआत हुई, लेकिन जब ट्रेडिंग खुली तो दोनों कीमती धातुएं भरभराकर टूट गईं. अचानक सोने की कीमत में 3200 रुपये से ज्यादा, जबकि चांदी का भाव 3800 रुपये से ज्यादा टूट गया. न सिर्फ एमसीएक्स पर, बल्कि घरेलू मार्केट में भी गोल्ड-सिल्वर प्राइस में गिरावट आई है.  MCX पर सोना-चांदी क्रैश  सबसे पहले बताते हैं एमसीएक्स पर सोना-चांदी की कीमतों में आई गिरावट के बारे में, तो 5 दिसंबर की एक्सपायरी वाले Gold का भाव 3232 रुपये टूटकर 1,17,789 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. बीते कारोबारी दिन सोने का वायदा भाव (Gold Rate) 1,20,957 रुपये पर बंद हुआ था.चांदी की कीमत के पर नजर डालें, तो ये खुलते ही 3825 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गई. इस तगड़ी गिरावट के बाद Silver Price 1,39,306 रुपये पर आ गया.  घरेलू मार्केट में क्या है भाव?  जहां एक ओर एमसीएक्स पर गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश हो गए, तो वहीं दूसरी ओर घरेलू मार्केट में भी सोना-चांदी भरभराकर टूटे हैं. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com पर अपडेट किए गए रेट्स के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम गिरकर 1,19,164 रुपये रह गया, जो बीते कारोबारी दिन 1,21,077 रुपये पर बंद हुआ था. अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट को देखें तो… क्वालिटी            गोल्ड रेट (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट गोल्ड        1,19,164 रुपये/10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड        1,16,300 रुपये/10 ग्राम 20 कैरेट गोल्ड        1,06,060 रुपये/10 ग्राम 18 कैरेट गोल्ड        96,520 रुपये/10 ग्राम 14 कैरेट गोल्ड        76,860 रुपये/10 ग्राम   चांदी की कीमत भी घरेलू बाजार में टूटी है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को सिल्वर 1,45,031 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी, लेकिन मंगलवार को ये 1,43,400 रुपये पर ओपन हुई. गौरतलब है कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर अपलोड किए गए रेट देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब आप दुकान पर ज्वेलरी खरीदने के लिए जाते हैं, तो उस पर 3 फीसदी जीएसटी के साथ ही मेकिंग चार्ज भी देना होता है, जिसके बाद इनकी कीमत बढ़ जाती है.  हाई पर पहुंचकर फिसल रही कीमतें सोने की कीमतों में बीते कुछ दिनों से लगातार गिरावट जारी है.इसके पीछे बड़ा कारण डिमांड में कमी और अमेरिका-चीन की टैरिफ टेंशन (US-China Tariff Tension) में नरमी के संकेत बताए जा रहे हैं. ज्वेलरी खरीदते समय सोने की जांच कर लेना जरूरी है और इसका प्रोसेस बेहद आसान है. आप ज्वेलरी पर दर्ज हॉलमार्क के जरिए इसकी शुद्धता की पहचान कर सकते हैं. जैसे 24 कैरेट पर 999 अंकित होता है. 

भारत में ChatGPT प्रीमियम सभी के लिए फ्री, OpenAI ने घोषित किया विशेष ऑफर

नई दिल्ली OpenAI ने मंगलवार को ऐलान किया है कि सभी भारतीय यूजर्स को ChatGPT GO मुफ्त में मिलेगा. इसकी मंथली कीमत 399 रुपये है और इसकी शुरुआत 4 नवंबर से होने जा रही है. ये ऐलान कंपनी के हेड और वाइस प्रेसिडेंट निक टर्ली ने की है. चैटजीपीटी के लिए भारत दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है.  OpenAI का राइवल परप्लेक्सिटी पहले से भारतीय यूजर्स को मुफ्त में पेड सब्सक्रिप्शन दे रहा है. Perplexity Pro AI के एनुअल प्लान की कीमत 17 हजार रुपये है. Perplexity Pro AI का मुफ्त एक्सेस पाने के लिए यूजर्स को Airtel की सिम चलानी होगी.  अगस्त में लॉन्च हुआ था ChatGPT Go OpenAI ने ChatGPT Go को इस साल अगस्त में लॉन्च किया है. इसकी मदद से कंपनी किफायदी कीमत में कुछ एडवांस्ड फीचर्स का एक्सेस देती है. इसमें ज्यादा सवाल और बेहतर एक्युरेसी वाली इमेज भी तैयार कर सकेंगे.  कंपनी ने बताया कि भारत में ChatGPT के पेड सब्सक्राइबर की संख्या सिर्फ एक महीने में डबल हो गई है. हालांकि कंपनी ने कोई संख्या रिवील नहीं की है. कंपनी ChatGPT Go को करीब 90 देशों में शुरू कर चुकी है.  चैटजीपीटी के हेड और वाइस प्रेसिडेंट निक टर्ली ने भारत में चार दिन तक चलने वाले इवेंट DevDay Exchange के पहले दिन ही बड़ा ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि हम भारत में सभी के लिए 1 साल तक मुफ्त में ChatGPT Go का एक्सेस देंगे.  ChatGPT के प्लान्स और उनके फीचर्स  ChatGPT Go के फीचर्स  ChatGPT Go के तहत यूजर्स को कई फीचर्स का बेहतर एक्सेस मिलेगा. GPT-5 का इस्तेमाल करते हुए यूजर्स ज्यादा सवाल पूछ सकेंगे. साथ ही इमेज जनरेशन टूल्स का भी बेहतर एक्सेस मिलेगा और ज्यादा इमेज तैयार कर सकेंगे. ज्यादा फाइल को अपलोड भी कर सकेंगे. बेहतर तरीके से डेटा एनालाइज करने की भी सुविधा मिलती है.  ChatGPT क्या है?  ChatGPT, असल में AI चैटबॉट है. OpenAI ने अपने इस चैटबॉट को साल 2022 में लॉन्च किया था और अब तक इसको कई अपडेट दिए जा चुके हैं. साथ ही बेहतर एक्युरेसी भी देखने को मिलती है. कंपनी ने प्रोफिट के लिए कुछ पेड सब्सक्रिप्शन को भी लॉन्च किया है, जिसमें Go, Plus, और प्लस जैसे ऑप्शन दिये हैं. 

अब कैरेंस में मिलेगा CNG विकल्प, लॉन्च हुई नई वेरिएंट, जानें कीमत

मुंबई  किआ इंडिया ने कैरेंस लाइनअप का विस्तार करते हुए एक नया सीएनजी वेरिएंट लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 11.77 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। यह सीएनजी किट डीलर-लेवल फिटमेंट के रूप में उपलब्ध है, जिसकी कीमत एकमात्र प्रीमियम (O) पेट्रोल वेरिएंट से 77,900 रुपये अधिक है, जिसकी कीमत 10.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। सीएनजी इंस्टॉलेशन एक सरकारी स्वीकृत लोवाटो डीआईओ किट है, जिस पर 3 साल या 1,00,000 किमी की थर्ड-पार्टी वारंटी मिलती है।  पावरट्रेन विकल्प किआ कैरेंस सीएनजी में 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन लगा है जो 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जुड़ा है। डिज़ाइन और आयाम बाहर की तरफ, कैरेंस सीएनजी में बॉडी कलर के बंपर और डोर हैंडल, सिल्वर सराउंड वाली किआ सिग्नेचर टाइगर नोज़ ग्रिल, इंटीग्रेटेड रियर स्पॉइलर, शार्क-फिन एंटीना, और हैलोजन हेडलैंप और टेललैंप हैं। इसमें फुल-साइज़ व्हील कवर के साथ R15 या R16 स्टील व्हील लगे हैं।इसके साथ ही यह एमपीवी R15 या R16 स्टील व्हील्स और फुल-साइज व्हील कवर के साथ आती है। डाइमेंशंस की बात करें तो कार की लंबाई 4,540 मिमी, चौड़ाई 1,800 मिमी और ऊंचाई 1,708 मिमी (रूफ रेल्स सहित) है। इसका व्हीलबेस 2,780 मिमी है, जो केबिन के अंदर पर्याप्त जगह सुनिश्चित करता है। आयामों की बात करें तो, कैरेंस की लंबाई 4,540 मिमी, चौड़ाई 1,800 मिमी और ऊँचाई 1,708 मिमी (रूफ रेल के साथ) है, जबकि इसका 2,780 मिमी व्हीलबेस पर्याप्त आंतरिक स्थान सुनिश्चित करता है। रंग विकल्प कैरेंस सीएनजी छह एक्सटीरियर रंगों में उपलब्ध है – क्लियर व्हाइट, स्पार्कलिंग सिल्वर, ग्रेविटी ग्रे, ऑरोरा ब्लैक पर्ल, इंपीरियल ब्लू और प्यूटर ऑलिव। विशेषताएँ इस एमपीवी के अंदर एक प्रीमियम, परिवार-अनुकूल केबिन है जिसमें सेमी-लेदरेट (काला और इंडिगो) सीटें, स्लाइडिंग, रिक्लाइनिंग और टम्बल फंक्शन वाली 60:40 स्प्लिट दूसरी पंक्ति की सीटें, और रिक्लाइनिंग और पूरी तरह से फ्लैट फोल्डिंग क्षमता वाली 50:50 स्प्लिट तीसरी पंक्ति की सीटें जैसी सुविधाएँ हैं। पीछे के यात्रियों को दूसरी और तीसरी दोनों पंक्तियों में रूफ-फ्लश्ड डिफ्यूज़्ड एसी वेंट का लाभ मिलता है। इस केबिन को सैटर्न ब्लैक, कोकून बेज और नेवी रंगों में डिज़ाइन किया गया है, और इंडिगो मेटल पेंट डैशबोर्ड इसे और भी बेहतर बनाता है। एंड्रॉइड ऑटो और एप्पल कारप्ले के साथ 8-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, वॉइस रिकग्निशन और छह-स्पीकर वाला ऑडियो सेटअप कनेक्टेड और आनंददायक ड्राइविंग सुनिश्चित करता है। कैरेंस सीएनजी में बर्गलर अलार्म के साथ कीलेस एंट्री, एलईडी टर्न इंडिकेटर्स के साथ इलेक्ट्रिक-एडजस्ट ओआरवीएम, डायनामिक गाइडलाइन्स वाला रियर-व्यू कैमरा, रियर डोर सनशेड कर्टेन, मैनुअल ड्राइवर सीट हाइट एडजस्टमेंट और सभी पंक्तियों में यात्रियों के लिए कई यूएसबी टाइप-सी पोर्ट (कुल पांच) जैसे सुविधाजनक फीचर्स मौजूद हैं। कैरेंस सीएनजी 10 सेफ्टी पैकेज से लैस है जिसमें छह एयरबैग, ईएससी, वीएसएम, बीएएस, एचएसी, डीबीसी, ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक, एबीएस, रियर पार्किंग सेंसर और एक हाईलाइन टीपीएमएस शामिल हैं। किया कैरेंस सीएनजी का यह नया वेरिएंट भारतीय बाजार में उन खरीदारों के लिए आकर्षक विकल्प है जो बेहतर माइलेज, कम रनिंग कॉस्ट और प्रीमियम फीचर्स की तलाश में हैं। किफायती कीमत, बेहतरीन सुरक्षा पैकेज और किया की भरोसेमंद तकनीक इसे फैमिली और कमर्शियल दोनों उपयोग के लिए एक शानदार विकल्प बनाती है।

कुआलालंपुर में साइन हुआ चीन-ASEAN FTA 3.0, व्यापार पर अमेरिकी टैरिफ का दबाव घटेगा

नई दिल्ली अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के असर को कम करने के लिए तमाम देश अपने-अपने तरीके से प्रयास कर रहे हैं. इस बीच दुनिया के लिए टेंशन की सबसे बड़ी वजह US-China Tariff War बना दिखाई दिया. हालांकि, दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तनाव घटने के संकेत भी मिले हैं और इसी हफ्ते के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं. लेकिन इससे पहले ही China ने एक बड़ी डील कर डाली है और उसने आसियान के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते पर साइन किए हैं. US Tariff के असर को कम करने के लिए ये डील कुआलालंपुर में हुई है.  चीन-आसियान के बीच बड़ा कारोबार रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशियाई ब्लॉक आसियान और चीन ने मंगलवार को अपने मुक्त व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने के लिए हस्ताक्षर किए. इसमें डिजिटल, ग्रीन इकोनॉमी और अन्य नए उद्योगों पर फोकस किया जाएगा. आसियान के आंकड़ों के अनुसार, 11 सदस्यीय दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. बीते साल दोनों देशों के बीच कुल 771 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ. चीन लगातार बढ़ा रहा व्यापारिक संबंध अमेरिका के टैरिफ अटैक के बीच चीन लगातार आसियान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो 3.8 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद वाला क्षेत्र है. ऐसा इसलिए ताकि दुनिया भर के देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगाए गए भारी आयात शुल्क का मुकाबला किया जा सके. गौरतलब है कि रेयर अर्थ मिनरल्स और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्यात प्रतिबंधों को लेकर प्रमुख शक्तियों की आलोचना के बावजूद चीन खुद को अधिक एक ओपन इकोनॉमी के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है. 2022 में बात शुरू, अब हो गई डील ASEAN के साथ चीन के FTA 3.0 पर मलेशिया में इस समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर किए गए. इसमें ट्रंप ने रविवार को एशिया की अपनी यात्रा की शुरुआत में भाग लिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस उन्नत आसियान-चीन समझौते पर बातचीत नवंबर 2022 में शुरू हुई थी और इस साल मई में समाप्त हुई. ये वो समय था जबकि डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ के साथ आक्रामक रुख अपनाए नजर आए. इससे पहले दोनों के बीच पहला मुक्त व्यापार समझौता 2010 में लागू हुआ था. क्यों खास हैं चीन-ASEAN?  चीन और आसियान दोनों क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) का हिस्सा हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समूह है. दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी और वैश्विक GDP के लगभग 30% को ये कवर करता है. मलेशिया ने सोमवार को कुआलालंपुर में आरसीईपी शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जो पिछले पांच सालों में पहली बार थी. चीन ने इससे पहले कहा था कि यह समझौता चीन और आसियान के बीच कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच की राह आसान बनाएगा.  कुछ एनालिस्ट इस ब्लॉक को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के विरुद्ध एक संभावित बफर के रूप में देखते हैं, लेकिन इसके सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धी हितों के कारण इसके प्रावधानों को कुछ अन्य क्षेत्रीय व्यापार समझौतों की तुलना में कमजोर माना जाता है.

LIC के बड़े निवेश खुलासा: टॉप-5 में अडानी ग्रुप की जगह नहीं, सबसे ज्यादा पैसा किसमें लगा?

मुंबई  अडानी ग्रुप (Adani Group) में LIC के निवेश को लेकर वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट पर देश में राजनीति शुरू हो गई है. विपक्ष ने सरकार पर सवाल दागे, तो LIC ने अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है.  दरअसल, वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में LIC पर अडानी ग्रुप में 3.9 अरब डॉलर (करीब 33 हजार करोड़ रुपये) निवेश करने का बड़ा आरोप लगा है. रिपोर्ट की मानें तो बीमा कंपनी ने अडानी ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए मई- 2025 में यह निवेश किया है. लेकिन LIC ने इस पूरी रिपोर्ट को भ्रामक करार दिया है. बीमा कंपनी ने कहना है कि  ये रिपोर्ट LIC की साफ-सुथरी छवि को खराब करने और भारत के मजबूत वित्तीय क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के मकसद से जारी की गई है.  अब आइए जानते हैं, LIC का अडानी ग्रुप में कितना निवेश है, और देश में सबसे ज्यादा LIC का निवेश कहां और कंपनियों में हैं. आज हम LIC के टॉप-10 निवेश के बारे में भी जानेंगे.  सितंबर- 2025 के डेटा के मुताबिक LIC की अडानी ग्रुप की इन कंपनियों में हिस्सेदारी हैं.   अडानी पोर्ट्स: 7.73% (जून से पहले 8.14% थी.) अडानी एंटरप्राइजेज: 4.16% Adani ग्रीन एनर्जी: 1.3% Adani एनर्जी सॉल्यूशन: 3.42% Adani टोटल गैस: 6% अंबुजा सीमेंट: 7.31% ACC लिमिटेड: 9.95%  हालिया रिपोर्ट के मुताबिक LIC की इक्विटी में निवेश करीब 16 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि अडानी ग्रुप की कंपनियों में LIC का निवेश करीब 60 हजार करोड़ रुपये का है. यानी LIC के कुल निवेश का करीब 4 फीसदी हिस्सा अडानी ग्रुप की कंपनियों में हैं.LIC ने अडानी ग्रुप से ज्यादा देश की कई दूसरी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है.  LIC का टॉप-5 निवेश:  1. LIC का सबसे ज्यादा निवेश Reliance Industries में है, यहां करीब 1.38 लाख करोड़ का निवेश है, जो कि RIL में करीब 6.94% हिस्सेदारी बनती है. 2. ITC Ltd: इस कंपनी में LIC का निवेश करीब 82,342 करोड़ रुपये का है, यानी ITC में LIC की करीब 15.86% हिस्सेदारी है.  3. HDFC Bank Ltd: इस बैंक में LIC का करीब 72,500 करोड़ रुपये का निवेश है. इस बैंक में LIC की करीब 5.45 फीसदी हिस्सेदारी है. 4. SBI: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में LIC की करीब 9.59% हिस्सेदारी है, अमाउंट में ये निवेश करीब 68,000 करोड़ रुपये का है.  5. Larsen & Toubro Ltd (L&T) में LIC का करीब 66,053 करोड़ रुपये का निवेश है. यानी इस कंपनी में 13% से ज्यादा हिस्सेदारी LIC की है.  6. Infosys Ltd में LIC का निवेश लगभग 63,400 करोड़ रुपये का है.  यानी LIC के टॉप-5 निवेश में अडानी ग्रुप नहीं है. LIC के लिए Adani Group महत्वपूर्ण जरूर है. लेकिन इसका हिस्सा सीमित है. LIC के शीर्ष 10 निवेशों में अभी भी बैंकिंग, आईटी, और कंज्यूमर सेक्टर की कंपनियां हावी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक LIC का इक्विटी पोर्टफोलियो 300 से कंपनियां हैं. जहां वह कम-से-कम 1% हिस्सेदारी रखती है. जून 2025 तिमाही के दौरान, एलआईसी ने 81 कंपनियों में हिस्सेदारी कम करके और चार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) रक्षा शेयरों को जोड़कर अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल किया.  निवेश पर अडानी ग्रुप का बयान अडानी समूह में एलआईसी का निवेश अन्य बड़े समूहों तुलना में काफी कम है, और यह पोर्टफोलियो विविधीकरण का एक हिस्सा है. एलआईसी का कहना है कि उनके निवेश फैसले बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं और नियामक दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है. बता दें, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी एशिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स हैं. फोर्ब्स के अनुसार उनकी नेटवर्थ 6.22 लाख करोड़ रुपये है. दुनिया के अमीरों की लिस्ट में वे 27वें नंबर पर हैं. अडाणी ग्रुप का साम्राज्य कोल ट्रेडिंग, माइनिंग, लॉजिस्टिक्स, पावर जेनरेशन, सीमेंट इंडस्ट्री और डिस्ट्रीब्यूशन तक फैला हुआ है.

टैरिफ की राजनीति में भारत ने दिखाया कमाल, चीन को निर्यात बढ़ा 22%

नई दिल्ली एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ-टैरिफ (Trump Tariff) खेल रहे हैं, तो वहीं भारत ने अपने निर्यातक देशों की लिस्ट में विविधता लाई है. इसका असर भी देखने को मिला है. अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ (US Tariff On India) का बड़ा असर झींगा निर्यात से लेकर टेक्सटाइल सेक्टर तक पर देखने को मिला. लेकिन भारतीय निर्यातकों ने अमेरिकी बाजार में दबाव के बीच दूसरे देशों के बाजारों का रुख किया. रिपोर्ट के मुताबिक, US Tariff Tension के बीच India-China के व्यापार संबंध सुधरे हैं और वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में भारत का चीन को निर्यात करीब 22% बढ़ा है.  टैरिफ टेंशन के बीच बढ़ा चीन से कारोबार रिपोर्ट्स की मानें तो India-China Trade में सुधार के चलते अप्रैल-सितंबर 2025 में चीन को भारत का निर्यात 8.41 अरब डॉलर रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2024 के 6.90 अरब डॉलर से 22 फीसदी के आसपास की बढ़त दर्शाता है. खास तौर पर अमेरिकी टैरिफ के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स के प्रोडक्ट्स की चीन में अच्छी खासी डिमांड देखने को मिली है. इनमें झींगा और एल्युमिनियम प्रमुख हैं. इसके अलावा और भी कई क्षेत्रों ने चीन को निर्यात में तेजी दिखाई है.  झींगा समेत इन सेक्टर्स को लगा था झटका बीते दिनों आईं अन्य रिपोर्ट्स पर नजर डालें, तो अमेरिका द्वारा भारत पर 50% का टैरिफ लगाने के बाद से भारतीय झींगा निर्यात पर बुरा असर देखने को मिला है. ग्लोबल डेटा के हवाले से ट्रंप के इस टैरिफ अटैक के चलते भारत से अमेरिका को एयर कार्गो निर्यात में 14 फीसदी की तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है, तो आंध्र प्रदेश की झींगा इंडस्ट्री करीब 25,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का अनुमान लगाया गया था. इनमें कहा गया था कि अमेरिका को झींगा निर्यात के 50 फीसदी ऑर्डर 50% टैरिफ के बाद से रद्द हुए. इसके अलावा अन्य सबसे प्रभावित सेक्टर्स में एल्युमिनियन और टेक्सटाइल रहा, जिनके लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है. बीते दिनों कंफेडेरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री यानी CITI के एक सर्वे में इसके प्रभाव देखने को मिले थे. सर्वे के निष्कर्षों में सामने आया था कि निर्यात पर 50% टैरिफ के चलते कपड़ा और परिधान क्षेत्र कम ऑर्डर और कारोबार में करीब 50% की गिरावट से जूझ रहा है.  चीनी राजदूत बोले- 'भारतीय वस्तुओं का स्वागत' भारत में चीन के राजदूत श फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (पहले X) पर एक पोस्ट के जरिए भी India-China Trade बढ़ने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि, 'वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में चीन को भारत का निर्यात 22% बढ़ा है. बीजिंग ज्यादा से ज्यादा भारतीय वस्तुओं का स्वागत करता है और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने में मदद के लिए तैयार है.' ट्रंप ने भारत पर टैरिफ किया था दोगुना बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ पॉलिसी के तहत शुरुआत में भारत पर 25 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. लेकिन बाद में रूसी तेल और हथियारों की खरीद को मुद्दा बनाया और भारत पर इसकी खरीद बढ़ाकर यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मदद करने का आरोप लगाया था. इसके चलते अमेरिका की ओर से भारत पर लागू टैरिफ को दोगुना करते हुए 50% कर दिया गया था, जो 27 अगस्त से लागू है.