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9 लाख करोड़ का नुकसान, आज फिर शेयर बाजार क्रैश, सेंसेक्स में 1700 अंक की गिरावट

मुंबई  दो दिनों की तेजी के बाद, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. लॉर्जकैप से लेकर मिड और स्‍मॉलकैप स्‍टॉक में हैवी फाल रहा. बीएसई SENSEX में 1690 अंक या 2.25% की गिरावट आई और यह 73,583 पर क्‍लोज हुआ. निफ्टी में 486 अंक या 2.09 फीसदी की गिरावट रही, जो 22,819 पर बंद हुआ. निफ्टी बैंक 1433 अंक गिरकर 52,274 पर क्‍लोज हुआ।  शेयर बाजार में यह बड़ी गिरावट ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति सामान्‍य नहीं होने के कारण आई है. हालांकि ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर 10 दिनों तक कोई हमला नहीं करने का ऐलान किया है और होर्मुज को खोलने की डेडलाइन बढ़ाकर 6 अप्रैल तक कर दी है. फिर भी बाजार में गिरावट देखने को मिली है।  बीएसई टॉप 30 शेयरों में एयरटेल, टीसीएस और पावरग्रिड को छोड़कर बाकी 27 शेयर तेजी से टूटे हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट रिलायंस इंडस्‍ट्री के शेयरों में हुई है, जो 4.60 फीसदी गिरकर 1347 रुपये पर आ चुका है. इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एसबीआई जैसे शेयरों में 4 फीसदी की गिरावट रही है. बाकी शेयर 2 फीसदी से ज्‍यादा गिरे हैं।  निवेशकों को तगड़ा नुकसान बुधवार को बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 431 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 422 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. इस हिसाब से देखा जाए तो निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।  क्‍यों आई शेयर बाजार में भारी गिरावट     प्रॉफिट बुकिंग: पिछले दो सत्रों में शेयरों में 3.5% की तेजी के बाद 27 मार्च को मुनाफावसूली देखने को मिली. आईटी को छोड़कर सभी सेक्‍टर बुरी तरह प्रभावित हुए. स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में 1.7% की गिरावट आई. बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के शेयरों में 1-3% की गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्‍यादा गिरावट में योगदान Reliance ने दिया, जो 4.60 फीसदी तक टूट गया।      जियो-पॉलिटिकल तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होते हुए दिखाई नहीं दे रही है. हालांकि ट्रंप ने 6 अप्रैल तक डेडलाइन बढ़ा दी है और कहा है कि वे 10 दिनों तक ईरान के एनर्जी इंफ्रा पर हमला नहीं करेंगे. इसके बावजूद, शेयर बाजार इसके निगेटिव ले रहा है. इसी कारण ग्‍लोबल मार्केट में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।      कच्‍चे तेल का भाव: शुक्रवार को कच्‍चे तेल के भाव में तेजी देखी जा रही है. भारतीय शेयर बाजार बंद होने तक कच्‍चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया, जिस कारण शेयर बाजार में गिरावट और भी हावी हो गई।      ऑल टाइम लो पर रुपया: शुक्रवार को भारतीय रुपया 94 प्रति डॉलर के पार चला गया. यह रुपया का सबसे निचला स्‍तर है, क्‍योंकि इस बात की चिंता थी कि मिडिल ईस्‍ट वॉर के कारण पैदा एनर्जी आपूर्ति संकट लंबा खिंचेगा, जिससे एनर्जी आयात करने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर दबाव और गहरा जाएगा।      VIX में बड़ी उछाल: बाजार की अस्थिरता का सूचकांक इंडिया VIX करीब 9% बढ़कर 28 पर पहुंच गया, जो दर्शाता है कि बाजार को निकट भविष्य में बिकवाली के दबाव की उम्मीद है।   

रामनवमी पर सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, निवेशकों को हुआ बड़ा झटका

इंदौर  आज रावनवमी के मौके पर सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। चांदी तो अचानक 15000 रुपये टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में राम नवमी के दिन यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 26 मार्च को शेयर बाजार बंद रहा, लेकिन कमोडिटी मार्केट खुलते ही सोना और चांदी के दाम में भारी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शाम के वक्त ट्रेडिंग शुरु होते ही कीमतें तेजी से टूट गईं, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। पीली धातु 3 हजार से ज्यादा टूटी एमसीएक्स (MCX) पर शाम करीब 7 बजे सोना 3000 रुपये से ज्यादा गिरकर करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह गिरावट तो  बुधवार के बंद भाव के मुकाबले 2 फीसदी से ज्यादा रही। चांदी में तो 15 हजार की भारी भरकम गिरावट कीमती धातु सोने के साथ ही चांदी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।  मई वायदा वाली चांदी करीब 15,000 रुपये टूटकर 2.20 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे आ गई। यह गिरावट करीब  6% दर्ज की गई। सोना और चांदी फिर क्यों हुए धड़ाम? दरअसल अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से  तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच, ईरान ने समुद्री रास्तों को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल की कीमत बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है और वो काफी गिर गए। वहीं जनवरी के मुकाबले देखें, तो सोना अपने रिकॉर्ड हाई 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से करीब 53,000 रुपये सस्ता हो चुका है जबकि चांदी भी 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से गिरकर करीब 2.20 लाख रुपये पर आ गई है।

सेंसेक्स में 1009 अंकों की गिरावट, युद्ध और कमजोर रुपया प्रमुख कारण—गिरावट की 5 वजहें

मुंबई   शेयर बाजार में आज शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक शुरुआती कारोबार के दौरान लुढ़क गए। सेंसेक्स 1009 अंक की गिरावट के बाद 74624.78 अंक के इंट्रा-डे लो लेवल पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद 23,000.85 स्तर तक लुढ़क गया था। घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट की वजह से निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये आज डूब गए हैं। इस गिरावट की वजह एशिआई बाजारों की कमजोर स्थिति, रुपया का नए रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंचने को माना जा रहा है। आइए जानते हैं 5 बड़ी वजहें — 1-मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ईरान के साथ जारी सत्ता संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका और ईरान एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। जिसकी वजह से अनिश्चितता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अप्रैल तक ईरान के एनर्जी इंफ्रा पर अटैक ना करने की बात कही है। एक्सपर्ट् का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं तब की स्थिति में तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकती है। इसका बुरा असर शेयर बाजारों पर दिख सकता है। 2-वैश्विक स्तर पर कमजोर स्थिति एशिया के कई धाकड़ शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को को मिली है। कोरिया Kospi और जापान Nikkei में आज 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है। S&P 500 और Nasdaq में भी दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 3- रुपया रिकॉर्ड लो लेवल पर है युद्ध शुरू होने के बाद से ही रुपया की स्थिति ठीक नहीं है। आज रुपया रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंच गया। 1 डॉलर की कीमत 94.1575 के स्तर पर आ गया। इससे पहले डॉलर के मुकाबले रुपये का रिकॉर्ड लो लेवल 93.98 था। बता दें, जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से रुपया 3.5 प्रतिशत लुढ़क चुका है। 4- कच्चे तेल की कीमतों में जारी उछाल ने बढ़ाई टेंशन सप्लाई प्रभावित होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। आज ब्रेंट क्रू़ड ऑयल का भाव 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। 5- FPI की निकासी घरेलू शेयर बाजारों से एफपीआई की निकासी जारी है। एफपीआई ने 123688 रुपये की निकासी की है। यह आंकड़ा 25 मार्च तक का है। (यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)

सोना-चांदी के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव, खरीदारी से पहले देखें ये अहम जानकारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सर्राफा बाजार में गुरुवार, 26 मार्च 2026 को एक बार फिर सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिला है, जबकि चांदी के दाम आज भी स्थिर बने हुए हैं। भोपाल और इंदौर में जारी ताजा रेट्स के मुताबिक, खरीदारी से पहले बाजार की चाल समझना बेहद जरूरी हो गया है। सोना हुआ महंगा आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है: 24 कैरेट सोना 1 ग्राम: ₹14,191 8 ग्राम: ₹1,13,528 10 ग्राम: ₹1,41,910 22 कैरेट सोना 1 ग्राम: ₹13,515 8 ग्राम: ₹1,08,120 10 ग्राम: ₹1,35,150 कल के मुकाबले सोना महंगा हुआ है, जिससे निवेशकों और खरीदारों की चिंता बढ़ सकती है। चांदी के दाम स्थिर चांदी के रेट में आज कोई बदलाव नहीं हुआ: 1 ग्राम: ₹260 1 किलो: ₹2,60,000 लगातार उतार-चढ़ाव के बीच आज चांदी की कीमत स्थिर रहना खरीदारों के लिए राहत की खबर है। बाजार का ट्रेंड क्या कहता है? मार्च महीने में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। ऐसे में अगर आप खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो जल्दबाजी के बजाय सही समय का इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है। खरीदारी से पहले ध्यान रखें रोज बदलते रेट जरूर चेक करें एक बार में बड़ी खरीदारी करने से बचें निवेश के हिसाब से सही कैरेट चुनें, कुल मिलाकर, सोना फिर महंगा हो गया है, लेकिन चांदी स्थिर है ऐसे में समझदारी से फैसला लेना ही सही रहेगा।

X सर्विस फिर डाउन, अचानक ठप पड़ी और यूजर्स को नहीं मिल रही कोई जानकारी

नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) एक बार फिर तकनीकी दिक्कतों की वजह से चर्चा में है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में यूजर्स ने शिकायत की कि यह प्लेटफॉर्म ठीक से काम नहीं कर रहा। लोगों को फीड लोड करने में परेशानी हुई, नई पोस्ट दिखाई नहीं दीं और कई मामलों में वे ऐप और वेबसाइट दोनों ही ठीक से एक्सेस नहीं कर पा रहे थे। अचानक आई इस दिक्कत ने लाखों यूजर्स के डिजिटल एक्सपीरियंस को प्रभावित किया। आउटेज की पुष्टि आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector की ओर से भी की गई है। वहां पर कुछ ही समय में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हजारों यूजर्स ने एक साथ दिक्कत दर्ज की, और शिकायतों का ग्राफ अचानक ऊपर चला गया। आमतौर पर इस तरह का स्पाइक इस बात का संकेत होता है कि समस्या डिवाइस या नेटवर्क की नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के सर्वर या सिस्टम स्तर पर है। यूजर्स के सामने आईं ये दिक्कतें यूजर्स को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उनमें सबसे ज्यादा के लिए दिक्कत फीड का रिफ्रेश ना होना थी। कई लोगों ने बताया कि पोस्ट और कमेंट्स लोड नहीं हो रहे थे, जबकि कुछ को ‘Something went wrong’ जैसे एरर मेसेज दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ यूजर्स को पुरानी पोस्ट तो दिख रही थीं लेकिन नई अपडेट नहीं आ रही थीं, जिससे लग जा रहा है कि बैकएंड सिंकिंग या सर्वर रिस्पॉन्स में गड़बड़ी हुई। दुनियाभर में सामने आए मामले रिपोर्ट्स की मानें तो आउटेज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों से भी इसी तरह की रिपोर्ट्स सामने आईं, जिससे यह मामला ग्लोबल आउटेज का हो गया है। जब एक ही समय पर अलग-अलग देशों के यूजर्स एक जैसी समस्या रिपोर्ट करते हैं, तो यह संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म के इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ी दिक्कत आई है। अच्छी बात यह है कि सीमित संख्या में ही यूजर्स इससे प्रभावित हुए हैं। फिलहाल, X की ओर से इस बारे में तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस तरह के आउटेज के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें सर्वर ओवरलोड, अचानक बढ़ा ट्रैफिक, बैकएंड अपडेट या फिर किसी तकनीकी फेलियर की संभावना ज्यादा होती है। पहले भी X को ऐसे आउटेज का सामना करना पड़ा है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो गए। अगर आप भी इससे प्रभावित हुए हैं तो परेशान ना हों और कुछ वक्त इंतजार करें।

ईरान युद्ध का प्रभाव: हल्दी के दाम ₹3,500 प्रति क्विंटल कम, किसान परेशान

 मराठवाड़ा महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध हल्दी का निर्यात ईरान के युद्ध की वजह से पूरी तरह ठप हो गया है. इससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतें तेजी से गिर गई हैं. कुछ ही दिनों में हल्दी की कीमत 16,500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. यानी एक क्विंटल हल्दी पर किसानों को 3,500 रुपये का नुकसान हो रहा है।   शिवसेना नेता और विधान परिषद सदस्य हेमंत पाटील ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा की हल्दी मुख्य रूप से खाड़ी देशों (गल्फ) और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है. पिछले महीने शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है. निर्यात रुकने से माल घरेलू बाजार में ही सड़ रहा है, जिससे दाम तेजी से गिर रहे हैं।  बता दें कि मराठवाड़ा क्षेत्र पूरे देश के हल्दी निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालता है. यहां की हल्दी गुणवत्ता में बेहतरीन मानी जाती है. हिंगोली जिले में ही लगभग 2 लाख एकड़ जमीन पर हल्दी की खेती होती है. हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था. यह हल्दी अपनी खास खुशबू, रंग, स्वाद के लिए जानी जाती है. आयुर्वेद, दवा, खाने-पीने और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका खूब इस्तेमाल होता है।  टेंशन में किसान निर्यात बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि अगर युद्ध जल्दी नहीं रुका तो कीमतें और भी गिर सकती हैं.  किसान पहले से ही महंगाई और अन्य समस्याओं से परेशान हैं, अब हल्दी जैसी नकदी फसल पर यह झटका उनके लिए बहुत बड़ा नुकसान साबित हो रहा है।  मराठवाड़ा के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्दी कोई राहत पैकेज या वैकल्पिक बाजार का इंतजाम करे, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो. फिलहाल युद्ध की वजह से न सिर्फ हल्दी बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। 

महंगाई का डबल झटका! LPG के बाद अब खाने के तेल की कीमतें बढ़ने के आसार

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारतीय घरों तक पहुंचने लगा है। इस बार मामला सिर्फ एलपीजी तक सीमित नहीं है, बल्कि किचन की सबसे जरूरी चीज (खाने का तेल) भी महंगा होने लगा है। भारत में पूड़ी, पराठा, समोसा, जलेबी से लेकर रोजमर्रा की सब्जियों तक, हर चीज में तेल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डाल रही है। क्या है डिटेल पिछले एक महीने में खाने के तेल की कीमतों में साफ उछाल देखने को मिला है। 24 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच सूरजमुखी तेल की कीमत 175 रुपये से बढ़कर 181 रुपये प्रति किलो हो गई। वहीं पाम ऑयल 5 रुपये महंगा होकर 141 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। सोयाबीन तेल में भी 4 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मूंगफली, वनस्पति और सरसों तेल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है। भारत में खाने के तेल का महत्व सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोषण का भी अहम स्रोत है। यह शरीर को जरूरी फैट, ऊर्जा और विटामिन देता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कुपोषण का सामना करते हैं। लेकिन समस्या यह है कि देश में तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है और घरेलू उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है। अगर खपत की बात करें तो 2022-23 में शहरी भारत में एक व्यक्ति औसतन 12 किलो और ग्रामीण इलाकों में करीब 11 किलो तेल सालाना इस्तेमाल करता है। वहीं 2004-05 में यह खपत काफी कम थी। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत करीब 56 फीसदी तेल आयात करता है, जबकि सिर्फ 44 फीसदी घरेलू उत्पादन से आता है। आयात के आंकड़े भी इस निर्भरता को साफ दिखाते हैं। 2017 में भारत ने 11.8 अरब डॉलर का तेल आयात किया था, जो 2022 में बढ़कर 21.1 अरब डॉलर हो गया। 2025 में यह थोड़ा घटकर 18.6 अरब डॉलर रहा। इसमें पाम ऑयल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 41 फीसदी, सोयाबीन तेल 35 फीसदी और सूरजमुखी तेल 18 फीसदी रहा। सरकार ने क्या कहा हालांकि, सरकार का कहना है कि मौजूदा ईरान से जुड़े तनाव के बावजूद भारत में तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा नहीं है। भारत मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे कई देशों से तेल आयात करता है, जिससे अगर किसी एक देश से सप्लाई प्रभावित होती है तो दूसरे विकल्प मौजूद रहते हैं। साथ ही सरकार ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स’ भी शुरू किया है, जिसका मकसद आने वाले वर्षों में देश में तेल उत्पादन बढ़ाना है।

अब PNG है तो LPG नहीं: गैस संकट के बीच सरकार ने बदले नियम

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने रसोई गैस को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नया निर्देश जारी किया है जिसके अनुसार जिन इलाकों में पाइप्ड नैचुरल गैस यानी PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां अगर लोग LPG सिलेंडर से PNG पर शिफ्ट नहीं करते हैं, तो उनकी LPG सप्लाई बंद की जा सकती है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश में गैस नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने और एक ही ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए उठाया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण LPG सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे देश में इसकी कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में सरकार अब लोगों को PNG अपनाने के लिए कह रही है, जो पाइप के जरिए सीधे घर तक लगातार मिलती है और सिलेंडर बुक करने की झंझट भी खत्म कर देती है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए नियम के मुताबिक, अगर किसी घर में PNG उपलब्ध होने के बावजूद तीन महीने के भीतर कनेक्शन नहीं लिया जाता है, तो LPG सप्लाई बंद की जा सकती है। सरकार का असली उद्देश्य क्या है? सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य गैस सप्लाई सिस्टम को ज्यादा संतुलित और मजबूत बनाना है। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा पहले से उपलब्ध है, वहां LPG के उपयोग को कम करके उस गैस को उन क्षेत्रों तक पहुंचाना है जहां अभी पाइपलाइन नेटवर्क नहीं है। इसके साथ ही सरकार “फ्यूल डाइवर्सिफिकेशन” को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि देश किसी एक ही सोर्स पर निर्भर न रहे, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल लेवल पर सप्लाई में रुकावटें आ रही हैं। पाइपलाइन गैस को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किए ये बड़े बदलाव सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क को तेजी से फैलाने के लिए नियमों को काफी आसान बना दिया है। अब पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी मंजूरियों को सरल कर दिया गया है और अलग-अलग जगहों पर लगने वाले चार्जेस को स्टैंडर्ड किया गया है, ताकि कंपनियों को अनावश्यक देरी या अतिरिक्त खर्च का सामना न करना पड़े। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अगर तय समय के अंदर कोई सरकारी विभाग अनुमति नहीं देता, तो उसे अपने आप मंजूरी मान लिया जाएगा। इन स्थिति में बंद नहीं होगी LPG अगर किसी घर तक पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन देना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, तो उस स्थिति में संबंधित अधिकृत कंपनी उपभोक्ता को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करेगी। ऐसे मामलों में उस घर की LPG सप्लाई जारी रहेगी और उसे बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि, कंपनी को यह स्पष्ट रिकॉर्ड रखना होगा कि PNG कनेक्शन क्यों नहीं दिया जा सका। साथ ही, जैसे ही भविष्य में उस इलाके में PNG कनेक्शन देना संभव हो जाएगा, यह NOC वापस लिया जा सकता है और फिर उपभोक्ता को PNG पर स्विच करना पड़ सकता है। यानी जहां PNG लगाना संभव नहीं है, वहां लोगों को LPG से राहत मिलती रहेगी। PNG के फायदे सरकार PNG को बढ़ावा इसलिए दे रही है क्योंकि यह LPG के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक है। PNG में गैस सीधे पाइप के जरिए घर तक पहुंचती है, जिससे सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा, इसमें लीकेज का खतरा भी कम होता है और यह लगातार उपलब्ध रहती है। साथ ही, PNG का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है।  

दूसरे दिन बाजार में जोश! सेंसेक्स 800 अंक बढ़ा, निफ्टी 400 अंक चढ़ा

मुंबई  शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी के साथ शुरुआत हुई है. सेंसेक्स 800 अंक चढ़कर 74,898 पर कारोबार कर रहा है और निफ्टी 400 अंक उछलकर 22,912 पर ट्रेड करते हुए नजर आ रहा है. निफ्टी टॉप गेनर्स में श्रीराम फाइनेंस, अडाणी पोर्ट्स, JSW Steel के शेयर्स शामिल हैं. वहीं, निफ्टी टॉप लूजर्स में टेक महिंद्रा, इंफोसिस के स्टॉक्स हैं. बाजार खुलने से पहले GIFT Nifty करीब 23,059 के स्तर पर ट्रेड करते हुए नजर आया और इसमें लगभग 130 अंकों की तेजी है, जिससे संकेत मिल रहा है कि घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज मजबूत और पॉजिटिव रह सकती है।  Nifty Midcap 100 इंडेक्स में करीब 2% की तेजी आई है और यह लगातार दूसरे दिन भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है. निफ्टी Nifty Smallcap 100 में भी 2% की बढ़त देखने को मिल रही है. India VIX में गिरावट देखने को मिली है, यह 0.31% कम होकर 24.66 पर आ गया. इसमें कमी का मतलब है कि बाजार में उतार-चढ़ाव की चिंता घट रही है. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जो शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव संकेत माना जाता है. शेयर बाजार में बढ़त के पीछे की वजह क्या है, ये बताते हैं।  किस वजह से आई शेयर बाजार में तेजी? ग्लोबल बाजार से मजबूत संकेत मिले हैं. एशियाई शेयर बाजारों में करीब 1.4% की तेजी देखी गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईरान और इजराइल के बीच युद्धविराम की उम्मीद बढ़ने से सप्लाई में रुकावट कम होने की संभावना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के साथ एक महीने के सीजफायर की कोशिश कर रहा है और 15 प्वाइंट का शांति प्रस्ताव भी दिया गया है. वहीं यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।  बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप मंगलवार के मुकाबले करीब ₹7.25 लाख करोड़ बढ़कर ₹429.49 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले सेशन में ₹422.24 लाख करोड़ था।  एक्सपर्ट की राय मनींकट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, Livelong Wealth के फाउंडर और रिसर्च एनालिस्ट Hariprasad K के मुताबिक,  क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं, जो इस बात का संकेत है कि बाजार को कूटनीतिक समाधान की उम्मीद है. यह गिरावट वैश्विक स्तर पर बढ़ते भरोसे को दिखाती है. वहीं ग्लोबल संकेत भी मजबूत हैं एशियाई बाजार जैसे Kospi, Nikkei 225, SSE Composite और Hang Seng में तेजी है, जबकि वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी पॉजिटिव शुरुआत का इशारा दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप के अमेरिका-ईरान बातचीत के संकेतों से निवेशकों को राहत मिली है और इसी वजह से ग्लोबल बाजारों में मजबूती देखने को मिल रही है। 

11 मिनट में फुल चार्ज, चीनी कंपनी ने पेश की गजब की बैटरी, बैटरी संकट का समाधान

 नई दिल्ली इलेक्ट्रिक कार्स को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जा रहा है. हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में इन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बैटरी को चार्ज होने में लगने वाला वक्त और ईवी की रेंज है. जहां पेट्रोल या डीजल कार में कहीं भी फ्यूल डलवाया जा सकता है. वहीं ईवी के चार्जिंग स्टेशन कम है।  इसके अलावा ईवी को चार्ज होने में भी वक्त लगता है. इसका समाधान चीनी ऑटोमोबाइल कंपनी BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) ने खोज लिया है. बीएआईसी ने सोडियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में एक महत्वपूर्ण सफलता का ऐलान किया है. BAIC चीन का एक प्रमुख कार निर्माता है. कंपनी इलेक्ट्रिक और ICE दोनों तरह की कार्स बनाती है।  कंपनी के रिसर्च डिविजन के मुताबिक, एक प्रोटोटाइप सोडियम-आयन बैटरी विकसित की गई है, जिसकी एनर्जी डेंसिटी 170 Wh/kg है. ये बैटरी 4C फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसे फुल चार्ज होने में सिर्फ 11 मिनट का वक्त लगेगा. ये चार्जिंग टाइम टेस्टिंग कंडीशन का है. रियल वर्ल्ड में चार्जिंग का वक्त ज्यादा हो सकता है. इस सिस्टम को अलग-अलग टेम्परेचर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।  लो टेम्परेचर में भी करेगी काम इसे -40 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. कंपनी का दावा है कि -20 डिग्री सेल्सियस पर भी बैटरी रिटेंशन लगभग 92 परसेंट है. ये दिखाता है कि कम तापमान में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी ने बताया है कि बैटरी ने इंटरनल वैलिडेशन टेस्टिंग को पास कर लिया है।  थर्मल टेस्टिंग में 200 डिग्री सेल्सियस तक के टेम्परेचर पर भी बैटरी स्टेबल थी. ये सोडियम-आयन बैटरी कंपनी की अरोरा बैटरी प्रोग्राम का हिस्सा है. इसमें लिथियम आयन बैटरी, सॉलिड स्टेट और सोडियम आयन बैटरी शामिल हैं. कंपनी ने प्रिजमैटिक सोडियम-आयन सेल्स के लिए मास प्रोडक्शन प्रॉसेस वैलिडेशन भी पूरा कर लिया है.  पूरे चीन में सोडियम आयन बैटरियों को एडिशनल सॉल्यूशन के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर कम लागत और ठंडे मौसम वाले यूजेज के लिए. लिथियम-आयन फॉस्फेट बैटरियों की तुलना में, सोडियम-आयन बैटरियों में रॉ मैटेरियल आसानी से मिल जाता है. साथ ही इनकी कोल्ड-वेदर परफॉर्मेंस बेहतर होती है. हालांकि एनर्जी डेंसिटी के मामले में ये अभी पीछे हैं।  कई कंपनियां कर रही हैं काम बीएआईसी (BAIC) ने इस प्रोग्राम से जुड़े लगभग 20 पेटेंट फाइल किए हैं. ये पेटेंट्स मटेरियल, सेल डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस और टेस्टिंग से जुड़े हैं. कंपनी चार्जिंग स्ट्रैटेजी, इलेक्ट्रोकेमिकल मॉडलिंग और बैटरी डिग्रेडेशन पर भी काम कर रही है. दूसरी चीनी कंपनियां भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रही हैं।  फरवरी 2026 में चांगान ऑटोमोबाइल और सीएटीएल ने पहली मास-प्रोड्यूस्ड सोडियम-आयन इलेक्ट्रिक कार पेश की. इसमें 45 kWh की बैटरी और 400 किमी से ज्यादा की रेंज का दावा किया गया है. ये कार 2026 मिड तक बाजार में लॉन्च हो सकती है।  BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) की बात करें, तो कंपनी ने अभी तक अपनी सोडियम-आयन बैटरी के कमर्शियल लॉन्च की जानकारी नहीं दी है. फिलहाल ये टेक्नोलॉजी प्री-कमर्शियल स्टेज में है।