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स्मृति ईरानी का अखिलेश यादव पर जवाब: ‘गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं दम’

वाराणसी  लोकसभा में सपा सांसद अखिलेश यादव के बयान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि पुराने विषयों को लेकर सवाल उठाना आसान है. अगर इतना ही दम है तो अपने पैतृक क्षेत्र (कन्नौज) को छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं. लेकिन उनमें इतना दम नहीं. हमने तो कांग्रेस अध्यक्ष को उनके गढ़ (अमेठी) में हराया है. ईरानी ने उपरोक्त बातें वाराणसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।  स्मृति ईरानी का पलटवार  दरअसल, संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए स्मृति ईरानी पर 'सास-बहू' सीरियल को लेकर तंज कसा. इस पर पलटवार करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है, उन्हें उनकी याद आना अच्छा है. उन्होंने अखिलेश को सीरियल छोड़कर संसद के काम पर ध्यान देने और महिला सशक्तीकरण बिल का समर्थन करने की सलाह दी. ईरानी ने कहा कि उन्होंने अपनी पहचान मेहनत से बनाई है।  बकौल स्मृति ईरानी- 'मुझ जैसी कामकाजी महिला ने किसी और के गढ़ में जाकर परचम गाड़ा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को हराया है. अगर आप इतना ही दमखम रखते हैं तो पैतृक सीट छोड़कर गोरखपुर से लड़कर दिखाएं. कामकाजी महिला पर टिप्पणी करना आसान होता है, खासकर उनके लिए जिन्होंने कभी खुद कहीं नौकरी ना की हो. हम जैसे लोग टैक्स भरते हैं, इसलिए नहीं कि सदन में सास-बहू की बातें हो. संसद में जाकर अपने संसदीय कार्य पर ध्यान दें. हालांकि, इस बात की खुशी भी है कि उनका उत्तर प्रदेश में विपक्ष में रहना सुनिश्चित है. क्योंकि यूपी की राजनीति करने वालों को इतना पता है कि गांव-गांव और पात-पात घूमते-घूमते इतना वक्त बीत जाता है कि सीरियल देखने का टाइम एक गंभीर राजनेता के पास नहीं होता है।  इससे पहले पूर्व मंत्री ने 'एक्स' पर लिखा- 'सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया. अच्छा है, जिनको राजनीति धरोहर में मिली, वे उनको भी याद करते हैं जो अपने दम पर आसमान में सुराख करते हैं. कामकाजी औरत पर वे टिप्पणी करते हैं जिन्होंने जिंदगी में कभी कोई नौकरी नहीं की. सीरियल से हटाकर संसद पर ध्यान लगाएं, महिलाओं के संबल हेतु अहम बिल पास कराएं।  अखिलेश यादव का शायराना तंज इसके बाद सपा मुखिया ने एक बार फिर पलटवार किया. चार लाइन लिखकर उन्होंने स्मृति ईरानी और बीजेपी पर जनता से दूर होने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा- हर बात से अगर साजिश की बू आई न होती, यकीन करते लोग अगर बात जुमलाई न होती, दरअसल अगर अवाम से दोस्ती निभाई होती, तो इतनी जल्दी विदाई की घड़ी आई न होती. फिलहाल, दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग अब और तेज हो गई है. यूपी चुनाव से पहले इस बयानबाजी ने सूबे का सियासी पारा हाई कर दिया है. अब देखना होगा कि ईरानी के इस बयान के बाद अखिलेश की ओर से क्या रिएक्शन आएगा। 

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का वादा अधूरा, मायावती ने सपा को भी घेरा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है. मायावती का कहना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस अब जो बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वो महज एक दिखावा है. उन्होंने कांग्रेस को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी करार देते हुए साफ कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने कभी SC, ST और OBC के आरक्षण का कोटा पूरा करने की कोशिश नहीं की. मायावती का यह वार सीधे तौर पर कांग्रेस के उस दावे पर है जिसमें वो अब इन वर्गों के हक की बात कर रही है।  मायावती ने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा इन वर्गों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब केंद्र की सरकार चला रही थी, तब उसने कभी भी पिछड़ों या दलितों के कोटे को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज वही पार्टी महिला आरक्षण के बहाने वोट बैंक की राजनीति कर रही है।  यही नहीं, मायावती ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मंडल कमीशन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिला, उसे भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. यह बीएसपी की मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा था कि उस समय की वी.पी. सिंह सरकार ने इसे आखिरकार लागू किया. मायावती ने साफ संदेश दिया कि जो काम कांग्रेस दशकों में नहीं कर पाई, उसे BSP ने लड़कर करवाया।  जब सरकार में होती है सपा, तो भूल जाती है पिछड़ों का हक मायावती के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं थी, उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी जमकर घेरा. उन्होंने यूपी का एक पुराना किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि 1994 में जब पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का फायदा देने की रिपोर्ट आई थी, तो उस वक्त की सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. लेकिन जब 1995 में बीएसपी की सरकार बनी, तो इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया गया. मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि सपा जब सत्ता से बाहर होती है, तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन सरकार में आते ही इनका रवैया पूरी तरह बदल जाता है।  मायावती ने जनता को सावधान करते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रंग बदलती हैं. सत्ता में रहते हुए इनका रवैया जातिवादी और तिरस्कार से भरा होता है, लेकिन चुनाव आते ही ये लोग छलावा करने लगते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि इन दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा बचकर रहना चाहिए, क्योंकि ये कभी भी दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का भला नहीं चाहतीं।  महिला आरक्षण को लेकर चल रही देरी पर भी मायावती ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करना चाहती है, तो उसे जल्दी करना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी बीजेपी की तरह ही कदम उठाती. यानी घुमा-फिराकर बात वही है कि बड़ी पार्टियों के लिए इन वर्गों का कल्याण कभी प्राथमिकता नहीं रहा।  आखिर में मायावती ने एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जो कुछ भी मिल रहा है उसे स्वीकार करें, लेकिन असली मजबूती तभी आएगी जब यह समाज खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा. मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अपने समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। 

कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर बढ़ा कास्ट प्रेशर, दलित- ब्राह्मणों के बाद सिंधी समाज ने भी किया दावेदारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी में जातीय समीकरणों को लेकर दबाव(कास्ट प्रेशर) लगातार बढ़ रहा है। जहां पहले दलित और फिर विंध्य के ब्राह्मणों की ओर से दावेदारी पेश की गई थी, वहीं अब इस रेस में सिंधी समाज की भी एंट्री हो गई है। सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठी रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से राज्यसभा प्रतिनिधि भेजने की मांग उठाई है। ठारवानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संबोधित पत्र में लिखा है कि वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा है। सिंधी समाज देशभर में कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था और योगदान के लिए जाना जाता है। आगामी राज्यसभा चयन में सिंधी समाज से एक योग्य और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में उनके नाम पर विचार किया जाए। इस पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भेजी गई है। त्रिकोणीय हुआ जातीय समीकरण दलित वर्ग: दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दलित वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी इसका समर्थन कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज: विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। उनका तर्क है कि विंध्य में ब्राह्मण समाज का बड़ा प्रभाव है, जिसे राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। सिंधी समाज: अब दिलीप ठारवानी की दावेदारी ने इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है। ठारवानी का मानना है कि यदि उन्हें अवसर मिलता है, तो वे संसद में पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा से उठाएंगे। प्रदेश भर में सिंधी समाज कांग्रेस से जुडे़गा। सीट बचाने के लिए कांग्रेस की घेराबंदी मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून में रिक्त हो रही हैं। विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। इस पर प्रदेश के नेता को ही भेजने की मांग उठ रही है। विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने प्रदेश से किसी भी जमीनी नेता को भेजने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी नेताओं का मन टटोलने में लगे हैं। उन्होंने वरिष्ठ विधायक अजय सिंह से भी भेंट की। इसे राज्यसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के पास एक सदस्य भेजने के लिए चार विधायक ही अतिरिक्त हैं। उधर, भाजपा भी तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने पिछले दो बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा था। वे तीसरी बार जाने के इच्छुक नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व को अपनी भावना से अवगत भी करा चुके हैं। साथ ही यह भी कह चुके हैं कि यदि किसी एससी वर्ग के व्यक्ति को भेजा जाता है तो उन्हें प्रसन्नता होगी। दरअसल, वे एक बार फिर दलित एजेंडे पर काम कर रहे हैं और बड़ा सम्मेलन भोपाल में कर चुके हैं। प्रदेश में एससी वर्ग के मतदाता कई सीटों पर प्रभावी भूमिका में हैं। उधर, ओबीसी समीकरण के चलते पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और महिला प्रतिनिधित्व के हिसाब से मीनाक्षी नटराजन के नाम चर्चा में हैं। उधर, डा.सिंह ने यह मांग रख दी कि प्रदेश के किसी जमीनी नेता को राज्यसभा भेजा जाए। अन्य नेता भी इसके पक्ष में हैं। इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, अजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच दो दिन पहले हुई बैठक को चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा गया। दरअसल, यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव है। यदि आवश्यक संख्या बल से अधिक होने के बाद भी पार्टी अपना सदस्य नहीं बनवा पाती है तो कार्यकर्ताओं में जोश भरने के प्रयास प्रभावित होंगे। इसका असर अगले साल होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस अभी से घर को सुरक्षित करने में जुट गई है। उधर, जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि उनके पास प्रदेश अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी है और उसके लिए पूरा समय देना आवश्यक है। पार्टी जब प्रदेश इकाई से परामर्श करेगी तो कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत कराया जाएगा।  

तमिलनाडु में BJP का चुनावी वादा: बिना ब्याज 50 लाख का लोन और हर साल 3 सिलेंडर फ्री

चेन्नई  तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने घोषणापत्र जारी कर दिया है। इसमें पार्टी ने महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता, मुफ्त गैस सिलेंडर और किसान सम्मान निधि समेत कई वादे किए हैं। खास बात है कि भाजपा लंबे समय से दक्षिण भारत में विस्तार की कोशिश में है और AIADMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, 'घोषणापत्र की मुख्य बातें यह हैं कि AIADMK के नेतृत्व में सत्ता में आने पर हम घर की सभी महिला मुखियाओं को हर महीने 2,000 रुपये की सहायता देंगे और हर परिवार को एक बार में 10,000 रुपये की राशि दी जाएगी। हम हर साल मुफ्त एलपीजी सिलेंडर भी देंगे।' तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान किया जाएगा। CCTV लगाए जाएंगे उन्होंने कहा, ‘अपराधों को रोकने के लिए हम जीरो FIR रिपोर्टिंग शुरू करेंगे। हम गवाहों की सुरक्षा का इंतजाम करेंगे और यौन अपराधों समेत गंभीर अपराधों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाएंगे। बसों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ताकि कोई भी कोना निगरानी से बाहर न रहे। हम निर्भया फंड का सही इस्तेमाल करेंगे।’ 50 लाख रुपये का लोन बगैर ब्याज के नड्डा ने कहा, ‘महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्योगों (MSMEs) को 50 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज दिया जाएगा और विनिर्माण इकाइयों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपनी खरीदारी का 20% हिस्सा इन समितियों से लें। हम पात्र महिलाओं को ई-स्कूटर खरीदने के लिए 25,000 रुपये देंगे।’ किसानों के लिए ऐलान केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'किसानों के लिए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाले 6,000 रुपये के साथ हम 3,000 रुपये अलग से जोड़कर देंगे, जिससे हर किसान को साल में कुल 9,000 रुपये मिलेंगे।' PM मोदी के द्रमुक पर आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में द्रमुक सरकार पर 'भ्रष्टाचार को व्यवस्था का हिस्सा बनाने' का आरोप लगाया। 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' कार्यक्रम के तहत पीएम मोदी ने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से बात की थी। उन्होंने कहा था, 'तमिलनाडु में द्रमुक सरकार ने भ्रष्टाचार को व्यवस्था का अभिन्न अंग बना दिया है। हर विभाग अनियमितताओं में लिप्त है। कई मंत्री मुकदमों का सामना कर रहे हैं। भ्रष्टाचार, कमीशन और रिश्वतखोरी द्रमुक सरकार की पहचान बन गए हैं।' प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब द्रमुक के केंद्र सरकार में शामिल होने के बावजूद तमिलनाडु में कोई नई परियोजना नहीं आती थी और चाहे कितनी भी समस्याएं हों, उनका कोई समाधान नहीं किया जाता था। पीएम मोदी ने कहा था कि भाजपा कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत के कारण ही तमिलनाडु के लोगों के बीच अब एक नया माहौल बना है।

एमपी बीजेपी की महत्वपूर्ण बैठक, कैबिनेट विस्तार और निगम-मंडल पर होगी चर्चा; जानें कौन होंगे शामिल

भोपाल आज यानी 14 अप्रैल को एमपी बीजेपी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। भाजपा कोर कमेटी की यह बैठक भोपाल में आयोजित होने जा रही है। बैठक में कैबिनेट विस्तार और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर अहम चर्चा हो सकती है। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित प्रदेश के 16 दिग्गज नेता शामिल होंगे। इसी के साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल भी मौजूद रहेंगे। बैठक में वर्तमान मुद्दों और आगे की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व की बड़ी बैठक आज मंगलवार को एमपी बीजेपी की बड़ी बैठक है। यह बैठक भोपाल में स्थित सीएम निवास में आयोजित की जाएगी। शाम करीब सात बजे बैठक शुरु होगी। इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पार्टी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल शामिल होंगे। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह व ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रहेंगे। इन दो मुद्दों पर होगी खास चर्चा सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी प्रदेश कोर कमेटी की इस बैठक में राज्य के निगम-मंडलों में नियुक्तियों और मंत्रीमंडल के विस्तार जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है। इन दोनों मामलों को लेकर पार्टी में काफी समय से असमंजस बना हुआ है। उम्मीद है कि आज की बैठक में शीर्ष नेता इन मुद्दों पर स्थिति साफ कर सकते हैं। प्रदेश कोर समिति के ये 16 सदस्य होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और सांसद वीडी शर्मा, सांसद लता वानखेड़े, नरोत्तम मिश्रा व अरविंद भदौरिया शामिल होंगे।

हेमंत खंडेलवाल ने बैलगाड़ी पर चढ़कर ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ को दिया नया आयाम, घर-घर पहुंचने का दिया संदेश

बैतूल मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने‘गांव-बस्ती चलो अभियान'के तहत घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का दौरा कर जनसंपर्क अभियान को नई गति दी। दौरे के दौरान उनका अनोखा अंदाज उस समय देखने को मिला, जब वे ग्राम चिरापाटला में बैलगाड़ी पर सवार होकर पहुंचे। उनके इस सादगीपूर्ण और पारंपरिक रूप ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चिरापाटला सहित आसपास के कई गांवों का भ्रमण किया। बैलगाड़ी से गांव में प्रवेश करते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवनशैली और परंपराओं के प्रति अपने जुड़ाव का संदेश दिया। गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों, ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण का भरोसा दिलाया। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया और लोगों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों का भी दौरा किया। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि‘गांव-बस्ती चलो अभियान'का उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना, उसकी समस्याओं को समझना और समाधान के लिए पहल करना है। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियां गांव, गरीब, किसान और वंचित वर्ग के उत्थान पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की वास्तविक ताकत उसकी सादगी और जनता के बीच सक्रिय मौजूदगी में होती है। सीधे संवाद से ही समस्याओं की सही पहचान और समाधान संभव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान कुछ स्थानों पर छोटे नेताओं में बैलगाड़ी पर सवार प्रदेश अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ देखी गई, जिससे कुछ ग्रामीणों में नाराजगी भी सामने आई।

कांग्रेस ने एमपी के वरिष्ठ नेता को 6 वर्ष के लिए निष्कासित किया, पार्टी में खलबली

भोपाल  एमपी कांग्रेस में अंदरुनी कलह लगातार जारी है। इंदौर नगर निगम में कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कथित अपमान के मामले में कार्रवाई पर पार्टी का अंतर्विरोध सामने आ चुका है। इस बीच कांग्रेस ने एक वरिष्ठ नेता को निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सिंगरौली के भास्कर मिश्रा पर ये कार्रवाई की है। उन्हें कांग्रेस से 6 वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश जारी किया गया है। पार्टी की इस सख्ती से खलबली सी मची है। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा पर अनुशासनहीनता करने पर ये सख्ती दिखाई गई। इससे पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। कांग्रेस ने भास्कर मिश्रा से स्पष्टीकरण तलब किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया गया। सिंगरौली शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा को कांग्रेस की सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की है। भास्कर को इससे पहले पार्टी की ओर से पांच बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि अनुशासनहीनता पर भास्कर को इससे पहले पार्टी की ओर से पांच बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने तय समय सीमा के भीतर इसका कोई जवाब नहीं दिया। जीतू पटवारी से मांगा जवाब इधर इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कथित अपमान का मामला राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है। देशभर में चर्चा के बीच कांग्रेस की ओर से सख्त कार्रवाई न होने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के रुख को बेहद आपत्तिजनक बताया। रविवार को चर्चा में भार्गव ने कहा कि दोनों पार्षदों ने राष्ट्रगीत के बाद मीडिया में बयान देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। ऐसे में अनुशासन समिति की जांच की बात किस आधार पर हो रही है, यह कांग्रेस ही स्पष्ट करे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस कार्यालय में भी वंदे मातरम् गाया जाता है, तो जो लोग नहीं गाते, उनके खिलाफ पार्टी क्या रुख अपनाती है, इस पर पटवारी को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। महापौर ने कहा कि शनिवार को पत्रकार वार्ता में जीतू पटवारी ने चुनौती देते हुए कहा था कि कोई ईमानदार है तो हाथ उठाए, हम उसका भ्रष्टाचार सिद्ध करेंगे। इस पर भार्गव ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप है तो प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं। ईमानदारी का प्रश्न उठाकर सिद्ध करने की परिपाटी कब से शुरू हुई? उन्होंने कहा कि जिन पर जनता पहले ही निर्णय दे चुकी है, उन्हें ऐसे आरोप शोभा नहीं देते। एक दिन का सदन बुलाने की मांग पर महापौर ने कहा कि परिषद जल्द ही सदन बुलाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत का अपमान करने वाले पार्षदों की पार्षदी समाप्त करने का प्रस्ताव भी लाया जाएगा।

राहुल गांधी को कांग्रेस से हटाने का माहौल, महाराष्ट्र CM का बड़ा बयान

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस में उन्हें हटाने का माहौल बन रहा है, क्योंकि वह पार्टी को चुनाव में जीत नहीं दिला पा रहे हैं। फडणवीस ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि गांधी केवल अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं और अपने नेतृत्व को लगातार मिल रही हार से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। फडणवीस ने दावा किया, 'कांग्रेस में राहुल गांधी को हटाने का माहौल बन रहा है, क्योंकि वह पार्टी के लिए चुनावी जीत सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं।' उन्होंने कहा कि गांधी ने अपनी पार्टी के भीतर जारी संघर्ष से ध्यान हटाने के लिए ऐसे बयान दिए हैं। राहुल गांधी का बयान राहुल ने आरोप लगाए थे कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उद्देश्य संविधान को खत्म करना है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत में सभी को समान माना जाए। उन्होंने मंडी हाउस से 14 अप्रैल को भीमराव आंबेडकर की जयंती से पहले यहां 'रन फॉर आंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टीट्यूशन' मैराथन शुरू होने से पहले एकत्रित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'आंबेडकर जी का मुख्य संदेश संविधान का था। संविधान के बिना जिसे हम भारत कहते हैं, वह नहीं होता। उन्होंने कहा था, 'आज जो लोग आरएसएस-भाजपा की सोच के हैं, वे संविधान को खत्म करना चाहते हैं। वे कुछ भी कहें, उनका असली उद्देश्य संविधान को मिटाना है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत में सभी को समान माना जाए।' उन्होंने कहा, 'वे (आरएसएस-भाजपा) चाहे जो करें, वे आंबेडकर जी की प्रतिमा के सामने सिर भी झुकाते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य संविधान को खत्म करना है। हमारा उद्देश्य संविधान की रक्षा करना और उसे मजबूत करना है।' PM मोदी से की थी बातचीत शनिवार को समाज सुधारक ज्योतिराव फुले की स्मृति में आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात हुई थी। यह बातचीत इसलिए खास है क्योंकि सार्वजनिक कार्यक्रमों में दोनों नेताओं को शिष्टाचार का आदान-प्रदान करने के अलावा शायद ही कभी एक-दूसरे से बात करते देखा जाता है। प्रधानमंत्री जब फुले की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी सहित कई गणमान्य व्यक्ति एक पंक्ति में खड़े थे। सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन करने के बाद पीएम, गांधी के पास रुके और उनसे बातचीत करने लगे। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि एक मिनट की इस बातचीत के दौरान उन्होंने किस बारे में बात की।

‘जिसे कोई नहीं जानता होगा वही बनेगा CM’, पप्पू यादव के बयान से बढ़ी चर्चा

पटना बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह सवाल बिहार की सियासत का सबसे अहम प्रश्न बन गया है। पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने जो दावा किया है उसके अनुसार डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी सीएम नहीं बन पाएंगे। बिहार का सीएम वही बनेगा जिसे कोई नहीं जानता हो। उन्हेंने कहा है कि जदयू को निशांत कुमार को सीएम बना देना चाहिए क्योंकि बिहार को एक विनम्र शासक की जरूरत है। पप्पू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार को अभी बिहार नहीं छोड़ना चाहिए। बेगूसराय में पत्रकारों से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में अनुकंपा पर ही सीएम बनना है। जिसे कोई नहीं जानता हो उसे ही बीजेपी मुख्यमंत्री बना देगी। जिसका भी नाम आ गया हो उसे भाजपा मौका नहीं देती है। कोई ऐसा व्यक्ति सीएम बनेगा जिसे कोई नहीं जानता होगा। बिहार में मुख्यमंत्री दिल्ली से बनाया जाएगा। पत्रकारों के सवाल के जवाब में यह भी कहा कि नीतीश कुमार को अभी बिहार नहीं छोड़ना चाहिए था। एनडीए को 25 से 30 फिर से नीतीश के नाम पर बहुमत जनता ने दिया। पप्पू यादव ने यह भी कहा कि बिहार में अनुकंपा पर सीएम बनाया जाएगा। किसी मजबूत आदमी को भाजपा सीएम नहीं बनाएगी। लेकिन, सीएम जनता दल यू से बनाया जाना चाहिए। नीतीश कुमार नहीं रहते हैं तो निशांत को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। बिहार को एक विनम्र व्यक्ति की जरूरत है। निशांत कुमार हिन्दू, मुलमान, जात पात नहीं करेंगे। वे पढ़े लिखे, विनम्र और सरल व समझदार व्यक्ति हैं। सीएम के रूप में वह बिहार को बेहतर नेतृत्व देंगे। कहा कि बीजेपी से मुख्यमंत्री बनते हैं तो दल्ली के आदेश पर बिहार में किसी को सीएम की कुर्सी पर चढ़ा दिया जाएगा। पप्पू यादव पहले भी निशांत कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत कर चुके हैं। नई सरकार और सीएम पद से लिए बिहार में कई दिनों से हलचल है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 14 अप्रैल को सीएम पद से त्याग पत्र दे देंगे। उससे पहले कैबिनेट की बैठक होगी। 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है। नए सीएम के साथ कुछ मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। राज्य में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को जगह मिल सकती है। कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। राज्य में पहली बार बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। अभी तक सीएम चेहरा तय नहीं किया गया है।

रील से रियल पॉलिटिक्स तक: अंकिता परमार की एंट्री, पार्टी में ही विरोध

बड़ोदरा गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है और जैसे ही भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, वडोदरा की पोर जिला पंचायत सीट अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई. बीजेपी ने यहां से सोशल मीडिया स्टार अंकिता परमार को चुनावी मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया है. अंकिता के इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन चुनावी राजनीति की जमीन पर उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं दिख रही. दरअसल, अंकिता को टिकट मिलते ही पार्टी के अंदर पुरानी और जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है. भाजपा की ही पुरानी कार्यकर्ता नयना परमार ने अंकिता के खिलाफ खुलेआम बागी तेवर अपना लिए हैं. नयना ने न केवल विरोध जताया, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है. माना जा रहा है कि नयना का यह कदम अंकिता के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. इस बगावत की वजह से भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का बड़ा डर है. पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि वह अपनों को कैसे मनाए, क्योंकि अगर वोट बंटते हैं तो इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है. . राजनीति और सोशल मीडिया का मेल अंकिता परमार के लिए राजनीति कोई नई चीज नहीं है. 5 साल पहले वे तालुका पंचायत की सदस्य चुनी गई थीं और ढाई साल तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली. रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बी.कॉम करने वाली अंकिता फिलहाल प्रदेश युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी एक जबरदस्त पहचान बनाई है. यही वजह है कि उनकी रील के साथ-साथ उनकी कार्यशैली की भी चर्चा होती रही है. वे जानती हैं कि आज के दौर में जनता तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म कितना जरूरी है और इसी का फायदा उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है. अंकिता का जन्म वडोदरा में हुआ, लेकिन उनकी शादी पोर गांव में हुई. उनके ससुर 45 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे और उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए अंकिता ने इस फील्ड में कदम रखा. अंकिता का मानना है कि महिलाओं को 'इंडिपेंडेंट' यानी आत्मनिर्भर होना चाहिए. वे पीएम मोदी के 'फिट इंडिया' अभियान की बड़ी फैन हैं और खुद का जिम भी चलाती हैं, जहाँ वे रोज जमकर वर्कआउट करती हैं. वे अक्सर अपने वीडियो के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश देती हैं, जिससे उनकी एक अलग ही 'फैन फॉलोइंग' बन गई है. भाजपा को उम्मीद है कि अंकिता की लोकप्रियता का फायदा उन्हें चुनावों में मिलेगा. पार्टी को लगता है कि एक युवा चेहरा, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हो, युवाओं और महिलाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से पार्टी से जोड़ सकता है. अब देखना होगा कि सोशल मीडिया पर रील से दिल जीतने वाली अंकिता, क्या जनता का वोट भी जीत पाती हैं. क्या उनकी डिजिटल लोकप्रियता उन्हें जिला पंचायत की दहलीज तक पहुंचा पाएगी, यह आने वाले चुनाव के नतीजे तय करेंगे.