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योगी सरकार का बड़ा फैसला: राज्यभर में नई न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली कानूनी मंजूरी

योगी सरकार का बड़ा कदम: राज्यभर में नई न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली कानूनी मंजूरी प्रदेश सरकार के निर्णय पर राज्यपाल की मुहर, नोटिफिकेशन जारी नोएडा प्रकरण के बाद सरकार का हस्तक्षेप, तीन श्रेणियों में लागू हुई नई मजदूरी दरें उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अंतरिम राहत लागू गौतमबुद्धनगर-गाजियाबाद प्रथम श्रेणी में, अन्य जिलों का दो वर्गों में विभाजन 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी नई दरें, महंगाई भत्ते के साथ वेतन का निर्धारण श्रमिकों की मांग और उद्योगों की स्थिति के बीच संतुलन बनाने की पहल लखनऊ/गौतमबुद्धनगर  नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का निर्णय लिया। सरकार के निर्णय पर प्रदेश की राज्यपाल ने भी अपनी मुहर लगाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके बाद सरकार द्वारा निर्धारित नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं। अब यह पूरे प्रदेश में बाध्यकारी रूप से लागू होंगी।  उल्लेखनीय है कि घटनाक्रम के बाद श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध खत्म करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी, जिसने अपनी सिफारिश में के तीन श्रेणियां में वेतन की दरें निर्धारित की हैं। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में नई मजदूरी दरें लागू करते हुए प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है, जिससे क्षेत्रीय परिस्थितियों और जीवन-यापन की लागत के अनुसार संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया। प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को रखा गया, जहां जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है। यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिलों को शामिल किया गया है, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं तृतीय श्रेणी में शेष जिलों को रखा गया है, जहां मजदूरी दरें क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये तय की गई हैं। इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) शामिल है। दरअसल, वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिसके चलते यह अंतर बढ़ता गया। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल श्रमिकों को राहत देने के लिए है, बल्कि औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन चक्र को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई दरें लागू होने के बाद श्रमिकों के हितों में किसी प्रकार की कटौती या अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय उस समय लिया गया जब श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं। श्रमिकों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और किराए के दबाव के कारण जीवनयापन कठिन हो गया है, जबकि नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का हवाला दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार को सौंपी गई। इसमें अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग एवं श्रमायुक्त, उत्तर प्रदेश को क्रमशः सदस्य और सदस्य सचिव के रूप में नामित किया गया। समिति में कर्मकारों के पांच प्रतिनिधि और नियोक्ताओं के तीन प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे। समिति ने मौके पर जाकर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की और संतुलित समाधान का प्रस्ताव तैयार किया।

दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: योगी सरकार के विजन से डेयरी सेक्टर को मिली नई रफ्तार

दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: योगी सरकार के विजन से डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार 50 वर्ष पूरे होने पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन, 5,000 करोड़ के मिले निवेश प्रस्ताव महोत्सव में 10 हजार से अधिक पशुपालकों की रही भागीदारी, 139 लाभार्थियों के खाते में गई धनराशि प्रदेश सरकार की योजनाओं, तकनीक और निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती लखनऊ  लखनऊ में दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026’ न केवल उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि योगी आदित्यनाथ सरकार के उस व्यापक विजन का भी प्रदर्शन बना, जिसके केंद्र में डेयरी सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी बनाना है। दो दिवसीय इस आयोजन में हजारों पशुपालकों, उद्यमियों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी के बीच जहां 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, वहीं योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के प्रसार और ‘गौ से ग्राहक तक’ की समग्र व्यवस्था को सशक्त करने का स्पष्ट रोडमैप भी सामने आया। महोत्सव में प्रदेशभर से करीब 10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से देश-विदेश के लाखों गोपालकों और उद्यमियों को भी जोड़ा गया, जहां विशेषज्ञों ने योजनाओं, नवीन तकनीकों, स्वदेशी नस्ल के गो पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। 139 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनीतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कार्यक्रम में विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों एवं उद्यमियों को सम्मानित किया। साथ ही वर्ष 2024-25 के नन्द बाबा पुरस्कार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित 139 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित की गई। इस दौरान निजी क्षेत्र के उद्यमियों ने स्टॉल के माध्यम से दुग्ध उत्पादों एवं नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया, जबकि नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 से लाभान्वित पशुपालकों, उत्पादकों और निवेशकों की सफलता की कहानियों पर आधारित संग्रह पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है यूपी कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव पशुपालन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य पालन मुकेश कुमार मेश्राम ने अतिथियों एवं पुरस्कार विजेताओं का स्वागत करते हुए स्वदेशी नस्ल के गोपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताया और विभागीय योजनाओं के बहुआयामी लाभों से पशुपालकों के जीवन स्तर में आए बदलावों पर प्रकाश डाला। वहीं दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और इसे बनाए रखने के लिए राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य और स्थायी आय उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के माध्यम से ‘गौ से ग्राहक तक’ की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर गुणवत्तापरक उत्पादन और वैश्विक स्तर के दुग्ध उत्पाद सुनिश्चित किए जा रहे हैं। अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में उभरकर सामने आया है, जो न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर रहा है, बल्कि राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में लगभग 1.72 लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहा है। विभाग द्वारा अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनसे 60,000 से अधिक रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के तहत 2,000 करोड़ रुपये की 72 परियोजनाएं शुरू की गईं, जबकि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 59 नए निवेश प्रस्तावों से 13,000 अतिरिक्त रोजगार की संभावना है। वहीं नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 10,000 से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से वितरित की गई है और 4,000 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए करीब 1.5 लाख दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रगति दर्ज हुई है। लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत किए कार्यक्रम में सहकारिता विभाग एवं सीएसए विश्वविद्यालय द्वारा स्वदेशी उन्नत नस्लों के पालन के महत्व पर प्रस्तुति दी गई, जबकि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों और उद्यमियों ने डेयरी क्षेत्र में अपने अनुभव एवं नवाचार साझा किए। इस दौरान नन्द बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध नीति-2022 के लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत किए। वहीं मंत्री धर्मपाल सिंह ने दुग्ध स्वर्ण महोत्सव एवं डेयरी एक्सपो में पारस, ज्ञान, नमस्ते इंडिया, अमूल समेत कई प्रमुख निजी डेयरी कंपनियों के स्टॉल का अवलोकन किया, जहां आधुनिक उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। कुछ कंपनियों ने इस अवसर पर नए उत्पाद भी लॉन्च किए, जबकि विभिन्न मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों ने भी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से ज्यादा छापे

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, राज्यभर में 29 हजार से अधिक छापे योगी सरकार की सख्ती से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई सामान्य एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई सरकार की जनता से पैनिक बाइंग न करने की अपील 14 मार्च के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए कालाबाजारी पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। मुख्य सचिव स्तर से जारी निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रवर्तन कार्रवाई की गई, जिसके तहत 12 मार्च से अब तक 29,607 छापे और निरीक्षण किए गए। इस दौरान एलपीजी वितरण से जुड़े 39 मामलों समेत कुल 220 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 22 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर 261 के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। सरकार के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। राज्य के 12,888 पेट्रोल पंपों के माध्यम से लगातार उपभोक्ताओं को ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। 12 से 16 अप्रैल के बीच प्रतिदिन हजारों किलोलीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री दर्ज की गई, जबकि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 82,000 किलोलीटर पेट्रोल और 1.05 लाख किलोलीटर डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें। एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई गई है। प्रदेश के 4,107 गैस वितरकों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार रिफिल सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों जैसे होटल, ढाबा, उद्योग और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध आवंटन किया जा रहा है। योगी सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार को भी तेजी दी है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराए जा सकें। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद विभिन्न विभागों से 117 से अधिक अनुमतियां जारी की जा चुकी हैं। 14 मार्च 2026 के बाद से अब तक 51,548 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 16.09 लाख से अधिक हो गई है। सप्लाई व्यवस्था की निगरानी के लिए खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, वहीं जिलों में भी नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड में जाकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर आपूर्ति बाधित न हो।

यूपी की प्रशासनिक दक्षता को मिली मान्यता, मिशन कर्मयोगी में दूसरे स्थान पर रहा राज्य

प्रशासनिक दक्षता में यूपी को बड़ी उपलब्धि, मिशन कर्मयोगी में बड़े राज्यों में यूपी को दूसरा पुरस्कार केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों व यूटी के बीच असाधारण प्रदर्शन किया यूपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से तैयार हुआ कर्मयोगी कार्यबल नई दिल्ली/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश को सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच असाधारण प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के तहत ‘साधना सप्ताह’ के दौरान 5 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले प्रदेशों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में दूसरा पुरस्कार हासिल किया है। नई दिल्ली में एक प्रतिष्ठित समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के इस शानदार प्रदर्शन के लिए एम. देवराज, प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) उत्तर प्रदेश को सम्मानित किया। यह उपलब्धि सशक्त, कुशल और भविष्य के लिए तैयार उत्तर प्रदेश के निर्माण में मिशन कर्मयोगी की ठोस भूमिका का प्रमाण है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को भी दर्शाती है, जिसके तहत राज्य में नागरिक-केंद्रित, भविष्य के लिए तैयार और डिजिटली सशक्त ‘कर्मयोगी’ कार्यबल तैयार किया गया है। उत्तर प्रदेश को मिली इस सफलता के पैमाने भी ऐतिहासिक हैं। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 21.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को जोड़ा गया। इसके साथ ही राज्य में रिकॉर्ड 1.25 करोड़ कोर्स पूरे किए गए, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी योगी सरकार के खाते में जबरदस्त उपलब्धि दर्ज की गई। राज्य ने 10 लाख एआई दक्ष बैज और 16,000 कर्मयोगी उत्कर्ष बैज अर्जित किए, जो यूपी में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को दर्शाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने क्षमता निर्माण में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर फ्रंटलाइन कर्मचारियों (समूह सी एवं डी) तक,  शासन में हर स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की।

सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में नकल पर पूरी तरह लगेगा ब्रेक, 4 पालियों में होगी परीक्षा

सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में नकल पर पूरी तरह लगेगा ब्रेक, 4 पालियों में होगी परीक्षा 18 व 19 अप्रैल को 4 पालियों में होगी परीक्षा शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने 53 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा की CCTV कैमरों से लैस रहेंगे परीक्षा केंद्र आयोग की अपील- परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचे अभ्यर्थी लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार नकल विहीन एवं पारदर्शी परीक्षा कराने के अपने संकल्प को लेकर प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में 18 और 19 अप्रैल 2026 को चार पालियों में सम्पन्न होने वाली सहायक आचार्य भर्ती की परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली है।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार (पूर्व आईपीएस) ने प्रदेश के 6 प्रमुख जनपद आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर के 53 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान पाया गया कि सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी परीक्षा कक्षों और महत्वपूर्ण स्थानों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है, जिन्हें जिला कंट्रोल रूम और आयोग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है। आयोग स्तर से इनकी कनेक्टिविटी का परीक्षण भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है, जिससे हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। हर जिले में आयोग के एक-एक सदस्य को प्रेक्षक के रूप में तैनात किया गया है, जो मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इसमें गोरखपुर जिले में डा. कृष्ण चन्द्र वर्मा, प्रयागराज में डा. हरेन्द्र कुमार राय, वाराणसी में विमल कुमार विश्वकर्मा, आगरा में कीर्ति गौतम, मेरठ में प्रो. राधाकृष्ण एवं लखनऊ में योगेन्द्र नाथ सिंह प्रेक्षक नामित किया गया हैं।  साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करेंगी। केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। योगी सरकार के निर्देशों के तहत संदिग्ध और असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखी जाएगी। नकल कराने या परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन समेत किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से परीक्षा केंद्र पहुंचें और प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का पालन करें। साथ ही किसी भी अफवाह से बचते हुए केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.upessc.up.gov.in एवं 'X' हैण्डल @upesscprayagraj पर सूचनाओं के संबंध में पुष्टि कर लें। आयोग इस परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष तथा शुचितापूर्ण ढंग से कराने के लिए कृत संकल्पित है।

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों से हटे कब्जे, लैंड बैंक में वृद्धि

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों में हटे कब्जे और लैंड बैंक में निरंतर वृद्धि ग्राम सभा की जमीन से हटे ईदगाह, इमामबाड़ा, मस्जिद-मदरसा संभल  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान को तेज करते हुए संभल जिला प्रशासन ने दो गांवों में बड़ी कार्रवाई की। आरक्षित श्रेणी की ग्राम सभा भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनने दी गई। बिछौली में आदेश के बाद हटे निर्माण तहसील संभल के ग्राम विछोली में गाटा संख्या 1240 (खाद के गड्ढे हेतु आरक्षित) और गाटा संख्या 1242 (पशुचर भूमि) पर अवैध रूप से इमामबाड़ा और ईदगाह का निर्माण किया गया था। प्रकरण में विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने 31 जनवरी 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया था। आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर अपील न होने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर निर्माण हटवा दिया। बिछौली और मुबारकपुर बन्द में  1.1 हैक्टेयर जमीन खाली इसी क्रम में ग्राम मुबारकपुर बन्द में ग्राम सभा की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पर जांच कराई गई। गाटा संख्या 623 और 630 पर मस्जिद और मदरसे का निर्माण पाया गया। प्रशासन ने पहले संबंधित पक्षों को स्वयं निर्माण हटाने का अवसर दिया, लेकिन संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए मुतवल्ली नुसरत अली व अन्य लोगों ने प्रशासन से मदद मांगी। इसके बाद शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटवाया गया। ‘नियमों के तहत हुई कार्रवाई, अभियान रहेगा जारी’ जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने बताया कि पूरी कार्रवाई धारा 67,राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेश के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा, पशुचर, खेल मैदान, खाद के गड्ढे और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित पक्षों को पूरा अवसर दिया जाता है, इसके बाद ही कार्रवाई होती है। जिले में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और जहां भी अवैध कब्जा मिलेगा, उसे हटाया जाएगा। 3 महीने के टाइम बाउंड पीरियड में पूरी कार्रवाई और 30 दिन के अपील के समय को पूर्ण कर दिया जाता है।

गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ से प्रयागराज 6 घंटे में, PM मोदी इस दिन कर सकते हैं उद्घाटन

मेरठ  गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से मेरठ से प्रयागराज तक का सफर करने की सोच रहे हैं, तो मेरठवासियों का यह सपना इसी महीने पूरा होने होनी की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर आम जनता के लिए इसे सौंप दिया जाए, जिसको लेकर अब अंतिम तैयारी का दौर शुरू हो गया है. ऐसे में लोकल 18 टीम की ओर से भी मेरठ के बिजौली मार्ग पर गंगा एक्सप्रेस पर ग्राउंड रिपोर्ट का जायजा लिया।  गंगा एक्सप्रेसवे की खासियत की बात की जाए, तो मेरठ से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि वर्तमान समय में मेरठ से प्रयागराज जाने मे लगभग 12 घंटे का समय लग जाता है, जिस कारण उन्हें काफी दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है. ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत होने के बाद मात्र 6 से 7 घंटे में ही प्रयागराज तक की दूरी को तय कर सकते हैं।  इन जिलों से होकर गुजरेगा हाइवे आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से इस हाइवे को तैयार किया गया है, जहां आधुनिक स्पीड के माध्यम से सफर करते हुए यात्री प्रयागराज तक पहुंच पाएंगे. खास बात यह है कि सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से अन्य जनपदों की दूरी भी कम होगी. इस नेशनल हाइवे के माध्यम से लगभग 12 जिले जुड़ते हुए नजर आएंगे. इसमें मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेंगे।  औद्योगिक क्रांति को भी मिलेगी उड़ान उन्होंने बताया कि इस हाइवे के माध्यम से सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र को भी एक नई उड़ान मिलेगी. गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही औद्योगिक क्षेत्र भी डेवलप किया जाएगा, जिसको लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. इससे आने वाले समय में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही विभिन्न ऐसी इकाइयों को स्थापित किया जाए, जिसके माध्यम से युवाओं को भी रोजगार मिल सके।  6 से 7 घंटे में पहुचेंगे प्रयागराज बताते चलें कि मेरठवासी इसके शुभारंभ का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अभी उन्हें प्रयागराज जाने के लिए नौचंदी ट्रेन या फिर बस का ही सहारा लेना पड़ता है, जिसमें लगभग 12 घंटे से अधिक का समय लगता है. वहीं अगर अपनी गाड़ी से भी जाते हैं, तो उसमें भी काफी समय लग जाता है, लेकिन 594 किलोमीटर के इस गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से सफर को मात्र 6 से 7 घंटे में ही पूरा कर पाएंगे।  दरअसल मेरठवासी इस बात का स्वागत भी कर रहे हैं. मेरठ के रहने वाले हिमांशु कहते हैं कि उन्हें प्रयागराज जाने के लिए अभी अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वह अपनी गाड़ी से भी जब इसका शुभारंभ हो जाएगा, तो सफर करेगे. इसी तरीके से स्टूडेंट सुजीत ने बताया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में जाने के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है, लेकिन अब राहत मिलेगी। 

यूपी में कैबिनेट और बीजेपी संगठन में बदलाव की तैयारी, योगी की टीम में होंगे बड़े बदलाव

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े फेरबदल की तैयारी कर ली है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद यूपी के राजनीतिक  कॉरिडोर में योगी के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है।  बिहार के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनने के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी संगठन और मंत्रिमंडल विस्तार कीप्लानिंग कर ली गई है. गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महमंत्री धर्मपाल सिंह ने पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष के साथ बैठक की और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुलाकात की।   पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह की दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात को उत्तर प्रदेश में सियासी बदलावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. इस बार कैबिनेट विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है. ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ की पसंदीदा नेताओं की लॉटरी लग सकती है?  यूपी में होने जा रहा कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश में कैबिनिट विस्तार को लेकर काफी समय से कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते में यूपी बीजेपी की ओर से एक बड़ी एक्सरसाइज देखने को मिली है. पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह का बीजेपी के टॉप लीडरशिप के साथ गुरुवार को हुई बैठक में यूपी में बड़े सांगठनिक बदलाव के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार पर यह चर्चा हुई है।  यूपी में माना जा रहा है कि जल्द ही संगठन के नए स्वरूप के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार भी हो जाएगा. बीजेपी अपने प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं को निगम आयोग और बोर्ड में समायोजन करना चाहती है ताकि मंत्रिमंडल विस्तार के पहले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट किया जा सके. पिछले दिनों यूपी के कई नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में मनोनीत सदस्य बनाए गए हैं, जिनके शपथ ग्रहण भी करा दिए गए हैं।  मंत्रियों की खंगाली जा रही कुंडली यूपी में अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कयास तेज हो गए हैं. माना जा रहा है कि योगी मंत्रिमंडल में दर्जन भर फेर बदल हो सकता है. योगी सरकार के कई मंत्रियों के चार साल के कामकाज की सियासी कुंडली खंगाली गई है, जिसमें मंत्री के काम काज का भी आकलन किया गया है. ऐसे में कई पुराने मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जाए सकता है।  योगी की पसंद का रखा जाएगा ख्याल माना जा रहा है कि बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मंत्रिमंडल विस्तार में अपनी पसंद और नापसंद से अवगत करा दिया है. इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद के चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है. यूपी में अभी  6 मंत्रियों की जगह खाली है जबकि आधे दर्जन लोगों को बदला जा सकता है. इस तरह करीब एक दर्जन मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसके जरिए बीजेपी 2027 के सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकती है।  UP में एक महीने से हो रही एक्सरसाइज उत्तर प्रदेश में बीजेपी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगातर इतिहास रचना चाहती है. इसके लिए पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश बीजेपी में मंथन के लिए कई बैठकें हो चुकी हैं. संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुख्यमंत्री और दोनों मुख्यमंत्री की मुलाकात के अलावा विनोद तावड़े चार दिन पहले लखनऊ आकर सभी भाजपा के पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।  विनोद तावड़े की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हो चुकी है. यही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी कई बैठके हो चुकी है.दिल्ली में बैठे प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात को अब आखिरी दौर की चर्चा चल रही है. ऐसे में यूपी में यह बदलाव कभी भी हो सकते हैं।  क्षेत्रीय और जातीय बैलेंस बनाने का प्लान संगठन में रहे कुछ अन्य मजबूत चेहरों को भी योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. कुछ राज्यमंत्रियों का कद बढ़ाकर स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया जा सकता है. बोर्ड और निगमों में भी कई चेहरों का समायोजन हो सकता है. माना जा रहा है कि पश्चिम की भागीदारी बढ़ सकती है, क्योंकि पूरब से ही मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष हैं।  यूपी में ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी को देखते हुए, उन्हें सत्ता और संगठन में मौका दिया जा सकता है. ऐसे में ये हो सकता है कि कुछ ब्राह्मण चेहरों को भी सरकार स संगठन तक जगह दी जाए. 2027 के यूपी चुनाव को देखते हुए भी सरकार से संगठन तक बदलाव में सामाजिक समीकरणों और जातीय गणित साधने की रणनीति भी देखने को मिल सकती है।  सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली कैबिनेट में फिलहाल अभी 54 मंत्री हैं जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इस तरह योगी सरकार में 6 मंत्री के पद खाली है. 2027 के विधानसभा चुनाव के देखते हुए पार्टी योगी कैबिनेट विस्तार कर सियासी समीकरण को साधने की कवायद करना चाहती है।    योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी यूपी में अपने सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बिगड़े जातीय समीकरण को दुरुस्त करने के लिए बीजेपी ने संगठन की कमान ओबीसी की कुर्मी जाति से आने वाले केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को सौंपी. अब उन्हें यूपी में अपनी टीम गठित करनी है. ऐसे में 2027 के लिहाज से टीम बनानी है ताकि सत्ता की हैट्रिक लग गए। 

आज कूच बिहार व जलपाईगुड़ी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे सीएम योगी

आज फिर पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में उतरेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज कूच बिहार व जलपाईगुड़ी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे सीएम योगी बांकुरा में रोड शो के माध्यम से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएंगे मुख्यमंत्री सीएम योगी की सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ से बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह लखनऊ पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में शनिवार को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय मौजूदगी देखने को मिलेगी। पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल योगी का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे उत्तर से दक्षिण तक फैले तीन जिलों में लगातार कार्यक्रमों के जरिए चुनावी माहौल को धार देंगे। दो जनसभाओं को करेंगे संबोधित निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कूच बिहार जिले की माथाभांगा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा प्रत्याशी निशीथ प्रमाणिक के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। सीमावर्ती इस क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और मुख्यमंत्री योगी की सभा को इसी दिशा में एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर जलपाईगुड़ी जिले की धूपगुड़ी विधानसभा की ओर रुख करेगा, जहां वे दोपहर 1:20 बजे भाजपा उम्मीदवार नरेश चंद्र राय के पक्ष में जनसभा करेंगे। उत्तर बंगाल की इस बेल्ट में पार्टी ने पिछले चुनावों में जो आधार तैयार किया था, उसे और सुदृढ़ करने पर इस बार खास जोर है। बांकुरा में करेंगे रोड शो दिन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री शाम 4:15 बजे बांकुरा पहुंचेंगे, जहां भाजपा प्रत्याशी नीलाद्री शेखर दाना के समर्थन में उनका रोड शो प्रस्तावित है। बांकुरा, जो कि जंगलमहल क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, वहां रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। स्थानीय स्तर पर इसकी व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी भीड़ जुटने के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की सभाओं में हाल के दिनों में उमड़ रही भीड़ ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है।  योगी की सभाओं में उमड़ रही भीड़ से बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है। सभास्थलों पर हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोगों में मुख्यमंत्री की एक झलक पाने की जबरदस्त उत्सुकता दिखाई दे रही है। कई जगहों पर भीड़ इतनी अधिक हो रही है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही। सभा शुरू होने से काफी पहले ही लोग पहुंचकर अपनी जगह सुनिश्चित कर रहे हैं और अंत तक डटे रहते हैं। यह नजारा न केवल स्थानीय स्तर पर भाजपा के बढ़ते जनाधार की ओर इशारा करता है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा दे रहा है।

योगी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी तेज, अप्रैल में फैसला

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही भाजपा संगठन को दुरुस्त करने की उलटी गिनती शुरु हो गई है। यह सब अप्रैल महीने में ही होगा। बीते पखवारे लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा के प्रदेश और शीर्ष नेतृत्व के बीच गहन मंथन के बाद अब बदलाव और विस्तार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुहर लगनी है। भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और भारत सरकार में मंत्री पंकज चौधरी की शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात प्रस्तावित है। उनकी हरी झंडी के बाद लखनऊ में तैयारी प्रारंभ होगी। रविवार या सोमवार को मंत्रिमंडल विस्तार होने की पूरी संभावना है। इसके बाद संगठन के नये पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी जाएगी। दिल्ली में गुरुवार को समीकरणों को फिर मथा गया। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी व प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ बैठक कर सभी पहलुओं को समझा। इससे पहले इन सभी ने भाजपा के थिंक टैंक माने जाने वाले अमित शाह के साथ मंत्रिमंडल और संगठन विस्तार पर मंथन किया। भारतीय जनता पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में संगठन और सरकार के सियासी समीकरण को दुरुस्त कर लेना चाहती है। अब भाजपा उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। जिसके तहत योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल और प्रदेश संगठन में भी फेरबदल होगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भेंट के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा उत्तर प्रदेश संगठन में बदलाव हो जाएगा। भाजपा प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं को निगम आयोग और बोर्ड में समायोजन करना चाहती है, इससे पहले सभासदों और नगर पंचायत सदस्यों को भी मनोनीत किया गया था। संगठन से ज्यादातर नेताओं की विदाई तय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश को लेकर संगठन महामंत्री बीएम संतोष, भाजपा यूपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह और यूपी के प्रभारी राष्ट्रीय संगठन मंत्री विनोद तावड़े के साथ बैठक की। इसके बाद यूपी बीजेपी संगठन की नई टीम फाइनल कर दी गई। महामंत्री और उपाध्यक्ष पदों पर जमे ज्यादातर नेताओं की विदाई तय हो गई है। इसके साथ युवा मोर्चा का नया अध्यक्ष और प्रवक्ताओं की सूची पर भी विचार किया गया। ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर क्षेत्रीय अध्यक्षों व प्रदेश पदाधिकारियों का नाम तय होने के साथ ही वहीं निगम, आयोग व बोर्ड में समायोजन करना है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर है। सबसे ज्यादा बदलाव स्वतंत्र प्रभार के मंत्रियों में होने की संभावनाएं हैं। तीन से चार चेहरों को हटाकर संगठन में लाने पर मंथन किया गया है। पिछले दो माह की तस्वीर देखें कि लखनऊ में आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक के साथ बैठक कर चुके हैं। अप्रैल में ही सभी कसरतों को किया जाएगा पूरा इसके बाद संघ और भाजपा के बड़े पदाधिकारियों की बैठक सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास पर हुई। अब राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने दो दिन लखनऊ में रुककर प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री संगठन से मिलकर सभी बिंदुओं पर चर्चा की। दोनों उप मुख्यमंत्रियों से अलग-अलग मिले थे। इसके बाद तत्काल बाद दिल्ली में फिर बैठक से साफ है कि पार्टी अप्रैल में ही सभी कसरतों को पूरा कर लेगी। मंत्रिमंडल में होगा बड़ा बदलाव माना जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में 12-14 बदलाव होंगे। संगठन और शीर्ष नेतृत्व ने मंत्रियों के चार वर्ष के कार्य की समीक्षा करने के साथ क्षेत्र में उनके कामों का खाका तैयार किया है। मंत्री के काम काज के आकलन के बाद नॉन या लेस परफॉर्मर मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।