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Magh Mela 2026: कब से शुरू होगा माघ मेला, मौनी अमावस्या और पहले स्नान की पूरी डिटेल

प्रयागराज संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का सबसे बड़ा संगम माघ मेला अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है. साल 2026 में भी लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए एकत्रित होंगे. माघ मेले का पहला पवित्र स्नान पौष पूर्णिमा के दिन होता है. यदि आप भी इस पावन अवसर पर पुण्य की डुबकी लगाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. इस लेख में जानें कि साल 2026 में माघ मेले का पहला स्नान कब है, मौनी अमावस्या की सही तिथि क्या है और इन स्नान पर्वों का धार्मिक महत्व क्या है. कब शुरू हो रहा है माघ मेला 2026? साल 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ होगी. इसी दिन से श्रद्धालु और कल्पवासी संगम तट पर अपने एक महीने के कठिन व्रत और साधना (कल्पवास) का आरंभ करते हैं. माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां     3 जनवरी 2026 पौष पूर्णिमा     15 जनवरी 2026 मकर संक्रांति     18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या     23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी     1 फरवरी 2026 माघी पूर्णिमा     15 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि मौनी अमावस्या 2026: क्यों है यह सबसे खास? माघ मेले में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. इसे अमावस्याओं की अमावस्या कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संगम का जल अमृत के समान हो जाता है. श्रद्धालु इस दिन मौन व्रत रखकर स्नान करते हैं, जिससे आत्मिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है. माना जाता है मौनी अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. माघ स्नान का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में माघ के महीने को बेहद पवित्र माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, माघ मेले के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर सभी देवी-देवताओं का वास होता है. संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. माघ मेले में एक महीने तक संयमित जीवन जीना (कल्पवास) मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है. मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर स्नान करने से कुंडली के कई दोष समाप्त हो जाते हैं.

UPPCL का ऐलान: जनवरी में यूपी के बिजली बिल पर 2.33% की राहत, यूपी वालों के लिए खुशखबरी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में नए साल पर बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा तोहफा दिया गया है. बिजली विभाग ने साल 2026 के जनवरी महीने में बिजली के बिल पर 2.33 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है. ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं का नए साल पर बिजली का बिल कम रहेगा, जिससे उन्हें राहत मिलेगी.  दरअसल उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी यूपीपीसीएल ने ईंधन अधिभार शुल्क को लेकर आदेश जारी किया है. जिसके तहत जनवरी महीने में बिजली के बिल में 2.33% छूट रहेगी और एक महीने के लिए बिजली की दरें कम हो जाएंगी. इससे करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं का नए साल के पहले महीने का बिल कम आएगा.  जनवरी महीने में कम आएगा बिजली का बिल उत्तर प्रदेश में यूपीपीसीएल प्रत्येक महीने विद्युत का फ्यूल सरचार्ज निर्धारित किया जाता है. आदेश के तहत अक्टूबर महीने के ईंधन अधिभार का समायोजन जनवरी 2026 में किया जाएगा. जिसका लाभ बिजली के सभी तरह के उपभोक्ताओं को मिलेगा और प्रदेश के उपभोक्ताओं को करीब 141 करोड़ रुपये का सीधा लाभ होगा.  इससे पहले सितंबर 2025 का ईंधन अधिभार दिसंबर में 5.56 प्रतिशत की दर से लिया गया था, जिससे उपभोक्ताओं को क़रीब 264 करोड़ रुपये का नुक़सान उठाना पड़ा था. यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के पहले से ही 33,122 करोड़ रुपये सरप्लस बिजली कंपनियों के पास हैं.  अवधेश वर्मा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में 18,592 करोड़ रुपये का सरप्लस जुड़ने की संभावना है. इससे बिजली उपभोक्ताओं को 51 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस बिजली कंपनियों पर बना हुआ है. उन्होंने कहा कि जब तक ये सरप्लस बिजली कंपनियों पर है उपभोक्ताओं से तब तक अधिभार शुक्ल न वसूला जाए. बल्कि जो समायोजन करना है वो सरप्लस से ही करना चाहिए. जब ये सलप्लस खत्म हो जाए इसके बाद ही उपभोक्ताओं से ईंधर अधिभार लिया जाए. 

स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार सुदृढ़ कर रही है सरकार : योगी

  खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन को अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम और जिले स्तर पर बड़ा स्टेडियम बनवाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ सरकार हर मंडल मुख्यालय पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाया जाएगा। सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विधायक खेल स्पर्धा – 2025 के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार सुदृढ़ कर रही है। गोरखपुर में बेलीपार के पास एक इंटरनेशनल स्टेडियम बनने जा रहा है। गोरखपुर के रीजनल स्टेडियम का भी 63 करोड़ रुपये की लागत से नवोद्धार हो रहा है। वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में भी बेहतरीन स्टेडियम बन रहा है। मेरठ में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का सत्र प्रारंभ हो चुका है। इस यूनिवर्सिटी का विश्व स्तरीय निर्माण जारी है। अब सरकार की तैयारी हर मंडल मुख्यालय पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह जल्द ही गोरखपुर महानगर की सभी संस्थाओं के साथ बैठक करने वाले हैं। उस बैठक में संस्थाओं का आह्वान किया जाएगा कि वे एक-एक खेल को गोद लें। कुछ सहयोग वे करें और कुछ सरकार करेगी। यहां पर अच्छे कोच रखे जाएंगे। इससे बच्चों को खेल के लिए एक बेहतर प्लेटफार्म प्राप्त होगा अगली बार कामकाजी और रिटायर्ड लोगों के लिए भी होंगी प्रतियोगिताएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायक खेल स्पर्धा को लेकर अपनी आगामी योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि अगली बार बच्चों और छात्रों के स्तर के साथ ही वार्ड स्तर पर कामकाजी और रिटायर्ड लोगों के लिए भी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वार्ड स्तर, उसके बाद कुछ वार्डों को मिलाकर उपनगरीय और फिर नगर स्तर पर बड़ी प्रतियोगिता, बड़े समारोह का आयोजन कर विजेताओं को  सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बच्चों-छात्रों की प्रतियोगिताएं बालक व बालिका वर्ग में तीन स्तर, बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे ही गोरखपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए भी कहा गया है। कला के अलग अलग विधाओं गायन, वादन, नृत्य, नाट्य आदि की यह प्रतियोगिता जनवरी के प्रथम सप्ताह में होगी। 11 से 13 जनवरी को गोरखपुर महोत्सव के मुख्य आयोजन में विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। खेलेगा युवा तो खिलेगा देश सीएम योगी ने खेलकूद के महत्व को समझाते हुए कहा कि युवा खेलेगा तो देश खिलेगा। विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने का रास्ता यहीं से प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलताओं का मार्ग स्वस्थ शरीर से ही संभव हो सकता है। स्वस्थ शरीर खेलकूद और यौगिक क्रियाओं के माध्यम से ही प्राप्त होगा। 11 वर्ष में खेल के क्षेत्र में हुआ भारी परिवर्तन मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्ष के अंदर देश में खेल और खेलकूद की गतिविधियों को लेकर भारी परिवर्तन हुआ है। कबड्डी, हॉकी, बैडमिंटन, एथलेटिक्स के लिए पूरी दुनिया भारत की तरफ देखती है। ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ, वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा की एक नई मांग खड़ी हो चुकी है और इसी को ध्यान में रख करके सरकार स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत कर रही है। भीषण ठंड में खिलाड़ियों के उत्साह को सीएम से सराहा मुख्यमंत्री ने भीषण ठंड में भी खिलाड़ियों के उत्साह की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि इस विधायक खेल स्पर्धा में प्रत्यक्ष रूप से 1000 और अप्रत्यक्ष रूप से 10000 खिलाड़ियों ने सहभागिता की है। विधायक खेल स्पर्धा 2025 में एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबाल, जूडो और कुश्ती प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि यह खेलकूद ही है जो सम और विषम परिस्थितियों में मनोरंजन भी करता है और हमें शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक रूप से चुस्त-दुरुस्त बनाने में भी बड़ी भूमिका का निर्वहन करता है। सीएम के नेतृत्व में बिना भेदभाव खिलाड़ियों को मिल रहा अवसर : संजय निषाद इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हरेक क्षेत्र की भांति खेल के क्षेत्र में भी बिना भेदभाव सभी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने यूपी से माफिया खत्म करके, बंदूक-कट्टे के खेल की बजाय वास्तविक अर्थों में खेल का माहौल बना दिया है। डॉ. संजय निषाद ने कहा खेलों के उन्नयन और खिलाड़ियों के संवर्धन के लिए योगी सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सीएम के नेतृत्व में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के हुए ऐतिहासिक कार्य : गिरीश चंद्र यादव विधायक खेल स्पर्धा के पुरस्कार वितरण समारोह में प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि सीएम योगी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में प्रदेश में हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान और ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम बनाने का कार्य तीव्र गति से जारी है। खेल के क्षेत्र में पीएम मोदी के सपने को साकार कर रहे सीएम योगी : रविकिशन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांव-देहात तक के बच्चों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उत्कृष्ट संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। सीएम योगी, पीएम मोदी के सपने ‘खेलेगा इंडिया, आगे बढ़ेगा इंडिया’ को साकार कर रहे हैं। सीएम के नेतृत्व में गोरखपुर में इंटरनेशनल स्टेडियम बनने जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए डबल इंजन सरकार हर सुविधा उपलब्ध करा रही है। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ल, एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष दिनेश सिंह, कुश्ती संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सिंह आगू आदि उपस्थित रहे। कुश्ती और कबड्डी का फाइनल मुकाबला देखा सीएम ने, बढ़ाया खिलाड़ियों का … Read more

पंकज चौधरी का दांव, यूपी में BJP के सबसे कमजोर किले को मजबूत करने की कोशिश

  नई दिल्ली उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान संभालने के साथ पंकज चौधरी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है. मिशन-2027 का आगाज पश्चिम यूपी से किया. बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने मथुरा में बांके बिहारी के दर्शन कर ब्रज क्षेत्र से यूपी यात्रा शुरू की और दूसरे दिन गाजियाबाद होते हुए मेरठ पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. इस तरह पूरब से पश्चिम यूपी तक जोड़ने की कवायद में पंकज चौधरी जुट गए हैं. बीजेपी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भले ही यूपी के सामाजिक समीकरण को साधने की कवायद काफी हद तक कर ली है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों ही गोरखपुर से हैं. इस तरह सत्ता और संगठन पर पूर्वांचल का पूरी तरह से दबदबा दिख रहा है. यूपी की सत्ता और संगठन दोनों की कमान पूर्वांचल के गोरखपुर मंडल के नेताओं के पास है. ऐसे में कहीं न कहीं पश्चिम यूपी के लोगों लगता था कि प्रदेश अध्यक्ष पूरब से हैं तो पश्चिम को कोई खास तवज्जे नहीं देंगे. माना जाता है कि यही वजह है कि पंकज चौधरी ने ब्रज क्षेत्र से अपने यूपी दौरे का आगाज कर पश्चिम यूपी के सियासी समीकरण को साधने में जुट गए हैं. पश्चिम यूपी से पंकज चौधरी का मिशन-2027 पंकज चौधरी ने मथुरा में बाके बिहारी का दर्शन कर मिशन 2027 का आगाज शनिवार को किया. इसके बाद आगरा के प्रतापपुरा स्थित एक मैरिज होम में ब्रज क्षेत्र की पहली बैठक को संबोधित करते हुए पंकज चौधरी कहा कि 2027 में हमें 2017 का रिकॉर्ड तोड़ना है. इसके लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करना होगा. ब्रज क्षेत्र की ताकत को वह जानते हैं, आपका सहयोग आवश्यक है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है. इसलिए हमें यहां यहां अपने संगठन को मजबूत रखना है. इसके बाद रविवार को मेरठ पहुंचे, जहां उन्होंने पश्चिम यूपी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. इस दौरान पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं को समझाया कि विपक्ष में कार्य करने और सत्ता में रहकर काम करने का तरीका अलग है. हमें केंद्र की और प्रदेश सरकार की योजनाओं को हर जरूरतमंद तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है. मेरठ में हुआ पंकज चौधरी का भव्य स्वागत बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी रविवार को पहली बार मेरठ पहुंचे, जहां पर उनके स्वागत अलग ही अंदाज किया गया. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली के अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने क्रेन में 15 कुंतल वजनी विशाल माला से पंकज चौधरी को पहनाकर स्वागत किया. पंकज चौधरी कहा कि कार्यकर्ताओं का जोश बता रहा है कि 2027 में बीजेपी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी. संगठनात्मक शक्ति और कार्यकर्ताओं का जोश यह दर्शाता है कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. यही 2027 में भाजपा की ऐतिहासिक विजय का आधार बनेगा. पंकज चौधरी के स्वागत में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी जुटे थे, क्योंकि कुंवर बासित का अपना गृह क्षेत्र मेरठ है. उन्होंने पंकज चौधरी के स्वागत में पूरी ताकत झोंक दी है.   पंकज चौधरी ने पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को देखते हुए कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बिना किसी भेदभाव के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ कार्य किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पद पर योगी आदित्यनाथ के आने के बाद प्रदेश की पहचान बदली है. इस तरह से पंकज चौधरी ने पश्चिम यूपी को साधने में जुट गए हैं.  सत्ता और संगठन पर पूर्वांचल का दबदबा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी भी गोरखपुर से हैं. इस तरह सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही गोरखपुर क्षेत्र से हो गए हैं. पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी पूर्वांचल में आता है तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी प्रयागराज क्षेत्र से हैं. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भले ही लखनऊ से सांसद हैं, लेकिन उनका गृह जनपद मिर्जापुर भी पूर्वांचल के इलाके में आता है. यूपी के दूसरे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक लखनऊ कैंट सीट से विधायक हैं. इस तरह से यूपी में बीजेपी की टॉप लीडरशिप पूर्वांचल क्षेत्र से है. योगी सरकार से लेकर बीजेपी संगठन तक में लखनऊ से लेकर गोरखपुर क्षेत्र तक का दबदबा दिख रहा है. योगी सरकार के मोर्चे पर पहले से ही भारी पूर्वांचल का पलड़ा अब संगठन में भी भारी हो चुका है. यही वजह है कि पंकज चौधरी ने मिशन-2027 का आगाज ब्रज इलाके से किया और वेस्ट यूपी को सियासी संदेश देने की कवायद की. पश्चिम यूपी में बिगड़े समीकरण को करेंगे दुरुस्त यूपी में बीजेपी संगठन की बागडोर अभी तक मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी के हाथों में थी, जिसके सहारे पश्चिम यूपी को साधे रखा था, लेकिन अब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर पूर्वांचल से आने वाले पंकज चौधरी विराजमान हो गए हैं. ऐसे में बीजेपी के सामने क्षेत्रीय संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सत्ता में वापसी और सियासी उभार में पश्चिम यूपी का अहम रोल था. लोकसभा चुनाव-2014, 2019 और विधानसभा चुनाव 2017, 2022 में बीजेपी का पश्चिम यूपी में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है. इस तरह बीजेपी की सियासी ताकत में पश्चिमी यूपी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. 2024 के सियासी झटके से उभारने की कवायद 2024 में बीजेपी को पूर्वांचल के साथ पश्चिमी यूपी और ब्रज के क्षेत्र में सियासी तौर पर गहरा झटका लगा था. 2024 में बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और अमरोहा सीटें जीती हैं, जबकि नगीना, कैराना, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसी सीट हार गई है. बागपत और बिजनौर सीट बीजेपी की सहयोगी आरएलडी ने भी जीती थीं. पश्चिम यूपी की मुरादाबाद, संभल, रामपुर, आंवला जैसी सीटें इस बार हार गई है. इसके अलावा ब्रज क्षेत्र में फिरोजाबाद, बदायूं और लखीमपुर, सीतापुर, कन्नौज, इटावा जैसी सीटें हार गई है. इसके अलावा बुंदेलखंड की पांच में से चार सीटें बीजेपी हार गई और सिर्फ एक सीट ही जीत सकी थी, … Read more

दिल्ली, आगरा और एनसीआर से मजबूत कनेक्टिविटी ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

यमुना एक्सप्रेस-वे सिर्फ सड़क नहीं विकास कॉरिडोर के रूप में किया गया है विकसित लखनऊ, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में यमुना एक्सप्रेस-वे मात्र एक सड़क नहीं बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीति और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक है। जिस मार्ग को कभी केवल दिल्ली और आगरा को जोड़ने वाले कॉरिडोर के रूप में देखा जाता था, वही आज प्रदेश के औद्योगिक पुनर्जागरण की रीढ़ बन गया है। योगी सरकार ने यमुना एक्सप्रेस-वे को ट्रैफिक सुविधा तक सीमित न रखते हुए इसे निवेश, रोजगार और नियोजित शहरीकरण के सबसे बड़े इंजन के रूप में विकसित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसने प्रदेश की छवि बदली है। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक क्लस्टर, आधुनिक अर्बन सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स हब का विकास इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीति अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं बल्कि जमीन पर परिणाम देने वाली साबित हो रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र आज उस नए उत्तर प्रदेश की पहचान बन रहा है जहां निवेशकों को भरोसा, युवाओं को रोजगार और प्रदेश को आर्थिक मजबूती मिल रही है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस-वे के आस-आस विकसित हो रहीं परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बुलंदी पर पहुँचाने का काम कर रही है। ये प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी की ओर ले जाएंगी। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से सरकार ने नियोजित विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जो उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती के साथ स्थापित करेगा। 3000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह औद्योगिक विकास क्षेत्र दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। इसमें औद्योगिक, आवासीय, वाणिज्यिक और मिश्रित भूमि उपयोग की स्पष्ट योजना बनाई गई है, जिससे अनियोजित शहरीकरण पर नियंत्रण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा स्पष्ट रही है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे बल्कि उसका लाभ आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचे। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहा औद्योगिक क्लस्टर इसी सोच का परिणाम हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, बिजली जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। दिल्ली आगरा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से मजबूत कनेक्टिविटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग के लिए आदर्श बना दिया है। इसके साथ ही जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने जा रहा है। योगी सरकार ने एयरपोर्ट को केंद्र में रखकर औद्योगिक शहरों, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार केंद्रों की एक पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई है। यमुना एक्सप्रेस-वे की प्रमुख परियोजनाएं – जेवर के पास एचसीएल फॉक्सकॉन की ओसैट यूनिट – ओसैट यूनिट को लेकर भूमि पूजन जनवरी, 2026 में संभावित – एक हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर और ईएमसी पार्क – मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर पार्क का विकास – विवो, एलजी और हावेल्स जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा फैक्ट्रियों की स्थापना – वाईईआईडीए को मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब को मंजूरी – एयरपोर्ट एक्सप्रेस-वे और आरआरटीएस से मजबूत कनेक्टिविटी – दो सौ से अधिक नई फैक्ट्रियां निर्माणाधीन – सेमीकंडक्टर पार्क से बड़े स्तर पर रोजगार की संभावना – लॉजिस्टिक्स और हाई टेक हब के रूप में विकसित हो रहा है – जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक जोन से रियल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में नए अवसर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में सुधार, वृद्धों के लिए मिली नई राहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को मिली नई गति आठ माह में प्रदेश भर में जुड़े 9.83 लाख नए पेंशनर डिजिटल सत्यापन से पारदर्शी हुई व्यवस्था, लाभार्थियों की संख्या 67.50 लाख तक पहुंची आधार और डिजिटल मॉनिटरिंग से अपात्र नामों पर लगी रोक पात्र वृद्धजनों को प्राथमिकता, कोई भी लाभ से न रहे वंचित फैमिली आईडी से 60 वर्ष होते ही स्वतः मिलेगी पेंशन समाज कल्याण विभाग की योजनाओं से बढ़ा बुजुर्गों का भरोसा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना वर्ष 2025 में सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। समाज कल्याण विभाग की इस योजना के अंतर्गत बीते आठ माह में प्रदेश भर में 9.83 लाख नए पात्र वृद्धजनों को जोड़ा गया है, जिससे कुल पेंशन लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 67.50 लाख तक पहुंच गई है। डिजिटल सत्यापन से पारदर्शी हुई व्यवस्था समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप वृद्धजनों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन देने की दिशा में यह योजना लगातार सशक्त हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर योजना में डिजिटल मॉनिटरिंग, आधार आधारित सत्यापन और सतत निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है। इससे पेंशन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनी है तथा यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी सहायता सही पात्रों तक ही पहुंचे। 67.50 लाख तक पहुंचे लाभार्थी वर्ष 2024 में जहां राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना से 61.00 लाख वृद्धजन लाभान्वित हो रहे थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 67.50 लाख हो गई है। मंत्री ने कहा कि लाभार्थियों में यह वृद्धि योगी सरकार की सामाजिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक संबल दिया जा रहा है। नियमित सत्यापन से अपात्र नाम हटे योजना की शुचिता बनाए रखने के लिए विभाग द्वारा नियमित सत्यापन और समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत वर्ष 2024 में 1.77 लाख, जबकि वर्ष 2025 में 3.32 लाख मृतक और अपात्र लाभार्थियों के नाम पेंशन सूची से हटाए गए। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया गया कि पेंशन राशि केवल वास्तविक और पात्र वृद्धजनों को ही प्राप्त हो। पात्र वृद्धजनों को मिले प्राथमिक लाभ समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक अमरजीत सिंह ने बताया कि विभाग की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र वृद्धजन पेंशन योजना से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से वर्ष 2025 में 9.83 लाख नए पात्र वृद्धजनों को योजना से जोड़ा गया, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 7.08 लाख थी। 60 वर्ष होते ही खाते में पहुंचेगी पेंशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अब वृद्धावस्था पेंशन योजना को और अधिक सरल बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत पात्रों की पहचान और सत्यापन फैमिली आईडी ‘एक परिवार एक पहचान’ प्रणाली के माध्यम से स्वतः किया जाएगा। इससे कोई भी पात्र व्यक्ति 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही पेंशन राशि सीधे उसके बैंक खाते में प्राप्त कर सकेगा।

यूपी रोडवेज में मोबाइल ऐप से सीट बुकिंग और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग की सुविधा शुरू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश रोडवेज बस अड्डों पर बस का इंतजार कर रहे यात्रियों को अब बार-बार जानकारी लेने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने मोबाइल ऐप के माध्यम से बसों की सीट बुकिंग और लाइव लोकेशन की सुविधा शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। रेलवे की तर्ज पर अब यात्री यात्रा से पहले ही अपनी पसंद की सीट आरक्षित कर सकेंगे। इसके साथ ही बस की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप्स से सीट बुकिंग, लाइव ट्रैकिंग यात्री यूपीएसआरटीसी, यूपी राही और मार्गदर्शी जैसे आधिकारिक मोबाइल ऐप्स के जरिए सीट बुकिंग के साथ-साथ बस की लाइव ट्रैकिंग कर सकेंगे। इसके लिए निगम की बसों में जीपीएस सिस्टम लगाया जा रहा है। जीपीएस के जरिए प्रत्येक बस की सटीक लोकेशन यात्रियों को उनके स्मार्टफोन पर दिखाई देगी। मोबाइल ऐप के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा मोबाइल ऐप के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा कि कौन-सी बस किस समय नजदीकी बस स्टैंड पर पहुंचेगी या पहुंच चुकी है। इससे यात्रियों को लंबे समय तक बस अड्डे पर खड़े रहकर इंतजार करने की परेशानी से राहत मिलेगी। यह सुविधा खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। सभी प्रमुख मार्गों पर सुविधा शुरू की जाएगी नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोडवेज की सेवाएं और अधिक आधुनिक व सुविधाजनक हो जाएंगी। जल्द ही जिले के सभी प्रमुख मार्गों पर चलने वाली बसों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्री इसका लाभ उठा सकें। रायबरेली के क्षेत्रीय प्रबंधक आर.के. त्रिपाठी ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था से बस संचालन में पारदर्शिता आएगी और समय पालन में भी सुधार होगा। यात्री घर बैठे मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सीट बुक कर सकेंगे और यात्रा से पहले ही बस की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। उम्मीद है कि यह सुविधा फरवरी से शुरू हो जाएगी।  

नए साल के जश्न पर मौलाना की सख्त राय: इस्लाम में नाजायज, बिगड़ता है माहौल

 बरेली भारत समेत दुनियाभर में नए साल के जश्न की तैयारियां चल रही हैं। लोग नए साल को लेकर प्लानिंग कर बना रहे हैं। लेकिन इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबु्द्दीन रजवी बरेलवी ने मुसलमानों से नए साल का जश्न न मनाने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा है कि ये फिजुलखर्ची है। इस्लाम में इसकी मनाही है। मौलाना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मौलाना बरेलवी ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा नए साल पर जश्न मनाने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इस संबंध में स्पष्ट करना जरूरी है कि शरीयत-ए-इस्लामिया की रोशनी में नए साल का जश्न मनाना जायज नहीं है। इसका कारण यह है कि इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नया साल मोहर्रम माह से शुरू होता है, जबकि हिंदू कैलेंडर में नया वर्ष चैत्र मास से आरंभ होता है। 1 जनवरी को मनाया जाने वाला नया साल यूरोपीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है और यह ईसाई समुदाय के लोग ये जश्न मनाते हैं। मौलाना ने नौजवानों को दी नसीहत मौलाना ने कहा, 'जश्न क्या होता है? 31 दिसंबर की रात में फूहड़ता, हंगामा, शोर-शराबा, नाच-गाना और फिजूलखर्ची करना होता है जश्न का तरीका। शरीयत इसकी इजाजत नहीं देता है। इसलिए मुस्लिम नौजवान लड़के और लड़कियों से गुजारिश करूंगा कि वह कतई जश्न न मनाए। अगर कही से खबर मिली कि कुछ लड़के-लड़कियां जश्न मना रहे हैं तो उलमा-ए-किराम सख्ती से रोकेंगे। इस्लाम में खुदा के सिवा किसी और की पूजा हराम इससे पहले बरेलवी ने संतकबीरनगर में आयोजित धार्मिक सम्मेलन में कहा था कि इस्लाम मजहब पूरी तरह अपने उसूलों पर कायम है और हमारे समाज के लोग सिर्फ एक खुदा की ही इबादत करते हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कुछ संगठन और नेता सूर्य नमस्कार, धरती, नदी और पेड़-पौधों की पूजा करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इस्लाम में इन तमाम चीजों की पूजा करना शरीयत में हराम है।  

मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला प्रदेशव्यापी अभियान, एनडीपीएस और बीएनएस के तहत हुई सख्त कानूनी कार्रवाई

सीएम योगी के निर्देश पर एफएसडीए का बड़ा एक्शन, कोडीनयुक्त कफ सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन ध्वस्त  – 52 जिलों में सघन जांच, 161 फर्मों पर एफआईआर, 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन का हुआ खुलासा – कोडीन कफ सिरप का गैर-चिकित्सीय उपयोग सिद्ध, 700 करोड़ से अधिक की संदिग्ध आपूर्ति जांच के घेरे में – मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला प्रदेशव्यापी अभियान, एनडीपीएस और बीएनएस के तहत हुई सख्त कानूनी कार्रवाई लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में अवैध नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ एक्शन ने अवैध नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) को कोडिनयुक्त कफ सिरप एवं एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिये। इस पर तीन माह पहले अभियान शुरू किया।      कई प्रदेशों में विवेचना की गई और सुपर स्टॉकिस्ट के साथ होलसेलर के कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए विभाग ने कोडिनयुक्त कफ सिरप के अवैध डायवर्जन को लेकर देश का सबसे बड़ा क्रैक डाउन शुरू करने से पहले अंदरुनी गहन जांच शुरू की। इस दौरान झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में विवेचना की गई और यूपी के सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलर के साथ उनके कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए। इसके बाद प्रदेश में क्रैक डाउन शुरू हुआ, जिसने सिरप के अवैध डायवर्जन की परतें उधेड़ दीं। एसएसडीए की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने नशे के सौदागरों को दबोचने के लिए एक्शन शुरू किया। सीएम के निर्देश पर सिरप का नशे के रूप में इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एनडीपीएस और बीएनएस के तहत मुकदमे दर्ज किये गये। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा चलाने को सही ठहराते हुए 22 मामलों में आरोपियों की रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 22 मामलों में आरोपियों द्वारा अरेस्ट स्टे की रिट याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की गई एफएसडीए ने पिछले तीन माह में कोडिनयुक्त कफ सिरप और एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर कुल 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की। जांच के दौरान प्राप्त अभिलेखीय एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर 36 जनपदों की कुल 161 फर्मों/संचालकों के विरुद्ध बीएनएस तथा एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। वहीं, जिलाधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के लिए पत्र लिखा ताकि अवैध नशे के अर्जित संपत्ति को जब्त किया जा सके। सीएम के निर्देश पर एफएसडीए ने कोडिनयुक्त कफ सिरप की नशे के रूप में तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, जो पूरे देश में सबसे बड़ा क्रैक डाउन है।  मामले की तह तक पहुंची एफएसडीए और पकड़ में आया पूरा नेक्सेज  एफएसडीए आयुक्त ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए जनपद स्तर पर कई टीमें बनाईं। टीमों की निगरानी के लिए मुख्यालय पर एक टीम बनाई गई। विभिन्न टीमें जांच के लिए विभिन्न प्रदेशों में गई और गोपनीय तरीके से साक्ष्य जुटाए। टीम ने केंद्रीय नॉरकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से कोडीन फॉस्फेट का कोटा एवं उठान के विवरण को एकत्रित किया। वहीं टीम ने कोडिनयुक्त कफ सिरप निर्माता फर्मों की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड गई। यहां से सिरप के निर्माण और वितरण से संबंधित अभिलेख जुटाए। इसके बाद सिरप के क्रय विक्रय अभिलेख के लिए रांची, दिल्ली और लखनऊ का रूख किया। इस दौरान पाया गया कि अधिकांश होलसेल के पास स्टॉक पहुंचने का सत्यापन नहीं है और रिटेल मेडिकल स्टोर के नाम पर कोई भी विक्रय बिल नहीं मिला जबकि दिल्ली, रांची के सुपर स्टॉकिस्ट और इनसे जुड़े कुछ चिन्हित होल सेलर के नाम पर बिलिंग करके सिरप के साथ एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं की एक सामानान्तर वितरण श्रृखंला बनायी गयी। इसका खुलासा करने के लिए विभाग द्वारा कड़ी मेहनत की गयी। इसके बाद पूरी चेन को कनेक्ट किया, जिसके बाद सिरप के अवैध डायवर्जन का मामला सामने आया। वर्ष 2024-25 में कफ सिरप की आपूर्ति चिकित्साीय आवश्यकता से कई गुना अधिक मिली कई मामलों में फर्में विक्रय बिल प्रस्तुत करने में असफल रहीं, जबकि कुछ फर्मों द्वारा केवल कागजी अभिलेखों में सिरप का क्रय-विक्रय दर्शाया गया। प्रस्तुत विक्रय विवरणों में भी किसी भी फुटकर औषधि प्रतिष्ठान को कोडीनयुक्त कफ सिरप की वास्तविक आपूर्ति का सत्यापन नहीं हो सका, जिससे कथित आपूर्ति को अप्रमाणित पाया गया। वर्ष 2024-25 प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की आपूर्ति वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता से कई गुना अधिक पाई गई। जांच में ऐबोट हेल्थ केयर द्वारा निर्मित फेन्सिडिल की 2.23 करोड़ से अधिक बोतलें, लैबोरेट फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित एस्कॉफ की 73 लाख से अधिक बोतलें तथा अन्य कंपनियों द्वारा निर्मित लगभग 25 लाख बोतलों की आपूर्ति दर्ज मिली, जिनका चिकित्सीय उपयोग प्रमाणित नहीं हो सका। पुलिस और एसटीएफ ने कुल 85 अभियुक्तों को किया अरेस्ट एफएसडीए ने रिपोर्ट सीएम और पुलिस को सौंपी। इसके आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने 79 अभियोग दर्ज किये। इसमें अब तक 85 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वर्तमान में एक्शन चल रहा है। वहीं मामले में गठित एसआईटी भी जांच कर रही है। जानकारों की मानें तो अगले माह एसआईटी जांच रिपोर्ट सीएम को सौंप सकती है। लाइसेंसिंग प्रणाली सख्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफएसडीए मुख्यालय द्वारा थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें थोक प्रतिष्ठान की जीओ टैगिंग, भंडारण क्षमता की पुष्टि और इनकी फोटोग्राफ कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं प्रतिष्ठान के टेक्निकल पर्सन का अनुभव प्रमाण पत्र को ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है। कोडीनयुक्त कफ सिरप के निर्माण, बल्क सप्लाई, वितरण एवं निगरानी के लिए भारत सरकार से आवश्यक अधिसूचना एवं दिशा-निर्देश जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा

ईयर एंडर 2025  सीएम योगी के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण की योजनाओं ने रची नए विकास की कहानी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा शादी अनुदान योजना ने वंचित समाज की बेटियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान को किया गया मजबूत कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिला कौशल और रोजगार का मार्ग डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से बढ़ी पारदर्शिता, घटा भ्रष्टाचार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में पिछड़ा वर्ग कल्याण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण—तीनों क्षेत्रों में सरकार की योजनाएं न केवल निरंतर चलीं, बल्कि लाभार्थियों की संख्या और बजट के लिहाज से पहले से अधिक प्रभावी साबित हुईं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के आधिकारिक आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियां सीधे तौर पर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण महज योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सम्मान और कौशल के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का मजबूत माध्यम बना है। योगी सरकार की यह नीति-आधारित और परिणाम-केंद्रित कार्यशैली ही उत्तर प्रदेश को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में आगे ले जा रही है। शिक्षा को प्राथमिकता, रिकॉर्ड छात्रवृत्ति वितरण वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पिछड़ा वर्ग के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्रदान की। इस अवधि में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 6 लाख 90 हजार 349 छात्रों को 147.75 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से 5 लाख 85 हजार 954 छात्रों को 175.54 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। इस तरह केवल वर्ष 2025 में ही कुल 12 लाख 76 हजार 303 विद्यार्थियों को 323.29 करोड़ रुपये की सीधी मदद मिली। कुल मिलाकर योगी सरकार ने नौ वर्षों में कुल 2 करोड़ 20 लाख 29 हजार 760 छात्रों को 13,858.62 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की।  बेटियों के सम्मान में सरकार की संवेदनशीलता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामाजिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण शादी अनुदान योजना है। वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में पिछड़ा वर्ग की 72 हजार 296 बेटियों को इस योजना के तहत 144.59 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। पूर्व वर्षों में भी यह योजना लगातार मजबूत होती रही। 2019-20 और 2024-25 में एक-एक लाख बेटियों को 200-200 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। कुल मिलाकर नौ वर्षों में योगी सरकार ने शादी अनुदान योजना के तहत कुल 6 लाख 47 हजार 863 लाभार्थियों को 1,295.72 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई। इस योजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम आय सीमा एक लाख वाले अन्य पिछड़े वर्ग के परिवारों की बेटियों की शादी हेतु अनुदान दिये जाने का प्राविधान है। शादी योजना में लड़की की उम्र 18 वर्ष एवं लड़के की उम्र 21 वर्ष होना आवश्यक है।  डिजिटल भविष्य की तैयारी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी बनाने की रही है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत 18,159 बालकों और 4,233 बालिकाओं, कुल 22,392 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिस पर 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बीते वर्षों में यह योजना लगातार विस्तार पाती रही। 2017-18 में जहां 9,431 युवाओं को प्रशिक्षण मिला था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 29,769 युवाओं तक पहुंच गई। नौ वर्षों में कुल 1 लाख 62 हजार 046 युवाओं को 154.56 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किया गया। इनमें ओ लेवल सर्टिफिकेट के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या एक लाख, 1139 रही, जबकि सीसीसी सर्टिफिकेट के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 60,907 रही। इस योजना के अंतर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के इंटरमीडिएट पास बेरोजगार युवक और युवतियों को जिनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख तक या उससे कम है को भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करना है। इन सभी योजनाओं में लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से लाभ प्रदान किया गया, जिससे पारदर्शिता में वृद्धि हुई और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई।