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योगी सरकार का एमएसएमई सेक्टर पर बड़ा भरोसा, अनुपूरक बजट में ठोस आर्थिक समर्थन

एमएसएमई कार्यालयी तंत्र को मजबूत करने के लिए सीधे बजटीय प्रावधान निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीतियों के अंतर्गत की गई ठोस व्यवस्था वैश्विक कंपनियों से जुड़कर एमएसएमई को बाजार और निर्यात का नया अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज) सेक्टर को सशक्त बनाने को लेकर अनुपूरक बजट में स्पष्ट और ठोस प्रावधान किए हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि एमएसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके मजबूत होने से रोजगार और निवेश का विस्तार संभव है। लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, रविन्द्र सिंह ने कहा कि “उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों और नये अनुपूरक बजट प्रावधानों से एमएसएमई को बढ़ावा और प्रोत्साहन मिलेगा। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह प्रभावी कदम है। सबसे बड़ी बात यह है कि योगी सरकार ने उद्यमियों और उद्योगों को सुरक्षित वातावरण देने का काम किया है“    एमएसएमई से जुड़े कार्यालयी तंत्र को मजबूत करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के अधिष्ठान व्यय हेतु 1.5 करोड़ रुपये तथा उद्योग निदेशालय के अधिष्ठान व्यय के लिए भी 1.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे जिलों में उद्यमियों को समय पर मार्गदर्शन, स्वीकृति और योजनाओं का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि मजबूत ऑफिस सिस्टम से ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जमीन पर दिखेगा। औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के अंतर्गत 823.43 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है। इस राशि का बड़ा हिस्सा एमएसएमई इकाइयों को पूंजी निवेश, सब्सिडी, ब्याज अनुदान और रोजगार सृजन से जुड़े प्रोत्साहन के रूप में मिलेगा। इसके साथ ही औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के लिए 300 करोड़ रुपये और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास नीति 2012 के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एमएसएमई सेक्टर को बड़े निवेश से जोड़ने के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट और फॉर्च्यून-500 कंपनियों की निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के अंतर्गत  371.69 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण लाभ एमएसएमई इकाइयों को सप्लाई चेन, वेंडर डेवलपमेंट और निर्यात के रूप में मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को ठोस बजटीय समर्थन मिला है। यही कारण है कि प्रदेश तेजी से एमएसएमई हब के रूप में उभर रहा है और आने वाले समय में लाखों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इस समय  प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए आवंटित की बड़ी रकम

– एनआरएचएम को 2000 करोड़ और आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के लिए 1200 करोड़ आवंटित   लखनऊ,  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती देने के उद्देश्य से अनुपूरक बजट में चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। अनुपूरक बजट में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर योगी सरकार ने यह संकेत दिया है कि आमजन तक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। अनुपूरक बजट में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पतालों के विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के लिए धनराशि दी गई है। अनुपूरक बजट में चिकित्सा क्षेत्र को आवंटित धनराशि न केवल स्वास्थ्य योजनाओं को गति देगी, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत करने की दिशा में अहम कदम भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों की सेवाएं होंगी और सशक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लंबित और भविष्य में प्राप्त होने वाले चिकित्सा दावों के भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। इससे निजी व सरकारी दोनों प्रकार के सूचीबद्ध अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा और मरीजों को बिना किसी बाधा के उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इस राशि से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पतालों की सेवाओं को और सशक्त किया जाएगा। साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, संक्रामक रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा निरंतर मिलती रहेगी आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के तहत सूचीबद्ध चिकित्सालयों के लंबित एवं प्राप्त होने वाले चिकित्सा दावों के भुगतान के लिए सबसे बड़ा प्रावधान किया गया है। इस मद में 1,200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता को अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। यह कदम आयुष्मान भारत योजना को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ गरीब व जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क इलाज की सुविधा निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने में सहायक होगा।

अनुपूरक बजट 2025-26-नवीनीकृत ऊर्जा, पीएम सूर्य घर योजना को मिलेगी नई रफ्तार, राज्य सब्सिडी के लिए ₹500 करोड़ की मंजूरी

लाभार्थियों को शीघ्र एवं सुगमता से उपलब्ध हो सकेगी राज्य सब्सिडी प्रदेश के आम नागरिकों को समय पर सुनिश्चित होगा योजना का पूर्ण लाभ लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना को सरकार और गति देने जा रही है। सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट में इसके लिए ₹500 करोड़ की मंजूरी दी गई। इस राशि से पीएम सूर्य घर योजना की राज्य सब्सिडी दी जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य लाभार्थियों को राज्य सब्सिडी शीघ्र एवं सुगमता से उपलब्ध कराना है, ताकि आम नागरिकों को योजना का पूर्ण लाभ समय पर मिल सके। सरकार के इस कदम से न केवल सोलर प्लांट की स्थापना में लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को भी नई गति प्राप्त होगी। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। योजना के अंतर्गत राज्य में अब तक कुल 10,09,567 आवेदन प्राप्त हुए हैं और 3,14,376 घरों में सोलर रूफटॉप सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से 3,17,690 परिवारों को योजना का लाभ मिला है, जिससे स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा मिला है। योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक 1,083.63 मेगावाट सोलर इंस्टॉलेशन क्षमता का सृजन किया जा चुका है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹2,188.79 करोड़ की केंद्रीय सब्सिडी जारी की गई है, जबकि राज्य सरकार की ओर से लगभग ₹600 करोड़ की राज्य सब्सिडी भी प्रदान की जा चुकी है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम नागरिकों के बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय कमी लाने में सहायक सिद्ध हो रही है।

विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना

  कहा: वंदे मातरम पर किया गया समझौता धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया मोहम्मद अली जिन्ना राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस और मोहम्मद अली जिन्ना को सीधे तौर पर भारत के सांस्कृतिक विभाजन और अंततः देश के बंटवारे का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर किया गया समझौता किसी धार्मिक भावना का सम्मान नहीं, बल्कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का पहला, सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक प्रयोग था, जिसने अलगाववाद को जन्म दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक मोहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस में थे, तब तक वंदे मातरम कोई विवाद नहीं था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इस राष्ट्रगीत को मुस्लिम लीग की राजनीति का औजार बनाया और जानबूझकर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया। कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र की बजाय वोटबैंक के साथ रहा सीएम योगी ने कहा कि 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से जिन्ना ने वंदे मातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया, जबकि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इसके तुरंत बाद 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखा गया पत्र, जिसमें कहा गया कि यह मुद्दा मुसलमानों को “आशंकित” कर रहा है, कांग्रेस के तुष्टीकरण की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ अंश हटाने का निर्णय लिया, जिसे उस समय “सद्भाव” कहा गया, लेकिन वास्तव में यह राष्ट्र चेतना की बलि थी। देशभक्तों ने इसका विरोध किया, प्रभात फेरियां निकाली गईं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व राष्ट्र के साथ खड़ा होने की बजाय वोटबैंक के साथ खड़ा हो गया। वंदे मातरम का विरोध पूरी तरह राजनीतिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 मार्च 1938 को जिन्ना ने मांग की कि वंदे मातरम पूरा बदला जाए, लेकिन कांग्रेस ने प्रतिकार नहीं किया। परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग का साहस बढ़ता गया, अलगाववाद की धार तेज हुई और सांस्कृतिक प्रतीकों पर पहला समझौता हुआ, जिसने अंततः भारत के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन की नींव रखी। सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम का विरोध न तो धार्मिक था और न ही आस्था से जुड़ा, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक था। उन्होंने याद दिलाया कि 1896 से 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता रहा। न कोई फतवा था, न कोई धार्मिक विवाद। खिलाफत आंदोलन तक भी यह गीत हर मंच से गूंजता था। मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेता इसके समर्थक थे। समस्या मजहब को नहीं, बल्कि कुछ लोगों की राजनीति को थी। कांग्रेस का राष्ट्रीय आत्मसमर्पण मुख्यमंत्री ने बताया कि 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में मोहम्मद अली जौहर ने पहली बार वंदे मातरम का विरोध किया। यह विरोध धार्मिक नहीं, बल्कि खिलाफत की राजनीति से प्रेरित था। जब विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने पूरा गीत गाया तो जौहर मंच छोड़कर चले गए। मंच छोड़ना उनका व्यक्तिगत निर्णय था, लेकिन कांग्रेस का झुकना उसकी नीति बन गई। सीएम योगी ने कहा कि इसके बाद कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के पक्ष में मजबूती से खड़े होने की बजाय समितियां बनाईं और अंततः 1937 में फैसला हुआ कि केवल दो छंद गाए जाएंगे और वह भी अनिवार्य नहीं होंगे। इसे उन्होंने राष्ट्रीय आत्मसमर्पण बताया। वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा जिस खंडित वंदे मातरम को मान्यता दी गई, वह भी कांग्रेस की इसी तुष्टीकरण नीति का परिणाम था। राष्ट्र ने गीत को अपनाया, लेकिन कांग्रेस पहले ही उसे काट चुकी थी। सीएम योगी ने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। 1905 के बंग-भंग आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, यह प्रभात फेरियों, सत्याग्रहों और क्रांतिकारियों की अंतिम सांस तक का मंत्र रहा। रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे भारत की आत्मा, अरविंद घोष ने इसे मंत्र कहा। मैडम भीकाजी कामा द्वारा फहराए गए पहले विदेशी तिरंगे पर वंदे मातरम लिखा था, मदनलाल ढींगरा के अंतिम शब्द भी वंदे मातरम थे। राष्ट्रगीत के बाद आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम के साथ किया गया समझौता केवल गीत का अपमान नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय दिशा पर किया गया क्रूर प्रहार था। उन्होंने चेतावनी दी कि आज भी कुछ राजनीतिक शक्तियां उसी विभाजनकारी सोच को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं। तब राष्ट्रगीत को निशाना बनाया गया था, आज राष्ट्रभाव को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का अर्थ केवल मातृभूमि को प्रणाम करना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा, समृद्धि और गौरव का संकल्प लेना है। तुष्टीकरण की ऐतिहासिक भूलों से सीख लेकर ही श्रेष्ठ, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने सदन से आह्वान किया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘आनंद मठ’ का अध्ययन कर राष्ट्र चेतना को समझा जाए और वंदे मातरम के 150 वर्ष को भविष्य के संकल्प के रूप में अपनाया जाए।

विकास की रफ्तार बनाए रखने और प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूती देने पर सरकार का फोकस: CM योगी

योगी सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत किया ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट विकास की रफ्तार बनाए रखने और प्राथमिक क्षेत्रों को मजबूती देने पर सरकार का फोकस: CM योगी  अनुपूरक बजट मूल बजट का 3.03 प्रतिशत, ₹18,369 करोड़ राजस्व व्यय और ₹6,127 करोड़ पूंजीगत व्यय का प्रावधान ऊर्जा, स्वास्थ्य और नगरीय विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता औद्योगिक विकास के लिए ₹4,874 करोड़, पावर सेक्टर को ₹4,521 करोड़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को ₹3,500 करोड़ की बड़ी सौगात नगर विकास के लिए ₹1,758.56 करोड़, शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर तकनीकी शिक्षा के लिए ₹639.96 करोड़, स्किल और इनोवेशन को बढ़ावा महिला एवं बाल विकास के लिए ₹535 करोड़ का प्रावधान सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यूपीनेडा को ₹500 करोड़  मेडिकल एजुकेशन को ₹423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल को ₹400 करोड़ वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का संतुलन, एफआरबीएम सीमा का पूर्ण पालन लखनऊ  योगी सरकार ने सोमवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए ₹24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट पेश करते हुए कहा कि यह अनुपूरक बजट प्रदेश में विकास की निरंतरता बनाए रखने, आवश्यक क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने और बदलती जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से लाया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025–26 के लिए प्रदेश का मूल बजट ₹808,736.06 करोड़ का था, जबकि प्रस्तुत अनुपूरक बजट मूल बजट के अनुपात में 3.03 प्रतिशत है। अनुपूरक बजट को मिलाकर वित्तीय वर्ष 2025-26 का कुल बजट अब 833,233.04 करोड़ का हो गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट विकासात्मक प्राथमिकताओं को और अधिक सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। राजस्व और पूंजीगत व्यय का संतुलित प्रावधान प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय के रूप में ₹18,369.30 करोड़, पूंजीगत व्यय के रूप में ₹6,127.68 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य राजस्व आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पूंजीगत निवेश को बढ़ाकर आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है। उद्योग, ऊर्जा और स्वास्थ्य को मिला बजट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अनुपूरक बजट में प्रदेश की आर्थिक प्रगति और जनकल्याण से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत औद्योगिक विकास के लिए ₹4,874 करोड़, पावर सेक्टर के लिए ₹4,521 करोड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए ₹3,500 करोड़, नगर विकास के लिए ₹1,758.56 करोड़, तकनीकी शिक्षा के लिए ₹639.96 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है। महिला, शिक्षा, सौर ऊर्जा और कृषि से जुड़े क्षेत्रों को भी बल अनुपूरक बजट में सामाजिक और भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत, महिला एवं बाल विकास के लिए ₹535 करोड़, यूपीनेडा (सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा) के लिए ₹500 करोड़, मेडिकल एजुकेशन के लिए ₹423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल क्षेत्र के लिए ₹400 करोड़ की बजटीय व्यवस्था की गई है। एफआरबीएम सीमा का पूर्ण अनुपालन, जीएसडीपी में ऐतिहासिक वृद्धि वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार ने एफआरबीएम (FRBM) अधिनियम की सीमा का हमेशा पालन किया है और किसी भी स्तर पर वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पत्रक के अनुसार उत्तर प्रदेश की जीडीपी (GSDP) ₹31.14 लाख करोड़ आंकी गई है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में उभर रहा है, जो राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। विकास की गति बनाए रखने के लिए प्रस्तुत हुआ अनुपूरक बजट जब किसी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत धनराशि व्यय की वास्तविक आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हो जाती है, तब अनुपूरक अनुदान की मांग विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। कई बार नई मदों पर व्यय की आवश्यकता होती है या योजनाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन के कारण विधानमंडल की स्वीकृति अनिवार्य हो जाती है।

फौजी के घर से अंडरवर्ल्ड तक: 28 महीने की तलाश के बाद ढेर हुआ सिराज, भाई भी फंसा

 सुल्तानपुर यूपी के सहारनपुर में मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर सिराज अहमद की सात थानों की पुलिस को 28 महीने से तलाश थी। आइए जानते हैं कैसे जुर्म की दुनिया में फंसता गया आर्मी मैन का बेटा और भाई को भी ले डूबा। इसकी शुरुआती साल 2006 में मारपीट और लूट की घटना में नाम आने के बाद हुई। सुल्तानपुर में छह अगस्त 2023 को भुलकी चौराहे के पास गैंगस्टर सिराज अहमद ने साथियों के साथ मिलकर अधिवक्ता आजाद अहमद को ताबड़तोड़ गोलियों से हत्याकर दी थी। इस हत्याकांड में नाम आने के बाद क्राइम ब्रांच समेत तीन टीमें बनाई गईं। उसे खोजने के लिए पुलिस खाक छान रही थी। सिराज चोरी-छिपे घर आता और चला जाता। पुलिस की किरकिरी हुई तो 50 हजार और फिर एक लाख तक का इनाम रखा गया, लेकिन फिर भी पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाए। लखनऊ की हसनगंज, गोसाईंगंज और जिले की पांच थानों की पुलिस फेल साबित हुई तो आखिरकार एसटीएफ को जिम्मेदारी दी गई। 28 महीने बाद सहारनपुर में सिराज को ढेर करने में सफलता मिली। लोलेपुर निवासी मंसूर अहमद रिटायर्ड आर्मी मैन हैं। अनुशासन, देशभक्ति की सीख देने वाले मंसूर अहमद ने बड़े बेटे मेराज को एनसीसी कराया। सिराज को भी मेहनत से पढ़ाई-लिखाई करने की सीख देते रहे। वर्ष 2006 में दोस्तों के दो गुटों में हुई एक छोटी सी मारपीट के बाद साधारण सा दिखने वाला सिराज जरायम की दुनिया में बढ़ता चला गया।   अपराध से अकूत संपत्ति बनाई, जिससे भाई मेराज भी जेल पहुंच गया, वह अमहट जेल में बंद है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गांव में एक बड़ा पक्का मकान, सुल्तानपुर व लखनऊ में कीमती प्लॉट, मुल्की क्षेत्र में सीमेंटेड पाइप बनाने की फैक्टरी और करीब आठ बीघा जमीन थी। पुलिस का कहना है कि यह संपत्ति हत्या, लूट और रंगदारी जैसे अपराधों से अर्जित धन से बनाई गई थी। छह अगस्त की शाम भुलकी चौराहे पर की थी हत्या भुलकी चौराहे पर छह अगस्त 2023 की शाम भुलकी गांव में ताबड़तोड़ फायरिंग कर अधिवक्ता आजाद अहमद की हत्या व उसके भाई को घायल कर दिया गया था। इस मामले में सलीम अहमद ने बेटे की हत्या के लिए नामजद एफआईआर लिखाई थी। विवेचना में आठ से अधिक लोग हत्या व साजिश में शामिल मिले, अधिकांश आरोपियों को पुलिस ने जेल भेजा था। दो साल चार महीने से दहशत में था अधिवक्ता का परिवार अधिवक्ता आजाद अहमद की छह अगस्त 2023 की शाम हत्या की गई। तब से लगातार उनका परिवार दहशत में रह रहा था। सिराज फरार चल रहा था, लेकिन उसके करीबी लगातार अधिवक्ता के पिता को धमकी दे रहे थे। पिता मो. सलीम पर पिछली पांच जुलाई को लोहरामऊ ओवरब्रिज के पास हमला किया गया था। किसी तरह से उनकी जान बची थी।  

तेज रफ्तार का कहर: पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर ट्रक में घुसी कार, 3 की मौत, 7 घायल

सुल्तानपुर घने कोहरे के बीच पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर दरपीपुर के पास सोमवार सुबह करीब 8.20 बजे लखनऊ से आजमगढ़ जा रही तेज रफ्तार कार खड़े ट्रक में पीछे से घुस गई। दुर्घटना में कार के परखचे उड़ गए। कार सवार चालक सिकंदर (27), शंभूलाल (55) निवासीगण तेवखार, सरायमीर, आजमगढ़ व सुरेंद्र (30) निवासी, गुड़ियावा आजमगढ़ की मौत हो गई। दुर्घटना में सुरेंद्र की पत्नी खुशबू (27),  पुत्री सनाया (06), शंभूलाल की पत्नी मीना देवी (35), पुत्र कोहिनूर (16), बड़ी पुत्री उजाला (24), छोटी पुत्री कुमारी रोशनी (15), सबसे छोटा पुत्र अंश (12) गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना की जानकारी पर घटनास्थल पहुंचे यूपीडा के सहायक सुरक्षा अधिकारी त्रिलोकी नाथ पांडेय ने बताया कि सिकंदर व सुरेंद्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि शंभूलाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर में चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। अन्य घायलों को भी सीएचसी दोस्तपुर पहुंचाया गया। वहां से सभी को अंबेडकरनगर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यूपीडा के सहायक सुरक्षा अधिकारी राम जगत तिवारी ने बताया कि कार चालक की लापरवाही से दुर्घटना हुई है। क्षतिग्रस्त कार को क्रेन से ट्रक से बाहर निकाला गया। कार को रिकवरी वैन से  भेजने की व्यवस्था की जा रही है l जयसिंहपुर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रमोद मिश्र ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोडिन कफ सिरप मामले में रखा सरकार का पक्ष, बोले-मामले में कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा

विधानसभा में कोडिन पर सीएम योगी का जवाब कोडिन से यूपी में एक भी मौत नहीं हुईः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोडिन कफ सिरप मामले में रखा सरकार का पक्ष, बोले-मामले में कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा मुख्यमंत्री ने सदन में समाजवादियों को दिखाया आईना  बोले- यूपी के जो सबसे बड़े होलसेलर हैं, उन्हें 2016 में समाजवादी पार्टी ने जारी किया था लाइसेंस  देश में दो नमूने हैं, जब कोई चर्चा होती है तो वह देश छोड़कर भाग जाते हैः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री ने सपाइयों से कहा- आप चिल्लाते रहेंगे और ‘बबुआ’ सैरसपाटे के लिए इंग्लैंड चले जाएंगे  अवैध लेन-देन भी लोहिया वाहिनी के एक पदाधिकारी के खाते के माध्यम से हुआः सीएम योगी  सीएम ने सपाइयों से कहाः समय आने पर होगी बुलडोजर कार्रवाई, तब चिल्लाइएगा नहीं  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सदन में कोडिन कफ सिरप मामले में सरकार का पक्ष रखा और समाजवादी पार्टी के नेताओं को खूब धोया। बोले कि प्रश्न क्या है और मुद्दे क्या उठाए जा रहे हैं। माननीय सदस्यों को अध्ययन करके आना चाहिए और सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। नेता विरोधी दल ने सदन की कार्रवाई होते ही इस मुद्दे को उठाया, इसलिए मुझे खड़ा होना पड़ा। सीएम ने कहावत ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ का जिक्र कर समाजवादी पार्टी को आईना दिखाया। सीएम ने सदन में साफ किया कि कोडिन कफ सिरप से यूपी में एक भी मौत नहीं हुई है। इस मामले में एनडीपीएस के अंतर्गत कार्रवाई होगी, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को कोर्ट में लड़ा और जीता है।  नेता प्रतिपक्ष से झूठ बोलवा देते हैं समाजवादी   सीएम ने नेता प्रतिपक्ष की चुटकी ली। बोले कि इस उम्र में व्यक्ति सच बोलने का आदी होता है, लेकिन समाजवादी इस उम्र में भी उनसे झूठ बोलवा देते हैं। समाजवादियों को ऐसा नहीं करना चाहिए और उन्हें भी सच बोलने का आदी होना चाहिए। उन्होंने लंबे समय तक स्पीकर के रूप में सदन को आगे बढ़ाया है।  2016 में समाजवादी पार्टी ने यूपी के सबसे बड़े होलसेलर को जारी किया था लाइसेंस  सीएम योगी ने सदन में कहा कि उत्तर प्रदेश में यूपी के सबसे बड़े होलसेलर को एसटीएफ ने पकड़ा था। 2016 में समाजवादी पार्टी ने उसे लाइसेंस जारी किया था। सीएम ने कहा कि देश में दो नमूने हैं। एक दिल्ली व दूसरा लखनऊ में बैठता है। जब देश में कोई चर्चा होती है तो वह देश छोड़कर भाग जाते हैं। यही आपके बबुआ के साथ भी हो रहा है। आप चिल्लाते रहेंगे और बबुआ सैरसपाटे के लिए इंग्लैंड चले जाएंगे।  यूपी में नहीं होता कोडिन कफ सिरप का प्रोडक्शन  सीएम ने फिर स्पष्ट किया कि कोडिन कफ सिरप (नकली दवा) के कारण मौत की कोई भी बात शासन के संज्ञान में नहीं आयी है। समय-समय पर एफएसडीए विभाग लगातार छापेमारी व कार्रवाई करती है। कंपनियों में भी इस प्रकार की कार्रवाई होती है। यूपी में कोडिन कफ सिरप के केवल स्टाकिस्ट व होलसेलर हैं। इसका यहां प्रोडक्शन नहीं होता। इसका प्रोडक्शन मध्य प्रदेश, हिमाचल व अन्य राज्यों में होता है। मौत के जो प्रकरण आए हैं, वह भी अन्य राज्यों के हैं। ऐसे प्रकरण तमिलनाडु में बने सिरप के कारण आए हैं। यह पूरा प्रकरण इललीगल डायवर्जन का है। इसके माध्यम से होलसेलर (सहारनपुर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी) ने इसे उन देशों व राज्यों में पहुंचाया है, जहां मद्य निषेध है। वहां नशे के आदी लोगों को इसे लेने की आदत है। वहां इसका दुरुपयोग किया गया है।  समाजवादी पार्टी के लोगों का पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता नहीं  मुख्यमंत्री ने सीएम ने कहा कि बच्चे हों या एडल्ट, बिना चिकित्सीय परामर्श के कोई भी इसका सेवन नहीं कर सकता। खांसी होने पर हर कोई कफ सिरप लेता है, लेकिन चिकित्सीय परामर्श से। उस पर यह अंकित भी होता है, लेकिन समाजवादी पार्टी के लोगों का पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता है नहीं, इसलिए आप लोग ऐसी बाते करते हैं।  समय आने पर होगी बुलडोजर कार्रवाई, तब चिल्लाइएगा नहीं  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी सदन में रखी। मुख्यमंत्री ने कहा अब तक 79 अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 225 अभियुक्त नामज़द हैं। 78 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है और 134 फर्मों पर छापेमारी की कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की गहराई में जाएंगे तो बार-बार यही तथ्य सामने आता है कि कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी से जुड़ा कोई नेता या व्यक्ति इसमें संलिप्त पाया जाता है। अवैध लेन-देन भी लोहिया वाहिनी के एक पदाधिकारी के खाते के माध्यम से हुआ है। एसटीएफ पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने इस लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ा है और इसमें सफलता भी प्राप्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। सीएम ने बुलडोजर एक्शन को लेकर समाजवादी पार्टी पर तंज कसा। कहा कि चिंता मत कीजिए, समय आने पर बुलडोजर एक्शन की पूरी तैयारी रहेगी, उस समय चिल्लाइएगा नहीं।

सीएम योगी का अलर्ट: यूपी की विधानसभा सीट पर वोटिंग में बढ़ा मत विभाजन, SIR आंकड़ों से हुई पुष्टि

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में लोकभवन में हुई एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में भी एसआईआर का मुद्दा ही छाया रहा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 25-25 उन विधानसभा सीटों का ब्योरा सबके सामने सिलसिलेवार रखा, जहां या तो सर्वाधिक वोट कटे हैं या फिर बहुत कम वोट कटे हैं। दोनों ही स्थितियों को चिंताजनक बताया गया। सर्वाधिक वोट कटने के मामले में गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट प्रदेश में पहले नंबर पर है। इस फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर प्रयागराज की उत्तरी सीट है। वर्ष 2025 की वोटर लिस्ट के लिहाज से देखें तो साहिबाबाद में अभी तक केवल 58 फीसदी ही वोट बन पाए हैं। यानि 42 फीसदी नाम नहीं हैं। जबकि प्रयागराज उत्तर में तुलनात्मक रूप से 40 फीसदी से अधिक नाम अभी सूची में नहीं हैं। इस सूची में लखनऊ की उत्तरी, पूर्वी सहित चार सीटें शामिल हैं। इसी तरह कानपुर, आगरा, बरेली, मेरठ, मथुरा आदि महानगरों की सीटें भी वोट कटने के मामले में टॉप-25 की लिस्ट में शामिल हैं। यह वे सीटें हैं जहां 30-32 से लेकर 42 फीसदी तक वोट 2025 की वोटर लिस्ट की तुलना में अभी शामिल नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा कार्यकर्ता एसआईआर का काम कर रहे हैं मगर अभी इसमें और तत्परता दिखानी होगी। अभी एसआईआर पर जितना काम कर लोगे तो समझो दो तिहाई चुनाव निपट जाएगा। उन्होंने ऐसी 25 सीटों की लिस्ट भी पढ़कर सुनाई जहां 13-14 फीसदी तक वोट ही कटे हैं। इनमें अमरोहा, शिकारपुर, देवबंद, जलेसर, सिरसागंज, मथुरा-वृंदावन, सीतापुर, एटा की मारहरा, कानपुर की सिकंदरा, आंवला, जसराना, फूलपुर आदि विधानसभा सीटें इसमें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विधायक अनुशासन के साथ सोमवार को सदन में मौजूद रहें। वंदेमातरम पर सदन में चर्चा होगी। बैठक में भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का स्वागत किया गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर, निषाद पार्टी प्रमुख डा. संजय निषाद, अपना दल (एस) की ओर से आशीष पटेल, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना मौजूद रहे। 32 फीसदी से अधिक वोट कटने वाली सीटें गाजियाबाद की साहिबाबाद-42 प्रतिशत, प्रयागराज उत्तर-40.9 प्रतिशत, लखनऊ उत्तर-39, लखनऊ ईस्ट-35, कैंट-37 प्रतिशत, सरोजनी नगर-32 प्रतिशत, कानपुर कैंट-34 फीसदी, कल्याणपुर-34 प्रतिशत, कानपुर दक्षिण-34 प्रतिशत, आर्य नगर-33 प्रतिशत, आगरा छावनी-35 प्रतिशत, आगरा दक्षिण-33 प्रतिशत, आगरा उत्तर में 33 प्रतिशत, बरेली-34, बरेली कैंट-35, मेरठ-34 प्रतिशत, गाजियाबाद-34, मथुरा-वृंदावन-34 प्रतिशत। ढाई से तीन करोड़ वोटर अभी कम, यह आपका वोट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कम वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने या हारने वालों को चेताया। कहा कि यदि तीन प्रतिशत भी वोट कट गया तो ऐसे लोगों के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे सभी लोग सतर्क हो जाएं। दावतें, कहीं आना-जाना, अनुष्ठान सब काम छोड़ कर एसआईआर में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि ढाई से तीन करोड़ वोटर कम है। यह वोट किसका है। यह वोट आपका है। नये वोटर बनाने पर फोकस कीजिए। सभी घुसपैठियों और फर्जी वोटरों को मतदाता सूची से बाहर कराइए। उन्होंने कहा कि भाजपा के हर नेता, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि के लिए इस समय एसआईआर से महत्वपूर्ण और कोई काम नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी संदिग्ध वोटर हैं, किसी एक ही पते पर यदि बड़ी संख्या में वोटर हैं तो ऐसे सभी लोगों की पड़ताल कर उन्हें सूची से बाहर कराइए। इसके लिए व्यापक पैमाने पर आपत्तियां दाखिल करने को फार्म-7 का प्रयोग कीजिए। उन्होंने दोहराया कि कोई भी सही नाम वोटर बनने से वंचित न हो और कोई फर्जी व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी विधानसभा व लोकसभा के चुनाव इसी मतदाता सूची से होंगे जबकि प्रधानी व निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची के आधार पर होंगे। कम एसआईआर वाली सीटों पर विधायकों का कटेगा टिकट प्रदेश की जिन विधानसभा सीटों पर एसआईआर कम है, वहां के विधायकों की टिकट पर संकट है। उन्हें दो टूक शब्दों में समझा दिया गया कि जिन्हें चुनाव नहीं लड़ना वो स्पष्ट बता दें लेकिन एसआईआर में पार्टी के साथ धोखा ना करें। अगले पांच दिन सब काम छोड़कर केवल वोट बढ़ाने में जुटें। ऐसी तमाम बातें रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एसआईआर पर आयोजित पार्टी की प्रदेश स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कम वोटों के अंतर से विधानसभा चुनाव जीतने-हारने वालों को चेताया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री चुघ ने कहा कि एसआईआर पर अभी की गई मेहनत अगले 20 साल काम आने वाली है। आने वाले आठ विधानसभा व लोकसभा चुनाव इसी मतदाता सूची से होंगे।

दीनी जलसे से लौटते समय हादसा: बिजनौर में कार–डंपर टक्कर, 4 की गई जान

 बिजनौर बिजनौर के हरिद्वार मार्ग पर स्थित जालपुर गांव के पास एक डंपर और क्रेटा कार की जोरदार भिड़ंत में चार लोगों की जान चली गई. मृतक लोग राहतपुर गांव में आयोजित एक दीनी जलसे से वापस लौट रहे थे, तभी उनकी कार आगे चल रहे डंपर में पीछे से जा घुसी.  जानकारी के मुताबिक, मरने वालों में प्रवचन देने वाले मौलाना कारी इकबाल और उन्हें छोड़ने जा रहे अशफाक, एतेशाम और सलाउद्दीन शामिल हैं. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से शवों को कार से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. जलसे से लौटते वक्त हुआ हादसा यह दर्दनाक वाकया उस समय हुआ जब राहतपुर गांव में दीनी जलसा समाप्त हुआ था. जलसे में प्रवचन देने आए मौलाना इकबाल कारी को सराय आलम गांव छोड़ने के लिए तीन युवक क्रेटा कार में सवार होकर निकले थे. जैसे ही उनकी गाड़ी जालपुर गांव के नजदीक पहुंची, वह आगे चल रहे डंपर से टकरा गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और सभी लोग गाड़ी के अंदर ही फंस गए. गांव में पसरा मातम हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू हुआ. हालांकि, जब तक लोगों को बाहर निकाला गया, चारों की सांसें थम चुकी थीं. पूर्व प्रधान मोहम्मद मुस्तफा और अन्य ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है. मौलाना और उनके साथियों की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है. सीएम योगी बिजनौर में हुए सड़क हादसे का संज्ञान लिया है. उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. सीएम ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए और घायलों के समुचित उपचार के लिए कहा है.