samacharsecretary.com

जब सरकार ने सुनी मिट्टी की पुकार, गोड़बहाल के गेट से फिर बह निकली उम्मीद की जल

जब सरकार ने सुनी मिट्टी की पुकार, गोड़बहाल के गेट से फिर बह निकली उम्मीद की जल *सुशासन तिहार—जहां शिकायतें फाइलों में नहीं, खेतों तक पहुंचकर होती  हैं समाधान * रायपुर  महासमुंद के पिथौरा विकासखंड के परसापाली गांव में शाम होते ही खेतों के किनारे बुजुर्ग किसान रामलाल यादव अक्सर गोड़बहाल जलाशय की तरफ टकटकी लगाकर देखते रहते थे।  सालों से यही जलाशय पोटापारा और परसापाली के खेतों की प्यास बुझाता आया था। पर इस बार बरसात से पहले ही उसका मुख्य गेट जर्जर होकर जवाब दे गया। गेट से पानी रिसता रहता, खेतों तक पानी पहुंचता ही नहीं। बीज पड़े रहे, मगर सिंचाई न होने से फसल का सपना अधूरा रह जाता। “साहब, बीज बो दिए, पर पानी नहीं पहुंचा तो सब मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी,”— यही दर्द लेकर रामलाल और गांव के दर्जनों किसान सुशासन तिहार के समाधान शिविर में पहुंचे। मंच पर उनकी बात सुनी गई, कागजों में दर्ज हुई, और सबसे बड़ी बात—भूली नहीं गई। शिकायत सुनते ही कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने उसी वक्त जल संसाधन विभाग को निर्देश भेजे। अगली सुबह कार्यपालन अभियंता अजय खरे अपनी टीम के साथ गोड़बहाल पहुंचे। टूटे गेट को देखा, औजार मंगवाए और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत शुरू कर दी। तीन दिन बाद जब गेट फिर से मजबूत होकर खड़ा हुआ, तो गांव में जैसे त्योहार जैसा माहौल हो गया। पानी का पहला प्रवाह जब नहरों में उतरा, तो खेतों की सूखी मिट्टी ने जैसे राहत की सांस ली। रामलाल की आंखें भर आईं।  “सालों से यही शिकायत करते आए, पर इस बार  मुख्य मंत्री श्री विष्णुदेव की सरकार सरकार ने सच में सुनी। सुशासन तिहार ने हमारी आवाज को सीधे अफसरों तक पहुंचा दिया। अब  गोड़बहाल से निकलने वाला पानी सिर्फ खेतों को नहीं सींच रहा, वो किसानों के भरोसे को भी सींच रहा है।  राज्य सरकार के लिए ये सिर्फ एक गेट की मरम्मत नहीं है। ये इस बात का सबूत है कि जब शासन ग्रामीणों की मांग को प्राथमिकता देता है, तो फसलों के साथ-साथ उम्मीदें भी फिर से लहलहा उठती हैं।

कोलियारी समाधान शिविर में दूर हुईं ग्रामीणों की समस्याएं

कोलियारी समाधान शिविर में दूर हुईं ग्रामीणों की समस्याएं ​ ​रायपुर           छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “सुशासन तिहार 2026” के तहत जनपद पंचायत नारायणपुर के ग्राम कोलियारी में आयोजित समाधान शिविर सफल रहा। आम जनता की समस्याओं को उनके घर-द्वार पर ही सुलझाने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में प्रशासन द्वारा मौके पर ही कई आवेदनों का त्वरित निराकरण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई।      ​गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में 'सुशासन तिहार' का व्यापक जन-समस्या निवारण अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य शासकीय सेवाओं को सीधे जनता तक पहुँचाना और उनकी शिकायतों का ऑन-स्पॉट समाधान सुनिश्चित करना है। ​विभिन्न विभागों को मिले 176 आवेदन, पंचायत विभाग अव्वल       ​कोलियारी के इस शिविर में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 176 आवेदन दर्ज किए गए। आंकड़ों के लिहाज से सबसे अधिक 58 आवेदन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को प्राप्त हुए। इसके बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में 41, कृषि विभाग में 17 और विद्युत विभाग में 13 आवेदन जमा किए गए। ​इसी तरह ​ऊर्जा/क्रेडा के 9,पीएमई के 8, मत्स्य व परिवहन के  6-6, PMGSY (आरईएस) के 5,​जल संसाधन के 3,उद्योग, राजस्व व आदिम जाति कल्याण के 2-2,​महिला एवं बाल विकास, वन, शिक्षा व सहकारिता के 1-1 आवेदन प्राप्त हुए। ​स्वास्थ्य के लिए स्वेच्छानुदान और बुजुर्गों को डिजिटल राहत    ​शिविर में संवेदनशील पहल करते हुए गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 21 हितग्राहियों को 5-5 हजार रुपये कुल 1 लाख रुपये की स्वेच्छानुदान राशि का चेक प्रदान किया गया। इसके साथ ही डिजिटल कनेक्टिविटी को सुगम बनाते हुए खाद्य विभाग द्वारा मौके पर ही वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) का ई-केवाईसी (e-KYC) सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ​खुशहाली की चाबी और 'गोद भराई' की रस्म     ​शिविर में न केवल समस्याओं का समाधान हुआ, बल्कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी सीधे तौर पर हितग्राहियों को सौंपा गया। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में ​04 हितग्राहियों को उनके सपनों के 'प्रधानमंत्री आवास' की चाबियां सौंपी गईं। इसी तरह ​02 परिवारों को नए राशन कार्ड वितरण के साथ-साथ ​5 गर्भवती माताओं की पारंपरिक रूप से 'गोद भराई' की रस्म संपन्न कराई गई। ​एक ही छत के नीचे समाधान से खिले ग्रामीणों के चेहरे      ​दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने इस बात पर बेहद संतोष जताया कि उन्हें एक ही छत के नीचे सभी विभागों की सेवाएं और अधिकारी मिल गए, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत हुई। शिविर में उपस्थित अधिकारियों ने लोगों को शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की बारीकियों से अवगत कराया और उन्हें पात्रता अनुसार लाभ लेने की प्रक्रिया समझाई। ​इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के जिला व जनपद स्तर के आला अधिकारी-कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

तेज हवाएं और बारिश बढ़ाएंगी परेशानी, छत्तीसगढ़ में 48 घंटे का मौसम अलर्ट जारी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भीषण गर्मी और उमस के बीच अब प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज आंधी और गरज-चमक का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी और विदर्भ क्षेत्र में सक्रिय चक्रवाती सिस्टम का असर प्रदेश के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इस बदलाव से तापमान में गिरावट और मौसम में नमी बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। कई जिलों में हुई झमाझम बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान रायपुर, बस्तर, दुर्ग, महासमुंद और आसपास के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में शनिवार को 62.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि बस्तर संभाग के कई इलाकों में भी जोरदार बारिश हुई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। दिनभर बादल छाए रहने और ठंडी हवाएं चलने से मौसम सुहावना बना रहा। ग्रामीण इलाकों में किसानों ने भी इस बारिश को राहत भरी बताया है। बिलासपुर सबसे गर्म, रायपुर में तापमान गिरा मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राजधानी रायपुर में न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और बादलों की सक्रियता के कारण अगले कुछ दिनों तक तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इन मौसम प्रणालियों का दिख रहा असर मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और तमिलनाडु के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इसके अलावा पश्चिम विदर्भ से मन्नार की खाड़ी तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो लगातार नमी को मध्य भारत और छत्तीसगढ़ की ओर खींच रही है। इसी वजह से प्रदेश में बादलों का घना जमाव, गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। अगले दो दिनों तक ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवाएं, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी। विभाग के अनुसार इस दौरान मौसम अचानक बदल सकता है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से लोगों को खुले क्षेत्रों, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस दौरान बिजली गिरने का खतरा अधिक रहता है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम? राजधानी रायपुर में सोमवार को आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक दिनभर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवा चल सकती है। रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। शाम के समय मौसम में  बदलाव देखने को मिल सकता है। किसानों के लिए राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश गर्मी से राहत देने के साथ-साथ खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचें और बिजली कड़कने के समय सुरक्षित स्थानों पर रहें। मौसम विभाग की अपील मौसम विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि बिजली चमकने के समय खुले स्थानों में न रहें, और पेड़ों तथा बिजली के खंभों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। तेज बारिश और आंधी के दौरान सुरक्षित जगहों पर शरण लेने की सलाह दी गई है, साथ ही मौसम से जुड़े ताज़ा अपडेट पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। विभाग के अनुसार, प्रदेश में यह बदला हुआ मौसम आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

महिला सुरक्षा से कुपोषण तक एक्शन प्लान तैयार, बस्तर बैठक में शाह ने दिए बड़े निर्देश

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जगदलपुर में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी।  बैठक में राज्यों के विकास के साथ-साथ गंभीर सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर कड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में चारों राज्यों में अपराध नियंत्रण, विशेषकर महिलाओं के उत्पीड़न और रेप जैसे मामलों पर जल्द फैसले लेने पर चर्चा की गई। विकास, समन्वय और सीमावर्ती मुद्दों पर चर्चा मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी फोकस रहा। बस्तर को नई पहचान देने की कोशिश बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक खत्म होने के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजरें टिकी हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए केंद्र सरकार बस्तर को लेकर अपना भविष्य का विजन और बड़ा रोडमैप देश के सामने रखेगी। इसके जरिए सरकार यह साफ संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब केवल संघर्ष या नक्सलवाद की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में यह अंचल पर्यटन, निवेश, तेज विकास और बड़ी प्रशासनिक गतिविधियों के एक नए और मजबूत केंद्र के रूप में उभरेगा, जिसकी शुरुआत इस सफल बैठक से हो चुकी है। वर्चुअल हो सकती थी बैठक- दीपक बैज बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने तंज कसा। बैज के मुताबिक एक तरफ प्रधानमंत्री देश से पेट्रोल-डीजल बचाने और वर्क फ्रॉम होम करने का आह्वान करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही गृहमंत्री और मुख्यमंत्री उनकी बातों को हवा में उड़ा रहे हैं। जब केंद्रीय गृह मंत्रालय और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सचिवालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की हाईटेक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, तो इस बैठक को वर्चुअल भी किया जा सकता था।

रेलवे मेंटेनेंस के चलते चार दिन नहीं चलेगी बिलासपुर-गेवरारोड मेमू ट्रेन

बिलासपुर. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के चांपा-गेवरारोड सेक्शन के मध्य स्थित मड़वारानी स्टेशन में अधोसंरचना विकास के अंतर्गत अतिरिक्त लूप लाइन की कमीशनिंग हेतु प्री-नॉन इंटरलॉकिंग तथा नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा. इसके वजह से बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर 21 मई से 24 मई तक नहीं चलेगी. भविष्य में इस सेक्शन की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इस दौरान 21 से 24 मई तक गाड़ी संख्या 68734/68733 बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी. 21 से 24 मई तक गाड़ी संख्या 68732/68731 बिलासपुर-कोरबा-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद रहेगी. देवरी अंडरब्रिज पर 5 दिन बंद रहेगा सड़क यातायात बिलासपुर. बिलासपुर मंडल क्षेत्राधिकार के अंतर्गत रेलवे अंडरब्रिज में लोगों को बेहतर सड़क आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रेल प्रशासन प्रतिबद्ध है. रेलवे प्रशासन द्वारा सारागांव-बाराद्वार स्टेशनों के मध्य किमी 655.862 से 655.867 में स्थित देवरी रेल अंडरब्रिज को 20 मई (बुधवार) से 24 मई (रविवार) तक पूर्णतः बंद कर रोड मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्य करने का निर्णय लिया गया है. इसके फलस्वरूप यह रेल अंडरब्रिज 20 मई (बुधवार) से 24 मई (रविवार) तक सड़क आवागमन हेतु पूर्णतः बंद रहेगी. इस अवधि में सड़क यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में पास में ही स्थित रेल अंडरब्रिज संख्या 54 (सोननदी ब्रिज) तथा भारत माला अंडरब्रिज का उपयोग किया जा सकता है. 

मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल होंगे योगी आदित्यनाथ, CM साय ने किया स्वागत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल होने पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री साय ने उन्हें राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप उन्हें सम्मान दिया। बता दें कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक का आयोजन आज बस्तर में किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय, विकास और प्रशासनिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच विभिन्न समसामयिक मुद्दों, राज्यों के बीच आपसी समन्वय तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में सुशासन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

तबादलों की नई लिस्ट जारी, पुलिस विभाग में बदली गई कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां

रायपुर  छत्तीसगढ़ के पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल की सूचना मिली है। यहां बेमेतरा जिले में ASI, प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों के तबादले किए गए है। एक साथ 140 पुलिसकर्मियों के तबादले हुए हैं। डीआईजी रामकृष्ण साहू के निर्देश के बाद ट्रांसफर आदेश जारी किया गया है। इस बदलाव को कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जारी सूची के मुताबिक, कई ASI, प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों के तबादले और नई पदस्थापनाएं की गई हैं। करीब 140 पुलिसकर्मियों का एक साथ ट्रांसफर किया गया है। उन्हें वर्तमान पदस्थापना स्थान से हटाकर नई जगह पर तैनात किया गया है। पुलिस विभाग में यह बड़ा फेरबदल प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के उद्देश्य से किया गया है। ट्रांसफर आदेश के साथ विस्तृत सूची भी जारी की गई है, जिसमें प्रत्येक कर्मचारी का पदनाम, नाम, वर्तमान पदस्थापना और नई पदस्थापना स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है। पुलिसकर्मियों को जल्द ही अपने-अपने कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि जिले में पुलिस व्यवस्था और अधिक सक्रिय होगी। साथ ही अपराधों पर नियंत्रण और जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान में भी सुधार देखने को मिलेगा।

सौतेली बहन की याचिका खारिज, बच्चों ने कोर्ट में कहा- हमें संप्रेक्षण गृह में कोई डर नहीं

बिलासपुर. बच्चों की मार्मिक कहानी सुनने के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दोनों बच्चों को फिलहाल बाल संप्रेक्षण गृह में ही कड़े विधिक संरक्षण में रखने का अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर मासूम बच्चों ने अपनी मर्मस्पर्शी व्यथा सुनाई। बच्चों ने कोर्ट से कहा कि हम बंदी नहीं हैं, बल्कि बाल संप्रेक्षण गृह में पूरी तरह सुरक्षित हैं। याचिकाकर्ता के पति ने बच्ची के साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। बच्चों के इस चौंकाने वाले बयान और विधिक तथ्यों की पुष्टि के बाद कोर्ट ने आदेश दिया। दरअसल, सरगुजा क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी नाबालिग सौतेली बहन और भाई को कुछ लोगों ने अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा है। याचिकाकर्ता महिला ने बच्चों को अपने साथ रखने की मांग करते हुए उनकी सुरक्षा करने वाली एक समाज सेविका, महिला एवं बाल संप्रेक्षण गृह के अधिकारियों सहित अन्य को पक्षकार बनाया था। चीफ जस्टिस की डीबी में मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि बच्चों को बंदी नहीं बनाया गया है, बल्कि उनकी सुरक्षा और विधिक संरक्षण के दृष्टिगत उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह में रखा गया है। इस पर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए न्यायालय ने बच्चों को कोर्ट में प्रस्तुत करने कहा। कोर्ट के निर्देशानुसार, पुलिस सुरक्षा में दोनों बच्चों को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के समक्ष प्रस्तुत किया गया। भाई-बहन ने कोर्ट में बताई पूरी सच्चाई न्यायालय के समक्ष दोनों भाई-बहन ने पूरी सच्चाई बताई। बच्चों ने बताया कि याचिकाकर्ता सौतेली बहन के पति ने नाबालिग बच्ची से तीन बार दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। इस गंभीर अपराध की प्राथमिकी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा चुकी है और आरोपी फरार है। कोर्ट ने मासूम बच्चों द्वारा दी गई इस बेहद गंभीर जानकारी को प्रशासनिक और विधिक स्तर पर तत्काल सत्यापित कराया। तथ्यों की पुष्टि होने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला की नीयत को भांपते हुए बच्चों को उसकी सुपुर्दगी में देने से साफ इंकार कर दिया और उन्हें संप्रेक्षण गृह में ही रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने मामले के समस्त विधिक तथ्यों को रिकार्ड पर लेते हुए प्रतिवादी समाज सेविका को अपना पक्ष व जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की गई है।

वैश्विक तनाव ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, अमृतसर में मशरूम उद्योग पर संकट गहराया

अमृतसर. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की। हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है। उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है। मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे। मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।

बादल अकादमी में सजी संस्कृति की महफिल, अमित शाह ने लिया लोकनृत्यों का आनंद

जगदलपुर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने बस्तर दौरे के दौरान बादल अकादमी पहुंचे, जहां उन्होंने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा और लोकनृत्य प्रस्तुतियों का आनंद लिया। कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक लोक संस्कृति की रंगारंग झलक देखने को मिली। मंच पर लोक गीत, गेड़ी नृत्य, शहीद गुंडाधुर पर आधारित नाट्य प्रस्तुति, ‘जादू बस्तर’ और लोक कलाकार लखेश्वर बुधराम के गीतों ने माहौल को पूरी तरह बस्तरमय बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुति ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस खास मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और लोक कला की सराहना की। कार्यक्रम के समापन के बाद सभी अतिथि नेता बादल अकादमी में ही रात्रि भोज में शामिल होंगे, जहां अनौपचारिक चर्चा के साथ बस्तर के विकास और सांस्कृतिक पहचान पर भी बातचीत होने की संभावना है।