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मोहाली के रिलायंस गोदाम में आग से ग्रॉसरी और राशन जल गए, खड़े वाहन भी चपेट में; दमकल की गाड़ियां मौके पर

मोहाली बनूड़ के नजदीक स्थित खेड़ी गांव में रिलायंस के एक गोदाम में अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते गोदाम में रखा ग्रॉसरी का सामान, राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं जलकर पूरी तरह खाक हो गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने के बाद गोदाम से ऊंची-ऊंची लपटें उठती दिखीं, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। आग ने पास में खड़े एक वाहन को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह भी बुरी तरह जल गया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कर दी गईं। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। हालांकि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। फिलहाल प्रशासन द्वारा नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और आग पूरी तरह बुझने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। आग पर काबू पाने के लिए प्रयास जारी घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कर दी गईं। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका हालांकि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। फिलहाल प्रशासन द्वारा नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और आग पूरी तरह बुझने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

Patiala School Threat: ईमेल से मिली धमकी के बाद स्कूलों में हड़कंप, बच्चों की छुट्टी

पटियाला. पटियाला के स्कूलों को फिर धमकी भरी ईमेल मिली है। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के माता-पिता को मैसेज भेज स्कूल से लेकर जाने के लिए कहा। बीते 9 अप्रैल को भी पटियाला में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी से दहशत फैल गई थी। स धमकी में खास तौर पर यादविंद्र पब्लिक स्कूल का नाम भी शामिल बताया गया था। धमकी मिलने के तुरंत बाद स्कूल प्रबंधन ने सतर्कता दिखाते हुए अभिभावकों को संदेश भेजकर स्थिति की जानकारी दी और जरूरी सावधानी बरतने की अपील की। वहीं, 23 अप्रैल को लुधियाना के कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिला था। नमें स्प्रिंग डेल पब्लिक स्कूल, पौदार इंटरनेशनल स्कूल, मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल, बीआरएस नगर का डीएवी पब्लिक स्कूल शामिल थे। पहले भी मिल चुकी है धमकी इससे पहले 10 मार्च को भी लुधियाना के कुछ स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी, जिससे हड़कंप मच गया था। सुबह करीब 7 बजे ई-मेल के जरिए सीबीएसई से संबंधित 3 स्कूलों को धमकी भरा संदेश मिला था, जिसमें स्कूल परिसर में बम होने की बात कही गई थी। धमकी भरा मेल मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंच गईं थी और स्कूल परिसरों की गहन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया था।

जसबीर, पंजाबी यूट्यूबर, 10 महीने बाद जेल से बाहर, पाकिस्तान के लिए जासूसी का था आरोप, बोले- भाई का कर्ज चुकाऊंगा

चंडीगढ़  पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने ने जासूसी और संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोपी यूट्यूबर जसबीर सिंह को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने देश की सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा की हो।  अदालत ने यह भी माना कि आरोपी करीब दस माह से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से गुप्त सूचना और कथित स्वीकारोक्ति बयान पर आधारित हैं। जसबीर सिंह पर आरोप था कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में रहकर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा कर रहा था। हालांकि जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से किसी प्रकार की चैट या संपर्क का ठोस प्रमाण नहीं मिला। अदालत ने कहा कि जिन वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया गया वे भाखड़ा बांध और मोहाली हवाई अड्डे जैसे सार्वजनिक स्थानों से जुड़े हैं, जहां आम लोगों की पहुंच रहती है। ऐसे में इन्हें गोपनीय सूचना मानना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित धाराओं और कानूनी प्रक्रिया के पालन में कमी रही है, जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हुआ है।  वह सभी के शुक्रगुजार रहेंगे। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि राज्य सरकार यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी कि जसबीर किसी पाकिस्तानी नागरिक या खुफिया अधिकारी के संपर्क में था। जिन वीडियो को जासूसी का सबूत बताया गया था, वे सार्वजनिक स्थानों के थे, जहां आम जनता जा सकती है। साथ ही पुलिस उनके मोबाइल से किसी भी तरह की चैट या गोपनीय जानकारी साझा करने का कोई स्वतंत्र और ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। इसी आधार पर उन्हें जमानत मिल गई। हालांकि अभी तक उन्होंने मीडिया से दूरी बनाकर रखी हुई है। वह अपने यूट्यूब चैनल से अपनी बात रख रहे हैं। जेल में पता लगा परिवार कितना प्यार करता है जॉन माहल ने अपने खेतों से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने जेल के दिनों को याद करते हुए भावुक बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वह जेल का समय याद करते हैं, उनकी आंखें भर आती हैं। माहल ने बताया कि जब परिवार उनसे मिलने जेल आता था, तो बीच में जाली लगी होती थी। एक तरफ वह होते थे और दूसरी तरफ उनका परिवार। उन्हें देखकर परिवार रोने लगता था, वहीं उनके भाई भी भावुक हो जाते थे। उस समय उन्हें एहसास हुआ कि परिवार उनसे कितना प्यार करता है। उन्होंने कहा कि बाद में वह घरवालों से कहने लगे थे कि मिलने न आया करें। भाई का कर्ज कभी नहीं चुका पाऊंगा माहल ने अपने भाई का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल समय में उसने उनका बहुत साथ दिया। तीन-चार महीने तक वह लगातार कोर्ट में बैठा रहा। पुरानी यादें साझा करते हुए माहल ने बताया कि जब वह बाहर थे, तब उन्होंने करियर में आगे बढ़ने के लिए काफी पैसा लगाया था। इसी दौरान उनके पिता का एक्सीडेंट हो गया और वह कोमा में चले गए। वहीं उनकी मां को ट्यूमर हो गया। तीन-चार महीनों के भीतर दोनों का निधन हो गया। माहल ने कहा कि उस मुश्किल दौर में उनके भाई ने माता-पिता की जिस तरह सेवा की, उसका एहसान वह जिंदगीभर नहीं चुका सकते।

पंजाब CM की प्रेस कांफ्रेंस आज: बीजेपी और विरोधी दलों को निशाना बनाएंगे

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने पर बने हालातों के बीच पंजाब CM भगवंत मान आज (29 अप्रैल) चंडीगढ़ में एक प्रेस कांफ्रेंस करेंगे। इस कांफ्रेंस में वह केंद्र सरकार व बीजेपी पर हमलावर रहेंंगे। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। इसमें पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वह जिस सवालों को लेकर आज आए थे उनके जवाब वह कल होने वाली प्रेस कांफ्रेंस में देंगे। इसके बाद सीएम ने शाम को कैबिनेट मीटिंग के बाद पोस्ट डालकर जानकारी दी थी कि एक तारीख को मई दिवस मौके वह स्पेशल सेशन बुला रहे हैं, जो श्रमिकों को समर्पित रहेगा। इस दौरान मुलाजिम नेताओं को सेशन के लिए आमंत्रित किया जाएगा। मान सबसे बड़े गद्दार हैं जब से आम आदमी पार्टी के सांसद बीजेपी में शामिल हुए है, तब से राज्य में राजनीति गरमाई हुई है। आप समर्थकों ने उन सांसदों के घरों का घेराव किया है। उनके घरों के बाहर गद्दार तक लिखा है। सीएम भी उन्हें गद्दार कह चुके हैं। वहीं, मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि दल बदलना गद्दारी है, तो मुख्यमंत्री भगवंत मान सबसे बड़े 'गद्दार' हैं, क्योंकि उन्होंने भी पहले अपनी पुरानी पार्टी (पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब) छोड़ी थी। शर्मा ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा और अन्य नेताओं द्वारा आप सरकार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने मान को एक "कठपुतली" बताया जो असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विधानसभा सत्र का दुरुपयोग कर रही है और केंद्र के खिलाफ झूठ और भ्रम फैलाकर लोगों के बीच द्वेष पैदा कर रही है। आप विधायक जाने वाले हैं पंजाब कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा एक प्रेस कांफ्रेंस में कुछ दिन पहले दावा कर चुके हैं कि आम आदमी पार्टी के 60 से 65 विधायक पार्टी बदलने वाले हैं। उन्होंने दावा किया है कि पंजाब में "महाराष्ट्र जैसा" राजनीतिक फेरबदल होने वाला है। महाराष्ट्र का जहाज मोहाली आकर लग गया है। इस जहाज में चढ़ने वाले व्यक्ति सीएम भगवंत मान होंगे। उन्होंने सीएम को पंजाब का एकनाथ शिंदे" कहा था।

Punjab Assembly Special Session: मजदूर दिवस पर BJP के खिलाफ निंदा प्रस्ताव की तैयारी तेज

चंडीगढ़. एक मई को मजदूर दिवस के मौके पर पंजाब सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें मई दिवस के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सदन में प्रस्ताव लाने पर भी मुहर लगी। हालांकि, सियासी हलकों में इस सत्र को लेकर महज औपचारिकता से कहीं ज्यादा राजनीतिक तापमान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस विशेष सत्र में विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है। मजदूरों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना मनरेगा और उससे जुड़े ढांचागत बदलावों के चलते मजदूर वर्ग पर पड़ रहे प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच श्रमिकों के सामने खड़ी चुनौतियों को भी एजेंडे में शामिल किया गया है। सत्र का सबसे अहम और चर्चित पहलू राजनीतिक रहने वाला है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में जाने के घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि विधानसभा के भीतर भाजपा के खिलाफ जोरदार बहस हो सकती है और निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। यह पहला मौका नहीं है जब ऐसे मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाया जा रहा हो। इससे पहले सितंबर 2022 में भी ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर पंजाब सरकार ने विशेष सत्र बुलाने की कोशिश की थी। 27 सितंबर को विश्वास प्रस्ताव पास किया उस समय राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव भी सामने आया था। बाद में 27 सितंबर को सत्र आयोजित कर सरकार ने अपना विश्वास प्रस्ताव पास किया था।उस दौरान आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि उनकी सरकार गिराने के लिए भाजपा विधायकों को लालच दे रही है। इस मामले में मोहाली में केस भी दर्ज कराया गया था। अब एक बार फिर राज्यसभा सदस्यों के घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।ऐसे में माना जा रहा है कि मजदूर दिवस के बहाने बुलाए गए इस विशेष सत्र में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहेगा और सत्ता पक्ष भाजपा को घेरने की पूरी कोशिश करेगा।

होशियारपुर में सरपंच का अनोखा कदम, रेलवे ने नहीं दिया गेटमैन तो खुद दिखाते हैं ट्रेन को हरी झंडी

होशियारपुर  गढ़शंकर के गांव बसियाला के सरपंच गुरदेव सिंह बिना गार्ड वाले रेलवे क्रॉसिंग पर एक अनौपचारिक गेटमैन की भूमिका निभा रहे हैं। सरपंच गुरदेव सिंह खुद मोर्चा संभालते हुए फाटक खोलते और बंद करते हैं। रेलवे विभाग ने अब तक फाटक पर कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया है, जिसके कारण सरपंच को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। इस स्थिति के चलते गांववासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सरपंच गुरदेव सिंह ने कहा कि मुझे डर है कि कभी भी किसी बड़े हादसे का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण मुझे खुद फाटक खोलने और बंद करने का काम करना पड़ता है। हमने कई बार अधिकारियों से इस मामले में मदद मांगी है, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला। हमें एक रास्ता यहां से रेलवे ने दिया है जो नवांशहर के गांव मुबारिकपुर में निकलता है। जबकि हमारे गांव बसियाला व रसूलपुर गढ़शंकर में पड़ते है। इसके अलावा यह रास्ता दोपहर और शाम के समय महिलाओं के अकेले आने जाने के लिए तो खतरनाक है। गन्ने की ट्रॉलियां भी इस रास्ते से नहीं निकल सकती। गांव वासियों के फाटक पर पहले एक व्यक्ति दस हजार सैलरी पर रखा था। वह भी काम छोड़ गया। उसके बाद से मैं खुद ही फाटक खोलने बंद करने का काम करता हूं।  ग्रामीणों ने चंदा इकठ्ठा कर लगवाया फाटक फाटक नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर फाटक लगवाया, ताकि आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसके बावजूद कई बार रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यहां कर्मचारी तैनात करने की मांग की गई और इसके लिए ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कुछ समय के लिए ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को मासिक वेतन पर रखा भी, लेकिन कुछ ही समय बाद वह काम छोड़कर चला गया।  सरपंच में खुद संभाली जिम्मेदारी इसके बाद सरपंच गुरदेव सिंह ने खुद यह जिम्मेदारी संभाल ली. वह दिन में दो बार, जब ट्रेन आने का समय होता है. अपनी दुकान छोड़कर फाटक पर पहुंचते हैं. पहले वह मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से फोन पर ट्रेन की जानकारी लेते हैं, फिर समय पर फाटक बंद कर देते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को सुरक्षित गुजरने का संकेत देते हैं।  न हो कोई हादसा इसलिए खुद ली जिम्मेदारी गुरदेव सिंह का कहना है कि उन्हें हमेशा इस बात का डर रहता है कि कहीं लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा न हो जाए, इसलिए उन्होंने इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मान लिया है. गांव के लोग भी उनके इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं।  गांववासियों का कहना है कि यह रास्ता महिलाओं और बच्चों के लिए भी खतरनाक हो सकता है, खासकर जब वे अकेले इस रास्ते से गुजरती हैं। गांववासियों ने बार-बार विभिन्न नेताओं और अधिकारियों को ज्ञापन देकर रेलवे से इस फाटक पर कर्मचारी तैनात करने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पहले रेलवे ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, लेकिन गांववासियों के संघर्ष के बाद इसे फिर से खोला गया। हालांकि, फाटक पर कर्मचारियों की तैनाती अभी तक नहीं की गई है। पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने हाल ही में केंद्रीय राज्य रेलवे मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मिलकर इस समस्या का समाधान करने की अपील की थी। बिट्टू ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी और एक टीम भेजकर कर्मचारी तैनात किया जाएगा। गांववासियों की मांग है कि रेलवे विभाग शीघ्र इस समस्या का समाधान करें और फाटक पर सुरक्षा के लिए कर्मचारी तैनात करें, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

CBSE स्कूलों में नया बदलाव, विद्यार्थियों के लिए लिया गया बड़ा फैसला

लुधियाना   सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने विद्यार्थियों की पढ़ाई की क्वालिटी और सुधारों के उद्देश्य से बड़े बदलाव किए हैं। स्कूलों के पारंपरिक क्लासरूम, जो अब तक केवल चार दीवारी और ब्लैक बोर्ड तक सीमित थे, अब स्किल लैब के रूप में नजर आएंगे। सी.बी.एस.ई. ने सत्र 2026-27 के लिए यह बड़े बदलाव किए हैं जिससे विद्यार्थी किताबी दुनिया से निकलकर जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे। नए बदलावों के तहत अब रटने की आदत को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है और पढ़ाई को पूरी तरह प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस किया जाएगा। बोर्ड ने कक्षा तीसरी से ही आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस (एआई) और कोडिंग को अनिवार्य कर दिया है। विद्यार्थी अब इंटरडिसीप्लिनरी प्रोजैक्ट्स के माध्यम से सीखेंगे कि अलग-अलग विषय एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। उदाहरण के तौर पर स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजैक्ट पर काम करते समय वे बजट कैलकुलेशन के लिए मैथ्स, एनर्जी मैनेजमेंट के लिए साइंस और शहरी नियोजन के लिए सोशल साइंस का एक साथ प्रयोग करेंगे। इसके अलावा, 'स्किल सैटरडे' जैसे नवाचारों के जरिए बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी और पब्लिक स्पीकिंग जैसे जीवन कौशल विकसित किए जाएंगे। परीक्षा का नया पैटर्न : रटने की आदत होगी खत्म  बोर्ड ने परीक्षा के तनाव को कम करने और योग्यता को परखने के लिए इवैल्यूएशन पैटर्न में भी बड़ा बदलाव किया है। अब पेपर में 50 प्रतिशत सवाल कॉम्पिटैंसी यानी योग्यता और व्यावहारिक प्रयोग पर आधारित होंगे। अब किताब के पीछे दिए गए प्रश्नों को रटकर अच्छे मार्क्स लाना मुश्किल होगा। मनोचिकित्सकों के अनुसार, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और इस नए परीक्षा पैटर्न से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और मानसिक तनाव कम होगा। व्यावहारिक होगी गणित  गणित की जटिलताओं को दूर करने के लिए स्कूलों में 'रियल लाइफ मैथ सिमुलेशन' का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में मिनी मार्कीट बनाए जाएंगे, जहां विद्यार्थी खुद दुकानदार और ग्राहक बनेंगे। इस एक्टिविटी से वे डिस्काऊंट, प्रॉफिट और लॉस जैसे कठिन समीकरणों को रटने के बजाय प्रैक्टिकली हल करना सीखेंगे।

ट्रैक ब्लास्ट के बाद सुरक्षा कड़ी, पंजाब में हाई अलर्ट; अमृतसर सहित प्रमुख स्टेशनों पर जांच तेज

अमृतसर. पटियाला रेल ट्रैक ब्लास्ट के बाद पंजाब में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। कल देर रात पटियाला में रेलवे ट्रैक पर हुए ब्लास्ट के बाद पूरे पंजाब में सिक्योरिटी के इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। इस घटना ने रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। खासकर बड़े शहरों के रेलवे स्टेशनों पर चेकिंग कैंपेन तेज कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अनचाही घटना को रोका जा सके। अमृतसर रेलवे स्टेशन पर GRP, RPF और लोकल पुलिस मिलकर खास चेकिंग कर रही है। स्टेशन में आने वाले हर यात्री की तलाशी ली जा रही है और सामान की भी गहराई से चेकिंग की जा रही है। इसके अलावा, सिक्योरिटी टीमें भी ट्रेनों पर सतर्कता से नजर रख रही हैं। हर प्लेटफॉर्म पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है, जिससे पैसेंजर में सिक्योरिटी की भावना बढ़ गई है। ब्लास्ट में मारे गए युवक की पहचान सूत्रों के मुताबिक, इस ब्लास्ट में जगरूप सिंह नाम के एक युवक का नाम सामने आ रहा है, जो तरनतारन जिले के गांव पंजवाड़ का बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक ऑफिशियली इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग एंगल से जांच चल रही है। सिक्योरिटी एजेंसियां ​​यह भी जांच कर रही हैं कि इस घटना के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है। पुलिस की आम जनता से सतर्क रहने की अपील DSP रेलवे अरविंदर सिंह ने मीडिया को बताया कि रूटीन चेकिंग पहले भी होती रही है, लेकिन ऐसी घटना के बाद और ज़्यादा सावधान रहना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि GRP और RPF की कई टीमें लगातार स्टेशनों और ट्रेनों में चेकिंग कर रही हैं। इसके साथ ही एंटी-सैबोटेज टीमें भी तैनात की गई हैं, जो हर संदिग्ध एक्टिविटी पर नजर रख रही हैं। पुलिस ने आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की है। यात्रियों से कहा गया है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध व्यक्ति या लावारिस चीज दिखे तो तुरंत रेलवे पुलिस या नजदीकी कर्मचारी को बताएं। पुलिस का कहना है कि जनता के सहयोग से ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और यात्रा को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सकता है।

रेल ट्रैक ब्लास्ट मामले में बड़ी सफलता, ISI लिंक मॉड्यूल का खुलासा, चार आरोपी पकड़े गए

चंडीगढ़ धमाके के 24 घंटे से भी कम समय में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पंजाब पुलिस ने मंगलवार को पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित एक 'खालिस्तान समर्थक' आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। यह मॉड्यूल शंभू शहर के पास रेलवे ट्रैक पर देर रात धमाके की कोशिश के लिए जिम्मेदार था। पुलिस ने इस मामले में चार कट्टरपंथी और आदतन अपराधियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से भारी मात्रा में आतंकवादी उपकरण बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मानसा के प्रदीप सिंह खालसा, मानसा के बप्पियाना गांव के कुलविंदर सिंह उर्फ बग्गा, तरनतारन के पंजवार के सतनाम सिंह उर्फ सत्ता और तरनतारन के गोइंदवाल बाईपास के गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी के रूप में हुई है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न जघन्य अपराधों के मामले दर्ज हैं। बरामद किए गए सामान में एक हैंड ग्रेनेड, दो 30 बोर पिस्तौलें, गोला-बारूद, विस्फोटों में इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी रूप से संचार उपकरण और लैपटॉप शामिल हैं, जिनका उपयोग वे अपने संचालकों के साथ संवाद करने के लिए करते थे। पटियाला रेंज के उप महानिरीक्षक कुलदीप चहल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वरुण शर्मा ने मीडिया को बताया कि रेलवे ट्रैक पर विस्फोट के प्रयास के लिए जिम्मेदार आतंकी मॉड्यूल का रिकॉर्ड 12 घंटे के अंदर पर्दाफाश हो गया। उन्होंने कहा कि आरोपी खालसा इस मॉड्यूल का मुख्य सरगना था और मलेशिया स्थित खालिस्तान समर्थक आतंकवादी के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित हथियार आपूर्तिकर्ताओं के भी करीबी संपर्क में था। उन्होंने बताया कि आरोपी खालसा कट्टरपंथी युवाओं को आतंकी प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजता था और फिर उन्हें आतंकी गतिविधियों का काम सौंपता था। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी ने 'चलदा वहीर चक्रवर्ती, अतरिये' नाम से एक कट्टरपंथी संगठन भी बनाया है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने शंभू रेलवे स्टेशन पर मुख्य लाइन पर कम तीव्रता वाला आईईडी विस्फोट किया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे-संपत्तियों पर और हमले करने की योजना बना रहे थे। पटियाला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111, विस्फोटक अधिनियम की धारा 3, 4 और 5, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13, 16, 18 और 20 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है।

बिल्डिंग नियमों पर बड़ा फैसला: कोर्ट की रोक के बाद पंजाब सरकार ने बायलॉज लिए वापस

लुधियाना. पंजाब में बिल्डिंग बनाने वालों को नियमों में छूट नहीं मिलेगी जिसके तहत सरकार ने नए बाईलॉज वापस ले लिए हैं। यहां बताना उचित होगा कि शहरी विकास विभाग द्वारा पिछले साल दिसम्बर के दौरान यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज जारी किए गए थे। जिसमें नगर निगम के एरिया में भी कमर्शियल व रिहायशी बिल्डिंग बनाने वालों को कवरेज के मामले में काफी छूट दी गई थी लेकिन यह बाईलॉज जारी होने के कुछ देर बाद ही कोर्ट द्वारा उसे लागू करने पर रोक लगा दी गई। अब भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस चल रहा है। इसी बीच सरकार द्वारा 2025 के यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज वापस लेने का फैसला कर लिया गया है। इस संबंध में नोटिफिकेशन सोमवार को अर्बन डिवैल्पमैंट विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी के हवाले से जारी किया गया जिसके मुताबिक अगले आदेश तक पंजाब की नगर निगम में 2018 और पुडा के एरिया में 2021 के बिल्डिंग बाईलॉज लागू होंगे। कमर्शियल व रिहायशी कैटेगरी को यह दी गई थी राहत  – टी.पी. स्कीम के एरिया में 60 फुट रोड पर नगर निगम के जरिए सरकार कमर्शियल रोड डिक्लेयर करवाने की लंबी प्रक्रिया से छूट। – कोर एरिया में 3 लाख प्रति ई.सी.एस. के हिसाब से पेड पार्किंग की शर्त पर 21 मीटर तक कवरेज की सुविधा। -ऑल अराउंड सेट बैक छोड़ने के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई की सीमा 15 से बढ़ाकर 21 मीटर की गई थी। -किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग में 20 फीसदी फ्रंट सैटबैक छोड़ने की शर्त को 20 मीटर अधिकतम पर किया गया था फिक्स। – 40 फुट रोड पर स्थित 200 गज के रिहायशी मकान की ग्राऊंड फ्लोर पार्किंग के छोडने के बाद 21 मीटर उंचाई तक 4 मंजिला निर्माण करने का प्रावधान। कोर्ट केस में 93 वर्षीय याचिकाकर्त्ता द्वारा यह उठाए गए थे मुद्दे  इस मामले को लेकर कोर्ट में चल रहे केस में याचिकाकर्त्ता 93 वर्षीय महिला हैं जिनके द्वारा मुद्दा उठाया गया है कि नए बिल्डिंग बाईलॉज इससे पहले से लागू फायर प्रिवैंशन एक्ट व नैशनल बिल्डिंग कोड के प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। इसके अलावा जिस रियल एस्टेट एडवायजरी कमेटी की सिफारिशों को आधार बनाकर नए बिल्डिंग बाईलॉज तैयार किए गए हैं, उस कमेटी में बिल्डर व डिवैल्पर शामिल हैं और उनकी सुविधा का ध्यान रखा गया है जिससे रिहायशी इलाके में बडी संख्या में कर्मिशयल बिल्डिंगों का निर्माण करने का रास्ता साफ हो गया है लेकिन यह फैसला लेने से उन इलाकों में रहने वाले लोगों को विश्वास में नही लिया गया।