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नवागढ़ की गुफाओं से फोर्ट विलियम तक, जानें शहीद बख्तर साय और मुंडल सिंह के बलिदान की गौरवशाली कहानी

गुमला आज 4 अप्रैल को बख्तर साय व मुंडल सिंह का शहादत दिवस है. देश की आजादी में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. ऐसे तो गुमला में कई वीर पैदा हुए, जिन्होंने इस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेज) से लोहा लिया. इतना ही नहीं, वो अपनी साहस, शक्ति, सूझबूझ से अंग्रेजों को पराजित भी किया. इन्हीं वीर सपूतों में गुमला जिला स्थित रायडीह प्रखंड के बख्तर साय व मुंडल सिंह हैं. जिन्होंने ना इस्ट इंडिया कंपनी का विरोध किया, बल्कि उन्हें छोटानागपुर क्षेत्र में घुसने का सबक भी सिखाया. इस लड़ाई में दोनों शहीद हो गए, लेकिन आज भी गुमला जिले में इन दोनों वीर सपूतों को याद किया जाता है. इन दोनों वीरों की वीरता की कहानी आज भी रायडीह प्रखंड के वादियों में गूंजती है और लोगों के जुबान से इन सपूतों का वीरभाव सुनने को मिलता है. इन दोनों ने जिस बहादुरी से अंग्रेजों को खदेड़ा है. यह इस क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. आज वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन बख्तर साय व मुंडल सिंह की पूजा आज भी गुमला जिले में होती है. अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान बख्तर व मुंडल ने नवागढ़ क्षेत्र की गुफाओं को अपना घर बनाया. यह गुफा आज भी इस क्षेत्र में साक्षात है. जहां दोनों सेनानी रहते थे. जिस तालाब का पानी पीते थे. वह तालाब भी है. युद्ध के दौरान यह तालाब रक्त से भर गया था. इसलिए इसे रक्त तालाब भी कहा जाता है.  शिवलिंग जहां दोनों पूजा करते थे. वह भी नवागढ़ में है. गढ़पहाड़ जहां युद्ध हुआ था. वह पहाड़ आज भी युद्ध की कहानी कह रही है. वीर सेनानियों की यह भूमि आज भी अंग्रेजों के पराजय की कहानी बयां करती है. बख्तर साय ने हीरा राम का सिर काट कर अंग्रेजों को भेजा था बख्तर साय नवागढ़ परगना (वर्तमान में रायडीह प्रखंड) के जागीरदार थे. उन्होंने इस्ट इंडिया कंपनी को खुली चुनौती दी. उनसे लोहा ले उसे पराजय का मुंह दिखाया. इस्ट इंडिया कंपनी की टुकड़ी बख्तर साय के सामने टिक नहीं सकी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा. पराजय के बाद अंग्रेज छोटानागपुर के महाराजा ह्रदयनाथ शाहदेव से संधि किये. उसके बाद अंग्रेज 12 हजार रुपये टैक्स वसूली करने लगे. उस समय अंग्रेज टैक्स वसूली के लिए कड़ा रूख अपना लिये थे. जागीरदार व रैयत पैसा दे देकर परेशान हो गये थे. अंग्रेजों से संधि के बाद महाराजा ह्रदयनाथ शाहदेव ने हीरा राम को टैक्स वसूली के लिए नवागढ़ भेजा. बख्तर साय ने हीरा राम का सिर काट कर महाराजा को भेजवा दिया. महाराजा इससे अत्यंत क्रोधित हुए. इस्ट इंडिया कंपनी को इसकी सूचना दी गयी. 11 फरवरी 1812 को रामगढ़ मजिस्ट्रेट ने लेफ्टीनेंट एचओ डोनेल के नेतृत्व में हजारीबाग के सैन्य टुकड़ी को नवागढ़ के जागीरदार को पकड़ने के लिए भेजा. इसी बीच रामगढ़ बटालियन के कमांडेंट आर गार्ट ने छोटानागपुर के बारवे (वर्तमान में रायडीह, चैनपुर व डुमरी), जशपुर व सरगुजा के राजा को पकड़ने के लिए एक पत्र लिखा. साथ ही पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी करने की सहायता मांगी. जशपुर राजा के साथ आर गार्ट का अच्छा संबंध था. इसका फायदा उठाते हुए लेफ्टीनेंट एचओ डोनेल ने हजारों सैनिकों के साथ मिलकर नवागढ़ को घेर लिया. अंग्रेजों के मंसूबों की जानकारी पनारी परगना के जागीरदार मुंडल सिंह को हो गयी थी. वे बख्तर साय की सहायता के लिए नवागढ़ पहुंच गए. दोनों ने मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया. अंग्रेजों की कूटनीति में दोनों वीर फंसकर शहीद हुए थे नवागढ़ में 1812 के आसपास घना जंगल था. ऊंचे ऊंचे पहाड़ थे. अंग्रेजों को मुंडल सिंह व बख्तर साय तक पहुंचने में परेशानी होने लगी. अंग्रेजों ने एक विशेष रणनीति के तहत नवागढ़ को चारों ओर से घेर लिया. बख्तर साय व मुंडल सिंह जगह बदल कर आरागढ़ा के गुफा में रहने लगे. अंग्रेजों को जब इसकी जानकारी हुई, तो वे गुफा तक जाने वाली नदी की धारा के पानी को गंदा कर दिया. जिससे बख्तर साय व मुंडल सिंह अपने सैनिकों के साथ पानी पी न सके. अंग्रेजों की इस कूटनीति चाल के बाद बख्तर व मुंडल जशपुर (छत्तीसगढ़ राज्य) के राजा रणजीत सिंह के यहां गए. जहां से दूसरे स्थान पर निकलने के कारण दोनों 23 मार्च 1812 को पकड़े गए. 4 अप्रैल 1812 को दोनों को कलकत्ता के फोर्ट विलियम में फांसी की सजा दे दी गई थी.

नीतीश का इस्तीफा कब आएगा? नई सरकार के गठन की तारीख तय, बीजेपी का सीएम उम्मीदवार कौन होगा?

पटना  बिहार में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ होती दिख रही है. नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद अब उनका दिल्ली जाना पक्का हो गया. सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ ही नीतीश को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा भी मिल जाएगी, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है.बिहार में अब नई सरकार के गठन का फाइनल शेड्यूल भी तय हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी?  नीतीश कुमार मीडिया के साथ बातचीत का सिलसिला बंद कर चुके हैं. ऐसे में लोगों के मन सवाल है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्यता की कब शपथ लेंगे और सीएम पद कब छोड़ेंगे. इसके अलावा नई सरकार का गठन कब तब हो जाएगा, इन सभी सवाल से अब तस्वीर साफ होने जा रही है।  सीएम पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही सरकार गठन की औपचारिकता अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाएगी. ऐसे में नई सरकार के गठन का शेड्यूल फाइनल हो गया है. कौन मुख्यमंत्री बनेगा और कौन कुर्सी पर होगा विराजमान, ये बीजेपी को तय करना?  नीतीश कुमार सीएम पद से कब देंगे इस्तीफा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. इसी बीच नीतीश कुमार के दिल्ली जान का शेड्यूल सामने आ गया है. सीएम नीतीश के आवास पर 6 अप्रैल को जेडीयू के कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि 6 अप्रैल को नीतीश कुमार के साथ होने वाली बैठक में जेडीयू के दिग्गज नेता कोई अहम फैसला लेंगे।  पटना में जेडीयू नेताओं के साथ बैठक के बाद नीतीश कुमार दिल्ली आएंगे. नीतीश 9 अप्रैल को दिल्ली में जेडीयू राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस दौरान कई अहम फैसले ले सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी नेताओं के साथ भी उनकी मुलाकात का कार्यक्रम में है।  मोदी-शाह के मुलाकात के बाद क्या छोड़ेंगे पद नीतीश कुमार दिल्ली प्रवास के दौरान पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर सकते हैं. 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण करेंगे. माना जा रहा है कि 10 अप्रैल की ही नीतीश कुमार दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. पीएम से नीतीश कुमार बिहार की नई सरकार के गठन पर चर्चा कर सकते हैं।  राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना फाइनल हो जाएगा. हालांकि, राज्यसभा सदस्य रहते हुए भी नीतीश छह माह तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं. खरमास खत्म होने के साथ ही राज्यपाल को नीतीश कुमार अपना मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में नई सरकार गठन का शेड्यूल फाइनल नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया बीजेपी शुरू कर देगी. माना जा रहा है कि राजधानी पटना में 12 और 13 अप्रैल में से किसी दिन एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है. इस बैठक में एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के चुनने में नीतीश कुमार के पसंद का भी ख्याल रखा जाना है. यह बात बीजेपी और जेडीयू दोनों ही तरफ से कही जा चुकी है. नीतीश के इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी नई सरकार के लिए अपनी एक्सरसाइज शुरू कर देगी।  मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते ही बीजेपी नई सरकार के गठन के लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री के चेहरे को चुनाव करना होगा. नए मुख्यमंत्री को चुनने में बीजेपी के साथ नीतीश कुमार का भी रोल होगा. ऐसे में मान जा रहा है कि खरमास के बाद नई सरकार के गठन की कवायद होगी, जिसके लिए एक्सरसाइज शुरू हो चुकी है. अब गेंद बीजेपी के पाले में है।  बीजेपी किसे बनाएगी बिहार का नया सीएम बिहार में यह तय है कि मुख्यमंत्री बीजेपी का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर पार्टी अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही है जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम बीजेपी से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा. बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाती है, ये बात सभी के लिए एक पहेली बनी हुई है. ऐसे में कई नामों पर चर्चा है, लेकिन किसी पर अभी तक फाइनल मुहर नहीं लगी है।  हालांकि, बिहार के नए सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपने संकेत दे चुके हैं. समृद्धि यात्रा में जनसंवाद के दौरान नीतीश कुमार ने मंच पर सम्राट चौधरी के के कंधे पर हाथ रखकर सियासी संदेश देते रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है।  बीजेपी क्या बिहार में भी चौंकाएगी यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है.बीजेपी ने 2014 से अपने फैसले से चौंकाती रही है. देखा गया है कि जिसके नाम की चर्चा रहती है, उसे पार्टी सीएम नहीं बनती।  हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे.मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजन लाल शर्मा और दिल्ली में रेखा गुप्ता को बीजेपी ने सीएम बनाकर चौंका दिया था. ऐसे में अब देखना है कि बिहार में किसे सत्ता की कमान सौंपती है। 

भीषण गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग का फैसला, अब सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगी कक्षाएं

पटना  बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने छात्रों को बड़ी राहत दी है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी किया है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूल अब मॉर्निंग शिफ्ट में चलेंगे. यह नया नियम 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक लागू रहेगा. क्या है नया टाइम-टेबल? नए शेड्यूल के मुताबिक, अब स्कूल सुबह 6:30 बजे शुरू हो जाएंगे. आधे घंटे की प्रार्थना के बाद सुबह 7:00 बजे से पढ़ाई शुरू होगी. बच्चों को दोपहर 12:20 बजे छुट्टी दे दी जाएगी. मिड-डे मील के लिए सुबह 9:00 से 9:40 बजे तक का समय तय किया गया है. विभाग ने यह भी कहा है कि जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है, वहां हेडमास्टर दो शिफ्टों में खाना खिला सकते हैं ताकि भीड़ न हो. डीएम को स्पेशल पावर गर्मी की स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने डीएम को भी स्पेशल अधिकार दिए हैं. अगर किसी जिले में गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है या लू का प्रकोप बढ़ता है, तो डीएम अपने स्तर से स्कूल के समय में और भी बदलाव कर सकते हैं. छुट्टियों के बाद फिर बदलेगा समय फिलहाल यह मॉर्निंग शिफ्ट केवल गर्मी की छुट्टियों शुरू होने तक ही लागू रहेगी. जैसे ही गर्मी की छुट्टियां खत्म होंगी और स्कूल दोबारा खुलेंगे, समय वापस पुराना वाला हो जाएगा. यानी तब स्कूल सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेंगे. इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को जरूरी निर्देश भेज दिए गए हैं.

ऑनलाइन हाजिरी में ‘ऑन ड्यूटी’ का खेल पड़ा भारी, शिक्षा विभाग ने दी वेतन कटौती और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

नवादा  जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में जिला शिक्षा विभाग ने 386 शिक्षक-शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। डीपीओ स्थापना शिव कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 30 मार्च को कई शिक्षकों ने अटेंडेंस स्टेटस कॉलम में 'प्रेजेंट' और अटेंडेंस टाइप में 'मार्क ऑन ड्यूटी' दिखाया। हालांकि, 'मार्क ऑन ड्यूटी रीजन' कॉलम में या तो खाली छोड़ा गया था या 'डेपुटेशन' और 'ऑफिस वर्क' दर्ज किया गया था। कटेगा शिक्षकों का वेतन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों का उल्लंघन और मनमानी माना है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर सही उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत पर वेतन कटौती की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में काफी खलबली मच गई है। कारण बताओ नोटिस जारी शिक्षा विभाग को जैसे ही या जानकारी मिली उनके द्वारा तुरंत ही सभी लोगों को कारण बताओं नोटिस थमा दिया गया है। गुरुवार को नोटिस भेज कर लोगों को या कहा गया है कि तीन दिन के अंदर सभी लोग नोटिस का जवाब भी दे। इससे पूर्व भी शिक्षा विभाग में 500 से अधिक शिक्षकों पर कार्रवाई कर चुके थे और एक बार फिर से नवादा में शिक्षकों की गजब की कारनामा देखने को मिला है। शिक्षा विभाग अलर्ट ध्यान रहे कि हाल के दिनों में शिक्षकों की ओर से हाजिरी बनाने को लेकर कुछ छेड़छाड़ का मामला बांका में अंजाम दिया गया था। ऐसी ही एक घटना पूर्व में जमुई में हुई थी। उसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई की है। हालांकि, बिहार के अन्य स्कूलों में शिक्षक ऑनलाइन अपनी हाजिरी बना रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन कई स्कूलों में ठीक नहीं रहने की वजह से शिक्षक कभी छत पर जाकर और कभी पेड़ का सहारा लेकर हाजिरी बनाते हैं। वैसी स्थिति को भी शिक्षा विभाग को समझना होगा। ई- शिक्षाकोष से छेड़छाड़ के मामले को गंभीरता से लिया गया है। आशुतोष कुमार पांडेय

भभुआ, सासाराम और रांची के लिए अब दिल्ली का सफर हुआ आसान, रेलवे ने शुरू की नई ट्रेन और जानें पूरा टाइम-टेबल

रांची भारतीय रेलवे ने बिहार और झारखंड के लोगों के लिए एक नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है. यह ट्रेन आनंद विहार से पुरुलिया तक जाएगी. यह ट्रेन दिल्ली और झारखंड के बीच सीधी कनेक्टिविटी देगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. इस इलाके के लोगों को होगा फायदा इस ट्रेन का खास फायदा बिहार के शाहाबाद और मगध इलाके के लोगों को मिलेगा. भभुआ रोड, सासाराम और डेहरी-ऑन-सोन जैसे स्टेशनों से अब दिल्ली जाना आसान हो जाएगा. खासकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए यह ट्रेन एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है. टाइम और रूट के बारे में जानिये आनंद विहार से सुबह 5 बजे चलने वाली ट्रेन रात 10:40 बजे पुरुलिया पहुंचेगी. रास्ते में यह मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी कैंट, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी-ऑन-सोन, गढ़वा रोड, डालटोनगंज, रांची और मुरी स्टेशन पर रुकेगी. वापसी में यह ट्रेन पुरुलिया से शाम 5 बजे रवाना होगी और अगले दिन रात 11:10 बजे आनंद विहार पहुंचेगी. यानी यात्रियों को दोनों तरफ से सफर का अच्छा टाइमिंग मिल जाएगा. रेलवे ने इस ट्रेन को फिलहाल साप्ताहिक रखा है. ट्रेन संख्या 14022 हर गुरुवार को दिल्ली से चलेगी, जबकि 14021 हर शुक्रवार को पुरुलिया से वापसी करेगी. ट्रेन में क्या-क्या सुविधा इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल कोच लगाए गए हैं. इससे हर वर्ग के लोग अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से यात्रा कर पाएंगे. यह नई ट्रेन बिहार और झारखंड के यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है. इससे सफर आसान होगा, समय बचेगा और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

रांची से जमशेदपुर तक अधिकारियों का तबादला, गजेंद्र सिंह संयुक्त आयुक्त और उमाशंकर सिंह बने सहायक आयुक्त

रांची झारखंड के प्रशासनिक महकमे से बड़ी खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने मद्य एवं उत्पाद विभाग झारखंड में बड़े पैमाने पर तबादले करते हुए नई पोस्टिंग की अधिसूचना जारी कर दी है. इस फेरबदल में सहायक आयुक्त, अधीक्षक और निरीक्षक स्तर के कई अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है. टॉप लेवल पर बदलाव जारी आदेश के अनुसार, गजेंद्र कुमार सिंह को संयुक्त आयुक्त उत्पाद, रांची के पद पर पदस्थापित किया गया है. वहीं उमाशंकर सिंह को बोकारो से स्थानांतरित कर सहायक आयुक्त उत्पाद, रांची बनाया गया है. इसके अलावा, संजय कुमार मेहता को मुख्यालय से हटाकर बोकारो में सहायक आयुक्त उत्पाद की जिम्मेदारी दी गई है. जिलों में बड़े स्तर पर फेरबदल सरकार ने कई जिलों में पदस्थापित अधिकारियों का तबादला किया है.     अरविंद कुजूर को पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) से रामगढ़ भेजा गया है.     अरुण कुमार मिश्र को रांची से पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) स्थानांतरित किया गया है.     सुनील कुमार चौधरी को हजारीबाग में सहायक आयुक्त उत्पाद बनाया गया है.     रामलीला रवानी को धनबाद से हटाकर दुमका (संथाल परगना प्रमंडल) में प्रभारी उपायुक्त उत्पाद बनाया गया है. प्रभारी पदों पर नई जिम्मेदारी     राकेश कुमार को प्रभारी उपायुक्त उत्पाद (मुख्यालय), रांची बनाया गया है.     मनोज कुमार को प्रभारी सहायक आयुक्त उत्पाद (मुख्यालय), रांची की जिम्मेदारी दी गई है.     अजय कुमार गोंड को प्रभारी सहायक आयुक्त उत्पाद, धनबाद बनाया गया है, साथ ही उन्हें अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है. अधीक्षक और निरीक्षक स्तर पर भी बदलाव अधीक्षक और निरीक्षक स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं.     जितेंद्र कुमार को साहेबगंज से पाकुड़ भेजा गया है.     आशुतोष कुमार को पाकुड़ से मुख्यालय EIB में प्रभारी अधीक्षक बनाया गया है.     शैलेंद्र कुमार को सिमडेगा से कोडरमा भेजा गया है.     शिव कुमार साहू को हजारीबाग से गिरिडीह में प्रभारी अधीक्षक बनाया गया है.     विमला लकड़ा को रामगढ़ से देवघर भेजा गया है.     क्षितिज विजय मिंज को गुमला से सरायकेला-खरसावां स्थानांतरित किया गया है. कई जिलों में निरीक्षकों की नई तैनाती निरीक्षक स्तर पर भी कई अहम बदलाव हुए हैं.     संजय कुमार श्रीवास्तव को देवघर से दुमका भेजा गया है.     प्रेम प्रकाश उरांव को जमशेदपुर से चतरा में नई जिम्मेदारी मिली है.     रंजन तिवारी को लातेहार से चाईबासा भेजा गया है.     संजीत कुमार देव को पलामू से गढ़वा स्थानांतरित किया गया है.     प्रवीण कुमार राणा को साहेबगंज से गोड्डा भेजा गया है. इसके अलावा कई अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारी दी गई है. सरकार का मानना है कि इस बड़े पैमाने पर किए गए तबादले से विभागीय कामकाज में तेजी आएगी और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा.

अब सुबह 7:30 बजे से खुलेंगे आंगनबाड़ी केंद्र, लू के खतरे को देखते हुए समाज कल्याण विभाग ने जारी किया नया टाइम-टेबल

पटना  राज्य भर में तेजी से बढ़ रही गर्मी और लू की आशंका को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव किया गया है। समाज कल्याण विभाग के निर्देशानुसार राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्र सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर साढ़े ग्यारह बजे तक संचालित होंगे। यह बदलाव छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए किया गया है, ताकि दोपहर की तेज धूप, उमस और गर्मी में उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या न हो। क्या है नया समय? नए समय में केंद्र सुबह जल्दी शुरू होकर दोपहर से पहले ही बंद हो जाएंगे, जिससे पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रह सकेंगी। समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि गर्मी की तीव्रता और बढ़ती है तो संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) समय में और बदलाव करने या आंगनबाड़ी केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद करने का अधिकार रखते हैं। विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में सतर्क रहने और स्थिति की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। पोषाहार वितरण का सवाल गर्मी के मौसम में पोषाहार वितरण में कोई भी कोताही बरतने वाली आंगनबाड़ी सेविका या सहायिका पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी सेविका-सहायिकाओं को निर्देश दिया है कि पोषाहार की नियमित आपूर्ति, गुणवत्ता और वितरण सुनिश्चित करें। पोषण वाटिका और अन्य गतिविधियां भी नए समय के अनुसार सुचारू रूप से चलाई जाएंगी। अभिभावकों से अपील अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को नए निर्धारित समय (सुबह 7:30 से 11:30 बजे तक) के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र भेजें। साथ ही गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं हल्के सूती कपड़े पहनाना, पर्याप्त पानी पिलाना और दोपहर में बच्चों को घर के अंदर रखना। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सुबह समय पर केंद्र पहुंचकर सभी गतिविधियां (पोषाहार वितरण, प्री-स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य जांच आदि) निर्धारित समय में पूरी करें। राज्य सरकार की यह पहल बच्चों और कमजोर वर्गों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विभाग लगातार मौसम की स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आगे के निर्देश जारी किए जाएं

तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी, झारखंड के 13 जिलों में शनिवार को बिगड़ेगा मौसम का हाल

  रांची झारखंड में मौसम लगातार करवट ले रहा है. शुक्रवार को दिनभर आंशिक बादल छाए रहे और शाम होते-होते रांची और कोडरमा में तेज हवा के साथ बारिश हुई. इससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन आने वाले दिनों में मौसम और बदलने वाला है. 4 से 6 अप्रैल तक येलो अलर्ट मौसम विभाग ने 4 अप्रैल से 6 अप्रैल तक राज्य में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है. इस दौरान कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है. इन जिलों में बारिश और तेज हवा की चेतावनी शनिवार को पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बारिश हो सकती है. इसके साथ ही 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है. रविवार-सोमवार को और तेज होगा असर मौसम विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को भी कई इलाकों में बारिश और गरज के साथ बादल छाए रहेंगे. इस दौरान हवा की रफ्तार बढ़कर 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. अप्रैल में टूट सकता है गर्मी का रिकॉर्ड मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, अप्रैल में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. पिछले 10 वर्षों में 2016 में अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, जो इस बार टूट सकता है. इस महीने के पहले सप्ताह में बारिश से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन दूसरे और तीसरे सप्ताह में तापमान तेजी से बढ़ेगा और महीने के अंत तक हीट वेव की स्थिति बन सकती है. तापमान का हाल पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक 5 मिमी बारिश रामगढ़ में हुई. वहीं, सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री सरायकेला में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री गुमला में रिकॉर्ड किया गया.

बाबा साहेब की प्रतिमा का अनावरण कर राजभर का सपा पर तीखा हमला, बोले- अखिलेश न पूरी तरह हिंदू बन पा रहे न मुसलमान

मऊ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मऊ जिले के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र स्थित कसारी गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क की प्रतिमा का अनावरण किया. इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए और पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव की दादरी रैली पर पलटवार किया. राजभर ने सपा प्रमुख पर धार्मिक पहचान को लेकर स्पष्ट न होने का आरोप लगाया. उन्होंने खुद को एक ऐसा नेता बताया जो गरीबों के हक के लिए मुख्यमंत्री और अधिकारियों से भी भिड़ सकता है. खुद को बताया 'बेहया' नेता मंच से जनता को संबोधित करते हुए राजभर ने अपनी कार्यशैली पर बेबाकी से बात की. उन्होंने कहा, "हम बहुत बेहया नेता हैं. बेहया उस पौधे की तरह है जो पोखरी में थोड़ा भी हो तो फैल जाता है. मेरा नाम सुनते ही अधिकारी काम कर देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यह हल्ला करेगा." उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जनता के न्याय के लिए डीएम, मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव, किसी से भी लड़ने को तैयार रहते हैं. राजभर ने कहा कि वह मनबढ़ नहीं हैं, बल्कि बाबा साहेब के संविधान की ताकत से गरीबों को न्याय दिला रहे हैं. अखिलेश की धार्मिक पहचान पर सवाल राजभर ने अखिलेश यादव की दादरी रैली पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश जी न तो पूरी तरह हिंदू बन पा रहे हैं और न ही मुसलमान. उन्होंने कहा, "अखिलेश कभी नमाज पढ़ने जाते हैं तो कभी सेवई खाने, लेकिन मंदिर जाने से कतराते हैं. वह पहले यह तय करें कि वह नमाजी हैं या मंदिर वाले." राजभर के मुताबिक, अखिलेश अयोध्या और मथुरा जाने से परहेज करते हैं, जबकि जनता अब उनकी हकीकत समझ चुकी है. गुर्जर समाज को बताया 'कट्टर हिंदू' दादरी में गुर्जर समाज के समर्थन के दावे पर राजभर ने कहा कि गुर्जर समाज कट्टर हिंदू है और वह भगवान राम व कृष्ण को मानता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का दावा खोखला है क्योंकि सोशल मीडिया पर गुर्जर समाज द्वारा सपा के बहिष्कार के वीडियो मौजूद हैं. राजभर ने कहा कि राजा मिहिर भोज की मूर्ति को गंगाजल से धोए जाने के सवाल पर अखिलेश जवाब नहीं दे पाए. उनके अनुसार, लाखों यादव और मुसलमान अब भाजपा के साथ हैं. विपक्षी गठबंधन को बताया 'दगे हुए कारतूस' एनडीए की मजबूती का दावा करते हुए राजभर ने कहा कि उनके गठबंधन में जयंत चौधरी, अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद जैसे नेताओं के पास वोट दिलाने की ताकत है. वहीं, समाजवादी पार्टी के पास केवल 'दगे हुए कारतूस' बचे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का कोई भी नेता सामाजिक न्याय समिति या रोहिणी आयोग की रिपोर्ट पर बात नहीं कर रहा है, सब केवल अपना टिकट पक्का करने के जुगाड़ में लगे हैं.

ऑनलाइन लगान भुगतान का असर, बिहार सरकार के खजाने में आए ₹570 करोड़, सारण जिला फिसड्डी

 पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भू-राजस्व वसूली में 2020 से 2021 के बाद हर फाइनेंशियल इयर में बढ़ोतरी दर्ज की. साल 2024 से 2025 में विभाग ने 570 करोड़ रुपए की वसूली की और बांका जिला सबसे आगे रहा.  पांच साल में बिहार के भू-राजस्व वसूली में दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी हुई है. साल 2020-21 में भू-राजस्व से राज्य सरकार को 253.31 करोड़ रुपए मिले थे. जबकि 2024-25 में यह वसूली 570 करोड़ रुपए हुई. इसमें बांका जिला पहले स्थान पर रहा, जबकि सबसे निचले पायदान पर सारण जिला रहा. पांच साल में करीब 316.69 करोड़ रुपए अधिक भू-राजस्व मिला इस तरह पांच साल में करीब 316.69 करोड़ रुपए से अधिक भू-राजस्व प्राप्त हुआ. जानकारी के मुताबिक, 2025 से 2026 में भू-राजस्व वसूली का लक्ष्य करीब सात सौ करोड़ रुपए रखा गया था. लेकिन फाइनेंशियल इयर की समाप्ति के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अब तक इसकी प्राप्ति का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है. भू-राजस्व वसूली की अधिकतर प्रक्रिया ऑनलाइन सूत्रों के अनुसार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भू-राजस्व वसूली में फाइनेंशियल इयर 2020-21 के बाद हर फाइनेंशियल इयर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है. फिलहाल भू-राजस्व वसूली की अधिकांश प्रक्रिया अब ऑनलाइन हो चुकी है. इस कारण लोगों को अब भू-राजस्व भुगतान के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे. इसके साथ ही अब कहीं से भी बैठकर लोग ऑनलाइन अपने भू-राजस्व का भुगतान कर पा रहे हैं. इस कारण विभाग को भी बैंक अकाउंट के माध्यम से इसकी प्राप्ति हो रही है. भू-राजस्व की यह वसूली कृषि भूमि पर किसानों से लगान और पट्टा शुल्क के रूप में हुई. साथ ही सरकारी जमीन को पट्टे पर देकर जमीन और उसके उपयोग से आय के रूप में प्राप्ति हुई.