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रसिक दुलारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटों की पुष्टि

जबलपुर संत प्रेमानंद के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के सात दिन बाद वृंदावन पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।25 सितंबर को संत प्रेमानंद के वृंदावन स्थित श्रीराधा केलिकुंज आश्रम के पास बने गुरुकृपा कुंज अपार्टमेंट में ही रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी ने चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। गंभीर चोटें मौत का कारण कूदने के पहले उन्होंने टाइल्स काटने वाली ग्राइंडर से अपना प्राइवेट पार्ट काट लिया था। करीब 40 मिनट चले पोस्टमार्टम में मौत का प्रमुख कारण ऊंचाई से गिरने के बाद हुई गंभीर चोटें सामने आई हैं। रिपोर्ट में सिर में फ्रैक्चर और रक्त का थक्का जमने के साथ छाती की चार पसलियां टूटकर फेफड़े में धंसने की बात सामने आई है। सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि चिकित्सकों ने रक्तस्राव रोकने के लिए उपचार किया था। परसवाड़ा में मातम, परिवार को अब भी कई सवाल संत प्रेमानंद के दीक्षित शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी गौर के पास परसवाड़ा से हैं, जहां दीपक का बचपन बीता। आईटीबीपी मार्ग पर अंदर बसा परसवाड़ा इन दिनों उनके परिवार के दुख का साक्षी बना हुआ है। दीपक के नाना प्रेमलाल पटेल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा है। यहीं दीपक का परिवार रहता है। उनकी मां लोंग बाई बेटे की बचपन की तस्वीर सीने से लगाकर बैठी हैं। परिवार की निष्पक्ष जांच की मांग पिता चेतराम लोधी भी बेटे की मौत को लेकर सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि वे किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे, लेकिन घटना की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उनका सवाल है कि आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद दीपक ने यह कदम उठाया। दीपक और उसका परिवार मूल रूप से बरगी डूब क्षेत्र के कठौतिया गांव का रहने वाला था। पिता के काम की तलाश में जबलपुर आने के बाद परिवार परसवाड़ा में नाना के घर रहने लगा। दीपक ने कठौतिया में आठवीं तक पढ़ाई की, बाद में गौर से स्कूली शिक्षा और बरेला से कॉलेज की पढ़ाई की। वर्ष 2023 में वह पहली बार वृंदावन गया।  

‘भारतीय युवा ‘जेन ज़ेड’ नहीं बल्कि ‘जेन बी’ (जनरेशन फॉर विकसित भारत) हैं’ : डॉ. शिवेश प्रताप सिंह

स्वयं के जामवंत खुद बनें युवा – कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत  'भारतीय युवा ‘जेन ज़ेड’ नहीं बल्कि ‘जेन बी’ (जनरेशन फॉर विकसित भारत) हैं' : डॉ. शिवेश प्रताप सिंह युवाओं को मिला नया मंत्र: खुद बनें अपने जामवंत, ‘Gen B’ से विकसित भारत का संकल्प ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के षष्ठम दिवस पर स्वयंसेवकों को युवाओं की भूमिका, भारतीय सभ्यता, मानवीय मूल्यों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। षष्ठम दिवस की शुरुआत प्रभात फेरी, योग-पीटी तथा परिसर में स्वच्छता अभियान से हुई तथा बौद्धिक सत्र कि शुरुवात माँ सरस्वती देवी और प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद जी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित के साथ हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम समन्वयक डॉ हरिशंकर सिंह कंसाना जी द्वारा प्रतिवेदन वाचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलगुरु माननीय डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी ने रामायण के प्रसंग का स्मरण कराते हुए कहा कि जिस प्रकार जाम्बवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का बोध कराया था, उसी प्रकार आज के युवाओं को भी अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्वयं का जाम्बवंत बनना होगा। उन्होंने कहा कि एनएसएस युवाओं को ‘मैं नहीं, हम’ की भावना से सेवा और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। कुलगुरु ने ‘विकसित’ शब्द की प्रेरक व्याख्या करते हुए विमर्श, कर्तव्यपरायणता, सिद्धि और तरंग को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। मुख्य वक्ता डॉ. शिवेश प्रताप सिंह, सीनियर रिसर्च फेलो, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली ने कहा कि भारतीय युवा केवल ‘Gen Z’ नहीं, बल्कि ‘Gen B – Generation for Viksit Bharat’ हैं। उन्होंने AI के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत की नींव तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर एकजुट समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। माननीय कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत जी और डॉ. शिवेश प्रताप सिंह जी के हाथों से सभी स्वयंसेवकों, जिला संगठकों, कार्यक्रम अधिकारियों, और कार्यक्रम समन्वयक जी को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।अंत में शिविर संचालक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना ने स्मृति चिह्न भेंट किया। शिविर संचालक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना, जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में आयोजित बौद्धिक सत्र का मंच संचालन प्रो. मुदिता मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय कुमार पांडे, प्रो. हिंदू सिंह धाकड़, डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ अर्चना सेन, प्रो. विनोद सिंह कुशवाह, डॉ. गिरजा नरवरिया, प्रो. दीक्षा त्यागी एवं प्रो. एच एल. पटेल उपस्थित रहें।कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. मनोज अवस्थी ने अतिथियों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

स्वामित्व योजना में फ्री रजिस्ट्री पर पेंच, पटवारियों के विरोध के बीच सरकार का सख्त रुख

भोपाल  मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे। वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे। विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री 68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है। पटवारियों ने कहा- अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे। सरकार का दावा- बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है। जमीनी मामलों के जानकारों के अनुसार जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती। 5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट भी बेकार नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया। मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे। विशेषज्ञों ने अभियान पर उठाए ये सवाल     जब स्वामित्व योजना के तहत संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?     यदि ऐसे भूखंडों पर लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?     जब भी रजिस्ट्री होती है तो शासन को राजस्व मिलता है। नि:शुल्क रजिस्ट्री में करीब 4000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति के बावजूद शासन को घाटे में डालने वाला अभियान क्यों बनाया गया?     अभियान डिजाइन करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं की पड़ताल क्यों नहीं की गई?

गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों पर सुरक्षा का पहरा, नेताओं की गतिविधियों पर पुलिस की नजर

भोपाल  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज भोपाल में हैं। वे 3 अक्टूबर को अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मध्यप्रदेश में नक्सलमुक्ति के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का यह पहला मप्र दौरा है। वे उच्च स्तरीय बैठकों के साथ अन्य आयोजनों में हिस्सा लेंगे। अमित शाह आज भौरी स्थित आइसर में 500 करोड़ की लागत वाले अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। वे गोपालक सम्मेलन में संबोधन देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उनके कार्यक्रमों पर विरोध प्रदर्शनों का खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए पुलिस कांग्रेस नेताओं की हरेक गतिविधियों पर नजर रख रही है। एक कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में भी लिया गया है। शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात 12.15 बजे भोपाल पहुंचे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रात्रि में भारतीय वायुसेना के विमान से भोपाल आए। सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विमानतल पर उनका स्वागत किया। अमित शाह आज शनिवार को भेल दशहरा मैदान में राज्यस्तरीय गोपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसमें 35 हजार से अधिक गोपालक व सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों के सदस्य शामिल होंगे। वे नए आपराधिक कानूनों के पालन में मप्र की नब्ज भी टटोलेंगे। भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की रखेंगे आधारशिला अमित शाह आज भौरी के आइसर में अत्रि कैंपस की आधारशिला रखेंगे। 52 एकड़ में 'अत्रि' रिसर्च एवं इनोवेशन कैंपस बनेगा। यहां एआई-रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, एडवांस्ड मैटेरियल्स, क्लाइमेट साइंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में रिसर्च होंगे। 500 करोड़ की लागत होगी। कांग्रेस नेता को उनके कार्यालय में ही हिरासत में लिया उधर, केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते पुलिस ने कार्रवाई भी शुरू की है। भोपाल भर में सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर गहरी नजर रखी जा रही है। नरेला में कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला को आफिस में नजरबंद किया गया है। गृहमंत्री अमित शाह का भोपाल दौरा शुक्रवार रात भोपाल आए गृहमंत्री अमित शाह अनेक कार्यक्रमों में करेंगे शिरकत केंद्रीय गृहमंत्री के भोपाल दौरे पर पुलिस सतर्क कांग्रेस नेता को किया नजरबंद शहर में आज कई कार्यक्रम 500 करोड़ के अत्रि कैंपस का शिलान्यास करेंगे गृहमंत्री नक्सलमुक्ति के बाद शाह पहली बार मप्र पहुंचे अब नशा मुक्ति का लक्ष्य

भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री अमित शाह, देर रात स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

भोपाल  .केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात 12 बजे भोपाल पहुंचे। स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डीजीपी कैलाश मकवाना, भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने उनका स्वागत किया। दिल्ली में व्यस्तता के चलते शाह करीब ढाई घंटे की देरी से भोपाल के लिए रवाना हुए। इसके चलते मंत्रियों और विधायकों को स्टेट हैंगर से वापस घर भेज दिया गया था। गोपालक सम्मेलन में 35 हजार लोग शामिल होंगे भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन में 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य शामिल होंगे। इसमें भोपाल के अलावा सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से प्रतिभागियों के पहुंचने की जानकारी है। सम्मेलन में अमित शाह को प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किए गए कार्यों और बलराम कृषि महोत्सव की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए गृह, पशुपालन एवं डेयरी, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग अपने-अपने कार्यों और योजनाओं का प्रस्तुतीकरण करेंगे। पशुपालकों को बोनस, गौशालाओं को मदद कार्यक्रम में शाह भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस वितरित करेंगे। गौशालाओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। गोपालक दीदियों का सम्मान होगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाएंगे। डेयरी क्षेत्र में भी कई घोषणाएं दौरे के दौरान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी प्रसंस्करण से जुड़ी परियोजनाओं की सौगात भी प्रस्तावित है। इनमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपए का डेयरी प्लांट और भोपाल में फॉर्म्युलेटेड/फर्मेंटेड मिल्क प्रोडक्ट से जुड़ी सुविधा शामिल है। भोपाल दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट पर 16.80 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इससे दही, छाछ, लस्सी, श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की योजना है। किसान फोकस क्यों? मध्यप्रदेश विधानसभा में 2026 में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रदेश में 1,11,88,295 किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी थी। सरकार ने विधानसभा में कहा कि जिलावार फार्मर आईडी की जानकारी परिशिष्ट में दी गई है और शेष किसानों की आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि फार्मर आईडी की संख्या को किसान वोटरों की संख्या नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में मतदाताओं को किसान या गैर-किसान के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया जाता। इसलिए किसी जिले में कितने किसान मतदाता हैं, इसका अलग आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक के आंकड़ों में भी मध्यप्रदेश में 1.04 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनने की जानकारी दी गई थी। जून तक राज्य सरकार का आंकड़ा बढ़कर 1.11 करोड़ से अधिक हो गया।

OBC क्रीमीलेयर नियम पर हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, प्रमोशन और वेतन आधार नहीं

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि माता-पिता के वेतनमान और पदोन्नति के आधार पर ही संतान को क्रीमीलेयर में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज करने के आदेश को रद कर दिया और मामले पर नियमों के अनुसार दोबारा विचार करने के निर्देश दिए। 2020 में खारिज हुआ था आवेदन मामला रागिनी राठौर से जुड़ा है। उनके ओबीसी प्रमाण पत्र के आवेदन को अनुविभागीय अधिकारी ने 23 अक्टूबर 2020 को खारिज कर दिया था। इसके बाद रागिनी ने अपर कलेक्टर के समक्ष अपील की, लेकिन 29 नवंबर 2022 को वहां भी एसडीओ के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बाद रागिनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी। पिता की सरकारी नौकरी और वेतन को बनाया था आधार याचिका में बताया गया कि अधिकारियों ने रागिनी के पिता की आय को केवल वेतन के आधार पर देखते हुए उन्हें क्रीमीलेयर की श्रेणी में माना और इसी आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज कर दिया। रागिनी के पिता की प्रारंभिक नियुक्ति सिविल जज वर्ग-दो के पद पर हुई थी। इसके बाद 16 जून 2008 को 40 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उन्हें सिविल जज वर्ग-एक के पद पर पदोन्नति मिली। याचिका के अनुसार, उनके पिता की आय का स्रोत केवल वेतन था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में 11 मार्च 2026 को दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण करते समय केवल माता-पिता के वेतन, वेतनमान या पदोन्नति को आधार बनाकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। खंडपीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश रद करते हुए कहा कि मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। OBC प्रमाण पत्र जारी करने पर कोर्ट ने नहीं दिया अंतिम आदेश हालांकि, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसके आदेश का मतलब रागिनी राठौर को स्वतः ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करना नहीं है। कोर्ट ने उनके दावे पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय सक्षम अधिकारी को लागू नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नए सिरे से करना होगा। यानी हाई कोर्ट ने सिर्फ प्रशासनिक आदेशों को रद कर मामले पर नियमानुसार पुनर्विचार का रास्ता साफ किया है।  

600 मजदूर रोज काट रहे 565 पेड़, फिर भी डिंडौरी में कटाई की रफ्तार धीमी

डिंडौरी डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है। डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी 60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे। मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था। पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं। हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही। 80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है। वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था। 30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे। इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं। विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी। डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए। साल बोरर क्या है ? साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो।  पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा।  अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है। 

इंदौर-मुंबई हाईवे होगा 6 लेन, चार जिलों के गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी

इंदौर  आगरा-मुंबई हाईवे पर इंदौर से पलासनेर के बीच हादसों को रोकने के लिए यहां रोड 6 लेन का किया जा रहा है। 154 किमी के इस हिस्से में रोड चौड़ा किया जाना है। इसी रोड पर सबसे ज्यादा करीब 15 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। जहां 25 से ज्यादा हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गवाई और कई घायल हो गए थे। आगरा-मुंबई रोड (एनएच-52) के इंदौर से खलघाट होते हुए पलासनेर(महाराष्ट्र) तक के हिस्से को सिक्स लेन करने का काम शुरू हो गया है। एनएच-52 के 154.77 किमी हिस्से में मौजूदा 4 लेन सड़क का विस्तार होगा। यह कवायद इसलिए है क्योंकि इस साल जनवरी से जुलाई के बीच एनएच-52 पर 15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 सड़क हादसे हुए, जिनमें 27 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एएम सप्रे ने एनएचएआई के अधिकारियों से पूछा कि हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा था कि इंदौर-खलघाट हाईवे को सिक्स लेन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांवों से जमीन अधिग्रहित की जानी है। सबसे ज्यादा महू के 41 गांवों से जमीनों का अधिग्रहण होगा। अभी डीपीआर पर भी काम जारी है। NH-52:15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 जानें गईं धार के 16, धरमपुरी के 30 गांव नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जो प्लान संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को दिखाया है, उसके मुताबिक परियोजना का बड़ा असर इंदौर जिले की महू तहसील में होगा। यहां 41 गांव इसके दायरे में हैं। धार तहसील में 16 गांव हैं। धरमपुरी तहसील में 30 गांव हैं। बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में 22 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में हैं। सेंधवा में 15 गांव हैं। निवाली में 9 गांव हैं। वरला में 2 गांव हैं। खरगोन जिले की महेश्वर तहसील के 6 गांव शामिल हैं। कसरावद के 28 गांव भी इसमें शामिल हैं। महाराष्ट्र की ओर के 9 गांव भी इस हाइवे विस्तार में शामिल हैं। इस तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे हैं। नियुक्त होंगे भू-अर्जन अधिकारी : प्रोजेक्ट के लिए जमीन का भू-अर्जन प्रस्तावित है। इसमें निजी, सरकारी और वनभूमि शामिल है। सड़क किनारे की सुविधाओं और जंक्शन के लिए जरूरी जमीन भी शामिल है। सभी संबंधित जिलों की तहसीलों में सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन (कम्पिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन-CALA) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए धारा 3(ए) का प्रकाशन किया जाना है। अभी तक यहां फोरलेन सड़क इंदौर से महाराष्ट्र के पलासनेर के बीच अभी तक फोरलेन सड़क है। कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने एनएचएआई से इस रास्ते पर हादसे रोकने को लेकर उठाए जा रहे कदम पर सवाल पूछा था। इस पर अधिकारियों ने कमेटी को बताया था कि सड़क को फोरलेन से सिक्स लेन किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए मधय प्रदेश और महाराष्ट्र के 170 से ज्यादा गांवों से जमीन अधिग्रहण किया जाना है। मध्य प्रदेश इन जिलों के गांवों से लेंगे जमीन मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन जिलों के गांवों से हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन अधिकारी नियुक्ति भी की जाएगी। महाराष्ट्र की ओर से भी करीब 9 गांवों से यह सड़क गुजरती है। इसे चौड़ा करने के लिए वहां भी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। आर्थिक और औद्योगिक केन्द्रों को मिलेगा फायदा यह मार्ग आगरा-मुंबई कॉरिडोर का हिस्सा है, जो उत्तर भारत को पश्चिमी एवं दक्षिणी भारत से जोड़ता है. इंदौर एवं मुंबई जैसे प्रमुख आर्थिक व औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है. इस रूट पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है. इस रूट के 6-लेन का किए जाने से देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता में बढ़ोत्तरी होगी।  इस परियोजना के तहत भेरू घाट, बाकानेर घाट एवं बिजासन घाट जैसे चुनौतीपूर्ण घाट खंडों को 6-लेन में बदला जाएगा. इस दौरान इस रूट पर पड़ने वाले ब्लैक स्पॉट को भी खत्म किया जाएगा. इस रूट पर कई स्थानों पर ढलाने हैं, इनका संतुलन किया जाएगा. कैरिजवे का चौड़ीकरण किया जाएगा. ढलान को कम तीखा और मोड़ों को अधिक सुरखित बनाया जाएगा. इस नई सड़क पर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित किया जाएगा।  इसको सेफ्टी फर्स्ट के सिद्धांत पर तैयार किया जाएगा. इसमें क्रैश बैरियर्स, उच्च गुणवत्ता की रोड मार्किंग, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनज, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम एवं आधुनिक स्लोप स्टेबिलाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इन उपायों के माध्यम से घाट खंडों को उच्च क्षमता, अधिक सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात के अनुरूप अत्याधुनिक 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।  बनेंगे फ्लाई ओवर, अंडरपास परियोजना के अंतर्गत खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर एक नए समानांतर पुल का निर्माण भी किया जाएगा. इससे मौजूदा पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इसके अलावा आसपास के छोटे बड़े शहरों में होने वाले जाम को कम करने के लिए बायपास, सर्विस रोड, फ्लाई ओवर और अंडरपास का भी निर्माण किया जाएगा. इससे हाईवे और स्थानीय यातायात व्यवस्था को अलग-अलग व्यवस्थित किया जा सकेगा. यह व्यवस्था न केवल जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि लोगों की सुरक्षा, सुविधा एवं यात्रा अनुभव को भी बेहतर बनाएगी।  पीथमपुर क्षेत्र को मिलेगा फायदा यह परियोजना एनएच-47 व प्रस्तावित इंदौर वेस्टर्न बायपास के साथ मिलकर स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटर्व को और मजबूत करेगी. खासतौर से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को इससे फायदा मिलेगा. इससे सप्लाई चेन और बेहतर होगी. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के मुताबिक "इस सिक्स लेन हाईवे के निर्माण से इंदौर से महाराष्ट्र और मुंबई तक की यात्रा कम समय में पूरी होगी. इसके अलावा लॉजिस्टिक नेटवर्क में भी मजबूती आएगी. इसकी डीपीआर दिसंबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है। 

केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में 5 लाख लीटर तक होगा विस्तार उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे। उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा। पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।” यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।  

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई शुरू, दिन में बढ़ेगा तापमान और रात में रहेगी ठंडक

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है और 10 अक्टूबर तक प्रदेश से इसके लौटने की संभावना है। अगले तीन दिनों तक कई इलाकों में तेज धूप रहने के आसार हैं, जिससे दिन का तापमान बढ़ सकता है, जबकि रात में हल्की ठंडक महसूस होगी। 5 अक्टूबर को 9 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश में अब तक करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 4% कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 4% ज्यादा, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में लगभग 12% कम बारिश दर्ज की गई है।  ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से हो सकती है मानसून की वापसी मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी जिले से मानसून की औपचारिक विदाई नहीं हुई है। वर्तमान में मानसून की वापसी रेखा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। इसका असर मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के आसपास भी देखा जा रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी की शुरुआत इन्हीं क्षेत्रों से हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा हो सकता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार या शनिवार से होने की संभावना जताई जा रही है। अक्टूबर में दिन गर्म, रातें रहेंगी ठंडी अक्टूबर को मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। मानसून की विदाई के साथ आसमान साफ होने लगता है, जिससे दिन में धूप का असर बढ़ता है, जबकि रात के तापमान में गिरावट आने लगती है। यही वजह है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में कमी दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो सकती है। 5 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार 5 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है। 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा प्रदेश के 25 जिलों में इस मानसून सीजन में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। ऐसे में संभावना है कि यहीं से मानसून वापसी करेगा। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से इसकी विदाई होगी। शुक्रवार-शनिवार को इसकी शुरुआत हो सकती है। अक्टूबर में दिन गर्म और रातें ठंडी होंगी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। दूसरी ओर, अक्टूबर का महीना चेंज ओवर पीरियड रहता है। इस महीने मानसून विदाई पर रहता है। इससे आसमान साफ हो जाता है। इस कारण दिन में गर्मी और रात में ठंड पड़ती है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले ही दिन कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली है। कम बारिश, लेकिन गर्मी का अहसास बढ़ सकता है मौसम विशेषज्ञ नायक ने बताया कि अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान भी है। 5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। इस बार प्रदेश में 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। इन 25 जिलों में कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।