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सिंगापुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देख उत्साह से भर गया भारतीय समुदाय

सिंगापुर में गूंजा नारा “योगी हैं तो यूपी है” सिंगापुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देख उत्साह से भर गया भारतीय समुदाय सीएम को प्रदेश की तमाम महिलाओं की तरफ से 'भैया' कहकर संबोधित किया एक महिला ने, कहा अब यूपी में रात में बिना सारे निकल सकती हैं महिलाएं सिंगापुर के ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों ने गणपति वंदना पर प्रस्तुत किया मनोहारी नृत्य, सीएम ने की मुक्त कंठ से सराहना सिंगापुर/लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सिंगापुर में अपने बीच देखकर प्रवासी भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह छा गया। मुख्यमंत्री के संबोधन के बीच कार्यक्रम स्थल पर लगातार तालियां बजती रहीं। “योगी हैं तो यूपी है” की गूंज पूरे वातावरण में ऊर्जा भर रही थी। कार्यक्रम में जब एक महिला ने सीएम योगी को प्रदेश की तमाम महिलाओं की तरफ से 'भैया' कहकर बुलाया तो पूरा माहौल भावनात्मक हो गया। आयोजन में एक बच्ची मुख्यमंत्री का स्केच बनाकर लाई थी, जिस पर सीएम योगी ने अपना ऑटोग्राफ देकर उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी।  कार्यक्रम के दौरान सिंगापुर में रह रही भारतीय मूल की स्वाति ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए खुद को उत्तर प्रदेश और सीएम योगी आदित्यनाथ की बहन बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत में मुख्यमंत्री का संबोधन सुनकर वह प्रेरित हुईं। स्वाति ने कहा, “जब संत सियासत में आता है तो सियासत इबादत बन जाती है, बन चुकी है। मैं उत्तर प्रदेश की साढ़े 11 करोड़ महिलाओं की ओर से मुख्यमंत्री को 'भैया' कहती हूं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिला है। अब महिलाएं रात में भी निडर होकर बाहर निकल सकती हैं। अपराधियों में कानून का भय है।" स्वाति ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना करते हुए नारा दिया कि योगी हैं तो यूपी है और संस्कृत में कहा, “योगी नेतृत्वे प्रदेशः भवति सुरक्षितम शुभम”। सिंगापुर में आयोजित यह संवाद प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच बढ़ते संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव का सशक्त संदेश देता नजर आया। जब मुख्यमंत्री मंच पर थे उस समय एक बच्ची उनका स्केच लेकर वहां पहुंची, सीएम योगी ने उस स्केच पर अपना ऑटोग्राफ दिया, जिसके बाद बच्ची बेहद प्रसन्न नजर आई। एक महिला ने मुख्यमंत्री की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) भी बांधा। इस अवसर पर सिंगापुर के ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष भारतीय परंपरा को जीवंत करते हुए गणपति वंदना पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुति दी, जिसकी मुख्यमंत्री ने मुक्तकंठ से सराहना की। स्कूल के संस्थापक ने कहा "आपमें हमें हमारे श्रद्धेय पहले प्रधानमंत्री और सिंगापुर के संस्थापक श्री ली क्वान यू की प्रतिछाया प्रतीत हो रही है।"    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की शास्त्रीय विधा को यहां पर इन बच्चों ने गणपति वंदना के माध्यम से बड़े ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया। आज जब पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने की होड़ लग रही है, उन स्थितियों में भारत से हजारों किलोमीटर दूर सिंगापुर में रहकर भारतीय समुदाय अपने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत बनाए हुए उन्हें मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहा है।

AI समिट में हंगामा: शर्टलेस प्रोटेस्ट के बाद यूथ कांग्रेस चीफ पर पुलिस की कार्रवाई

नई दिल्ली दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किए गए एआई इंपैक्ट समिट के दौरान शर्टलेस प्रदर्शन के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने आज इंडियन यूथ कांग्रेस चीफ उदय भानु चिब को भी गिरफ्तार कर लिया है। उदय भानु की गिरफ्तारी के मद्देनजर तिलक मार्ग थाने के बाहर भारी सुरक्षा तैनात किया गया है। कांग्रेस ने उदय भानु चिब की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध किया है। घंटों चली पूछताछ के बाद गिरफ्तार तिलक मार्ग थाना पुलिस ने सोमवार को युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को पूछताछ के लिए बुलाया था। करीब 20 घंटे चली पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि वह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे। उन्हें आज पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। बता दें कि, शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता के एक ग्रुप ने AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में घुसकर अपनी शर्ट उतारकर प्रोटेस्ट किया, जिन पर "PM कॉम्प्रोमाइज्ड" के नारे लिखे थे। अब तक कुल 8 लोग गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने पिछले सप्ताह आयोजित 'एआई इम्पैक्ट सम्मेलन' के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा शर्टलेस विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में सोमवार को ग्वालियर से तीन और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। उदय भानु चिब की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस द्वारा इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 और धारा 197 के तहत मामले दर्ज किए हैं।आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय अखंडता के लिए हानिकारक दावे करने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर बोला हमला उदय भानु चिब की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "यह शर्म की बात है कि उन्हें किसी के शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट करने से दिक्कत है। तानाशाह उन्हें जेल में डाल देगा जो उन्हें आईना दिखाएगा। क्या पुलवामा, पहलगाम अटैक, लाल किला ब्लास्ट के पीछे के सभी टेररिस्ट गिरफ्तार हो गए हैं…आप टेररिस्ट हमलों के पीछे वालों को गिरफ्तार नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन अगर कोई अपनी शर्ट उतार दे तो आप डर जाते हैं। यह सरकार की असलियत है…" कांग्रेस के सीनियर नेता भूपेश बघेल ने सरकार को तानाशाही बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''मैं दिल्ली पुलिस द्वारा IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई उदय भानु चिब जी एवं अन्य युवा साथियों की गैरकानूनी गिरफ्तारी की मैं कड़ी निंदा करता हूं। तानाशाह" सरकार यह भूल रही है कि लोकतंत्र में युवाओं का आवाज उठाना, सवाल पूछना और विरोध करना अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सबसे मजबूत हथियार है। हमारे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिना किसी हिंसा या उकसावे के, सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से प्रधानमंत्री के समझौतों और युवाओं की अनसुनी पीड़ा को सामने लाया। यह एक साहसी, जायज और लोकतांत्रिक कदम था, जिसे दबाने के लिए अब सरकार के द्वारा पुलिसिया दमन का सहारा लिया जा रहा है। यह कार्रवाई न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र पर सीधा हमला भी है। हम मांग करते हैं कि उदय भानु चिब जी सहित सभी गिरफ्तार IYC कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए सभी झूठे आरोप वापस लिए जाएं तथा इस तरह की दमनकारी कार्रवाईयों को तत्काल रोका जाए। लड़ेंगे-जीतेंगे।'' बता दें कि, AI समिट में इस मुद्दे पर बात करते हुए उदय भानु ने कहा था कि देश के युवा "अब चुप नहीं रहेंगे"। उन्होंने कहा, "इंडियन यूथ कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि देश के युवा अब चुप नहीं रहेंगे। 'प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं' सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि लाखों बेरोजगार युवाओं का गुस्सा है। अमेरिका के साथ यह ट्रेड डील हमारे किसानों और जनता के हितों के साथ धोखा है, जिससे सिर्फ अमेरिका को फायदा होगा। डेमोक्रेसी में शांतिपूर्ण विरोध हमारा हक है और हम युवाओं की आवाज उठाते रहेंगे।" उदय भानु ने साफ किया कि पार्टी "AI समिट के खिलाफ नहीं है", लेकिन "भारत के हितों के साथ किसी भी तरह के कॉम्प्रोमाइज" का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने आगे कहा, "हम भारत के हितों के साथ किसी भी तरह के कॉम्प्रोमाइज़ के ख़िलाफ़ हैं। जब देश के किसानों के साथ कॉम्प्रोमाइज किया जा रहा है, भारत विरोधी ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए जा रहे हैं, और युवाओं को बेरोजगार रखते हुए नफरत की पॉलिटिक्स में धकेला जा रहा है, तो क्या हमें चुप रहना चाहिए? यह 140 करोड़ लोगों का देश है।" PM मोदी पर और तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं" और “इसका मतलब यह नहीं है कि जनता चुप रहे।”

योगी आदित्यनाथ से मिले संजय दत्त, बोले- यह मेरे लिए गर्व और सौभाग्य की बात

लखनऊ  बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. सोमवार को एक्टर ने अपने इंस्टाग्राम पर सीएम के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीर शेयर की है. तस्वीर में दोनों हाथ मिलाते नजर आ रहे हैं. संजय दत्त ने सीएम के साथ हुई मुलाकात का अनुभव भी शेयर किया है.  योगी आदित्यनाथ से मिले संजय दत्त  संजय दत्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंचें. मुलाकात के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर कर फैन्स को इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में मुलाकात करने का अवसर मिला. बेहद सुखद अनुभव रहा, इस बातचीत और शुभकामनाओं के लिए आपका शुक्रिया.  तस्वीर में सीएम योगी आदित्यनाथ और संजय दत्त बेहद खुश नजर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री के साथ संजय दत्त को देखकर इनके चाहने वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. फैन्स सीएम और एक्टर को एक फ्रेम में देखकर इसे बेस्ट फोटो ऑफ द ईयर बता रहे हैं.  रोड शो में लगे जय श्रीराम के नारे  पिछले हफ्ते संजय दत्त विधायक राजेश्वर सिंह के बुलावे पर लखनऊ पहुंचे थे. लखनऊ में उन्होंने 'जीरो नेट 2040' के लिए 1 किलोमीटर लंबा रोड शो किया. शहर में उनका फूलों की बारिश से स्वागत किया गया. लोगों ने जयश्री राम के नारे भी लगाए. एक्टर ने युवाओं को पर्यावरण बचाने की सलाह दी. रोड शो में संजय दत्त की झलक पाने के लिए बूढ़े बच्चों की भीड़ उमड़ पड़ी. फैन्स के बीच उनका क्रेज देखने को मिला.  वर्कफ्रंट की बात करें, तो संजय दत्त आखिरी बार धुरंधर में नजर आए थे. आने वाले दिनों में वो 'धुरंधर 2', 'द गुड महाराजा', 'केडी: द डेवेल' जैसी मूवीज में दिखाई देंगे. संजय दत्त के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर फैन्स एक्साइटेड हैं.  संजय दत्त से पहले गोविंदा भी सीएम योगी से मिलने लखनऊ पहुंचे थे, जहां उन्हें सम्मानित भी किया गया था. 

इलाज के लिए उड़ान बनी आखिरी सफर: आग में झुलसे संजय और एयर एम्बुलेंस हादसे का सच

  रांची झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के केंदू कसारी स्थित करम टॉड़ के घने जंगल में रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. ये एयर एम्बुलेंस एक हादसे में झुलसे मरीज संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए रांची से दिल्ली लेकर जा रही थी. परिवार के सदस्यों ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह पर संतोष को दिल्ली ले जाने के लिए लोन लेकर 8 लाख रुपये में एयर एम्बुलेंस बुक की थी. जानकारी के अनुसार, संजय कुमार चंदवा कस्बे में एक छोटा-सा रेस्टोरेंट चलाते थे. सोमवार को होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में वे गंभीर रूप से झुलस गए थे (करीब 63-65 प्रतिशत). उनका इलाज पहले रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने परिवार के सदस्यों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की सलाह दी और उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया था. लोन लेकर बुक की एयर एम्बुलेंस इसके बाद बेहतर इलाज की आस में परिवार ने करीब 8 लाख रुपये खर्च कर एयर एम्बुलेंस बुक की थी. इसके लिए परिवार ने लोन और अपने रिश्तेदारों से कर्ज लिया, ताकि संजय को तुरंत दिल्ली पहुंचाया जा सके. लेकिन एयर एम्बुलेंस उड़ान के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया. तेज हवाओं और खराब विजिबिलिटी के कारण विमान संतुलन खो बैठा और सिमरिया के घने जंगल में क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला और सभी की मौके पर ही मौत हो गई. एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत इस हादसे ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान छीन ली. मृतकों में मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी बसंती देवी और उनका भांजा ध्रुव शामिल हैं. इनके अलावा विमान के पायलट स्वराज दीप सिंह, सह-पायलट विवेक, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता और नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा ने भी अपनी जान गंवा दी. परिवार के सदस्यों की अचानक हुई इस मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और इलाके के लोग इस घटना से गहरे सदमे में हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि संजय का परिवार बेहद गरीब पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है और ये रकम कर्ज पर ली गई थी, जिसमें इलाज के लिए पहले से भी लाखों रुपये कर्ज में थे. खबर से मिली हादसे की जानकारी परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें इस हादसे की जानकारी खबरों से मिली. उन्होंने बताया कि रांची एयरपोर्ट से एयर एम्बुलेंस के उड़ा भरने के बाद वो लोग अपने घर आ गए थे और थोड़ी देर बाद विमान में मौजूद अपने परिवार के सदस्यों को फोन किया तो उनका फोन नहीं मिला. इसके कुछ देर बाद ही उन लोगों को एक प्लेन के क्रैश होने की खबर मिली तो उनकी चिंताएं बढ़ गई. उन्होंने बताया कि बाद में हम लोगों ने प्रशासन से संपर्क किया तो पता चला कि हादसे में सभी लोगों की मौत हो गई.  ATC से टूटा संपर्क प्राप्त जानकारी के अनुसार, विमान ने शाम करीब 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी, लेकिन खराब मौसम (तेज हवाएं और कम विजिबिलिटी) के कारण रूट डायवर्ट करने की कोशिश में 23 मिनट बाद ही ATC से संपर्क टूट गया. विमान चतरा के दुर्गम जंगल में क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला. हादसे की जानकारी मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन और एसएसबी 35वीं बटालियन के जवान तुरंत हरकत में आए. विमान सड़क से लगभग चार किलोमीटर अंदर घने और दुर्गम जंगल में गिरा था, जिससे राहत कार्य में भारी मुश्किलें आईं. जवानों को मलबे से शवों को निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. रेस्क्यू टीम ने सभी शवों को अपने कंधों पर उठाकर चार किलोमीटर पैदल दूरी तय की और फिर एंबुलेंस के जरिए उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया. 6000 फुट ऊंचाई पर जाते ही पायलट को हो गया था अंदेशा कोलकाता से संपर्क होने के बाद, विमान ने खराब मौसम की वजह से अपना रास्ता बदलने (deviation) का अनुरोध किया था. इसके बाद, शाम 7:34 बजे वाराणसी से लगभग 100 NM दक्षिण-पूर्व में विमान का कोलकाता कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया और वो रडार से भी गायब हो गया. जानकारी के मुताबिक, IMD ने इस इलाके में पहले ही बिजली गिरने और मौसम खराब रहने का अलर्ट जारी किया था. दुर्घटनास्थल का दौरा करेगी एविएशन मिनिस्ट्री डीसी कीर्तिश्री जी ने एयर एम्बुलेंस हादसे की वजह तूफान बताई. उन्होंने कहा, 'तूफान के कारण ये हादसा हुआ. डॉक्टरों की टीम ने मृतकों की संख्या 7 बताई. इनमें से दो क्रू मेंबर्स थे और बाकी पांच में एक मरीज और उसके परिवार के सदस्य थे. एविएशन मिनिस्ट्री की टीम कल दुर्घटनास्थल का दौरा करेगी ताकि ब्लैक बॉक्स की पहचान की जा सके और आगे की जांच शुरू की जा सके.' बता दें कि AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की टीम आज दिल्ली स्थित रेडबर्ड एविएशन कार्यालय का दौरा करेगी. टीम यहां रेडबर्ड और क्रैश हुए प्लेन से जुड़े दस्तावेज हासिल कर सकती है. SSB के सेकंड इन कमांड ने सुनाया आंखों देखा हाल SSB के सेकंड इन कमांड रमेश कुमार ने हादसे की पूरी कहानी सुनाई है. उन्होंने बताया, 'हमें सूचना मिली थी कि एक प्लेन क्रैश हो गया है. ये इलाका काफी अंदरूनी है. यहां दो किलोमीटर तक कोई सड़क नहीं है. जब हम रात में यहां पहुंचे, तो हमने देखा कि कोई भी जिंदा नहीं है. शवों को निकालना बहुत मुश्किल था. हमें उन्हें यहां से दो किलोमीटर तक एक तरफ ले जाना पड़ा.' कुमार ने आगे बताया कि उनकी टीम के पास सिर्फ एक स्ट्रेचर था, जो वो एसएसबी से अपने साथ लाए थे. उन्होंने बताया कि प्लेन जंगल के बीचोंबीच क्रैश हुआ था और मेन सड़क यहां से दो किलोमीटर दूर थी. यहां रात में लोगों को निकालना और बचाना उनके लिए काफी मुश्किल रहा.

प्रकृति की गोद में रोमांच — बारनवापारा अभयारण्य की अनोखी दुनिया

रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभ्यारण्य साल और सागौन के घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराती है। बारनवापारा में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंगा, भालू तथा कभी-कभी तेंदुए की झलक भी देखने को मिल जाती है। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां के वातावरण को और जीवंत बनाते हैं। वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी पर्यटकों को जंगल के भीतर सुरक्षित भ्रमण का अवसर देती है। सुबह और शाम का समय वन्यजीवों को देखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह अभयारण्य सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है। रेल यात्रियों के लिए रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक स्टेशन है। रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। निजी वाहन से पहुंचना अधिक सुविधाजनक रहता है। अभयारण्य में प्रवेश शुल्क और सफारी शुल्क निर्धारित हैं। यहां पार्किंग, गाइड, वॉच टॉवर, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग कराएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। बारनवापारा की यात्रा को और अधिक सुखद बनाने के लिए पर्यटन मंडल द्वारा संचालित मोहदा रिसोर्ट विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह रिसोर्ट प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है और यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे, रेस्टोरेंट, बच्चों के खेलने की जगह तथा हरियाली से घिरा शांत परिसर उपलब्ध है। परिवार और समूह में आने वाले पर्यटकों के लिए यह ठहरने का एक उत्कृष्ट विकल्प है। यहां स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है। जंगल सफारी और मोहदा रिसोर्ट की बुकिंग वनविभाग और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की साइट से की जा सकती है। बारनवापारा के समीप स्थित तुरतुरिया भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां प्राचीन अवशेष, शांत वन क्षेत्र और जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। तुरतुरिया को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ी मान्यता के कारण धार्मिक और पौराणिक महत्व भी प्राप्त है। यहां पिकनिक और प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है। लोक मान्यता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान यहीं आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ। इस कारण यह स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है। यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहां बहने वाली छोटी जलधाराएं और प्राकृतिक झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए यह आकर्षक स्थान है। तुरतुरिया में प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्राकृतिक गरम जल कुंड भी पाए जाते हैं, जिनके बारे में स्थानीय मान्यता है कि इनका जल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यही “तुर-तुर” ध्वनि से निकले नाम की एक मान्यता भी बताई जाती है। अभयारण्य से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार और पुरातात्विक अवशेष यहां के प्रमुख आकर्षण हैं, जो इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। बारनवापारा घूमने का सर्वाेत्तम समय अक्टूबर से जून तक माना जाता है। वर्षा ऋतु में हरियाली अपने चरम पर होती है, हालांकि कभी-कभी सफारी सेवाएं सीमित हो सकती हैं। यात्रा के दौरान हल्के रंग के वस्त्र पहनना, दूरबीन और कैमरा साथ रखना तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। बारनवापारा अभयारण्य, सिरपुर और तुरतुरिया मिलकर एक ऐसा पर्यटन परिपथ तैयार करते हैं, जहां प्रकृति, रोमांच, इतिहास और आरामदायक आवास की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। यदि आप सप्ताहांत में सुकून भरी और यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए एक आदर्श गंतव्य सिद्ध हो सकता है।

सरसों किसानों की बढ़ी उम्मीदें: भावांतर योजना में शामिल, कम कीमत का नुकसान भरेगी सरकार

भोपाल मध्य प्रदेश में किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सोयाबीन की तरह ही सरसों पर भावांतर दिया जाएगा। जो पंजीकृत किसान मंडियों में उपज बेचेंगे, उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं उड़द पर प्रति किसान प्रति क्विंटल छह सौ रुपये का बोनस भी दिया जाएगा। चना, मसूर और तुअर का प्राइस सपोर्ट स्कीम में उपार्जन करने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने यह जानकारी सोमवार को विधानसभा में दी। वर्ष 2026 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित उन्होंने कृषि पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। किसान को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता की तरह उद्यमी बनाने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादों का हब बनाया जाएगा। सोयाबीन में समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के लिए 6.86 लाख किसानों को 1,492 करोड़ रुपये का भावांतर दिया गया। इस योजना को पूरे देश में सराहा गया। इसे आगे बढ़ाते हुए सरसों में भी लागू किया जा रहा है।   दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन और केंद्र को भेजे गए उपार्जन प्रस्ताव अभी मंडी में सरसों का भाव 5,500 से 6,000 के बीच चल रहा है। इसका समर्थन मूल्य 6,200 रुपये है। इसमें भावांतर लागू किए जाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया है। प्रदेश में सरसों के क्षेत्र में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादन 15.71 लाख टन होने का अनुमान है। दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। वैसे भी प्रदेश में बिजली और पानी की कोई कमी नहीं है। ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर उड़द को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति क्विंटल छह सौ रुपये बोनस दिया जाएगा। चना, मसूर और तुअर के उपार्जन का प्रस्ताव भी भेजा है। इसमें 6.45 लाख टन चना और एक लाख टन मसूर शामिल है। इसी तरह तुअर भी प्राइस सपोर्ट स्कीम में खरीदा जाएगा। विपक्ष ने उठाए बिजली और गेहूं पंजीयन के मुद्दे इस पर प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि 12 घंटे बिजली किसानों को मिलनी चाहिए। मक्का खरीदने का प्रस्ताव ही सरकार ने भारत सरकार को नहीं भेजा। गेहूं का पंजीयन सही नहीं हो रहा है। सर्वर डाउन होने की शिकायतें मिल रही हैं। ओलावृष्टि से नुकसान पर सर्वे और मुआवजे का आश्वासन उधर, प्रश्नकाल में ओलावृद्धि से गेहूं, धनिया, अफीम सहित अन्य फसलों के खराब होने का मुद्दा ध्यानाकर्षण के माध्यम से कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने उठाया। सभी ने कहा कि सर्वे ठीक से नहीं हो रहा है। अफीम की फसल नीमच, रतलाम और मंदसौर में खराब हो गई। गुना में धनिया बर्बाद हो गया। गेहूं की फसल खेत में लेट गई है। उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो गई। उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। फसल बीमा के लिए किसान परेशान हो रहे हैं। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि सर्वे कराया जा रहा है। कहीं 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है तो कहीं 15। सर्वे होने के बाद सही स्थिति सामने आएगी और मापदंड के अनुसार सरकार राहत देगी।

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी 3 साल में ढाई फीसदी बढ़ी, आधी दुनिया की ताकत में इजाफा

भोपाल  मप्र में पुरुषों के मुकाबले सरकारी नौकरी में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते तीन साल में ही बढ़ोतरी तकरीबन ढाई प्रतिशत देखी गई। जबकि पुरुषों का प्रतिशत घट गया। आर्थिक सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि क्लास-वन, क्लास-टू और क्लास-थ्री श्रेणी में महिलाओं की संख्या बीते वर्षों की तुलना में बढ़ी है। ये सब श्रेणियां अफसर के स्तर की होती हैं। तीनों में प्रतिशत 30 से ऊपर है, जबकि चतुर्थ श्रेणी में प्रतिशत 20.54 है। क्लास-टू में तो आंकड़ा 33 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है। प्रदेश के कुल 22 विश्वविद्यालयों में जरूर महिलाओं की संख्या घटी है। दो विवि ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि और महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि उज्जैन में तो एक-एक ही महिला रह गई हैं। भोपाल के राष्ट्रीय विधि संस्थान विवि (एनएलआईयू) में सिर्फ तीन महिलाएं हैं। यह दस फीसदी से भी कम है। सर्वाधिक 37 से अधिक महिलाएं भोपाल के हिंदी विवि में हैं। नौकरियां घटीं… 2024 के मुकाबले 2025 में 16,396 नौकरी कम हुईं रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई कि सरकार के 54 विभागों में एक मार्च 2024 से एक मार्च 2025 के बीच सिर्फ 282 लोगों को नियमित (रेग्यूलर) नौकरी मिली है। यानी आंकड़ा 6 लाख 6 हजार 876 से बढ़कर 6 लाख 7 हजार 158 हुआ जो सिर्फ 0.05 प्रतिशत बढ़ोतरी बता रहा है। दूसरी तरफ सरकारी नौकरी से इतर राज्य के सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में संख्या 3447 घट गई। पांच सालों में 2021 से 2025 के बीच सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में 15 हजार लोगों की नौकरी घटी है। यही हाल नगरीय निकायों का भी है। यहां 450 नौकरी कम हुई। ग्रामीण निकायों में 38, विकास प्राधिकरण व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में 98 और विवि में 130 नौकरियां कम हुई हैं। तमाम वर्गों को देखें तो 2024 के मुकाबले मप्र में 2025 में 16 हजार 396 नौकरी कम हुई है। नियमित कर्मचारी… भोपाल-इंदौर में और स्कूल शिक्षा में सर्वाधिक सरकार के नियमित कर्मचारियों में 39.8% जिलों में काम करते हैं। इसमें भोपाल में सर्वाधिक नियमित कर्मियों की संख्या 6.65% है। दूसरे नंबर पर इंदौर 4.47, फिर ग्वालियर 3.50 और धार 3.36 प्रतिशत है। इसी तरह प्रदेश में कुल नियमित कर्मचारियों में सर्वाधिक 37.66% लोग स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं। दूसरा नंबर गृह विभाग का है, जहां 15.18% लोग हैं। इसके बाद तीसरे और चौथे नंबर पर क्रमश आदिम जाति व अनुसूचित जाति कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग आते हैं।

इंदौर में एआई-सैटेलाइट मॉडल से भूमि मूल्य तय करने का प्रस्ताव, तैयार हो रहा है

 इंदौर आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। शासन से प्राप्त ऑनलाइन डाटा और स्थानीय स्तर पर एकत्र जानकारी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से विश्लेषण कर नई गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों का आधार बनेगा। पंजीयन विभाग ने पहली बार एआई और सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर नई गाइडलाइन तैयार करना शुरू किया है। इससे नए विकास का सही आकलन हो सकेगा और जमीन का मूल्य वास्तविक बाजार के अनुरूप हो सकेगा। संपत्ति सौदों का अध्ययन किया गया उप पंजीयन कार्यालयों में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान हुए संपत्ति सौदों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। जिन स्थानों पर जमीन या संपत्ति की खरीद-फरोख्त तय गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर हुई है, वहां दर बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है। विशेष रूप से ऐसी लोकेशन को बढ़ोतरी में शामिल किया जा रहा है, जहां 10 प्रतिशत से अधिक दस्तावेज गाइडलाइन दर से ऊंचे मूल्य पर पंजीकृत हुए हैं। एआई तकनीक से बढ़ोतरी वाली लोकेशन का आकलन किया जा रहा है। अनुमान है कि जिले में तीन हजार से अधिक लोकेशन पर दरों में बढ़ोतरी होगी। मार्च में शासन को भेजेंगे प्रस्ताव वर्तमान में उप पंजीयन कार्यालयों में गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली समितियों की बैठक में स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। यहां पर स्वीकृति के बाद दावे-आपत्ति बुलाकर निराकरण कर प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति पूरे प्रदेश के प्रस्तावों का निराकरण कर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजेगी और इसके बाद नई दरें लागू होंगी। 270% तक बढ़ी थीं दरें मौजूदा वित्त वर्ष में भी कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 20 से लेकर 270 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी। सबसे ज्यादा वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में देखी गई थी। अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां होने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विरोध को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए गए थे।

भोपाल में सेंट्रल विस्टा डिजाइन को मंजूरी, स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स के निर्माण पर खर्च होंगे एक हजार करोड़ रुपये

भोपाल  नए सेंट्रल विस्टा (स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स प्रोजेक्ट) का डिजाइन फाइनल हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की बैठक में इस योजना के प्राथमिक स्वरूप पर सहमति दे दी गई है। बैठक में हाउसिंग बोर्ड को चार महीने यानी 30 जून के पहले इसकी डीपीआर फाइनल करने को कहा है। इसके तहत बोर्ड ने टेंडर के माध्यम से आर्किटेक्ट के रूप में फर्म मेसर्स सीपी कुकरेजा का चुनाव कर लिया है। प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट लगभग एक हजार करोड़ रुपये का होगा। 33 विभागों ने मांगी जगह जीएडी ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर उनकी ऑफिस की जरूरतों और स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। जीएडी को 58 विभागों के 84 कार्यालयों से पत्र प्राप्त हुआ है। 33 विभाग के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरण के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल एक लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह मांगी है। बाकी छह कार्यालय रेनोवेशन व प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं है। 19 अन्य के अपने स्वतंत्र और पर्याप्त ऑफिस हैं। हाईटेक होगा ऑफिस सूत्रों के मुताबिक जिन भी ऑफिस में रेनोवेशन या निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां काम रोका जा सकता है। किसी को भी नई जमीन आवंटित नहीं होगी। सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सभी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉर्पोरेट की तरह यह हाईटेक आफिस होगा। 12 नये टावर बनाने का प्लान पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पुराने दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर है। नये सेंट्रल विस्टा में लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होगा। नई योजना में 12 नये टावर बनाने की योजना है। ग्रीन एरिया और पार्किंग पर विशेष फोकस पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हरित क्षेत्र को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर (लगभग चार गुना) किया जा रहा है। साथ ही अगले 50 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए विशाल पार्किंग बनाई जाएगी। आम जनता की सुविधा के लिए मेट्रो स्टेशन से कवर्ड पाथ-वे, हाकर्स कार्नर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी इस मास्टर प्लान का हिस्सा है। साझा छत से बिजली व शीतलता प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता 12 टावरों को जोड़ने वाली एक साझा छत (परगोला) होगी। इससे न केवल परिसर का तापमान कम रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सोलर ऊर्जा भी पैदा की जाएगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का विवरण मांगा है। नागरिकों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट     प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आम नागरिकों की सुविधा के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मप्र शासन की मंशा के अनुरूप बोर्ड इस पर तेजी से काम कर रहा है। – गौतम सिंह, कमिश्नर, एमपी हाउसिंग बोर्ड  

आस्था पर संकट! ओंकारेश्वर में नर्मदा में गिर रहा सीवेज, पवित्रता पर उठे सवाल

खंडवा देश के बारह ज्योतिर्लिंग में शामिल ओंकारेश्वर में मां नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। यहां नालों का पानी नदी में मिल रहा है। नर्मदा में स्नान और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शनार्थ देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन घाटों पर गंदगी और गंदे पानी की वजह से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है। वहीं ओंकारेश्वर की छवि भी धूमिल हो रही है। सिंहस्थ-2028 को लेकर तीर्थनगरी में अरबों रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन यहां बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा गंदे पानी के उपचार के लिए एमपीयूडीसी को जिम्मेदार ठहरा कर दायित्वों की इतिश्री कर ली जाती है। तीर्थ नगरी में नर्मदा की बदहाली को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी वीडियो बहुत प्रसारित हो रहे हैं।   ओंकारेश्वर में पुण्य सलिला मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हालातों में बदलाव नहीं हो रहा है। नर्मदा क्षेत्र में नालों के माध्यम से लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन द्वारा पानी उपचार के बाद छोड़ने का दावा किया जाता है। वहीं स्थानीय लोग इसे खानापूर्ति बता रहे हैं। ओंकार मठ में मिल रहा गंदा पानी समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमी प्रदीप ठाकुर ने बताया कि ओंकार मठ घाट पर बना वाटर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है। इसकी क्षमता प्रतिदिन ढाई लाख लीटर पानी शुद्ध करने की है। ऐसे में कई क्षेत्रों का गंदा पानी अब सीधा नाली के माध्यम से ओंकार मठ घाट पर मिल रहा है। यह ओंकार पर्वत परिक्रमा का रास्ता भी है। घाट पर भी नाली का पानी फैलता रहता है। शिवपुरी क्षेत्र में चार से पांच स्थानों से बस्ती का पानी सीधे नर्मदा नदी में जाता है। इस ओर नगर परिषद ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगाए हैं। कांग्रेस ने भी लगाए थे आरोप ओंकारेश्वर में नर्मदा प्रदूषित होने से स्थानीय लोगों के साथ ही हाल ही में कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने घाटों का जायजा लेकर नर्मदा में गंदा पानी मिलने के आरोप लगाए थे। कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने ओंकारेश्वर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता अनुरूप नहीं होने और कई बंद होने के आरोप लगाए थे। इससे नर्मदा नदी में होटल और घरों के शौचालय का गंदा पानी मिल रहा है, जो प्रशासन की नाकामी और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ है। दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद ओंकारेश्वर में पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बाद भी नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। नगर का गंदा पानी आठ नालों के माध्यम से नर्मदा में मिल रहा है। ओंकारेश्वर में चार स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए गए, लेकिन आरोप है कि इसमें भी तीन प्लांट चल रहे है, दो बंद हैं, जिससे लाखों लीटर गंदा पानी प्रतिदिन नर्मदा में मिल रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट चालू होने का दावा ओंकारेश्वर में एमपीयूडीसी द्वारा संचालित एसटीपी की क्षमता और क्रियाशीलता को लेकर हमेशा आरोप लगते रहे हैं। एमपीयूडीसी के वरिष्ठ अधिकारी ट्रीटमेंट प्लान सही ढंग से काम करने के दावे करने के साथ ही इनकी कार्य क्षमता बढ़ाने का आश्वासन देखकर पल्ला झाड़ लेते हैं।