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नई दुल्हन को बाइक न मिलने पर पति ने तलाक का दिल दहला देने वाला फैसला लिया

 बांदा उत्तर प्रदेश के बांदा में एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला को शादी के बाद इतना मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया कि वो टूट गयी. ससुराल वालों ने उसे लौटने के लिए हलाला करने की शर्त रख दी, जिससे परेशान होकर उसने थाना पहुंच पुलिस से शिकायत की है. पुलिस ने शौहर सहित चार लोगों पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.  दहेज के लिए प्रताड़ना मामला मटौंध थाना क्षेत्र का है, जहां की रहने वाली एक युवती ने पुलिस शिकायत के दौरान बताया कि उसके पिता ने उसका निकाह जून 2025 में अपने सामर्थ्य के अनुसार किया था, निकाह के बाद विदा होकर ससुराल पहुचीं तो मालूम हुआ कि पति सहित अन्य ससुरालीजन दहेज से खुश नही थे. महिला ने आरोप लगाया कि इस कारण लोग उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे. उसे कई दिनों तक भूखा रखा गया, लेकिन परिवार चलता रहे इसलिए युवती सब सहती रही. कई बार मामला बढ़ने पर पुलिस ने समझौता कराया, लेकिन ससुराल पक्ष के लोगों मे कोई बदलाव नहीं आया. दिसम्बर 2025 में मारपीट करते हुए उसे ससुराल से निकाल दिया गया.  'हलाला कराकर आओगी तो रखूंगा' युवती ने आगे बताया कि इन लोगों ने कहा कि अपने परिवार वालों को बुलाओ, हमे दो लाख रुपये, एक हीरो होंडा बाइक दिलवाओ. हमने तुम्हे तलाक दे दिया है तो अब हम तुम्हें अपने साथ तब रखेंगे जब तुम हलाला कराकर आओगी. साथ ही उसे जमकर गालियां दी गईं. जिसके बाद पीड़ित युवती ने परेशान होकर पुलिस से शिकायत की है, पुलिस ने शौहर सहित चार ससुरालियों पर केस दर्ज किया है.  मटौंध थाना के पुलिस अधिकारी SO संदीप कुमार ने बताया कि महिला ने शिकायत की है, जिस पर सुसंगत धाराओ में अभियोग दर्ज किया गया है. मामले में जांच करके सही तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

पटरी नवीनीकरण तेज, भोपाल मंडल में 100 किमी से अधिक ट्रैक का सुधार, यात्रियों के लिए सुरक्षा बढ़ाई

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।  

मध्य प्रदेश के 25 जिलों में अगले 3 दिन मावठा बारिश का अनुमान, तापमान गिरेगा, किसान चिंतित

भोपाल  मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम और ठंड में बदलाव देखने को मिल रहा है. अधिकतर जिलों में बादल छाए रहने से तापमान में गिरावट आई है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि, अगले 3 दिनों में मध्य प्रदेश के 25 जिलों में मावठा की बारिश हो सकती है. जिससे तापमान में और गिरावट आएगी. बारिश की आशंका ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. बीते दिनों कई जिलों में हुई बारिश और ओलावृष्टि से ठंड बढ़ गई थी. हालांकि कई जिलों में बारिश का दौर रुक गया है लेकिन ठंडक बनी हुई है. पूरे प्रदेश में सुबह के समय कोहरा छाया रहता है. मौसम में बदलाव के संकेत, मौसमी प्रणालियां सक्रिय मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि, ''वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में सक्रिय है. इसके साथ एक द्रोणिका भी जुड़ी हुई है, जो मौसम में बदलाव के संकेत दे रही है.'' उन्होंने बताया कि, ''दक्षिणी हरियाणा और उससे लगे उत्तरी राजस्थान के क्षेत्र में एक प्रेरित चक्रवात बना हुआ है. इस चक्रवात से लेकर मध्य महाराष्ट्र तक एक लंबी द्रोणिका विकसित हुई है, जो गुजरात होते हुए आगे बढ़ रही है. इस मौसमी प्रणाली के कारण संबंधित क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा सकती है.'' मध्य प्रदेश में बारिश का अनुमान मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, ''पूर्वोत्तर भारत के ऊपर लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर पश्चिमी जेट स्ट्रीम की हवाएं सक्रिय हैं. जिनकी रफ्तार करीब 232 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई है. इन तेज हवाओं का प्रभाव आने वाले दिनों में मौसम के मिजाज को और प्रभावित कर सकता है.'' दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि, ''5 फरवरी से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है. इसके असर से कुछ इलाकों में बादल, हल्की से मध्यम वर्षा और तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है.'' नीमच-मंदसौर में गिरे ओले  नीमच और मंदसौर जिले में तेज हवाएं चलीं, इस दौरान ओले भी गिरे. कई गांव सफेद बर्फ की चादर से ढंक गए. इसके अलावा ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में भी हल्की बारिश हुई. बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि बीते दिनों हुई बारिश से किसानों की फसलें नष्ट हो गई हैं. गेहूं की फसल, जो अभी फूलने की स्टेज में है, खराब हो सकती है. बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता कुछ दिनों से मध्य प्रदेश में रुक-रुककर बारिश हो रही है. जिससे किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है. खंडवा सहित कई जिलों में खेतों में खड़ी लगभग 50 से 60 फीसदी तक फसल नष्ट हो गई है. जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. रविवार को नीमच और मंदसौर जिलों में तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. नीमच के जीरन क्षेत्र में नींबू के आकार के ओले गिरे, जिससे सड़कें बर्फ जैसी दिखाई दीं. इससे अफीम, गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान हुआ है. किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल फूलों की अवस्था में है, इसलिए बारिश और ओलावृष्टि से पैदावार पर असर पड़ सकता है.

योगी सरकार ने राज्यकर्मियों की संपत्ति छुपाने पर वेतन रोका, लिया कड़ा निर्णय

लखनऊ   राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अब तक घोषित नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें वेतन रोके जाने की कोई चिंता नहीं है। सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्यकर्मियों की संपत्ति का विवरण जुटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर देना अनिवार्य था। इसके लिए विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जो कर्मचारी तय समयसीमा तक विवरण अपलोड न करें, उनका वेतन रोक दिया जाए। इन सभी का वेतन रोका जाएगा  रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। वहीं ‘अन्य’ श्रेणी के 1,612 कर्मचारियों में से 854 ने भी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। इन सभी का वेतन रोका जाएगा।  

दृष्टिहीन युवक शम्भूलाल की कहानी, मजबूत इरादों से बना पोस्ट मास्टर

 आगर मालवा जीवन में जब मुसीबतें आती हे तो कई हिम्मत वाले इंसान भी अपना हौसला खो देते हैं. मगर हम आज आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने ऊपर आने वाली कठिनाइयों से ना सिर्फ लड़ाई की बल्कि वो सब कर दिखाया. जिसे देखकर हर कोई दंग है. युवक के इस हिम्मत की आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा हो रही है.  दरअसल हम बात कर रहे हैं आगर मालवा जिले के ग्राम महुड़िया निवासी युवक शम्भूलाल विश्वकर्मा की. शम्भूलाल दृष्टिहीन हैं. उन्हें केवल एक या दो इंच की दूरी से ही दिखाई देता है. बस शम्भूलाल इसी से अपना काम चलाता है. शम्भूलाल इतनी दूरी से देखकर ही पोस्ट ऑफिस के सारे काम कर लेते हैं. मां भी दृष्टिहीन और पिता भी लकवाग्रस्त मोबाइल चलाना भी इनके लिए जैसे बाए हाथ का खेल है. इतनी ही दूरी से मोबाइल में लॉगिन करना, पासवर्ड डालना आदि सभी काम शम्भूलाल कर लेते हैं. शम्भूलाल बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता भी लकवाग्रस्त हैं. जिसके कारण वे पलंग पर लेटे-लेटे अपना जीवन गुजार रहे हैं. शम्भूलाल की मां भी जन्म से दृष्टिहीन हैं और वो भी अपने घर का काम किसी तरह करती हैं. शम्भूलाल को जितना भी समय मिलता है वे अपने पिता के पास बैठकर पिता का हौसला बढ़ाते हैं और मां के काम में भी थोड़ा हाथ बढ़ाते हैं. शम्भूलाल गांव में ही पढ़ाई करते थे. मगर परिवार की स्थिति के चलते उन्होंने जिला मुख्यालय पर आकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया. पहले शम्भूलाल एक स्कूल में पढ़ने गए, मगर वहां उनके अनुरूप पढ़ाई नहीं थी. फिर शम्भूलाल आगर मालवा के एक निजी स्कूल में पढ़ाई करने गए. 10वीं में मिले 87 प्रतिशत अंक और फिर लगी नौकरी यहां उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई की. आश्चर्य की बात यह थी की शम्भूलाल ने दसवीं की परीक्षा में 87% अंक अर्जित किए. इसी दौरान स्कूल के अध्यापक ने शम्भूलाल को बताया कि दृष्टिहीन लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस में भर्ती निकली है. जिसके बाद शम्भूलाल ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया और उनका चयन हो गया. शम्भूलाल जिले के बाहर नौकरी करते थे. वहां अन्य सहयोगियों की मदद से एक गरीब कन्या से उनका विवाह भी हो गया और अब शम्भूलाल के घर एक छोटा सा बच्चा भी है. शम्भूलाल ने अपनी सोच और मेहनत से अपनी जिंदगी बदल दी व पोस्ट मास्टर बन गए.

MP में हाईवे पर हर दिन 21 करोड़ का खर्च, बावजूद इसके 33 सड़क हादसे और 10 मौतें

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।  प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़ सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिखित उत्तर से सामने आया है कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब ₹21 करोड़ हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर खर्च हो रहे हैं , इसके बावजूद रोजाना औसतन 33 सड़क हादसे हुए और 10 से 11 लोग अपनी जान गवां रहे हैं। हर साल कितना खर्च हो रहा है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक कुल हाइवे मेंटेनेंस व विकास बजट (MP): लगभग ₹38,700 करोड़ यानी औसतन ₹7,740 करोड़ हर साल है। सरकार के मुताबिक यह राशि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च की गई। 12 हजार से ज्यादा हादसे हर साल लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो एमपी में 2021 से लेकर 2025 तक पांच सालों में 61,176 दुर्घटनाएं हुई और इन हादसों में 19,416 मौतें हुईं। हर साल औसतन एमपी में 12,235 हादसे हो रहे हैं और 3,883 मौतें प्रति वर्ष हो रहीं हैं। हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां? केंद्र सरकार के अनुसार यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत व रखरखाव, सुरक्षा कार्य, और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश को 4,000 किमी से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाइवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं? सरकार ने गिनाईं वजहें लोकसभा में दिए जवाब में मंत्रालय ने हादसों के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग, सड़क व वाहन की स्थिति को जिम्मेदार बताया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी पर खर्च की वास्तविक असरदार मॉनिटरिंग भी जरूरी है। डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर खर्च हुई राशि(करोड़ रुपए) वर्ष खर्च 2020–21 8,250 2021–22 9,006 2022–23 6,210 2023–24 7,447 2024–25 7,799 पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं। मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025) साल कुल हादसे (Total Accidents) कुल मौतें (Total Deaths) 2021 11,030 3,389 2022 13,860 4,025 2023 14,561 4,476 2024 13,937 4,644 2025 7,788 2,882 कुल (Total) 61,176 19,416 करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां? केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?  

केंद्रीय बजट 2026: एमपी के रेलवे नेटवर्क के लिए 7500 करोड़ का फंड, इस मंडल को मिलेगा बड़ा लाभ

ग्वालियर देश के आम बजट के साथ रेलवे का बजट (Railway Budget 2026) भी पेश किया गया है। इसमें रेल मुसाफिरों की सुरक्षा पर फोकस रहा है। रेल हादसों को रोकने के लिए मुख्य रेल मार्गों पर कवच (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) लगाने के काम को तेज किया जाएगा। रेल अधिकारियों का कहना है इससे रेल एक्सीडेंट की आशंका को काफी हद तक खत्म किया जाएगा। इसके अलावा रेल बजट में इस बार गेज कन्वर्जन की राशी को 4284 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4600 करोड़ रुपए किया है और सिग्नलिंग और टेलीकॉम सिस्टम को पुख्ता करने के लिए 7500 रुपए खर्च होंगे। इसमें कवच सुरक्षा भी शामिल है। क्या है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल अधिकारियों का कहना है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम एक आधुनिक कवच प्रणाली है। इस पर करीब 2012 से प्रयोग चल रहा है। इसे अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। इससे रेल दुर्घटनाओं की गिनती में कमी आएगी। पिंक बुक से सामने आएंगी सौगातें ग्वालियर, आगरा, झांसी, सहित दूसरे स्टेशन को रेल बजट में क्या सौगात मिली है इसका खुलासा पिंक बुक के जारी होने पर सामने आएगा। रेल अधिकारियों के मुताबिक पिंक बुक 2 फरवरी को जारी किए जाने की उम्मीद है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंहका कहना है पिंक बुक जारी होने पर पता चलेगा कि एनसीआर को कितना बजट मिला है इसमें ग्वालियर को क्या सहूलियतें मिलीं हैं। मिलेगा फायदा, यह भी उम्मीद     केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की बात है। जिले में पशु चिक्तिसकों की काफी कमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश की सबसे गोशाला में भी पशु नहीं है,ऐसे में जिले को भी डॉक्टर मिलने से काफी फायदा मिलेगा।     वीजीएफ/पुंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। इससे जिले को महिला छात्रावास मिल सकेगा।     बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी। इसमें जिले में भी दो माध्यमिक विद्यालयों व एक महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं खोलने की उम्मीद है।     ग्वालियर जिले में भी उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास बनाया जाएगा। 

मध्यप्रदेश के बजट में जबलपुर के लिए 300 करोड़ का फ्लाईओवर, ट्रैफिक जाम पर लगेगी लगाम

 जबलपुर   जबलपुर शहर के गढ़ा क्षेत्र में त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और मेडिकल कॉलेज के सामने रोजाना लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार के बजट (MP Budget 2026) में स्वीकृति मिलने की स्थिति में यह जबलपुर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। इस फ्लाईओवर के बन जाने से गढ़ा, त्रिपुरी चौक और मेडिकल क्षेत्र के रहवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ए्बुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। ऐसा हो सकता है फ्लाईओवर का स्वरूप करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फ्लाईओवर (Flyover Construction) की एक रैंप आईसीएमआर के सामने उतारे जाने की संभावना है, जबकि दूसरा रैंप सूपाताल क्षेत्र में बनाया जा सकती है। इसके अतिरिक्त साइड रैंप संजीवनी नगर और धनवंतरी नगर चौराहा की ओर उतारे जाने की योजना है। इससे मेडिकल मार्ग पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा और मरीजों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व मेडिकल छात्रों को सुगम आवागमन मिलेगा। वर्तमान में त्रिपुरी चौक से पंडा की मढिय़ा होते हुए इमरती तालाब और गंगा नगर तिराहा तक प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग से गुजरने वाली 40 से अधिक कॉलोनियों के रहवासी लंबे समय से यातायात अव्यवस्था से परेशान हैं। दो फ्लाईओवर चालू, एक निर्माणाधीन शहर में मदनमहल-दमोहनाका और कटंगा फ्लाईओवर पहले ही चालू हो चुके हैं, जबकि सगड़ा फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। पेंटीनाका फ्लाईओवर का काम रक्षा विभाग से एनओसी मिलते ही शुरू होना है। बंदरिया तिराहासा ईं मंदिर फ्लाईओवर को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं विजयनगर-धनवंतरी नगर फ्लाईओवर को बजट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा रेलवे पुल नंबर-2 से रद्दी चौकी फ्लाईओवर का प्राकलन तैयार किया जा रहा है और आईएसबीटी से आईटीआई फ्लाईओवर परियोजना पाइपलाइन में है, जिसके लिए केन्द्रीय रिजर्व निधि से फंड मिलना प्रस्तावित है। इन सबके बीच गढ़ा क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उज्जैन में सप्त सागरों की बदहाली पर जताई चिंता

उज्जैन उज्जैन की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान माने जाने वाले ‘सप्त सागर’ लगातार उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे दखल देने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि आदेशों की अवहेलना और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल जोन बेंच के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन न तो पूर्व आदेशों का समुचित पालन कर पाया और न ही समय पर संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक शिथिलता गंभीर परिणाम ला सकती है। अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई सुनवाई में सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर (कुल रकबा 36 बीघा) के 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने शासन-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सप्तसागर के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य मिशन मोड में किया जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को मासिक निगरानी कर रिपोर्ट पेश करने और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। पवित्र सरोवर बने नालियां आवेदक प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने माना कि उज्जैन के रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर, सभी की हालत दयनीय हो चुकी है। उज्जैन मास्टर प्लान-2021 के संदर्भ में ट्रिब्यूनल ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि तालाबों को कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। शहर का अनुपचारित सीवेज सीधे इन जल निकायों में प्रवाहित हो रहा है। अवैध निर्माणों और गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। जारी रहेगी सुनवाई एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें कलेक्टर और नगर निगम को की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि जमीनी स्तर पर आखिर क्या बदला। संकेत साफ है कि महाकाल की नगरी में आस्था के साथ अब पर्यावरणीय जवाबदेही भी कसौटी पर है। एनजीटी ने गेंद पूरी तरह शासन-प्रशासन के पाले में डाल दी है। एनजीटी के मुख्य निर्देश ये     अतिक्रमण हटाना : खसरा नंबर 1281 (गोवर्धन सागर) सहित सभी सातों सागरों से तत्काल और पूर्ण अतिक्रमण हटाने के निर्देश।     सीवेज पर पूर्ण रोक : बिना उपचारित (अनट्रीटेड) गंदा पानी और सीवेज किसी भी जल निकाय में बहाने पर पूरी तरह रोक।     मुख्य सचिव की सीधी भूमिका : राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर कलेक्टर और नगर निगम से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।     मासिक निगरानी तंत्र : प्रमुख सचिव (पर्यावरण) हर महीने प्रगति की निगरानी कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करेंगे।     जल गुणवत्ता की जांच : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी के नमूने लेकर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।     अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य : कलेक्टर और नगर निगम को 20 फरवरी 2026 की अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।  

‘सपा को सामाजिक न्याय नहीं, सिर्फ अपने परिवार की फिक्र’ — योगी आदित्यनाथ का हमला

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल को 'पीडीए' से ज्यादा 'परिवार' की चिंता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा, "पीडीए तो बहाना है, असली लक्ष्य तो 'परिवार' है…!" मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में पीडीए को नजरअंदाज करने के सपा प्रमुख के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा, "जो लोग यह दावा करते हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार ने उत्तर प्रदेश के छह करोड़ लोगों सहित पूरे देश में 25 करोड़ लोगों को गौरव और सम्मान के साथ आगे बढ़ने में मदद की, तो उनके कार्यकाल में ऐसा क्यों नहीं हो सका? पीडीए का मुद्दा तब भी जरूर रहा होगा।" उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पीडीए पर चर्चा क्यों नहीं हुई? अपनी पार्टी (सपा) के शासनकाल में उन्हें (अखिलेश को) सिर्फ परिवार की ही चिंता क्यों थी?" योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को परिवार के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य गरीबों, युवाओं और किसानों की सहायता करना है। हमारा लक्ष्य उच्च श्रेणी की अवसंरचना सुनिश्चित करना है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "यह दृष्टिकोण बजट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, लेकिन दूरदृष्टिहीन लोग, भविष्य की कोई योजना न रखने वाले लोग ऐसी निरर्थक बातों में उलझे रहते हैं।" योगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बजट की आलोचना को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आवंटन से उत्तर प्रदेश को मदद मिलेगी, जो देश में रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के साथ-साथ निवेशकों को भी लाभ होगा। योगी ने कहा कि केंद्रीय बजट के आधार पर प्रदेश सरकार फरवरी में बजट प्रस्तुत करेग और डबल इंजन सरकार के इस बजट का लाभ देश की सबसे बड़ी आबादी को प्राप्त होगा।