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31 IPS अधिकारियों को मिला प्रमोशन, बिहार में 22 नए DIG नियुक्त; कुंदन कृष्णन बने DG

पटना बिहार सरकार ने मंगलवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 31 अधिकारियों को पदोन्नति दी है। गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। अधिसूचना के अनुसार ये पदोन्नतियां एक जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी। अधिसूचना में बताया गया कि 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) पद से पदोन्नत कर पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा 2008 बैच के आठ आईपीएस अधिकारियों को उप महानिरीक्षक (DIG) से पदोन्नत कर पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। इनमें किम, निताशा गुरिया, सत्यवीर सिंह, उपेंद्र कुमार शर्मा, विकास बर्मन और मनोज कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। अधिसूचना के मुताबिक 2012 बैच के 22 आईपीएस अधिकारियों को उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति दी गई है।

भोपाल प्रशासन का कड़ा कदम: चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध, कानून तोड़ने वालों के लिए सजा

भोपाल पतंगबाजी के नाम पर हो रही मौतों और गंभीर हादसों को देखते हुए भोपाल पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत सख्त आदेश जारी करते हुए भोपाल नगर सीमा में चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा पुलिस के अनुसार, चाइनीज मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। कई बार पतंग उड़ाने के दौरान पक्षी इसमें उलझकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और कई मामलों में उनकी मौके पर ही मौत हो जाती है। इतना ही नहीं, सड़क पर चलने वाले राहगीर और दोपहिया वाहन चालक भी चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। मांझे की अत्यधिक मजबूती और उस पर चिपका कांच इन हादसों की बड़ी वजह है। तुरंत प्रभाव से लागू हुआ चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर बैन  रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को भोपालपुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद के खिलाफ एक आदेश किया है और यह आदेश तुरंत प्रभाव से राजधानी में लागू हो गया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 (2) के तहत jकार्रवाई होगी. राजधानी भोपाल में पूरी तरह से बैन हो गया चाइनीज मांझा गौरतलब है चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद पर लागू हुआ प्रतिबंध राजधानी भोपाल की सीमा में लागू है. पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आदेश में राजधानी भोपाल में पतंगबाजी में चाइनीज मांझे के उपयोग, बिक्री और भण्डारण को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है और इस्तेमाल करते पाए गए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होगी. इसलिए लगाई गई रोक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले त्योहारों के दौरान पतंगबाजी की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आमजन की सुरक्षा, पशु-पक्षियों के जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कठोर कदम उठाया गया है। प्रतिबंध के तहत अब भोपाल में न तो चाइनीज मांझे का उपयोग किया जा सकेगा, न उसकी बिक्री होगी और न ही किसी तरह का भंडारण किया जा सकेगा। आदेश दो माह तक प्रभावी यह आदेश दो माह तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सजा और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे परंपरागत और सुरक्षित सूती मांझे का ही उपयोग करें। चाइनीज मांझे से दूरी बनाकर न सिर्फ कानून का पालन करें, बल्कि इंसान, पशु-पक्षियों और खुद की जान की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें।  आम नागरिकों से सुरक्षित मांझा उपयोग करने की गई अपील उल्लेखनीय है हर साल चाइनीज़ मांझे के इस्तेमाल से लोग गंभीर हादसे के शिकार होते हैं. चाइनीज मांझे से कई लोगों को जानलेवा चोटें भी आ चुकी हैं. प्रशासन ने दुकानदारों और आम नागरिकों से अपील की है कि वो सुरक्षित मांझे का ही उपयोग करें, और चाइनीज़ मांझे की बिक्री, इस्तेमाल और भंडारण करने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को दें. पतंगबाजी में चाइनीज मांझा इस्तेमाल करना अपराध अब भोपाल में पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज मांझे का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। जो भी व्यक्ति चाइनीज मांझे के साथ पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चाइनीज मांझे का बेचना, खरीदना, भंडारण करना तीनों ही कानूनन अपराध होंगे। दुकानदारों को भी सख्त चेतावनी दी गई है। सुरक्षा के लिए लिया गया फैसला भोपाल पुलिस ने यह फैसला पक्षियों, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। हर साल चाइनीज मांझे से कई गंभीर हादसे होते हैं। पहले भी हो चुके हैं गंभीर हादसे चाइनीज मांझे से पहले कई लोगों को जानलेवा चोटें लग चुकी हैं। कुछ मामलों में लोगों की जान भी जा चुकी है, वहीं कई पक्षी भी घायल या मृत पाए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की अपील प्रशासन ने दुकानदारों, आम नागरिकों से अपील की है कि सिर्फ सुरक्षित मांझे का ही इस्तेमाल करें। अगर कहीं चाइनीज मांझा बिकता या इस्तेमाल होता दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से स्वस्थ जीवन की ओर

विशेष लेख विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवन राजेन्द्र शुक्ल भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विकास के उस मार्ग पर अग्रसर है, जहाँ आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों को समान महत्व दिया जा रहा है। इसी समग्र दृष्टि के अंतर्गत भारतीय कृषि को भी एक नए युग की ओर ले जाया जा रहा है। कृषि सदियों से हमारी सभ्यता की रीढ़ रही है। आधुनिक युग में रासायनिक उर्वरकों और सिंथेटिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने खेती की लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, उसकी जलधारण क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप, हमारे भोजन की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत की समस्याओं का समाधान हमारी अपनी परंपराओं और ज्ञान प्रणाली में निहित है। इसी विचार से प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है, जो भारतीय कृषि की मूल आत्मा से जुड़ी हुई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कृषि को केवल उत्पादन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में देखा जाए। भारत की पारंपरिक कृषि व्यवस्था सह-अस्तित्व और संतुलन पर आधारित रही है, जिसमें गौमाता की भूमिका केंद्रीय रही है। गौ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और पोषण सुरक्षा का आधार रही हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि गौवंश का संरक्षण सीधे मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ा है। गोबर और गोमूत्र से भूमि को पोषण मिलता है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी पुनः जीवंत होती है। स्वस्थ मिट्टी से प्राप्त अन्न अधिक पौष्टिक, सुरक्षित और मानव शरीर के अनुकूल होता है। प्राकृतिक खेती कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की भारतीय पद्धति है। वे इसे किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और उन्हें बाहरी निर्भरता से मुक्त करने का सशक्त माध्यम मानते हैं। साथ ही, यह देशवासियों को रसायन-मुक्त, विषरहित भोजन उपलब्ध कराने का मार्ग है। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। प्राकृतिक खेती की कार्यप्रणाली सरल, स्वदेशी और प्रभावशाली है। इसमें गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि कृषि आदानों के उत्पादन के आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करते हैं और भूमि की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाते हैं। पलवार (मल्चिंग) जैसी तकनीकें मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं, जल संरक्षण में सहायक होती हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से फसलों की रक्षा करती हैं। इन उपायों से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे शून्य बजट प्राकृतिक खेती का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से संभव होता है। सहकारिता से समृद्धि और संस्थागत शक्ति प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके विजन 'सहकारिता से समृद्धि' के तहत, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को संगठित किया जा रहा है एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाया जा रहा है ताकि छोटे किसानों को न केवल सस्ती दरों पर प्राकृतिक खाद-बीज मिल सकें, बल्कि उनके विषमुक्त उत्पादों को उचित बाजार और लाभकारी मूल्य भी प्राप्त हो सके। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और सहकारिता का मेल ही ग्रामीण समृद्धि का नया मार्ग है। प्राकृतिक खेती का महत्व केवल खेत तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य और जीवनशैली से है। आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका एक बड़ा कारण रासायनिक अवशेषों से युक्त भोजन है। प्राकृतिक खेती से प्राप्त शुद्ध और विषमुक्त अन्न पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा योग और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाना इसी समग्र स्वास्थ्य दृष्टि का हिस्सा है। योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या तभी पूर्ण लाभ देती है जब भोजन भी शुद्ध और प्राकृतिक हो। प्राकृतिक खेती, स्वस्थ भोजन और योग—तीनों मिलकर स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करते हैं। प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का व्यावहारिक मंत्र—‘एक एकड़, एक मौसम’—किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। छोटे स्तर पर प्रयोग कर किसान बिना जोखिम उठाए परिणाम देख सकता है और फिर धीरे-धीरे विस्तार कर सकता है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, आदानों की उपलब्धता और बाजार से जोड़ने के लिए मजबूत संस्थागत समर्थन दिया जा रहा है। किसान उत्पादक संगठन (FPOs) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक शक्ति प्राप्त हो रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि महिला किसान इस परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इस संपूर्ण प्रयास में गौ-सेवा का स्थान केंद्रीय है। गौवंश का संरक्षण और संवर्धन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और सतत विकास सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी की इस दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में प्राकृतिक खेती, गौ-संवर्धन और किसान कल्याण को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मिट्टी, किसान और उपभोक्ता—तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण गौ-आधारित प्राकृतिक खेती केवल कृषि सुधार की पहल नहीं, बल्कि भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण है। गौमाता और मिट्टी की रक्षा के अपने सांस्कृतिक दायित्व को निभाते हुए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भोजन, संतुलित जीवनशैली और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत के स्वप्न को साकार करने का सशक्त मार्ग है।  

जनजातीय अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करता है पेसा कानून: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय भाई-बहनों के अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करने वाला है पेसा कानून: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पेसा कानून स्थापना दिवस पर विचार व्यक्त किए विशाखापट्टनम में हो रहा है राष्ट्रीय पेसा महोत्सव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेसा कानून के स्थापना दिवस के अवसर पर, विशाखापट्टनम में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय पेसा महोत्सव के आयोजन के लिए राज्य सरकार की ओर से जनजातीय भाई-बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जनजातीय स्वशासन, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की पावन भूमि पर आदिकाल से निवास करने वाले जनजातीय समुदाय हमारे राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उनके अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करने वाला पेसा कानून सहभागी लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने पेसा अधिनियम को संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ लागू किया है। हमने ग्राम सभाओं के गठन से जनजातीय समाज को सशक्त बनाया है। मध्यप्रदेश का जनजातीय समाज अब, अपने जल-जंगल-जमीन, सामाजिक व्यवस्थाओं और विकास की प्राथमिकताओं पर स्वयं निर्णय लेकर स्वशासी समुदाय के रूप में आगे बढ़ रहा है। यह पेसा कानून की भावना और संविधान की आत्मा का सजीव उदाहरण है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय भाइयों-बहनों के हितों, संस्कृति और परम्पराओं के संरक्षण के लिए सदैव कृत संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशाखापट्टनम में जारी पेसा महोत्सव के लिए उपरोक्त वीडियो संदेश में अपने विचार व्यक्त किए।  

क्या बदलने वाला है दिल्ली का मुख्यमंत्री? LG के पत्र पर AAP ने खेली चौंकाने वाली चाल

नई दिल्ली  पलूशन के मुद्दे पर दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस जंग में एलजी विनय सक्सेना की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर किए गए हमले से भड़की 'आप' ने दिल्ली की सियासत में नया शिगूफा छेड़ दिया है। एलजी के लेटर को उनकी नई लॉन्चिंग बताते हुए आप के दिल्ली प्रमुख और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश को अब नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है। इन दिनों अपने व्यंगात्मक शैली में भाजपा सरकार के खिलाफ वीडियोज को लेकर चर्चा में रहने वाले सौरभ भारद्वाज ने एलजी के लेटर पर नई गुगली फेंकते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेखा गुप्ता को हटाने के लिए एलजी को दोबारा सक्रिय किया गया है और जब तक नया सीएम नहीं मिल जाता है एलजी दिल्ली को चलाएंगे। भारद्वाज ने एक दम आगे बढ़ते हुए यह तक दावा कर दिया कि नए सीएम के लिए गृहमंत्री के घर बैठक हुई है। सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो में कहा, 'पिछले 10 महीने से एलजी साहब को इतना बेइज्जत करके साइडलाइन किया गया। मगर अब एकदम केंद्र सरकार ने एलजी साहब को एक्टिव क्यों किया। केंद्र सरकार का मानना है कि रेखा गुप्ता जी की वजह से भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ नीचे आ रहा है। पूरे देश में इसका असर पड़ रहा है। कल गृह मंत्री के यहां इसके लिए मीटिंग भी हुई है। हमारा मानना है कि दिल्ली के अंदर नया मुख्यमंत्री बनाया जाने वाला है।' भारद्वाज ने आगे कहा कि जब तक नया मुख्यमंत्री नहीं आता तब तक एलजी साहब को कहा गया है कि आप दिल्ली चलाइए। आप देखेंगे कि आने वाले समय में इनको ऐक्टिव किया जाएगा। कुछ दिनों में नया मुख्यमंत्री आएगा। इसकी शुरुआत कल उस पत्र से कराई गई है। एलजी ने केजरीवाल को लिखे लेटर में क्या कहा है? दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेटर लिखकर राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। सक्सेना ने दावा किया कि वायु प्रदूषण पर केजरीवाल के साथ हुई बातचीत के दौरान, पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को कमतर आंका और कहा कि यह एक वार्षिक घटना है और पर्यावरण कार्यकर्ता और अदालतें इसे मुद्दा बनाते हैं और फिर भूल जाते हैं। सक्सेना ने 15 पन्नों के लेटर में 'आप' प्रमुख पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए 10 महीने की भाजपा सरकार के सामने अनावश्यक रूप से जटिलताएं पैदा कर दी हैं, जो उनके द्वारा की गई गलतियों को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।’ उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में करारी हार के बावजूद, केजरीवाल और उनकी पार्टी ने नतीजों से सबक नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ‘दिल्ली की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर तुच्छ राजनीति करने और झूठ फैलाने में लगी हुई है।’  

मंत्रालय में सुशासन दिवस का आयोजन, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती गौर ने दिलाई शपथ

भोपाल  पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के एक दिन पूर्व मंत्रालय में सुशासन दिवस मनाया गया। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त , घुमन्तु, अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में प्रात: 11 बजे अधिकारियों और कर्मचारियों को सुशासन दिवस की शपथ दिलाई। इससे पहले उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण किया। भोपाल के सांसद श्री आलोक शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने प्रदेश में सुशासन के उच्चतम मापदण्डों को स्थापित करने के लिये संकल्पित रहकर शासन को अधिक पारदर्शी,सहभागी ,जनकल्याण केन्द्रित और जबावदेह बनाने के प्रयास करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री के.सी.गुप्ता, श्री संजय कुमार शुक्ला सहित मंत्रालय वल्लभ भवन, सतपुड़ा-विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी एवं पुलिस अधिकारी आदि उपस्थित थे।  

तेजस्वी यादव पर JDU का बड़ा आरोप, हिस्ट्रीशीटर रमीज संग विदेश घूमने का दावा

पटना जदयू प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने बिहार के नेता प्रतिपक्ष को लेकर बड़ा दावा किया है। नीरज कुमार ने बिहार डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ विदेश भ्रमण पर हिस्ट्रीशीटर रमीज नेमत खान गए हुए हैं। पुलिस को इसपर कड़ी नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि मीडिया से यह जानकारी मिली है। उन्होंने कहा है कि रमीज नेतान खान उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं। हत्या के मामले में वह पूर्व में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। नीरज कुमार ने एक्स पर लिखा, ‘DGP, बिहार को पत्र। मीडिया के अनुसार तेजस्वी यादव हिस्ट्री-शीटर रमीज़ नेमत खान के साथ विदेश भ्रमण पर गए हैं। आशंका है कि मोतिहारी विधानसभा से राजद के प्रत्याशी देवा गुप्ता भी उस यात्रा में शामिल हो, जिस पर 28 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं 1 लाख रुपये का इनाम घोषित है।’ कौन है रमीज नेमत खान बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की हार और फिर लालू परिवार की बेटी रोहिणी आचार्या के साथ परिवार में टकरार होने के बाद रमीज नेमत खान का नाम सामने आया था। इस हार के बाद रोहिणी आचार्या ने रमीज और संजय यादव का नाम लिया था औऱ इनपर निशाना साधा था। रमीज के बारे में बताया जाता है कि वो तेजस्वी यादव की तरह ही एक क्रिकेटर रहे हैं। रमीज उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले हैं। बताया जाता है कि बिहार चुनाव के दौरान रमीज तेजस्वी यादव की कैंपेनिंग और चुनाव से जुड़े अन्य कार्य संभालते थे। रमीज नेमत खान बलरामपुर के चर्चित नेता रिजवान जहीर के दामाद हैं। रिजवान जहीर पर मर्डर का केस है औऱ वो जेल में बंद हैं। इस मामले में रमीज भी अभियुक्त हैं। रमीज को साल 2022 में गिरफ्तार भी किया गया था। रमीज नेमत खान को तेजस्वी यादव का बेहद करीबी माना जाता है। देवा गुप्ता पर पुलिस ने इनाम रखा है देवा गुप्ता बिहार विधानसभा चुनाव में मोतिहारी जिले से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी थे। उनकी पत्नी मेयर हैं। मेयर पति पर छतौनी थाना क्षेत्र के बढई टोला निवासी देवा गुप्ता पर हत्या के मामले में इनाम की घोषणा की गई है। उसपर जिले के विभिन्न जगहों पर 28 अपराधिक मामले दर्ज हैं। देवा गुप्ता पर एक लाख रुपये इनाम रखा गया है। देवा गुप्ता 2 मामलों में फरार भी बताए जाते हैं।  

ठंड से ठिठुरा बिहार: 14 जिलों में Cold Day का अलर्ट जारी

पटना बिहार के अधिकांश जिलों में इन दिनों गंभीर शीत लहर और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार दिन और रात के तापमान में बेहद कम अंतर रह जाने से राज्यभर में कनकनी काफी बढ़ गई है। फिलहाल पटना, अरवल और औरंगाबाद समेत 14 जिलों में शीत दिवस (Cold Day) की स्थिति बनी हुई है और अगले 3 से 4 दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। कई इलाकों में छाया रहेगा घना कोहरा मौसम विभाग ने बताया है कि बिहार के अलग-अलग हिस्सों में Dense Fog बने रहने के आसार हैं। सुबह और रात के समय कोहरे का असर ज्यादा रहेगा, जिससे सामान्य जनजीवन के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। 7–8°C के साथ सबसे ठंडा रहा गयाजी बीते 24 घंटों के दौरान गयाजी राज्य का सबसे ठंडा स्थान दर्ज किया गया। यहां न्यूनतम तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया, जिससे ठंड का प्रकोप और ज्यादा महसूस किया गया। रेल, सड़क और हवाई सेवाएं प्रभावित घने कोहरे के कारण कम दृश्यता की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा असर रेल, सड़क और हवाई यातायात पर पड़ा है। पटना, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट से आज भी कई नियमित उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि कुछ फ्लाइट्स देरी से संचालित हो रही हैं। वहीं कोहरे की वजह से लंबी दूरी की कई ट्रेनें अपने तय समय से काफी देरी से चल रही हैं। ठंड के चलते स्कूलों में छुट्टी तेज ठंड और शीतलहर से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों को लेकर अहम फैसले लिए हैं—     पटना जिला: कक्षा 8 तक के सभी स्कूल 27 दिसंबर तक बंद     लखीसराय: कक्षा 8 तक शैक्षणिक गतिविधियां 4 जनवरी 2026 तक स्थगित     कक्षा 9 और उससे ऊपर की कक्षाएं सावधानी के साथ जारी     शेखपुरा: कक्षा 8 तक के स्कूलों में 26 दिसंबर तक पठन-पाठन पर रोक     प्रशासन ने अभिभावकों से बच्चों को ठंड से बचाने की अपील की है।

सामाजिक ताना-बाना टूट रहा है— लिव-इन रिलेशनशिप पर हरियाणा में उत्तराखंड मॉडल की वकालत

चंडीगढ़  हरियाणा में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त कानून बनाने की मांग उठने लगी है. बीजेपी विधायक लक्ष्मण यादव ने हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान जीरो ऑवर में यह मुद्दा उठाया. बीजेपी विधायक की अपनी ही सरकार से सख्त कानून लाने की मांग की बीजेपी विधायक का दावा है कि कई विधायक लिव-इन-रिलेशनशिप के खिलाफ हैं. वो जल्द ही सीएम से मिलेंगे और उत्तराखंड की तर्ज पर हरियाणा सरकार से भी लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त कानून लाने की मांग करेंगे. उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते प्रचरन पर चिंता जताई है. विधायक बोले- लिव-इन- रिलेशनशिप से रिश्ते खराब हो रहे उन्होंने कहा कि लिव-इन-रिलेशनशिप से सामाजिक ताना-बाना और पारिवारिक रिश्ते खराब हो रहे हैं. हमारी मांग कि उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर हरियाणा में भी लिव-इन-रिलेशनशिप का पंजीकरण शुरू किया जाए ताकि इस तरह के रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों का सरकार के पास पूरा आंकड़ा हो. विधायक ने मांग की है कि सरकार की और से लिव-इन-रिलेशनशिप के मानदंड तय करने के लिए कमेटी गठित करनी चाहिए.     रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण यादव की मांग है कि समाज में लिव-इन-रिलेशनशिप की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह खराब हो रही है.     हरियाणा में भी लिव-इन-रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के लिए उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर पंजीकरण जरूरी हो.     उत्तराखंड सरकार की और से समान नागरिक संहिता के अंतर्गत लिव-इन-रिलेशनशिप पंजीकरण का प्रावधान किया गया है, जिसके मानदंड और नियम तय किए गए हैं.     हरिद्वार में लिव-इन-रिलेशनशिप के 40 मामले सामने आए, जब पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए तो उनमें से 13 मामले ऐसे थे, जो पहले से ही शादीशुदा थे. लक्ष्मण यादव ने कहा कि पंजीकरण से महिला सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और पुरुष द्वारा महिला को छोड़ने के बाद हताशा में जीवन लीला को समाप्त करने वाले कदमों पर भी अंकुश लगेगा. उन्होंने कहा कि लिव-इन-रिलेशनशिप के मामलों में आत्महत्या का ग्राफ भी बढ़ रहा है. उनके रेवाड़ी जिले में तीन मामले सामने आए हैं. मुहिम से जुड़ने का आह्वान उन्होंने कहा कि सीएम से मुलाकात के दौरान वो लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए मानदंड और नियम बनाने के लिए कमेटी गठित करने की मांग करेंगे. इससे सामाजिक ताना-बाना नहीं बिगड़ेगा और पारिवारिक रिश्ते भी मौजूद रहेंगे.उन्होंने सामाजिक संस्थाओं को भी इस मुहिम में जुड़ने का आह्वान किया. गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार की और से मानदंड तय किया गया है कि यदि 6 महीने तक कोई लिव-इन-रिलेशनशिप को पंजीकरण नहीं कराता है तो उसे 25 हजार रुपये का जुर्माना और तीन साल सजा का प्रावधान है. विधायक बोले- कमेटी की मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए विधायक लक्ष्मण यादव ने कहा लिव-इन-रिलेशनशिप में पंजीकरण से पहले सरकार द्वारा गठित कमेटी की मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए. यदि लिव-इन-रिलेशनशिप का रिश्ता 5 साल या इससे ज्यादा का है तो उसे शादी की मान्यता दी जाए, ताकि महिला की संतान को संपत्ति में हिस्सेदारी का हक मिल सके. हालांकि हरियाणा की विपक्षी पार्टियों अभी इस मुद्दे पर खामोश है और उनका कहना है कि जब हरियाणा सरकार कोई इस तरह का प्रस्ताव या कानून लेकर आएगी तब इस पर चर्चा की जाएगी.  

देशभक्ति की मिसाल बना नन्हा ‘योद्धा’: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों की सेवा, अब राजधानी दिल्ली में सम्मान

फिरोजपुर  पंजाब के सरहदी जिले फिरोजपुर के चक तरां वाली गांव के रहने वाले 10 साल के श्रवण सिंह को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा. श्रवण को भारत की राष्ट्रपति के द्वारा 26 दिसंबर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ मिलेगा. इसके लिए वह अपने पिता के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. श्रवण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान असाधारण साहस का परिचय निस्वार्थ सेवा दिखाया था. ​श्रवण सिंह को मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनके असाधारण साहस, सूझबूझ और निस्वार्थ सेवा के लिए पहचाना गया. भारत-पाकिस्तान सीमा पर अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच, श्रवण सिंह ने तैनात सैनिकों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की थी. दुश्मन के ड्रोनों की निरंतर घुसपैठ और भारी तनाव के माहौल में, देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत होकर श्रवण प्रतिदिन अग्रिम चौकियों तक जाते थे. वे सैनिकों के लिए पानी, दूध, लस्सी, चाय और बर्फ जैसी आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे. श्रवण ने सैनिकों को पहुंचाई थी मदद दुश्मन की सीधी निगरानी और हमले के निरंतर खतरे के बावजूद, उनके अटूट संकल्प ने लंबे समय से तैनात सैनिकों के लिए जल-आपूर्ति और मनोबल बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन के रूप में काम किया. ​श्रवण ने अपने परिवार को भी सशस्त्र बलों के पूर्ण समर्थन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने सैनिकों के आराम और लॉजिस्टिक के लिए अपने घर और संसाधनों के दरवाजे खोल दिए, जिससे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूती मिली. अब मिलेगा पीएम बाल पुरस्कार उनके इस साहसी और करुणामयी आचरण ने स्थानीय समुदाय को एकजुट किया और देश भर के बच्चों के लिए एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है. उनके इस नेक और बहादुर कार्य के लिए ‘गोल्डन एरो डिवीजन’ ने उनकी शिक्षा को स्पॉन्सर किया है. ​उनकी असाधारण वीरता, निरंतर समर्पण और प्रेरणादायक देशभक्ति को स्वीकार करते हुए, भारत सरकार ने मास्टर श्रवण सिंह को बच्चों को दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 के लिए चुना है. उनका अनुकरणीय साहस और सेवा की गहरी भावना भारतीय समाज के बेहतरीन मूल्यों को दर्शाती है और राष्ट्र के युवाओं के लिए एक चमकते प्रकाश स्तंभ के समान है. वही परिवार में और इलाके में खुशी का माहौल है. परिवार ने कहा कि श्रवण को अवार्ड मिल रहा है हमें बड़ी खुशी है.