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NGT ने लगाया ब्रेक: भोपाल अयोध्या बायपास पर अब नहीं कटेंगे पेड़

भोपाल राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास चौड़ीकरण के लिए हरे पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल( NGT) ने बुधवार को पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है.   बायपास चौड़ीकरण के लिए कुल 8 हजार पेड़ों को काटा जाना था. रोक के बाद प्रोजेक्ट में खटाई खटाई में पड़ सकता है..  मंगलवार 23 दिसम्बर से इन पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई थी, लेकिन इसके अगले ही दिन यानी आज 24 दिसम्बर बुधवार को एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. हालांकि एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि सिर्फ पेड़ कटाई पर रोक लगाई गई है, लेकिन संबंधित एजेंसी सड़क निर्माण का कार्य जारी रख सकता है. इसके लिए पेड़ों के साथ छेड़छाड़ न की जाए. इसलिए लगाई कटाई में रोक भोपाल में 10 लेन सड़क के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए एनजीटी में याचिका लगाने वाले नितिन सक्सेना ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  (एनएचएआई) द्वारा सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई तो शुरू कर दी गई, लेकिन इसके लिए तय मानकों का पालन नहीं किया गया. शहर में इसके पहले भी बीआरटीएस, स्मार्ट सिटी, कोलार सिक्सलेन और मेट्रो समेत अन्य प्रोजेक्ट के लिए लाखों पेड़ों की बलि चढ़ चुकी है. संबंधित निर्माण एजेंसियों ने भी पेड़ कटने के बाद उसकी भरपाई के लिए पौधारोपण का दावा किया था, लेकिन हकीकत सबके सामने है. 8 जनवरी तक रोक याचिकाकर्ता के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि पूर्व में दिए गए एनजीटी के आदेश के अनुसार वृक्षों की कटाई की वैकल्पिक योजना पर विचार करने के लिए कोई केंद्रीय रूप से सशक्त समिति गठित नहीं की गई है, जिससे कम संख्या में वृक्षों की कटाई आवश्यक हो सके. न ही काटे गए वृक्षों की क्षतिपूर्ति और रोपित वृक्षों के 5 वर्ष तक जीवित रहने के लिए इस न्यायाधिकरण द्वारा निर्देशित विधि के अनुसार क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के संबंध में कोई निर्णय लिया गया है. अयोध्या बायपास क्षेत्र में बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को सॉ कटर से काटा गया था. स्थानीय लोगों ने कहा कि यह क्षेत्र शहर के लिए ग्रीन लंग की तरह काम करता था. अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला पहले से ही एनजीटी में विचाराधीन था. इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को मंजूरी देना कई सवाल खड़े करता है. नियमों के मुताबिक, एनजीटी में मामला लंबित होने की स्थिति में किसी भी तरह की बड़ी पर्यावरणीय गतिविधि पर रोक लगनी चाहिए. इतनी जल्दी कैसे मिली अनुमति? सूत्रों के अनुसार, 12 दिसंबर को स्टेट इम्पावरमेंट कमेटी की बैठक हुई और उसी दिन या बेहद कम समय में एनएचएआई को 7,881 पेड़ काटने की हरी झंडी दे दी गई. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अनुमति देने से पहले विस्तृत पर्यावरणीय आकलन और जनसुनवाई जरूरी होती है. खटाई में पड़ सकता है 16 किलोमीटर लंबा 10 लेन वाला प्रोजेक्ट  गौरतलब है एनजीटी द्वारा हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से करीब 16 किलोमीटर लंबे 10 लेन वाला अयोध्या बायपास चौड़ीकरण प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है. हालांकि बिना हरे पेड़ों के काटे सड़क चौड़ीकरण का काम बदस्तूर जारी रहेगा. हालांकि एनजीटी ने सुनवाई के दौरान बड़े ही सख्त अंदाज में कहा है कि, नियम पहले, प्रोजेक्ट बाद में होता रहेगा.  हरे पेड़ों की कटाई ने वृक्ष संरक्षण कानून पर उठा दिए सवाल रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या बाइपास चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित 8000 हरे पेड़ों की कटाई के फैसले ने वृक्ष संरक्षण कानून पर भी सवाल उठा दिए हैं. बायपास चौड़ीकरण के लिए 8000 हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए एनजीटी में अपनी टिप्पणी में प्रतिपूरक वनीकरण पर भी सरकार से जवाब मांगा और कहा है कि विकल्पों पर भी विचार जरूरी है.  रोक के बावजूद बिना पेड़ काटे चलता रहेगा सड़क का काम NGT ने बायपास चौड़ीकरण के लिए हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक एक भी पेड़ नहीं कटेगा. इससे 16 किमी लंबे 10 लेन वाला बड़ा प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है. एनजीटी के आदेश को मोहन सरकार के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है.  प्रतिपूरक वृक्षारोपण पर सवाल एनएचएआई की ओर से दावा किया गया है कि पेड़ों की कटाई के बदले प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया जाएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या नए लगाए जाने वाले पौधे उसी क्षेत्र में, उसी संख्या और उसी जैव विविधता के होंगे? अनुभव बताता है कि कागजों में दिखाया गया वृक्षारोपण ज़मीनी हकीकत में अक्सर नजर नहीं आता. हाईकोर्ट और नियमों का हवाला पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे पहले भी हाईकोर्ट और एनजीटी कई मामलों में साफ कर चुके हैं कि विकास कार्यों के नाम पर अंधाधुंध पेड़ काटना स्वीकार्य नहीं है. सड़क चौड़ीकरण के विकल्प तलाशे जाने चाहिए थे, लेकिन सबसे आसान रास्ता हरियाली खत्म करना चुना गया.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी दिल्ली मेट्रो फेज 5A की हरी झंडी, नए साल में 13 नए स्टेशन खुलेंगे

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बुधवार को दिल्ली मेट्रो के फेज 5A को मंजूरी दे दी है. इसमें 13 स्टेशन होंगे. इस दौरान 12,015 करोड़ रुपये की लागत से 16 किमी लंबी नई लाइन बिछाई जाएगी. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी. अश्विनी वैष्णव ने कहा, " केंद्रीय मंत्रीमंडल ने दिल्ली मेट्रो के फेज 5A को मंजूरी दे दी है, जिसमें 13 स्टेशन होंगे. इस परियोजना के तहत 12,015 करोड़ रुपये की लागत से 16 किमी लंबी नई लाइन बिछाई जाएगी. इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 400 किमी को पार कर जाएगा." 16 किमी लंबे तीन नए कॉरिडोर बनेंगे फेज V (A) के तहत दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) कुल 16 किमी लंबे तीन नए कॉरिडोर बनाएगा. इसका मकसद लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और शहर के कुछ सबसे बिजी हिस्सों पर भीड़ कम करना है. इस विस्तार से मौजूदा नेटवर्क में 13 स्टेशन जुड़ जाएंगे, जिससे रेजिडेंशियल हब, कमर्शियल डिस्ट्रिक्ट और ट्रांजिट इंटरचेंज के बीच लिंक मजबूत होंगे. 'दिल्ली मेट्रो ने बदली लोगों की जिंदगी' कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "दिल्ली मेट्रो के विस्तार के बारे में एक बहुत जरूरी फैसला लिया गया है. हम सभी जानते हैं कि दिल्ली मेट्रो ने दिल्ली के लोगों और शहर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की जिंदगी में कैसे बदलाव लाया है. इस विस्तार के साथ, दिल्ली मेट्रो में एक नया चैप्टर जुड़ेगा." औसतन 65 लाख यात्री करते हैं मेट्रो का इस्तेमाल केंद्रीय मंत्री बताया "औसतन 65 लाख यात्री रोजाना दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं. कुछ पीक दिन ऐसे होते हैं जब दिल्ली मेट्रो एक दिन में 80 लाख लोगों को ले जाती है." उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज-VA का कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन तीन साल है. कंस्ट्रक्शन ज्यादातर टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल करके अंडरग्राउंड होगा, जिससे ट्रैफिक में कम से कम रुकावट आएगी.

कोहरे और कम दृश्यता में नियंत्रित गति, सभी बसों में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य

योगी सरकार यात्रियों की सुरक्षा के लिए सतर्क, ठंड में सुरक्षित बस संचालन के निर्देश कोहरे और कम दृश्यता में नियंत्रित गति, सभी बसों में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य कोहरे की स्थिति में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो  विजिबिलिटी सामान्य होने पर ही बसों का संचालन किया जाए बस अड्डों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से यात्रियों को सुरक्षा उपायों की दी जाएगी जानकारी घने कोहरे वाले मार्गों पर रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित किया जाए  रात्रि सेवाओं में अनुभवी, दुर्घटना-रहित और अच्छे ईंधन रिकॉर्ड वाले चालकों की हो तैनाती  लंबी दूरी की बसों की 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग तथा 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शरद ऋतु और ठंड के मौसम में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद में प्रदेश में बस यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किये जाने, रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित करने और यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। कोहरे में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने परिवहन निगम एवं संबंधित अधिकारियों को शरद ऋतु/ठंड के मौसम में बसों के सुरक्षित एवं नियंत्रित संचालन को लेकर विस्तृत आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोहरे और दृश्यता में कमी जैसी परिस्थितियों में बसों का संचालन अत्यंत सावधानी से किया जाना आवश्यक है और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मुहैया कराना प्रदेश सरकार का दायित्व है। परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कोहरे की स्थिति में बसों की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक न हो, जबकि अत्यधिक कोहरे में बस को किसी सुरक्षित स्थान पर रोककर विजिबिलिटी सामान्य होने पर ही आगे संचालन किया जाए। बस अड्डों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार एनाउंसमेंट कर यात्रियों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं। अनुभवी चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए उन्होंने कहा कि घने कोहरे वाले मार्गों पर रात्रिकालीन सेवाओं को आवश्यकता अनुसार सीमित किया जाए तथा रात्रि सेवाओं में अनुभवी, दुर्घटना-रहित और अच्छे ईंधन रिकॉर्ड वाले चालकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि रात्रि सेवा पर जाने से पूर्व चालक को कम से कम 8 घंटे का विश्राम प्राप्त हुआ हो। 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर वाली रात्रिकालीन सेवाओं को अस्थायी रूप से स्थगित रखने के निर्देश दिए गए हैं। चालकों का अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य लंबी दूरी एवं रात्रिकालीन सेवाओं की बसों को मार्ग पर भेजने से पूर्व 13 बिंदुओं पर आउटशेडिंग जांच तथा संचालन के दौरान 31 बिंदुओं पर नियमित भौतिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निगम एवं अनुबंधित बसों में रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप, फॉग लाइट, ऑल वेदर बल्ब, वाइपर और शीशे पूर्ण रूप से कार्यरत होना अनिवार्य किया गया है। मार्ग पर तैनात इंटरसेप्टर एवं प्रवर्तन वाहनों द्वारा निरीक्षण के दौरान ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता परिवहन मंत्री ने चालकों को तीन प्रकार की सड़कों पर विशेष सावधानी बरतने को कहा है। एक्सप्रेस-वे पर अचानक ठहराव से बचाव, डिवाइडर युक्त सड़कों पर दायीं ओर संचालन, तथा बिना डिवाइडर वाली सड़कों पर बायीं ओर संचालन कर दुर्घटनाओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी चालकों एवं परिचालकों को इन दिशा-निर्देशों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि संयमित गति और सतर्कता के साथ बसों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि योगी सरकार प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निर्माणाधीन विश्वविद्यालय भवनों का CM नीतीश ने किया निरीक्षण, गुणवत्ता व समयसीमा पर दिया जोर

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मीठापुर में बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय एवं बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ० प्रतिमा एस० वर्मा ने बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय तथा स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के भवन के निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी दी। CM नीतीश ने तेजी से निर्माण पूर्ण करने का दिया निर्देश निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के छात्र एवं छात्राओं को उच्च स्तर की तकनीकी शिक्षा प्रदान करने हेतु बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय एवं बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय एवं बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन सभी संरचनाओं का निर्माण कार्य बेहतर ढंग से और तेजी से पूर्ण करें। मीठापुर के इस क्षेत्र में चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वाविद्यालय, निफ्ट, चाणक्या लॉ यूनिवर्सिटी एवं मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान बनाये गए हैं। यह पूरा क्षेत्र काफी अच्छा हो गया है। इन दोनों विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य पूर्ण होने से यह क्षेत्र और भी अच्छा दिखेगा। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 27 जुलाई 2022 को बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की गई तथा इसके भवन के निर्माण हेतु मीठापुर, पटना में 05 एकड़ भूमि आवंटित की गई। मुख्य भवन 04 मंजिल का होगा। इसका कुल निर्मित क्षेत्रफल 1,11,732 वर्गफीट है। इसके भूतल पर डीन कार्यालय, रजिस्ट्रार का कार्यालय, कैफेटेरिया एवं अन्य कार्यालय, प्रथम तल पर कुलपति कार्यालय, मीटिंग हॉल तथा मूल्यांकन केन्द्र बनाया जा रहा है। द्वितीय तल पर कार्यालय कक्ष, मूल्यांकन केन्द्र, भंडारगृह आदि तृतीय तल पर 05 अभिलेखागार, भंडारगृह आदि तथा चतुर्थ तल पर मूल्यांकन केन्द्र एवं 02 बड़े बहुउद्देशीय हॉल बनाया जा रहा है। साथ ही इस परिसर में 01 अतिथि गृह का भी निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 08 कमरे तथा 04 सुइट रूम का निर्माण किया जाना है। यहां 01 केयर टेकर आवास का भी निर्माण किया जा रहा है। राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा (मेडिकल एजुकेशन) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी योजना के रूप में सात निश्चय-2 योजना के अंतर्गत स्थापित बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के नये भवन निर्माण कार्य किया जा रहा है। भवन का कुल क्षेत्रफल 27567 वर्गमीटर है। परियोजना के दो भाग हैं प्रथम भाग मुख्य विश्वविद्यालय भवन, जिसका कुल क्षेत्रफल 12,845 वर्ग मीटर है, जिसके अंतर्गत प्रशासनिक सह शैक्षणिक भवन, परीक्षा कक्ष, औषधालय, बहुउद्देशीय मंच, प्रतीक्षालय कक्ष, सूचना केन्द्र, नामांकन शाखा, कुलाधिपति कक्ष, प्रशिक्षण सह स्थानन शाखा इत्यादि हैं तथा दूसरे भाग उपभवन, जिसका कुल क्षेत्रफल 14822 वर्ग मीटर है, जिसके अंतर्गत कुलपति आवास, विश्वविद्यालय अतिथि गृष्ठ तथा बहुउद्देशीय सभागार की व्यवस्था की गई है।

यूपी भाजपा में जातीय बैठकों की गूंज: ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग की तस्वीरें वायरल, माहौल गरमाया

लखनऊ  यूपी की राजनीति में जाति के नाम पर वार-पलटवार का दौर तो हमेशा चलता रहता है। टिकट से लेकर पार्टियों में पद भी जाति के आधार पर देने की तो परंपरा ही है। ऐसे में जब किसी दल में एक जाति के विधायकों की गोलबंदी होती है तो माहौल गरमा जाता है। कुछ समय पहले लखनऊ में राजपूत विधायकों ने कुटुंब के नाम से बैठक की थी। अब भाजपा के ब्राह्मण विधायकों ने सहभोज के नाम पर बैठक की है। विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के जुटान ने सूबे का सियासी माहौल गर्मा दिया है। कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के बहुखंडी स्थित आवास पर ब्रह्माण विधायकों का जुटान हुआ है। इसमें करीब तीन दर्जन विधायक और विधान परिषद सदस्यों के शामिल होने की खबर है। सरकार और संगठन में बदलाव के इस दौर में लोग इस जुटान के सियासी मायने तलाशने में जुटे हैं। बैठक की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। भाजपा ने भी इस पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं।   इस सहभोज की तस्वीरों के साथ एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें विधायकों को प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी सहित अन्य सियासी मुद्दों पर चर्चा करते हुए सुना जा सकता है। इस सहभोज में लिट्ठी-चोखा और मंगलवार व्रत के भोजन के साथ ही राजनैतिक चर्चाएं भी होने की खबर है। पिछले विधानसभा सत्र के दौरान इसी तरह क्षत्रिय विधायक भी कुटुंब मिलन कार्यक्रम के तहत राजधानी के एक होटल में जुटे थे। उसके बाद एक अन्य स्थान पर कुर्मी विधायकों की भी बैठक हुई थी। भाजपा में हाल ही में प्रदेश संगठन का नेतृत्व बदला है। केंद्रीय मंत्री व महराजगंज के सांसद पंकज चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी या ब्राह्मण चेहरे को लेकर ही चर्चाओं का बाजार गर्म था। नये साल में योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी चर्चाएं तेज हैं। उधर, सबको हिन्दुत्व के झंडे के नीचे लाने के प्रयास में जुटे संघ और भाजपा को भी जातीय गोलबंदी का संदेश देती ऐसी बैठकों ने बेचैन कर दिया है। सूत्रों की मानें तो पीएन पाठक के आवास पर हुए सहभोज में शामिल विधायकों में से कइयों से बातचीत कर बैठक के निहितार्थ खोजे जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बता दें कि भाजपा के कुल 46 ब्राह्मण विधायक हैं।   यह हुए शामिल पीएन पाठक (आयोजक), रत्नाकर मिश्र, उमेश द्विवेदी, एमएलसी, प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्र, शलभमणि त्रिपाठी, विपुल दूबे, राकेश गोस्वामी, रवि शर्मा, विनोद चतुर्वेदी, संजय शर्मा, विवेकानंद पाण्डेय, अनिल त्रिपाठी, अंकुर राज तिवारी, साकेत मिश्र (एमएलसी, बाबूलाल तिवारी (एमएलसी), विनय द्विवेदी, सुभाष त्रिपाठी, अनिल पाराशर, कैलाशनाथ शुक्ला, प्रेमनारायण पाण्डेय, ज्ञान तिवारी, सुनील दत्त द्विवेदी, धर्मेंद्र सिंह भूमिहार (एमएलसी।  

स्वास्थ्य आपातकाल में भी महंगा टैक्स! एयर प्यूरिफायर पर 18% GST पर HC की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली  दिल्ली में प्रदूषण संकट के बीच हाई कोर्ट ने एयर प्यूरिफायर पर टैक्स कटौती के पक्ष में रुख जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि क्यों एयर इमरजेंसी के दौरान भी 18 पर्सेंट टैक्स लग रहा है? अदालत ने केंद्र सरकार को यह भी बताने को कहा है कि क्यों तुरंत टैक्स में कटौती नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट ने प्रदूषण की वजह से आम लोगों को ही रही समस्याओं की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, ‘हम एक दिन में 21 हजार बार सांस लेते हैं। नुकसान की गणना कीजिए।’ चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एयर प्यूरिफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में रखने की मांग की गई है जिससे यह 5 फीसदी जीएसटी स्लैब के दायरे में आ जाएगा। इस पर जवाब के लिए केंद्र सरकार से और समय की मांग किए जाने पर बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘यह उचित समय क्या होता है? जब हजारों लोग मर जाएंगे? इस शहर के हर व्यक्ति को साफ हवा की आवश्यकता है और आप यह भी नहीं दे सकते हैं। कम से कम आप इतना कर सकते हैं कि एयर प्यूरिफायर तक उनकी पहुंच हो।’ अदालत ने कहा- तुरंत सरकार से पूछकर बताएं प्रस्ताव जजों ने तात्कालिक राहत की संभावनाओं पर भी सवाल किए। अदालत ने कहा, 'इस आपातकालीन स्थिति में आप राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अस्थायी कदम के तौर पर इसमें छूट क्यों नहीं दे सकते हैं।' बेंच ने सरकारी वकील से इस पर निर्देश लेने और प्रस्ताव को अदात में 2.30 के बाद रखने को कहा। पीआईएल को अधिवक्ता कपिल मदान ने दायर की और अदालत से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार को एयर प्यूरिफायर को मेडिकल डिवाइस का दर्जा देने का निर्देश दिया जाए। एयर प्यूरिफायर पर मौजूदा समय में 18 पर्सेंट जीएसटी लगाया जाता है।  

जशपुर को मिला ऐतिहासिक तोहफा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बड़ी सिंचाई सौगात

किसानों के हित में 11 परियोजनाओं के लिए लगभग 199 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन के दो वर्षों के दौरान जशपुर जिले के कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जिले में किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 199 करोड़ 49 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय को स्थायी मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जशपुर जिले में बैराज, एनीकट, तालाब एवं व्यपवर्तन योजनाओं के निर्माण, मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से जिले के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और वर्षा पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। जशपुर जिले को स्वीकृत प्रमुख सिंचाई योजनाओं में मैनी नदी, बगिया स्थित बैराज उद्वहन सिंचाई योजना के लिए 79 करोड़ 37 लाख रुपये, कुनकुरी ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य हेतु 37 करोड़ 9 लाख रुपये, सहसपुर तालाब योजना के लिए 4 करोड़ 27 लाख रुपये तथा डुमरजोर (डुमरिया) व्यपवर्तन योजना हेतु 10 करोड़ 36 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है। इसी क्रम में तुबा एनीकट योजना के लिए 2 करोड़ 67 लाख रुपये, बारो एनीकट योजना हेतु 7 करोड़ 6 लाख रुपये, मेडरबहार तालाब योजना के लिए 5 करोड़ रुपये, पमशाला एनीकट योजना हेतु 28 करोड़ 2 लाख रुपये, कोनपारा तालाब (दलटोली डेम) के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए 3 करोड़ 47 लाख रुपये, अंकिरा तालाब योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार हेतु 3 करोड़ 47 लाख रुपये तथा कोकिया व्यपवर्तन योजना के लिए 16 करोड़ 17 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन सिंचाई परियोजनाओं के पूर्ण होने से जिले के अनेक ग्रामों में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को खेती के लिए नियमित पानी मिलेगा, फसल उत्पादन बढ़ेगा और कृषि को स्थायी आजीविका का मजबूत आधार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सिंचाई, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। जशपुर जिले को मिली ये सिंचाई सौगातें सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनकल्याणकारी नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन योजनाओं से जिले के किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

पैसों की भूख में क्रूरता: कुत्ते का मांस खरगोश बताकर बेचने का आरोप, बिहार में हड़कंप

पटना  बिहार में शराब के पैसों के लिए एक शख्स ने बड़ा कांड कर दिया है। इस शख्स की करतूत को जानकर आप चौंक जाएंगे। घटना मोतिहारी जिले की है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक शख्स के पास शराब पीने के लिए पैसे नहीं थे तो उसने एक कुत्ते को मार डाला। उसने कुत्ते के मांस को खरगोश का मांस बताकर पूरे गांव में बेचा और लोगों से पैसे भी लिए। इधर कुत्ते का मांस खरगोश का मांस समझ कर खाने से यहां कई लोगों की तबीयत भी खराब हो गई है।   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोतिहारी के मधुबन प्रखंड के गरहिया बाजार थाना इलाके के गरहिया गांव में रहने वाले मंगरु सहनी नाम के एक युवक ने इस भयानक कांड को अंजाम दिया है। इलाके के कुछ लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि मंगरु शराब पीने का आदी था। घटना के दिन मंगरु के पास शराब पीने के लिए पैस नहीं थे। आरोप है कि मंगरु सहनी ने इलाके में रहने वाले एक कुत्ते को मार डाला। मंगरु ने इस कुत्ते के कई टुकड़े कर दिए। इसके बाद मंगरु गांव में इन टुकड़ों को यह कहकर बेचने लगा कि यह खरगोश का मांस है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उसने कुत्ते के मांस को 1000 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेच दिया। यह भी कहा जा रहा है कि शराब बेचकर आए पैसों से उसने शराब भी पी थी। इधर मंगरु से मांस खरीदकर खाने वाले कई लोगों की तबीयत भी खराब होने लगी। यह भी कहा जा रहा है कि मंगरु ने खुद गांव में घूम-घूम कर कई लोगों से कहा कि उसने सबको कुत्ते का मांस खिलाया है। इस घटना से गांव में लोग आक्रोशित हैं। आरोपी मंगरु फरार है। हांव के पास ही एक बागवानी में कुत्ते का कटा हुआ सिर भी मिला है। यह सारा मामला अब स्थानीय थाने में भी पहुच चुका है। गांव वालों ने लिखित शिकायत पुलिस को सौंपा है और कार्रवाई की मांग की है।

हरियाणा सरकार ने जारी किए ये आदेश, इस कर्मचारियों पर होंगे लागू

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने जिलों में प्रशासनिक कार्यों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, अतिरिक्त उपायुक्त के अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे, चुनाव ड्यूटी पर होने अथवा स्थानांतरण/सेवानिवृत्ति के कारण पद रिक्त होने की स्थिति में संबंधित जिले के जिला नगर आयुक्त को लिंक अधिकारी-2 नामित किया है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे अथवा चुनाव ड्यूटी पर जाने से पूर्व लिंक अधिकारी को अनिवार्य रूप से सूचित करेंगे।

स्वास्थ्य शिक्षा में बड़ा फैसला: पंजाब के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों के कायाकल्प को ₹68 करोड़ मंजूर

चंडीगढ़  पंजाब के आम लोगों को बेहतर इलाज और जांच की सुविधाएं मिले, इसके लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों का कायाकल्प करने का प्लान तैयार किया है. पंजाब सरकार ने इसके लिए 68.98 करोड़ रुपए के फंड तुरंत जारी करने के आदेश दिए हैं. मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सुविधाओं का विस्तार करने का आदेश जारी किया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों को अति-आधुनिक और विश्वस्तरीय मशीनरी से लैस करना जरूरी है ताकि ये मरीजों को बेहतर तरीके से सेवाएं दे सकें. भगवंत सिंह मान ने मेडिकल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि इन मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए तुरंत 68.98 करोड़ रुपए जारी किए जाएं.   कौन-कौन से मेडिकल कॉलेज के लिए फंड मुख्यमंत्री ने कहा कि 26.53 करोड़ रुपए सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर, 28.51 करोड़ रुपए सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला, 9.43 करोड़ रुपए डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एस.ए.एस. नगर (मोहाली) तथा 4.51 करोड़ रुपए पी.जी.आई. सैटेलाइट सेंटर, फिरोजपुर के लिए तुरंत दिए जाएं. उन्होंने कहा कि इन फंडों का उपयोग आधुनिक मशीनें एवं अन्य उपकरण खरीदने के साथ-साथ मेडिकल कॉलेजों में विकास कार्यों के लिए किया जाए. भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि हमारी सरकार पंजाब को दुनिया भर में मेडिकल शिक्षा का गढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि इससे इलाज एवं मेडिकल टेस्ट की सुविधाओं को और बल मिलेगा. ताकि किफायती दरों पर मिले इलाज मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों में ये सुविधाएं समयबद्ध एवं उचित तरीके से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है ताकि लोगों को इलाज की सुविधाएं किफायती दरों पर उपलब्ध हों. उन्होंने कहा कि पंजाब का इतिहास रहा है कि इसने विश्वस्तरीय डॉक्टर पैदा किए हैं. आज भी राज्य में बड़ी संख्या में विद्यार्थी डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल शिक्षा ले रहे हैं. भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों में मानक शिक्षा देना राज्य सरकार का फर्ज है ताकि मेडिकल शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों को बड़े स्तर पर लाभ मिले. इस अवसर पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अलोक शेखर, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कुमार राहुल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत तथा अन्य उपस्थित थे.