samacharsecretary.com

निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास

अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में दिखेगी प्रदेश के आर्थिक विकास की समग्र तस्वीर निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास केन्द्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में होंगे शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। इसी उद्देश्य से 25 दिसंबर को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार” का आयोजन किया जाएगा। यह ग्रोथ समिट प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार आधारित विकास की समग्र तस्वीर को प्रदर्शित करने वाला सबसे प्रभावी मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप इस समिट में औद्योगिक निवेश के साथ उत्पादन और रोजगार के सृजन पर भी फोकस किया जायेगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित रहेंगे। उनकी सहभागिता यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास मॉडल केंद्र की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और प्रदेश में निवेश सुरक्षित, पारदर्शी और लाभकारी तरीके से लागू किया जाएगा। निवेश को जमीन पर उतारने का मंच ग्रोथ समिट के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर आधारित भूमि आवंटन और अनुमोदन संबंधी निर्णय लिये जायेंगे। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। नए औद्योगिक क्षेत्र, क्लस्टर और प्लग-एंड-प्ले इकाइयों के शुभारंभ से प्रदेश में उत्पादन और उद्योग गतिविधियों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी व्यापक रूप से विकसित होंगे और युवाओं के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। कार्यक्रम में निवेशकों को सिंगल-क्लिक प्रणाली के माध्यम से प्रोत्साहन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से निवेशक परियोजनाएँ तेजी से शुरू कर पाएंगे और औद्योगिक इकाइयों को समय पर समर्थन मिलेगा। रोजगार और युवाओं का सशक्तिकरण ग्रोथ समिट का उद्देश्य केवल निवेश नहीं, बल्कि रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता देना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में नए उद्योगों के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश में उद्योग और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रोजगार पाने वाले युवाओं को मंच से प्रोत्साहन देने से उनके आत्मविश्वास और उत्पादनशीलता में वृद्धि होगी। एमएसएमई, कौशल विकास और स्टार्टअप पर विशेष ध्यान समिट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, ड्रोन, डिफेंस और फार्मा जैसे क्षेत्रीय और निर्यात आधारित उद्योगों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन पर केंद्रित सत्र यह दिखाएंगे कि प्रदेश सरकार कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगार अवसर प्रदान करने पर समान रूप से ध्यान दे रही है। औद्योगिक प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की ताकत कार्यक्रम स्थल पर औद्योगिक परियोजनाओं, अधोसंरचना और निवेश से जुड़े विभागीय कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक अवसर, निवेश के प्रस्ताव, अधोसंरचना विकास और औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों और आमजन को दी जाएगी। इससे निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए भरोसा मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी। सतत औद्योगिक और आर्थिक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह ग्रोथ समिट यह सुनिश्चित करेगा कि निवेश केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। निवेश को उद्योग स्थापना, उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण में बदला जाएगा। यह समिट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा। प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार और कौशल विकास एक साथ बढ़ें। समिट के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए सुविधाजनक माहौल है, उद्योगों को गति मिलेगी और युवाओं को स्थायी रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे। समग्र प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व ग्रोथ समिट न केवल प्रदेश के निवेश और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं और नीति स्थिरता को प्रदर्शित करेगा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की सहभागिता इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनाएगी। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार प्रदेश की औद्योगिक नीति और रोजगार सृजन दृष्टि का सबसे बड़ा और प्रभावी मंच साबित होगा। यह आयोजन निवेशकों को भरोसा, उद्योगों को गति और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके मध्यप्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त, रोजगारोन्मुख और निवेश-फ्रेण्डली राज्य के रूप में स्थापित करेगा।  

देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी

देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी    – डॉ. नरेश बंसल, राज्यसभा सांसद और  राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष ,भारतीय जनता पार्टी  हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर ,लिखता–मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। — अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी महज एक स्मृति-उत्सव नहीं है, यह राष्ट्रीय आत्मनिरीक्षण का क्षण है।आज जब देश अपने लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है, १४० करोड़ भारतीय एक ऐसे नेतृत्व की परंपरा पर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं जिसने नैतिक साहस को लोकतांत्रिक संयम, दृढ़ता को सहानुभूति और दूरदर्शिता को विनम्रता के साथ जोड़ा। अटल जी उन दुर्लभ राजनेताओं में से एक थे जिनके लिए राजनीति जनसेवा का एक पवित्र साधन थी। उनका नेतृत्व दिखावटी नहीं था; बल्कि प्रेरक था। उनका मानना था कि अधिकार विश्वसनीयता से आना चाहिए और शक्ति जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए। एक प्रतिबद्ध विचारक होते हुए भी, उन्होंने कभी भी विचारधारा को संवाद पर हावी नहीं होने दिया। उनके लिए संसदीय लोकतंत्र एक प्रक्रियात्मक दायित्व नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी थी। प्रधानमंत्री के रूप में, अटल जी ने यह सिद्ध किया कि सशक्त नेतृत्व और मानवीय शासन एक साथ चल सकते हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों में दृढ़ रहते हुए वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके नेतृत्व ने विश्व को दिखाया कि भारत बिना जल्दबाजी किए दृढ़ संकल्पित हो सकता है, और बिना आक्रामक हुए मुखर हो सकता है। उनके विचार में, शक्ति का अर्थ तभी सार्थक होता है जब वह शांति और स्थिरता के लिए अपनी सार्थकता प्रतिस्थापित करता हो। पोखरण परमाणु परीक्षण रणनीतिक दृढ़ संकल्प का प्रतीक था , जबकि शांति के लिए उनके प्रयासों ने उनकी कुशल राजनेता की भूमिका को अभिभूत किया। मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रहरी , अटल जी  मानना था कि भारत को सशक्त होने के साथ-साथ उत्तरदायी भी होना आवश्यक है ।   विकास के प्रति उनका दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण था। अटल जी समझते थे कि राष्ट्रीय प्रगति तभी सार्थक होती है जब वह समावेशी हो। अवसंरचना, ग्रामीण संपर्क और दूरसंचार के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों का उद्देश्य केवल संपत्ति अर्जन नहीं था, बल्कि लोगों, बाजारों और अवसरों को आपस में जोड़ना था। सड़कों, संपर्क और प्रौद्योगिकी पर उनकी प्राथमिकताओं  ने दूरस्थ क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत करने में मदद की और भारत के विकास को एक नया आधार दिया।   नीति और शासन के अलावा, अटल जी का सबसे बड़ा योगदान भारत को एक सभ्यतागत लोकतंत्र के रूप में समझना था। उनका मानना था कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, वाद-विवाद करने की क्षमता और एकता खोए बिना मतभेदों को आत्मसात करने की क्षमता में निहित है। उनका राष्ट्रवाद आत्मविश्वास से भरा था, लेकिन कभी भी बहिष्कारवादी नहीं था; दृढ़ होते हुए भी सहानुभूतिपूर्ण था। उत्तराखंड के लिए अटल जी की विरासत बेहद व्यक्तिगत और परिवर्तनकारी है। 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) का शांतिपूर्ण गठन लोगों की लंबे समय से पोषित आकांक्षा की पूर्ति थी। यह महज प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था; यह राजनीतिक संवेदनशीलता और राष्ट्रीय दूरदर्शिता का महायज्ञ था क्यूँकि अटल जी समझते थे कि भूगोल शासन को आकार देता है, और जनमानस की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है जन-जन के दिल की धड़कनों से जुड़ना । उनकी प्रतिबद्धता राज्य बनने के साथ ही समाप्त नहीं हुई ;उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि नवगठित राज्य को विशेष दर्जा और आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक समर्पित औद्योगिक पैकेज मिले। उत्तराखंड के आध्यात्मिक और पारिस्थितिक महत्व को पहचानते हुए, उनकी सरकार ने उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक सहायता भी प्रदान की। ये निर्णय विकास के प्रति उनकी समग्र समझ को दर्शाते हैं – एक ऐसी समझ जो पारिस्थितिकी, संस्कृति और आजीविका का सम्मान करती है। उत्तराखंड के साथ अटल जी का रिश्ता नीतिगत संबंधों से कहीं बढ़कर था। उन्हें यहाँ के पहाड़ों, नदियों और आध्यात्मिक ऊर्जा से गहरा लगाव था। 1984 में चुनाव में हार के बाद उन्होंने हरिद्वार और गंगोत्री की पहाड़ियों में शरण ली और वहाँ की शांति से शक्ति प्राप्त की। बहुत कम नेता किसी क्षेत्र की आत्मा से इतनी गहराई से जुड़ पाते हैं। आज जब हम कहते हैं, "अटल जी ने बनाया, मोदी जी  संवारेंगे ," तो यह तुलना का नारा नहीं, बल्कि निरंतरता की अनुभूति  है। अटल जी द्वारा रखी गई कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय एकता की नींव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत और विस्तारित किया जा रहा है। दूरदृष्टि की यह निरंतरता समावेशी और महत्वाकांक्षी विकास के प्रति भारतीय जनता पार्टी की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।  जन्म शताब्दी वर्ष, विशेष रूप से युवा भारतीयों के लिए, राजनीति को एक महान कर्तव्य के रूप में पुनः स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। अटल जी का जीवन यह सिखाता है कि नेतृत्व संख्या के बारे में नहीं, बल्कि दूरदर्शिता के बारे में है; टकराव के बारे में नहीं, बल्कि आम सहमति के बारे में है; व्यक्तिगत स्वार्थ के  बारे में नहीं, बल्कि उद्देश्यगत ईमानदारी के बारे में है।   सार्वजनिक जीवन में रहने वालों के लिए, उनकी यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि सत्ता को हमेशा जवाबदेही के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। राष्ट्र के लिए, यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि प्रगति और मूल्य प्रतिस्पर्धी विचार नहीं हैं, बल्कि पूरक हैं।   अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक बार लिखा था कि अंधेरे से डरना नहीं चाहिए क्योंकि यह केवल अपने भीतर ही जीवित रहता है। जैसे-जैसे भारत आत्मविश्वास और आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है, उनके शब्द और कार्य आगे के मार्ग को प्रशस्त करते रहेंगे।   2025 में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मशताब्दी वर्ष है । आइये! उस  दूरदर्शी नेता, कवि, वक्ता और रणनीतिकार को नमन करें जिन्होंने भारत को एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने  के लिए इतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए और “भारत के सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य “ का मान अर्जित किया । अटल जी का व्यक्तित्व आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता , मजबूत होते हुए भी करुणामय होने की … Read more

कड़ाके की ठंड में झारखंड परेशान, लोग तापमान और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित

रांची झारखंड इन दिनों हाड़ कंपाने वाली ठंड की चपेट में है। राज्य के अधिकांश जिलों में शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ठिठुरन से लोग बेहाल हैं। वहीं अस्पतालों में ठंड से प्रभावित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऊपर से कोहरे के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई है, जिससे आवागमन में भी परेशानी हो रही है। आज राजधानी रांची का न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन के सबसे कम तापमान में से एक है। राज्य के कुल नौ जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। रांची के अलावा डाल्टनगंज में 6.5 डिग्री, लोहरदगा में 7.1 डिग्री, गुमला में 7.3 डिग्री, खूंटी में 7.3 डिग्री, हजारीबाग में 7.6 डिग्री, कोडरमा में 8.1 डिग्री, बोकारो और चाईबासा में 9.2 डिग्री तथा लातेहार में 9.5 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। ठंड की वजह से इन जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा चिंता की बात अधिकतम तापमान में आई भारी गिरावट को लेकर है। हजारीबाग में अधिकतम तापमान महज 15.8 डिग्री सेल्सियस तक सिमट गया है, जबकि न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री रहा। इसके चलते दिन के समय भी ठंड का एहसास हो रहा है। खासकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हजारीबाग के अलावा कोडरमा में अधिकतम तापमान 17 डिग्री, डाल्टनगंज में 18.5 डिग्री, लोहरदगा में 19.4 डिग्री और लातेहार में 19.8 डिग्री रिकॉडर् किया गया है। राज्य के कुल पांच ऐसे जिले हैं, जहां अधिकतम तापमान 20 डिग्री से नीचे चला गया है, जबकि 19 जिलों में अधिकतम तापमान 20 से 25 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम केंद्र, रांची के अनुसार 22 दिसंबर को राज्य के 16 जिलों में घना कोहरा छाया रहा। चतरा, कोडरमा, हजारीबाग, गिरिडीह, रामगढ़ और बोकारो में कोहरे का सबसे ज्यादा असर देखा गया। इसके अलावा गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, रांची, खूंटी, धनबाद, देवघर और जामताड़ा में भी कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित किया। देवघर में द्दश्यता घटकर 200 मीटर और जमशेदपुर में 300 मीटर तक पहुंच गई, जिससे यातायात पर खासा असर पड़ा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड और कोहरे के बने रहने की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।  

नए साल 2026 पर महाकाल मंदिर में भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर को आरती बुकिंग होगी बंद

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 31 दिसंबर को भस्म आरती की ऑफलाइन बुकिंग व्यवस्था बंद रहेगी। भीड़ भरे दिनों में दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए 25 दिसंबर से पांच जनवरी तक ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को पहले से ही ब्लाक कर दिया गया है। ऐसे में एक जनवरी को देश-विदेश से आने वाले दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन होंगे। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 के अवसर पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए दर्शन की व्यापक योजना बनाई गई है। 31 दिसंबर को भस्म आरती का ऑफलाइन पंजीकरण बंद रहेगा। एक जनवरी को दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन कराए जाएंगे। चलित भस्म आरती दर्शन का समय सुबह चार बजकर, 15 मिनट से रहेगा। भस्म आरती के बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से महाकाल महालोक होते हुए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से मंदिर के बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि चौराहा होते हुए पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे।  

रायपुर पुलिस कमिश्नर के पद के लिए आईजी स्तर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में

 रायपुर  रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अगले साल एक जनवरी को लेकर सरकार के भीतर मंत्रणा चल रही है। एक जनवरी को अगर ना भी हुआ तो उस दिन कम-से-कम नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। वैसे सरकार के लोगों की कोशिश है कि एक जनवरी से पुलिस के इस बड़े रिफार्म का आगाज हो जाए। हालांकि, एक जनवरी में टाईम काफी कम बच गया है। मुश्किल से हफ्ता भर समय है। किस प्रकार का पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा, इस पर भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालांकि, चाहेगी तो हफ्ता भर काफी है। अब ज्यादा लेट होने की गुंजाइश इसलिए नहीं है कि मुख्यमंत्री के ऐलान किए सवा साल से अधिका हो गया है। सीएम विष्णुदेव साय ने 15 अगस्त 2024 के भाषण में पुलिस कमिश्नर सिस्टम शुरू करने की घोषणा की थी। उनके ऐलान के बाद काफी वक्त निकल चुका है। इसलिए, अब ज्यादा विलंब करने का प्रश्न नहीं उठता। छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ करने चर्चाएं थीं मगर ऐन वक्त पर उसे टाल दिया गया। बाद में पता चला कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधयेक पारित कर एक्ट बनाया जाएगा। याने ओड़िसा की तरह काफी सशक्त पुलिस कमिश्नर प्रणाली बनाया जाएगा। किंतु उसके बाद विधानसभा का एक दिन का स्पेशल सत्र भी निकल गया और फिर शीतकालीन सत्र भी। रायपुर के फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए आईजी लेवल के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चाओं में हैं, उनमें पुलिस मुख्यालय में पोस्टेड अजय यादव, ब्रदीनारायण मीणा, बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला, दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और सरगुजा आईजी दीपक झा का नाम प्रमुख है। हालांकि, महिला आईजी के तौर पर एक नाम नेहा चंपावत का भी है। उन्होंने एलएलबी करने के बाद यूपीएससी क्रैक किया। सरकार को अगर फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए महिला आईपीएस जंचेगी तो उन्हें मौका मिल सकता है। नेहा तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं। एसपी के तौर पर उन्होंने सिर्फ एक जिला महासमुंद किया है। तेज महिलाएं पुलिस में सफल भी होती हैं, क्योंकि उनसे अकरण कोई हुज्जत नहीं करता। यद्यपि, रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा भी बेहतर चयन हो सकते हैं, मगर एसीबी और ईओडब्लू की जिम्मेदारियों के चलते सरकार शायद ही उनके नाम पर विचार करें। कोरबा में कुख्यात अपराधी का एककांउटर करने वाले सुंदरराज इस समय बस्तर आईजी हैं। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के चलते उन्हें सरकार अभी टच नहीं करेगी। पांच नामों की चर्चा सबसे अधिक रायपुर पुलिस कमिश्नर के लिए वैसे पांच आईपीएस अधिकारियों की चर्चा सबसे अधिक है। अब सरकार नेहा चंपावत जैसा कोई नया प्रयोग कर चौंका दें तो बात अलग है। मगर इन नामों पर जोर ज्यादा है। चलिये बताते हैं इन पांचों आईपीएस अधिकारियों के बारे में कौन, किस-किस जिले में एसपी, आईजी रहे…. 1. अजय यादव 2004 बैच के आईपीएस अजय यादव सात जिलों के एसपी रहे। नारायणपुर से उनकी कप्तानी शुरू हुई थी, इसके बाद कांकेर, बिलासपुर जांजगीर, दुर्ग, रायपुर में एसएसपी रहे। प्रोफाइल के हिसाब से देखें तो अजय यादव काफी मजबूत स्थिति में हैं। वे रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा को मिलाकर तीन पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। इसके अलावा पुलिस महकमे में नेक्स्ट टू डीजीपी इंटेलिजेंस चीफ की भी पोस्टिंग वे कर चुके हैं। 2. बद्रीनारायण मीणा 2004 बैच के आईपीएस बद्री नारायण मीणा छत्तीसगढ़ में नौ जिले के एसपी रह चुके हैं। बलरामपुर से उनकी कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ। इसके बाद कवर्धा, राजनांदगांव, जगदलपुर, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग। बद्री चार पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। वे पहले आईपीएस अधिकारी होंगे, जो दुर्ग के साथ रायपुर के भी आईजी रहे। इसके बाद फिर बिलासपुर के आईजी बनाए गए। बिलासपुर के बाद उन्हें फिर दुर्ग आईजी का दायित्व सौंपा गया। याने तीन पुलिस रेंज में वे चार बार आईजी रहे। वे डेपुटेशन पर तीन साल तक आईबी में भी रहे। 3. संजीव शुक्ला संजीव शुक्ला इस समय बिलासपुर पुलिस रेंज के आईजी हैं। वे पांच जिलों के पुलिस अधीक्षक रहे हैं। इनमें जशपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर शामिल है। वे नक्सल प्रभावित इलाका कांकेर के डीआईजी भी रह चुके हैं। 4. रामगोपाल गर्ग 2007 बैच के आईपीएस रामगोपाल गर्ग सात साल सीबीआई में डेपुटेशन पर रहने के कारण ज्यादा जिलों के एसपी नहीं रह सके। दिल्ली जाने के बाद वे गरियाबंद के एसपी रहे। और जब लौटकर आए तो डीआईजी बन चुके थे। उन्हें अंबिकापुर पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाकर भेजा गया। वहां से फिर रायगढ़ का डीआईजी। फिर विधानसभा चुनाव के समय दुर्ग के एसएसपी बने। चुनाव के बाद दुर्ग के प्रभारी आईजी बने और फिर पिछले साल प्रमोशन होने पर वहीं आईजी बन गए। रामगोपाल का कैरियर बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा। याने सरगुजा जैसे रेंज का आईजी रहने के बाद रायगढ़ का डीआईजी। इसके बाद दुर्ग का एसपी, फिर दुर्ग का प्रभारी आईजी, आईजी। 5. दीपक झा 2008 बैच के आईपीएस दीपक झा सात जिलों के एसपी रह चुके हैं। कोंडागांव से उनके कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ था, उसके बाद बालोद, महासमुंद, रायगढ़, जगदलपुर, बिलासपुर और फिर बलौदा बाजार। इसके बाद उन्हें नवगठित राजनांदगांव पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाया गया। पिछले साल उन्हें आईजी प्रमोट होने पर अंबिकापुर पुलिस रेंज के आईजी की जिम्मेदारी दी गई। नाम का पुलिस कमिश्नर पता चला है, एक जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ हो जाएगा। मगर इसके साथ यह भी जानकारी मिली है कि सोशल मीडिया और मीडिया में जो बातें चल रही हैं, उससे उलट सिर्फ नाम के लिए पुलिस कमिश्नर होगा। उसे प्रतिबंधात्मक धारा याने 151 के अलावा और कोई अधिकार देने के पक्ष में सिस्टम नहीं है। ओड़िसा सबसे बेस्ट देश में चूकि ओड़िसा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम ताजा लागू हुआ है, इसलिए उसका सिस्टम भी काफी तगड़ा है। ओड़िसा ने एक्ट बनाकर उसे क्रियान्वित किया है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में एक वर्ग मध्यप्रदेश से ज्यादा अधिकार पुलिस कमिश्नर को देना नहीं चाहता। जाहिर है, एमपी में आईएएस लॉबी के तगड़े विरोध के चलते दंतविहीन पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाया गया, जिसका प्रदेश को कोई लाभ नहीं मिल रहा। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब ओड़िसा की तत्कालीन नवीन … Read more

1 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली, सरकार की तैयारियां अपराध नियंत्रण के लिए तैयार

रायपुर  रायपुर में 1 जनवरी से पुलिसिंग का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है। छत्तीसगढ़ की राजधानी में नए साल की शुरुआत के साथ ही पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इसकी सभी जरूरी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस नई व्यवस्था के प्रभावी होते ही छत्तीसगढ़ देश का 18वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम काम करेगा। जानकारों का कहना है कि इस बदलाव के लिए मध्य प्रदेश के मॉडल का अध्ययन किया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस को कुछ अतिरिक्त अधिकार देने की तैयारी में है। कानून-व्यवस्था और कर्फ्यू जैसे फैसलों पर होगा सीधा नियंत्रण पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद राजधानी की सुरक्षा और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह कमिश्नर के कंधों पर होगी। अब तक शहर में तनाव या आपात स्थिति के दौरान कर्फ्यू लगाने जैसे बड़े फैसलों के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर खुद हालात का जायजा लेकर धारा 144 लागू करने या कर्फ्यू जैसे कड़े कदम उठाने का निर्णय ले सकेंगे। इससे किसी भी गंभीर स्थिति में कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी कम होगी और पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पाएगी। फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने में जुटे अफसर अब एक बार फिर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके साथ ही गृह विभाग लगातार समीक्षा में जुटा है, ताकि नए सिस्टम में किसी तरह की कमी न रह जाए.  विभागीय सूत्र के अनुसार, मौजूदा SP–CSP पैटर्न पर जिले का स्टाफ पहले से ही भारी दबाव में है. इसलिए नई व्यवस्था में बड़े रैंक के अधिकारियों की तैनाती बेहद आवश्यक मानी जा रही है. अक्टूबर में सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 500 से अधिक नए स्टाफ की नियुक्ति अनिवार्य होगी. इसके साथ ही कई विभागीय संरचनाओं में बदलाव, नई शाखाओं का गठन और ट्रैफिक व्यवस्था को पुनर्गठित करना भी जरूरी बताया गया है. अब जुलूस और धरना-प्रदर्शन की अनुमति भी मिलेगी पुलिस से प्रशासन ने तय किया है कि शहर में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और धरना-प्रदर्शनों की अनुमति देने का अधिकार अब कलेक्टर के बजाय पुलिस कमिश्नर के पास होगा। अक्सर देखा जाता है कि प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल में समय लग जाता है। अब कमिश्नर ही यह तय करेंगे कि किस मार्ग पर जुलूस निकलेगा और कहां प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी। इससे शहर के यातायात प्रबंधन और आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर फैसले लेना आसान होगा। अपराधियों को जिला बदर करने और लाइसेंस जारी करने की नई शक्ति अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट स्तर की शक्तियां प्राप्त होंगी। अब पुलिस के पास आदतन अपराधियों को जिला बदर करने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए सीधे अधिकार होंगे। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत हथियारों के लाइसेंस जारी करने या किसी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें रद्द करने का काम भी पुलिस मुख्यालय से संचालित होगा। इन कड़े अधिकारों के जरिए राजधानी में बढ़ते संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की योजना तैयार की गई है। दंगों पर नियंत्रण और बल प्रयोग के लिए मिलेगी पूरी छूट आपातकाल या दंगों जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में बल प्रयोग से जुड़े फैसलों को लेकर पुलिस अब अधिक स्वतंत्र होगी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज या अन्य सुरक्षात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस को मौके पर ही फैसला लेने की छूट मिलेगी। प्रशासन का तर्क है कि रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से होते शहरीकरण के कारण अपराधों का ग्राफ भी बदला है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ बढ़ेगा जिससे राजधानी अधिक सुरक्षित महसूस करेगी।

इंदौर में मंदिरों में बड़े पैमाने पर सुधार, रोज दो लाख से अधिक भक्तों की सुविधा पर खर्च करोड़ों रुपए

इंदौर   सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें। रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था।  सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं।   

योगी सरकार ने 2000 करोड़ के ड्रग रैकेट को तोड़ा, अवैध संपत्तियों पर होगा बुलडोजर एक्शन

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अब तक की सबसे कड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में कोडीनयुक्त कफ सीरप के जरिए युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह की कमर तोड़ दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि अब इस काले धंधे से जुड़े लोगों को किसी भी तरह की कानूनी राहत नहीं मिलेगी। हाईकोर्ट से सरकार को बड़ी मजबूती इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार दिनों तक चली गहन सुनवाई के बाद कोर्ट ने 22 आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। यह फैसला न केवल जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह भी संकेत है कि न्यायपालिका इस अपराध को केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ गंभीर हमला मान रही है। अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कफ सिरप का अवैध भंडारण और तस्करी सीधे तौर पर NDPS एक्ट के अंतर्गत आता है। आरोपियों के उस तर्क को खारिज कर दिया गया, जिसमें इसे केवल लाइसेंस से जुड़ा तकनीकी मामला बताया जा रहा था। संगठित अपराध, जिसका निशाना पूरी पीढ़ी सरकार ने कोर्ट के सामने यह मजबूती से रखा कि यह मामला साधारण तस्करी का नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में झोंकने वाले संगठित अपराध का है। शुभम जायसवाल, भोला प्रसाद और विभोर राणा जैसे प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तारी से किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी गई। अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ यह विशेष अभियान अब देश में नशीली दवाओं के खिलाफ सबसे बड़े अभियानों में गिना जा रहा है। STF, FSDA और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक फैले लगभग 2000 करोड़ रुपये के ड्रग सिंडीकेट की परत-दर-परत पोल खुल चुकी है। फर्जी कंपनियों से मनी लॉन्ड्रिंग का जाल जांच में सामने आया है कि सीए विष्णु अग्रवाल और बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह जैसे लोगों ने 140 से अधिक फर्जी कंपनियों के माध्यम से अवैध कमाई को वैध दिखाने का बड़ा तंत्र खड़ा किया था। झारखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा तक फैले इस नेटवर्क से जुड़े अहम सबूतों को मिटाने की कोशिशें भी जांच एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दीं। आर्थिक रीढ़ तोड़ने की तैयारी पूरी योगी सरकार अब इस नेटवर्क की आर्थिक ताकत पर सीधा प्रहार कर रही है। केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर अपराधियों को पूरी तरह आर्थिक रूप से निष्क्रिय करने की रणनीति पर काम हो रहा है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक 30 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है, जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। अवैध निर्माणों पर बुलडोजर की तैयारी वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और सहारनपुर में नशे की कमाई से खड़ी की गई अवैध संपत्तियों की पहचान कर ली गई है। प्रशासन ने संकेत दे दिए हैं कि जल्द ही इन निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा अभियान साफ संदेश देता है कि उत्तर प्रदेश में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए न तो जमीन सुरक्षित है, न पैसा और न ही कानून से बचने का कोई रास्ता।  

गैस सिलेंडर पर नई आफत! पंजाब में अगले 7 दिन तक उपभोक्ताओं को झटका

लुधियाना सर्दियों के सीजन में घरेलू गैस सिलैंडरों की किल्लत पिछले डेढ़ महीने से बनी हुई है। इंडेन और हिंदुस्तान पैट्रोलियम गैस कम्पनियों के अधिकांश डीलर अपने उपभोक्ताओं को फोन कर माफी मांगते हुए बता रहे हैं कि अगले 7 दिन तक गैस सिलैंडर की सप्लाई संभव नहीं है। डीलरों ने बताया कि सर्दियों में रसोई गैस की मांग बढ़ जाने के कारण उन्हें लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बुकिंग करने के बाद कई बार उपभोक्ताओं को 5 से 7 दिन तक सिलैंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके पीछे कम्पनी अधिकारियों की तैयारी और समय पर प्लांट की मैंटीनैंस में देरी को मुख्य कारण माना जा रहा है। गैस एजैंसियों के कर्मचारियों और डिलीवरी स्टाफ ने कहा कि कई बार लोड (सिलैंडरों से भरे ट्रक) केवल 2 दिनों के अंतराल पर मिल रहे हैं, जिससे एजैंसी संचालन प्रभावित हो रहा है। घने कोहरे और मौसम की कठिनाई भी सप्लाई में देरी का एक और कारण बन रहे हैं। सेल्स अधिकारियों का दावा : इंडेन गैस कम्पनी के सेल्स अधिकारी अर्जुन कुमार और गौरव जोशी ने कहा कि केवल कुछ एजैंसियों में 3-4 दिनों का बैकलॉग है और जल्द ही स्थिति सामान्य कर दी जाएगी। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे पैनिक न हों।  

दिल्ली की दमघोंटू हवा पर LG की CM केजरीवाल को चिट्ठी, बोले– हालात भयावह, जिम्मेदारी आपकी

नई दिल्ली  दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है। उपराज्यपाल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की राजनीति सिर्फ नकारात्मकता और तथ्यहीन प्रोपेगेंडा पर आधारित है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल लिखे पत्र में 56 बिंदुओं को रखा। इसमें उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे को केजरीवाल की बड़ी बेपरवाही बताया। उपराज्यपाल ने अरविंद केजरीवाल के साथ अपनी बातचीत का खुलासा किया। उन्होंने पत्र में लिखा, "मैं मेरे और आपके (अरविंद केजरीवाल) बीच नवंबर-दिसंबर 2022 में हुई चर्चा की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा। गंभीर वायु प्रदूषण के बीच मैंने हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था। पंजाब के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की प्रति आपको भी भेजी थी। जब मैंने आपसे इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इसके समाधान के लिए निर्णायक कदम उठाने को कहा, तो आपने मुझसे कहा था, 'सर, यह हर साल होता है, 15-20 दिन मीडिया इसको उठाती है। एक्टिविस्ट और अदालतें इसका मुद्दा बनाते हैं और फिर सब भूल जाते हैं। आप भी इस पर ज्यादा ध्यान मत दीजिए।' अब इससे अधिक दोहरा रवैया क्या होगा ?" पत्र में उपराज्यपाल ने लिखा, "यह लगभग 11 साल की आपकी सरकार की अकर्मण्यता ही थी, जिसके कारण दिल्ली आज इस भयानक आपदा से गुजर रही है। आपने बहुत आसानी से और बहुत ही कम खर्च में, कम से कम दिल्ली की धूल भरी सड़कों की मरम्मत ही करवा दी होती। फुटपाथ और किनारों को कवर करवा दिया होता, तो धूल से उत्पन्न प्रदूषण से दिल्ली को निजात मिल जाती, लेकिन आपने ऐसा जान बूझकर नहीं किया।" वीके सक्सेना ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने पड़ोसी राज्यों और भारत सरकार के साथ टकराव के बजाय अगर आपने समन्वय से काम किया होता, तो दिल्ली आज वायु प्रदूषण की इस आपदा से नहीं गुजर रही होती। अफसोस है कि आपने दिल्ली के लिए कुछ नहीं किया। उपराज्यपाल ने लिखा, "मुझे आप (केजरीवाल) और आपके सहयोगी निरंतर अपशब्द कहते रहे हैं, क्योंकि मैं दिल्ली के लोगों के हित में काम करता हूं। मेरे काम करने से अगर आपकी अकर्मण्यता उभरकर लोगों के सामने आई है, तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। अगर काम करने के एवज में किसी को गालियां दी जाने लगें, तो आप स्वयं विचार करें कि काम न करने वाले लोग क्या डिजर्व करते हैं।"