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झारखंड में बढ़ी सर्दी: 11 जिलों में शीतलहर की चेतावनी, तापमान में गिरावट

रांची हिमालयी राज्यों में जारी बफर्बारी का सीधा असर अब झारखंड के मौसम पर दिखने लगा है। इस बार दिसंबर में महसूस होने वाली कड़ाके की ठंड नवंबर की शुरुआत से ही दस्तक दे चुकी है। कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। मैक्लुस्कीगंज में बीते रविवार को पारा गिरकर 6 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे न्यूनतम तापमान है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में भी सुबह-शाम ठिठुरन काफी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में घना कोहरा छाया है, जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग ने राज्य के 11 जिलों-गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और लातेहार के लिए शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में अगले 24 घंटों तक यलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। घने कोहरे और तेज ठंडी हवा का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम बाहर रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अचानक तापमान गिरने से सर्दी, खांसी, सांस की दिक्कत और ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। सदर अस्पताल में ब्रेन स्ट्रोक मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है। रिम्स में रोज छह से सात मरीज पहुंच रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, 18 नवंबर से न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे हल्की राहत मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हिमालय में जारी बफर्बारी आगे भी झारखंड के मौसम को प्रभावित करेगी। अगले 3-4 दिनों तक हल्की राहत के बाद तापमान फिर से गिर सकता है। लोगों को ठंड से बचाव के आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।  

3 दिसंबर को रायपुर में IND vs SA मैच: जानिए टिकट कहाँ और कैसे खरीदें, क्या हैं ऑफर्स

रायपुर छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रेमियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। नवा रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 3 दिसंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला आयोजित किया जाएगा। दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बहुप्रतीक्षित मैच की टिकटें कब और कहां उपलब्ध होंगी। आइए, आपको इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। कब से शुरू होगी टिकट की बिक्री ? मुकाबले को लेकर सबसे बड़ी उत्सुकता टिकट बिक्री की है। टिकटों की ऑनलाइन बिक्री 22 नवंबर से शुरू होगी, जिसका आधिकारिक माध्यम वेबसाइट www.ticketgini.in होगा। ऑनलाइन टिकट खरीदना पहली प्राथमिकता होगी क्योंकि भीड़ अधिक होने की संभावना है। फिजिकल टिकट 24 नवंबर से जो लोग ऑफलाइन टिकट लेना पसंद करते हैं, उनके लिए भी अच्छी खबर है। 24 नवंबर से रायपुर के इंडोर स्टेडियम में फिजिकल टिकट उपलब्ध होंगे। दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार दोनों तरीकों में से किसी का चयन कर सकेंगे। टिकट प्राइस लिस्ट (स्टैंड–वाइस) इस बार टिकट की कीमतें कैटेगरी के आधार पर तय की गई हैं। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत यह है कि पिछली बार 1000 रुपए की टिकट अब 800 रुपए में उपलब्ध होगी। किसी भी छात्र को अपनी वैध स्टूडेंट ID दिखाकर सिर्फ एक टिकट खरीदने की अनुमति दी जाएगी। आम दर्शकों के लिए स्टैंड टिकट     1500 रुपए     2500 रुपए     3000 रुपए     3500 रुपए प्रिमियम कैटेगरी     सिल्वर: 6000 रुपए     गोल्ड: 8000 रुपए     प्लैटिनम: 10,000 रुपए     कॉरपोरेट बॉक्स: 20,000 रुपए विश्व दिव्यांग दिवस पर खास पहल 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस भी मनाया जाता है, और इसी अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने एक सराहनीय निर्णय लिया है। संघ दिव्यांग बच्चों को मैच मुफ्त में दिखाएगा और उनके आने-जाने के लिए बस की सुविधा भी प्रदान करेगा। यह कदम सामाजिक संवेदनशीलता और खेल को सभी वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। स्टेडियम में मैच की तैयारियां तेज स्टेडियम प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर भी CSCS सक्रिय है। खेल विभाग, पुलिस, नगर निगम और अन्य आवश्यक विभागों को मेजबानी की जानकारी भेज दी गई है और उनकी सहायता मांगी गई है। स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरा उतारने के लिए सभी व्यवस्थाएं तय समय पर पूरी की जा रही हैं।     50–60 लाख रुपये का मेंटेनेंस बजट     15 दिनों में सभी काम पूरे करने का लक्ष्य     फ्लड लाइट पूरी तरह जनरेटर पर चलेंगी     सुरक्षा, ट्रैफिक, पार्किंग और एंट्री गेट मैनेजमेंट के लिए पुलिस, नगर निगम व अन्य विभागों को सूचना भेज दी गई है क्यों खास है यह मुकाबला?     स्टेडियम पहली बार CSCS की पूर्ण जिम्मेदारी में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित कर रहा     हाल ही में स्टेडियम को 30 साल की लीज पर संघ को सौंपा गया     यहां टेस्ट क्रिकेट की संभावनाएं भी इसी फैसले से मजबूत हुई हैं     फैंस को लंबे समय बाद इस प्रतिष्ठित मैदान पर टीम इंडिया को लाइव देखने का मौका मिलेगा भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका वनडे और टी-20 सीरीज का शेड्यूल भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच इस समय दो मैचों की टेस्ट सीरीज जारी है। टेस्ट मुकाबलों के खत्म होते ही सीमित ओवरों की श्रृंखला शुरू होगी। वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 30 नवंबर 2025 को रांची में खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा वनडे 3 दिसंबर 2025 को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होगा। तीसरा और अंतिम वनडे 6 दिसंबर 2025 को विशाखापट्टनम (वाइजैक) में आयोजित किया जाएगा। सभी वनडे मुकाबले 3 दिसंबर की दोपहर 1:30 बजे से शुरू होंगे। हालांकि टॉस दोपहर 1:00 होगा। टी-20 सीरीज का शेड्यूल वनडे के बाद दोनों टीमों के बीच टी-20 सीरीज शुरू होगी। पहला टी-20 मुकाबला 9 दिसंबर 2025 को कटक में खेला जाएगा। दूसरा टी-20 11 दिसंबर को मुल्लांपुर में, जबकि तीसरा टी-20 14 दिसंबर को धर्मशाला में होगा। चौथा टी-20 17 दिसंबर को लखनऊ में निर्धारित है और श्रृंखला का पांचवां तथा अंतिम टी-20 मुकाबला 19 दिसंबर 2025 को अहमदाबाद में खेला जाएगा।

यमुना सिटी में 7 सेक्टरों के किनारे विकसित होगा नया रिवरफ्रंट: जानें YEIDA की पूरी मास्टर प्लानिंग

नई दिल्ली यमुना सिटी में सात सेक्टरों के पास यमुना नदी के किनारे कई किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए विशेष परियोजना के रूप में शामिल किया गया है और इसका विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में यह रिवर फ्रंट यमुना नदी के आसपास बसे सेक्टर-26बी, 27, 26, 25, 24, 24ए, 23डी और अन्य क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। इन सेक्टरों के आसपास इस परियोजना के तहत सुंदर और व्यवस्थित नदी किनारे का निर्माण किया जाएगा। रिवर फ्रंट परियोजना के तहत नदी और आसपास के सेक्टरों के बीच एक लंबा व चौड़ा रास्ता विकसित किया जाएगा। इस मार्ग पर घास के टीले, शेड, फूलों की क्यारियां, रंग-बिरंगी रोशनी वाले फव्वारे, जॉगिंग और साइकिल ट्रैक, आकर्षक लैंडस्केपिंग, साथ ही खानपान कियोस्क, नदी देखने और बैठने के व्यू पॉइंट बनाए जाएंगे। यह सुविधाएं न केवल नदी तट से सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी, बल्कि जल गुणवत्ता में सुधार में भी मदद करेंगी। परियोजना में तटबंध का निर्माण किया जाएगा, जो मानसून के दौरान बाढ़ से क्षेत्र की सुरक्षा करेगा। साथ ही, क्षेत्र की उन्नत जल निकासी प्रणाली और रियल-टाइम मॉनिटरिंग बाढ़ से सुरक्षा को और प्रभावी बनाएगी। तालाबों-नहरों के आसपास 30 मीटर में ग्रीन बेल्ट होगा फेज-1 में कुल 10 प्रमुख झीले, नहरें और 135 तालाब शामिल हैं। ये तालाब और नहरें भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। वर्तमान में 38 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। मास्टर प्लान के अनुसार, इन तालाबों और नहरों को हरित संरक्षण क्षेत्र के रूप में रखा गया है और इसके आसपास खुले हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। नहरों के दोनों किनारों पर 30 मीटर और प्राकृतिक जलधाराओं के दोनों किनारों पर 15 मीटर की ग्रीन बेल्ट बनाई जाएगी। शैलेंद्र भाटिया, ओएसडी यीडा, ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी को ध्यान में रखते हुए, फेज-1 में 15 प्रतिशत हरित क्षेत्र निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि यह पहल शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और यहां आने वाले लोगों को अलग और आकर्षक अनुभव प्रदान करने में मदद करेगी। पर्यटकों को बोटिंग की सुविधा मिलेगी नए आगरा शहर में 823.7 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीन रिवर बफर जोन विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में रंग-बिरंगे फूल, दुर्लभ पेड़-पौधे और जलस्रोत तैयार किए जाएंगे। पर्यटकों के लिए यहां बोटिंग, वॉकवे और फूड स्टॉल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, वेलनैस टूरिज्म एक्टिविटी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें योग और आयुर्वेदिक मसाज जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोग अपने शरीर और मन को स्वस्थ कर सकेंगे। धनौरी वेटलैंड पर्यटन स्थल बनेगा धनौरी वेटलैंड क्षेत्र, जो लगभग 100 एकड़ में फैला है, का उत्तर-पूर्वी भाग दलदली और जलभराव वाला है, जिसका कुल क्षेत्रफल 46.35 हेक्टेयर है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के विदेशी जलीय जीव और सारस पाए जाते हैं। फिलहाल पर्यटकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। इस वेटलैंड के संरक्षण के लिए 112.89 हेक्टेयर का प्रभाव क्षेत्र (जोन ऑफ इन्फ्लुएंस) चिन्हित किया गया है, जिसके चारों ओर 100 मीटर का हरित बफर जोन तैयार होगा। इस जोन में हरे-भरे घास के टीले, वॉकवे, रंग-बिरंगे फव्वारे आदि बनाए जाएंगे, ताकि लोग प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें। साथ ही, इस क्षेत्र के पास 10 हेक्टेयर में पशु बचाव और पुनर्वास केंद्र विकसित किया जा रहा है, जो काले हिरण और अन्य वन्य जीवों का आश्रय बनेगा।

सीएम योगी आज आ सकते हैं अयोध्या : प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के साथ करेंगे समीक्षा बैठक

अयोध्या प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 नवंबर को होने वाले राम मंदिर के ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए आज अयोध्या आ सकते हैं। सीएम योगी के दोपहर एक बजे के बाद यहां पहुंचने की संभावना है। सीएम योगी अयोध्या पहुंच कर प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। यह बैठक रामजन्मभूमि परिसर में होगी। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री की ओर से राम मंदिर परिसर में ध्वजारोहण समारोह से जुड़े कार्यक्रम स्थलों का भी निरीक्षण किया जाएगा। उनकी ओर से पीएम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर निर्देश दिए जाएंगे। अब राम मंदिर में मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे मेहमान  राम मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करते हुए ट्रस्ट व प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। ध्वजारोहण समारोह में आने वाले किसी भी मेहमान को मोबाइल फोन लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। शुरुआत में मेहमानों को मोबाइल साथ ले जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ाने की सिफारिश की। इसके बाद ट्रस्ट और प्रशासन ने संयुक्त समीक्षा के बाद मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। 25 नवंबर को राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह आयोजित है। समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत आठ हजार मेहमान शामिल होंगे। मेहमानों को भेजे गए आमंत्रण पत्र में बताया गया था कि 25 नवंबर को सभी को सुबह आठ से 10 बजे के भीतर मंदिर में प्रवेश करना होगा। वे अपने साथ मोबाइल रख सकते हैं, लेकिन अब इस निर्णय को बदल दिया गया है। मेहमानों को खाली हाथ समारोह के लिए आना होगा। परिसर में उनके भोजन, जलपान की व्यवस्था ट्रस्ट की ओर से की जाएगी। समारोह को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। राम जन्मभूमि परिसर में अतिरिक्त मेटल डिटेक्टर, डॉग स्क्वॉड और सर्विलांस बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बड़े आयोजन, बढ़ती भीड़ और राष्ट्रव्यापी सतर्कता को देखते हुए यह कदम आवश्यक था। मंदिर के आसपास 24×7 निगरानी के लिए नए कैमरे, हाईटेक कंट्रोल रूम और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए जा रहे हैं। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से अनुरोध किया है कि वे मोबाइल साथ न लाकर सहयोग करें, ताकि मंदिर परिसर में सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

औषधीय फसलों की खेती में मध्यप्रदेश सबसे आगे, ईसबगोल और अश्वगंधा का उत्पादन बढ़ा

औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य मध्यप्रदेश  46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती भोपाल  मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रकि टन औषधीय फसलों का उत्पादन  हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसानों का भी आकर्षण इन फसलों के उत्पादन की ओर बढ़ा है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44 हजार 324 हैक्टेयर में औषधीय फसलों की बोनी की गई थी । जो 2024-25 में बढ़कर 46 हजार 837 हैक्टेयर हो गया यानिकी 2 हजार 512 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन   एक लाख 16 हजार 848 मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर एक लाख 24 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।  मध्यप्रदेश में प्रमुख फसलें अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। प्रदेश में 13 हजार हैक्टेयर में ईसवगोल, 6 हजार 626 हैक्टेयर अश्वगंधा, 2 हजार 403 हैक्टेयर में सफेद मूसली, 974 हैक्टेयर में कोलियस तथा 23 हजार 831 हैक्टेयर में अन्य औषधी फसल की बोनी की गई है। मध्यप्रदेश सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का औषधीय पौधों की खेती आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार द्वारा डाबर, वैद्यनाथ जैसी आयुर्वेद कम्पनियों, संजीवनी क्लिनिक में विंध्यवैली जैसे ब्रांड के माध्यम से औषधीय उत्पादन को बाजार मुहैया करा रही है।  

बीजेपी और जेडीयू में मंत्रिपद साझा करने को लेकर चर्चा, पुराने फार्मूले को किया जाएगा बदल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटों (101) पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया था। ऐसे में दोनों ही दलों को बराबर मंत्रिपद भी मिल सकते हैं। सरकार गठन के फार्मूले पर बात करें तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को दो मंत्रिपद और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 01 वह उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी को एक मंत्रिपद दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि एनडीए के घटक दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है और कई पहले के मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदलने पर भी विचार हो रहा है।  सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक संभावित है। बता दें कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीती हैं। दूसरे नंबर पर जेडीयू के खाते में 85 सीटें गई हैं। एलजेपी (आरवी) को 19, HAM (S) को पांच और आरएमएम को चार सीटें मिली हैं। 2020 की बात करें तो बीजेपी को 74 सीटें मिली थीं और जेडीयूके पास 43 सीटें थीं। वहीं सरकार में बीजेपी के 22 और जेडीयू के 12 मंत्री थे। बता दें कि बिहार की मौजूदा विधानसबा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे मे बुधवार या फिर गुरुवार को ही शपथ ग्रहण हो सकता है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के बीच संक्षिप्त बैठक हुई थी जिसमें सरकार बनाने पर चर्चा की गई थी। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्रियों को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भ्रष्टाचारा के आरोपों और फिर नामांकन पेपर में गड़बड़ी के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इसपर अभी असमंजस की स्थिति है। बता दें कि गांधी मैदान में बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। 2015 में नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में ही शपथ ली थी। 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान को आम लोगों के लिए बंद किया गया है। माना जा रहा है कि गांधी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा शपथ ग्रहण के लिए भव्य मंच तैयार किया जाएगा।

High Court का फैसला: मानसिक क्रूरता के चलते पत्नी को तलाक देने की अनुमति

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी का पति से शारीरिक संबंध न बनाने को मानसिक क्रूरता माना है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पति की दायर अपील पर तलाक का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पति को शारीरिक संबंध बनाने से रोकना उसके साथ मानसिक क्रूरता है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि 11 साल अलगाव और पत्नी की शारीरिक संबंध के लिए ईच्छा न होना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। विवाह के एक महीने बाद ही पत्नी मायके चली गई थी। यह था पति और पत्नी के बीच पूरा मामला दरअसल अंबिकापुर के शख्स की शादी 30 मई 2009 को रायपुर की महिला के साथ हुई थी। पति का आरोप है कि शादी के एक महीने बाद ही उसे पत्नी मायके चली गई। जिस पर उन्होंने फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग करते हुए आवेदन दिया। पत्नी पर आरोप लगाया कि वह वैवाहिक दायित्व निभाने से इनकार कर रही है। महिला ने पति को यहां तक धमकी दे डाली कि अगर  वो शारीरिक संबंध बनाएगा तो अपना जीवन खत्म लेगी। पति की कई कोशिशों के बाद भी पत्नी मायके से वापस नहीं लौटी।  केस दर्ज होने के बाद भी उसने कभी पति से संपर्क नहीं किया। महिला ने पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। फैमिली कोर्ट की सुनवाई के दौरान पत्नी ने पति के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि उसका पति एक साध्वी का भक्त हैं और वो वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं रखते ।  आरोप लगाया कि पति बच्चे नहीं चाहता था। पत्नी ने पहले वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अर्जी भी लगाई, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया। फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी को खारिज कर दिया। पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी पति फैमिली कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ और हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। कहा कि फैमिली कोर्ट ने उनके तर्कों को सुने बगैर ही तलाक की अर्जी खारिज की है। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए पाया कि पति-पत्नी 11 सालों से अलग रह रहे हैं। पत्नी ने माना कि वह अब पति के साथ वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहती। हाईकोर्ट ने अलगाव के लंबे अंतराल को मानसिक क्रूरता माना और पति की तलाक की अपील को स्वीकार किया।

बिल्डिंग का बड़ा खर्च, लेकिन मीटिंग हॉल नहीं बना; अब अतिरिक्त 10 करोड़ से निर्माण होगा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी में खराब इंजीनियरिंग का एक और नमूना सामने आया है। लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए।  यह एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ऐसे 2 प्रोजेक्ट और हैं, जिनमें खराब इंजीनियरिंग के नमूने सामने आ चुके हैं। 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज को लेकर पहले ही भोपाल सुर्खियों में रह चुका है। फिर मेट्रो के 2 स्टेशन भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। इन नमूनों को सिलसिलेवार जानिए…। सबसे पहले निगम मुख्यालय का ताजा मामला लिंक रोड नंबर-1 पर ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। इसके बाद 10 से ज्यादा लोकेशन पर बने ऑफिस एक ही छत पर आ जाएंगे। करीब 40 करोड़ रुपए से बन रही बिल्डिंग में सिर्फ सोलर पैनल लग रहे हैं तो गार्डनिंग, फोन, इंटरनेट केबल और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर का काम चल रहा है। कई मायनों में बिल्डिंग खास है। जब तक नया हॉल नहीं बनेगा, तब तक आईएसबीटी में होंगी बैठकें इन सब अच्छी बातों में एक बड़ी गलती भी हो गई। इस बिल्डिंग में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बना है। इसलिए 10 करोड़ रुपए खर्च कर परिषद हॉल बनाने का प्लान है, लेकिन जब तक यह नहीं बन जाता, तब तक आईएसबीटी में ही परिषद की बैठकें होंगी। पड़ताल की गई तो पता चला कि जब बिल्डिंग बनी थी, तब मीटिंग हॉल ही उसमें शामिल नहीं था। जिम्मेदारों का कहना है कि शुरुआत में बिल्डिंग की कुल लागत 22 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में लागत बढ़ती गई। अब यह 40 करोड़ में आ गई। हॉल में ही परिषद की बैठक होती है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि जब भी कोई निर्माण कार्य कराया जाता है तो उसकी डिजाइन समेत कई पैमानों पर नजर रखी जाती है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया होती है। नगर निगम अपनी ही बिल्डिंग में मीटिंग हॉल जैसा निर्माण करना ही भूल गया। अब मीटिंग हॉल को लेकर दूसरी बिल्डिंग बनेगी, लेकिन पैसा तो जनता का ही लगेगा, जो टैक्स के रूप में वसूला गया है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय फिनिशिंग हो रही है। 40% बिजली उत्पादन को लेकर बिगाड़ा फ्रंट मुख्यालय के ठीक सामने परिसर में ही पार्किंग बनाई गई है, जिस पर शेड है। इन्हीं शेड के ऊपर सोलर पैनल लगा दिए गए, ताकि 40 प्रतिशत बिजली निगम खुद ही बना सके, लेकिन ये ऐसी जगह लगाए गए हैं, जिनसे पूरी बिल्डिंग ही छिप गई, यानी बिल्डिंग का फ्रंट ही बदल गया है। इस मामले में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन गलत नहीं है। उस समय आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हालांकि, इसके बाद इस्टीमेट कॉस्ट बढ़ी है। यह भी सही है कि पुरानी डिजाइन में परिषद हॉल नहीं था। अभी और जमीन लेकर पास में ही परिषद का हॉल बनवा रहे हैं, ताकि यहां बैठकें हो सकें। पार्किंग की जगह पर आपत्ति जताई है। इस वजह से फ्रंट ढंक गया है। सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते हैं।

जंगल सफारी की तैयारियां जोरों पर, सीएम सैनी करेंगे वन्य जीवन का अवलोकन

कलेसर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 18 नवंबर को कलेसर नेशनल पार्क में नौ किलोमीटर तक जंगल सफारी का लुत्फ उठाएंगे। जंगल सफारी के ट्रैक को समतल कर दिया गया है। सफारी के दौरान वे दूरबीन से वन्य प्राणियों का आनंद लेंगे। इसके लिए वन्य प्राणी विभाग के पास आठ से 10 दूरबीन आ चुकी हैं। इसके अलावा ट्री हाउस भी बनाया जा रहा है। नायब सिंह सैनी पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जो कलेसर जंगल सफारी का आनंद लेंगे। कलेसर नेशनल पार्क हिमाचल की शिवालिक की पहाड़ियों से सटा है, जोकि 11570 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें हाथी, चीता बाघ सांभर, खरगोश, अजगर, जंगली मोर, सांभर, चीतल, हिरण, कोबरा, बंदर, लंगूर जैसे जीव जंतु हैं। कलेसर जंगल में वन्य प्राणियों पर नजर रखने के लिए चार लोहे के वॉच टावर भी बने हैं। ट्री हाउस पहली बार बनाया जा रहा है। यह ट्री हाउस तैयार किया जा रहा नए मुख्यद्वार के पास होगा। मुरादाबाद के कारीगर इसे तैयार कर रहे हैं। 18 फीट ऊंचाई पर पेड़ के ऊपर यह ट्री हाउस बनाया जाना है। ऐसे में वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारी इस पर चढ़ कर दूरबीन से वन्य प्राणियों पर नजर रख सकेंगे।  एक द्वार प्रवेश तो दूसरे से होगी निकासी अभी तक कलेसर नेशनल पार्क का एक ही मुख्यद्वार था। अब दो होंगे। नए मुख्यद्वार से अब प्रवेश होगा और पुराने वाले द्वार से जंगल सफारी की निकासी होगी। जंगल सफारी के नए मुख्यद्वार के पास ही टिकट हाउस भी तैयार किया जा रहा है। अब सैलानी यहीं से जंगल सफारी के लिए टिकट लिया करेंगे। मुख्यमंत्री 18 नवंबर को नए मुख्यद्वार का उद्घाटन करने के अलावा वन्य प्राणी विभाग के परिसर में जनसभा को भी संबोधित करेंगे। कलेस्र नेशनल पार्क में जाने के लिए नया रास्ता बनवाया जा रहा है। इस रास्ते पर गेट का उद्घाटन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 18 नवंबर को करेंगे। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। टिकट घर के अलावा ट्री-हाउस भी बनाया जा रहा है। – लीलू राम, इंस्पेक्टर वन्य प्राणी विभाग यमुनानगर।    

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को 19वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री श्री मठपाल करेंगे सम्मानित

19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री मठपाल होंगे सम्मानित "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक भोपाल में राष्ट्रीय संगोष्ठी में संक्षेप (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तक भोपाल  19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल को सम्मानित किया जाएगा। संस्कृति विभाग के संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान में श्री मठपाल को प्रशस्ति पत्र, सम्मान पट्टिका और 2 लाख रुपये प्रदान किए जायेगे। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक, रचनात्मक और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। आयुक्त पुरातत्व श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को स्मरण करने के लिए, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय, भोपाल 09 से 11 जनवरी, 2026 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी दौरान 19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, पूरे भारत से प्रशासकों, नीति निर्माताओं, क्षेत्रीय पदाधिकारियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी, जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में विभिन्न उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पुरातात्विक खजानों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश करेंगे।  आयुक्त पुरातत्व श्रीमती शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य को 3 विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इन विषयों में पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व (ethnoarchaeology), पुरातत्वमिति (archaeometry), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ,  हाइब्रिड सिस्टम सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मूर्त और अमूर्त विरासतों (tangible and intangible heritages) के संग्रह, भंडारण, पहुँच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन के रुझान शमिल है।  सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषयों या संबंधित क्षेत्रों में से किसी पर भी सार-संक्षेप (Abstracts) आमंत्रित हैं। सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 थी, जिसे अब 20 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है। स्वीकृत सार-संक्षेप के पूर्ण पर्चों (full papers) का मूल्यांकन, संपादन किया जाएगा और उन्हें संगोष्ठी की कार्यवाही पुस्तक (seminar proceeding book) में प्रकाशित किया जाएगा। प्रत्येक विषय क्षेत्र पर सर्वश्रेष्ठ पर्चा प्रस्तुति (best paper presentation) के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in को देखा जा सकता है।  उल्लेखनीय है कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें 'हरिभाऊ' के नाम से जाना जाता है और भारतीय शैल कला (rock art) अध्ययन के "पितामह" के रूप में संदर्भित किया जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखविद् और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान भी कहा जाता है, मध्यप्रदेश के भोपाल में पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय द्वारा (वर्ष के आधार पर) वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।