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महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के पोषण पर जारी की गाइडलाइन, छह महीने के बाद मांसाहारी परिवारों के लिए खास सलाह

भोपाल  मध्य प्रदेश में महिला और बाल विकास विभाग ने दो साल तक के बच्चों के आहार को लेकर नई सलाह जारी की है। विभाग का कहना है कि छह माह की उम्र पूरी होने के बाद यदि परिवार मांसाहारी है, तो बच्चों को अंडा, मांस और मछली खिलाना चाहिए।विभाग ने बच्चों के पोषण के पांच सूत्र जारी किए हैं और इनका प्रचार-प्रसार आंगनवाड़ी केंद्रों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए करने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि बाजार की चीजें जैसे बिस्किट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस बच्चों के लिए नुकसानदायक हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। पोषण अभियान के तहत दिए निर्देश केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन सूत्रों को अपनाने को कहा है। मध्य प्रदेश में इन्हें राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। पोषण के पांच सूत्र इस प्रकार हैं:     पहले 1000 सुनहरे दिन: बच्चे के जन्म से दो वर्ष तक का समय सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें पोषण और स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की जरूरत है।     पौष्टिक आहार: परिवार मांसाहारी हो तो बच्चे को अंडा, मांस और मछली देने की सलाह।     अनीमिया से बचाव: आयरन और प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन बढ़ाने की सलाह।     डायरिया से बचाव: साफ पानी और स्वच्छ भोजन पर ध्यान।     स्वच्छता और साफ-सफाई: संक्रमण और बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत व घरेलू स्वच्छता पर फोकस। बच्चों के लिए 1000 दिन बताए सुनहरे पोषण के पांच सूत्र बताते हुए कहा गया है कि पहले सौ दिनों में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक की उम्र की अवधि शामिल है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल होना चाहिए, ताकि बच्चे का पूरा विकास हो। इस दौरान मां और बच्चे को सही पोषण की सर्वाधिक जरूरत होती है। इन 1000 सुनहरे दिनों में 270 दिन गर्भावस्था, 365 दिन बच्चे के जन्म के पहले साल के और 365 दिन बच्चे के जन्म के दूसरे साल के शामिल होते हैं। पौष्टिक आहार में कहा- मांस, मछली, अंडा खाना चाहिए सभी उम्र के लोगों के साथ बच्चे को छह माह का होने पर पर्याप्त मात्रा में अलग-अलग आहार खिलाने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि विभिन्न खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, चावल और पीले व काले रंग की दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां मसलन पालक, मैथी, चौलाई, सरसों, पीले फल आम, पका पपीता आदि खाना चाहिए। विभाग ने इसमें यह भी कहा है कि यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली खाना चाहिए। विभाग के अनुसार खाने में दूध, मिल्क प्रोडक्ट, अखरोट आदि शामिल करने के साथ आंगनवाड़ी में मिलने वाले पोषाहार अवश्य खाना चाहिए। जब बच्चा छह माह का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी दिया जाना चाहिए। इसमें कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, दाल शामिल हैं। अगर मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में नमक, चीना और मसाला कम डालें और बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न पिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिलते। अनीमिया रोकने के लिए भी अंडा, मांस, मछली खाने को कहा पोषण का तीसरा सूत्र अनीमिया रोकने को लेकर किए जाने वाले प्रयास बताए गए हैं जिसमें कहा गया है कि अनीमिया रोकथाम के लिए आयरन युक्त भोजन जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मैथी, सरसों, फल, दूध, दही, पनीर आदि बच्चे को खिलाएं। एमपी में हो चुका है अंडा खिलाने का विरोध प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों में जाने वाले बच्चों को अंडा खिलाने का प्रस्ताव पूर्व में भी महिला और बाल विकास विभाग में आ चुका है जिसका जमकर विरोध हुआ और इसके बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। अब केंद्रीय महिला और बाल विकास विभाग के पोषण के पांच सूत्र बताए जाने के बाद इसे जिला अधिकारियों को लागू करने के लिए कहा गया है। हालांकि आंगनवाड़ी केंद्रों से इसकी सप्लाई को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। बच्चे के माता पिता के लिए यह सलाह दी गई है।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर में दुलदुला छठ घाट में सूर्य को दिया अर्घ्य: प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का अवसर है कि मुझे छठ पर्व में सम्मिलित होने का अवसर मिला।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह से ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला है, और वे क्षेत्र के विकास एवं जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री साय ने दुलदुला क्षेत्रवासियों की माँग पर छठ घाट के सौन्दर्यीकरण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी छठ पर्व तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट का सौन्दर्यीकरण लगभग ₹5 करोड़ 17 लाख की लागत से किया गया है, जहाँ इस वर्ष व्रती महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष रामकुमार सिंह, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

महासमुंद जिले के 323 तीर्थयात्री मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत निकल पड़े प्रयागराज-काशी यात्रा पर

विधायक श्री सिन्हा ने फूल माला पहनाकर तीर्थयात्रियों को दी शुभकामना महासमुंद मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत महासमुंद जिले के पांचों विकासखंडों से आज कुल 323 श्रद्धालु 18 बसों के माध्यम से पवित्र तीर्थस्थलों — प्रयागराज, हनुमानगढ़ एवं काशी विश्वनाथ — के दर्शन हेतु रवाना हुए। यह पांच दिवसीय यात्रा 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की गई है। रवाना होने के पूर्व सभी श्रद्धालुओं का मेडिकल चेक अप कराया गया। इस अवसर पर महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने ध्वज दिखाकर श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए रवाना किया। कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवी चंद राठी, श्री येतराम साहू, श्री पवन पटेल, श्री महेंद्र सिक्का, श्री राजू चंद्राकर, श्री माखन पटेल, श्री मीना वर्मा, श्री रिंकू चंद्राकर, श्री शरद मराठा, श्री राकेश चंद्राकर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज कल्याण विभाग, जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। विधायक श्री सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा आरंभ की गई थी, किंतु पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में यह योजना बंद रही। वर्तमान में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस जनकल्याणकारी योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को फूल माला पहनाकर और तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी।  ज्ञातव्य है कि योजना अंतर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रद्धालु तीर्थ यात्रा के पात्र हैं। यदि पति-पत्नी साथ यात्रा करना चाहें तो उनमें से एक को आयु सीमा में छूट दी जाती है। योजना के तहत प्रत्येक माह पात्र श्रद्धालुओं को शासन द्वारा निर्धारित तीर्थस्थलों का निःशुल्क दर्शन कराया जाएगा। यह योजना पूर्णतः निःशुल्क है । यात्रा के दौरान आवागमन, ठहरने एवं भोजन की सभी व्यवस्थाओं का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा, बल्कि समाज और संस्कृति से उनका आत्मिक जुड़ाव भी सुदृढ़ होगा। महासमुंद जनपद से 52, बागबाहरा से 47, पिथौरा से 50, बसना से 40, सरायपाली से 43, नगरपालिका महासमुंद से 50, बागबाहरा से 6, सरायपाली से 15, तुमगांव से 6, पिथौरा से 6 तथा नगर पंचायत बसना से 5 श्रद्धालु शामिल हैं। इनके साथ कुल 9 अनुरक्षक भी यात्रा पर गए हैं। इस तीर्थ यात्रा से श्रद्धालुओं में उत्साह एवं श्रद्धा का भाव देखा गया। श्रद्धालु सुखिया ध्रुव,मचेवा, दुलारी साहू, बागबाहरा से फौज सिंह और ठाकुर दीवान,पिथोरा की रेखा प्रधान सहित सभी श्रद्धालुओं ने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इस जनकल्याणकारी योजना को जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

जनजातीय वन-भूमि पट्टाधारी किसानों के लिए खुशखबरी, सब्जी उत्पादन पर मिलेगा विशेष अनुदान

भोपाल प्रदेश में जनजाति बाहुल्य ग्रामों में वनपट्टाधारी परिवारों को सब्जी उत्पादन के प्रति प्रोत्साहित कर, उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, इसके तहत प्रदेश के चार संभाग के 16 जिलों में जनजाति वर्ग के लोगों को वन भूमि पर पैदावार बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत सब्जियों के उत्पादन के लिए विशेष अनुदान दिया जाएगा। अनुदान राशि प्रति हैक्टेयर इकाई लागत का 90% तक हो सकता है। आयुक्त उद्यानकी से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में नर्मदापुरम संभाग में नर्मदापुरम , बैतूल, हरदा, जबलपुर संभाग में जबलपुर, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा कटनी, नरसिंहपुर, डिंडोरी और बालाघाट, शहडोल संभाग में शहडोल, उमरिया और अनूपपुर तथा भोपाल संभाग में भोपाल और सीहोर जिलों के कोलार बांध के आसपास के वनपट्टाधारी किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। इन किसानों को कृषि तकनीकी विशेषज्ञ और मार्केटिंग एक्सपर्ट की सलाह पर उच्चमूल्य वाली सब्जी फसलों जैसे:- टमाटर, लौकी, करेला, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली ब्रुसेल्स, स्प्राउट, बाकलावली, हरी मटर, बैंगन, शिमला मिर्च, भिंडी, खीर, हरी मिर्च, गाजर चुकंदर, शलजम, मूली, गांठ गोभी, राजमा, शकरकंद, केल-करम साग, सहजना की फली या मुनगा तथा पात्तिदार सब्जियों पर अनुदान सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को विभाग के एमपीएफएसटीएस पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना अनिवार्य है। जिन किसानों का चयन योजना के अंतर्गत किया जाएगा, उनको उद्यानकी विभाग द्वारा सब्जी फसल उत्पादन की नवीन तकनीकियों, फसलोत्तर प्रबंधन, विपणन एवं संस्करण और विषयों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।  

किसानों के लिए बड़ी राहत: शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना जारी रहेगी

किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना निरंतर जारी रहेगी राज्य शासन ने किया आदेश जारी भोपाल राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) द्वारा शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण देने की योजना को निरंतर रखने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य शासन ने आदेश जारी किया है। जारी आदेशानुसार खरीफ 2025 सीजन के लिये देय तिथि 28 मार्च 2026 तथा रबी 2025-26 सीजन के लिये देय तिथि 15 जून 2026 नीयत की गई है। राज्य शासन द्वारा अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले सभी किसानों को गत वर्ष के समान 1.5 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित देय तिथि तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) दिया जायेगा। 

योगी आदित्यनाथ की बड़ी सौगात: एक और शहर का नाम बदला, विपक्ष पर बोला हमला

लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी के मुस्तफाबाद में विश्व कल्याण आश्रम में आयोजित स्मृति प्राकट्योत्सव मेला-2025 में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने मुस्तफाबाद का नाम बदलकर कबीरधाम करने की घोषणा की और पूज्य संतों को नमन करते हुए डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण पर काम कर रही है, जबकि पहले यह पैसा "कब्रिस्तान की बाउंड्री" बनाने में खर्च होता था। कबीरधाम और धार्मिक स्थलों की पहचान बहाल मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने अयोध्या को फैजाबाद, प्रयागराज को इलाहाबाद और कबीरधाम को मुस्तफाबाद बनाया था, जिसे उनकी सरकार ने ठीक किया। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, "यह सब सेक्युलरिज्म के नाम पर किया जाता था, जो पाखंड है।" योगी ने संत कबीरदास की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा, "‘जाति पाति पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होई,’ यह वाणी समाज की एकता और अखंडता की आधारशिला है। कबीर ने निर्गुण भक्ति की धारा प्रवाहित कर समाज की विसंगतियों को तोड़ा और आत्मा-परमात्मा का संबंध सरल शब्दों में समझाया।" उन्होंने गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए कबीर का दोहा उद्धृत किया, "‘गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पांव…’ यह आज भी हमें गुरु की महत्ता याद दिलाता है।" देश की एकता को तोड़ने वाली शक्तियों से सावधान रहें सीएम योगी ने चेतावनी दी कि समाज विरोधी ताकतें आस्था और जाति के नाम पर देश को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, "समय रहते कमजोरियों को न पहचाना गया, तो यह बीमारियां कैंसर बनकर समाज को खोखला कर देंगी। राष्ट्रभक्ति ही सभी समस्याओं का समाधान है।" उन्होंने जोर देकर कहा, "माता भूमि पुत्रोहम्… यह भूमि केवल मिट्टी नहीं, हमारी मातृभूमि और पितृभूमि है। इसकी सेवा ही सच्ची उपासना है।" भारत बनेगा तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 2014 से पहले देश भ्रष्टाचार, आतंकवाद और विभाजनकारी राजनीति के संकट से जूझ रहा था। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। लखीमपुर में विकास की नई धारा सीएम ने बताया कि सीमावर्ती जिला लखीमपुर खीरी में भी विकास की नई लहर चल रही है। गांव-गांव सड़कें बन रही हैं, मेडिकल कॉलेज स्थापित हो रहे हैं, एयरपोर्ट का विस्तार हो रहा है और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है। गोला गोकर्णनाथ धाम और कबीरधाम जैसे धार्मिक स्थलों के पुनरोद्धार से आस्था और पर्यटन दोनों को बल मिल रहा है। गो-सेवा और नेचुरल फार्मिंग पर बल मुख्यमंत्री ने संत असंगदेव जी महाराज की धर्म, नशा मुक्ति और राष्ट्र चेतना के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "नशा नाश का कारण है। विदेशी ताकतें हमारे युवाओं को बर्बाद करने की साजिश रच रही हैं। फोन का इस्तेमाल सीमित करें और आत्मविकास पर ध्यान दें।" उन्होंने गो-सेवा और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने की बात कही। योगी ने बताया कि सरकार हर गाय के लिए 1500 रुपये प्रतिमाह दे रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से गोशालाओं की देखरेख करने और रासायनिक खेती को छोड़कर नेचुरल फार्मिंग अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, "एक गाय 30 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त जैविक खाद दे सकती है।" कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने देशवासियों को छठ महापर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सद्गुरु कबीर पूज्य श्री असंगदेव जी धर्मशाला का भूमि पूजन भी किया। इस अवसर पर संत असंगदेव जी महाराज, मंत्री राकेश सचान, नितिन अग्रवाल, मन्नूलाल कोरी, विधायक अमन गिरी, रोमी साहनी, लोकेंद्र प्रताप सिंह, शशांक वर्मा, योगेश वर्मा, विनोद शंकर अवस्थी, मंजू त्यागी, सौरभ सिंह सोनू, महामंडलेश्वर प्रवक्तानंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संतजन मौजूद रहे।  

मौसम विभाग का अलर्ट: राजस्थान के 17 जिले भीगेंगे, 7 में भारी बारिश का खतरा

जयपुर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में सक्रिय चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से राजस्थान का मौसम बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार, इसका सबसे अधिक असर सोमवार और मंगलवार को देखने को मिलेगा, जिसके चलते कई इलाकों में तेज से भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने आज सोमवार को उदयपुर और कोटा संभाग के 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, जबकि 17 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन सिस्टम अब मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया है और आज यह चक्रवात का रूप ले लेगा। यह चक्रवात 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों से टकराएगा। इसके अलावा, मध्य-पूर्वी अरब सागर में भी एक डिप्रेशन सिस्टम सक्रिय है। इन दोनों सिस्टम की वजह से भारत के कई राज्यों में नमी (मॉइश्चर) की आपूर्ति बढ़ी है, जिसका असर राजस्थान तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 30 अक्टूबर तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहेगा। बारिश का हाल पिछले 24 घंटों में सिस्टम के असर से कोटा, उदयपुर, अजमेर संभाग के कई जिलों और जोधपुर संभाग के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहे और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। झालावाड़ के मनोहरथाना में 16 मिमी, रायपुर में 1 मिमी, जबकि उदयपुर जिले के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई।  बूंदी, चित्तोड़गढ़, डूंगरपुर, कोटा, उदयपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में आज अति भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग की तात्कालिक चेतावनी जयपुर मौसम केंद्र ने आज सुबह साढ़े छह बजे यह अलर्ट जारी किया है। इसमें कोटा, बूंदी, भीलवाड़ा, टोंक, बारां, अजमेर, चित्तौड़गढ़, सवाईमाधोपुर, करौली, उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, जालौर, दौसा, जयपुर, धौलपुर, भरतपुर, पाली, सिरोही जिले और आसपास के क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ हल्की से मध्यम वर्षा / आकाशीय बिजली / तेज सतही हवा (अधिकतम हवा की गति 20-30 kmph) की संभावना जताई गई है। तापमान में गिरावट मौसम में बदलाव का असर तापमान पर भी देखने को मिला। रविवार को बादलों और कम धूप के कारण उदयपुर, कोटा और अजमेर संभाग के अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बारां, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर और भीलवाड़ा में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। सबसे कम अधिकतम तापमान डूंगरपुर में 27.7°C दर्ज किया गया।  

फेक ऑडियो विवाद में चंद्रशेखर आजाद का बयान — विवाद नहीं चाहिए, रोहिणी बोलीं- सबूत दो

इंदौर इंदौर की रोहिणी घावरी ने एक बार फिर चंद्रशेखर आजाद पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कोई मेरे आरोपों को गलत कहता है तो साबित कर के दिखाए। दरअसल उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी पूर्व परिचित डॉ. रोहिणी घावरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि, मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह महिलाओं का सम्मान करते हैं और किसी भी विवादित बयानबाजी में पड़ना नहीं चाहते। चंद्रशेखर बोले- मैं मरा नहीं हूं.. चंद्रशेखर ने कहा, "मैं मरा नहीं, जिंदा हूं। जब मैं खुद सामने बोल रहा हूं, तो किसी ऑडियो या वीडियो के पास जाने की क्या जरूरत है?" उन्होंने आगे कहा कि वह हमेशा बसपा प्रमुख मायावती और कांशीराम साहब का सम्मान करते आए हैं। "हमारे राजनीतिक रास्ते भले अलग हों, लेकिन बहनजी के संघर्ष और कांशीराम साहब की विचारधारा के प्रति हमारा आदर हमेशा रहेगा। यही हमारे संस्कार हैं, जो हमें माता-पिता से मिले हैं।" रोहिणी घावरी ने दी खुली चुनौती चंद्रशेखर के इस बयान के बाद डॉ. रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा, "अगर हिम्मत है, तो चंद्रशेखर खुलकर कहें कि बहनजी को लेकर वायरल ऑडियो फेक है।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि, "जब वह सांसद हैं, तो अपनी पद की ताकत से जांच क्यों नहीं कराते ताकि सच्चाई सामने आ सके?" इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्ष खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

सुश्री भूरिया का निर्देश, आंगनवाड़ी केंद्रों में भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए

आंगनवाड़ी केन्द्रों में नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करें : मंत्री सुश्री भूरिया हितग्राहियों के पंजीयन और पोषण ट्रैकर की मॉनिटरिंग को अभियान के रूप में संचालित करने के निर्देश भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने सोमवार को विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में संचालित सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ता और सहायिका के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए ताकि सेवाओं में कोई व्यवधान न आए। उन्होंने कहा कि हितग्राहियों का पंजीयन और पोषण ट्रैकर की मॉनिटरिंग नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए। इस कार्य को विभागीय स्तर पर एक अभियान के रूप में संचालित किया जाए जिससे प्रदेश में प्रत्येक पात्र महिला, गर्भवती, धात्री माता और बच्चों को योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित (ऑपरेशन रहित) प्रसव सुनिश्चित करने के लिये प्रसव की नियत तिथि के चार दिवस पूर्व शासकीय चिकित्सालयों में ठहरने के लिये वार्ड चिन्हांकित किए जाएं। इस कार्य के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के 25,239 भवनविहीन आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए नवीन भवन निर्माण की योजना तैयार की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रतिवर्ष 3,000 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण प्रस्तावित है मंत्रि परिषद से स्वीकृति के लिये प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए हैं जिनकी जानकारी भारत सरकार को भी होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम का प्रभावी अनुश्रवण करें, साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों में मेडिकल किट का नियमित रूप से परीक्षण किया जाए। आयुक्त महिला एवं बाल विकास श्रीमती निधि निवेदिता ने बैठक में कहा कि शहरी क्षेत्रों की सुपरवाइज़र यह सुनिश्चित करें कि आंगनवाड़ी केंद्र समय पर खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब विभाग की ओर से ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिससे यह पता चल सके कि आंगनवाड़ी केंद्र माह में कितने दिन संचालित रहा। सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार 97,791 में से 99.11% केंद्र 21 से 24 दिवस तक खुले जबकि 91.16% केंद्र माह में 25 दिवस से अधिक खुले रहे। यह अवधि मध्य जोनल क्षेत्र में सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि 11,786 आंगनवाड़ी केंद्रों को शासकीय भवनों में स्थानांतरित किया गया है तथा 21,954 एक कमरे वाले केंद्रों को सुविधायुक्त भवनों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही विद्युत विहीन केंद्रों में विद्युत प्रदाय के लिये पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 7,500 केंद्रों को विद्युत कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि कुपोषण निवारण के लिये जुलाई और अगस्त 2025 में विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें 9,49,161 बच्चों के वजन, ऊँचाई और लंबाई के आंकड़ों का सत्यापन कर वास्तविक डेटा दर्ज किया गया। इसके परिणामस्वरूप ठिगनापन के रिपोर्टिंग आंकड़ों में 7.5% की कमी दर्ज की गई।सभी कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल स्तर पर सीबीसी टेस्ट सुनिश्चित किया जा रहा है और गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 5 दिवसीय परामर्श सत्रों की व्यवस्था की जा रही है।वर्तमान में 26,583 आंगनवाड़ी केंद्र किराए के भवनों में संचालित हैं जिनमें से 14,649 ग्रामीण और 11,934 शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। पीएम जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत 605 आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 217 भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (दा-जगुआ) के अंतर्गत 66 नवीन आंगनवाड़ी केंद्र एवं भवन स्वीकृत एवं संचालित हैं। समीक्षा के दौरान भवनविहीन आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण, पूरक पोषण आहार की व्यवस्था, पोषण ट्रैकर एवं आरसीएच अनमोल डेटा की एकरूपता तथा हितग्राहियों तक समय पर सेवाओं की उपलब्धता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम जहां इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है

रायपुर, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया है, जिससे इसकी अंर्तराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है। यह नगर धार्मिक सहिष्णुता और कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है जिससे इसकी ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग हो रहा है। सिरपुर बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर है जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। आनंदप्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र है, जहाँ चीन से आए भिक्षु रह चुके हैं। गंधेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जिसमें अनेक मूर्तियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा सिरपुर के अवशेषों की खोज की गई थी। इसके बाद यहाँ अनेक उत्खनन कार्य हुए, जिनमें बुद्ध, विष्णु, शिव और जैन परंपराओं के असंख्य साक्ष्य मिले। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के विद्वान भी सिरपुर को एशिया की बौद्ध धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।     हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। यहाँ ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालयों की योजनाएँ चलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले। विद्यार्थियों के लिए सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है।     साय सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विजन 2047 के तहत आधुनिक बुनियादी ढांचा, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अंर्तराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। सिरपुर की पुरातात्त्विक संरचनाओं को संरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ हमें यह सिखाती हैं कि भारत की संस्कृति, सहिष्णुता, कला और ज्ञान का संगम है। सिरपुर सचमुच वह स्थान है जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है।