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विजय शर्मा की अध्यक्षता में अहम बैठक, राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 9 प्रकरणों की वापसी की अनुशंसा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में राजनीतिक प्रकरण वापसी समिति की हुई अहम बैठक उप मुख्यमंत्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी रजवाड़े, कृषि मंत्री राम विचार नेताम बैठक में हुए शामिल 16 प्रकरणों पर हुई प्रकरणवार समीक्षा, 9 प्रकरणों की हुई अनुशंसा रायपुर,  उप मुख्यमंत्री एवं गृह तथा जेल मंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े प्रकरणों की वापसी के संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में प्रकरण वापसी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरूण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े, कृषि मंत्री राम विचार नेताम सहित प्रमुख सचिव गृह सुनिहारिका बारीक, प्रमुख सचिव विधि मनीष ठाकुर, गृह सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, डीजीपी अरूण देव गौतम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।       बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 16 प्रकरणों की वापसी से संबंधित मामलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें 8 लंबित प्रकरण शामिल थे, सभी मामलों में से 9 प्रकरणों की अनुशंसा की गई, 02 प्रकरणों को पुनर्विचार के लिए जिलों में भेज दिया गया। इसके अतिरिक्त शेष मामलों को राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ा हुआ ना पाते हुए उनको समिति ने विचार कर उन्हें समिति ने अस्वीकृत कर दिया।        समिति ने अधिकारियों से पूर्व में अनुसंशित लंबित प्रकरणों, उनकी वर्तमान स्थिति तथा नियमानुसार आगे की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली गई एवं इसकी नियमित समीक्षा करते हुए न्यायालय में लंबित प्रकरणों को भी त्वरित गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने राजनीतिक प्रकरणों की वापसी से जुड़े मामलों की प्रकरणवार समीक्षा करते हुए आवश्यक प्रक्रियाओं को नियमानुसार आगे बढ़ाने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की।

MP ट्रांसको की टीम ने खराब मौसम में बहाल की ग्वालियर-औरैया इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन

एमपी ट्रांसको की टीम ने प्रतिकूल मौसम में बहाल की ग्वालियर-औरैया इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन मालनपुर और मेहगांव के 220 केवी सबस्टेशनों को मिलती है आपूर्ति ग्वालियर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस टीम ने ग्वालियर-औरैया (उत्तर प्रदेश) 220 केवी इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन के मेजर ब्रेकडाउन को प्रतिकूल मौसम के बीच दुरुस्त कर लाइन को पुनः चालू कर दिया। यह लाइन ग्वालियर क्षेत्र के मेहगांव तथा औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर के 220 केवी सबस्टेशनों को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में ट्रांसमिशन लाइन को शीघ्र बहाल करना पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। 145 किलोमीटर लंबी लाइन में सघन पेट्रोलिंग से मिला फाल्ट उत्तर प्रदेश स्थित पीजीसीआईएल के औरैया सबस्टेशन से ग्वालियर तक आने वाली इस 220 केवी इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन का रखरखाव एमपी ट्रांसको द्वारा किया जाता है। हाल ही में आई तेज बारिश और तूफान के दौरान भिंड जिले की गोहद तहसील के बिरखाड़ी गांव के समीप लाइन के दो टावरों के हार्डवेयर क्षतिग्रस्त हो गए थे तथा मिड-स्पान जॉइंट फेल हो गया था। करीब 145 किलोमीटर लंबी इस लाइन में फाल्ट का पता लगाने के लिए टीम ने सघन पेट्रोलिंग की, जिसके बाद फाल्ट का स्थान चिन्हित किया गया। खेत, कीचड़ और लगातार बारिश के बीच चला मरम्मत अभियान फाल्ट ऐसे क्षेत्र में मिला जहां धान की फसल खड़ी थी। लगातार बारिश, तेज हवा और कीचड़ के कारण टावरों तक पहुंचना कठिन था। खड़ी फसल के कारण राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने थीं। इन परिस्थितियों में मरम्मत कार्य की योजना बनाकर सुधार कार्य शुरू किया गया। 67 घंटे में पूरा किया सुधार कार्य मुख्य अभियंता (अति उच्च दाब मेंटेनेंस)  डी.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने लगातार 67 घंटे कार्य कर लाइन को बहाल किया। सुधार कार्य में दोनों टावरों के क्षतिग्रस्त डिस्क इंसुलेटर बदलना, ओपीजीडब्ल्यू और कंडक्टर को नीचे उतारना तथा मिड-स्पान जॉइंट की मरम्मत शामिल थी। ये तकनीकी कार्य लगभग 45 मीटर की ऊंचाई पर प्रतिकूल मौसम के बीच संपादित किए गए। औद्योगिक और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है लाइन ग्वालियर-औरैया 220 केवी इंटर स्टेट ट्रांसमिशन लाइन के दोनों सर्किटों से लगभग 200-200 मेगावाट विद्युत मालनपुर और मेहगांव के 220 केवी सबस्टेशनों को प्राप्त होती है। यह आपूर्ति क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों, कृषि उपभोक्ताओं तथा घरेलू विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती है। लाइन के बहाल होने से क्षेत्र को पुनः सामान्य विद्युत आपूर्ति मिलने लगी है।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक आज, CM साय की अध्यक्षता में लिए गए कई बड़े फैसले

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – 1. मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति (पॉलिसी)-2024 में प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत जारी संशोधित नीति-2026 का कार्याेत्तर अनुमोदन किया गया। संशोधित नीति में पूर्व की व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक समान होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी। साथ ही, अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों के अंतर्गत अब शासकीय महाविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 5 माह अध्यापन कार्य पूर्ण करने पर 5 अंक दिए जाने का प्रावधान किया गया है। पूर्व नीति में राजकीय विश्वविद्यालय में किए गए अध्यापन अनुभव का यह लाभ स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं था। मंत्रिपरिषद द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि शासकीय महाविद्यालयों के साथ राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के कार्यानुभव का उपयोग करते हुए उन्हें रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर दिया जाए तथा मानदेय निर्धारण में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखण्ड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय व्यवस्था लागू की जाए। अतिथि व्याख्याताओं एवं अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि एवं आकस्मिक अवकाश संबंधी प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है। 2. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री जी द्वारा 10 सितम्बर, 2026 को फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा के परिपालन में, फिल्म के प्रदर्शन पर प्रवेश हेतु देय राज्य माल और सेवा कर (एस.जी.एस.टी.) के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति सिनेमाघरों को किए जाने हेतु वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश का अनुसमर्थन किया गया। 3. मंत्रिपरिषद द्वारा पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। इसके तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। अब इस आरक्षण को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम, 2026 बनाया गया है, जिसका मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया है। इन नियमों में नियुक्ति एवं सेवा शर्तें, भर्ती के मापदंड, आरक्षण और चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

नशामुक्त पंजाब का टारगेट 2029, जालंधर रैली में अमित शाह का बड़ा ऐलान

जालंधर  पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी नशे के खिलाफ यात्राएं निकाल रही है। 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने के बाद नशा विरोधी यात्राओं का समापन आज जालंधर में एक रैली में हुआ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस रैली में बतौर मुख्य वक्ता भाग लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जनता को सबंधोति करते हुए कहा कि पंजाब देश में दो चीजों के लिए बहुत अच्छे से जाना जाता है। देश में जब भी खाने पाने की जरूरत पड़ती थी तो पंजाब का किसान गोदामों को भर देता था। देश में जब की सुरक्षा की जरूर पड़ती थी मेरे पंजाब का जवान मां भारती के लिए अपना बलिदान देने के लिए तैयार रहता था। पंजाबियों के बलिदान से न हमें केवल आजादी मिली, आजादी के बाद भारत की सीमाओं की रक्षा के लिए कोई एक सूबे अगर सबसे ज्यादा बलिदान दिया है तो वो मेरे पंजाब ने दिया है। आज नशा मुक्त पंजाब बनाने का समय क्यों आया। चिट्टे के खत्म करने की डेडलाइन बताई आप पार्टी की सरकार ने चिट्टे के व्यापार को खुलेआम चलने दिया। मैं आज पंजाब की जनता को कहना आया हूं, पंजाब के चुनाव में कई मुद्दे हैं। मगर आने वाला चुनाव बीजेपी केवल और केवल नशा मुक्त पंजाब के मुद्दे पर लड़ने वाली है। मैं पंजाब की माताओं और युवाओं को वादा करके जाता हूं, भाजपा को समर्थन करो 31 दिसंबर 2029 से पहले हम पंजाब को चिट्टे से मुक्त कर देंगे। मुझे मालूम है केजरीवाल एंड कंपनी मेरे पीछे क्या कहने वाली है। मैं पंजाब की जनता को बताना चाहता हूं हमने जो कहा है वो करके दिखाया है। शाह बोले- हमने जो कहा है वो करके दिखाया 13 दिन में चार हजार किमी, 117 विधानसभा घूमकर यह यात्रा पहुंची है। मैं कहता हूं कि 31 दिसंबर 2029 को नशामुक्त कर देंगे तो केजरीवाल एंड कंपनी क्या कहेगी। हमने जो कहा है, वह करके दिखाया। कश्मीर को आतंकवाद मुक्त करने का काम मोदी सरकार ने किया। देश में नक्सलवाद को खत्म किया। नॉर्थ ईस्ट के आतंकवाद को खत्म करने का काम मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने किया। मैं फिर माताओं-बहनों को बता रहा हूं कि 31 दिसंबर 2029 के बाद बच्चों को चिट्टा देने वाला कोई नहीं बचेगा। बीजेपी ही ऐसी पार्टी है, जो पंजाब को नशामुक्त कर सकती है। माताओं से किया वादा, तस्करों को चुन-चुनकर डालेंगे जेल रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, "मैं पंजाब की माताओं को यह विश्वास दिलाने आया हूँ कि 31 दिसंबर 2029 के बाद आपके बच्चों को चिट्टा उपलब्ध कराने वाला कोई नहीं बचेगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि नशा बेचने वाले तस्करों को चुन-चुनकर जेलों की सलाखों के पीछे डाला जाएगा। शाह ने कहा कि जो पंजाब कभी पूरे देश के लिए गेहूं और धान उगाता था, आज उस उपजाऊ धरती पर नशा बो दिया गया है। उन्होंने बताया कि वे उन पीड़ित परिवारों से भी मिलकर आए हैं जिन्होंने नशे के कारण अपने जवान बच्चों को खोया है। पंजाब की बदहाल अर्थव्यवस्था और घोटालों पर घेरा राज्य की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आज पंजाब की आर्थिक व्यवस्था बेहद बदहाल स्थिति में है। उन्होंने मोगा विज्ञापन घोटाला, बरनाला भूमि घोटाला और पंजीरी घोटाले जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में हर महीने उगाही हो रही है और केवल विज्ञापनों पर सालाना 785 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया कि 25 लाख नौकरियां देने और 26 फसलों पर एमएसपी देने के उनके वादों का क्या हुआ? रैली से पहले मिली थी बम से उड़ाने की धमकी गृह मंत्री के इस दौरे और रैली से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों में उस समय हड़कंप मच गया जब एक स्कूल (कैंब्रिज स्कूल) को ई-मेल भेजकर यह धमकी दी गई कि रैली के स्टेज के नीचे आईईडी (IED) बम रखा गया है। इस ई-मेल में शहर के अन्य स्कूलों, श्री देवी तालाब मंदिर और बसों को भी निशाना बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत सतर्कता बरतते हुए मंदिर में माथा टेकने और नशामुक्त पंजाब यात्रा के समापन के बाद सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बीच इस कार्यक्रम को संपन्न कराया। नशे को सिर्फ बीजेपी कर सकती है खत्म अमित शाह ने कहा कि पंजाब का विकास तबतक नहीं हो सकता जबतक पंजाब का युवा नशा मुक्त नहीं हो जाता। यह नशा हमारी आने वाली पीढ़ियो को बर्बाद कर देता है। पंजाब के युवाओं को नशा न मिले ऐसे सख्त तंत्र की रचना केवल और केवल पीएम मोदी के नेृत्तव में बीजेपी ही कर सकती है कोई और नहीं। आज पंजाब की आर्थिक व्यवस्था बड़ी बदहाल है। पंजाब के अंदर भ्रष्टाचार के एक के बाद एक घपले हो रहे हैं। भगवंत मान से पूछे सवाल अमित शाह ने भगवंत मान से पूछा आपके वादों का क्या हुआ। आप 25 लाख नई नौकरियां देने वाले थे। उन वादों का क्या हुआ, कुछ नहीं हुआ। विधवा पेंशन 2500 करने वाले थे नहीं किया। खनन की आय सालाना 20 हजार करोड़ बढ़ाने वाले थे। सभी फसलों पर एमएसपी देने वाले थे। आपने तो नहीं दिया, हरियाणा में बीजेपी सरकार ने सभी फसलों पर एमएसपी दे दी। कांग्रेस पर भी बोला हमला कांग्रेस पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा कि 2004-14 तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस के शासन में मात्र 26 लाख किलो नशा पकड़ा गया। बीजेपी सरकार ने नशे के खिलाफ सख्ती की, एक लाख किलो से अधिक नशा पकड़ा। बीजेपी ने एक लाख 90 हजार करोड़ रुपये का नशा पकड़ा। जालंधर वाले पूछेंगे, पंजाब में क्यों नशा नहीं रुका। आम आदमी पार्टी की सरकार हटेगी तो नशे को खत्म कर देंगे। पंजाब का युवा जब तक नशे से मुक्त नहीं होंगे, विकास भी नहीं हो सकता है। अमित शाह ने एक्स पर शेयर की थी एक पोस्ट पंजाब पहुंचने से पहले अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट सांझा की थी। उन्होंने कहा कि पंजाब ‘आप-दा’ सरकार के कुशासन के कारण नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। पंजाब … Read more

MP में CSR का नया रोडमैप तैयार, 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों पर फोकस

मध्यप्रदेश में सीएसआर का नया रोडमैप, जरूरत के मुताबिक होगा निवेश, परिणाम पर रहेगी नजर : मंत्री सुश्री भूरिया 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी भोपाल मध्यप्रदेश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को सरकारी विकास प्राथमिकताओं से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में अधिक प्रभावी परिणाम हासिल करने की दिशा में सरकार ने कॉरपोरेट जगत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने कहा कि सीएसआर केवल गतिविधियां पूरी करने या निर्धारित लक्ष्य हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समुदायों को मजबूत करना और लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए। मंत्री श्रीमती भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे विविधताओं वाले राज्य में सीएसआर निवेश के लिए एक जैसी कार्ययोजना के बजाय स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं और कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता एवं संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल से ऐसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक कायम रखा जा सके। उन्होंने सीएसआर साझेदारियों में स्पष्ट प्राथमिकताओं, जरूरतों की पहचान, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामों के मापन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीएसआर पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश का पंखुड़ी पोर्टल भी सरकार की विकास आवश्यकताओं और संभावित सीएसआर साझेदारों के बीच सेतु का काम कर सकता है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी साझा कर सरकार, कॉरपोरेट, विकास एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के बीच अधिक व्यवस्थित साझेदारी विकसित की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि मजबूत सरकारी-सीएसआर सहयोग से विकास के प्रयासों को अतिरिक्त गति देने के साथ उनकी पहुंच और प्रभाव को भी बढ़ाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में 1195 करोड़ से अधिक का सीएसआर निवेश, प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला ने सीएसआर के कानूनी और संस्थागत ढांचे की जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के बाद पात्र कंपनियों के लिए सीएसआर एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में सामने आया है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाली कंपनियों को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर व्यय करना होता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1,195.34 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च किए गए। हालांकि, इस निवेश में जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत ही है। उन्होंने इसे भविष्य में अधिक सक्रिय सीएसआर भागीदारी की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया। श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सीएसआर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग, सरकार की प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर कंपनियों की रुचि का मिलान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा। उन्होंने सीएसआर पोर्टल को और सुदृढ़ करने, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों और अन्य साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई, जिनके परिणाम स्पष्ट रूप से मापे जा सकें और जिन्हें लंबे समय तक संचालित किया जा सके। उन्होंने मध्यप्रदेश सीएसआर फैसिलिटेशन गाइडलाइनस 2017 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सरकार की भूमिका सुविधा प्रदाता और समन्वयक की है। सीएसआर के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र, कंपनियों, विकास संस्थाओं, सिविल सोसायटी और अन्य हितधारकों के बीच साझेदारी को अधिक संरचित स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। 61 लाख से अधिक बच्चों के पोषण में सीएसआर की भागीदारी का बड़ा अवसर महिला एवं बाल विकास आयुक्त श्री संदीप जी. आर. ने सीएसआर को बाल पोषण और शुरुआती बाल विकास से जोड़ते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके संपूर्ण विकास की बुनियाद तय करते हैं। विशेष रूप से जीवन के पहले छह वर्ष और शुरुआती 1000 दिन पोषण, वृद्धि और विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में समय पर किए गए हस्तक्षेपों का प्रभाव आगे के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बाल विकास के लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए सरकार के साथ समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। आयुक्त ने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 61 लाख से अधिक संवेदनशील एवं जरूरतमंद बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नवाचारों को बढ़ावा देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। श्री संदीप ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण समाधानों का उदाहरण देते हुए ‘रंगीन रोटी’ जैसी पहल का उल्लेख किया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री, जैसे सहजन की पत्तियों या मिलेट्स को रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर ऐसे पोषण मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जो स्थानीय खान-पान की आदतों के अनुरूप होने के साथ व्यवहारिक भी हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थानीय और नवाचारी समाधान समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के साथ पोषण परिणामों को भी बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआर की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश देश की आबादी में लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सीएसआर व्यय में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1.44 प्रतिशत है। ऐसे में राज्य में सीएसआर निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने श्योपुर में ब्रिटानिया फाउंडेशन और विदिशा में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियां सरकारी प्रयासों को पूरक समर्थन प्रदान कर सकती हैं। जरूरत और निवेश के बीच बनेगा सीधा संबंध कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सीएसआर को केवल गतिविधि आधारित व्यय के बजाय स्पष्ट और मापनीय परिणामों से जोड़ा जाए। राज्य और जिलों की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उन्हें सीएसआर संस्थाओं की रुचि, क्षमता और विशेषज्ञता से जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी करने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति … Read more

फायर सेफ्टी में खामियां मिलीं, अंबाला के चमन वाटिका स्कूल के हॉस्टल पर बड़ा एक्शन

 चंडीगढ़  देश-प्रदेश में लगातार सामने आ रही भवन गिरने और आगजनी की घटनाओं से हरियाणा सरकार ने सबक लिया है। खासकर ऐसे भवन, जो पुराने हैं, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुके हैं अथवा जिनमें अग्नि सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हैं, वे जांच के दायरे में हैं। इसके लिए सरकार ने भवनों का सुरक्षा और फायर सेफ्टी ऑडिट आरंभ कर दिया है। इस अभियान की पहली बड़ी कार्रवाई अंबाला के चमन वाटिका स्कूल में हुई है। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर स्थित इस स्कूल परिसर में बने छात्रावासों में फिलहाल विद्यार्थियों के रहने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में सामने आया कि परिसर में अग्निशमन की बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदेश सरकार के निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक स्कूल परिसर में किसी विद्यार्थी को रहने की अनुमति नहीं होगी। चमन वाटिका स्कूल का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि हाल ही में अंबाला में एक भवन गिरा है, जिसमें कई लोग मारे गए। चमन वाटिका का करीब 35 वर्ष पुराना भवन तीन बार बाढ़ का सामना कर चुका है। छात्रावास और स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए यहां छात्राओं के लिए संचालित आवासीय गुरुकुल को मार्च 2026 में बंद कर दिया गया था। गुरुकुल के तत्कालीन प्रबंधन ने चमन वाटिका से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को धोखे में रखकर अक्टूबर 2026 से इसमें दाखिले होने की सूचना प्रसारित की जा रही है, जिसे फायर सेफ्टी विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। अंबाला के अग्निशमन अधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन के पास जो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट है, वह केवल 374.86 वर्ग मीटर के ग्राउंड कवरेज के लिए है, जबकि मौके पर परिसर का वास्तविक कवर क्षेत्र इससे काफी अधिक पाया गया। परिसर के तीन गर्ल्स हास्टल ब्लॉक, मेस और स्विमिंग पूल क्षेत्र मौजूदा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के दायरे में नहीं आते। सरकार ने स्कूल को नया स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही हास्टल और स्कूल भवनों के सक्षम अधिकारी से स्वीकृत नक्शे भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं अग्निशमन विभाग ने साफ कर दिया है कि सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिसर के सभी भवन और वास्तविक क्षेत्र उसके दायरे में होने चाहिए। इसी तरह पुराने अथवा प्राकृतिक आपदा झेल चुके भवनों के लिए संरचनात्मक स्थिरता का प्रमाण भी जरूरी होगा। दिल्ली-अंबाला समेत हालिया घटनाओं के बाद शुरू हुआ सुरक्षा ऑडिट यह संकेत दे रहा है कि सरकार अब संभावित रूप से असुरक्षित भवनों की पहचान कर उन्हें हादसे का कारण बनने से पहले कार्रवाई के दायरे में ला रही है। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले भवनों की जांच पर रहेगा जोर हरियाणा में सुरक्षा ऑडिट की यह कवायद ऐसे समय शुरू हुई है, जब दिल्ली, अंबाला और देश के अन्य हिस्सों में भवन गिरने तथा आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने खासतौर पर स्कूलों, हास्टलों और ऐसे सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जहां बड़ी संख्या में बच्चे और लोग एकसाथ मौजूद रहते हैं। सरकार अब ऐसे भवनों की पहचान और जांच पर जोर दे रही है, जिनकी संरचनात्मक मजबूती संदिग्ध है या जिनमें अग्निरोधी व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। सुरक्षा ऑडिट का उद्देश्य हादसा होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले ही जोखिम वाले भवनों की पहचान करना है।  

आंगन मिलन सेवा में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश

सेवा संकल्प अभियान  आंगन मिलन सेवा में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश बिलासपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मस्तुरी ब्लॉक के ग्राम मनिकचौरी में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समुदाय के लोगों को स्वस्थ हृदय के लिए आवश्यक सावधानियों, संतुलित जीवनशैली और हृदय रोगों से बचाव के उपायों के बारे में स्वास्थ्य शिक्षा एवं जागरूकता प्रदान की गई।       कार्यक्रम के दौरान लोगों को बताया गया कि स्वस्थ हृदय के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त आराम और तनाव से बचाव बेहद जरूरी है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने तथा शरीर में दिखाई देने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने के लिए प्रेरित किया गया। स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने, खान-पान में सावधानी बरतने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का संदेश दिया गया। हृदय रोगों से बचाव के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलावों के महत्व को समझाते हुए समुदाय के लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से ग्रामीण समुदाय तक स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी पहुंचाने और लोगों में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।  

मंगला में सेवा संकल्प अभियान के तहत जल संरक्षण और स्वच्छता गतिविधियां आयोजित

मंगला में सेवा संकल्प अभियान के तहत जल संरक्षण और स्वच्छता गतिविधियां आयोजित बिलासपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मंगला में जल संरक्षण एवं स्वच्छता को लेकर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल स्रोत सुधार, नदी घाट स्वच्छता अभियान, जल चौपाल एवं जल संकल्प जैसी गतिविधियां मंगला (पासीद) एनीकट क्षेत्र में की गईं।     कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत बिल्हा के अध्यक्ष श्री रामकुमार कौशिक तथा श्री सोमेश तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नागरिकों को जल के महत्व और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में कुल 121 नागरिकों ने सहभागिता निभाई। जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण के साथ ही लोगों ने जल की बर्बादी रोकने और भविष्य के लिए जल बचाने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों को जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और स्वच्छ एवं सुरक्षित जल स्रोतों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।     इस अवसर पर सेवा सहकारी समिति पासीद के अध्यक्ष नारोत्तम यादव, उपाध्यक्ष मनोज साहू, ग्राम पंचायत मंगला के सरपंच प्रतिनिधि उमेश खुसरो, पूर्व सरपंच घनश्याम यादव, जल संसाधन निर्माण उपसंभाग बिलासपुर के बी.एम. चौहान तथा उप अभियंता कुमारी श्रुति गौरहा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं नागरिक मौजूद रहे।  

निवेशकों के लिए खुशखबरी, राजस्थान में 4700 से ज्यादा औद्योगिक भूखंडों की ई-लॉटरी

जयपुर राजस्थान में उद्योग लगाने की तैयारी कर रहे निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 का 14वां चरण शुरू हो गया है। राइजिंग राजस्थान के तहत शुरू किए गए इस चरण में प्रदेश के 94 औद्योगिक क्षेत्रों में 4700 से अधिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक भूखंड निवेशकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इच्छुक निवेशक 12 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। भूखंडों का आवंटन 15 अक्टूबर को ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य निवेशकों को बिना लंबी प्रक्रिया के औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराना है। राइजिंग राजस्थान के तहत राज्य सरकार के साथ एमओयू करने वाले निवेशक योजना का लाभ ले सकेंगे। जिन निवेशकों ने अभी तक एमओयू नहीं किया है, वे भी ईएमडी की अंतिम तिथि तक एमओयू कर पात्र बन सकते हैं। भूखंडों का इस तरह से होगा वर्गीकरण इस चरण में 4,116 भूखंड अनारक्षित श्रेणी में रखे गए हैं। इसके अलावा 27 लॉजिस्टिक भूखंड उपलब्ध हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए 168, महिला वर्ग के लिए 167, भूतपूर्व सैनिकों के लिए 95, बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए 124 तथा सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के मृतकों के आश्रितों के लिए 59 भूखंड आरक्षित किए गए हैं। एक आवेदन तो सीधा आवंटन, ज्यादा आवेदन पर ई-लॉटरी रीको की योजना में आवंटन की प्रक्रिया भी स्पष्ट रखी गई है। किसी भूखंड के लिए केवल एक आवेदन प्राप्त होने पर उसे सीधे आवंटित किया जाएगा। वहीं एक ही भूखंड के लिए एक से अधिक आवेदन आने की स्थिति में ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटन होगा। इससे आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया गया है। 13 चरणों में 2335 भूखंड आवंटित, 21 हजार करोड़ का निवेश प्रत्यक्ष आवंटन योजना के 13 चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं। इन चरणों में 2,335 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया गया। रीको के अनुसार, इन भूखंडों के माध्यम से प्रदेश में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 46 हजार से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार सृजन का रास्ता तैयार हुआ है। इसके अलावा 444 भूखंडों का आवंटन अभी प्रक्रियाधीन है, जिनसे 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश की संभावना है निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें योजना का 14वां चरण 28 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर है। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को ई-लॉटरी आयोजित की जाएगी। रीको का कहना है कि योजना के जरिए प्रदेश में औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसरों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

बिहार के शहरों में घटेगा प्रदूषण और गर्मी, मियावाकी तकनीक से बनेंगे माइक्रो-फॉरेस्ट

पटना बिहार के प्रमुख शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और कंक्रीट के जंगलों के कारण उत्पन्न हो रही अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक ठोस कदम उठाया है। शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जापान की प्रसिद्ध 'मियाबाकी' तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है। पानी के अस्थाई छिड़काव जैसे उपायों के बजाय अब प्राकृतिक और स्थाई समाधान के रूप में इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलते ही इस पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। बढ़ते पीएम-10 और हीट वेव से समाधान की पहल बिहार के शहरी क्षेत्रों में धूलकणों (PM-10) की बढ़ती मात्रा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। कंक्रीट के विस्तार से शहरों में सामान्य तापमान पर भी तीखी गर्मी और हीट वेव का अनुभव हो रहा है। पहले अपनाए गए पानी के छिड़काव जैसे तात्कालिक उपाय अपर्याप्त साबित हो रहे थे। इसी समस्या के दीर्घकालिक और स्थाई समाधान के लिए दोनों विभागों ने मियावाकी विधि से सघन पौधरोपण करने की योजना बनाई है। जानिए क्या है जापानी मियावाकी तकनीक कम जगह में घना जंगल विकसित करने की यह जापानी विधि शहरी पर्यावरण के लिए बेहद प्रभावी मानी जाती है। इस तकनीक के जरिए बहुत ही कम समय और सीमित क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के अधिक से अधिक पौधे लगाए जाते हैं। इसमें पौधों को अत्यंत पास-पास लगाया जाता है, जिससे यह बहुत कम समय में एक घने जंगल का रूप ले लेता है। इसमें अलग-अलग ऊंचाई वाले पौधे जैसे झाड़ी, छोटे पेड़, मुख्य पेड़ और कैनोपी (ऊंचे पेड़) एक साथ रोपे जाते हैं। पारंपरिक पौधरोपण की तुलना में मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधे 10 गुना तेजी से विकसित होते हैं। ये विधि आम पौधरोपण से थोड़ी खर्चीली है, फिर भी सीमित जगह वाले शहरों के लिए इसे सर्वोत्तम विकल्प माना जाता है। सार्वजनिक स्थलों और खाली जमीनों का होगा चयन मियावाकी तकनीक से पौधरोपण करने के लिए शहरों के प्रमुख चौक-चौराहों, भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक इलाकों, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों के किनारे उपलब्ध खाली जमीनों को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय नगर निकायों से आवश्यक सहमति प्राप्त कर इन स्थलों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। आम नागरिकों को भी पौधरोपण के लिए किया जाएगा प्रेरित सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ आम जनता को भी इस हरित अभियान से जोड़ने की योजना है। नागरिकों को उनके घरों के आसपास मौजूद खाली जमीनों पर मियावाकी शैली में छोटे-छोटे सघन उपवन (माइक्रो-फॉरेस्ट) विकसित करने के लिए प्रोत्साहित और जागरूक किया जाएगा, ताकि पूरे शहर का हरित आवरण तेजी से बढ़ सके।