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नरोत्तम मिश्रा की वापसी के संकेत? दतिया उपचुनाव के बाद बदल सकते हैं प्रदेश के राजनीतिक समीकरण

भोपाल दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। आर्थिक अनियमितता के मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद होने के बाद रिक्त हुई इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। परिणाम तीन अगस्त को आएगा। भाजपा से दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा यहां से प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा नरोत्तम मिश्रा को चुनाव लड़वाने के संकेत दे चुकी है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से नरोत्तम मिश्रा का यह वनवास समाप्त होने की संभावना है। हार के ढाई साल बाद यदि वह उपचुनाव में जीत दर्ज करते हैं तो मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार और संगठन में उनका कद फिर से मजबूत हो जाएगा।  

पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में लगा महारुद्र यंत्र दोबारा काला, श्रद्धालुओं में जिज्ञासा

मंदसौर भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में लगा चांदी का महारुद्र यंत्र बार-बार काला हो रहा हैं। कुछ माह पहले ही महारुद्र यंत्र की रतलाम के भक्तों की मंडली द्वारा सफाई की गई थी। अबकी बार सिर्फ महारुद्र यंत्र ही काला हुआ हैं, चांदी का छत्र, दरवाजे पर चमक बरकरार हैं। मंदिर प्रबंधक का कहना हैं की सावन माह में गर्भगृह के रुद्र यंत्र सहित दरवाजे, छत की सफाई होगी। भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में करीब 11 साल पहले 1 करोड़ रुपए से बना महारुद्र यंत्र कुछ-कुछ दिनों में ही काला पड़ रहा हैं। कई बार सफाई की गई हैं, लेकिन महारुद्र यंत्र की चांदी बार-बार काली हो रही हैं। गर्भगृह में करीब 260 किलो चांदी का रुद्रयंत्र लगा हुआ हैं। महाशिवरात्रि पर्व के पहले गर्भगृह के दरवाजों, छत्र एवं महारुद्र यंत्र की सफाई कर चकाचक किया गया था। चांदी के दरवाजे और छत की चमक तो पहले जैसी बनी हुई हैं, लेकिन महारुद्र यंत्र काला हो गया। प्रयोगशाला की तरह ही कार्य हो रहा है। प्रारंभ में जब महारुद्र यंत्र एवं चांदी के सभी आयटम कुछ-कुछ दिनों में काले हो रहे थे तब निर्माता द्वारा 3.5 किलो चांदी का लेप बनाकर यंत्र पर चढ़ाया था। मंदिर समिति से उस समय कहा था की इससे यंत्र काला नहीं पड़ेगा लेकिन कुछ समय बाद ही यंत्र काला पड़ने लगा और वह अब भी कायम हैं। मंदिर प्रबंधक राहुल रुनवाल ने बताया मंदिर गर्भगृह में चांदी के महारुद्र यंत्र, छत्र, दरवाजों की समय-समय पर सफाई हो रही हैं। सावन माह में फिर चांदी की सफाई होगी।

मीडिया प्रतिनिधियों को मिला हरिद्वार कुंभ का आमंत्रण

​रायपुर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निवास (देहरादून) में आज छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से एक अत्यंत गरिमामय और सौजन्य भेंट हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम और अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और उत्तराखंड के बहुआयामी विकास, सांस्कृतिक धरोहर तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी। ​'विकास भी, विरासत भी': क्षेत्रीय प्राधिकरणों से संवर रहा है उत्तराखंड ​मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार "विकास भी, विरासत भी" के मूल मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नैनीताल, गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विकास प्राधिकरणों का गठन कर उनके विकास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों का संतुलित सामाजिक, आर्थिक और नैसर्गिक विकास करना है, ताकि यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।  उत्तराखंड के ​मुख्यमंत्री धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड ऋषियों, मुनियों और संतों की पावन तपोस्थली है। इस देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान को संभालना हम सभी का परम दायित्व है। उन्होंने नैसर्गिक संपदा (प्राकृतिक संसाधनों) के संरक्षण पर विशेष बल दिया, ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण संजोकर रखा जा सके। ​लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने में छत्तीसगढ़ सरकार की भूमिका अनुकरणीय ​संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरगामी सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने सीएम साय की मंशानुरूप इस महत्वपूर्ण भ्रमण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और संयुक्त सचिव सह आयुक्त जनसंपर्क रजत बंसल को विशेष रूप से बधाई दी। धामी ने इस बात को रेखांकित किया कि देश के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने और पत्रकार कल्याण से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य रहा है। अधिकारियों के कुशल नेतृत्व में ऐसे अंतर्राज्यीय भ्रमणों से दोनों राज्यों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को एक नया आयाम मिलता है। ​अगले वर्ष हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष आमंत्रण  ​भेंट के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के मीडिया दल को अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ के लिए सस्नेह आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री धामी ने एक बड़ा दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि कुंभ के पावन अवसर पर देश के सभी राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों को एक-एक अवसर दिया जाना चाहिए। ​मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस पहल से देश भर की मीडिया देवभूमि की पावन तपोभूमि, आध्यात्मिक ऊर्जा और वहां की विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देख सकेगी और इन अद्भुत अनुभवों को अपने-अपने राज्यों की जनता तक पहुँचा सकेगी। ​एक अनूठा संगम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, खनिज व नैसर्गिक संपदा और उत्तराखंड की हिमालयी दिव्यता व आध्यात्मिक चेतना के बीच हुआ यह संवाद आने वाले समय में अंतर्राज्यीय समन्वय और राष्ट्रीय एकता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरेगा। इस भ्रमण दल में मुख्यमंत्री धामी से मिलने वालों में दुर्ग,​रायपुर,​कोरबा,​जगदलपुर,​बिलासपुर,​राजनांदगांव,​कोरिया और ​धमतरी जिले के मीडिया प्रतिनिधी और छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय के अधिकारियों के साथ उत्तराखंड के सूचना एवं जनसंपर्क के निदेशक बंशीधर तिवारी,मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव पांडे,संयुक्त संचालक के.एस. चौहान सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बिहार B.Ed काउंसलिंग में कॉलेज आवंटन जारी, मेरिट और वरीयता के आधार पर चयन

मुजफ्फरपुर  CET BEd 2026: बिहार राज्य के दो वर्षीय बीएड एवं शिक्षा शास्त्री पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए आयोजित सीईटी-बीएड-2026 के प्रथम चरण की ऑनलाइन काउंसिलिंग का कॉलेज आवंटन जारी कर दिया गया है। कुल 36,872 अभ्यर्थियों को महाविद्यालय एवं विभाग आवंटित किए गए हैं। आवंटन सूची आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी गई है। महाविद्यालयों का आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, आरक्षण नियमों तथा ऑनलाइन काउंसिलिंग के दौरान दी गई विश्वविद्यालय एवं कॉलेज वरीयता के आधार पर किया गया है। 4 से 10 जुलाई तक नामांकन कॉलेज आवंटित अभ्यर्थी 4 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक संबंधित महाविद्यालय या विभाग में उपस्थित होकर दस्तावेजों का सत्यापन कराने के बाद नामांकन करा सकेंगे। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रवेश नहीं लेने वाले अभ्यर्थियों का आवंटन स्वतः निरस्त माना जाएगा। 6.10 लाख से अधिक आवेदन इस वर्ष सीईटी-बीएड-2026 के लिए 6,10,811 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। विश्वविद्यालयों की वरीयता में सबसे अधिक पसंद बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर रहा, जिसे 1,13,824 अभ्यर्थियों ने प्राथमिकता दी। इन संस्थानों की रही सबसे अधिक मांग सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में भी अभ्यर्थियों ने बड़ी संख्या में वरीयता दी। सबसे अधिक पसंद किए गए कॉलेज इस प्रकार हैं:     शिक्षा विभाग, सीटीई, तुर्की (मुजफ्फरपुर) – 29,598     कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, गया – 27,288     राजकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, समस्तीपुर – 22,885     महिला प्रशिक्षण महाविद्यालय, पटना – 20,206     कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, भागलपुर – 19,666     पटना ट्रेनिंग कॉलेज, पटना – 15,011 नामांकन के दौरान अभ्यर्थियों को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे—     मैट्रिक, इंटरमीडिएट एवं स्नातक के अंकपत्र और प्रमाण-पत्र की छायाप्रति     स्नातकोत्तर अंकपत्र एवं प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     मूल सीएलसी/डीएलसी/टीसी     आवासीय प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     जाति प्रमाण-पत्र (आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए)     ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     दिव्यांग (PwD) प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     अन्य आरक्षण अथवा कोटा संबंधी प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     हाल के चार पासपोर्ट आकार के रंगीन फोटोग्राफ समय पर पूरा करें नामांकन सीईटी-बीएड-2026 प्रशासन ने सभी आवंटित अभ्यर्थियों से निर्धारित तिथि के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित महाविद्यालय में उपस्थित होकर नामांकन सुनिश्चित करने की अपील की है। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी प्रकार का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।  

नए आई सी डी और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करने का अनुरोध

भोपाल  सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में शुक्रवार को सम्पन्न हुई बोर्ड ऑफ ट्रेड की महत्वपूर्ण बैठक में मध्यप्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश की निर्यात क्षमता, औद्योगिक विकास एवं निवेश संभावनाओं पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। बोर्ड बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, देश के प्रमुख उद्योगपति, निर्यातक, व्यापार बोर्ड के सदस्य, विभिन्न राज्यों के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। एमएसएमई मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों से संपन्न हुए 9 मुक्त व्यापार समझौते भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हैं। उन्होंने सभी राज्यों से इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने तथा निर्यात को नई गति देने के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया। मंत्री काश्यप ने कहा कि भारत को वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचाने में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य निर्यात वृद्धि के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। मंत्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश ने राज्य निर्यात नीति, जिला निर्यात कार्य योजनाओं, जिला निर्यात संवर्धन परिषदों, राज्य स्तरीय निर्यात संवर्धन परिषद तथा 'एक जिला–एक उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से मजबूत निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। प्रदेश का वस्तु निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आगामी वर्षों में इसे और अधिक गति देने के लिए ठोस रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का टेक्सटाइल, फार्मा एवं इंजीनियरिंग क्षेत्र तेजी से निर्यात वृद्धि का आधार बन रहा है। मंत्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश में देश का पहला पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां लगभग 36 औद्योगिक इकाइयों के साथ ₹26,000 करोड़ से अधिक के निवेश समझौते हो चुके हैं तथा भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। साथ ही, उन्होंने इंदौर में टेक्सटाइल टेस्टिंग फैसिलिटी तथा एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जाने का भी अनुरोध किया, जिससे प्रदेश के निर्यातकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग पार्क तथा भोपाल के निकट सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किया जा रहा है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल विनिर्माण को नई गति मिलेगी। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित किए जाने की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने हाल के महीनों में 20 नए जीआई टैग प्राप्त किए हैं, जिनमें अधिकांश कृषि एवं उद्यानिकी उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना आवश्यक है, ताकि वैश्विक बाजारों की गुणवत्ता आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सके। उन्होंने मध्यप्रदेश के भूमि बैंक की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए 13 स्थानों की पहचान की गई है तथा लगभग 12,000 एकड़ भूमि निवेशकों के लिए उपलब्ध कराई गई है। यह औद्योगिक विकास एवं बड़े निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री काश्यप ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को निर्यात वृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में संचालित आई सी डी पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसे देखते हुए उन्होंने जबलपुर एवं रीवा क्षेत्र में नए आई सी डी तथा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करने का अनुरोध किया, जिससे पूर्वी मध्यप्रदेश के उद्योगों एवं निर्यातकों को बड़ी सुविधा मिलेगी। पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक संपदा, वन्यजीव एवं इको-टूरिज्म की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। चीता परियोजना की सफलता तथा वन्य पर्यटन की बढ़ती संभावनाएं प्रदेश को विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन भी विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक सशक्त माध्यम है और इसके लिए विशेष रणनीति तैयार किए जाने की आवश्यकता है। मंत्री काश्यप ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन,, ई मार्केट प्लेस,,जेम सहित विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इनका लाभ अधिक से अधिक एमएसएमई स्टार्टअप्स,ओ डी ओ पी उत्पादकों एवं नए निर्यातकों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश जैसे लैंड-लॉक्ड राज्यों को LIFT योजना में शामिल करने तथा FTA के प्रभावी उपयोग हेतु जिला एवं क्लस्टर स्तर पर विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाने का भी सुझाव दिया। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास, निर्यात संवर्धन एवं निवेश आकर्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश न केवल राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण एवं निर्यात शक्ति बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।  

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने की रायपुर नगर निगम के कार्यों की समीक्षा

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव  शंगीता आर. ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ रायपुर नगर निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर राजधानी रायपुर में विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित बैठक में तकनीकी कारणों से लंबित अप्रारंभ कार्यों की बाधाएं दूर कर उन्हें तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोन कमिश्नरों को हर 15 दिनों में कार्यस्थलों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  आर. एक्का और रायपुर नगर निगम के आयुक्त  संबित मिश्रा भी बैठक में मौजूद थे। सचिव  शंगीता आर. ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि राजधानी में नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य बुनियादी सेवाओं की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए सभी जोन कमिश्नरों, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ निर्वहन करने को कहा।  नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर व्यापक सफाई अभियान चलाने तथा जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी नियमित एवं प्लेसमेंट अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने से कार्यक्षमता और सेवा वितरण दोनों बेहतर होते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के आवासों के निर्माण में तेजी लाने को कहा। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की समीक्षा के दौरान रायपुर की स्वच्छता रैंकिंग को सुधारने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने को कहा। सचिव  शंगीता आर. ने राजधानी की गरिमा के अनुरूप स्वच्छता व्यवस्था विकसित करने, शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने तथा कचरा परिवहन की व्यवस्था की नियमित निगरानी व समीक्षा करने को कहा। उन्होंने नालंदा परिसर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा और रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक  एस.के. सुन्दरानी सहित नगर निगम के सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त, जोन कमिश्नर, अभियंता, सभी विभागों के प्रभारी अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारी, जोन स्वास्थ्य अधिकारी तथा जोन सहायक राजस्व अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

अल्प वर्षा की हर चुनौती से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित अल्प वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग तथा विकसित भारत-बीवी-जी राम जी योजना की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मौसम की संभावित स्थिति, खाद एवं बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती तथा ग्रामीण रोजगार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन अथवा आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा तथा खरीफ सीजन की तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की फसल के लिए आवश्यक सिंचाई जल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर प्राप्त हों और कृषि जोखिम कम हो। मुख्यमंत्री साय ने किसानों से अपील की कि वे कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या अथवा तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। उन्होंने अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में बताया गया कि राज्य में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। बैठक में बताया गया कि अर्ली वेरायटी के धान बीज बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराने की संपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। उन्होंने 'मोर गांव मोर पानी' अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विकसित 'सचेत', 'दामिनी' और 'मेघदूत' मोबाइल एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समय पर मौसम संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंच सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादन लागत कम हो और फसल सुरक्षित रह सके। वीबी-जी राम जी योजना बनेगी जल सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बैठक में बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है। योजना के अंतर्गत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, जल संरचनाओं के निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे एक ओर ग्रामीणों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो और दूसरी ओर प्रदेश की जल सुरक्षा मजबूत हो। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में किया गया प्रत्येक प्रयास आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण परिवारों के हितों की रक्षा, कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित रूप से जारी किए जाने वाले बुलेटिनों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान तैयार किया जाए, ताकि यह जानकारी किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुँचे। साथ ही सोशल मीडिया एवं पारंपरिक मीडिया के माध्यम से भी इनका व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि संचालक राहुल देव, विकसित भारत वीबी – जीरामजी योजना के आयुक्त तारणप्रकाश सिन्हा, भारत मौसम विज्ञान विभाग की विशेषज्ञ श्रीमती गायत्री वानी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के निदेशक विवेक कुमार त्रिपाठी सहित कृषि, मौसम एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Punjab Land Pooling Policy: किसानों के हित में बदलाव, जानिए नई नीति से क्या होंगे फायदे

 चंडीगढ़ पंजाब में मान सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी में बदलाव कर दिए हैं। जमीन मालिकों की चिंताओं को दूर करने और जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को अधिक फायदा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने जमीन मालिकों के लाभों से संबंधित मौजूदा नीति में संशोधनों को मंजूरी दे दी है तथा राहत के लिए कई अन्य कदमों की भी शुरुआत की है। लैंड पूलिंग पॉलिसी से क्या होंगे बदलाव? संशोधित नियमों के अनुसार, लैंड पूलिंग में आवासीय व व्यावसायिक श्रेणी चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट मिलते रहेंगे। कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ा 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो सिर्फ आवासीय श्रेणी चुनेंगे, उन्हें अब 1,600 की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा। व्यावसायिक जगह 800 वर्ग गज से 840 वर्ग गज कर दी है। आउस्टी पॉलिसी में संशोधन के तहत वह जमीन मालिक जिनकी एक एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज प्लाट के हकदार होंगे। 1-2.5 एकड़ तक के मालिकों को 300 वर्ग गज प्लाट मिलेगा 12.5 एकड़ से अधिक पर 500 वर्ग गज प्लॉट मिलेगा। छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर आफ इंटेंट की व्यवस्था। 'सुविधा सर्टिफिकेट' अवधि दो साल से बढ़ा चार साल कर दी है। विकसित प्लाट लेने वाले असली मालिकों को स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वे कहीं भी स्टांप ड्यूटी छूट का लाभले सकते हैं। ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा। किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लाट आबंटन के योग्य होंगे। कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 किया संशोधित नियमों के अनुसार लैंड पूलिंग के तहत रिहायशी और कमर्शियल कैटेगरी चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के रिहायशी प्लॉट मिलते रहेंगे, जबकि कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो लोग केवल रिहायशी कैटेगरी चुनते हैं, उन्हें अब 1,600 वर्ग गज की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा, जबकि कमर्शियल कैटेगरी के प्रोजेक्ट्स के लिए कमर्शियल जगह 800 वर्ग गज से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी कैबिनेट ने आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत वह जमीन मालिक जिनकी 1 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे। जिनकी अधिग्रहित जमीन 1 एकड़ से अधिक और 2.5 एकड़ तक है, उन्हें 300 वर्ग गज का प्लॉट मिलेगा। वहीं जिनकी अधिग्रहित जमीन 2.5 एकड़ से अधिक है, वे 500 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे। किसानों के लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था कैबिनेट ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है और 'सुविधा सर्टिफिकेट' की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दी है। इसके अलावा इस नीति के तहत विकसित प्लॉट लेने वाले असली जमीन मालिकों को रजिस्ट्रेशन या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वैकल्पिक रूप से वे अधिग्रहित जमीन के कलेक्टर रेट पर गणना किए गए मूल्य तक पंजाब में कहीं भी जमीन खरीदते समय स्टांप ड्यूटी की छूट का लाभ ले सकते हैं। योग्य जमीन मालिकों को एक तरजीही ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा, जबकि इस नीति में भाग लेने वाले किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लॉटों की आबंटन के योग्य होंगे। संशोधित लैंड पूलिंग नीति का विरोध शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार की संशोधित लैंड पूलिंग नीति को किसानों की जमीन हड़पने की साजिश करार दिया है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार चुनाव नजदीक आते देख अपने राजनीतिक हितों को साधने में जुटी है। सरकार उन लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जिनसे पहले कथित तौर पर विभिन्न प्रकार के समझौते किए गए थे। किसानों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता सुखबीर ने कहा कि पंजाब की उपजाऊ जमीन और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है। पहले भी किसानों की जमीनों को लेकर की गई ऐसी कोशिशों का विरोध किया गया था और आगे भी किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी कदम को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों और उनकी जमीनों की सुरक्षा के लिए पूरे पंजाब में व्यापक जन आंदोलन और संघर्ष चलाया जाएगा। इसके तहत किसानों को जागरूक करने और सरकार की नीति के विरोध में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

योगी सरकार की नंदिनी योजना किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा अवसर

लखनऊ  खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय का मजबूत आधार बनाने की दिशा में महत्वाकांक्षी नंदिनी योजना किसानों, पशुपालकों और बेरोजगार युवाओं के लिए सुनहरा अवसर लेकर आई है। यूपी की योगी सरकार की इस योजना के माध्यम से जिले में छह आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिनमें प्रत्येक इकाई में 10 उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली गायों का पालन किया जाएगा। 23.50 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना पर सरकार 50 प्रतिशत अर्थात 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को नई गति मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त होगा। बलरामपुर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि बलरामपुर को इस वर्ष छह डेयरी इकाइयों का लक्ष्य आवंटित हुआ है। प्रत्येक इकाई की कुल लागत 23.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार 11.80 लाख रुपये सब्सिडी देगी। शेष राशि लाभार्थी स्वयं अथवा बैंक ऋण के माध्यम से जुटा सकेंगे। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान, पशुपालक और बेरोजगार युवा 21 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पात्र अभ्यर्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ लॉटरी प्रणाली से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नंदिनी योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक एवं आधुनिक डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना भी है। वर्तमान समय में खेती के साथ पशुपालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनकर उभर रहा है। यदि आधुनिक तकनीक, संतुलित पशु आहार और बेहतर नस्ल की गायों का उपयोग किया जाए तो डेयरी व्यवसाय किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना से जिले में दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे दुग्ध सहकारी समितियों को पर्याप्त मात्रा में दूध उपलब्ध होगा, दुग्ध प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। योजना ग्रामीण युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे रोजगार के लिए शहरों की ओर होने वाले पलायन पर प्रभावी अंकुश लगेगा। सरकार पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। नंदिनी योजना भी उसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। डेयरी व्यवसाय से प्रतिदिन नकद आय प्राप्त होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति में स्थायित्व आता है और वे खेती के साथ अन्य आवश्यकताओं को भी आसानी से पूरा कर सकते हैं। विशेषज्ञ परामर्श के साथ मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को केवल अनुदान ही नहीं मिलेगा, बल्कि पशुपालन विभाग की ओर से तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी, पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञ परामर्श तथा वैज्ञानिक तरीके से डेयरी संचालन का मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे लाभार्थी डेयरी इकाइयों का सफल संचालन कर अधिक उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित कर सकेंगे। 21 तक करें आवेदन जिले के किसानों, पशुपालकों और बेरोजगार युवाओं से अपील की कि वे अंतिम तिथि 21 जुलाई से पहले ऑनलाइन आवेदन अवश्य करें। आवेदन नंद बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने पहले से कामधेनु योजना, मिनी/माइक्रो कामधेनु योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ लिया है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। आवेदन की अंतिम तिथि: 21 जुलाई जनपद का लक्ष्य: 6 आधुनिक डेयरी इकाइयां प्रति इकाई: 10 उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली गायें कुल परियोजना लागत: 23.50 लाख रुपये सरकारी अनुदान: 11.80 लाख रुपये (50 प्रतिशत) शेष राशि: स्वयं अथवा बैंक ऋण के माध्यम से चयन प्रक्रिया: लॉटरी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी चयन अतिरिक्त सुविधा: तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं आधुनिक डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण बलरामपुर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि नंदिनी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को नई दिशा देगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर सृजित होंगे। जिले में दुग्ध उत्पादन के साथ गोवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।

37 साल पुराने पारिवारिक विवाद पर बनी सहमति, 8 जुलाई को कोर्ट में होगी औपचारिक कार्यवाही

ग्वालियर  सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग चार दशक से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब समाधान की ओर बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए आपसी समझौते की औपचारिक प्रक्रिया आठ जुलाई को न्यायालय में पूरी की जाएगी। इसके लिए ये दोनों पक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। बता दें कि वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जबकि यशोधरा राजे मध्य प्रदेश में मंत्री रह चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने पर राजी हो गए हैं। समझौते का प्रार्थनापत्र ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों को राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे और 90 दिनों के भीतर पूरे विवाद का समाधान कर उसकी पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को पुनः बहाल किया जा सकता है।