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बीजेपी नेता तरुण चुघ बोले- पंजाब में बढ़ता ड्रग्स और गैंगस्टर नेटवर्क बेहद गंभीर मामला

अमृतसर  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ हाथी गेट स्थित शर्मा टी स्टाल पर चाय पर चर्चा की। पश्चिमी बंगाल में जीत के बाद पंजाब की बारी के पोस्टर लेकर भाजपाई वर्करों के साथ उन्होंने चाय की चुस्कियां ली और स्वयं चाय बनाकर लोगों दी और लड्डू भी बांटे। चुघ ने पंजाब की मौजूदा हालातों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पंजाब गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है, जहां नशा, गैंगस्टर गतिविधियां और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं आम जनता के लिए बड़ी चिंता का कारण बन चुकी हैं। पंजाब की जनता अब बदलाव चाहती है और एक मजबूत, सुरक्षित तथा विकसित पंजाब की उम्मीद कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य पंजाब को विकास की नई दिशा देना है। पार्टी व्यापार, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों को दौबारा से मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना चाहती है, ताकि युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा हो सकें और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। चुग ने सीएम भगवंत मान और आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार अपेक्षित प्रदर्शन करने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब की जनता भाजपा को अवसर देती है, तो पंजाब को नशा मुक्त और गैंगस्टर मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।  

रेलवे का बड़ा प्लान! आरा जंक्शन से होकर गुजरेंगी चार नई रेल लाइनें

आरा. दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाली दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर जल्द ही बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचे का विस्तार देखने को मिल सकता है। रेल मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरा जंक्शन होकर गुजरने वाले इस अत्यंत व्यस्त रेलखंड को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। योजना के तहत लगभग 3500 से 4000 करोड़ रुपये की लागत से दो नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही कोईलवर में सोन नदी पर देश का दूसरा चार लेन रेल पुल भी बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान दो लाइन वाले रेलखंड को चार लाइन में विकसित किया जाएगा। इसमें एक लाइन पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए, एक लाइन मालगाड़ियों के लिए तथा दो लाइन एक्सप्रेस ट्रेनों की आवाजाही के लिए निर्धारित की जाएगी। इससे ट्रेनों के परिचालन में काफी आसानी होगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा का लाभ मिल सकेगा। सोन नदी पर बनेगा नया पुल इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कोइलवर में सोन नदी पर नए रेल पुल का निर्माण है। यह पुल मौजूदा रेल पुल के समानांतर बनाया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी से पहले परियोजना की तकनीकी और व्यवहारिकता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। संभावना जताई जा रही है कि इसी माह जांच रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंप दी जाएगी। नए पुल के निर्माण के बाद पुराने और नए पुल को मिलाकर कुल चार रेल लाइनें उपलब्ध हो जाएंगी। इससे एक ही समय में तीन-तीन ट्रेनों का आवागमन संभव हो सकेगा। वर्तमान में केवल दो लाइन होने के कारण अप और डाउन दिशा में एक-एक ट्रेन ही एक समय में गुजर पाती है, जिससे ट्रेनों के परिचालन पर भारी दबाव बना रहता है। समय पालन में होगी बड़ी राहत हावड़ा-पटना-डीडीयू रेलखंड भारतीय रेल के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस रूट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियां गुजरती हैं। ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण अक्सर परिचालन प्रभावित होता है और समय पालन बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौती बन जाता है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि चार लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा। इससे मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों की गति प्रभावित नहीं होगी। वहीं लंबी दूरी की ट्रेनों को भी समय पर चलाने में सहायता मिलेगी।  आरा, पटना और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा लाभ इस परियोजना से आरा, बक्सर, बिहिया, डुमरांव और पटना सहित पूरे शाहाबाद क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। रेल ढांचे के मजबूत होने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और कम विलंब वाली ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस परियोजना को अंतिम मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट से मिलनी है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूर्व मध्य रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

गबन मामले में बड़ा एक्शन, रायपुर SDM कोर्ट ने 11 पूर्व सरपंचों को जेल भेजने के दिए आदेश

अभनपुर/रायपुर. रायपुर के अभनपुर विकासखंड के 11 पंचायतों के पूर्व सरपंचों को न्यायालय एसडीएम अभनपुर की ओर से 30 दिनों के लिए जेल भेजने का आदेश जारी किया गया है, जिससे हड़कंप मच गया है। यह आदेश उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान शासकीय राशि का गबन और उस राशि को राजकोष में जमा करने के आदेश का उल्लंघन करने पर जारी किया गया है। क्या है पूरा मामला 30 दिनों का जेल भेजने का आदेश जारी किए जाने के पहले उन सभी पूर्व सरपंचों को न्यायालय एसडीएम अभनपुर की ओर से मांग नोटिस जारी करने के साथ ही उनकी चल/अचल संपति जब्त करने की कार्रवाई भी गई थी, लेकिन इसके बावजूद संबंधित राशि चुकाने के लिए पर्याप्त साधन होने के बाद भी संबंधित पूर्व सरपंचों द्वारा गबन की गई शासकीय राशि जमा करने में हीलाहवाली किया जा रहा था। नोटिस का नहीं दिया जवाब इतना ही नहीं एसडीएम न्यायालय द्वारा सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर उन्हें उनके कृत्य के लिए क्यों न जेल भेजा जाए ? भी पूछा गया था, लेकिन किसी भी पूर्व सरपंच ने नोटिस का संतोषजनक और वैधानिक उत्तर नहीं दिया। आखिरकार 18 मई को एसडीएम न्यायालय द्वारा सभी को 30 दिन या फिर जब तक वे संबंधित राशि जमा नहीं कर देते हैं, तब तक सिविल जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश की तामिली करते हुए संबंधित पूर्व सरपंचों को जेल भेजने का पत्र संबंधित थाना प्रभारी को प्रेषित कर दिया गया है। साथ ही केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक को भी इसका पत्र भेजा गया है । इन पूर्व सरपंचों के खिलाफ जारी किया गया आदेश जिन पूर्व सरपंचों के विरुद्ध इस आशय का आदेश जारी किया गया है उनमें सेवाराम यादव (पूर्व सरपंच घोंठ ) 1 लाख 96 हजार रुपए, गोपाल ध्रुव (पूर्व सरपंच कुर्रु) 80 हजार रुपए, गोपेश ध्रुव (पूर्व सरपंच आलेखुंटा) 50 हजार रुपए, तुलसीराम बारले (पूर्व सरपंच खोला) 20 हजार 927 रूपए, रामेश्वर प्रसाद डहरिया (पूर्व सरपंच परसुलीडीह) 5 लाख 90 हजार 387 रुपए, थनवार बारले (पूर्व सरपंच पचेड़ा) 3 लाख 80 हजार रुपए, सावित्री यादव (पूर्व सरपंच गोतियारडीह) 2 लाख 47 हजार 34 रुपए, धर्मेंद्र यदु (पूर्व सरपंच चंपारण) 30 हजार 700 रुपए, राधेश्याम लहरी (पूर्व सरपंच घुसेरा) 80 हजार रुपए, तुकाराम कारले (पूर्व सरपंच भोथीडीह) 2 लाख रुपए और सेवेंद्र तारक (पूर्व सरपंच तोरला) 1 लाख 56 हजार 915 रुपए शामिल हैं। एसडीएम अभनपुर ने बताया कि अगर संबंधित पूर्व सरपंच राशि जमा कर देते हैं तो उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा ।

अपहरण के 6 दिन बाद मिली पंजाबी गायिका इंदर कौर की लाश, इलाके में हड़कंप

लुधियाना. पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशइंदर कौर (29) की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे उनका शव नीलो नहर से बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि इंदर कौर को करीब 6 दिन पहले गन प्वाइंट पर किडनैप किया गया था, जिसके बाद से परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा था। मृतका के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोगा निवासी एक युवक इंदर पर जबरदस्ती शादी करने का दबाव बना रहा था। जब इंदर ने शादी से इनकार कर दिया तो आरोपित ने उसका अपहरण कर लिया। परिवार का कहना है कि आरोपित ने हत्या की साजिश पहले से रची हुई थी और वह इसी इरादे से कनाडा से नेपाल के रास्ते पंजाब पहुंचा था। वारदात को अंजाम देने के बाद वह दोबारा नेपाल के रास्ते कनाडा फरार हो गया। परिवार ने लगाया बड़ा आरोप परिवार के अनुसार, करीब तीन साल पहले इंदर कौर की आरोपित से इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। बाद में इंदर को पता चला कि आरोपित पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। इसके बाद उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया था। इसी बात को लेकर आरोपित उससे रंजिश रखने लगा था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नहर से बाहर निकलवाकर पोस्टमॉर्टम के लिए समराला के सिविल अस्पताल भेज दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपित् की तलाश के लिए विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि इंदर कौर के माता-पिता और दो भाई कोरिया में रहते हैं, जबकि उसका एक भाई लुधियाना के जमालपुर इलाके में रह रहा है। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है।

ओबीसी आरक्षण के लिए बनेगा समर्पित आयोग, पंचायत चुनाव में अब वैज्ञानिक तरीके से तय होगा कोटा

लखनऊ उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य में पहली बार ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 'ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले' (Triple Test Formula) के तहत तय किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा एक 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया जा रहा है। सोमवार को कैबिनेट ने आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। 2021 के पंचायत चुनावों में केवल रैपिड सर्वे के आधार पर ही आरक्षण की सीटें तय कर दी गई थीं, लेकिन इस बार प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक, अनुभवजन्य और विधिक होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2023 के नगर निकाय चुनावों में पहली बार इस फॉर्मूले को आजमाया था, और अब इसे पंचायत चुनावों में भी पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। क्या है ‘ट्रिपल टेस्ट फार्मूला’ ट्रिपल टेस्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया एक कड़ा विधिक पैमाना है। शीर्ष अदालत ने पहली बार साल 2010 में 'के. कृष्णमूर्ति बनाम भारत संघ' मामले में और बाद में साल 2021 में 'विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में इस फॉर्मूले को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अनिवार्य किया था। इसके तहत राज्य सरकार को आरक्षण लागू करने से पहले तीन मुख्य शर्तों (तीन टेस्ट) को अनिवार्य रूप से पार करना होता है। 1. पहला टेस्ट: समर्पित आयोग का गठन इसके तहत राज्य सरकार को एक विशेष और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना होता है। इस आयोग का मुख्य काम स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभाव और उसकी स्थिति की समकालीन व गहन अनुभवजन्य (Empirical) जांच और अध्ययन करना है। 2. दूसरा टेस्ट: आरक्षण का सटीक अनुपात तय करना आयोग द्वारा जुटाए गए जमीनी और अनुभवजन्य आंकड़ों (Empirical Data) के आधार पर ही स्थानीय निकायवार (Local Body-wise) ओबीसी वर्ग के लिए सीटों के आरक्षण का सटीक प्रतिशत तय किया जाना चाहिए। अदालत के नियमों के मुताबिक, यह आरक्षण बिना किसी वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन के नहीं दिया जा सकता। 3. तीसरा टेस्ट: 50% की अधिकतम सीमा यह इस फॉर्मूले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी स्थानीय निकाय (जैसे कोई ग्राम पंचायत या जिला पंचायत) में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिलाकर दिया जाने वाला कुल आरक्षण किसी भी परिस्थिति में कुल सीटों के 50% से अधिक न हो। आखिर क्यों पड़ी इस कड़े फॉर्मूले की जरूरत? सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि नौकरियों और शिक्षा में मिलने वाला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत) और राजनीति या स्थानीय निकाय चुनावों में मिलने वाला प्रतिनिधित्व (अनुच्छेद 243D और 243T के तहत) दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं। राजनीतिक पिछड़ेपन को साबित करने के लिए सरकार के पास पुख्ता और समकालीन आंकड़े होने जरूरी हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि आरक्षण का वास्तविक लाभ धरातल पर मौजूद जरूरतमंदों तक पहुंचे और पूरी चुनावी प्रक्रिया संवैधानिक रूप से वैध रहे नियम यह भी है कि यदि कोई राज्य सरकार इन तीनों शर्तों (ट्रिपल टेस्ट) को पूरा किए बिना या आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराती है, तो उन ओबीसी सीटों को 'सामान्य श्रेणी' (General Category) की सीट मानकर ही चुनाव कराना होगा। यही वजह है कि यूपी सरकार अब पूरी विधिक तैयारी के साथ कदम आगे बढ़ा रही है। जून के पहले हफ्ते तक हो जाएगी आयोग में नियुक्तियां शासन स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल 6 महीने का तय किया गया है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने (मई) के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में पूरी होने की उम्मीद है। यह आयोग जमीनी स्तर पर जाकर पिछड़पेपन की प्रकृति, उसके प्रभावों की समकालीन व सतत जांच करेगा। जिन क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा और उसी के आधार पर आरक्षण की रूपरेखा तैयार होगी।

टाइगर रिजर्व में दहशत: 77 बाघों की भीड़ में दो बाघिनों का नहीं मिला सुराग

करौली राजस्थान के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 2 बाघिन के लापता होने की खबर है. बाघिन T-124 रिद्धि की बेटी RBT-2504 माही और RBT-2510 कई दिनों से गायब हैं. पिछले कई दिनों से वन विभाग की टीम दोनों बाघिनों को ढूंढने का प्रयास कर रही है. हाल ही में आरबीटी-2504 'माही' का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें बाघिन उसकी मां रिद्धि से भिड़ती दिख रही है. आरबीटी-2504 का मूवमेंट भी रणथंभौर के जोन नम्बर 2, 3 और 4 के लेक एरिया में देखा गया है, लेकिन करीब एक महीने से बाघिन कहीं नजर नहीं आ रही है. बाघिन टी-107 सुल्ताना की बेटी आरबीटी-2510 की भी कोई जानकारी नहीं है. आपसी संघर्ष के चलते बाघिन ने छोड़ा इलाका! इन दोनों बाघिन के गायब होने के पीछे आपसी संघर्ष की भी आशंका जताई जा रही है. लगातार बाघ-बाघिन की बढ़ती संख्या के चलते आपसी संघर्ष भी बढ़ गया है. ऐसे में बढ़ती संख्या के चलते टेरिटरी को लेकर बाघों के बीच संघर्ष देखा जा चुका है. ताकतवर बाघ-बाघिन के डर से कमजोर बाघ बाघिन अपना इलाका छोड़ने को मजबूर है. आखिरी बार 1 और 2 मई को देखी गई आरबीटी-2504 रणथंभौर में ना सिर्फ सर्च अभियान चलाया जा रहा है, बल्कि ट्रेप कैमरों के जरिए भी दोनों बाघिनों को ढूंढा जा रहा है. डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि वन विभाग की टीम बाघिनों की तलाश में जुटी हुई है. आरबीटी-2504 को आखिरी बार 1 और 2 मई को देखा गया था. 3 मई को आरबीटी-2504 और उसकी मां टी-124 के बीच संघर्ष हुआ. इसके बाद से ही बाघिन गायब है. हालांकि, यह पहली बार नहीं था जब दोनों के बीच आपसी संघर्ष हुआ हो. इससे पहले भी कई बार ऐसा मामला सामने आ चुका है. आखिरी बार बाघ के साथ देखी थी आरबीटी-2510 आरबीटी-2510 रणथंभौर की पेराफेरी पर रहने वाली बाघिन है. जो झूमर बावड़ी, फतेह कैफे, आमा घाटी ओर फलोदी क्षेत्र में विचरण करती थी. वह अक्सर बाघ आरबीटी-2407 के साथ देखी जाती है. उसका गायब होना भी वन विभाग को हैरान करने वाला है. आरबीटी-2407 की तलाश के लिए करीब 100 कैमरा ट्रैप बढ़ाए गए हैं. साथ ही कई दिनों की तलाश के बाद वन विभाग ने नए सिरे से योजना बनाई है. अब 5 टीमों का गठन किया गया है, जो 'ऑन फुट पेट्रोलिंग' कर रही है, ताकि बाघिन के पगमार्क के जरिए उसका पता लगाया जा सके. 55 आबादी वाले रिजर्व में 77 बाघ-बाघिन और शावक वन विभाग का मानना है कि देश का सबसे सघन आबादी वाले टाइगर रिजर्व रणथंभौर में बाघों के बीच संघर्ष होना सामान्य प्रक्रिया है. बाघ-बाघिन की संख्या बढ़ने से आपसी संघर्ष भी बढ़ेगा. अनुमानित तौर पर 45 से 55 बाघों की क्षमता वाले इस रिजर्व में 77 से भी अधिक बाघ-बाघिन और शावक हैं.

पटना कैश वैन लूटकांड का खुलासा, मुठभेड़ में एक अपराधी के पैर में लगी गोली

पटना बिहार में सम्राट चौधरी सरकार की पुलिस अपराधियों पर ताबड़तोड़ ऐक्शन ले रही है। दो दिन के अंदर राजधानी पटना में दो और सीवान में एक हाफ एनकाउंटर कर पुलिस ने अपराधियों को कड़ा संदेश दे दिया है कि अब उनकी खैर नहीं है। बिहार में रो रहे एनकाउंटर पर बिहार सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने बड़ी बात कही है। भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा है कि एनकाउंटर तो कम हुआ है अभी एनकाउंटर और होगा। भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा, 'एनकाउंटर तो कम हुआ है। अभी और करना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संकल्प लिया है कि हमको भ्रष्टाचार मुक्त और अपराध मुक्त बिहार बनाना है। चाहे इसके लिए जो कुछ करना होगा हमलोग करेंगे। पटना में एनकाउंटर पटना जिले के गोपालपुर थाना क्षेत्र में सीएमएस कंपनी की कैश वैन से हुई लूटकांड का पुलिस ने उद्भेदन करते हुए चार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा ने मंगलवार को बताया कि 13 मई 2026 को गोपालपुर थानांतर्गत सीएमएस कंपनी की कैश वैन से कुछ अज्ञात अपराधकर्मियों द्वारा हथियार का भय दिखाकर लूट की घटना को अंजाम दिया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी), पटना की निगरानी में मामले के त्वरित उद्भेदन के लिये एक टीम का गठन किया गया।वरीय पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गठित टीम द्वारा तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज के गहन अवलोकन एवं मानवीय अनुसंधान के आधार पर घटना में संलिप्त अपराधियों की पहचान की गई।इसके बाद अपराधियों की गिरफ्तारी के लिये टीम द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही थी। इसी क्रम में देर रात तीन अपराधियों को छापेमारी कर गिरफ्तार किया गया। उसके बाद मामले में संलिप्त एक और अपराधी की स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस टीम द्वारा गिरफ्तारी के लिये छापेमारी की गई। इस दौरान अपराधी द्वारा पुलिस बल पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी गई। पुलिस टीम द्वारा पूर्ण संयम एवं सतर्कता से आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक गोली अपराधी के पैर में लगी। घायल अपराधी को अभिरक्षा में लेकर तत्काल उपचार के लिये अस्पताल भेजा गया है। इससे पहले सोमवार को पटना के अगमकुआं इलाके में भी पुलिस ने एक अपराधी का हाफ एनकाउंटर किया था। इसी दिन सीवान जिले में भी एक ज्वेलरी लूट के आरोपी को पुलिस ने पैर में गोली मारी थी। कुछ ही दिनों पहले बिहार के रोहतास जिले में मौजूद मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने अपराधियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि गुंडे मवाली अपनी हरकतों से बाज नहीं आएंगे और जनता की संपत्ति लूटने का काम करेंगे तो पुलिस की राइफल पानी नहीं उगलेगी, बल्कि गोलियां उगलेगी। उन्होंने कहा था कि बिहार सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है तथा आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

खाड़ी तनाव का असर झारखंड तक, कुड़ू में तेल की भारी किल्लत और लंबी कतारें

कुड़ू खाड़ी देशों में उत्पन्न तनावपूर्ण हालात का असर अब झारखंड के लोहरदगा जिले तक दिखाई देने लगा है. कुड़ू प्रखंड में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत शुरू हो गई है. स्थिति यह है कि तीन पेट्रोल पंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जबकि एकमात्र चालू पंप पर भी सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा है. वाहन चालकों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है और कई लोग बिना तेल लिए वापस लौट रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं हो पा रही है. कहीं तीन दिनों में तो कहीं एक सप्ताह के अंतराल पर तेल पहुंच रहा है. इससे आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ने लगा है. भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल पंप बंद जानकारी के मुताबिक भारत पेट्रोलियम का नीचे स्टैंड स्थित पेट्रोल पंप सोमवार शाम करीब चार बजे तेल समाप्त होने के कारण बंद हो गया. वहीं कुंदों स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप में भी तेल खत्म होने के बाद पंप बंद कर दिया गया है. टिको स्थित इंडियन ऑयल पंप भी पिछले दो दिनों से बंद पड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि भारत पेट्रोलियम पंप में तीन दिनों बाद तेल पहुंचा था, लेकिन 24 से 25 घंटे के भीतर ही पूरा स्टॉक समाप्त हो गया. इसके बाद सोमवार दोपहर पंप परिसर में पोस्टर चस्पा कर लोगों को सूचित किया गया कि तेल उपलब्ध नहीं है. पेट्रोल पंप बंद होने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं. कई वाहन चालकों को दूसरे इलाकों में जाकर तेल भरवाना पड़ रहा है. रिलायंस पंप पर सीमित मात्रा में मिल रहा तेल फिलहाल कुड़ू में केवल रिलायंस पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है, लेकिन यहां भी तेल किस्तों में दिया जा रहा है. प्रशासन के निर्देश का हवाला देते हुए वाहन मालिकों के लिए मात्रा और समय दोनों तय कर दिए गए हैं. पंप में कार और छोटे वाहनों को अधिकतम एक हजार रुपये तक का तेल दिया जा रहा है. लंबी दूरी तय करने वाले यात्री और मालवाहक वाहनों को अधिकतम दो हजार रुपये तक डीजल मिल रहा है. ट्रैक्टर में एक हजार रुपये, बाइक में दो सौ रुपये और बुलेट बाइक में अधिकतम तीन सौ रुपये तक का पेट्रोल दिया जा रहा है. स्थिति यह है कि एक घंटे तक तेल वितरण करने के बाद पंप बंद कर दिया जाता है. इसके बाद कुछ समय बाद फिर वितरण शुरू होता है. इससे वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ गई है. तपती गर्मी में घंटों लाइन में खड़े लोग तेल की कमी के कारण रिलायंस पेट्रोल पंप में सुबह से ही वाहनों की लंबी कतार लग रही है. मंगलवार को सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक डीजल वितरण बंद रहने के कारण एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर लाइन में खड़े रहे. इसी तरह बाइक चालकों को भी तपती गर्मी में खुले आसमान के नीचे आधे घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा. कई लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि तेल की कमी से रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है, लेकिन पंप संचालक स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे हैं. हालांकि पेट्रोल पंप संचालक और कर्मचारी इस मामले में खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. प्रशासन ने बुलाई बैठक स्थिति बिगड़ने के बाद कुड़ू थाना प्रभारी अजीत कुमार ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों और उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. बैठक में लोगों की परेशानी कम करने और तेल वितरण को व्यवस्थित करने पर चर्चा की गई. थाना प्रभारी ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कमी का थोड़ा असर जरूर पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. उन्होंने कहा कि पंप संचालकों को लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनने देने के निर्देश दिए गए हैं. खेती, परिवहन और सरकारी कामकाज प्रभावित पेट्रोल-डीजल संकट का असर अब आम लोगों की जिंदगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. पिछले दिनों हुई बारिश के बाद किसान धान की खेती की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन डीजल की कमी के कारण ट्रैक्टर पर्याप्त समय तक नहीं चल पा रहे हैं. ट्रैक्टर मालिकों ने खेत जुताई का किराया भी बढ़ा दिया है. पहले जहां ट्रैक्टर पूरे दिन चलते थे, वहीं अब दिनभर में केवल दो से तीन घंटे ही काम हो पा रहा है. मालवाहक वाहन मालिकों ने बढ़ाया किराया मालवाहक वाहन मालिकों ने भी किराया बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर बाजार और आम लोगों पर पड़ रहा है. प्रखंड और अंचल कार्यालय के अधिकारियों के क्षेत्र भ्रमण पर भी असर पड़ा है. सीओ संतोष उरांव ने बताया कि डीजल की कमी के कारण नियमित क्षेत्र भ्रमण नहीं हो पा रहा है. वहीं कुड़ू थाना में भी डीजल आपूर्ति प्रभावित होने से पुलिस गश्ती और अन्य सरकारी कार्यों पर असर दिखाई देने लगा है.

अफसरशाही छोड़ जमीन पर उतरे रीवा कलेक्टर, नॉन एसी बस से गांव पहुंचकर सुनी लोगों की समस्याएं

रीवा  मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप ग्रामीणों की समस्याओं का गांव में ही निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने गंगेव जनपद पंचायत के टिकुरी गांव में ग्राम चौपाल आयोजित की। इस दौरान उन्होंने 42 विभागीय अधिकारियों के साथ पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर सूर्यवंशी नॉन एसी बस से कलेक्ट्रेट से टिकुरी पहुंचे। ग्राम पंचायत प्रांगण में आयोजित चौपाल में राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए सीमांकन में देरी पर नाराजगी जताई और नायब तहसीलदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र नियमित न खुलने की शिकायत पर संबंधित सुपरवाइजर को निलंबित करने तथा सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। चौपाल में ग्रामीणों द्वारा उठाए गए रास्ता विवाद को तत्काल सुलझाने और सड़क चौड़ीकरण के निर्देश भी कलेक्टर ने दिए, ताकि आवागमन सुगम हो सके। उन्होंने निर्देशित किया कि टिकुरी गांव में शिविर लगाकर विभिन्न विभागों के अधिकारी समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करें। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन हितग्राहियों ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया, उनके आवास निरस्त करने के निर्देश भी दिए गए।   कलेक्टर ने कहा कि उनका उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को भी अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की हिदायत दी। नल-जल योजना के सुचारू संचालन में लापरवाही मिलने पर पीएचई उपयंत्री और रोजगार सहायक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सरपंच और जनपद सीईओ को योजना जल्द शुरू कराने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने एक स्वर में पानी का शुल्क देने की सहमति भी जताई। विद्युत विभाग को घर-घर मीटर लगाने की कार्रवाई शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए। वहीं टंट्या मामा योजना के तहत पात्र हितग्राही को ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। कलेक्टर ने अंत में कहा कि यदि अब इस गांव से शिकायतें जनसुनवाई में आती हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर, जनपद सीईओ प्राची चतुर्वेदी सहित जिला एवं खंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

छात्रों को ग्लोबल अवसरों से जोड़ने की तैयारी, हरियाणा पॉलिटेक्निक में शुरू होंगी विदेशी भाषाएं

भिवानी/चंडीगढ़. हरियाणा के युवाओं के लिए अब विदेशों में करियर के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को वैश्विक स्तर से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इस शैक्षणिक सत्र से पालिटेक्निक संस्थानों में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने वाली है। इसके तहत जर्मन, जापानी, कोरियन और फ्रेंच जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाएं सिखाई जाएंगी, ताकि युवा विदेशी कंपनियों और इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। योजना के तहत प्रदेश के 39 पालिटेक्निक संस्थानों और 11 सोसायटी संस्थानों में विदेशी भाषा कोर्स संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक संस्थान में 30 से 60 सीटें निर्धारित की गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल तकनीकी डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए भी सक्षम बनाना है। प्रोफेशनल कम्युनिकेशन स्किल्स विकसित कराए जाएंगे विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से भाषा दक्षता और प्रोफेशनल कम्युनिकेशन स्किल्स विकसित कराए जाएंगे। इससे वे सीधे विदेशी कंपनियों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और इंटरनेशनल इंडस्ट्री की मांग के अनुसार खुद को तैयार कर पाएंगे। इस पहल से प्रदेश के 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी शिक्षा के साथ विदेशी भाषाओं का ज्ञान युवाओं की रोजगार क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा। हरियाणा सरकार की यह पहल प्रदेश के युवाओं के लिए सिर्फ नौकरी के अवसर नहीं, बल्कि विदेशों में करियर बनाने के सपनों को नई उड़ान देने का काम करेगी। अब हरियाणा के युवा स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर ग्लोबल मंच पर अपनी प्रतिभा साबित कर सकेंगे।