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Mother’s Day Special: सालों बाद बेटी से बात हुई तो मां बोली – मुझे पूरी दुनिया मिल गई

कानपुर  मदर्स डे का दिन एक मां के लिए तब और भी खास हो जाता है, जब उसे अपनी संतान की सलामती का सबसे बड़ा तोहफा मिले। कानपुर की दो मांओं ग्वालटोली की गीता गुप्ता और केशवपुरम की नेहा फातिमा के लिए यह दिन खुशियों का एक अलग एहसास लेकर आया है। इन दोनों मांओं की कहानी अलग जरूर है, लेकिन जीवन में खुशियों का उजाला लाने वाले एक ही हैं- एक मां की पीड़ा को महूसस कर उसका त्वरित निवारण करने वाले अत्यंत संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। ग्वालटोली की गीता गुप्ता बताती हैं, "उनकी बेटी खुशी सुन और बोल नहीं पाती थी, लेकिन आज वह पूरी तरह ठीक होने की राह पर है। जब खुशी ने पहली बार मुझे सुना, तो मुझे लगा जैसे पूरी दुनिया मिल गई। एक मां के लिए इससे बड़ी जीत क्या होगी? ये सब योगी जी की वजह से हो पाया। मेरी बेटी को सरकार की मदद से इलाज मिला। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने मेरी बेटी की खामोश दुनिया बदल दी।" गीता बताती हैं कि खुशी पुलिस की वर्दी देखकर आकर्षित होती है। उन्हें भरोसा है कि उनकी बेटी एक दिन पुलिस अफसर बनकर देश का नाम रोशन करेगी।  केशवपुरम की रहने वाली नेहा फातिमा भी बेहद ख़ुश हैं। उनकी 5 साल की मासूम बेटी मायरा फातिमा अब स्कूल जाती है। नेहा ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, "आज जब मैं मायरा को कॉपी-किताबों के साथ स्कूल जाते देखती हूं, तो मेरा दिल भर आता है। यह सब योगी जी के स्नेह और उनकी सरकार की मदद की वजह से मुमकिन हो पाया।" नेहा ने अपनी बेटी की एक प्यारी बात साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब बच्ची से मुलाकात की थी, तब उसे चॉकलेट दी थी। आज भी जब किसी का फोन आता है, तो मायरा चहकते हुए पूछती है- "उन्हीं अंकल का कॉल आया है, जिन्होंने मुझे चॉकलेट दी थी?" नेहा के लिए अपनी बेटी को दूसरे बच्चों की तरह अच्छे स्कूल में पढ़ते देखना मदर्स डे का सबसे अनमोल उपहार है।

अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में निकाय चुनाव बने प्रतिष्ठा की लड़ाई, हरियाणा में नेताओं की पूरी ताकत झोंकी

 चंडीगढ़  नगर निगम और नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गए हैं। अंबाला, सोनीपत, पंचकूला, सांपला और उकलाना में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हैं तो कहीं विकास बनाम भ्रष्टाचार और बदहाली चुनावी केंद्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक कई बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। उकलाना में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का प्रभाव और कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, ऐसे में भाजपा के लिए यह किला भेदना आसान नहीं माना जा रहा। भाजपा ट्रिपल इंजन सरकार और विकास कार्यों को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ चुनाव मैदान में है। अब सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी। कुछ जगह निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं। सोनीपत नगर निगम चुनाव में भाजपा विकास माडल और ट्रिपल इंजन सरकार को मुद्दा बनाकर प्रचार कर रही है, जबकि कांग्रेस नगर निगम कार्यालय में प्रॉपर्टी आइडी, भ्रष्टाचार और शहर की बदहाल व्यवस्था को चुनावी केंद्र बना रही है। भाजपा प्रत्याशी राजीव जैन अपने नौ महीने के कार्यकाल और सरकार के समर्थन को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। उनके समर्थन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, सांसद मनोज तिवारी और कई मंत्री प्रचार कर चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी कमल दिवान के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर और अन्य नेता मैदान में उतरे। कांग्रेस पेयजल, सड़क, सीवर, स्ट्रीटलाइट और सफाई व्यवस्था को मुद्दा बना रही है। चुनाव में शहरी मतदाताओं के साथ निगम क्षेत्र में शामिल गांवों के वोट भी अहम माने जा रहे हैं। पंचकूला: संगठनात्मक ताकत और पलायन के असर की परीक्षा पंचकूला नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी श्यामलाल बंसल के समर्थन में मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता प्रचार में पहुंचे। भाजपा ने कई आजाद उम्मीदवारों को अपने पक्ष में बैठाकर चुनावी माहौल मजबूत करने का प्रयास किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज को संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के भाजपा में जाने से नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन के सहारे चुनाव मैदान में सक्रिय रही। यहां इनेलो और आम आदमी पार्टी भी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा 2020 की जीत दोहराने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क के भरोसे चुनाव लड़ रही है। सांपला पालिका: हुड्डा के प्रभाव क्षेत्र में भाजपा की परीक्षा रोहतक जिले की सांपला नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय निकाय से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा संगठन और उसके नेता प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि चुनावी गतिविधियों पर प्रदेश स्तर तक लगातार नजर रखी गई। भाजपा इस चुनाव को हुड्डा प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित खेमे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी रोड शो, नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क के जरिए पूरी ताकत लगाई। चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ राजनीतिक साख की लड़ाई भी खुलकर दिखाई दी। ननपा क्षेत्र के 15 हजार 624 मतदाता चेयरमैन पद के 10 और वार्डों के 53 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। उकलाना पालिका: कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने की चुनौती हिसार जिले की उकलाना नगरपालिका चुनाव इस बार भाजपा के लिए राजनीतिक परीक्षा बन गया है। विधानसभा क्षेत्र में अब तक भाजपा को सफलता नहीं मिली है और यहां कांग्रेस का प्रभाव माना जाता रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का ये गृहक्षेत्र है ऐसे में भाजपा ने पहली बार चुनाव चिह्न पर वरिष्ठ नेता एवं वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के पूर्व चेयरमैन श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधु निकिता गोयल को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी को कांग्रेस, इनेलो और आम आदमी पार्टी का समर्थन मिला हुआ है। रीमा पूर्व पार्षद की बेटी हैं। चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पहुंचे, जबकि कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल और अन्य नेताओं ने भी पूरी ताकत झोंकी। पूर्व मंत्री अनूप धानक भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में सक्रिय रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में लिया हिस्सा, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए की विशेष पूजा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ समाज में भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी देते हैं। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

सतलोक आश्रम मामले में बड़ा अपडेट, रामपाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की अर्जी लगाई

 हिसार पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने देशद्रोह मामले में जमानत पर रिहा हुए सतलोक आश्रम संचालक रामपाल ने अदालत में भविष्य की पेशियों को लेकर एक अर्जी लगाई है। रामपाल ने अधिवक्ता के माध्यम से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैस्मीन शर्मा की अदालत में अर्जी देकर आगामी तारीखों पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी है। अदालत ने इस पर पुलिस से 16 मई को जवाब मांगा है। सतालोक आश्रम संचालक रामपाल और उसके समर्थकों के खिलाफ बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में साल 2014 में हुई हिंसा और प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आश्रम में टकराव हुआ था उस समय पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आश्रम में टकराव हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी और पुलिस-प्रशासन को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। उसके बाद रामपाल व अन्य के खिलाफ देशद्रोह समेत विभिन्न आपराधिक धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। इस संबंध में रामपाल के अधिवक्ता महेंद्र सिंह नैन ने बताया कि अदालत में दायर अर्जी में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वीसी के माध्यम से अदालत में पेश होने की अनुमति देने की मांग की है। अदालत ने पुलिस से जवाब-तलब किया है। हाल ही में रिहा हुआ है रामपाल बता दें कि रामपाल लंबे समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में हाई कोर्ट से जमानत पर रिहा हुआ है। 16 मई को होने वाली सुनवाई पर पुलिस का पक्ष सुनने के बाद अदालत अपना फैसला देगी। पुलिस ने रामपाल को 19 नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया था। 8 दिसंबर 2014 से न्यायिक हिरासत जेल में भेजा था। हाई कोर्ट ने आठ अप्रैल 2026 को रामपाल की नियमित जमानत याचिका स्वीकार की थी। रामपाल चार आपराधिक मामलों में जिला अदालत से बरी हो चुका है, जबकि हत्या के दो मामलों की मिली उम्रकैद की सजा को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने निलंबित किया हुआ है।

रांची में कर्मचारी पेंशन विवाद, हाई कोर्ट ने सरकार की कार्यशैली पर जताई नाराजगी

रांची  झारखंड हाई कोर्ट में गुमला जिला के बैजनाथ जालान कालेज, सिसई के तृतीय वर्गीय कर्मचारी दिनेश साहू को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाने के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने उच्च शिक्षा निदेशक की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जब समान परिस्थितियों वाले दूसरे कर्मियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ दिया जा चुका है, तो प्रार्थी को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा को निर्देश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर मामले की पुनः समीक्षा कर दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान सुनिश्चित करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में निर्धारित करते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया था कि विभाग ने सकारण आदेश पारित कर प्रार्थी को एकल पीठ के आदेश के अनुरूप लाभ नहीं देने का निर्णय लिया है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उस सकारण आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दिनेश साहू का मामला उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों के मामले के समान है। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी का समायोजन और नियमितीकरण भी उसी पत्र के आधार पर हुआ था, जिसके आधार पर उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों को लाभ मिला। इसलिए दिनेश साहू को भी वही लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रार्थी के मामले में सरकार ने अब तक कोई अपील दाखिल नहीं की है, जबकि उपेंद्र प्रसाद मामले में अपील समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं होने के कारण खारिज हुई थी। इसका हवाला देकर प्रार्थी के मामले को लंबित रखना अनुचित है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि दिनेश साहू वर्ष 2022 में बैजनाथ जालान कालेज, सिसई (गुमला) से तृतीय वर्गीय कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें फिलहाल प्रोविजनल रूप से पंचम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। उनकी सेवा समायोजन और नियमितीकरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में वर्ष 2005 और 2007 में हुआ था। दिनेश साहू के मामले में सरकार ने एकल पीठ के आदेश को कभी चुनौती ही नहीं दी। बता दें कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2024 में ही दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल की है।

खिलाड़ियों को सीएम की सीख: बैडमिंटन की तरह अपने सपनों को गिरने न दें

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों को जीवन का मूलमंत्र दिया। कहा कि बैडमिंटन-टेबल टेनिस में एकाग्रता व त्वरित निर्णय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खेल के माध्यम से सीखे गए स्किल आपदा प्रबंधन के साथ ही विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने को तैयार करते हैं। हर मेडल के पीछे संघर्ष और कभी हार न मानने के संकल्प की कहानी होती है। टैलेंट शुरुआत देता है, लेकिन मेहनत हमें लक्ष्य तक पहुंचाती है। जितना पसीना बहेगा, जीत उतनी ही बड़ी होगी। खेल गिरना, उठना और जीतना सिखाता है। बैडमिंटन में शटल कॉक को नहीं गिरने देते, वैसे ही जीवन में सपनों और हौसलों को टूटने नहीं देना चाहिए। जैसे हर खेल में स्टेप व शॉट का ध्यान जरूरी है, वैसे ही जीवन में निरंतर सुधार व अनुशासन के साथ लगातार किए जाने वाले प्रयास का परिणाम भी बेहतर तरीके से प्राप्त होता है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बाबू बनारसी दास यूपी बैडमिंटन एकेडमी गोमतीनगर में द्वितीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन क्लस्टर (बैडमिंटन- टेबल टेनिस) प्रतियोगिता 2025-26 का शुभारंभ किया। सीएम ने बैडमिंटन भी खेला और स्मारिका का विमोचन किया। कपिल चौधरी ने खिलाड़ियों को शपथ दिलाई। यूपी में खेल व खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। 35वीं वाहिनी पीएसी के बैंड ने मधुर स्वर लहरियां प्रस्तुत कीं।  स्वस्थ शरीर के लिए खेलकूद को जीवन का हिस्सा बनाएं सीएम योगी ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश में हो रहे पांच दिवसीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन कलस्टर में लगभग 1400 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। भारत में खेल व इसकी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की परंपरा प्राचीन काल से ही रही है। जीवन के जितने भी साधन हैं, वह स्वस्थ शरीर से ही संभव हो सकते हैं। स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है कि दैनिक कार्यक्रमों के साथ खेलकूद की गतिविधियों को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, धनुर्विद्या, मलखंभ, तलवारबाजी, शतरंज प्राचीन काल से ही जीवन का हिस्सा रहे हैं। सीएम ने अखाड़ा शब्द की व्याख्या करते हुए, बताया कि ज्ञान की परंपरा व शरीर को स्वस्थ रखने की कला को जिस क्षेत्र विशेष में प्रदर्शित किया जाए, वही अखाड़ा है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ मस्तिष्क से स्वस्थ चरित्र का निर्माण करके राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान सुनिश्चित करना उस अभियान का हिस्सा बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।  एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं अर्जुन सीएम ने प्राचीन धर्मग्रंथों की चर्चा कर अर्जुन का भी उल्लेख किया। कहा कि अर्जुन एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं। मल्लयुद्ध की बात करते हैं तो बलराम जी व भीम जी का स्मरण हो जाता है। बलराम मतलब शक्ति और संतुलन का प्रतीक। गदायुद्ध में शक्ति, रणनीति व पराक्रम भी है। डबल इंजन सरकार इन प्राचीन विधाओं से प्रेरणा प्राप्त कर खेल के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से बढ़ा रही है।  खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पुस्तकों में मिलना कठिन होता सीएम योगी ने कहा कि 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पाठ्य पुस्तकों में मिलना कठिन होता है क्योंकि खेलकूद के बारे में जो व्यावहारिक रणनीति बताई जाएगी, वह सैद्धांतिक रूप से पुस्तकों में मिलना कठिन होता है। खेल के मैदान में अनुशासन, दृढ़संकल्प और समर्पण के बारे में खिलाड़ी को तैयार किया जाता है और उसके माध्यम से ऐसे व्यक्तित्व को तराशने का कार्य होता है, जो राष्ट्र को सशक्त, सुरक्षित और विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।  11 वर्ष में देश में नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का हुआ क्रियान्वयन सीएम ने कहाकि हम लोगों ने पीएम मोदी के विजन को यूपी में प्रभावी ढंग से लागू करने में सफलता हासिल की। 11 वर्ष में देश के अंदर नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सभी ने देखा है। खेल ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ व राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बना है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट, सांसद/विधायक खेलकूद प्रतियोगिता, यूपी में ग्रामीण लीग आदि प्रतियोगिताएं समाज के अंतिम पायदान पर बैठे खिलाड़ियों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रही हैं। इसी का परिणाम है कि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स व विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिभाग बढ़ा है और हमें अभूतपूर्व सफलता भी मिल रही है।  2017 के पहले प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ती थीं प्रतिभाएं सीएम ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में नाममात्र के स्टेडियम थे, इनमें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं। उनका उचित रखरखाव तक नहीं था। ट्रैक टूटे और स्वीमिंग पुल सूखे थे। खिलाड़ी उपेक्षित और कुशल खिलाड़ी कार्यालय-कार्यालय भटकने को मजबूर थे। प्रतिभाएं प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ने को मजबूर होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश ने आज कुशल खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती, पदोन्नति व नकद पुरस्कार की पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। सीएम ने खिलाड़ियों के लिए किए कार्यों को गिनाया सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने खिलाड़ियों के लिए नौकरियों में दो प्रतिशत हॉरिजेंटल रिजर्वेशन की व्यवस्था की है। खेल अब केवल शौक, टाइमपास नहीं बल्कि सम्मानजक कैरियर बन रहा है। हमारी सरकार इसकी गारंटी भी दे रही है।

पटना में डिप्टी सीएम पद को लेकर भ्रम, विजय कुमार चौधरी ने बताया- पद समाप्त नहीं हुआ

 पटना  उप मुख्यमंत्री से जुड़ी मंत्रिमंडल विभाग की अधिसूचना को लेकर इंटरनेट मीडिया पर बहस चल रही है। यूजर प्रश्न पूछ रहे हैं-क्या राज्य में उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त हो गया है? विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने साफ किया-उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं हुआ है। वह कायम है। हरेक अधिसूचना में पदनाम का उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है। 7 मई की अधिसूचना पर शुरू हुई चर्चा बहस की शुरुआत सात मई की अधिसूचना से हुई है। इसमें मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विभागों को अधिसूचित किया गया है। पदनाम में मुख्यमंत्री और मंत्री लिखा हुआ है। विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के साथ उप मुख्यमंत्री पदनाम का उल्लेख नहीं है। इन दोनों का नाम भी मंत्रियों की श्रेणी में है। नाम के साथ विभागों का विवरण दिया गया है। विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने पूछने पर बताया कि 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री के अलावा दो उप मुख्यमंत्रियों का शपथ ग्रहण हुआ था। उस दिन जारी अधिसूचना में दोनों के पदनाम उप मुख्यमंत्री दिए गए हैं। वही मान्य है। वैसे, सोशल मीडिया के यूजर इस तर्क से सहमत नहीं हैं। वे पिछले साल के 21 नवंबर को जारी इसी विभाग की अधिसूचना का हवाला दे रहे हैं। डिप्‍टी सीएम के रूप में व‍िजय कुमार स‍िन्‍हा का नाम उसमें तत्कालनीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा के नाम के सामने उप मुख्यमंत्री लिखा हुआ है। वैसे संविधान में उप मुख्यमंत्री के पद का उल्लेख नहीं है। उसमें मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य पदधारक मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री आदि की चर्चा है। आज भी मुख्यमंत्री को छोड़ कर मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य मंत्री पद की ही शपथ लेते हैं। मुद्रण की भूल हो सकती है: उप मुख्यमंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नाम के साथ पदनाम का जिक्र नहीं होना मुद्रण की भूल हाे सकती है।विभाग वाले इसमें सुधार कर लेंगे।

रांची में फीस वसूली पर कार्रवाई, रांची के स्कूलों को चेतावनी

 रांची  जिले के निजी स्कूलों पर शुल्क वसूली और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) गठन को लेकर सख्ती बरतते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने 16 सीबीएसई- 2 आईसीएसई स्कूलों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों ने वार्षिक फीस स्ट्रक्चर और (पीटीए) का विवरण नहीं दिया है, उनके खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि एडमिशन व एनुअल चार्ज के नाम पर वसूले गए शुल्क को इस वर्ष की मासिक फीस में समायोजित करने का एक्शन प्लान 10 से 15 दिनों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा जाए। यह निर्देश रांची के मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में दिए गए। बैठक में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रतिनिधियों ने शिरकत की। उपायुक्त ने (पीटीए) गठन की समीक्षा की, जिसमें बताया गया कि जिले के कुल 149 सीबीएसई- आईसीएसई स्कूलों में से 131 ने अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन कर लिया है। शेष 18 स्कूलों ने अभी तक जानकारी नहीं दी है। इनमें से दो स्कूलों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही, बैठक में अनुपस्थित स्कूलों की कार्यात्मक स्थिति की जांच के आदेश भी दिए गए। बैठक का मुख्य फोकस स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और वार्षिक शुल्क वसूली पर रहा। चर्चा में पाया गया कि कई स्कूल प्रबंधन (आरटीई) राइट-टू-एजुकेशन नियमों का उल्लंघन करते हुए नर्सरी से 12वीं तक 37 से 106 प्रतिशत तक वार्षिक शुल्क बढ़ा रहे हैं। उपायुक्त ने जोर देकर कहा कि फीस संरचना तर्कसंगत, पारदर्शी और अभिभावक अनुकूल होनी चाहिए, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने स्कूलों को निर्देशित किया कि स्कूल बस चालकों की पूरी जानकारी शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे प्रशासन ड्राइवर का सत्यापन कर सके। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत कमजोर वर्ग के 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन के दिशा-निर्देश भी दोहराए गए। उपायुक्त ने चिंता जताई कि कुछ स्कूल टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जारी करने के लिए 25 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जो चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। जिला प्रशासन शिक्षा क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता चाहता है। नए सत्र के लिए शीघ्र बीपीएल बच्चों की लाटरी आयोजित की जाएगी। एक्शन प्लान पर अगले 10 दिनों में साक्षात्कार या ऑनलाइन बैठक होगी। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्कूल प्रतिनिधियों से अपील की कि अभिभावकों के हित में नियमों का पालन करें। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस पहल से रांची के अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन परिवारों को जो महंगी फीस से जूझ रहे हैं। बैठक में यह पाया गया कि राइट टू एजुकेशन एक्ट का उलंघन कर सभी 149 निजी स्कूलों ने प्रति वर्ष वार्षिक शुल्क बढ़ाया है। जिनमें केवल 2 वर्षों में वार्षिक शुल्क 10 प्रतिशत बढ़ानी हैं। इसपर स्कूल प्रबंधन ने अपना जवाब में पुन: विचार करने का आश्वासन दिया। इसी दौरान जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री उपस्थित सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य व प्रतिनिधियों को सेंसस 2027 के अंतर्गत पोर्टल के माध्यम से स्वगणना करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है, इसके लिए बच्चों को भी जानकारी दें ताकि वो अपने माता-पिता अभिभावक को डिजिटल माध्यम से स्वगणना करने को कहें। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज द्वारा बताया गया कि स्व-गणना अंतर्गत आनलाइन पोर्टल (एसई डाट सेंससडाट जीओभी डाट इन ) (se.census.gov.in) के माध्यम से स्वयं अपने परिवार व आवास संबंधी जानकारी आनलाइन उपलब्ध कराया जा सकता है। ये हैं बैठक में अनुपस्थित स्कूल जिन्हें किया गया शोकाज नोटिस     वाईबीएन पब्लिक स्कूल मैक्लुस्कीगंज     संत कोलंबस मूरबू     कैंब्रियन पब्लिक स्कूल रांची     सेंट्रल एकैडमी कांके     शाईन वैली स्कूल     रायल प्रोग्रेस स्कूल डकरा     झारखंड पब्लिक स्कूल डकरा     कैंब्रियन बीजूपाड़ा     सचिदानंद पब्लिक स्कूल डोरंडा     स्टार इंटरनेशनल स्कूल नगड़ी     एलए गार्डन स्कूल सामलोंग     छोटानागपुर पब्लिक स्कूल     आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली     सरस्वती शिशु विद्या मंदिर डकरा     सेंट्रल एकेडमी बरियातू     बलदेव पब्लिक स्कूल     उर्सुलाईन सिल्ली मूर     माउंट कार्मेंल ओरमाझी  

बिहार के रोहतास में औद्योगिक पुनर्जागरण की तैयारी, डालमियानगर रेल कारखाने को मिला बजट

 रोहतास  डालमियानगर औद्योगिक परिसर में चार दशक से पसरा अंधेरा अब छंटने की उम्मीद जगी है। रेलवे द्वारा 430.20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक औद्योगिक परिसर के गुलजार होने की संभावना बढ़ गई है। कभी देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाला डालमियानगर औद्योगिक परिसर स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। ले‍क‍िन वर्तमान में यहां सन्‍नाटा है। एश‍िया के बड़े औद्योग‍िक समूह में थी गिनती एक समय एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक परिसरों में शामिल रोहतास उद्योग समूह का यह क्षेत्र दुधिया रोशनी से जगमगाता था, लेकिन वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह में तालाबंदी के बाद यहां सन्नाटा और अंधेरा छा गया। वर्ष 2007 से परिसमापन की प्रक्रिया में चल रहे रोहतास उद्योग समूह को रेलवे ने करीब 240 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि इस क्षेत्र की औद्योगिक पहचान फिर लौटेगी। लोकसभा चुनाव 2009 से पहले तत्कालीन रेलमंत्री Lalu Prasad Yadav ने यहां रेल वैगन मरम्मत कारखाने का शिलान्यास किया था। उस समय लोगों को लगा कि डालमियानगर के अच्छे दिन लौट आएंगे, लेकिन यूपीए-2 सरकार के दौरान यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। प्रधानमंत्री से मिलकर की गई मांग वर्ष 2015 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन सांसद Upendra Kushwaha और शाहाबाद क्षेत्र के अन्य सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर यहां रेल कारखाना स्थापित करने की मांग उठाई। जून 2017 में रेल मंत्रालय में हुई बैठक में राइट्स को यहां रेल वैगन मरम्मत एवं कपलर कारखाना स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए बजटीय प्रावधान भी किया। वर्ष 2018 में परिसर के कबाड़ की नीलामी 94 करोड़ रुपये से अधिक राशि में की गई। प्रस्तावित रेल कारखाने के लिए चिह्नित 219 एकड़ भूमि से कबाड़ हटाकर उसे समतल भी कर दिया गया। डीएफसीसी निर्माण बना बाधा इस परियोजना के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (DFCC) का निर्माण बड़ी बाधा बन गया। प्रस्तावित रेल वैगन मरम्मत कारखाने के समीप से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कारण रेल लाइन ले जाना मुश्किल हो गया। रेलवे ने वर्ष 2020 में बजटीय प्रावधान होने के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई। इसके बाद राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रयास किया। उन्‍होंने रेलमंत्री अश्‍वि‍नी वैष्‍णव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद पहलेजा रेलवे स्टेशन के पास से फ्लाईओवर के जरिए डालमियानगर तक रेलवे ट्रैक ले जाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा गया। अब रेलवे ने वर्ष 2026-27 के रेल बजट में डालमियानगर रेल वैगन मरम्मत कारखाने के लिए 430.20 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इससे इलाके के लोगों में एक बार फिर औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद जाग उठी है।  

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां को नमन कर साझा की भावुक तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

पटना  मातृ दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भावुक संदेश और वीडियो साझा कर अपनी मां को याद किया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने मातृत्व की महत्ता, त्याग और संस्कारों की भावना को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया। माता को नमन करती तस्‍वीर की साझा मुख्यमंत्री ने अपनी दिवंगत माता पार्वती देवी को नमन करते हुए एक तस्वीर भी साझा की। तस्वीर पर लिखा था, मां ही पहली गुरु, पहली मित्र और ईश्वर का सबसे सुंदर स्वरूप है। एक मां का स्नेह, त्याग और आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके साथ उन्होंने समस्त मातृशक्ति को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि ईश्वर से उनकी प्रार्थना है कि सभी माताएं सदैव स्वस्थ, सुखी और सम्मानित रहें। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, ममता और संस्कारों की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। वह बिना किसी अपेक्षा के अपना पूरा जीवन परिवार और बच्चों के लिए समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। 2022 में हो गया था सम्राट चौधरी की माता का निधन मुख्यमंत्री का यह भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी भावनाओं की सराहना करते हुए अपनी माताओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी की माता पार्वती देवी का वर्ष 2022 में निधन हो गया था। वे वर्ष 1998 के उपचुनाव में समता पार्टी के टिकट पर विधायक भी चुनी गई थीं। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका को आज भी याद किया जाता है।