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राजस्थान में साइबर सुरक्षा पर बड़ा कदम, AI आधारित कंट्रोल सेंटर और हेल्पलाइन कॉल सेंटर की होगी शुरुआत

जयपुर राजस्थान के सभी जिलों में साल 2030 तक साइबर पुलिस स्‍टेशन स्थापित किए जाएंगे. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में लोक अभियोजकों और विशेष लोक अभियोजकों के लिए आयोजित कार्यशाला के दौरान इसका ऐलान किया है. इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल ने बढ़ते डिजिटल अपराधों को देखते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों की साइबर सुरक्षा को लेकर अत्यंत गंभीर है. उन्होंने बताया कि सरकार साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की स्थापना करने जा रही है. बनेगा साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर इसके साथ ही, अब साइबर अपराधों का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यवस्था और एक समर्पित साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर भी विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तीनों नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है. पुलिस और अभियोजन को इन कानूनों की पूरी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. साथ ही, हमारी सरकार ने 42 न्यायालय स्थापित किए हैं. हमने फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, बाड़मेर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ एवं सलूंबर में जिला एवं सेशन न्यायालय और बड़ी सादड़ी एवं केशोरायपाटन में नियमित अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय स्थापित किए हैं. साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब की हुई स्थापना मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों की साइबर सुरक्षा को लेकर भी अत्यधिक सजग है. हमारी सरकार ने साइबर खतरों से बचाव के लिए साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब की स्थापना की है. ऑपरेशन साइबर शील्ड चलाकर साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही करने का काम किया है. इसके अलावा लगभग 10 हजार साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 12 लाख से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया. उन्होंने आगे बताया कि हमारी सरकार ने राज्य के समस्त पुलिस थानों पर साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं और वर्ष 2030 तक समस्त जिलों में साइबर पुलिस स्‍टेशन स्थापित किए जाएंगे. सरकार डिजिटल अरेस्‍ट सहित अन्य साइबर अपराधों पर नियंत्रण और रोकथाम के लिए राजस्‍थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की भी स्थापना करने जा रही है. राज्य सरकार साइबर अपराधों के एआई आधारित विश्लेषण तथा साइबर हेल्‍पलाइन कॉल सेंटर की व्यवस्था करेगी.

यूपी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, स्मार्ट मीटर हटे, हर महीने आएगा सामान्य बिजली बिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने काफी हंगामा मचने के बाद अब प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर को वापस लेना शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी वितरण कंपनियों को प्रदेश भर में लाखों उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड बिल मॉडल बहाल करने की निर्देश दिया है। सरकार ने यह फैसला अनिवार्य प्रीपेड रिचार्ज, अचानक कनेक्शन काटने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी कथित बिलिंग अनियमितताओं को लेकर उपभोक्ताओं, व्यापारियों और किसान समूहों के महीनों के विरोध प्रदर्शन और शिकायतों के बाद लिया है। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख वितरण निगमों- पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों, साथ ही आरडीएसएस के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों पर लागू होता है। उपभोक्ताओं के लिए अब क्या? रिचार्ज करने की जरूरत नहीं सरकार के इस कदम से अब उपभोक्ताओं को अपने बैलेंस को पहले से रिचार्ज करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन्होंने जितनी बिजली खर्च की, उसका हर माह बिल आएगा, बिल्कुल पहले की तरह। यानी आपने मई में बिजली खर्च की है तो आपको बिल जून में देना होगा। बिलिंग कैसे होगी? नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर के बिल हर माह 10 तारीख तक तैयार किए जाएंगे और यह एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाएंगे। उपभोक्ता आधिकारिक व्हाट्सऐप चैटबोट और 1912 बिजली हेल्पलाइन के माध्यम से भी बिल देख सकेंगे। जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के दिक्कत है और जहां महीने की पांच तारीख तक ऑटोमैटिक रीडिंग नहीं मिलती, वहीं मीटर रीडिंग एजेंसियां बिलिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए मैन्युअल रीडिंग करेंगी। कैसे काम करेगी नई भुगतान प्रणाली? सरकार ने बताया कि उपभोक्ताओं को बिल जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर बिल जमा नहीं किया तो सात दिन के भीतर बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद बकाया बिल पर विलंब शुल्क यानी लेट फीस भी लगेगी। बकाया राशि का निपटान ब्याज दरों में छूट के साथ-साथ बकाया राशि में राहत की घोषणा की है। घरेलु उपभोक्ताओं को चार किस्तों में राशि चुकाने की अनुमति दी जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा, “जब पोस्टपेड उपभोक्ताओं को प्रीपेड में बदला गया, तो उनकी पिछली सुरक्षा राशि बिल में जोड़ दी गई। 6 मई के आदेश के अनुसार, उपभोक्ताओं से मौजूदा लागत मानदंडों के अनुसार नई सुरक्षा जमा राशि जमा करने की अपेक्षा की गई थी। हालांकि, हमने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि इससे उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “अब यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ली गई सुरक्षा राशि पहले की गणनाओं पर आधारित होगी और किश्तों में वसूल की जाएगी।” 15 मई से लगेगा विशेष शिविर शिकायतों के निवारण के लिए यूपीपीसीएल ने सभी डिस्कॉम को 15 मई से 30 जून के बीच कार्यकारी अभियंता और उपखंड कार्यालयों में विशेष स्मार्ट मीटर शिकायत शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इन शिविरों में बिल संबंधी विवाद, मोबाइल नंबर में सुधार, मीटर रीडिंग संबंधी शिकायतें, स्मार्ट मीटर में परिवर्तन से संबंधित मुद्दे और खाता मिलान जैसे मामलों को निपटाया जाएगा।

रमा निषाद बनीं बिहार सरकार की सबसे अमीर मंत्री, करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

पटना बिहार सरकार के 10 मंत्री मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अधिक अमीर हैं। सीएम सहित 35 मंत्रियों में 32 करोड़पति हैं। केवल तीन ही मंत्री लखपति हैं। सबसे अधिक धनी भाजपा कोटे की पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद हैं जबकि सबसे कम संपत्ति वाले लोजपा आर कोटे के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास 6.38 करोड़ की संपत्ति है। महिला मंत्रियों की औसत संपत्ति पुरुष मंत्रियों से तीन गुना अधिक है। सरकार में पांच महिला मंत्री हैं। इनकी औसत संपत्ति 16 करोड़ से अधिक है। वहीं पुरुष मंत्रियों की औसत संपत्ति 4.68 करोड़ है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष पांच स्थान पर रहे मंत्रियों के पास मंत्रिमंडल की कुल संपत्ति का 46 फीसदी है। सभी मंत्रियों की कुल संपत्ति 220.89 करोड़ है। पांच शीर्ष मंत्रियों के पास 102 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। जबकि पांच सबसे गरीब मंत्रियों के पास सिर्फ 3 करोड़ 63 लाख की संपत्ति है। रमा सबसे अमीर, श्वेता दूसरे स्थान पर सबसे अधिक अमीर मंत्री रमा निषाद के पास 31.86 करोड़ की संपत्ति है। दूसरे स्थान पर डॉ. श्वेता गुप्ता हैं, जिनके पास 29.24 करोड़ की संपत्ति है। तीसरे स्थान पर अशोक चौधरी हैं, जिनके पास 22.39 करोड़ की संपत्ति है। अन्य मंत्रियों में शीला कुमारी के पास 9.50 करोड़, डॉ. दिलीप जायसवाल के पास 9.33 करोड़, शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के पास 9.25 करोड़, विजय कुमार सिन्हा के पास 8.81 करोड़, श्रेयसी सिंह की 7.62 करोड़ तो दामदोर रावत के पास 6.70 करोड़ की संपत्ति है। कुमार शैलेन्द्र के पास 6.68 करोड़ संपत्ति है।

उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार पर मुहर, जातीय समीकरण साधने में जुटी बीजेपी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने सबसे बड़े राजनीतिक दांव की तैयारी में जुट गई है. लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर आखिरकार मुहर लग गई है और आज रविवार दोपहर लखनऊ के लोकभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी. योगी कैबिनेट में इस समय छह पद खाली हैं और माना जा रहा है कि इन सभी सीटों को भरा जाएगा. खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े प्रयोग के बजाय सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर फोकस रखा गया है. बीजेपी ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोधी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति पर काम करती दिख रही है. यही वजह है कि जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे अलग-अलग सामाजिक समूहों से हैं. योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार देर रात सभी संभावित मंत्रियों से मुलाकात कर अंतिम चर्चा कर ली है. मौजूदा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल की प्रोन्नति लगभग तय मानी जा रही है. पश्चिम यूपी से आने वाले सोमेंद्र तोमर को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है, जबकि पाल बिरादरी से आने वाले सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अजीत पाल का भी कद बढ़ाया जा सकता है. वहीं नए चेहरों में कन्नौज के तिर्वा से विधायक और लोधी समाज के नेता कैलाश राजपूत को मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है. अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक और वाल्मीकि समाज से आने वाले दलित नेता सुरेंद्र दिलेर भी नए मंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं. मनोज पांडेय: सपा से BJP तक, अब कैबिनेट की दहलीज पर रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय का नाम लगभग तय माना जा रहा है. कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाकर बीजेपी का समर्थन किया और बाद में भगवा खेमे के साथ खुलकर खड़े नजर आए. मनोज पांडेय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर बीजेपी के लिए अहम माने जा रहे हैं. राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके मनोज पांडेय का लंबा राजनीतिक अनुभव है. 2012 और 2017 में ऊंचाहार सीट से जीत हासिल कर चुके पांडेय अब बीजेपी के ब्राह्मण समीकरण को मजबूत करने वाले चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं. भूपेंद्र चौधरी: पश्चिम यूपी का बड़ा जाट चेहरा मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. आरएसएस से राजनीति की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौधरी साल 1989 में बीजेपी में शामिल हुए थे. संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे यूपी बीजेपी अध्यक्ष भी बने. जाट समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पश्चिमी यूपी में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. कृष्णा पासवान: पासी समाज की मजबूत महिला चेहरा फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है. पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान बीजेपी की पुराने दलित चेहरों में शामिल हैं. उन्होंने कई बार चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है. 2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को करीबी मुकाबले में हराया था. बीजेपी दलित वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए पासी समाज को प्रतिनिधित्व देना चाहती है. इसी रणनीति के तहत कृष्णा पासवान का नाम आगे बढ़ाया गया है. हंसराज विश्वकर्मा: अति पिछड़े वर्ग पर BJP की नजर वाराणसी से एमएलसी और बीजेपी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है. विश्वकर्मा समाज पूर्वांचल की अहम अति पिछड़ी बिरादरी मानी जाती है. हंसराज विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है. बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव OBC वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में विश्वकर्मा समाज को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी पूर्वांचल और अति पिछड़े वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है.   सुरेंद्र दिलेर: वाल्मीकि समाज से नया दांव हाथरस से आने वाले सुरेंद्र सिंह दिलेर का नाम वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के तौर पर चर्चा में है. उनका राजनीतिक परिवार लंबे समय से सक्रिय रहा है. उनके दादा किशन लाल दिलेर चार बार सांसद रहे, जबकि पिता राजवीर सिंह दिलेर विधायक और सांसद दोनों रहे. सुरेंद्र दिलेर लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और वाल्मीकि समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. बीजेपी दलित वोट बैंक में वाल्मीकि समुदाय को मजबूत संदेश देना चाहती है. कैलाश राजपूत: लोधी वोट बैंक साधने की कोशिश कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल हैं. वे लोधी समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली समुदाय माना जाता है. कैलाश राजपूत अलग-अलग दौर में हर बार सत्ता पक्ष के साथ रहे हैं. साल 1996 में बीजेपी, 2007 में बसपा और फिर 2017 में बीजेपी से विधायक बने. इसके बाद फिर से विधायक बने. कन्नौज और आसपास के इलाकों में लोधी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. चर्चा में रहा मनोज पांडे का नाम प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार में जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं, वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और तीन को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. सपा से अलग होकर भाजपा को समर्थन देने वाले विधायक मनोज पांडे का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा है. लोकसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भी मनोज पांडे और उनके परिवार से भेंट की थी. तभी से माना जा रहा था था कि उन्हें बीजेपी या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी. मनोज पांडे कल शाम लखनऊ आवास पहुंचे और सूत्रों के मुताबिक, सीएम योगी से मुलाकात की है. हालांकि, मुलाकात के बाद रात लगभग 10 बजे वह … Read more

सुशासन की रफ़्तार 12 किमी का मुश्किल सफर अब अनिल के लिए हुआ आसान

बिलासपुर हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो कोई भी बाधा सपनों को नहीं रोक सकती। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम नागपुरा के रहने वाले अनिल कुमार की कहानी आज इसी बदलाव की गवाही दे रही है। सुशासन तिहार के माध्यम से मिली एक मोटरराइज़्ड ट्राइसिकल ने न केवल अनिल के रास्ते की दूरी कम की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी है। चुनौतियों से भरा था शिक्षा का पथ      अनिल कुमार 12वीं कक्षा के छात्र हैं और 70 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उनके मन में पढ़ने की तीव्र इच्छा है। लेकिन उनके घर से स्कूल की दूरी 12 किलोमीटर है। रोज़ लंबी दूरी तय करना, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और स्कूल पहुँचने के लिए दूसरों पर निर्भरता अनिल की पढ़ाई में बड़ी बाधा थी। अनिल के परिवार वाले भी उनकी सुरक्षा और पहुँच को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। समाधान शिविर में मिली त्वरित राहत    बानाबेल में आयोजित श्सुशासन तिहारश् समाधान शिविर अनिल के जीवन में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अनिल ने अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। शासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही आवेदन का निराकरण किया और अनिल को मोटरराइज़्ड ट्राइसिकल प्रदान की। आत्मनिर्भरता की नई मुस्कान      ट्राइसिकल की चाबी मिलते ही अनिल के चेहरे पर जो चमक दिखी, वह आत्मनिर्भर होने के गर्व की थी। अब अनिल बिना किसी मानवीय सहारे के स्वयं वाहन चलाकर समय पर स्कूल पहुँच सकेंगे। पहले स्कूल पहुँचना ही सबसे बड़ी चुनौती थी, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी। अब मेरी मुश्किलें आसान हो गई हैं। अनिल कुमार ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मेरे सपनों को नई रफ़्तार दी है।

फोटो में दिख रहा शख्स भाई, पिता या दोस्त भी हो सकता है: अदालत

ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में मानवीय ²ष्टिकोण अपनाते हुए बच्चों को मां के साथ रखने का आदेश दिया है । कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मासूम बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मां का सानिध्य और ममता अनिवार्य है। पति द्वारा पेश किए गए स्क्रीनशॉट पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर वह अपने दोस्त का हाथ भी पकड़े हुए है, तो भी इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि वह व्यभिचारी जीवन जी रही है। केवल एक फोटो के आधार पर यह मान लेना गलत है कि महिला का आचरण खराब है, क्योंकि फोटो में दिख रहा व्यक्ति उसका भाई, पिता या कोई मित्र भी हो सकता है। पति को कोर्ट ने फटकार भी लगाई। कोर्ट ने 15 हजार रुपए भरण पोषण दिए जाने का आदेश भी दिया है। ग्वालियर निवासी प्रीति (परिवर्तित नाम) ने अपने साढ़े तीन साल और डेढ़ साल के दो मासूम बच्चों की कस्टडी के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि पति, सास और ननद ने उसे प्रताडि़त कर घर से निकाल दिया और बच्चों को अपने कब्जे में रख लिया है। सुनवाई के दौरान पति की ओर से पत्नी पर चरित्रहीनता के आरोप लगाते हुए एक स्क्रीनशॉट पेश किया गया था। हालांकि, अदालत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केवल किसी के साथ हाथ पकड़े हुए फोटो होने से यह साबित नहीं होता कि महिला का आचरण गलत है। कोर्ट ने यह भी पाया कि काउंसङ्क्षलग के दौरान पति ने खुद स्वीकार किया था कि वह पत्नी के साथ मारपीट और गाली-गलौज करता है। कोर्ट ने कहा कि मां बच्चों की प्राकृतिक संरक्षक     कोर्ट ने कहा कि इतने छोटे बच्चों के लिए मां ही उनकी प्राकृतिक संरक्षक है और उन्हें मां की कंपनी की आवश्यकता है।     सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोहराया कि कस्टडी के मामलों में कानूनी अधिकारों से ऊपर बच्चों का हित, उनका स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।     अदालत ने पति को निर्देश दिया है कि वह बच्चों के नाम पर खोले गए बैंक खाते में हर महीने 15,000 रुपए जमा करे, जिसका उपयोग उनकी परवरिश के लिए किया जाएगा।     हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए बच्चों को मां के सुपुर्द रखने का आदेश जारी रखा है। हालांकि, कोर्ट ने पति को यह स्वतंत्रता दी है कि वह भविष्य में ’गार्जियन एंड वाड्र्स एक्ट’ के तहत कस्टडी के लिए कानूनी प्रक्रिया अपना सकता है।

10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धाओं में देशभर के निशानेबाजों ने दिखाया दम

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित “24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैंपियनशिप (राइफल इवेंट्स)” के अंतर्गत आज 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर, जूनियर एवं यूथ वर्ग की स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में देशभर से आए खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर वर्ग में राजस्थान की जोड़ी ने जीता स्वर्ण 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर स्पर्धा में राजस्थान के दिव्यांश एस पंवार एवं मनीषा की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 503.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। रेलवे की अर्जुन बाबूता एवं सोनम उत्तम की टीम ने 502.5 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं इस्मिता की जोड़ी ने 438.3 अंक अर्जित कर कांस्य पदक प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में हरियाणा का दबदबा 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम जूनियर स्पर्धा में हरियाणा की अमीरा एवं रोहित कन्यन की जोड़ी ने 501.9 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं स्वास्तिका ने 501.0 अंक के साथ रजत पदक प्राप्त किया। महाराष्ट्र की अवनी राठौड़ एवं प्रीतम केंद्रे की टीम ने 432.8 अंक अर्जित कर कांस्य पदक हासिल किया। यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की जोड़ी रही अव्वल 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की शाम्भवी एवं वेदांत वाघमारे की जोड़ी ने 496.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उत्तरप्रदेश के अंश डबास एवं कोपल ने 496.1 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के स्वास्तिका एवं अभिनव शॉ ने 434.7 अंक अर्जित कर कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों, रेलवे, सेना एवं अन्य संस्थानों के खिलाड़ियों ने सहभागिता करते हुए उच्च स्तरीय प्रदर्शन किया। यह आयोजन युवाओं में शूटिंग खेल के प्रति रुचि, अनुशासन एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 15 मई तक आयोजित होंगी विभिन्न स्पर्धाएँ उल्लेखनीय है कि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता 03 मई 2026 से 15 मई 2026 तक म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न राइफल स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा। खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएँ सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना एवं अकादमियों के माध्यम से देश को भविष्य के श्रेष्ठ खिलाड़ी मिलते रहेंगे। 

छत्तीसगढ़ के पहले अत्याधुनिक बकरी ब्रीडिंग एवं रिसर्च सेंटर की तैयारी

रायपुर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से धमतरी जिले का भटगांव एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है। कलेक्टर की विशेष पहल पर यहाँ राज्य का पहला “रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर” स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र न केवल पशुपालन के पारंपरिक स्वरूप को बदलेगा, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता का एक ग्लोबल मॉडल पेश करेगा। वैज्ञानिक पशुपालन- परंपरा और तकनीक का संगम          यह केंद्र पारंपरिक बकरी पालन की सीमाओं को तोड़कर इसे आधुनिक और लाभप्रद व्यवसाय में बदलेगा। केंद्र में कृत्रिम गर्भाधान, पैथोलॉजी जांच और त्वरित रोग निदान के लिए हाई-टेक प्रयोगशाला होगी। रिसर्च यूनिट के माध्यम से बकरी की उन्नत नस्लों का संरक्षण और प्रजनन किया जाएगा, जिससे पशुपालकों को बेहतर गुणवत्ता के पशु मिल सकें। पशुओं के लिए टिकाऊ आहार और विभिन्न प्रकार के हरे चारे के उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कौशल विकास- पशु सखियों और युवाओं को मिलेगा नया मंच           कलेक्टर धमतरी के विजन के अनुसार, यह केंद्र केवल एक ब्रीडिंग सेंटर नहीं बल्कि एक लर्निंग सेंटर भी होगा। युवाओं और किसानों के लिए हॉस्टल की सुविधा के साथ ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। प्रथम चरण में ही 10-12 स्थानीय युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जाएगा। पशु सखियों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भविष्य का रोडमैप- माणिकस्तु के साथ ग्लोबल विजन          परियोजना की सफलता के लिए ओडिशा की प्रतिष्ठित फर्म माणिकस्तु (डंदपोजन) के विशेषज्ञों का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में उन्नत नस्लों की खरीद-बिक्री के लिए एक पारदर्शी मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। भविष्य में यहाँ राज्य की सबसे आधुनिक समर्पित पशुधन मंडी और पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की योजना है।

मध्यप्रदेश को बड़ी रेल सौगात, नई लाइन से गुजरात की दूरी होगी कम

झाबुआ मध्य प्रदेश में जून महीने तक नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। सांसद अनिता चौहान की अध्यक्षता में हुई झाबुआ जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक में जिले के विकास को नई रफ्तार देने पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य आकर्षण इंदौर-दाहोद रेल परियोजना रही। इसके तहत रेलवे अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि गुजरात के कतवारा से झाबुआ के मध्य रेल लाइन (Katwara-Jhabua railway line) निर्माण का कार्य जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इंदौर-दाहोद परियोजना का हिस्सा है ये रेल लाइन बता दें कि, गुजरात के कतवारा से मध्य प्रदेश के झाबुआ तक बन रही रेल लाइन महत्वाकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ( Indore-Dahod railway line project) का हिस्सा। इस परियोजना के तहत 204.76 किलोमीटर तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत 1873 करोड़ रुपए है जिसके अंतर्गत प्रदेश के धार और झाबुआ जैसे अन्य आदिवासी जिलों में पहली बार रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इससे गुजरात तक की दूरी कम होगी। बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम घरसट की मौजूदगी में हुई बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। ताकि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबोर, भाजपा जिलाध्यक्ष भानू भूरिया, थांदला विधायक वीरसिंह भूरिया, एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन मुद्दों पर विशेष रूप से फोकस किया जल संरक्षणः जिले में गहराते जल संकट के स्थायी समाधान पर चर्चा करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की समीक्षा की गई। जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान ने बताया स्वीकृत 1233 खेत तालाबौ में से 260 पूर्ण हो चुके हैं, शेष 30 मई तक पूरे होंगे। डगवेल रिचार्ज के 4071 कार्यों में से 2244 पूर्ण हो चुके है, शेष 15 मई तक पूरे करने का लक्ष्य है। जिले के 147 पुराने अमृत सरोवरी मैं से 112 लबालब है। अमृत 2.0 के तहत 14 नए तालाबों का निर्माण जारी वाले 1,748 हैंडपंपों के पास अनिवार्य रूप से रिचार्ज पिट बनाए जाएं ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। कृषि एवं तकनीक: कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान उप संचालक एनएस रावत ने आगामी खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया। किसानों को ई-विकास प्रणाली से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबीर ने किसानों की सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करने का सुझाव दिया। सांसद ने जल संकट को देखते हुए कम पानी वाली और सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बुनियादी ढांचा और बिजली व्यवस्थाः प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मजरा-टोला योजना में 181 सड़कों की डीपीआर तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत क्षतिग्रस्त ग्वाली ब्रिज का मुद्दा विधायक वीरसिह भूरिया ने उठाया, जिस पर अधिकारियों ने बताया कि पुराने ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर नई निविदा प्रक्रिया शुरू सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जिले में 435 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। सांसद ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। शिक्षा और स्वास्थ्यः टीबी मुक्त झाबुआ का संकल्प : सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से निक्षय मित्र बनने और टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया जिले के विद्यार्थियों को 5,933 साइकिलें वितरित की जा चुकी हैं और 'अपार आईडी' निर्माण का कार्य प्रगति पर है। महिला विकासः प्रधानमंत्री मातृ वंदना और लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से 350 से अधिक नए हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पारदर्शी भुगतान और उपार्जनः जिला आपूर्ति अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक 19,368 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जिसका 31.52 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे किसानों के खातों में पीएम-किसान हितग्राहियों की ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

मिशन 2027 के लिए यूपी में कैबिनेट फेरबदल, योगी की नई टीम की झलक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में अगले कुछ घंटे बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार अब किसी भी वक्त हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद संभावित मंत्रियों को आज शाम तक लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दे दिए गए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख और समय पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी।  2027 का ‘प्लान’ और विकास के साथ हिंदुत्व बीजेपी हमेशा 24X7 चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी मानी जाती है. अब पार्टी की निगाहें 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं. बीजेपी यूपी में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने की तैयारी में है. इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए पार्टी न केवल सरकार का चेहरा बदलेगी, बल्कि बोर्ड, निगम और आयोगों में भी कार्यकर्ताओं को जगह देकर संगठन को मजबूती देगी. रणनीति साफ है, पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ‘विकास और हिंदुत्व’ के साथ-साथ मजबूत जातिगत समीकरणों को साधना।  महिला कोटे पर विशेष फोकस, अखिलेश के PDA को जवाब इस बार के विस्तार में सबसे खास बात ‘नारी शक्ति’ पर फोकस है. बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर सपा को घेरने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी नारी शक्ति के अपमान पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते रहे हैं. ऐसे में योगी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।      कृष्णा पासवान: फतेहपुर से तीन बार की विधायक कृष्णा पासवान का नाम सबसे आगे है. उनके जरिए बीजेपी न केवल महिला कार्ड खेलेगी, बल्कि दलित (पासी) समाज को भी साधेगी. यह अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट माना जा रहा है।      पूजा पाल: सपा की बागी विधायक पूजा पाल को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है. सपा के बागी और पुराने दिग्गजों की एंट्री मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को जगह मिलने की पूरी संभावना है. इसमें जातिगत संतुलन का खास ख्याल रखा गया है:     मनोज पांडेय: सपा से आए ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बीजेपी अवध क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करना चाहती है.     चौधरी भूपेंद्र सिंह: पश्चिम यूपी के बड़े जाट नेता भूपेंद्र सिंह का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है.     अशोक कटारिया: गुर्जर समाज में पैठ रखने वाले पूर्व मंत्री और एमएलसी अशोक कटारिया को एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.     रोमी साहनी: खीरी क्षेत्र में सिखों और पंजाबी खत्री बिरादरी की नाराजगी दूर करने के लिए रोमी साहनी को मौका मिल सकता है. प्रमोशन और विभागों में फेरबदल की तैयारी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ नए चेहरे ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि पुराने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर भी काम होगा. कुछ राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को उनकी बेहतर परफॉर्मेंस, खासकर बंगाल चुनाव के दौरान किए गए कार्यों के लिए कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है. साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में बड़े बदलाव की भी चर्चा है।  बुजुर्ग मंत्रियों को नहीं हटाएगी पार्टी? सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कुछ उम्रदराज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, लेकिन पार्टी के एक धड़े का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसा करने से गलत संदेश जा सकता है. चूंकि यह विस्तार कुछ ही समय के लिए है और जल्द ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, इसलिए बीजेपी क्षेत्रीय क्षत्रपों और बुजुर्ग नेताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती।